NCERT Solutions Class 10 Social Science Civics Chapter 03 Gender Religion and Caste (जाति, धर्म और लैंगिक मसले) in Hindi

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Question 1: जीवन के उन विभिन्न पहलुओं का जिक्र करें जिनमें भारत में स्त्रियों के साथ भेदभाव होता है या वे कमजोर स्थिति में होती हैं।

Answer:

भारत में पितृप्रधान समाज के कारण महिलाओं को जीवन के विभिन्न पहलुओं में भेदभाव और कमजोर स्थिति का सामना करना पड़ता है। सबसे पहले, शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों को आज भी लड़कों की तुलना में कम अवसर मिलते हैं, जिसके कारण महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों की तुलना में काफी कम है। दूसरा, महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अधिकांश घरेलू श्रम को आर्थिक मूल्य नहीं दिया जाता और उन्हें अनुत्पादक माना जाता है, जबकि बाहर काम करने वाली महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अक्सर कम वेतन मिलता है। तीसरा, रूढ़िवादी सोच और लड़के की चाह के कारण देश के कई हिस्सों में कन्या भ्रूण हत्या और लिंग-चयनित गर्भपात जैसी कुप्रथाएँ आज भी प्रचलित हैं, जिससे लिंगानुपात लगातार असंतुलित हो रहा है। इसके अलावा, घरेलू हिंसा और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा की कमी भी महिलाओं के जीवन को सीमित करती है।

मुख्य बिंदु:

• महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों से कम है क्योंकि शिक्षा में भेदभाव किया जाता है।
• महिलाओं के घरेलू श्रम को आर्थिक रूप से मान्यता नहीं मिलती है।
• समाज में पुत्र मोह के कारण कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक भेदभाव बढ़ता है।
• कार्यक्षेत्र में भी महिलाओं को समान काम के लिए कम वेतन मिलता है।

आम गलतियाँ:

• केवल शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों को पूरे देश की स्थिति मान लेना।
• घरेलू श्रम के आर्थिक महत्व और उसकी उपेक्षा को नजरअंदाज करना।
• लैंगिक असमानता को केवल पारिवारिक मामला समझना और सामाजिक ढांचे को न देखना।

Exam Tips:

a) बिंदुओं के रूप में उत्तर लिखें ताकि सभी पहलू स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
b) शिक्षा, वेतन, और कन्या भ्रूण हत्या जैसे मुख्य सामाजिक मुद्दों का उल्लेख अवश्य करें।
c) उत्तर लिखते समय व्यावहारिक और संवेदनशीलतापूर्ण भाषा का प्रयोग करें।

 

Question 2: विभिन्न तरह की सांप्रदायिक राजनीति का ब्योरा दें और सबके साथ एक-एक उदाहरण भी दें।

Answer:

सांप्रदायिक राजनीति वह है जिसमें एक धर्म के अनुयायियों को दूसरे धर्म के खिलाफ खड़ा किया जाता है और धर्म को राजनीति का आधार बनाया जाता है। सांप्रदायिक राजनीति के विभिन्न रूप इस प्रकार हैं: पहला, दैनिक जीवन की सामान्य मान्यताओं में सांप्रदायिक श्रेष्ठता की भावना और पूर्वाग्रह दिखना, जिसका उदाहरण बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक समुदायों के बीच रोज़मर्रा के टकराव और मिलीटेंट धार्मिक समूह हैं। दूसरा, राजनीतिक स्तर पर अपने धर्म के आधार पर राजनीतिक दल बनाना या चुनाव में धार्मिक भावनाओं का खुलकर उपयोग करना, जिसका उदाहरण जम्मू-कश्मीर या देश के अन्य हिस्सों में अलगाववादी राजनीतिक दल या समूह हैं जो धार्मिक पहचान के आधार पर राजनीति करते हैं। तीसरा, मतदाताओं को लुभाने के लिए धर्म के नाम पर अपील करना और धार्मिक प्रतीकों, गुरुओं या नेताओं का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करना, जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ता है। चौथा, इसका सबसे खतरनाक रूप सांप्रदायिक हिंसा, दंगे और नरसंहार के रूप में सामने आता है, जिसका उदाहरण वर्ष 2002 में गुजरात में हुए भीषण सांप्रदायिक दंगे हैं।

