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Question क-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह सोचता, "यहाँ इतने सालों से हूँ। अमीर लोग नौकरों पर विश्वास नहीं करते पर मुझपर यहाँ कभी किसी ने संदेह नहीं किया। यहाँ से जाऊँ तो शायद कोई ग्यारह-बारह दे दे, पर ऐसा आदर नहीं मिलेगा।”
उपर्युक्त वाक्य के वक्ता का परिचय दें।
Answer: उपर्युक्त वाक्य का वक्ता इंजीनियर बाबू जगतसिंह का नौकर रसीला है। वह सालों से इंजीनियर बाबू जगतसिंह के यहाँ नौकर है।
In simple words: रसीला वह व्यक्ति है जो ये वाक्य बोल रहा है, और वह कई सालों से इंजीनियर बाबू जगतसिंह के यहाँ नौकर के रूप में काम कर रहा है।
🎯 Exam Tip: वक्ता और श्रोता का सही परिचय देना पात्रों की समझ दर्शाता है, जो महत्वपूर्ण है।
Question क-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह सोचता, "यहाँ इतने सालों से हूँ। अमीर लोग नौकरों पर विश्वास नहीं करते पर मुझपर यहाँ कभी किसी ने संदेह नहीं किया। यहाँ से जाऊँ तो शायद कोई ग्यारह-बारह दे दे, पर ऐसा आदर नहीं मिलेगा।”
रसीला बार-बार किससे, कौन-सी और क्यों प्रार्थना करता था?
Answer: रसीला इंजीनियर बाबू जगतसिंह का नौकर था। वह सालों से इंजीनियर बाबू जगतसिंह के यहाँ नौकर था। उसे दस रूपए वेतन मिलता था। गाँव में उसके बूढ़े पिता, पत्नी, एक लड़की और दो लड़के थे। इन सबका भार उसी के कंधों पर था। इसी कारण वह बार-बार अपने मालिक इंजीनियर बाबू जगतसिंह से अपना वेतन बढ़ाने की प्रार्थना करता था।
In simple words: रसीला अपने मालिक इंजीनियर बाबू जगतसिंह से बार-बार अपना वेतन बढ़ाने की प्रार्थना करता था क्योंकि उसके परिवार में बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चे थे, और उसकी दस रूपए की तनख्वाह में परिवार का गुजारा मुश्किल था।
🎯 Exam Tip: प्रश्न के तीनों भागों (किससे, कौन-सी, क्यों) का उत्तर स्पष्टता से दें, जिससे पात्र की स्थिति और प्रेरणा समझ में आए।
Question क-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह सोचता, "यहाँ इतने सालों से हूँ। अमीर लोग नौकरों पर विश्वास नहीं करते पर मुझपर यहाँ कभी किसी ने संदेह नहीं किया। यहाँ से जाऊँ तो शायद कोई ग्यारह-बारह दे दे, पर ऐसा आदर नहीं मिलेगा।”
वेतन की बात पर इंजीनियर बाबू जगतसिंह का जवाब क्या होता था?
Answer: रसीला इंजीनियर बाबू जगतसिंह का नौकर था। वह सालों से इंजीनियर बाबू जगतसिंह के यहाँ नौकर था। उसे दस रूपए वेतन मिलता था। गाँव में उसके बूढ़े पिता, पत्नी, एक लड़की और दो लड़के थे। इन सबका भार उसी के कंधों पर था। इसी कारण वह बार-बार अपने मालिक इंजीनियर बाबू जगतसिंह से अपना वेतन बढ़ाने की माँग करता था। परंतु हर बार इंजीनियर साहब का यही जवाब होता था कि वे रसीला की तनख्वाह नहीं बढ़ाएँगे यदि उसे यहाँ से ज्यादा और कोई तनख्वाह देता है तो वह बेशक जा सकता है।
In simple words: इंजीनियर बाबू जगतसिंह वेतन बढ़ाने की रसीला की हर प्रार्थना को ठुकरा देते थे और कहते थे कि अगर उसे कहीं और बेहतर वेतन मिलता है तो वह वहाँ जा सकता है।
🎯 Exam Tip: मालिक के जवाब को सटीक शब्दों में लिखें, यह दर्शाता है कि आप पाठ के संवादों को समझ पाए हैं।
Question क-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
वह सोचता, "यहाँ इतने सालों से हूँ। अमीर लोग नौकरों पर विश्वास नहीं करते पर मुझपर यहाँ कभी किसी ने संदेह नहीं किया। यहाँ से जाऊँ तो शायद कोई ग्यारह-बारह दे दे, पर ऐसा आदर नहीं मिलेगा।”
तनख्वाह न बढ़ाने के बावजूद रसीला नौकरी क्यों नहीं छोड़ना चाहता था?
