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Detailed Sahitya Sagar Chapter 10.2 Do Kalakar ICSE Solutions for Class 10 Hindi
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Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 10.2 Do Kalakar ICSE Solutions PDF
Question क-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश,
चलू उनको बहलाऊँ आज।
बताकर अपना सुख-दुख उसे
हृदय का भार हटाऊँ आज।।
चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़
नयन-जल से नहलाऊँ आज।
मातृ मंदिर में मैंने कहा....
चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।।
किंतु यह हुआ अचानक ध्यान,
दीन हूँ छोटी हूँ अज्ञान।
मातृ-मंदिर का दुर्गम मार्ग
तुम्हीं बतला दो हे भगवान।।
किसका हृदय व्यथित है?
Answer: कवयित्री का हृदय व्यथित है।
In simple words: कवयित्री का हृदय दुखी है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में यह समझना महत्वपूर्ण है कि कविता में 'किसका' शब्द कवयित्री के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो उसके आंतरिक भावों को दर्शाता है।
Question क-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश,
चलू उनको बहलाऊँ आज।
बताकर अपना सुख-दुख उसे
हृदय का भार हटाऊँ आज।।
चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़
नयन-जल से नहलाऊँ आज।
मातृ मंदिर में मैंने कहा....
चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।।
किंतु यह हुआ अचानक ध्यान,
दीन हूँ छोटी हूँ अज्ञान।
मातृ-मंदिर का दुर्गम मार्ग
तुम्हीं बतला दो हे भगवान।।
कवयित्री अपनी व्यथा को दूर करने के लिए क्या करना चाहती है?
Answer: कवयित्री अपनी व्यथा को दूर करने के लिए मातृ मंदिर जाना चाहती है।
In simple words: कवयित्री अपने मन का दुख कम करने के लिए माँ के मंदिर में जाकर दर्शन करना चाहती है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न कवयित्री की आंतरिक इच्छा और उसके दुःख निवारण के लिए चुने गए मार्ग को समझने पर आधारित है।
Question क-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश,
चलू उनको बहलाऊँ आज।
बताकर अपना सुख-दुख उसे
हृदय का भार हटाऊँ आज।।
चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़
नयन-जल से नहलाऊँ आज।
मातृ मंदिर में मैंने कहा....
चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।।
किंतु यह हुआ अचानक ध्यान,
दीन हूँ छोटी हूँ अज्ञान।
मातृ-मंदिर का दुर्गम मार्ग
तुम्हीं बतला दो हे भगवान।।
मातृ मंदिर का मार्ग कैसा है?
Answer: मातृ मंदिर का मार्ग दुर्गम है।
In simple words: मातृ मंदिर का रास्ता कठिन और पहुँच से बाहर है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में 'दुर्गम' शब्द के अर्थ को पहचानना महत्वपूर्ण है, जो मार्ग की कठिनाई को बताता है।
Question क-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश,
चलू उनको बहलाऊँ आज।
बताकर अपना सुख-दुख उसे
हृदय का भार हटाऊँ आज।।
चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़
नयन-जल से नहलाऊँ आज।
मातृ मंदिर में मैंने कहा....
चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।।
किंतु यह हुआ अचानक ध्यान,
दीन हूँ छोटी हूँ अज्ञान।
मातृ-मंदिर का दुर्गम मार्ग
तुम्हीं बतला दो हे भगवान।।
शब्दार्थ लिखिए -
व्यथित, नयन-जल, दुर्गम
Answer: व्यथित - दुखी
नयन-जल - आँसू
दुर्गम - जहाँ जाना कठिन हो
In simple words: यहाँ दिए गए शब्दों के अर्थ क्रमशः दुखी, आँसू और कठिन मार्ग हैं।
🎯 Exam Tip: शब्दार्थ के प्रश्न में सही और सटीक अर्थ लिखना आवश्यक है ताकि आपकी शब्दावली का ज्ञान स्पष्ट हो सके।
Question ख-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मार्ग के बाधक पहरेदार
सुना है ऊँचे से सोपान
फिसलते हैं ये दुर्बल पैर
चढ़ा दो मुझको हे भगवान।।
अहा ! वे जगमग-जगमग जगी
ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ।
शीघ्रता करो वाद्य बज उठे
भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?
सुनाई पड़ता है कल-गान
मिला दूँ मैं भी अपनी तान।
शीघ्रता करो मुझे ले चलो,
मातृ मंदिर में है भगवान।।
मार्ग के बाधक कौन है?
Answer: मार्ग के बाधक पहरेदार है।
In simple words: मार्ग पर बाधा डालने वाले पहरेदार हैं जो मंदिर तक जाने से रोक रहे हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर सीधे गद्यांश में दिया गया है, इसलिए ध्यान से पढ़कर सही शब्द को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question ख-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मार्ग के बाधक पहरेदार
सुना है ऊँचे से सोपान
फिसलते हैं ये दुर्बल पैर
चढ़ा दो मुझको हे भगवान।।
अहा ! वे जगमग-जगमग जगी
ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ।
शीघ्रता करो वाद्य बज उठे
भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?
