ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper 2026 with Solutions

Official ICSE Exam Papers for Class 10 Hindi

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Solved Previous Year Papers for Hindi

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ICSE Class 10 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions

 

SECTION - A (40 Marks)

Attempt all questions from this Section.

 

Question 1
Write a short composition in Hindi of approximately 250 words on any one of the following topics : -
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त हिन्दी लेख लिखिए : - [15 Marks]

(i) 'स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित भोजन, व्यायाम तथा खेलकूद बहुत आवश्यक होता है' इस विषय को आधार बनाते हुए एक लेख लिखिए।

Answer:
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है - यह एक अकाट्य सत्य है। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य अपने स्वास्थ्य के प्रति उदासीन होता जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न बीमारियाँ तेजी से फैल रही हैं। एक स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन जीने के लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और खेलकूद का हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

सबसे पहले, संतुलित भोजन हमारे शरीर का आधार है। हमारे शरीर को ऊर्जा, वृद्धि और रोगों से लड़ने की क्षमता के लिए कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिजों की आवश्यकता होती है। जंक फूड और तली-भुनी चीजें खाने से शरीर में बीमारियाँ घर करती हैं। इसके विपरीत, हरी सब्जियाँ, ताजे फल, दूध और अनाज खाने से शरीर को पोषण मिलता है।

दूसरा महत्वपूर्ण घटक व्यायाम है। नियमित रूप से सुबह की सैर, योगासन या जिम जाने से शरीर की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और रक्त संचार सुचारू रूप से चलता है। व्यायाम से मानसिक तनाव भी कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

अंत में, खेलकूद का शारीरिक और मानसिक विकास में विशेष योगदान है। मैदान पर खेलने से हमें अनुशासन, टीम भावना और हार-जीत को सहजता से स्वीकार करने की सीख मिलती है। पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद मनोरंजन का भी सबसे अच्छा साधन है।

संक्षेप में कहें तो, संतुलित आहार, व्यायाम और खेलकूद को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर ही हम एक निरोगी, प्रसन्न और सफल जीवन प्राप्त कर सकते हैं।

Teacher's Note:
a) निबंध में विषय से संबंधित सभी बिंदुओं (संतुलन भोजन, व्यायाम और खेलकूद) को संतुलित रूप से समाहित किया जाना चाहिए।
b) भाषा की शुद्धता, विराम चिह्नों का सही प्रयोग और शब्दों की सीमा का ध्यान रखना अति आवश्यक है।

 

(ii) पुस्तकालय (Library) का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है। आप अपने विद्यालय के पुस्तकालय में जाकर किस प्रकार की पुस्तकों को पढ़ना पसंद करते हैं। अपनी प्रिय पुस्तक का वर्णन करते हुए एक लेख लिखिए।

Answer:
पुस्तकालय को ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। विद्यालय का पुस्तकालय वह पवित्र स्थान है जहाँ शांति के साथ बैठकर विभिन्न विषयों की असीम जानकारियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। पुस्तकालय हमारे जीवन में अमूल्य योगदान देता है क्योंकि पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं।

जब भी मुझे विद्यालय के पुस्तकालय में जाने का अवसर मिलता है, तो मैं विज्ञान, इतिहास, और प्रेरणादायक जीवनियों (Biography) की पुस्तकों को पढ़ना विशेष रूप से पसंद करता हूँ। इसके साथ ही, बाल साहित्य और कहानियों की पुस्तकें भी मेरे आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

इन सभी पुस्तकों में से 'डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम' द्वारा लिखित आत्मकथा 'अग्नि की उड़ान' (Wings of Fire) मेरी सबसे प्रिय पुस्तक है। इस पुस्तक को पढ़ने से मुझे यह प्रेरणा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर कठिन परिश्रम करना चाहिए। कलाम साहब का साधारण जीवन और उच्च विचार हर युवा को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।

पुस्तकालय में बैठकर अध्ययन करने से न केवल हमारी शब्दावली और ज्ञान का दायरा बढ़ता है, बल्कि हमारी सोचने-समझने की शक्ति भी विकसित होती है। पुस्तकालय हमें एकांत में भी एक अद्भुत दुनिया की सैर करा देता है।

Teacher's Note:
a) छात्र को अपनी रुचि की पुस्तक का नाम और उससे मिलने वाली सीख का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए।
b) छात्र अक्सर पुस्तकालय के महत्व को तो लिखते हैं, लेकिन अपनी प्रिय पुस्तक का सजीव वर्णन करना भूल जाते हैं, जिससे अंक कट सकते हैं।

 

(iii) अच्छी संगति हमारे जीवन में अनेक बदलाव ला सकती है। हम अक्सर अपने मित्रों की बातों से प्रभावित होकर उनका अनुकरण (follow) करने लगते हैं। अच्छी संगति के लाभ बताते हुए एक सारपूर्ण लेख लिखिए।