Answer: रसीला बार-बार अपने मालिक से तनख्वाह बढ़ाने की माँग करता था और हर बार उसकी माँग ठुकरा दी जाती थी परंतु इस सबके बावजूद रसीला यह नौकरी नहीं छोड़ना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि अमीर लोग किसी पर विश्वास नहीं करते हैं। यहाँ पर रसीला सालों से नौकरी कर रहा था और कभी किसी ने उस पर संदेह नहीं किया था। दूसरी जगह भले उसे यहाँ से ज्यादा तनख्वाह मिले पर इस घर जैसा आदर नहीं मिलेगा।
In simple words: रसीला जानता था कि अमीर लोग नौकरों पर आसानी से भरोसा नहीं करते। उसे इस घर में सालों से सम्मान और विश्वास मिला था, जो उसे कहीं और बेहतर तनख्वाह के साथ भी शायद नहीं मिलता, इसलिए वह नौकरी नहीं छोड़ना चाहता था।
🎯 Exam Tip: पात्र की मानसिक स्थिति और कारणों को स्पष्ट करें, जिससे उसकी वफादारी और निर्णय के पीछे की भावना उजागर हो।
Question ख-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
पहले तो रसीला छिपाता रहा। फिर रमजान ने कहा, "कोई बात नहीं है, तो खाओ सौगंध।”
उपर्युक्त वाक्य के वक्ता तथा श्रोता का परिचय दें।
Answer: उपर्युक्त वाक्य का वक्ता ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन का चौकीदार मियाँ रमजान हैं और श्रोता उनके पड़ोसी इंजीनियर बाबू जगतसिंह का नौकर रसीला है। दोनों बड़े ही अच्छे मित्र थे।
In simple words: मियाँ रमजान, जो ज़िला मजिस्ट्रेट के चौकीदार हैं, इस वाक्य के वक्ता हैं, और रसीला, जो इंजीनियर जगतसिंह का नौकर है और उनका पड़ोसी भी है, इस वाक्य का श्रोता है। वे दोनों गहरे दोस्त थे।
🎯 Exam Tip: वक्ता और श्रोता के पद और संबंध दोनों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question ख-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
पहले तो रसीला छिपाता रहा। फिर रमजान ने कहा, "कोई बात नहीं है, तो खाओ सौगंध।”
वक्ता श्रोता को सौगंध खाने के लिए क्यों कहता है?
Answer: एक दिन रमजान ने रसीला को बहुत ही उदास देखा। रमजान ने अपने मित्र रसीला की उदासी का कारण जानना चाहा परंतु रसीला उससे छिपाता रहा तब रमजान ने उसकी उदासी का कारण जानने के लिए उसे सौगंध खाने के लिए कहा।
In simple words: रमजान ने अपने दोस्त रसीला को उदास देखा और जब रसीला अपनी परेशानी छिपाने लगा, तो रमजान ने उससे सच बताने के लिए सौगंध खाने को कहा।
🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाने वाले इस संवाद का संदर्भ और कारण स्पष्ट करें।
Question ख-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
पहले तो रसीला छिपाता रहा। फिर रमजान ने कहा, "कोई बात नहीं है, तो खाओ सौगंध।”
श्रोता की उदासी का कारण क्या था?
