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पाठ 4: साडकेन
अरुणाचल प्रदेश में नोखाम के मंडल कार्यालय में वल्लरी के पिताजी एक अधिकारी है। इस बार उन्होंने दिल्ली से अपने परिवार को भी अपने पास बुला लिया है। कहाँ दिल्ली की भीड़भरी सड़कें, हॉर्न बजाती हुई कारें और बसें, आदमियों की लंबी-लंबी कतारें और कहाँ नोखाम का खुला और शांत वातावरण। जिधर देखों, हरियाली ही हरियाली और फूल ही फूल यहाँ के लोगों के मुखों पर सदेव मुस्कान बनी रहती है।
एक दिन वल्लरी को उसके मित्र चाऊतान ने अपने घर बुलाया। वल्लरी अपने पिताजी के साथ चाऊतान के घर गई। उस समय चाऊतान के पिताजी घर की सफाई कर रहे थे। वल्लरी और उसके पिताजी को देखकर उन्होंने सफाई का काम छोड़ दिया और उन दोनों का स्वागत किया।
चाऊतान की मातृजी कई प्रकार के पकवान ले आई। ये पकवान बहुत स्वादिष्ट थे। वल्लरी और उसके पिताजी
[चित्र: वल्लरी और चाऊतान नोखाम के घर के द्वार पर, परिवार के सदस्य पास में खड़े हैं, पाठ्यपुस्तक में देखें]
पकवान खाने लगो। तभी वल्लरी ने चाऊतान से पूछा, "ये लोग कहाँ जा रहे हैं? बहुत प्रसन्न दिख रहे हो।"
चाऊतान ने बताया, "अभी एक-दो दिन पहले ही हमारे गाँव के लोगों ने नदी के किनारे एक मंदिर बनाया है। ये लोग बौद्ध-बिहार से भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ लाए हैं और इन्हें मंदिर ले जा रहे हैं। ये मूर्तियाँ तीन दिन तक उस मंदिर में रखी रहेंगी। गाँव के लोग इन मूर्तियों पर प्रतिदिन जल चढ़ाएँगे और इनकी पूजा करेंगे।"
"क्या हम लोग भी शोभायात्रा में सम्मिलित हो सकते हैं?" वल्लरी के पिताजी ने पूछा। "हाँ-हाँ, अवश्य चलिए, हम सब शोभायात्रा में चलते हैं।" चाऊतान के पिताजी
[चित्र: शोभायात्रा में बहुत से लोग एक-दूसरे के पीछे चल रहे हैं और साडकेन मना रहे हैं, पाठ्यपुस्तक में देखें]
बोलो, "तुम्हें मालूम नहीं, आज हमारे यहाँ साडकेन का त्योहार है। आज से हमारा नया बर्ष आरंभ होता है।"
चाऊतान के पिताजी ने बताया, "गाँव के लोग फिर बौद्ध-बिहार जाएँगे और भिक्षुओं को बार-बार दंडवत प्रणाम करेंगे। भिक्षु लोग हमें आशीर्वाद देंगे -
खेती फूले-फूले तुम्हारी,
तुम्हें न हो कोई बीमारी
हिल-मिलकर सब नाचें-गाएँ,
नए साल में खुशी मनाएँ।"
शिक्षक की टिप्पणी
इस कहानी में साडकेन त्योहार के बारे में बताया गया है जो अरुणाचल प्रदेश में मनाया जाता है। जब आप कहानी पढ़ते हैं, तो ध्यान दीजिए कि नए साल के समय लोग अपने पड़ोसियों के साथ कैसे मिलते-जुलते हैं और एक-दूसरे को कैसे आशीर्वाद देते हैं। यह दिखाता है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में त्योहार अलग-अलग तरीकों से मनाए जाते हैं।
बातचीत के लिए
- त्योहारों पर घरों में कई प्रकार की मिठाइयों और नमकीन बनाई जाती है। आपको कौन-सी मिठाइयों और नमकीन अच्छी लगती हैं? वे किस त्योहार पर बनाई जाती हैं?
- आप कौन-से त्योहार मनाते हैं? उनमें और साडकेन में कौन-कौन सी समानताएँ हैं?
- हमारे देश में अनेक अवसरों पर शोभायात्राएँ (जुलूस) निकाली जाती हैं। आपने कौन-कौन सी शोभायात्राएँ देखी हैं? उनके बारे में अपने अनुभव बताइए।
- आप नया बर्ष कब और कैसे मनाते हैं?
पाठ से
प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सामने तारे का चिह्न (*) बनाइए -
- साडकेन क्यों मनाया जाता है?
- (क) दिपावली पर्व के कारण
- (ख) नव बर्ष प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में
- (ग) नए मंदिर के उद्घाटन की प्रसन्नता में
- (घ) बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर
- भगवान बुद्ध का मंदिर कहाँ बना हुआ था?
- (क) चिकित्सालय के पास (ख) सरोवर के किनारे
- (ग) नदी के किनारे (घ) समुद्र के किनारे
- लोग बहुत देर तक एक-दूसरे पर पानी डालते रहे क्योंकि -
- (क) उन्हें गर्मी लग रही थी (ख) वे स्नान कर रहे थे
- (ग) ये गंदे हो गए थे (घ) वे साडकेन मना रहे थे
शिक्षक की टिप्पणी
बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करते समय पूरी कहानी को ध्यान से पढ़ें। सही उत्तर खोजने के लिए कहानी के विभिन्न भागों में दिए गए संकेतों का उपयोग करें। उदाहरण के लिए, अगर कहानी में कहा गया है कि लोग "एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे" और साथ ही "साडकेन मना रहे थे", तो यह दिखाता है कि पानी डालना साडकेन त्योहार का हिस्सा है।
मुख्य बिंदु
- साडकेन अरुणाचल प्रदेश में मनाया जाने वाला नए साल का त्योहार है। इस दिन लोग मंदिरों में जाते हैं, भिक्षुओं को प्रणाम करते हैं और एक-दूसरे को आशीर्वाद देते हैं।
- भारत में विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं। हर त्योहार की अपनी खासियत और परंपरा होती है।
- त्योहार लोगों को एक-दूसरे के पास लाते हैं और समाज में प्रेम और भाईचारे की भावना बढ़ाते हैं।
- साडकेन में लोग पानी से खेलते हैं और एक-दूसरे को आशीर्वाद देते हैं कि उन्हें स्वास्थ्य और खुशियाँ मिलें।
यह अध्याय के पहले 5 पृष्ठों का पूर्वावलोकन है। पूरा अध्याय पाने के लिए नीचे क्लिक करें।
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