Answer:
संगति का प्रभाव मनुष्य के जीवन पर सबसे गहरा पड़ता है। कहा भी गया है कि जैसी संगत, वैसी रंगत। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह अपने आसपास के वातावरण और मित्रों से बहुत जल्दी प्रभावित होता है। बुरी संगति इंसान को पतन के गर्त में धकेल देती है, जबकि अच्छी संगति उसे फर्श से अर्श तक पहुँचा सकती है।

अच्छे मित्र हमारे जीवन के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। वे हमें हमेशा सही और गलत का भेद समझाते हैं। अच्छी संगति के अनेक लाभ हैं। सबसे पहले, यह हमारे चरित्र का निर्माण करती है। अच्छे मित्रों के साथ रहने से हमारे अंदर अनुशासन, सत्यनिष्ठा, बड़ों का आदर और परोपकार जैसे सद्गुणों का विकास होता है।

दूसरा, अच्छी संगति हमें पढ़ाई और करियर के प्रति गंभीर बनाती है। जब हमारे मित्र परिश्रमी और सकारात्मक सोच वाले होते हैं, तो हम भी उनके साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं। असफलताओं के समय अच्छी संगति वाले मित्र हमारा हौसला बढ़ाते हैं और हमें कभी निराश नहीं होने देते।

कबीरदास जी ने भी कहा है - "संगत कीजै साधु की, हरे और की व्याधि।" अतः हमें मित्र बनाते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। अच्छी संगति ही हमारे भविष्य को उज्ज्वल और सुंदर बना सकती है।

Teacher's Note:
a) लेख में संगति के प्रभाव को तार्किक ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए तथा उचित उदाहरण या दोहे का प्रयोग करना प्रभावशीलता बढ़ाता है।
b) वाक्य विन्यास स्पष्ट होना चाहिए और पुनरावृत्ति से बचना चाहिए।

 

(iv) 'मैंने यह निर्णय लिया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी' इस वाक्य से अंत करते हुए अपने जीवन की कोई यादगार घटना या मौलिक कहानी लिखिए।

Answer:
यह बात पिछले वर्ष की गर्मियों की है जब हमारे विद्यालय की वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता होने वाली थी। मैं सौ मीटर दौड़ प्रतियोगिता के लिए कड़ा अभ्यास कर रहा था। मेरे शिक्षक और माता-पिता को मुझसे स्वर्ण पदक की पूरी उम्मीद थी।

प्रतियोगिता से दो दिन पहले मैंने अभ्यास करना यह सोचकर छोड़ दिया कि मैं तो पहले से ही तेज दौड़ता हूँ, मुझे अभ्यास की क्या आवश्यकता है। अति-आत्मविश्वास (Overconfidence) में मैंने आराम करना शुरू कर दिया।

प्रतियोगिता के दिन जब दौड़ शुरू हुई, तो मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई, लेकिन पर्याप्त अभ्यास न होने के कारण बीच रास्ते में ही मेरी साँस उखड़ने लगी और मैं तीसरे स्थान पर आया। मुझे स्वर्ण पदक के स्थान पर कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। जब मैंने अपने शिक्षक और माता-पिता के चेहरे पर निराशा देखी, तो मेरा हृदय गिल्ट से भर गया। मुझे समझ आ गया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और घमंड हमेशा पतन की ओर ले जाता है। मैंने अपनी आँखें पोंछीं और मन ही मन दृढ़ संकल्प लिया कि - "मैंने यह निर्णय लिया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।"

Teacher's Note:
a) कहानी या घटना मौलिक होनी चाहिए और निर्धारित वाक्य से ही उसका अंत होना आवश्यक है।
b) भावों की अभिव्यक्ति और कथा-क्रम का प्रवाह सराहनीय होना चाहिए।

 

(v) नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर कोई लेख, घटना अथवा कहानी लिखिए जिसका सीधा व स्पष्ट संबंध चित्र से होना चाहिए।

[Figure: A black and white image showing a young boy with torn clothes looking up towards the sky with folded hands, holding a broken vessel/pot in one hand, expressing a sense of prayer, helplessness, or hope.]

Answer:
चित्र में दिखाई दे रहा बालक कबीर है, जो एक अत्यंत निर्धन परिवार से ताल्लुक रखता है। इस भीषण सूखे और गरीबी के दिनों में उसके घर में पीने के पानी का संकट गहराया हुआ था। घर का एकमात्र पानी का मटका भी कल शाम गलती से टूट गया था, जिससे उसकी माँ बहुत दुखी हुई थी।

कबीर सुबह-सुबह उस टूटे हुए मटके के टुकड़ों को लेकर अपने घर के आँगन में खड़ा था। आसमान में चारों तरफ बादलों की लुकाछिपी चल रही थी, लेकिन बारिश की एक बूँद भी नहीं बरस रही थी। कबीर की आँखें आसमान की ओर उठी थीं और उसके हाथ अनजाने ही जुड़ गए थे। वह निर्दोष बालक मूक प्रार्थना कर रहा था - "हे भगवान! मेरी माँ की आँखों के आँसू पोंछ दे और इस सूखी धरती पर पानी बरसा दे, ताकि हमारे घर में भी खुशहाली आ सके।"

