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ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions
Section-A
Question 1. Write a composition in Hindi in approximately 400 words on any ONE of the topics given below: [20]
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 400 शब्दों में हिन्दी में निबन्ध लिखिए -
(a) "भूकम्प प्रकृति का वह विनाशकारी रूप है जिसकी कल्पना भी मनुष्य-मन को चोट पहुँचाती है।" - इस कथन को ध्यान में रखते हुए उस समय का वर्णन कीजिए जब आपके नगर में भूकम्प आया, उसका आम जन जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा? आपने तथा आपके साथियों ने राहत कार्यों में क्या योगदान दिया। विस्तार से लिखिए।
(b) अपराधी को नहीं बल्कि अपराध को समाप्त करने से एक मजबूत राष्ट्र तैयार होता है। इस विषय के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार लिखिए।
(c) "बालश्रम समाज पर एक अभिशाप है।" इस विषय को ध्यान में रखते हुए उन बच्चों की जरूरतों और मजबूरियों पर एक प्रस्ताव लिखिए।
(d) "अहंकार से वृद्धि रुक जाती है।" इस विचार को अपने जीवन की घटना के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
(e) "योग स्वस्थ जीवन का आधार" - विवेचन कीजिए।
(f) निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर मौलिक कहानी लिखिए -
(i) कहानी का अन्तिम वाक्य होगा ...... इस घटना ने मेरा हृदय परिवर्तन कर दिया।
(ii) "जहाँ चाह वहाँ राह।" कहावत को आधार बनाकर एक कहानी लिखिए।
Answer:
(a)
भूकम्प
पृथ्वी का अपनी धुरी से हिलकर कम्पन करने की स्थिति को भूकम्प या भूचाल कहा जाता है। कभी-कभी तो यह स्थिति बहुत भयावाह हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी के ऊपर स्थित जड़-चेतन, प्राणी और पदार्थ का या तो विनाश हो जाता है या फिर वह सर्वनाश की-सी स्थिति में पहुँच जाता है। जापान के विषय में तो प्रायः सुना जाता है कि वहाँ अक्सर भूकम्प आकर विनाशशीलता प्रस्तुत करते ही रहते हैं। इस कारण लोग वहाँ लकड़ी के बने घरों में रहते हैं। इसी प्रकार का एक भयानक भूकम्प बहुत वर्षों पहले अविभाजित भारत के क्वेटा नामक स्थान पर आया था। उसने शहर के साथ-साथ हजारों घर-परिवारों का नाम तक भी बाकी नहीं रहने दिया था।
अभी कुछ वर्षों पहले गढ़वाल और महाराष्ट्र के कुछ भागों को भूकम्प के दिल दहला देने वाले हादसों का शिकार होना पड़ा था। प्रकृति की यह कैसी लीला है कि वह मानव-शिशुओं के घरघरोंदों को तथा स्वयं उनको भी कच्ची मिट्टी के खिलौनों की तरह तोड़-मरोड़कर रख देती है। पहले यह भूकम्प गढ़वाल के पहाड़ी इलाकों में आया था, जहाँ इसने बहुत नुकसान पहुँचाया था। थोड़े दिनों पश्चात् महाराष्ट्र के लातूर में फिर एक भूकम्प आया जिसने वहाँ सब कुछ मटियामेट कर दिया था।
26 जनवरी, 2001 को गुजरात सहित पूरे भारत ने भूकम्प का कहर देखा। भुज सहित सम्पूर्ण गुजरात में भारी जान-माल का नुकसान हुआ। 8 अक्टूबर, 2005 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और उससे सटे भारतीय कश्मीर में दिल दहला देने वाला भूकम्प आया। उसमें जहाँ एक लाख से अधिक लोग काल के गाल में समा गये, वहीं लाखों लोग घायल हुए तथा अरबों रुपये की सम्पत्ति की भी हानि हुई।
