Official ICSE Solutions for Class 10 Hindi: Ekanki Sanchay Chapter 06 Deepdaan
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Chapter-wise Solutions for Hindi: Ekanki Sanchay Chapter 06 Deepdaan
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Question क-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 'तुम कभी रात में अकेले नहीं जाओगे। चारों तरफ़ जहरीले सर्प घूम रहे हैं। किसी समय भी तुम्हें डस सकते हैं।' वक्ता कौन है? उसका परिचय दीजिए।
Answer: वक्ता पन्ना धाय है। वह स्वर्गीय महाराणा साँगा की स्वामिभक्त सेविका है। वह कर्तव्यनिष्ठ तथा आदर्श भारतीय नारी है। वह हमेशा कुँवर की सुरक्षा का ध्यान रखती है।
In simple words: इस गद्यांश में वक्ता पन्ना धाय है, जो महाराणा साँगा की एक वफादार सेविका है और कुँवर की सुरक्षा के लिए बहुत चिंतित रहती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, वक्ता और श्रोता की पहचान तथा उनके संबंधों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होता है।
Question क-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 'तुम कभी रात में अकेले नहीं जाओगे। चारों तरफ़ जहरीले सर्प घूम रहे हैं। किसी समय भी तुम्हें डस सकते हैं।' श्रोता कौन है? उसका वक्ता से क्या संबंध है?
Answer: श्रोता स्वर्गीय महाराणा साँगा का सबसे छोटा पुत्र है। उसकी माँ की मृत्यु के पश्चात से पन्ना धाय जोकि महाराज की सेविका थी उसने उसे माँ की तरह पाला।
In simple words: इस गद्यांश में श्रोता महाराणा साँगा के सबसे छोटे पुत्र हैं, जिन्हें पन्ना धाय ने उनकी माँ के निधन के बाद पाला था, जिससे उनका संबंध माँ और पुत्र जैसा है।
🎯 Exam Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में, पात्रों की भूमिका और उनके आपसी रिश्तों को सही ढंग से समझना आवश्यक है।
Question क-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 'तुम कभी रात में अकेले नहीं जाओगे। चारों तरफ़ जहरीले सर्प घूम रहे हैं। किसी समय भी तुम्हें डस सकते हैं।' वक्ता के उपर्युक्त कथन कहने के पीछे क्या कारण था?
Answer: महाराणा साँगा की मृत्यु के बाद उनका पुत्र राज सिंहासन का उत्तराधिकारी था परंतु उनकी आयु मात्र 14 वर्ष होने के कारण महाराणा साँगा के भाई पृथ्वीराज के दासी पुत्र बनवीर को राज्य की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया। धीरे-धीरे वह राज्य हड़पने की योजना बनाने लगा। इस वजह से कुँवर उदय सिंह की जान को खतरा बढ़ जाने से पन्ना धाय ने उपर्युक्त कथन कहा।
In simple words: वक्ता (पन्ना धाय) ने यह कथन इसलिए कहा क्योंकि बनवीर, जो राज्य हड़पना चाहता था, कुँवर उदय सिंह की जान का दुश्मन बन गया था।
🎯 Exam Tip: कथन के पीछे के मूल कारण और पात्रों के उद्देश्यों को स्पष्ट करना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।
Question क-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 'तुम कभी रात में अकेले नहीं जाओगे। चारों तरफ़ जहरीले सर्प घूम रहे हैं। किसी समय भी तुम्हें डस सकते हैं।' वक्ता श्रोता की सुरक्षा के प्रति चिंतित क्यों रहती थी?
