NCERT Solutions Class 10 Social Science Economics Chapter 04 Globalisation and the Indian Economy (वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था) in Hindi

NCERT Solutions for Class 10 Social Science: Chapter 04 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

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Practice Class 10 Social Science Solutions: Chapter 04 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

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Question 1: वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

Answer:

वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ जोड़ा जाता है, जिससे वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, तकनीक और श्रम का निर्बाध प्रवाह विभिन्न देशों के बीच होता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से दुनिया भर के बाजार आपस में एकीकृत हो जाते हैं और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) वैश्विक स्तर पर अपने उत्पादन और व्यापार का विस्तार करती हैं। इसके परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं के पास विभिन्न देशों की वस्तुएँ खरीदने के अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं और देशों के बीच आपसी निर्भरता बढ़ती है।

मुख्य बिंदु:

• वैश्वीकरण विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी का आदान-प्रदान है।
• यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विस्तार और निवेश के कारण तेजी से बढ़ता है।
• इसके अंतर्गत घरेलू बाजार अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ एकीकृत हो जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• वैश्वीकरण को केवल आयात-निर्यात तक सीमित समझना।
• बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका को नजरअंदाज करना।
• इसके सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों प्रभावों को अलग-अलग न समझ पाना।

Exam Tips:

a) परिभाषा में एकीकरण और मुक्त प्रवाह जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
b) इसे सरल और स्पष्ट भाषा में उदाहरण सहित समझाएँ।
c) वैश्वीकरण के मुख्य चालकों (जैसे प्रौद्योगिकी) का उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 2: भारत सरकार द्वारा विदेशी व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?

Answer:

स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने घरेलू उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश पर भारी अवरोधक (जैसे आयात शुल्क और कोटा) लगाए थे, क्योंकि उस समय भारतीय उद्योग नए थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों का मुकाबला करने में सक्षम नहीं थे। 1990 के दशक की शुरुआत में देश की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने और उद्योगों की उत्पादकता तथा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सरकार ने इन अवरोधकों को हटाने का निर्णय लिया। सरकार का मानना था कि विदेशी प्रतिस्पर्धा से भारतीय उत्पादकों को अपनी गुणवत्ता सुधारने का अवसर मिलेगा और देश में विदेशी निवेश बढ़ने से आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

मुख्य बिंदु:

• प्रारंभिक वर्षों में घरेलू उद्योगों के संरक्षण के लिए व्यापार अवरोधक आवश्यक माने गए थे।
• 1991 की नई आर्थिक नीति के तहत उदारीकरण अपनाकर इन अवरोधकों को हटाया गया।
• इसका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना था।

आम गलतियाँ:

• यह भूल जाना कि अवरोधक क्यों लगाए गए थे और क्यों हटाए गए।
• उदारीकरण की समय-सीमा और उसके कारणों को स्पष्ट न करना।
• केवल करों की बात करना और गुणात्मक सुधार को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) उत्तर को दो भागों में लिखें - पहले अवरोधक लगाने के कारण और फिर हटाने के कारण।
b) 1991 के आर्थिक सुधारों का संदर्भ अवश्य दें।
c) घरेलू सुरक्षा बनाम वैश्विक प्रतिस्पर्धा के तर्क को स्पष्ट करें।

 

Question 3: श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को कैसे मदद करेगा?

Answer:

श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को बाजार की मांग के अनुसार कामगारों की संख्या घटाने या बढ़ाने की अनुमति देता है, जिससे उन्हें कठिन समय में लागत नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। पारंपरिक श्रम कानूनों के तहत कंपनियों को छंटनी और स्थायी कामगार रखने में कई कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ता था, जिससे उनकी कार्यकुशलता प्रभावित होती थी। लचीले कानूनों के कारण कंपनियाँ अनुबंध पर या थोड़े समय के लिए श्रमिक रख सकती हैं, जिससे विदेशी निवेशक आकर्षित होते हैं और उत्पादन लागत कम होती है।

मुख्य बिंदु:

• यह कंपनियों को मांग के अनुसार श्रम शक्ति को समायोजित करने की स्वतंत्रता देता है।
• इससे उत्पादन लागत कम होती है और व्यापार करना आसान हो जाता है।
• यह विदेशी निवेश को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आम गलतियाँ:

