ICSE Class 10 Hindi Ekanki Sanchay Chapter 3 Matrubhumi Ka Maan Solutions

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 10 Hindi Ekanki Sanchay Chapter 03 Matrubhumi Ka Maan

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Question क-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : उनके पौरुष की परीक्षा का दिन आ पहुँचा है। महारावल बाप्पा का वंशज मैं लाखा प्रतिज्ञा करता हूँ कि जब तक बूँदी के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करूँगा, अन्न जल ग्रहण नहीं करूँगा। महाराणा लाखा ने प्रतिज्ञा क्यों ली?
Answer: मेवाड़ नरेश महाराणा लाखा ने सेनापति अभी सिंह से बूँदी के राव हेमू के पास यह संदेश भिजवाया कि बूँदी मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करे ताकि राजपूतों की असंगठित शक्ति को संगठित करके एक सूत्र में बाँधा जा सके, परंतु राव ने यह कहकर प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया कि बूँदी महाराणाओं का आदर तो करता है, पर स्वतंत्र रहना चाहता है। हम शक्ति नहीं प्रेम का अनुशासन करना चाहते हैं। यह सुन कर राणा लाख प्रतिज्ञा करते हैं।
In simple words: महाराणा लाखा ने प्रतिज्ञा इसलिए ली क्योंकि बूँदी के राव हेमू ने मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, और लाखा राजपूतों को संगठित करना चाहते थे। राव हेमू ने कहा कि बूँदी स्वतंत्र रहना चाहता है, जिससे लाखा को क्रोध आ गया।

🎯 Exam Tip: Students should focus on the historical context and the immediate cause of Maharana Lakha's vow.

 

Question क-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : उनके पौरुष की परीक्षा का दिन आ पहुँचा है। महारावल बाप्पा का वंशज मैं लाखा प्रतिज्ञा करता हूँ कि जब तक बूँदी के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करूँगा, अन्न जल ग्रहण नहीं करूँगा। किसका वंशज क्या प्रतिज्ञा करता है?
Answer: महारावल बाप्पा का वंशज महाराणा लाखा प्रतिज्ञा करते है कि 'जब तक बूँदी के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करूँगा, अन्न जल ग्रहण नहीं करूँगा।'
In simple words: महारावल बाप्पा के वंशज महाराणा लाखा यह प्रतिज्ञा करते हैं कि जब तक वे बूँदी के दुर्ग में सेना सहित प्रवेश नहीं करेंगे, तब तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करेंगे।

🎯 Exam Tip: Identify the specific character and their exact vow as stated in the passage.

 

Question क-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : उनके पौरुष की परीक्षा का दिन आ पहुँचा है। महारावल बाप्पा का वंशज मैं लाखा प्रतिज्ञा करता हूँ कि जब तक बूँदी के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करूँगा, अन्न जल ग्रहण नहीं करूँगा। किसके पौरुष की परीक्षा का दिन आ गया?
Answer: मेवाड़ के सैनिकों के लिये युद्ध-भूमि में वीरता दिखाने की परीक्षा का दिन आ गया।
In simple words: यह गद्यांश मेवाड़ के सैनिकों के लिए युद्ध के मैदान में अपनी बहादुरी और मर्दानगी साबित करने के अवसर की बात करता है।

🎯 Exam Tip: Understand the broader implication of the statement regarding "पौरुष की परीक्षा" (test of valor).

 

Question क-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : उनके पौरुष की परीक्षा का दिन आ पहुँचा है। महारावल बाप्पा का वंशज मैं लाखा प्रतिज्ञा करता हूँ कि जब तक बूँदी के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करूँगा, अन्न जल ग्रहण नहीं करूँगा। महाराणा लाखा जनसभा में क्यों नहीं जाना चाहते?
Answer: मेवाड़ के शासक महाराणा लाखा को नीमरा के युद्ध के मैदान में बूँदी के राव हेमू से पराजित होकर भागना पड़ा, इसलिए अपने को धिक्कारते हैं, और आत्मग्लानि अनुभव करने के कारण जनसभा में भी नहीं जाना चाहते।
In simple words: महाराणा लाखा नीमरा के युद्ध में बूँदी के राव हेमू से हार गए थे और उन्हें भागना पड़ा था, जिससे वे स्वयं को अपमानित महसूस करते थे और इस आत्मग्लानि के कारण जनसभा में नहीं जाना चाहते थे।

🎯 Exam Tip: Connect the Maharana's personal humiliation with his reluctance to face the public.