मुख्य बिंदु:

• सांप्रदायिक राजनीति रोजमर्रा की मान्यताओं, चुनावी अपील और हिंसा के रूप में प्रकट होती है।
• धार्मिक प्रतीकों और नेताओं का राजनीतिक उपयोग सांप्रदायिकता को बढ़ावा देता है।
• गुजरात दंगे (2002) सांप्रदायिक हिंसा और राजनीति का एक प्रमुख उदाहरण हैं।
• अलगाववादी दल धार्मिक आधार पर राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।

आम गलतियाँ:

• सांप्रदायिकता और धर्म में अंतर न समझ पाना।
• सांप्रदायिक राजनीति के विभिन्न रूपों (दैनिक जीवन, चुनावी अपील, हिंसा) को स्पष्ट न करना।
• उदाहरणों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत करना।

Exam Tips:

a) सांप्रदायिकता के विभिन्न रूपों को अलग-अलग उप-शीर्षकों या बिंदुओं में समझाएं।
b) प्रत्येक रूप के साथ प्रासंगिक उदाहरण (जैसे गुजरात दंगे) जरूर लिखें।
c) परिभाषा स्पष्ट करते हुए बताएं कि कैसे धर्म का राजनीतिक दुरुपयोग किया जाता है।

 

Question 3: बताइए कि भारत में किस तरह अभी भी जातिगत असमानताएँ जारी हैं।

Answer:

आधुनिक भारत में कानूनी रूप से छुआछूत और जातिगत भेदभाव को प्रतिबंधित कर दिया गया है और संविधान ने सबको समानता का अधिकार दिया है, फिर भी सामाजिक स्तर पर जातिगत असमानताएँ विभिन्न रूपों में आज भी जारी हैं। आज भी देश के अधिकांश लोग अपनी ही जाति या जनजाति के भीतर विवाह (अंतर्जातीय विवाह की कमी) करते हैं, जिससे जातिगत दायरे सुरक्षित रहते हैं। संवैधानिक निषेध के बावजूद ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में छुआछूत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और निचली जातियों को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति की दृष्टि से भी जाति व्यवस्था आज भी गहराई से जुड़ी हुई है; उच्च जातियों की पहुँच उच्च शिक्षा और अच्छे पदों तक आसानी से होती है, जबकि पारंपरिक रूप से निचली जातियों के लोग गरीबी और शारीरिक श्रम वाले कार्यों में फंसे हुए हैं।

मुख्य बिंदु:

• आज भी अधिकांश लोग अपनी ही जाति के भीतर विवाह करते हैं।
• कानूनन प्रतिबंध के बावजूद छुआछूत और भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
• आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी जातियाँ आज भी मुख्यधारा से पीछे हैं।
• जाति और आर्थिक स्थिति के बीच गहरा संबंध अभी भी बना हुआ है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि कानून बनने से समाज से जातिगत असमानता पूरी तरह खत्म हो गई है।
• अंतर्जातीय विवाह और सामाजिक मेलजोल की कमी की अनदेखी करना।
• केवल शहरी क्षेत्रों को आधार मानकर ग्रामीण वास्तविकताओं को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) उत्तर में विवाह, छुआछूत और आर्थिक स्थिति जैसे सामाजिक पहलुओं का जिक्र करें।
b) यह स्पष्ट करें कि संवैधानिक प्रावधानों और जमीनी हकीकत में अभी भी अंतर है।
c) विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए संतुलित उत्तर लिखें।

 

Question 4: दो कारण बताइए कि क्यों सिर्फ जाति के आधार पर भारत में चुनावी नतीजे तय नहीं हो सकते।

Answer:

भारत में केवल जाति के आधार पर चुनाव के नतीजे तय नहीं हो सकते क्योंकि चुनावी राजनीति में कई अन्य कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पहला कारण यह है कि देश के किसी भी संसदीय या विधानसभा क्षेत्र में केवल एक ही जाति के मतदाताओं का स्पष्ट बहुमत नहीं होता है; हर निर्वाचन क्षेत्र में विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग मिले-जुले रूप में रहते हैं, इसलिए किसी भी दल को जीतने के लिए एक से अधिक जातियों और समुदायों का समर्थन हासिल करना पड़ता है। दूसरा कारण यह है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी एक विशेष जाति के सभी मतदाताओं के वोट नहीं जीत सकती है, क्योंकि एक ही जाति के भीतर लोग अपनी आर्थिक स्थिति, राजनीतिक विचारधारा, और व्यक्तिगत पसंद के आधार पर अलग-अलग पार्टियों को वोट देते हैं।

मुख्य बिंदु:

• किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में एक अकेली जाति का स्पष्ट बहुमत नहीं होता।
• राजनीतिक दल केवल एक जाति के वोटों के सहारे चुनाव नहीं जीत सकते।
• एक ही जाति के मतदाता अलग-अलग राजनीतिक दलों को मतदान करते हैं।
• विकास, नेतृत्व और पार्टी की नीतियां भी चुनाव नतीजों को प्रभावित करती हैं।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि भारत में चुनाव पूरी तरह जातिगत समीकरणों पर जीते जाते हैं।
• निर्वाचन क्षेत्र की जनसांख्यिकी (Demography) को नजरअंदाज करना।
• जाति के भीतर आंतरिक मतभेदों को न समझना।

Exam Tips:

a) दोनों मुख्य कारणों को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
b) निर्वाचन क्षेत्र में बहु-जातीय बनावट और जाति के भीतर मतभेदों का विशेष उल्लेख करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तथ्यात्मक रखें।

 

Question 5: भारत की विधायिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की स्थिति क्या है?

Answer:

भारत की राष्ट्रीय और प्रादेशिक विधायिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम और निराशाजनक स्थिति में रहा है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या कुल सदस्यों का बमुश्किल 10 से 15 प्रतिशत के आसपास ही पहुँच पाई है, जिससे भारत दुनिया के सबसे निचले देशों में शुमार होता है। हालांकि, इसके विपरीत स्थानीय निकाय स्तर पर (यानी पंचायतों और नगर पालिकाओं में) महिलाओं की स्थिति काफी बेहतर है क्योंकि संविधान द्वारा इन स्थानीय निकायों में एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गई हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हजारों महिला प्रतिनिधि चुनकर आ रही हैं।

मुख्य बिंदु:

• लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10-15 प्रतिशत से भी कम है।
• स्थानीय निकायों (पंचायत और नगरपालिका) में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
• राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण विधेयक की मांग लंबे समय से की जाती रही है।
• स्थानीय निकायों में आरक्षण के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आ रही हैं।

आम गलतियाँ:

• राष्ट्रीय विधायिका और स्थानीय निकायों की स्थिति को एक जैसा मान लेना।
• महिला आरक्षण के प्रभाव को स्थानीय स्तर पर नजरअंदाज करना।
• सही प्रतिशत आंकड़ों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) राष्ट्रीय स्तर (लोकसभा/विधानसभा) और स्थानीय स्तर (पंचायत) की तुलना करके उत्तर दें।
b) स्थानीय निकायों में 33% आरक्षण का उल्लेख अवश्य करें।
c) आंकड़ों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 6: किन्हीं दो प्रावधानों का जिक्र करें जो भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बनाते हैं।

Answer:

भारतीय संविधान में ऐसे कई प्रावधान किए गए हैं जो भारत को एक स्पष्ट धर्मनिरपेक्ष (Secular) राज्य बनाते हैं। पहला प्रावधान यह है कि संविधान देश के सभी नागरिकों को किसी भी धर्म को मानने, उसका अभ्यास करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, और राज्य का अपना कोई राजकीय धर्म नहीं है। दूसरा प्रावधान यह है कि संविधान धर्म के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव करने पर पूर्ण रोक लगाता है; सरकार की नजर में सभी धर्म समान हैं और वह धार्मिक मामलों में निष्पक्ष रहती है।