• श्रम लचीलेपन को केवल श्रमिकों के शोषण के रूप में देखना और आर्थिक लाभ भूल जाना।
• कंपनियों पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को स्पष्ट न करना।
• अनुबंध आधारित रोजगार और स्थायी रोजगार के अंतर को न समझना।

Exam Tips:

a) लचीलेपन का अर्थ स्पष्ट करते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
b) कंपनियों की लागत और विदेशी निवेश से इसका सीधा संबंध समझाएँ।
c) संतुलित दृष्टिकोण अपनाएँ, जिसमें कंपनियों के लाभ के साथ श्रमिकों की सुरक्षा का भी हल्का उल्लेख हो।

 

Question 4: दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किस प्रकार उत्पादन पर या उत्पादन पर नियंत्रण स्थापित करती हैं?

Answer:

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) विभिन्न तरीकों से दूसरे देशों में उत्पादन पर नियंत्रण स्थापित करती हैं। वे स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Venture) बनाती हैं, छोटी स्थानीय कंपनियों को खरीद लेती हैं, या उन्हें अनुबंधित करके अपने ब्रांड नाम के तहत माल तैयार करवाती हैं। इसके अलावा, वे उत्पादन की लागत को कम करने के लिए दुनिया भर के उन स्थानों पर कारखाने लगाती हैं जहाँ सस्ता श्रम और कच्चे माल आसानी से उपलब्ध होते हैं। इस प्रकार वे वैश्विक स्तर पर उत्पादन के साधनों पर अपना नियंत्रण बनाए रखती हैं।

मुख्य बिंदु:

• स्थानीय कंपनियों को खरीदना या उनके साथ साझेदारी करना मुख्य तरीका है।
• ठेके पर स्थानीय उत्पादकों से माल तैयार करवाना और अपना ब्रांड नाम देना।
• कम लागत वाले क्षेत्रों में अपने कारखाने स्थापित करना।

आम गलतियाँ:

• केवल एक ही तरीके (जैसे केवल कारखाना लगाना) का उल्लेख करना।
• स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी की प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।
• बहुराष्ट्रीय कंपनियों की वैश्विक रणनीति को न समझा पाना।

Exam Tips:

a) बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादन के तरीकों को बिंदुओं में लिखें।
b) उप-शीर्षकों या बुलेट पॉइंट्स का उपयोग करने से उत्तर अधिक स्पष्ट होता है।
c) 'संयुक्त उद्यम' और 'अनुबंध' जैसे तकनीकी शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 5: विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण क्यों चाहते हैं? क्या आप मानते हैं कि विकासशील देशों को भी बदले में ऐसी मांग करनी चाहिए?

Answer:

विकसित देश विकासशील देशों से व्यापार और निवेश का उदारीकरण इसलिए चाहते हैं ताकि उनकी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बिना किसी बाधा के विकासशील देशों के बाजारों में प्रवेश कर सकें और अपने उत्पादों को बेच सकें। हाँ, विकासशील देशों को भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निष्पक्ष व्यापार की मांग करनी चाहिए क्योंकि विकसित देशों ने अपने घरेलू उत्पादकों को सब्सिडी और भारी शुल्कों से सुरक्षित रखा है। विकासशील देशों को यह मांग करनी चाहिए कि विकसित देश भी अपने बाजारों को उनके लिए खोलें ताकि उनके उत्पादकों को भी वैश्विक स्तर पर समान अवसर मिल सकें।

मुख्य बिंदु:

• विकसित देशों का मुख्य उद्देश्य अपने उत्पादों के लिए नए वैश्विक बाजारों तक पहुँच बनाना है।
• विकासशील देशों को अपने कृषि और घरेलू उद्योगों के संरक्षण के लिए अनुचित शर्तों का विरोध करना चाहिए।
• विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे मंचों पर निष्पक्ष व्यापार नियमों की मांग करना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• केवल विकसित देशों के दृष्टिकोण का समर्थन करना और विकासशील देशों की समस्याओं को छोड़ देना।
• व्यापार समझौतों में सब्सिडी के प्रभाव को न समझाना।
• प्रश्न के दूसरे भाग (क्या मांग करनी चाहिए) का उत्तर अधूरा छोड़ देना।