सुनाई पड़ता है कल-गान
मिला दूँ मैं भी अपनी तान।
शीघ्रता करो मुझे ले चलो,
मातृ मंदिर में है भगवान।।
कवयित्री भगवान से सहायता क्यों माँग रही है?
Answer: कवयित्री के पैर दुर्बल हैं और वो ऊँची सीढ़ियाँ चढ़ने में असमर्थ से इसलिए वह भगवान से सहायता माँग रही है।
In simple words: कवयित्री अपने कमजोर पैरों के कारण ऊंची सीढ़ियाँ चढ़ने में असमर्थ है, इसलिए वह भगवान से मदद मांग रही है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में कवयित्री की शारीरिक असमर्थता और उसकी भावनात्मक प्रार्थना के बीच के संबंध को स्पष्ट करना चाहिए।
Question ख-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मार्ग के बाधक पहरेदार
सुना है ऊँचे से सोपान
फिसलते हैं ये दुर्बल पैर
चढ़ा दो मुझको हे भगवान।।
अहा ! वे जगमग-जगमग जगी
ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ।
शीघ्रता करो वाद्य बज उठे
भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?
सुनाई पड़ता है कल-गान
मिला दूँ मैं भी अपनी तान।
शीघ्रता करो मुझे ले चलो,
मातृ मंदिर में हे भगवान।।
'अहा ! वे जगमग-जगमग जगी, ज्योतियाँ दिख रही हैं वहाँ।' - आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवियित्री को माँ के मंदिर में जगमगाते दीपों का ज्योति पुंज दिखाई दे रहा है।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि कवयित्री को माँ के मंदिर में जलते हुए दीयों की चमकती रोशनी दूर से ही दिखाई दे रही है।
🎯 Exam Tip: आशय स्पष्ट करते समय, दी गई पंक्ति के शाब्दिक अर्थ के साथ-साथ उसके निहितार्थ और संदर्भ को भी समझाना चाहिए।
Question ख-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मार्ग के बाधक पहरेदार
सुना है ऊँचे से सोपान
फिसलते हैं ये दुर्बल पैर
चढ़ा दो मुझको हे भगवान।।
अहा ! वे जगमग-जगमग जगी
ज्योतियाँ दीख रही हैं वहाँ।
शीघ्रता करो वाद्य बज उठे
भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?
सुनाई पड़ता है कल-गान
मिला दूँ मैं भी अपनी तान।
शीघ्रता करो मुझे ले चलो,
मातृ मंदिर में है भगवान।।
शब्दार्थ लिखिए -
सोपान, शीघ्रता, दुर्बल,
Answer: सोपान - सीढ़ियाँ
शीघ्रता - जल्दी
दुर्बल - कमजोर
In simple words: दिए गए शब्दों के अर्थ हैं सीढ़ियाँ, जल्दी और कमजोर।
🎯 Exam Tip: शब्दार्थ लिखते समय, पर्यायवाची शब्दों का उपयोग करें जो मूल शब्द के अर्थ को सटीक रूप से व्यक्त करते हों।
Question ग-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ।
देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति।
आह ! वह मीठी-सी मुसकान
जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।
उसे भी आती होगी याद?
उसे, हाँ आती होगी याद।
नहीं तो रूदूँगी मैं आज
सुनाऊँगी उसको फरियाद।
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।
कवयित्री क्यों जल्दी से आगे बढ़ना चाहती है?
Answer: कवियित्री को माँ के मंदिर में जगमगाते दीपों का ज्योति पुंज दिखाई दे रहा है तथा वाद्य भी सुनाई दे रहे है इसलिए वे मातृ
भूमि के चरणों में जाना चाहती है।
In simple words: कवयित्री जल्दी से आगे बढ़ना चाहती है क्योंकि उसे माँ के मंदिर की रोशनी और वाद्य-धुन सुनाई दे रही है, और वह मातृभूमि के चरणों में पहुँचने को आतुर है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में कवयित्री की उत्सुकता और उसके पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना चाहिए, जो गद्यांश में निहित हैं।
Question ग-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ।
देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति।
आह ! वह मीठी-सी मुसकान
जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।
उसे भी आती होगी याद?
उसे, हाँ आती होगी याद।
नहीं तो रूदूँगी मैं आज
सुनाऊँगी उसको फरियाद।
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।
कवयित्री माँ को क्या सुनाना चाहती है?
Answer: कवयित्री माँ को फरियाद सुनाना चाहती है।
In simple words: कवयित्री माँ से अपनी शिकायतें या प्रार्थनाएँ व्यक्त करना चाहती है।
🎯 Exam Tip: 'फरियाद' शब्द के अर्थ को समझते हुए, उत्तर में कवयित्री के मन की बात को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
Question ग-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ।
देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति।
आह ! वह मीठी-सी मुसकान
जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।
उसे भी आती होगी याद?