उसकी सच्ची पुकार और आँखों में छिपी उम्मीद मानो बादलों तक पहुँच गई। अचानक तेज हवा चली और आसमान में काले बादल घिर आए। कुछ ही पलों में मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। कबीर का चेहरा खुशी से खिल उठा। उसने आसमान की तरफ देखकर राहत की साँस ली और अपने टूटे हुए बर्तनों को पानी भरने के लिए रख दिया।

Teacher's Note:
a) चित्र आधारित रचना में चित्र के मुख्य भाव (बालक की मनोदशा, परिस्थिति और अभिव्यक्ति) का स्पष्ट चित्रण होना अनिवार्य है।
b) छात्र केवल चित्र का वर्णन न करें, बल्कि उससे जुड़ी एक जीवंत घटना या कहानी प्रस्तुत करें।

 

Question 2
Write a letter in Hindi of approximately 120 words on any one of the topics given below : -
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर हिन्दी में लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिए : - [7 Marks]

(i) आपके इलाके में एक सरकारी पार्क है लेकिन उसका उचित रखरखाव नहीं हो रहा है। वहाँ की स्थिति का वर्णन करते हुए तथा उसकी व्यवस्था ठीक करने के लिए नगर पालिका के मुख्य अधिकारी को पत्र लिखिए।

Answer:
परीक्षा भवन,
क-ख-ग नगर।
दिनांक : 15 मार्च 2026

सेवा में,
मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी,
नगर पालिका निगम,
क-ख-ग नगर।

विषय : इलाके के सरकारी पार्क के दयनीय रखरखाव और सुधार हेतु पत्र।

महोदय,
मैं आपका ध्यान हमारे आवासीय क्षेत्र (क-ख-ग नगर, ब्लॉक-ए) में स्थित एकमात्र सरकारी पार्क की दयनीय स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।

इस पार्क की स्थिति दिनोंदिन बदतर होती जा रही है। उचित देखभाल के अभाव में यहाँ चारों तरफ लंबी घास उग आई है, पेड़ों की कटाई-छँटाई नहीं हुई है और जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। पार्क में लगे झूले टूट चुके हैं जिससे बच्चों का खेलना असुरक्षित हो गया है। शाम के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिसके कारण महिलाओं और बुजुर्गों का पार्क में टहलना दूभर हो गया है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस पार्क की सफाई, मरम्मत और सुरक्षा का उचित प्रबंध जल्द से जल्द करवाने की कृपा करें ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।

धन्यवाद!

भवदीय,
क-ख-ग

Teacher's Note:
a) औपचारिक पत्र के प्रारूप (प्रेषक का पता, दिनांक, सेवा में, विषय, संबोधन, मुख्य भाग, धन्यवाद, भवदीय और हस्ताक्षर) का सही पालन किया जाना चाहिए।
b) भाषा औपचारिक, स्पष्ट और समस्या पर केंद्रित होनी चाहिए।

 

(ii) आप अपने परिवार के साथ कोई प्रदर्शनी (Exhibition) या मेला (fair) देखने गए। वहाँ किन-किन वस्तुओं ने आपको आकर्षित किया और आपने क्या मनोरंजन किया और क्या खरीदारी की? इन सभी बातों का वर्णन अपने मित्र को एक पत्र लिखकर कीजिए।

Answer:
परीक्षा भवन,
क-ख-ग नगर।

दिनांक : 15 मार्च 2026

प्रिय मित्र अमन,
मधुर स्मृतियाँ!

आशा है तुम भी अपने परिवार के साथ सकुशल होगे। यह पत्र मैं तुम्हें अपने शहर में लगे हस्तशिल्प मेले के अपने अद्भुत अनुभव को साझा करने के लिए लिख रहा हूँ।

गत रविवार को मैं अपने परिवार के साथ इस मेले को देखने गया था। मेले का भव्य प्रवेश द्वार और वहाँ की रंग-बिरंगी रोशनी ने मुझे सबसे अधिक आकर्षित किया। मेले के अंदर देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति और कला देखने को मिली। हमने वहाँ उड़ीसा के हस्तशिल्प और राजस्थानी लोकनृत्य का आनंद लिया।

मनोरंजन के लिए हमने कई रोमांचक झूलों का लुत्फ उठाया और एक जादुई शो भी देखा। खाने-पीने के स्टॉल्स पर हमने चाट और गोलगप्पों का स्वाद लिया। खरीदारी की बात करूँ तो मैंने तुम्हारे लिए एक सुंदर लकड़ी का शो-पीस और अपने लिए एक विज्ञान से जुड़ी रोचक पुस्तक खरीदी है।

काश तुम भी उस समय हमारे साथ होते! अगली बार जब तुम आओगे, हम दोनों मिलकर ऐसा ही मेला देखने चलेंगे। अंकल और आंटी को मेरा प्रणाम कहना।

