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Detailed Sahitya Sagar Chapter 5.2 Megh Aaye ICSE Solutions for Class 10 Hindi
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Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 5.2 Megh Aaye ICSE Solutions PDF
Question क-i: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली
दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगी गली-गली
पाहुन ज्यों आये हों गाँव में शहर के।
पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाये
आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाये
बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरकाए।
मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए?
Answer: मेघ रूपी मेहमान के आने से हवा के तेज बहाव के कारण आँधी चलने लगती है जिससे पेड़ कभी झुक जाते हैं तो कभी उठ जाते हैं। दरवाजे खिड़कियाँ खुल जाती हैं। नदी बाँकी होकर बहने लगी। पीपल का वृक्ष भी झुकने लगता है, तालाब के पानी में उथल-पुथल होने लगती है, अंत में आसमान से वर्षा होने लगती है।
In simple words: मेघ के आने से तेज हवा चलती है, पेड़ झुकते-उठते हैं, खिड़कियाँ खुल जाती हैं, नदी टेढ़ी हो जाती है, तालाब में हलचल होती है, और अंत में बारिश होती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में मेघों के आगमन पर प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों का मानवीकरण सहित विस्तृत वर्णन करें।
Question क-ii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
आगे-आगे नाचती - गाती बयार चली
दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगी गली-गली
पाहुन ज्यों आये हों गाँव में शहर के।
पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाये
आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाये
बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरकाए।
'बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूँघट सरकाए।' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: उपर्युक्त पंक्ति का भाव यह है कि मेघ के आने का प्रभाव सभी पर पड़ा है। नदी ठिठककर कर जब ऊपर देखने की चेष्टा करती है तो उसका घूँघट सरक जाता है और वह तिरछी नज़र से आए हुए आंगतुक को देखने लगती है।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि नदी भी मेघों को देखने के लिए रुक जाती है और अपने घूंघट को सरकाकर उन्हें तिरछी नजरों से देखती है, जैसे कोई नई दुल्हन मेहमान को देखे।
🎯 Exam Tip: इस पंक्ति के मानवीकरण को समझाते हुए कवि के भाव को स्पष्ट करें, जिसमें नदी को एक स्त्री के रूप में दर्शाया गया है।
Question क-iii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
आगे-आगे नाचती - गाती बयार चली
दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगी गली-गली
पाहुन ज्यों आये हों गाँव में शहर के।
पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाये
आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाये
बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरकाए।
मेघों के लिए 'बन-ठन के, सँवर के' आने की बात क्यों कही गई है?
Answer: कवि ने मेघों में सजीवता लाने के लिए बन ठन की बात की है। जब हम किसी के घर बहुत दिनों के बाद जाते हैं तो बन सँवरकर जाते हैं ठीक उसी प्रकार मेघ भी बहुत दिनों बाद आए हैं क्योंकि उन्हें बनने सँवरने में देर हो गई थी।
In simple words: कवि ने मेघों को मनुष्य की तरह दर्शाया है, जो लंबे समय बाद आने के कारण सज-धज कर आते हैं, जिससे कविता में सजीवता और मानवीय भावनाएँ जुड़ जाती हैं।
🎯 Exam Tip: मानवीकरण अलंकार का प्रयोग और मेघों के देर से आने के संदर्भ को जोड़कर उत्तर दें।
Question क-iv: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
आगे-आगे नाचती - गाती बयार चली
दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगी गली-गली
पाहुन ज्यों आये हों गाँव में शहर के।
पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाये
आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाये
बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरकाए।
शब्दार्थ लिखिए - बन ठन के, बाँकी चितवन, पाहून, ठिठकना
Answer:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बन ठन के | सज-धज के |
| बाँकी चितवन | तिरछी नजर |
| पाहुन | अतिथि |
| ठिठकना | सहम जाना |
In simple words: यह शब्दार्थ कविता के मुख्य शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करते हैं, जैसे 'बन ठन के' का मतलब है सज-धजकर, 'बाँकी चितवन' का मतलब तिरछी नजर, 'पाहुन' का मतलब अतिथि, और 'ठिठकना' का मतलब सहम जाना।
🎯 Exam Tip: शब्दार्थ लिखते समय ध्यान रखें कि सटीक और प्रचलित अर्थ ही प्रस्तुत करें।
Question ख-i: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
बूढ़े पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
'बरस बाद सुधि लीन्ही'
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।
क्षितिज अटारी गदरायी दामिनि दमकी
'क्षमा करो गाँठ खुल गयी अब भरम की'
बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
'क्षितिज अटारी गहराई दामिनी दमकी, क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की' - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: उपर्युक्त पंक्ति का आशय यह है कि नायिका को यह भ्रम था कि उसके प्रिय अर्थात् मेघ नहीं आएँगे परन्तु बादल रूपी नायक के आने से उसकी सारी शंकाएँ मिट जाती है और वह क्षमा याचना करने लगती है।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि जब बिजली चमकती है और नायिका का भ्रम टूटता है कि उसका प्रिय (मेघ) नहीं आएगा, तो उसे अपनी शंका पर पछतावा होता है और वह क्षमा माँगती है।
🎯 Exam Tip: नायिका के भावों और मेघों के आगमन से उसके भ्रम टूटने की प्रक्रिया को स्पष्टता से व्यक्त करें।
Question ख-ii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
बूढे पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
'बरस बाद सुधि लीन्ही'
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।
क्षितिज अटारी गदरायी दामिनि दमकी
'क्षमा करो गाँठ खुल गयी अब भरम की'
बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
लता ने बादल रूपी मेहमान को किस तरह देखा और क्यों?