मुख्य बिंदु:

• संविधान द्वारा सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है।
• भारत का अपना कोई राजकीय धर्म नहीं है, सभी धर्मों को समान सम्मान मिलता है।
• धर्म के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव वर्जित है।
• राज्य सभी धार्मिक समुदायों से समान दूरी और सद्भाव बनाए रखता है।

आम गलतियाँ:

• धर्मनिरपेक्षता का अर्थ केवल 'धर्महीनता' या 'नास्तिकता' समझ लेना।
• संवैधानिक प्रावधानों को केवल कागजी बातें बताना और उनके उद्देश्य को न समझना।

Exam Tips:

a) किन्हीं दो प्रमुख संवैधानिक प्रावधानों को बिंदुओं में स्पष्ट लिखें।
b) 'राजकीय धर्म का न होना' और 'धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार' जैसे शब्द प्रयोग करें।
c) उत्तर सटीक और बिंदुवार होना चाहिए।

 

Question 7: जब हम लैंगिक विभाजन की बात करते हैं तो हमारा अभिप्राय होता है:
(क) स्त्री और पुरुष के बीच जैविक अंतर
(ख) समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई आसमान भूमिकाएँ
(ग) बालक और बालिकाओं की संख्या का अनुपात
(घ) लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में महिलाओं को मतदान का अधिकार न मिलना।

Answer:

(ख) समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई आसमान भूमिकाएँ
लैंगिक विभाजन (Gender Division) कोई जैविक अंतर नहीं है, बल्कि यह समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई असमान भूमिकाओं, रूढ़ियों और अपेक्षाओं पर आधारित है। पुरुष और स्त्री के शरीर रचना में जैविक अंतर होता है (जिसे लिंग या Sex कहते हैं), लेकिन समाज ने यह तय कर दिया है कि कौन सा काम महिला करेगी और कौन सा पुरुष, जिसे लैंगिक (Gender) असमानता कहा जाता है।

मुख्य बिंदु:

• लैंगिक विभाजन सामाजिक रूप से निर्मित असमानता है, न कि जैविक।
• समाज ने महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग भूमिकाएँ तय कर रखी हैं।
• यह पितृप्रधान सोच का परिणाम है।

आम गलतियाँ:

• जैविक अंतर (Sex) और सामाजिक भूमिका (Gender) के अंतर को न समझना।
• विकल्प (क) को सही मान लेना।

Exam Tips:

a) बहुविकल्पीय प्रश्न में सही विकल्प का चयन स्पष्ट रूप से करें।
b) लैंगिक और जैविक अंतर की परिभाषा हमेशा याद रखें।
c) संक्षिप्त व्याख्या के साथ उत्तर दें।

 

Question 8: भारत में यहाँ औरतों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है:
(क) लोकसभा
(ख) विधानसभा
(ग) मंत्रिमंडल
(घ) पंचायती राज की संस्थाएँ

Answer:

(घ) पंचायती राज की संस्थाएँ
भारत में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण वर्तमान में केवल स्थानीय शासन की संस्थाओं यानी पंचायती राज संस्थाओं (पंचायतों और नगर पालिकाओं) में है, जहाँ एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था अभी तक लागू नहीं हो पाई है।

मुख्य बिंदु:

• पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण है।
• लोकसभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण अभी लागू नहीं है।
• स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

आम गलतियाँ:

• लोकसभा या विधानसभा में आरक्षण समझ लेना।
• राष्ट्रीय विधायिका और स्थानीय निकायों में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) सही विकल्प (घ) को चिह्नित करें।
b) याद रखें कि राष्ट्रीय स्तर पर अभी आरक्षण बिल पास होना बाकी है, केवल स्थानीय स्तर पर है।
c) उत्तर लिखते समय स्थानीय शासन का ध्यान रखें।

 