तुम्हारा मित्र,
क-ख-ग

Teacher's Note:
a) अनौपचारिक पत्र में संबोधन (प्रिय मित्र), आपसी आत्मीयता और अंत में 'तुम्हारा मित्र' जैसे शब्दों का प्रयोग अनिवार्य है।
b) पत्र का कलेवर जीवंत और मित्रवत् होना चाहिए जिसमें मेले के सभी पहलुओं का जिक्र हो।

 

Question 3
Read the passage given below and answer in Hindi the questions that follow, using your own words as far as possible : -
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में दीजिए। उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए : -

रामू एक किसान था। वह अपने खेतों में दिन-रात कठोर परिश्रम करता था। इस बार उसकी मेहनत और ईश्वर की कृपा से उसके खेतों में इतना अनाज उगा कि उसकी वर्षों की गरीबी मिट गई।

बारिश के मौसम में उसकी फूस की छत से पानी बहकर घर में टपकता जिससे घर की मिट्टी की दीवारें भी नमी से गल जाती थीं और उसका घर गिर जाया करता था। इस बार हुए धन-लाभ से उसने अपने कच्चे घर की जगह एक नया और पक्का घर बनाने का निश्चय किया।

रामू ने घर बनाने के लिए सारा सामान मंगा लिया था। बस आँगन में खड़े नीम के पेड़ को काटना शेष रह गया था जिसके कारण घर की नींव खोदना मुश्किल हो रहा था। उसने पेड़ काटने के लिए कुल्हाड़ी लाने अपने बेटे को पड़ोस में भेजा और स्वयं थोड़ी देर आराम करने के लिए पेड़ की छाया में लेट गया। थकान के कारण लेते ही उसकी आँखें लग गईं और वह सपनों की दुनिया में पहुँच गया।

उसने देखा - उसके दादाजी एक नन्हा-सा पौधा लगा रहे हैं और उसके पिताजी पास खड़े उनकी सहायता कर रहे हैं। एक छोटा-सा बालक उन दोनों के साथ उत्साह और खुशी से घूम रहा है। यह छोटा बालक रामू ही था और वह उन दोनों के साथ उस पेड़ की बहुत देखभाल किया करता था। दिनोंदिन वह पेड़ बड़ा होता गया और उसके तने व टहनियों के आसपास खेलता हुआ रामू भी बड़ा होता गया।

दादाजी तो गुजर गए थे परंतु उस पेड़ की गोद में उसे दादाजी की गोद में होने का अहसास होता था। उसे लगा मानो वे दोनों उससे पूछ रहे हैं - "रामू, क्या तुम भूल गए यह पेड़ केवल पेड़ नहीं, हमारे घर का एक सदस्य है, इसने कितनी ही धूप और बरसातों में हमारी रक्षा की है। इसकी डालियों पर तुमने कई सावन झूले झूले हैं। इसकी प्राणवायु से हमारे घर के चारों ओर, दूर तक के दायरों में शुद्धता, शीतलता और स्वस्थता विद्यमान रहती है। रोग हमारे घर के सदस्यों को छू भी नहीं पाता। इसकी दातून, निबोरियाँ और पत्तियाँ हमारे लिए कितनी उपयोगी हैं! प्रचंड गर्मियों की दोपहर में घर के सारे नीचे आकर ही चैन पाते हैं। पथिक इसकी छाया में विश्राम करते हैं और हम सभी को आशीर्वाद देकर जाते हैं। मोर, कोयल, तोते और भी न जाने कितने ही पक्षियों और जीवों के लिए यह पेड़ उनका आश्रय-स्थान है। अकाल के समय अपनी सूखी लकड़ियों को देकर इसने तुम्हारे पिता के बड़े भाई के समान घर चलाने में सहायता की थी। इसने कभी तुमसे कुछ नहीं माँगा। हम सभी इसके कृतज्ञ हैं। आज तुम इसे काटकर सैकड़ों पशु-पक्षियों और जीवों का गृह-हीन करना चाहते हो क्या? इसकी हत्या करने के इसे काटने के पाप को करने के बाद तुम अपने नए घर में शांति से जी पागे?"

रामू की आँखों से आँसू निकल पड़े तभी उसके बेटे की आवाज़ आई - "बाबा लो, मैं कुल्हाड़ी ले आया।" रामू की आँखें मानो खुल गई थीं। अपनी अश्रुपूरित आँखों से वह पेड़ के तने से लिपटकर क्षमा-याचना करने लगा।

अपनी कोमल शाखाओं से नीम ने उसे अपने गले लगाकर माफ कर दिया। रामू ने नीम के पेड़ से एक हाथ की दूरी पर अपने नए मकान की नींव खोदकर अपना नया घर बनाया। नीम की शीतल छाया उसके घर पर सदैव एक बुजुर्ग के आशीर्वाद के समान बनी रही।

 

(i) रामू कौन था? यह वर्ष उसके लिए लाभकारी कैसे रहा? [2 Marks]