 

Question ख-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : इस मिट्टी के दुर्ग को मिट्टी में मिलाने से मेरी आत्मा को संतोष नहीं होगा, लेकिन अपमान की वेदना में जो विवेकहीन प्रतिज्ञा मैंने कर डाली थी, उससे तो छुटकारा मिल ही जाएगा। महाराणा ने किसके सुझाव पर बूँदी का नकली महल बनवाया?
Answer: महाराणा ने चारणी सुझाव पर बूँदी का नकली महल बनवाया।
In simple words: महाराणा ने अपनी विवेकहीन प्रतिज्ञा से मुक्ति पाने के लिए चारणी के सुझाव पर बूँदी का एक नकली किला बनवाया।

🎯 Exam Tip: Remember the role of the 'charini' (bard/poetess) in providing the solution to the Maharana's dilemma.

 

Question ख-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : इस मिट्टी के दुर्ग को मिट्टी में मिलाने से मेरी आत्मा को संतोष नहीं होगा, लेकिन अपमान की वेदना में जो विवेकहीन प्रतिज्ञा मैंने कर डाली थी, उससे तो छुटकारा मिल ही जाएगा। नकली दुर्ग क्यों बनवाया गया?
Answer: महाराणा लाखा ने गुस्से में यह प्रतिज्ञा की थी कि जब तक वे बूँदी के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करेंगे, अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगे। चारिणी ने उन्हें सलाह दी कि वे नकली दुर्ग का विध्वंस करके अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण कर ले। महाराणा ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया क्योंकि वे हाड़ाओं को उनकी उदण्डता का दंड देना चाहते थे तथा अपने व्रत का भी पालन करना चाहते थे।
In simple words: नकली दुर्ग इसलिए बनवाया गया ताकि महाराणा लाखा अपनी क्रोध में की गई प्रतिज्ञा पूरी कर सकें कि वे बूँदी के दुर्ग में प्रवेश किए बिना अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे, जिससे उनकी प्रतिज्ञा भी पूर्ण हो जाए और हाड़ाओं को सबक भी सिखाया जा सके।

🎯 Exam Tip: Explain the dual purpose of constructing the replica fort – fulfilling the vow and punishing the Hadas.

 

Question ख-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : इस मिट्टी के दुर्ग को मिट्टी में मिलाने से मेरी आत्मा को संतोष नहीं होगा, लेकिन अपमान की वेदना में जो विवेकहीन प्रतिज्ञा मैंने कर डाली थी, उससे तो छुटकारा मिल ही जाएगा। महाराणा की प्रतिज्ञा विवेकहीन क्यों थी?
Answer: महाराणा ने बिना सोचे समझे प्रतिज्ञा की थी इसलिए यह विवेकहीन थी।
In simple words: महाराणा की प्रतिज्ञा विवेकहीन थी क्योंकि उन्होंने क्रोध में आकर बिना भविष्य के परिणामों पर विचार किए, जल्दबाजी में यह शपथ ली थी।

🎯 Exam Tip: Focus on the spontaneous and ill-considered nature of the Maharana's vow as the reason for its "recklessness" or "lack of wisdom."

 

Question ख-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : इस मिट्टी के दुर्ग को मिट्टी में मिलाने से मेरी आत्मा को संतोष नहीं होगा, लेकिन अपमान की वेदना में जो विवेकहीन प्रतिज्ञा मैंने कर डाली थी, उससे तो छुटकारा मिल ही जाएगा। 'मातृभूमि का मान' एकांकी शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
Answer: प्रस्तुत एकांकी 'मातृभूमि का मान' शीर्षक सार्थक है क्योंकि यहाँ मातृभूमि के मान के लिए ही महाराणा लाखा, बूँदी के नरेश तथा वीर सिंह लड़ते है तथा वीरसिंह ने अपनी मातृभूमि बूँदी के नकली दुर्ग को बचाने के लिए अपने प्राण की आहुति दे दी।
In simple words: 'मातृभूमि का मान' शीर्षक पूरी तरह सार्थक है क्योंकि यह एकांकी दिखाता है कि कैसे महाराणा लाखा, बूँदी के नरेश और विशेष रूप से वीर सिंह जैसे पात्र अपनी मातृभूमि के सम्मान की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान करने को तैयार रहते हैं।

🎯 Exam Tip: Emphasize how the actions of various characters, especially वीर सिंह, uphold the honor of their homeland, justifying the title.