Answer: वक्ता पन्ना धाय एक देशभक्त राजपूतनी थी तथा अपने राजा के उत्तराधिकारी की रक्षा करना वह परम कर्तव्य समझती थी। महाराणा साँगा की मृत्यु के बाद उनका पुत्र राज सिंहासन का उत्तराधिकारी था परंतु उनकी आयु मात्र 14 वर्ष होने के कारण महाराणा साँगा के भाई पृथ्वीराज के दासी पुत्र बनवीर को राज्य की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया। धीरे-धीरे वह राज्य हड़पने की योजना बनाने लगा। इसलिए पन्ना धाय कुँवर उदय सिंह की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती थी।
In simple words: पन्ना धाय अपने राजा के उत्तराधिकारी (कुँवर उदय सिंह) की रक्षा को अपना परम कर्तव्य मानती थी, और बनवीर द्वारा राज्य हड़पने की योजना के कारण कुँवर की जान को खतरा था, जिससे वह चिंतित रहती थी।
🎯 Exam Tip: पात्रों के नैतिक मूल्यों और उनके कर्तव्यों को रेखांकित करना ऐसे वर्णनात्मक प्रश्नों के लिए उच्च अंक दिलाता है।
Question ख-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : पहाड़ बनने से क्या होगा? राजमहल पर बोझ बनकर रह जाओगी, बोझ ! और नदी बनो तो तुम्हारा बहता हुआ बोझ पत्थर भी अपने सिर पर धारण करेंगे, आनंद और मंगल तुम्हारे किनारे होंगे, जीवन का प्रवाह होगा, उमंगों की लहरें होंगी, जो उठने में गीत गाएँगी, गिरने में नाच नाचेंगी। यहाँ किसे पहाड़ कहा गया है? क्यों?
Answer: यहाँ धाय माँ पन्ना को पहाड़ कहा गया है क्योंकि उनमें ईमानदारी और देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है। जैसे एक पहाड़ अपने देश की सुरक्षा करता है वैसे ही पन्ना धाय भी अपने स्वर्गीय राजा के उत्तराधिकारी कुँवर उदय सिंह की रक्षा के लिए पहाड़ बनकर खड़ी है।
In simple words: गद्यांश में पन्ना धाय को पहाड़ कहा गया है, क्योंकि वह अपनी ईमानदारी और देशभक्ति के कारण कुँवर उदय सिंह की रक्षा में एक मजबूत और अटल दीवार की तरह खड़ी हैं।
🎯 Exam Tip: लाक्षणिक प्रयोगों को पहचानना और उनके प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question ख-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : पहाड़ बनने से क्या होगा? राजमहल पर बोझ बनकर रह जाओगी, बोझ ! और नदी बनो तो तुम्हारा बहता हुआ बोझ पत्थर भी अपने सिर पर धारण करेंगे, आनंद और मंगल तुम्हारे किनारे होंगे, जीवन का प्रवाह होगा, उमंगों की लहरें होंगी, जो उठने में गीत गाएँगी, गिरने में नाच नाचेंगी। उपर्युक्त कथन किसने किससे कहा? इसका अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: उपर्युक्त कथन रावल सरूप सिंह की पुत्री सोना ने धाय माँ पन्ना से कहा। इसका अर्थ यह है कि धाय माँ पन्ना बनवीर सिंह के साथ मिल जाए तथा अपने कर्तव्य कुँवर उदयसिंह की रक्षा से मुँह मोड़ ले।
In simple words: सोना ने यह बात पन्ना धाय से कही थी, जिसका अर्थ था कि पन्ना बनवीर का साथ दे और कुँवर उदय सिंह की रक्षा करने के अपने कर्तव्य से हट जाए।
🎯 Exam Tip: संवाद के वक्ता, श्रोता और उसके निहितार्थ को समझना गद्यांश के सार को पकड़ने में मदद करता है।
Question ख-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : पहाड़ बनने से क्या होगा? राजमहल पर बोझ बनकर रह जाओगी, बोझ! और नदी बनो तो तुम्हारा बहता हुआ बोझ पत्थर भी अपने सिर पर धारण करेंगे, आनंद और मंगल तुम्हारे किनारे होंगे, जीवन का प्रवाह होगा, उमंगों की लहरें होंगी, जो उठने में गीत गाएँगी, गिरने में नाच नाचेंगी। 'तुम्हारा बहता हुआ बोझ पत्थर भी अपने सिर पर धारण करेंगे' का क्या तात्पर्य है?