Answer:
रामू एक मेहनती किसान था जो अपने खेतों में दिन-रात कठोर परिश्रम करता था। यह वर्ष उसके लिए अत्यंत लाभकारी रहा क्योंकि इस बार उसकी कड़ी मेहनत और ईश्वर की कृपा से उसके खेतों में बंपर फसल (अनाज) उगी, जिससे उसकी वर्षों पुरानी गरीबी दूर हो गई और उसके पास नया पक्का घर बनाने के लिए पर्याप्त धन आ गया।

Teacher's Note:
a) उत्तर में रामू की पहचान और उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार का मुख्य कारण (अनाज की बंपर पैदावार) स्पष्ट होना चाहिए।
b) विद्यार्थी गद्यांश के शुरुआती वाक्यों से सटीक उत्तर छाँटकर लिखें।

 

(ii) प्रतिवर्ष वह किस समस्या से परेशान रहता था? उसके हल के लिए उसने क्या निश्चय किया? [2 Marks]

Answer:
रामू प्रतिवर्ष बारिश के मौसम में इस समस्या से परेशान रहता था कि उसकी फूस की कच्ची छत से पानी टपकता था, जिससे मिट्टी की दीवारें नमी पाकर गल जाती थीं और उसका घर गिर जाया करता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उसने इस बार हुए धन-लाभ से अपने पुराने कच्चे घर की जगह एक नया और पक्का घर बनाने का निश्चय किया था।

Teacher's Note:
a) गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद से समस्या (कच्चे घर का टपकना और गिरना) तथा उसके समाधान (पक्का घर बनाना) को लिखना है।
b) दोनों उप-प्रश्नों का उत्तर एक ही क्रम में देना उचित रहता है।

 

(iii) नीम का पेड़ कहाँ था? रामू उसे क्यों काटना चाहता था? [2 Marks]

Answer:
नीम का पेड़ रामू के घर के आँगन में खड़ा था। रामू उसे इसलिए काटना चाहता था क्योंकि उस पेड़ के वहाँ होने के कारण उसके नए पक्के घर की नींव (Foundation) खोदना मुश्किल हो रहा था।

Teacher's Note:
a) पेड़ की स्थिति (आँगन में) और उसे काटने का कारण (नींव खोदने में बाधा) दोनों का स्पष्ट उल्लेख होना आवश्यक है।
b) उत्तर संक्षिप्त और गद्यांश के संदर्भ के अनुकूल होना चाहिए।

 

(iv) रामू के आँखों में आँसू क्यों आ गए थे? समझाइए। [2 Marks]

Answer:
सपने में नीम के पेड़ के माध्यम से उसके दादाजी ने उसे याद दिलाया कि यह पेड़ उनके परिवार का एक सदस्य है जिसने धूप-बरसात में उनकी रक्षा की है, पक्षियों को आश्रय दिया है और कभी कुछ नहीं माँगा। उस पेड़ को काटने से होने वाले पाप और उसके प्रति अपनी कृतघ्नता का अहसास जब रामू को सपने में हुआ, तो उसकी आँखें खुल गईं और आत्मग्लानि तथा पश्चाताप के कारण उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े।

Teacher's Note:
a) सपने के प्रसंग और वृक्ष के प्रति उपजी भावना (पश्चाताप व आत्मग्लानि) को उत्तर का आधार बनाएँ।
b) केवल 'सपना आया' लिखने से पूरे अंक नहीं मिलेंगे, स्वप्न में हुए बोध का वर्णन आवश्यक है।

 

(v) प्रस्तुत गद्यांश से आपको क्या सीख मिली? वर्तमान समय में यह सीख कैसे उपयोगी है? [2 Marks]

Answer:
प्रस्तुत गद्यांश से यह सीख मिलती है कि पेड़-पौधे हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा और प्रकृति के सच्चे संरक्षक हैं, इन्हें काटना पाप है। वर्तमान समय में ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण की गंभीर समस्या को देखते हुए यह सीख अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यदि हम पेड़ों की रक्षा करेंगे तभी पर्यावरण संतुलित रहेगा और हमारा जीवन सुरक्षित रह पाएगा।

Teacher's Note:
a) नैतिकता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सीख को अपने शब्दों में लिखना है।
b) वर्तमान संदर्भ (प्रदूषण व पर्यावरण संतुलन) से जोड़कर उत्तर लिखने से परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

 

Question 4
Answer the following according to the instructions given below : -
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए : - [8 Marks]

 

(i) 'परलोक' शब्द का विलोम चुनकर लिखिए : [1 Mark]
(A) परमलॉक
(B) स्वर्गलोक
(C) इहलोक
(D) यमलोक

Answer: (C) इहलोक

'परलोक' का विलोम शब्द 'इहलोक' (या इस लोक) होता है।

Teacher's Note:
a) विलोम शब्द का अर्थ विपरीत होता है।
b) भ्रमित करने वाले विकल्पों जैसे 'स्वर्गलोक' से सावधान रहें।

 

(ii) 'वर्षा' के उचित पर्यायवाची शब्दों को चुनकर लिखिए : [1 Mark]
(A) वर्ष - चतुर्मास
(B) वृक्ष - वार्षिक
(C) पावस - बारिश
(D) वार्षिक - बरखा