 

Question ग-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : वीरसिंह और जिस जन्मभूमि की धूल में खेलकर हम बड़े हुए हैं, उसका अपमान भी कैसे सहन किया जा सकता है? हम् महाराणा के नौकर हैं तो क्या हमने अपनी आत्मा भी उन्हें बेच दी है? जब कभी मेवाड़ की स्वतंत्रता पर आक्रमण हुआ है, हमारी तलवार ने उनके नमक का बदला दिया है। वीरसिंह की मातृभूमि कौन-सी थी और वह मेवाड़ में क्यों रहता था?
Answer: वीरसिंह की मातृभूमि बूँदी थी। वह मेवाड़ में इसलिए रहता था क्योंकि वह महाराणा लाखा की सेना नौकरी करता था।
In simple words: वीरसिंह की मातृभूमि बूँदी थी, और वह मेवाड़ में इसलिए रहता था क्योंकि वह महाराणा लाखा की सेना में एक सैनिक के रूप में कार्यरत था।

🎯 Exam Tip: Clearly state both parts of the question – Veer Singh's homeland and his reason for being in Mewar.

 

Question ग-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : वीरसिंह और जिस जन्मभूमि की धूल में खेलकर हम बड़े हुए हैं, उसका अपमान भी कैसे सहन किया जा सकता है? हम महाराणा के नौकर हैं तो क्या हमने अपनी आत्मा भी उन्हें बेच दी है? जब कभी मेवाड़ की स्वतंत्रता पर आक्रमण हुआ है, हमारी तलवार ने उनके नमक का बदला दिया है। वीरसिंह ने अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम किस तरह दिखाया?
Answer: वीरसिंह ने अपनी मातृभूमि बूँदी के नकली दुर्ग को बचाने के लिए अपने साथियों के साथ प्रतिज्ञा ली कि प्राणों के होते हुए हम इस नकली दुर्ग पर मेवाड़ की राज्य पताका को स्थापित न होने देंगे तथा दुर्ग की रक्षा के लिए अपने प्राण की आहुति दे दी।
In simple words: वीरसिंह ने बूँदी के नकली दुर्ग को मेवाड़ की पताका से बचाने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर अपने प्राणों का बलिदान कर मातृभूमि के प्रति अपना गहरा प्रेम दर्शाया।

🎯 Exam Tip: Highlight Veer Singh's ultimate sacrifice and his vow to protect even the replica fort as an act of profound patriotism.

 

Question ग-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : वीरसिंह और जिस जन्मभूमि की धूल में खेलकर हम बड़े हुए हैं, उसका अपमान भी कैसे सहन किया जा सकता है? हम महाराणा के नौकर हैं तो क्या हमने अपनी आत्मा भी उन्हें बेच दी है? जब कभी मेवाड़ की स्वतंत्रता पर आक्रमण हुआ है, हमारी तलवार ने उनके नमक का बदला दिया है। वीरसिंह के बलिदान ने राजपूतों को क्या सिखा दिया?
Answer: वीरसिंह के बलिदान ने राजपूतों को जन्मभूमि का मान करना सिखा दिया।
In simple words: वीरसिंह के बलिदान ने राजपूतों को यह सिखाया कि जन्मभूमि के सम्मान की रक्षा अपने प्राणों से भी बढ़कर होती है।

🎯 Exam Tip: Focus on the key lesson derived from Veer Singh's sacrifice – the paramount importance of honoring one's birthplace.

 

Question ग-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : वीरसिंह और जिस जन्मभूमि की धूल में खेलकर हम बड़े हुए हैं, उसका अपमान भी कैसे सहन किया जा सकता है? हम महाराणा के नौकर हैं तो क्या हमने अपनी आत्मा भी उन्हें बेच दी है? जब कभी मेवाड़ की स्वतंत्रता पर आक्रमण हुआ है, हमारी तलवार ने उनके नमक का बदला दिया है। 'मातृभूमि का मान' एकांकी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस एकांकी में यह दिखाया गया है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए क्या-क्या बलिदान नहीं करना पड़ता, यहाँ तक कि प्राणों का बलिदान भी करना पड़ता है। इस एकांकी में वीर सिंह के माध्यम से यह बताया गया है कि राजपूत किसी भी सूरत में अपनी मातृभूमि को किसी के अधीन नहीं देख सकते हैं इसलिए राजपूत अपनी मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं करते हैं। इस पूरी एकांकी में राजपूतों की मातृभूमि के प्रति ऐसी ही एकनिष्ठा को दर्शाया है।
In simple words: 'मातृभूमि का मान' एकांकी का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि मातृभूमि के सम्मान की रक्षा के लिए राजपूत किसी भी हद तक बलिदान देने को तैयार रहते हैं, यहाँ तक कि अपने जीवन का त्याग भी कर देते हैं, जो उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: Explain the central theme of the play – unwavering loyalty and ultimate sacrifice for the motherland's honor, exemplified by the Rajput code of conduct.

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