भूकम्प वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई उपकरण या यन्त्र विकसित नहीं हुआ है जिससे यह पता चल सके कि अमुक-अमुक क्षेत्रों में भूकम्प आने वाला है। भूकम्प के आते समय 'रक्टर स्केल' पर सिर्फ उसकी क्षमता का ही माप लिया जा सकता है।
गुजरात के भूकम्प को देखकर वहाँ अफरा-तफरी मच गई। आँखों-देखी इस भयंकर दुर्घटना ने सभी लोगों के मन में एक प्रश्न खड़ा कर दिया कि आखिर गुजरात प्रान्त का क्या होगा? वहाँ जनहानि और धन हानि का अनुमान ही लगाना कठिन था। भूकम्प आने के बाद गुजरात प्रान्त की स्थिति एक श्मशान घाट या कब्रिस्तान की भाँति हो गई थी। हम पाँच छात्र किसी परीक्षा के लिए वहाँ गए थे। हम एक होटल में ठहरे थे। हमें जैसे ही पता लगा तो हम लोग बाहर आए और उस स्थान की तरफ बढ़े जहाँ से चीख-पुकार या भयंकर शोर शराबा हो रहा था। लोग उधर दौड़े जा रहे थे। हम भी भागकर वहाँ पहुंचे और पीड़ित लोगों की मदद की। पुलिस, एम्बुलेन्स और फायरब्रिज्ड की गाड़ियाँ आ चुकी थीं। उस भयंकर दृश्य को देखकर प्राण सूख रहे थे। हम पाँचों छात्रों ने हिम्मत नहीं हारी और घायलों को एम्बुलेन्स में बिठाया। दबे हुए लोगों को मलवा काटकर बाहर निकाला। मृतकों के ढेर देखकर करुणा भी रोने लगी। ऐसी त्रासदी भगवान किसी देश को न दे।
ऊपरी सतह से लेकर अन्तर्भाग तक पृथ्वी कई परतों से बनी हुई है। पृथ्वी की बाहरी सतह कई कठोर खण्डों या विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है जो क्रमशः कई लाख सालों की अवधि में पूरे सतह से विस्थापित होती है। पृथ्वी की आन्तरिक सतह एक अपेक्षाकृत ठोस भूपटल की मोटी परत से बनी हुई है और सबसे अन्दर होता है एक कोर, जो एक तरल बाहरी कोर और एक ठोस लोहे की आन्तरिक कोर से बनी हुई है। बाहरी सतह की जो विवर्तनिक प्लेट हैं वे बहुत धीरे-धीरे गतिमान हैं।
ये प्लेट आपस में टकराते भी हैं और एक-दूसरे से अलग भी होते हैं। ऐसी स्थिति में घर्षण के कारण भूखण्ड या पत्थरों में अचानक दरारें फूट सकती हैं। इस अचानक तेज हलचल के कारण जो शक्ति उत्सर्जति होती है, वही भूकम्प के रूप में तबाही मचाती भूकम्प भूस्खलन और हिम स्खलन पैदा कर सकता है, जो पहाड़ी और पर्वतीय इलाकों में क्षति का कारण हो सकता है। भूकम्प के कारण किसी विद्युत लाइन के टूटने के कारण आग लग सकती है। भूकम्प के कारण मिट्टी द्रवीकृत हो सकती है जिससे इमारतों और पुलों को नुकसान पहुँच सकता है। समुद्र के अन्दर भूकम्प से सुनामी आ सकती है। भूकम्प से क्षतिग्रस्त बाँध के कारण बाढ़ आ सकती है। भूकम्प से जीवन की हानि, सम्पत्ति की हानि, मूलभूत आवश्यकताओं की कमी, रोग इत्यादि होते हैं।
यह एक प्राकृतिक आपदा है। हमें इससे अपनी रक्षा के उपाय करने चाहिए। जापान आदि देशों में जहाँ भूकम्प अधिकतर आते हैं वहाँ लोग लकड़ी या बाँस के मकान बनाते हैं जिससे कि जनहानि कम होती है।
Teacher's Note:
a) Composition writing on a personal narrative or descriptive topic requires a well-structured beginning, body, and conclusion in fluent Hindi.
b) Students should ensure appropriate vocabulary, vivid imagery, and correct grammatical usage without spelling mistakes.