Exam Tips:

a) प्रश्न के दोनों भागों का स्पष्ट और अलग-अलग उत्तर दें।
b) निष्पक्ष व्यापार और डब्ल्यूटीओ (WTO) के नियमों का संदर्भ दें।
c) संतुलित और तार्किक दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।

 

Question 6: 'वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।' इस कथन की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।

Answer:

वैश्वीकरण का प्रभाव समाज के विभिन्न वर्गों पर अलग-अलग रहा है, इसलिए यह समान नहीं है। शहरी क्षेत्रों के धनी उपभोक्ता और उच्च कुशल पेशेवर वर्ग (जैसे आईटी और तकनीकी विशेषज्ञ) को वैश्वीकरण से उच्च आय, बेहतर जीवन स्तर और अधिक विकल्प मिले हैं। इसके विपरीत, छोटे उत्पादक, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक और कृषि से जुड़े लोग कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण प्रभावित हुए हैं, क्योंकि कई छोटे कारखाने बंद हो गए हैं और रोजगार की सुरक्षा कम हुई है। इस प्रकार वैश्वीकरण ने कुछ लोगों के लिए अपार अवसर पैदा किए हैं जबकि कई अन्य लोगों के लिए आजीविका का संकट खड़ा किया है।

मुख्य बिंदु:

• उच्च कुशल श्रमिकों और धनी वर्ग को वैश्वीकरण से सबसे अधिक लाभ हुआ है।
• छोटे उत्पादक और अकुशल श्रमिक वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण घाटे में रहे हैं।
• उपभोक्ता स्तर पर विकल्प बढ़े हैं, लेकिन रोजगार के मोर्चे पर असमानता बढ़ी है।

आम गलतियाँ:

• वैश्वीकरण को पूरी तरह अच्छा या पूरी तरह बुरा मान लेना।
• समाज के विभिन्न वर्गों (अमीर बनाम गरीब, कुशल बनाम अकुशल) के अंतर को स्पष्ट न करना।
• केवल आर्थिक विकास के आंकड़ों की बात करना और मानवीय प्रभाव को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) 'समान नहीं है' इस मुख्य बिंदु पर विशेष जोर दें और उदाहरण दें।
b) समाज के दोनों पक्षों (लाभार्थी और प्रभावित वर्ग) का वर्णन करें।
c) उत्तर को निष्कर्ष के साथ समाप्त करें जो संतुलित हो।

 

Question 7: व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वीकरण प्रक्रिया में कैसे सहायता पहुँचाती है?

Answer:

व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण विदेशी व्यापार पर लगे प्रतिबंधों और शुल्कों को हटाकर या कम करके वैश्वीकरण की प्रक्रिया को तीव्र करता है। जब सरकारें आयात-निर्यात को आसान बनाती हैं और विदेशी कंपनियों को देश में निवेश करने की स्वतंत्रता देती हैं, तो देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी का प्रवाह बिना किसी बाधा के होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विभिन्न देशों में अपने उत्पादन केंद्र स्थापित कर सकती हैं और वैश्विक बाजार का एकीकरण संभव हो पाता है।

मुख्य बिंदु:

• उदारीकरण से व्यापारिक बाधाएँ और आयात शुल्क समाप्त या कम हो जाते हैं।
• इससे विदेशी निवेश (FDI) का मार्ग प्रशस्त होता है।
• यह विभिन्न देशों के बाजारों को आपस में जोड़ने में मुख्य उत्प्रेरक का कार्य करता है।

आम गलतियाँ:

• उदारीकरण और वैश्वीकरण को एक ही समझ लेना, जबकि उदारीकरण वैश्वीकरण का एक साधन है।
• निवेश नीतियों के प्रभाव को स्पष्ट रूप से न दर्शाना।
• केवल आयात की बात करना और पूंजी प्रवाह को भूल जाना।

Exam Tips:

a) दोनों के बीच कार्य-कारण संबंध (Cause and Effect) को स्पष्ट करें।
b) उदारीकरण को वैश्वीकरण के द्वार खोलने वाली चाबी के रूप में समझाएँ।
c) सटीक शब्दावली जैसे 'बाधाओं को हटाना' और 'पूंजी प्रवाह' का प्रयोग करें।

 

Question 8: विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में किस प्रकार मदद करता है? यहाँ दिए गए उदाहरण से भिन्न उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

Answer:

विदेश व्यापार विभिन्न देशों के खरीदारों और विक्रेताओं को घरेलू सीमाओं से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर व्यापार करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे बाजारों का एकीकरण होता है। उदाहरण के लिए, भारतीय बाजारों में केवल भारतीय खिलौने ही नहीं बल्कि चीन के इलेक्ट्रॉनिक खिलौने भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिससे उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार बेहतर और सस्ते विकल्प चुन सकते हैं। इसके माध्यम से चीन के निर्माता भारत के बाजारों में पहुँच बनाते हैं और दोनों देशों के बाजार एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• विदेश व्यापार घरेलू बाजारों की सीमाएँ तोड़कर उन्हें वैश्विक बाजार में बदल देता है।
• इससे उपभोक्ताओं को विभिन्न देशों की वस्तुएँ खरीदने के विकल्प मिलते हैं।
• उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती है जिससे गुणवत्ता में सुधार होता है।

आम गलतियाँ:

• पाठ में दिए गए ऑटोमोबाइल उदाहरण को ही दोबारा लिख देना जबकि नया उदाहरण माँगा गया हो।

• बाजारों के एकीकरण की प्रक्रिया को सरल शब्दों में न समझा पाना।
• उपभोक्ता और उत्पादक दोनों के दृष्टिकोण को शामिल न करना।

Exam Tips:

a) वस्त्र, खिलौने, या मोबाइल फोन जैसे दैनिक जीवन के अन्य उदाहरणों का प्रयोग करें।
b) 'एक देश से दूसरे देश में वस्तुओं की आवाजाही' को एकीकरण का आधार बताएं।
c) उदाहरण को प्रश्न के मुख्य सिद्धांत से अच्छी तरह जोड़ें।

 

Question 9: वैश्वीकरण भविष्य में जारी रहेगा। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज से बीस वर्ष बाद विश्व कैसा होगा? अपने उत्तर का कारण दीजिए।

Answer:

आज से बीस वर्ष बाद वैश्वीकरण के कारण विश्व और अधिक आपस में जुड़ा हुआ, तकनीकी रूप से उन्नत और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर आधारित होगा। सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उन्नत परिवहन प्रणालियों के विकास के कारण सीमाओं के पार व्यापार और सेवाओं का आदान-प्रदान और अधिक तीव्र हो जाएगा। हालांकि, इसके साथ ही डिजिटल विभाजन, पर्यावरण संबंधी चुनौतियाँ और आर्थिक असमानता जैसी समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं, जिनका समाधान करने के लिए देशों को वैश्विक स्तर पर मिलकर प्रयास करने होंगे।

मुख्य बिंदु:

• भविष्य का विश्व तकनीक और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से और अधिक एकीकृत होगा।
• ई-कॉमर्स और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का दायरा और अधिक विस्तृत हो जाएगा。
• आर्थिक असमानता और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियाँ भी वैश्वीकरण के साथ बनी रहेंगी।

आम गलतियाँ:

• केवल सकारात्मक या केवल नकारात्मक भविष्य का अनुमान लगाना।
• भविष्य की तकनीकों और वैश्वीकरण की निरंतरता के कारणों को स्पष्ट न करना।
• तार्किक तर्कों के बजाय केवल कल्पना के आधार पर उत्तर लिखना।

Exam Tips:

a) भविष्य के परिदृश्य को प्रौद्योगिकी और व्यापार के दृष्टिकोण से समझें।
b) अपने उत्तर में तार्किक कारण और दूरदर्शिता अवश्य दिखाएँ।
c) संतुलित उत्तर दें जिसमें अवसर और चुनौतियाँ दोनों शामिल हों।

 

Question 10: मान लीजिए कि आप दो लोगों को तर्क करते हुए पाते हैं - एक कह रहा है कि वैश्वीकरण ने हमारे देश के विकास को क्षति पहुँचाई है, दूसरा कह रहा है कि वैश्वीकरण ने भारत के विकास में सहायता की है। इन लोगों को आप कैसे जवाब देंगे?