Question 9: सांप्रदायिक राजनीति के अर्थ संबंधी निम्नलिखित कथनों पर गौर करें। सांप्रदायिक राजनीति इस धारणा पर आधारित है कि:
(अ) एक धर्म दूसरों से श्रेष्ठ है।
(ब) विभिन्न धर्मों के लोग समान नागरिक के रूप में खुशी-खुशी साथ रह सकते हैं।
(स) एक धर्म के अनुयायी एक समुदाय बनाते हैं।
(द) एक धार्मिक समूह का प्रभुत्व बाकी सभी धर्मों पर कायम करने में शासन की शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
इनमें से कौन-कौन सा कथन सही है?
(क) अ, ब, स और द
(ख) अ, ब और द
(ग) अ और स
(घ) ब और द

Answer:

(ग) अ और स
सांप्रदायिक राजनीति इस मान्यता पर आधारित होती है कि धर्म ही सामाजिक समुदाय का मुख्य आधार है (कथन स) और एक धर्म के लोगों के हित एक जैसे होते हैं, साथ ही यह सोचती है कि एक धर्म दूसरे धर्म से श्रेष्ठ है (कथन अ)। इसके विपरीत, कथन (ब) धर्मनिरपेक्षता और सह-अस्तित्व की बात करता है और कथन (द) सांप्रदायिक प्रभुत्व के खिलाफ है, इसलिए ये दोनों सांप्रदायिक राजनीति की परिभाषा में नहीं आते।

मुख्य बिंदु:

• सांप्रदायिक राजनीति धार्मिक श्रेष्ठता और एक समुदाय होने की भावना पर आधारित है।
• कथन (अ) और (स) सांप्रदायिक सोच को दर्शाते हैं।
• कथन (ब) और (द) धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल हैं।

आम गलतियाँ:

• सभी कथनों को सांप्रदायिक राजनीति का हिस्सा मान लेना।
• सकारात्मक और नकारात्मक कथनों में अंतर न कर पाना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़कर उसका वैचारिक आधार समझें।
b) सही संयोजन (अ और स) का चयन करें।
c) सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष विचारों की सूची अलग से याद रखें।

 

Question 10: भारतीय संविधान के बारे में इनमें से कौन सा कथन गलत है?
(क) यह धर्म के आधार पर भेदभाव की मनाही करता है।
(ख) यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है।
(ग) यह सभी लोगों को कोई भी धर्म मानने की आजादी देता है।
(घ) यह किसी धार्मिक समुदाय में सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है।

Answer:

(ख) यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है。
भारतीय संविधान एक धर्मनिरपेक्ष संविधान है, जिसका अर्थ है कि इसका अपना कोई राजकीय (राज्य) धर्म नहीं है। संविधान सभी धर्मों को समान मानता है। इसलिए कथन (ख) पूरी तरह गलत है, जबकि बाकी तीनों कथन (क, ग, घ) संविधान के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक स्वरूप का सही वर्णन करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• भारतीय संविधान का कोई राजकीय धर्म नहीं है (यह धर्मनिरपेक्ष है)।
• संविधान धर्म के आधार पर भेदभाव मना करता है और सबको धार्मिक स्वतंत्रता देता है।
• गलत कथन की पहचान करनी थी, जो विकल्प (ख) है।

आम गलतियाँ:

• सही और गलत कथन वाले प्रश्नों में भ्रमित होकर सही कथन को चुन लेना।
• भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना को भूल जाना।

Exam Tips:

a) प्रश्न में पूछा गया है कि कौन सा कथन *गलत* है, इसलिए सावधानी से उत्तर दें।
b) भारत का कोई आधिकारिक राजकीय धर्म नहीं है - यह तथ्य हमेशा याद रखें।
c) सही विकल्प (ख) को रेखांकित करें।

 

Question 11: ..................... पर आधारित सामाजिक विभाजन सिर्फ भारत में ही है।

Answer:

जाति पर आधारित सामाजिक विभाजन सिर्फ भारत में ही है। यद्यपि दुनिया के कई देशों में वर्ग, नस्ल या भाषा के आधार पर सामाजिक असमानताएँ पाई जाती हैं, किंतु जन्म आधारित जाति व्यवस्था (Caste System) और उससे जुड़ा पदानुक्रम मुख्य रूप से भारतीय समाज की एक विशिष्ट और प्रमुख विशेषता रही है।

मुख्य बिंदु:

• रिक्त स्थान में 'जाति' शब्द आएगा।
• जातिगत विभाजन और छुआछूत का रूप मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में देखा जाता है।
• यह सामाजिक विभाजन जन्म पर आधारित होता है।

आम गलतियाँ:

• 'जाति' की जगह 'धर्म' या 'लिंग' लिख देना।
• यह सोचना कि जाति व्यवस्था दुनिया के हर देश में समान रूप से पाई जाती है।

Exam Tips:

a) रिक्त स्थान वाले प्रश्नों में सटीक शब्द भरें।
b) जाति व्यवस्था को भारतीय समाज की विशिष्ट विशेषता के रूप में याद रखें।
c) उत्तर पूरा वाक्य लिखकर प्रस्तुत करें।

 

Question 12: सूची I और सूची II का मेल कराएं और नीचे दिए गए कोड के आधार पर सही जवाब खोजें:
सूची I
1. अधिकारों और अवसरों के मामले में स्त्री और पुरुष की बराबरी मानने वाला व्यक्ति
2. धर्म को समुदाय का मुख्य आधार मानने वाला व्यक्ति
3. जाति को समुदाय का मुख्य आधार मानने वाला व्यक्ति
4. व्यक्तियों के बीच धार्मिक आस्था के आधार पर भेदभाव न करने वाला व्यक्ति
सूची II
(क) सांप्रदायिक
(ख) नारीवादी
(ग) धर्मनिरपेक्ष
(घ) जातिवादी
(सही मिलान का कोड चुनें: (र) ख क घ ग, (ग) घ क घ ख, (मा) ग क ख घ, (ऐ) ख क घ ग आदि - सही संयोजन: 1-ख, 2-क, 3-घ, 4-ग)

Answer:

सूची I का सूची II के साथ सही मिलान इस प्रकार है: (1) अधिकारों और अवसरों के मामले में स्त्री और पुरुष की बराबरी मानने वाला व्यक्ति 'नारीवादी' (Feminist) कहलाता है (1 - ख)। (2) धर्म को समुदाय का मुख्य आधार मानने वाला व्यक्ति 'सांप्रदायिक' (Communalist) कहलाता है (2 - क)। (3) जाति को समुदाय का मुख्य आधार मानने वाला व्यक्ति 'जातिवादी' (Casteist) कहलाता है (3 - घ)। (4) व्यक्तियों के बीच धार्मिक आस्था के आधार पर भेदभाव न करने वाला व्यक्ति 'धर्मनिरपेक्ष' (Secular) कहलाता है (4 - ग)। इस प्रकार सही संयोजन (1-ख, 2-क, 3-घ, 4-ग) बनता है।

मुख्य बिंदु:

• नारीवादी महिलाओं और पुरुषों की समानता में विश्वास रखता है।
• सांप्रदायिक व्यक्ति धर्म को राजनीति और समाज का मुख्य आधार मानता है।
• जातिवादी व्यक्ति जाति को सर्वोपरि मानता है।
• धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति सभी धर्मों को समान मानता है और भेदभाव नहीं करता।

आम गलतियाँ:

• सूचियों का मिलान करते समय कूट (Codes) को गलत पढ़ना या आपस में मिला देना।
• नारीवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की परिभाषा में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) मिलान करने वाले प्रश्नों में प्रत्येक बिंदु को ध्यान से पढ़कर उसकी सही विशेषता से जोड़ें।
b) नारीवादी, सांप्रदायिक, जातिवादी और धर्मनिरपेक्ष की परिभाषा अच्छी तरह याद रखें।
c) सही कूट का चयन सावधानीपूर्वक करें।

 

Social Science Class 10 Curriculum Solutions: Chapter 03 जाति, धर्म और लैंगिक मसले

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