Answer: (C) पावस - बारिश

'पावस' और 'बारिश' दोनों 'वर्षा' के सही पर्यायवाची शब्द युग्म हैं।

Teacher's Note:
a) पर्यायवाची शब्द समान अर्थ वाले होते हैं।
b) अन्य विकल्प वर्षा के सटीक पर्यायवाची युग्म नहीं हैं।

 

(iii) 'शिक्षक' शब्द की भाववाचक संज्ञा चुनकर लिखिए : [1 Mark]
(A) शिक्षिका
(B) शिक्षा
(C) शिक्षाप्रद
(D) शिक्षाविद्

Answer: (B) शिक्षा

'शिक्षक' जातिवाचक संज्ञा से बनने वाली भाववाचक संज्ञा 'शिक्षा' है।

Teacher's Note:
a) भाववाचक संज्ञा किसी गुण, दशा या भाव का बोध कराती है।
b) 'शिक्षिका' स्त्रीलिंग रूप है, भाववाचक संज्ञा नहीं।

 

(iv) 'नीति' शब्द का विशेषण चुनकर लिखिए : [1 Mark]
(A) नैतिकता
(B) नैतिक
(C) नितिक
(D) नवनीत

Answer: (B) नैतिक

'नीति' शब्द में 'इक' प्रत्यय जोड़ने पर विशेषण 'नैतिक' बनता है।

Teacher's Note:
a) विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है।
b) 'नैतिकता' भाववाचक संज्ञा है, जबकि 'नैतिक' विशेषण है।

 

(v) 'श्रेष्ठ' शब्द का शुद्ध रूप चुनकर लिखिए : [1 Mark]
(A) श्रेष्ट
(B) श्रेष्ठ
(C) श्रैष्ट
(D) श्रेषट

Answer: (B) श्रेष्ठ

'श्रेष्ठ' शब्द वर्तनी की दृष्टि से पूरी तरह शुद्ध है। (नोट: प्रश्नपत्र में विकल्प (A) और (B) समान छप गए हैं, लेकिन सही वर्तनी 'श्रेष्ठ' है)।

Teacher's Note:
a) वर्तनी शुद्धि के नियमों का अभ्यास आवश्यक है।
b) ठ और ट वर्णों के प्रयोग में अक्सर छात्र भ्रमित होते हैं।

 

(vi) 'आँखें फेर लेना' मुहावरे का सही अर्थ चुनकर लिखिए : [1 Mark]
(A) लज्जित होना
(B) आँखें झुकाना
(C) क्रोधित होना
(D) उपेक्षा करना

Answer: (D) उपेक्षा करना

'आँखें फेर लेना' मुहावरे का अर्थ सहायता न करना या उपेक्षा करना होता है।

Teacher's Note:
a) मुहावरों का सामान्य अर्थ न निकालकर उनका विशेष सांकेतिक अर्थ समझा जाता है।
b) संकट के समय अपनों द्वारा मुँह मोड़ लेना ही आँखें फेर लेना है।

 

(vii) निर्देशानुसार उचित वाक्य बनाइए :
सभी कलाकारों के प्रधान बहुत सुन्दर थे।
(रेखांकित शब्द के स्थान पर उचित शब्द का प्रयोग कीजिए) [1 Mark]

(A) परिधान
(B) पहचान
(C) पराधीन
(D) प्रियधन

Answer: (A) परिधान

'प्रधान' के स्थान पर 'परिधान' (वस्त्र/पोशाक) शब्द रखने पर वाक्य सार्थक बनेगा - "सभी कलाकारों के परिधान बहुत सुन्दर थे।"

Teacher's Note:
a) श्रुतिसम भिन्नार्थक या समान ध्वनि वाले शब्दों के अर्थ में अंतर समझना चाहिए।
b) वाक्य की व्याकरणिक और अर्थगत सार्थकता का ध्यान रखें।

 

(viii) परिवर्तन प्रकृति का वह नियम है जिसे टाला नहीं जा सकता।
(रेखांकित वाक्यांश हेतु एक शब्द का प्रयोग कीजिए) [1 Mark]

(A) परिवर्तन प्रकृति का अनिवार्य नियम है।
(B) परिवर्तन प्रकृति का अचल नियम है।
(C) परिवर्तन प्रकृति का अटल नियम है।
(D) परिवर्तन प्रकृति का अटूट नियम है।

Answer: (C) परिवर्तन प्रकृति का अटल नियम है।

जिसे टाला न जा सके, उसे 'अटल' कहा जाता है।

Teacher's Note:
a) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के सटीक प्रयोग का अभ्यास करें।
b) 'अटल' जिसका टलना असंभव हो।

 

SECTION - B (40 Marks)

Questions from only two textbooks are to be answered.
Attempt four questions from this section.
You must answer at least one question from each of the two books you have studied and any two other questions from the same books you have chosen.