Question 2. Read the following passage and briefly answer the questions that follow :
निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर, अन्त में दिये गए प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर लिखिए -
विनम्रता तथा सरलता ऐसे गुण हैं जो हमें सच्चे अर्थों में मनुष्य बनाते हैं। विनम्रता मानव को उसके दिव्य स्वभाव से जोड़ती है। उसे दूसरों के प्रति सहृदय बनाती है। वह सरलता से प्रेरित होकर विपत्ति में पड़े मनुष्यों की मदद करता है। स्वयं अभाव में रहकर भी दूसरों की यथासंभव सहायता करता है। विनम्र व्यक्ति की वाणी बड़ी मधुर होती है। इनके मृदुवचन मन की कटुता को समाप्त करते हैं। वाणी की मिठास के कारण इनके अनेकानेक मित्र बन जाते हैं। लोग इस प्रकार के व्यक्तियों से चाहे जितने भी क्रोध में बात करें, विनम्रता का जादू क्षणभर में क्रोध को शांत कर देता है। अतः इस प्रकार विनम्रता बड़ी सहलता से क्रोध जैसे बड़े मनोविकार पर भी विजय प्राप्त कर लेती है। ये व्यक्ति समाज के लिए मार्गदर्शक बन जाते हैं। इनकी सरलता में जो स्वाभाविकता है वह लोगों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित करती है। इनका अनुकरण करने का प्रयास सभी करते हैं। जिससे वे भी विनम्रता को अपने जीवन में अपनाकर अपना जीवन सफल बना सकें। ईर्ष्या, द्वेष, घृणा जैसे मनोविकार को पराजित कर पाएं।
अनेक महान विभूतियों का जीवन सरलता तथा विनम्रता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात शक्ल से अत्यंत ही कुरूप थे। एक दिन अकेले में वे दर्पण हाथ में लेकर अपना मुंह देख रहे थे, तभी उनका प्रिय शिष्य आया और सुकरात को दर्पण देखता पाकर बहुत आश्चर्य में पड़ गया। वह कुछ बोला नहीं मात्र मुस्कुराने लगा। सुकरात ने उससे कहा "शायद तुम सोच रहे हो कि मुझ जैसा सुंदर व्यक्ति आखिर शीशा क्यों देख रहा है?" सुकरात ने उसे समझाया "वत्स शायद तुम नहीं जानते कि मैं यह शीशा क्यों देखता हूँ? मैं कुरूप हूँ। इसलिये प्रतिदिन शीशा देखता हूँ। शीशा देखकर मुझे अपनी कुरूपता का ज्ञान होता है। मैं अपने रूप को जानता हूँ। इसलिए प्रतिदिन प्रयत्न करता हूँ कि ऐसे, अच्छे कार्य करूँ जिससे मेरी यह कुरूपता ढक जाए।" यह सरलता शिष्य के हृदय को छू गई। उसे गहरा जीवन दर्शन बड़ी आसानी से उसके गुरु ने सिखा दिया।
हमें भी अपने जीवन में इस अच्छे गुण को अपनाना चाहिए। यह बहुत बड़ी शक्ति है। इससे हम अपने केन्द्र से जुड़ते हैं। हमारी जीवनदृष्टि विशाल तथा भव्य बनती है। हम मानवता को नई ऊँचाई प्रदान करते हैं। हमारी विनम्रता तथा सरलता एक स्वस्थ समाज को जन्म देती है।
(a) विनम्रता किस प्रकार मनुष्य के स्वभाव को दिव्यता प्रदान करती है? [4]
Answer:
विनम्रता सच्चे अर्थ में मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है। वह मनुष्य को उसके दिव्य स्वभाव से जोड़ती है। विनम्र व्यक्ति में ही सहृदयता आती है जिससे वह दूसरे मनुष्यों की सहायता करता है। विनम्र व्यक्ति का कोई शत्रु नहीं होता। वह सबको अपना प्रिय बना लेता है। विनम्रता मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ गुण है। विनम्र व्यक्ति सबका चेता होता है।
Teacher's Note:
a) Answers to comprehension questions must be derived strictly from the provided text.
b) Express the core idea clearly using direct sentences from the passage.
(b) सरल तथा विनम्र मनुष्यों की वाणी की विशेषता तथा प्रभाव का वर्णन करें। [4]
Answer:
सरल तथा विनम्र मनुष्यों की वाणी मधुर होती है। वे सामने वाले व्यक्ति के अनुरूप ही सद्व्यवहार करते हैं। सरल व्यक्ति किसी से धोखाधड़ी नहीं करता। विनम्र व्यक्ति सरल हृदय तो होता ही है साथ-साथ वह अपनी मधुर वाणी से सुनने वाले को सन्तोष और सुख प्रदान करता है। उसके मृदुवचन मन की कटुता को समाप्त करते हैं। वाणी की मधुरता के कारण इनके अनेकानेक मित्र बन जाते हैं। विनम्र व्यक्ति की मधुर वाणी क्रोधी व्यक्ति के क्रोध को भी शान्त कर देती है।
Teacher's Note:
a) Focus on the specific traits of speech mentioned in the text for this sub-question.
b) Maintain precision and avoid adding extraneous details not supported by the passage.
(c) सामान्य लोग सरल और विनम्र लोगों का अनुकरण करने का प्रयास क्यों करते हैं? [4]
Answer:
सामान्य लोग सरल और विनम्र लोगों का अनुकरण करने का प्रयास इसलिए करते हैं क्योंकि वे भी उन लोगों की तरह विनम्रता को अपनाकर अपने जीवन को महान और सफल बना सकें। विनम्रता से ईर्ष्या, द्वेष, घृणा जैसे मनोविकार धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और मनुष्य सद्गुणों की ओर प्रेरित होता है।
Teacher's Note:
a) Explain the motivation behind people trying to emulate humble individuals as stated in the text.
b) Ensure all key points like elimination of negative traits are covered.