Answer: श्रोता रसीला का परिवार गाँव में रहता था। उसके परिवार में बूढ़े पिता, पत्नी और तीन बच्चे थे। इन सबका भार उसी के कंधों पर था और रसीला को मासिक तनख्वाह मात्र दस रुपए मिलती थी पूरे पैसे भेजने के बाद भी घर का गुजारा नहीं हो पाता था उसपर गाँव से ख़त आया था कि बच्चे बीमार है पैसे भेजो। रसीला के पास गाँव भेजने के लिए पैसे नहीं थे और यही उसकी उदासी का कारण था।
In simple words: रसीला उदास था क्योंकि उसकी कम तनख्वाह में गाँव में रहने वाले उसके बूढ़े माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों का गुजारा नहीं हो पा रहा था। बच्चों की बीमारी की खबर आने पर उसके पास पैसे भेजने के लिए भी नहीं थे।
🎯 Exam Tip: पात्र की आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उसकी उदासी को विस्तृत रूप से समझाएं।
Question ख-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
पहले तो रसीला छिपाता रहा। फिर रमजान ने कहा, "कोई बात नहीं है, तो खाओ सौगंध।”
वक्ता ने श्रोता की परेशानी का क्या हल सुझाया?
Answer: वक्ता ने श्रोता की परेशानी का यह हल सुझाया कि वह सालों से अपने मालिक के यहाँ काम कर रहा है तो वह अपने मालिक से कुछ रुपए पेशगी के क्यों नहीं माँग लेता?
In simple words: रमजान ने रसीला को सलाह दी कि क्योंकि वह अपने मालिक के यहाँ लंबे समय से काम कर रहा है, तो वह उनसे अपनी परेशानी के लिए कुछ पैसे पेशगी (एडवांस) में क्यों नहीं माँग लेता।
🎯 Exam Tip: प्रस्तुत समाधान की व्यवहारिकता और पाठ में इसके महत्व को दर्शाएं।
Question ग-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
भैया गुनाह का फल मिलेगा या नहीं, यह तो भगवान जाने, पर ऐसी कमाई से कोठियों में रहते हैं, और एक हम हैं कि परिश्रम करने पर भी हाथ में कुछ नहीं रहता।”
यहाँ पर किस गुनाह की बात की जा रही है?
Answer: यहाँ पर रमजान और रसीला अपने-अपने मालिकों के रिश्वत लेने वाले गुनाह की बात कर रहे हैं। रसीला ने जब रमजान को बताया कि उसके मालिक जगत सिंह ने पाँच सौ रूपए की रिश्वत ली है। तो इ इस पर रमजान ने कहा यह तो कुछ भी नहीं उसके मालिक शेख साहब तो जगत सिंह के भी गुरु हैं, उन्होंने भी आज ही एक शिकार फाँसा है हजार में कम में शेख साहब नहीं मानेंगे। इस प्रकार यहाँ पर मालिकों के रिश्वत के गुनाह की चर्चा की जा रही है।
In simple words: इस संवाद में, रमजान और रसीला अपने मालिकों द्वारा रिश्वत लेने के "गुनाह" की बात कर रहे हैं, विशेषकर जब रसीला बताता है कि उसके मालिक ने पाँच सौ रूपए की रिश्वत ली थी, और रमजान अपने मालिक शेख साहब के और भी बड़े रिश्वतखोर होने का जिक्र करता है।
🎯 Exam Tip: गुनाह के प्रकार को स्पष्ट करें और उसे पाठ के प्रसंग से जोड़कर बताएं, जिससे विषयवस्तु की गहराई समझ में आए।
Question ग-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
भैया गुनाह का फल मिलेगा या नहीं, यह तो भगवान जाने, पर ऐसी कमाई से कोठियों में रहते हैं, और एक हम हैं कि परिश्रम करने पर भी हाथ में कुछ नहीं रहता।”
उपर्युक्त कथन रमजान ने रसीला से क्यों कहा?