 

साहित्य सागर - संक्षिप्त कहानियाँ
SAHITYA SAGAR - SHORT STORIES

 

Question 5
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

सेठ बड़े आश्चर्य में पड़े - महायज्ञ! और आज। वे समझे कि उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। विनम्र भाव से बोले, ''आप आज की कहती हैं, मैंने तो बरसों से कोई यज्ञ नहीं किया है। मेरी स्थिति ही ऐसी नहीं थी।''

महायज्ञ का पुरस्कार - यशपाल
Mahayagya Ka Puruskar - Yashpal

 

(i) सेठ जी कहाँ गए थे? उन दिनों कौन सी प्रथा प्रचलित थी? [2 Marks]

Answer:
सेठ जी अपनी पत्नी के कहने पर अपनी संपत्ति और धन का एक बड़ा हिस्सा दान करने के बाद गरीबी के दिनों में धन की तलाश में एक धनी सेठ के यहाँ नौकरी मांगने गए थे। उन दिनों यज्ञ के क्रय-विक्रय (खरीदने और बेचने) की अनूठी प्रथा प्रचलित थी, जिसके तहत लोग अपने द्वारा किए गए यज्ञ का पुण्य दूसरों को बेचकर धन प्राप्त करते थे।

Teacher's Note:
a) कहानी के आरंभिक प्रसंग के अनुसार सेठ जी की स्थिति और तत्कालीन लोक-मान्यता का उल्लेख करें।
b) यज्ञ बेचने की प्रथा इस कहानी का केंद्रीय कथ्य है।

 

(ii) किसके कथन को सुनकर सेठ को ऐसा लगा कि उनका मजाक उड़ाया जा रहा है और क्यों? [2 Marks]

Answer:
कंगाली और भुखमरी के दौर से गुजर रहे धनी सेठ को यह बात धनी सेठ की पत्नी (या वहाँ मौजूद लोगों) के उस कथन को सुनकर लगी जिसमें उन्होंने उनके द्वारा आज ही 'महायज्ञ' किए जाने की बात कही थी। सेठ को ऐसा इसलिए लगा क्योंकि वे इतने गरीब हो चुके थे कि बरसों से उन्होंने कोई यज्ञ नहीं किया था, अतः उन्हें लगा कि उनकी गरीबी का मजाक उड़ाया जा रहा है।

Teacher's Note:
a) सेठ की विपन्नता और धनी सेठानी के वचनों के बीच के विरोधाभास को स्पष्ट करें।
b) सेठ का आश्वर्यचकित होना स्वाभाविक था।

 

(iii) सेठानी ने सेठजी के किस कार्य को महायज्ञ कहा था तथा सेठ ने अपने कार्य को महायज्ञ क्यों नहीं माना? इस कार्य से सेठ जी के स्वभाव की कौन सी विशेषता स्पष्ट होती है? [3 Marks]

#Answer:
सेठानी ने उस कार्य को महायज्ञ कहा था जब अकाल के दिनों में अत्यंत भूखे और बेसहारा कुत्ते को सेठ जी ने अपनी आखिरी रोटी खिला दी थी और खुद भूखे सो गए थे। सेठ ने इसे महायज्ञ इसलिए नहीं माना क्योंकि उन्होंने वह कर्म किसी स्वार्थ, दिखावे या पुण्य कमाने के लिए नहीं, बल्कि एक जीव के प्रति करुणा और मानवता के नाते किया था। इस कार्य से सेठ जी के परोपकारी, दयालु, सच्चे और अहंकाररहित स्वभाव की विशेषता स्पष्ट होती है।

Teacher's Note:
a) सच्चे परोपकार की परिभाषा इस प्रसंग के माध्यम से समझाई गई है।
b) सेठ की विनम्रता और जीवों के प्रति करुणा उनके चरित्र की मुख्य विशेषता है।

 

(iv) 'महायज्ञ का पुरस्कार' कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? इस कहानी का कौन सा पात्र आपको अपने किन गुणों के कारण सबसे अच्छा लगा? [3 Marks]

Answer:
'महायज्ञ का पुरस्कार' कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि निष्काम भाव से किया गया परोपकार और जीव-सेवा ही सबसे बड़ा धर्म एवं महायज्ञ है। इसका फल ईश्वर समय आने पर अवश्य देता है। इस कहानी में मुझे सेठ जी की पत्नी का पात्र सबसे अच्छा लगा, जो विपत्ति के समय भी धैर्य नहीं खोती, नैतिक मूल्यों पर अडिग रहती है और अपने पति को स्वार्थी बनने से रोककर हमेशा परोपकार का मार्ग दिखाती है।

Teacher's Note:
a) कहानी का केंद्रीय संदेश निस्वार्थ सेवा और कर्म फल पर आधारित है।
b) पात्र का चयन करते समय उसके गुणों का तार्किक उल्लेख करना आवश्यक है।

 

Question 6
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

रामनिहाल फिर रुक गया। श्यामा ने फिर तीखी दृष्टि से उसकी ओर देखा। रामनिहाल कहने लगा, ''तुमको भी संदेह हो रहा है। सो ठीक ही है। मुझे भी कुछ संदेह हो रहा है, मनोरमा क्यों मुझे इस समय बुला रही है?''