Answer: लता ने बादल रूपी मेहमान को किवाड़ की ओट में से देखा क्योंकि एक तो वह बादल को देखने के लिए व्याकुल हो रही थी और दूसरी ओर वह बादलों के देरी से आने के कारण रूठी हुई भी थी।
In simple words: लता (विरहिणी) ने किवाड़ की ओट से मेघों को देखा क्योंकि वह उनसे मिलने को उत्सुक भी थी और देर से आने के कारण थोड़ी रूठी हुई भी थी।
🎯 Exam Tip: लता के मानवीकृत रूप और उसके दोहरे भावों (व्याकुलता और नाराजगी) को उत्तर में प्रमुखता से दर्शाएँ।
Question ख-iii: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
बूढे पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
'बरस बाद सुधि लीन्ही'
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।
क्षितिज अटारी गदरायी दामिनि दमकी
'क्षमा करो गाँठ खुल गयी अब भरम की'
बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
क कवि ने पीपल के पेड़ के लिए किस शब्द का प्रयोग किया है और क्यों?
Answer: कवि ने पीपल के पेड़ के लिए 'बूढ़े' शब्द का प्रयोग किया है क्योंकि पीपल का पेड़ दीर्घजीवी होता है। जिस प्रकार गाँव में मेहमान आने पर बड़े-बूढ़े आगे बढ़कर उसका अभिवादन करते हैं वैसे ही मेघ रूपी दामाद के आने पर गाँव के बुजुर्ग पीपल का पेड़ आगे बढ़कर उनका स्वागत करते हैं।
In simple words: कवि ने पीपल के पेड़ को 'बूढ़े' कहा है क्योंकि पीपल का पेड़ बहुत लंबा जीवन जीता है, और यह गाँव के सबसे बड़े-बुजुर्ग व्यक्ति की तरह मेहमान (मेघ) का स्वागत करता है।
🎯 Exam Tip: पीपल के दीर्घायु होने और गाँव में बुजुर्गों द्वारा अतिथि सत्कार की परंपरा को जोड़कर उत्तर को पुष्ट करें।
Question ख-iv: निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
बूढ़े पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
'बरस बाद सुधि लीन्ही'
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।
क्षितिज अटारी गदरायी दामिनि दमकी
'क्षमा करो गाँठ खुल गयी अब भरम की'
बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
शब्दार्थ लिखिए - बरस, सुधि, अकुलाई, ढरके
Answer:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बरस | वर्ष |
| सुधि | सुध |
| अकुलाई | व्याकुल |
| ढरके | ढलकना |
In simple words: यह शब्दार्थ कविता में प्रयुक्त 'बरस', 'सुधि', 'अकुलाई' और 'ढरके' शब्दों के स्पष्ट अर्थ प्रस्तुत करते हैं, जो क्रमशः वर्ष, याद, व्याकुल और ढलकना हैं।
🎯 Exam Tip: दिए गए शब्दों का सही और संदर्भ-आधारित अर्थ लिखें, ताकि उनका प्रयोग समझने में आसानी हो।
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ICSE Solutions Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 5.2 Megh Aaye
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