Answer: रमजान और रसीला दोनों ही नौकर थे। दिन रात परिश्रम करने के बाद भी बड़ी मुश्किल से उनका गुजारा होता था। रसीला के मालिक तो बार-बार प्रार्थना करने के बाद भी उसका वेतन बढ़ाने के लिए तैयार नहीं थे। दोनों यह बात भी जानते थे कि उनके मालिक रिश्वत से बहुत पैसा कमाते हैं। इसी बात की चर्चा करते समय रमजान ने उपर्युक्त कथन कहे।
In simple words: रमजान ने यह बात रसीला से इसलिए कही क्योंकि दोनों नौकर थे और कड़ी मेहनत के बावजूद उनका गुजारा मुश्किल था, जबकि उनके मालिक रिश्वतखोरी से बहुत पैसा कमाकर ऐशो-आराम से रहते थे।
🎯 Exam Tip: कथन के पीछे की सामाजिक-आर्थिक असमानता और पात्रों की भावना को रेखांकित करें।
Question ग-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
भैया गुनाह का फल मिलेगा या नहीं, यह तो भगवान जाने, पर ऐसी कमाई से कोठियों में रहते हैं, और एक हम हैं कि परिश्रम करने पर भी हाथ में कुछ नहीं रहता।”
ऐसी कमाई से क्या तात्पर्य है?
Answer: प्रस्तुत पाठ में ऐसी कमाई से तात्पर्य रिश्वत से है। यहाँ पर स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार सफेदपोश लोग ही इस कार्य में लिप्त रहते हैं। अच्छा ख़ासा वेतन मिलने के बाद भी इनकी लालच की भूख मिटती नहीं है और रिश्वत को कमाई का एक और जिया बना लेते हैं। इसके विपरीत परिश्रम करने वाला दाल-रोटी का जुगाड़ भी नहीं कर पाता और सदैव कष्ट में ही रहता है।
In simple words: "ऐसी कमाई" का तात्पर्य रिश्वतखोरी से है, जिसके माध्यम से प्रभावशाली लोग अनुचित तरीके से धन कमाते हैं और समृद्ध जीवन जीते हैं, जबकि ईमानदार और परिश्रमी लोग गरीबी और कठिनाई में रहते हैं।
🎯 Exam Tip: वाक्यांश का अर्थ पाठ के नैतिक संदेश के साथ स्पष्ट करें, जिससे रिश्वतखोरी के नकारात्मक प्रभाव उजागर हों।
Question ग-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
भैया गुनाह का फल मिलेगा या नहीं, यह तो भगवान जाने, पर ऐसी कमाई से कोठियों में रहते हैं, और एक हम हैं कि परिश्रम करने पर भी हाथ में कुछ नहीं रहता।”
रमजान की उपर्युक्त बात सुनकर रसीला के मन में क्या विचार आया?
Answer: रमजान की उपर्युक्त बात सुनकर यह आया कि सालों से वह इंजीनियर जगत बाबू के यहाँ काम कर रहा है इस बीच इस घर में उसके हाथ के नीचे से सैकड़ों रूपए निकल गए पर कभी उसका धर्म और नियत नहीं बिगड़ी। एक-एक आना भी उड़ाता तो काफी रकम जुड़ जाती।
In simple words: रमजान की बात सुनकर रसीला ने सोचा कि वह सालों से अपने मालिक के यहाँ ईमानदारी से काम कर रहा है, जबकि उसके हाथ से सैकड़ों रूपए निकालने का मौका था, लेकिन उसने कभी बेईमानी नहीं की और अपना धर्म नहीं बिगाड़ा।
🎯 Exam Tip: रसीला के विचारों को उसकी ईमानदारी और नैतिकता के संदर्भ में बताएं, जिससे पात्र का चारित्रिक गुण स्पष्ट हो।
Question घ-i. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
"यह इंसाफ नहीं अँधेर है। सिर्फ़ एक अठन्नी की ही तो बात थी!”
रसीला का मुकदमा किसके सामने पेश हुआ?
Answer: रसीला का मुकदमा इंजीनियर जगत सिंह के पड़ोसी शेख सलीमुद्दीन ज़िला मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश हुआ।
In simple words: रसीला का मुकदमा ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन की अदालत में चला, जो संयोगवश उसके मालिक इंजीनियर जगत सिंह के पड़ोसी थे।
🎯 Exam Tip: अदालत और न्यायाधीश का सही नाम बताएं, यह कहानी के न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी के लिए महत्वपूर्ण है।
Question घ-ii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
"यह इंसाफ नहीं अँधेर है। सिर्फ़ एक अठन्नी की ही तो बात थी!”