Answer: सोना पन्ना धाय को अपनी देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा छोड़कर बनवीर के साथ मिल जाने की सलाह दे रही है।
In simple words: इस पंक्ति का तात्पर्य है कि यदि पन्ना धाय बनवीर से मिल जाती है और अपने कर्तव्य से भटक जाती है, तो वह भी राजमहल के अन्य भारों की तरह एक और बोझ बन जाएगी जिसे बनवीर अपने स्वार्थ के लिए सहन कर लेगा।
🎯 Exam Tip: मुहावरों और प्रतीकात्मक वाक्यांशों का सही अर्थ समझना और उसे संदर्भ के साथ जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question ख-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : पहाड़ बनने से क्या होगा? राजमहल पर बोझ बनकर रह जाओगी, बोझ ! और नदी बनो तो तुम्हारा बहता हुआ बोझ पत्थर भी अपने सिर पर धारण करेंगे, आनंद और मंगल तुम्हारे किनारे होंगे, जीवन का प्रवाह होगा, उमंगों की लहरें होंगी, जो उठने में गीत गाएँगी, गिरने में नाच नाचेंगी। दीपदान उत्सव का आयोजन किसने और क्यों किया?
Answer: दीपदान उत्सव उत्सव का आयोजन महाराणा साँगा के भाई पृथ्वीराज के दासी पुत्र बनवीर ने किया जिसे राज्य की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया था। उसने सोचा प्रजाजन दीपदान उत्सव के नाचगाने में मग्न होगे तब कुँवर उदय सिंह को मारकर वह सत्ता हासिल कर सकता है।
In simple words: दीपदान उत्सव का आयोजन बनवीर ने किया था ताकि सभी लोग उत्सव में व्यस्त रहें और वह इस अवसर का लाभ उठाकर कुँवर उदय सिंह की हत्या कर सके और राज्य पर कब्जा कर ले।
🎯 Exam Tip: घटनाक्रमों के पीछे के उद्देश्यों को जानना और उन्हें स्पष्ट रूप से व्यक्त करना उत्तर को सटीक बनाता है।
Question ग-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : दूर हट दासी। यह नाटक बहुत देख चुका हूँ। उदयसिंह की हत्या ही तो मेरे राजसिंहासन की सीढ़ी होगी। उपयुक्त वाक्य का प्रसंग स्पष्ट करें।
Answer: उपर्युक्त वाक्य बनवीर धाय पन्ना से कहता है जब वह कुँवर को मारने जाता है और पन्ना उन्हें रोकने का प्रयास करती है। पन्ना उसे कहती है कि मैं कुँवर को लेकर संन्यासिनी बन जाऊँगी, तुम ताज रख लो कुँवर के प्राण बक्श दो।
In simple words: यह वाक्य तब बोला गया जब बनवीर कुँवर उदय सिंह को मारने आया और पन्ना धाय ने उसे रोकने का प्रयास करते हुए कुँवर के बदले खुद के संन्यासिनी बनने की पेशकश की।
🎯 Exam Tip: संवाद के प्रसंग को स्पष्ट करने के लिए घटना के पूर्व और पश्चात की स्थितियों का संक्षिप्त विवरण देना आवश्यक है।
Question ग-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : दूर हट दासी। यह नाटक बहुत देख चुका हूँ। उदयसिंह की हत्या ही तो मेरे राजसिंहासन की सीढ़ी होगी। पन्ना ने कुँवर को सुरक्षित स्थान पर किस तरह पहुँचाया?