Answer:

मैं दोनों तर्कों को सही मानते हुए एक संतुलित जवाब दूंगा, क्योंकि वैश्वीकरण के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। एक ओर जहाँ वैश्वीकरण के कारण देश में विदेशी निवेश बढ़ा है, रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं, उपभोक्ताओं को बेहतर और सस्ती वस्तुएँ मिली हैं और अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है; वहीं दूसरी ओर छोटे स्थानीय उत्पादक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ गए हैं, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर दबाव बढ़ा है और समाज के कुछ वर्गों के बीच असमानता भी बढ़ी है। इसलिए, हमें वैश्वीकरण का पूरी तरह विरोध करने के बजाय इसके लाभों को अधिकतम करने और हानियों को नियंत्रित करने की नीति अपनानी चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• वैश्वीकरण के कारण निवेश, उत्पादन और आधुनिक तकनीकों में वृद्धि हुई है।
• दूसरी ओर, छोटे उद्योगों के बंद होने और रोजगार की अनिश्चितता जैसी समस्याएँ भी आई हैं।
• एक विकासशील देश के रूप में हमें इसके प्रभावों का प्रबंधन समझदारी से करना चाहिए।

आम गलतियाँ:

• किसी एक पक्ष (केवल अच्छा या केवल बुरा) का पूरी तरह समर्थन करना।
• दोनों पक्षों के तर्कों का उचित विश्लेषण न कर पाना।
• मध्यस्थता या संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत न करना.

Exam Tips:

a) एक निष्पक्ष निर्णायक की तरह दोनों पक्षों की बात का सम्मान करते हुए उत्तर दें।
b) सकारात्मक और नकारात्मक बिंदुओं को अलग-अलग स्पष्ट करें।
c) अंत में एक रचनात्मक और व्यावहारिक सुझाव दें।

 

Question 11: रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
दो दशक की तुलना में भारतीय खरीदारों के पास वस्तुओं के अधिक विकल्प हैं। यह ....... की प्रक्रिया से नजदीक से जुड़ा हुआ है। अनेक दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं को भारत के बाजारों में बेचा जा रहा है। इसका अर्थ है कि अन्य देशों के साथ ....... बढ़ रहा है। इससे भी आगे भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित ब्रांडों की बढ़ती संख्या हम बाजारों में देखते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही है क्योंकि .......। जबकि बाजार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प, इसलिए बढ़ते ....... और ....... के प्रभाव का अर्थ है उत्पादक के बीच अधिकतम .......।

Answer:

दो दशक की तुलना में भारतीय खरीदारों के पास वस्तुओं के अधिक विकल्प हैं। यह वैश्वीकरण की प्रक्रिया से नजदीक से जुड़ा हुआ है। अनेक दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं को भारत के बाजारों में बेचा जा रहा है। इसका अर्थ है कि अन्य देशों के साथ विदेशी व्यापार बढ़ रहा है। इससे भी आगे भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित ब्रांडों की बढ़ती संख्या हम बाजारों में देखते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही है क्योंकि यहाँ उन्हें उचित परिस्थितियाँ मिल रही हैं, जैसे - बड़ा बाजार, सस्ते श्रमिक आदि। जबकि बाजार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प, इसलिए बढ़ते निर्यात और उदारीकरण के प्रभाव का अर्थ है उत्पादकों के बीच अधिकतम प्रतिस्पर्धा।

मुख्य बिंदु:

• रिक्त स्थानों में वैश्वीकरण, विदेशी व्यापार, निवेश, और प्रतिस्पर्धा जैसे मुख्य शब्द आएंगे।
• यह पूरा गद्यांश वैश्वीकरण और उसके प्रभावों के मूल सार को स्पष्ट करता है।
• यह छात्रों को अध्याय के प्रमुख विषयों को संक्षेप में याद रखने में मदद करता है।

आम गलतियाँ:

• गद्यांश के संदर्भ को समझे बिना गलत शब्द भर देना।
• वर्तनी की अशुद्धियाँ करना।
• वाक्यों के आपसी संबंध को न समझ पाना।

Exam Tips:

a) रिक्त स्थान भरने से पहले पूरे वाक्य को ध्यान से पढ़ें।
b) पाठ के महत्वपूर्ण शब्दावली का सही चयन करें।
c) उत्तर पुस्तिका में पूरा वाक्य लिखकर रिक्त स्थान को रेखांकित करें।

 