रसीला पर किस आरोप पर किसने मुकदमा दायर किया था?
Answer: रसीला वर्षों से इंजीनियर जगत सिंह का नौकर था। उसने कभी कोई बेईमानी नहीं की थी। परंतु इस बार भूलवश अपना अठन्नी का कर्ज चुकाने के लिए उसने अपने मालिक के लिए पाँच रूपए की जगह साढ़े चार रुपए की मिठाई खरीदी और बची अठन्नी रमजान को देकर अपना कर्ज चुका दिया और इसी आरोप में रसीला के ऊपर इंजीनियर जगत सिंह ने मुकदमा दायर कर दिया था।
In simple words: रसीला पर उसके मालिक इंजीनियर जगत सिंह ने मुकदमा दायर किया था, क्योंकि उसने अपने मालिक के लिए पाँच रूपए की मिठाई की जगह साढ़े चार रुपए की मिठाई खरीदी और बची अठन्नी अपने दोस्त रमजान का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल कर ली थी।
🎯 Exam Tip: आरोप की सटीक प्रकृति और मुकदमा दायर करने वाले व्यक्ति का नाम स्पष्ट करें।
Question घ-iii. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
"यह इंसाफ नहीं अँधेर है। सिर्फ़ एक अठन्नी की ही तो बात थी!”
रसीला को अपने किस अपराध के लिए कितनी सजा हुई?
Answer: रसीला ने अपने मालिक के लिए पाँच रुपए के बदले साढ़े चार रूपए की मिठाई खरीदी और बची अठन्नी से अपना कर्ज चुका दिया। यही मामूली अपराध रसीला से हो गया था। इसलिए रसीला को केवल अठन्नी की चोरी करने के अपराध में छह महीने के कारावास की सजा हुई।
In simple words: रसीला को सिर्फ एक अठन्नी की हेराफेरी के अपराध के लिए छह महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी, जो उसने अपने मालिक के पैसों से की थी।
🎯 Exam Tip: अपराध की गंभीरता और मिली हुई सजा को संख्यात्मक रूप से स्पष्ट करें।
Question घ-iv. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
"यह इंसाफ नहीं अँधेर है। सिर्फ़ एक अठन्नी की ही तो बात थी!”
उपर्युक्त उक्ति का क्या कारण था स्पष्ट कीजिए।
Answer: रमजान ज़िला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन का चौकीदार था और वह रसीला का बहुत ही अच्छा मित्र था। जब ज़िला मजिस्ट्रेट अठन्नी के मामूली अपराध के लिए उसे छह महीने की सजा सुनाते हैं तो रमजान का क्रोध उबल पड़ता है क्योंकि वह जानता था कि फैसला करने वाले शेख साहब और आरोप लगाने वाले जगत बाबू दोनों स्वयं बहुत बड़े रिश्वतखोर अपराधी हैं लेकिन उनका अपराध दबा होने के कारण वे सभ्य कहलाते हैं और एक गरीब को मामूली अपराध के लिए इतनी बड़ी सजा दी जाती है इसी करण रामजान के मुँह से उपर्युक्त उक्ति निकलती है।
In simple words: रमजान ने यह उक्ति इसलिए कही क्योंकि उसे ज़िला मजिस्ट्रेट का फैसला अन्यायपूर्ण लगा। वह जानता था कि मजिस्ट्रेट और इंजीनियर स्वयं बड़े रिश्वतखोर थे, लेकिन एक गरीब रसीला को मामूली अठन्नी की चोरी के लिए छह महीने की कड़ी सजा दी गई थी, जबकि अमीरों के बड़े अपराध दब जाते थे।
🎯 Exam Tip: उक्ति के पीछे की गहरी सामाजिक टिप्पणी और न्यायिक व्यवस्था की विसंगति को स्पष्ट करें।
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