उसे, हाँ आती होगी याद।
नहीं तो रूदूँगी मैं आज
सुनाऊँगी उसको फरियाद।
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।
कहाँ से पुकार हो रही है?
Answer: मातृ-वेदी पर से पुकार हो रही है।
In simple words: मातृभूमि की वेदी पर से पुकार उठ रही है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न गद्यांश के अंतिम हिस्से में वर्णित 'मातृ-वेदी पर हुई पुकार' को सीधे संदर्भित करता है, इसलिए सटीक उत्तर दें।
Question ग-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ।
देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति।
आह ! वह मीठी-सी मुसकान
जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।
उसे भी आती होगी याद?
उसे, हाँ आती होगी याद।
नहीं तो रूदूँगी मैं आज
सुनाऊँगी उसको फरियाद।
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।
शब्दार्थ लिखिए -
स्फूर्ति, फरियाद
Answer: स्फूर्ति - उत्तेजना
फरियाद - याचना
In simple words: यहाँ स्फूर्ति का अर्थ उत्तेजना और फरियाद का अर्थ याचना है।
🎯 Exam Tip: शब्दार्थ के प्रश्नों में, दिए गए शब्द के समानार्थी या निकटतम अर्थ वाले शब्द का चयन करें।
Question घ-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।
सुनूँगी माता की आवाज़
रहूँगी मरने को तैयार
कभी भी उस वेदी पर देव,
न होने दूँगी अत्याचार।
न होने दूँगी अत्याचार
चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।
मातृ-मंदिर में हुई पुकार, चढ़ा दो मुझको हे भगवान।
'कलेजा माँ का, मैं संतान करेगी दोषों पर अभिमान।' - का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवयित्री कहती है कि माँ का हृदय उदार होता है वह अपने संतान के दोषों पर ध्यान नहीं देती। उसे अपने संतान पर गर्व
होता है।
In simple words: इस पंक्ति का अर्थ है कि एक माँ अपने बच्चों की गलतियों को नजरअंदाज कर देती है और उन पर हमेशा गर्व करती है।
🎯 Exam Tip: आशय स्पष्ट करते समय, पंक्ति के गहरे अर्थ और मातृत्व के भाव को समझना और व्यक्त करना महत्वपूर्ण है।
Question घ-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।
सुनूँगी माता की आवाज़
रहूँगी मरने को तैयार
कभी भी उस वेदी पर देव,
न होने दूँगी अत्याचार।
न होने दूँगी अत्याचार
चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।
मातृ-मंदिर में हुई पुकार, चढ़ा दो मुझको हे भगवान।
कवयित्री किसके लिए तैयार है?
Answer: कवयित्री मरने के लिए तैयार है।
In simple words: कवयित्री अपनी मातृभूमि के लिए किसी भी बलिदान को देने के लिए तत्पर है, यहाँ तक कि अपने जीवन का भी त्याग करने को तैयार है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर गद्यांश में 'रहूँगी मरने को तैयार' और 'चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान' जैसी पंक्तियों से स्पष्ट होता है, जो कवयित्री के समर्पण को दर्शाते हैं।
Question घ-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।
सुनूँगी माता की आवाज़
रहूँगी मरने को तैयार
कभी भी उस वेदी पर देव,
न होने दूँगी अत्याचार।
न होने दूँगी अत्याचार
चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।
मातृ-मंदिर में हुई पुकार, चढ़ा दो मुझको हे भगवान।
कवयित्री किस पथ पर बढ़ना चाहती है?
Answer: कवयित्री मातृभूमि की रक्षा में बलिदान के पथ पर बढ़ना चाहती है।
In simple words: कवयित्री मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर करने के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती है।
🎯 Exam Tip: 'बलिदान' शब्द और मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव इस उत्तर का मुख्य बिंदु है।
Question घ-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
कलेजा माँ का, मैं संतान
करेगी दोषों पर अभिमान।
मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
चढ़ा दो मुझको, हे भगवान।।
सुनूँगी माता की आवाज़
रहूँगी मरने को तैयार
कभी भी उस वेदी पर देव,
न होने दूँगी अत्याचार।
न होने दूँगी अत्याचार
चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।
मातृ-मंदिर में हुई पुकार, चढ़ा दो मुझको हे भगवान।
शब्दार्थ लिखिए -
अत्याचार, मातृ-मंदिर
Answer: अत्याचार - जुल्म
मातृ-मंदिर - माता की मंदिर जिस मंदिर में विराजमान है
In simple words: अत्याचार का अर्थ जुल्म है और मातृ-मंदिर उस पवित्र स्थान को कहते हैं जहाँ माता विराजमान होती हैं।
🎯 Exam Tip: इन शब्दार्थों को याद रखना गद्यांश के अर्थ को पूरी तरह से समझने में सहायक होगा।
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