Question 12: निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए -
(क) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों से सस्ते दरों पर खरीदती हैं। (अ) मोटर गाड़ियाँ
(ख) आयात पर कर और कोटा का उपयोग, व्यापार नियमन। (ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के समान आदि लिया जाता है।
(ग) विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियाँ। (स) कॉल सेंटर
(घ) आई०टी० ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की है। (द) टाटा मोटर्स, इन्फोसिस रेनबैक्सी
(ङ) अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने उत्पादन करने के लिए निवेश किया है। (य) व्यापार अवरोधक

Answer:

(क) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों से सस्ते दरों पर खरीदती हैं। - (ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के समान आदि लिया जाता है।
(ख) आयात पर कर और कोटा का उपयोग, व्यापार नियमन। - (य) व्यापार अवरोधक
(ग) विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियाँ। - (द) टाटा मोटर्स, इन्फोसिस रेनबैक्सी
(घ) आई०टी० ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की है। - (स) कॉल सेंटर
(ङ) अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने उत्पादन करने के लिए निवेश किया है। - (अ) मोटर गाड़ियाँ

मुख्य बिंदु:

• यह मिलान वैश्वीकरण के विभिन्न पहलुओं और उनके वास्तविक उदाहरणों को जोड़ता है।
• व्यापार अवरोधक, MNCs और आईटी सेक्टर के कार्यों को स्पष्ट करता है।
• भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उदाहरण भी इसमें शामिल हैं।

आम गलतियाँ:

• जल्दबाजी में गलत विकल्पों को आपस में मिला देना।
• बहुराष्ट्रीय कंपनियों और भारतीय कंपनियों के उदाहरणों में भ्रमित होना।
• व्यापार अवरोधक की सही परिभाषा और उसके प्रकार को न पहचान पाना।

Exam Tips:

a) मिलान करते समय दोनों स्तंभों को पूरी तरह पढ़ें।
b) सही मिलान को सीधे आमने-सामने लिखकर प्रदर्शित करें।
c) ऐसे प्रश्न परीक्षा में अंक प्राप्त करने के लिए सबसे आसान होते हैं।

 

Question 13: सही विकल्प का चयन कीजिए -
(अ) वैश्वीकरण के विगत दो दशकों में द्रुत आवागमन देखा गया है
(क) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और लोगों का
(ख) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का
(ग) देशों के बीच वस्तुओं, निवेशों और लोगों का
(ब) विश्व के देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निवेश का सबसे अधिक सामान्य मार्ग है
(क) नये कारਖानॱ की स्थापना
(ख) स्थानीय कंपनियों को खरीद लेना
(ग) स्थानीय कंपनियों से साझेदारी करना
(इ) वैश्वीकरण ने जीवन-स्तर के सुधार में सहायता पहुँचाई है।
(क) सभी लोगों के
(ख) विकसित देशों के लोगों के
(ग) विकासशील देशों के श्रमिकों के
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Answer:

(अ) वैश्वीकरण के विगत दो दशकों में द्रुत आवागमन देखा गया है - (ख) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का
(ब) विश्व के देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निवेश का सबसे अधिक सामान्य मार्ग है - (ख) स्थानीय कंपनियों को खरीद लेना
(इ) वैश्वीकरण ने जीवन-स्तर के सुधार में सहायता पहुँचाई है। - (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं (क्योंकि वैश्वीकरण का प्रभाव सभी लोगों पर समान रूप से सकारात्मक नहीं रहा है, बल्कि यह कुछ वर्गों तक ही सीमित रहा है)

मुख्य बिंदु:

• वैश्वीकरण में वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का प्रवाह सबसे तेज होता है।
• MNCs निवेश के लिए आमतौर पर स्थानीय कंपनियों का अधिग्रहण करती हैं।
• वैश्वीकरण का लाभ सभी लोगों को समान रूप से नहीं मिला है।

आम गलतियाँ:

• बहुविकल्पीय प्रश्नों में बिना सोचे-समझे तुक्का लगाना।
• तीसरे प्रश्न में 'सभी लोगों के' विकल्प को जल्दबाजी में चुन लेना।
• पाठ के मुख्य निष्कर्षों को ध्यान में न रखना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक बहुविकल्पीय प्रश्न के सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) यदि कोई भ्रम हो तो पाठ के मुख्य सिद्धांतों से उसकी जाँच करें।
c) उत्तर लिखते समय प्रश्न क्रमांक और सही विकल्प का पूर्ण विवरण दें।

 

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