(d) सुकरात की प्रतिदिन शीशा देखने वाली घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिये। [4]
Answer:
विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात शक्ल में अत्यन्त कुरूप थे। एक दिन वे दर्पण में अपना मुख देख रहे थे। तभी एक शिष्य वहाँ आया तो उसे आश्चर्य हुआ कि कुरूप होते हुए भी गुरुजी अपना मुख दर्पण में क्यों देख रहे हैं? लेकिन वह कुछ बोला नहीं। गुरु ने उसके मन के विचारों को जानकर उससे कहा कि वत्स मैं कुरूप हूँ इसलिए शीशा देखकर मैं यह प्रयत्न करता हूँ कि ऐसे अच्छे कार्य करूँ जिससे मेरी कुरूपता ढक जाये। संसार में रूप का नहीं बल्कि विद्विता और सत्कर्मों का ही महत्व है। शिष्य की समझ में यह बात आ गई।
Teacher's Note:
a) Summarize the Socrates anecdote clearly and concisely.
b) Retain the moral lesson imparted by Socrates in the story.
(e) इस गद्यांश से आपको क्या शिक्षा मिलती है? [4]
Answer:
इस गद्यांश से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने जीवन में अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए। इससे हमारी जीवनदृष्टि विशाल तथा भव्य बनती है। हम मानवता को नई ऊँचाई प्रदान करते हैं। हमारी विनम्रता तथा सरलता एक स्वस्थ समाज को जन्म देती है। हमारे जीवन में सद्गुणों का विकास होता है और सत्पुरुषों का संग मिलता है।
Teacher's Note:
a) Conclude with the moral message of the passage accurately.
b) Express the conclusion in standard, grammatically correct Hindi sentences.
Question 3. (a) Correct the following sentences, [5]
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए -
(i) मुझे आपसे अनेकों बात करनी हैं।
(ii) हमें अपनी मातृभूमि पर अहंकार है।
(iii) मेरी बात राकेश हँसी से टाल गया।
(iv) जो काम करो वह पूरा जरूर करो।
(v) यह सारा कार्य मैंने करा है।
Answer:
(i) मुझे आपसे अनेक बातें करनी हैं।
(ii) हमें अपनी मातृभूमि पर गर्व है।
(iii) मेरी बात राकेश हँसी में टाल गया।
(iv) जो काम करो उसे पूरा जरूर करो।
(v) यह सारा कार्य मैंने किया है।
Teacher's Note:
a) Sentence correction tests grammatical agreement, proper usage of words like अनेक instead of अनेकों, and appropriate prepositions.
b) Pay close attention to subtle errors in verb forms and case markers.
(b) Use the following idioms in sentences of your own to illustrate their meaning - [5]
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करने के लिए वाक्य में प्रयोग कीजिए -
(i) आँच न आना।
(ii) कान खड़े होना।
(iii) घी के दीये जलाना।
(iv) चेहरे का रंग उड़ना।
(v) राई का पहाड़ बनाना।
Answer:
(i) आँच न आना - कोई नुकसान न होना।
प्रयोग - शेयरों की उलटफेर में करीब-करीब सभी को घाटा हुआ, लेकिन रमेश भाग्यशाली रहा कि उसको कोई आँच न आई।
(ii) कान खड़े होना - सावधान हो जाना।
प्रयोग - जब से सुशील को चाँदी के काम में घाटा हुआ है तब से उसके कान खड़े हो गए हैं और अब वह सावधानी से चलता है।
(iii) घी के दिये जलाना - बहुत खुशी मनाना।
प्रयोग - व्यापार में उम्मीद से ज्यादा मुनाफा होने पर सेठ लक्ष्मीचन्द के यहाँ घी के दिये जल रहे हैं।
(iv) चेहरे का रंग उड़ना - घबरा जाना।
प्रयोग - चोर ने चोरी के माल को ऐसी जगह छिपा दिया कि किसी को पता न चले; लेकिन जब पुलिस ने उसको पकड़ लिया तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
(v) राई का पहाड़ बनाना - बड़ा-चढ़ा कर कहना।
प्रयोग - रमेश की तो आदत है कि वह हर घटना को राई का पहाड़ बनाकर बताता है।
Teacher's Note:
a) Idioms must be explained with their literal meanings and used naturally within contextual sentences.
b) Ensure the sentence clearly demonstrates the meaning of the idiom.
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