Answer: पन्ना धाय को जैसे ही बनवीर के षडयंत्र का पता चला वैसे ही पन्ना ने सोये हुए कुँवर को कीरत के जूठे पत्तलों के टोकरे में सुलाकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया।
In simple words: पन्ना ने बनवीर के षडयंत्र का पता चलते ही कुँवर उदय सिंह को कीरत के जूठे पत्तलों के टोकरे में छिपाकर सुरक्षित जगह पहुँचाया।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण घटनाओं के विवरण को सटीक और संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करें।
Question ग-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : दूर हट दासी। यह नाटक बहुत देख चुका हूँ। उदयसिंह की हत्या ही तो मेरे राजसिंहासन की सीढ़ी होगी। पन्ना ने क्या बलिदान दिया?
Answer: पन्ना ने कुँवर को कीरत के जूठे पत्तलों के टोकरे में सुलाकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। उसके बाद कुँवर के स्थान पर अपने पुत्र चंदन को सुला दिया और उसका मुँह कपड़े से ढँक दिया। जब बलवीर कुँवर को मारने आया उसने चंदन को कुँवर समझकर मार डाला। इस प्रकार पन्ना ने देशधर्म के लिए अपनी ममता की बलि चढ़ा दी।
In simple words: पन्ना ने अपने पुत्र चंदन को कुँवर उदय सिंह के स्थान पर सुला दिया और बनवीर ने चंदन को ही कुँवर समझकर मार डाला। इस प्रकार पन्ना ने देशधर्म के लिए अपने पुत्र का बलिदान दिया।
🎯 Exam Tip: चरित्र के सर्वोच्च त्याग या बलिदान का वर्णन करते समय, घटनाओं के क्रम को तार्किक रूप से प्रस्तुत करें।
Question ग-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : दूर हट दासी। यह नाटक बहुत देख चुका हूँ। उदयसिंह की हत्या ही तो मेरे राजसिंहासन की सीढ़ी होगी। प्रस्तुत एकांकी का सार लिखिए।
Answer: महाराणा साँगा की मृत्यु के बाद उनका पुत्र राज सिंहासन का उत्तराधिकारी था परंतु उनकी आयु मात्र 14 वर्ष होने के कारण महाराणा साँगा के भाई पृथ्वीराज के दासी पुत्र बनवीर को राज्य की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया। धीरे-धीरे वह राज्य हड़पने की योजना बनाने लगा। पन्ना धाय स्वर्गीय महाराणा साँगा की स्वामिभक्त सेविका है। वह कर्तव्यनिष्ठ तथा आदर्श भारतीय नारी है। वह हमेशा कुँवर की सुरक्षा का ध्यान रखती है। सोना पन्ना धाय को अपनी देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा छोड़कर बनवीर के साथ मिल जाने की सलाह दे रही है। परंतु वह नहीं मानती। बनवीर ने दीपदान उत्सव का आयोजन किया। उसने सोचा प्रजाजन दीपदान उत्सव के नाचगाने में मग्न होगे तब कुँवर उदय सिंह को मारकर वह सत्ता हासिल कर सकता है। तभी किसी ने पन्ना को यह खबर दी और पन्ना ने कुँवर को कीरत के जूठे पत्तलों के टोकरे में सुलाकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। उसके बाद कुँवर के स्थान पर अपने पुत्र चंदन को सुला दिया और उसका मुँह कपड़े से ढँक दिया। जब बलवीर कुँवर को मारने आया उसने चंदन को कुँवर समझकर मार डाला। इस प्रकार पन्ना ने देशधर्म के लिए अपनी ममता की बलि चढ़ा दी।
In simple words: इस एकांकी में पन्ना धाय की अद्भुत देशभक्ति और त्याग को दिखाया गया है। बनवीर राज्य हड़पने के लिए कुँवर उदय सिंह को मारना चाहता था, लेकिन पन्ना ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर कुँवर के प्राण बचाए और अपने कर्तव्य का पालन किया।
🎯 Exam Tip: एकांकी का सार लिखते समय, मुख्य घटनाओं, प्रमुख पात्रों और उनके केंद्रीय संदेश को संक्षेप में प्रस्तुत करना चाहिए।
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