संदेश - श्री जयशंकर प्रसाद
Sandeh - Shri Jaishankar Prashad

 

(i) रामनिहाल और श्यामा का संबंध स्पष्ट करते हुए बताइए कि रामनिहाल ये बातें श्यामा से क्यों कह रहा है? [2 Marks]

Answer:
रामनिहाल और श्यामा में बहुत घनिष्ठ और आत्मीय संबंध था; श्यामा उसकी एक विश्वसनीय हितैषी और शुभचिंतक थी जिसके यहाँ वह किराए पर रहता था। रामनिहाल श्यामा से ये बातें इसलिए कह रहा था क्योंकि मनोरमा का अचानक आधी रात के समय उसे बुलाने का बुलावा आया था, जिससे रामनिहाल और श्यामा दोनों के मन में अजीब सी शंका और संदेह उत्पन्न हो रहा था।

Teacher's Note:
a) दोनों के बीच के विश्वास और मित्रवत संबंधों का उल्लेख करें।
b) मनोरमा के संदेश से उपजे असमंजस की स्थिति को स्पष्ट करें।

 

(ii) 'तुमको भी संदेह हो रहा है' - यह कथन वक्ता के किस संदेह को प्रकट करता है? संदेह की यह स्थिति कब से उत्पन्न हुई थी? [2 Marks]

Answer:
यह कथन वक्ता (रामनिहाल) के इस संदेह को प्रकट करता है कि कहीं मनोरमा के इस प्रकार बार-बार बुलाने और उसके प्रति बढ़ते आकर्षण के पीछे कोई अनुचित बात या उनका आपसी संबंध किसी गलत दिशा में तो नहीं जा रहा है। संदेह की यह स्थिति तब से उत्पन्न हुई थी जब से मनोरमा ने अपने दुखों को साझा करते हुए रामनिहाल को अपना सब कुछ मान लिया था और वह उसके प्रति मानसिक रूप से उलझता जा रहा था।

Teacher's Note:
a) रामनिहाल की मानसिक दुविधा और कर्तव्य तथा भावनाओं के संघर्ष को समझें।
b) मनोरमा के बुлаве से उपजे संशय का संदर्भ दें।

 

(iii) मनोरमा का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताइए कि वह किस संकट से ग्रस्त थी? वह रामनिहाल से किस प्रकार की सहायता चाहती थी? [3 Marks]

Answer:
मनोरमा एक उच्च कुल की कुलीन, धनी किंतु अत्यंत अभागिन और दुखी महिला थी जिसके शराबी और चरित्रहीन पति ने उसकी उपेक्षा कर रखी थी। वह मानसिक प्रताड़ना और अकेलेपन के भारी संकट से ग्रस्त थी। वह रामनिहाल से किसी भौतिक या आर्थिक सहायता की नहीं, बल्कि अपने वीरान और सूने जीवन में एक सच्चे आत्मीय सहारे, नैतिक संबल और मानसिक सांत्वना की सहायता चाहती थी।

Teacher's Note:
a) मनोरमा के पारिवारिक जीवन की त्रासदी का संक्षिप्त परिचय दें।
b) उसकी अपेक्षा रामनिहाल से भावनात्मक समर्थन पाने की थी।

 

(iv) प्रस्तुत कहानी के अन्त में 'श्यामा' ने रामनिहाल को क्या सलाह दी थी? 'संदेश' कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है? समझाकर लिखिए। [3 Marks]

Answer:
कहानी के अंत में श्यामा ने रामनिहाल को यह दृढ़ सलाह दी कि वह मनोरमा के मोह-पाश और भ्रम से बाहर निकले, अपनी नौकरी छोड़कर अपने घर वापस लौट जाए और अपनी जिम्मेदारियों को निभाए। 'संदेश' कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को जीवन की वास्तविकता का सामना करना चाहिए, काल्पनिक मोह-माया और भ्रामक संदेहों में फंसकर अपने वास्तविक कर्तव्यों से विमुख नहीं होना चाहिए।

Teacher's Note:
a) श्यामा के व्यावहारिक दृष्टिकोण और कहानी के संदेश को स्पष्ट करें।
b) अत्यधिक संदेहास्पद स्थिति मानसिक पतन का कारण बनती है - यह मुख्य सीख है।

 

Question 7
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

सियार ने भेड़िए का हाथ चूम कर कहा, ''बड़े भोले हैं आप सरकार! अरे मालिक, रूप-रंग बदल देने से तो सुना है आदमी तक बदल जाते हैं। फिर यह तो सियार है।''
और तब, बूढ़े सियार ने भेड़िए का भी रूप बदला। मस्तक पर तिलक लगाया, गले में कंटी पहनाई और मुँह में घास के तिनके खोंस दिए। बोला, ''अब आप पूरे संत हो गए हैं।''

भेड़े और भेड़िए - हरिशंकर परसाई
Bhede Aur Bhediyan - Harishankar Parsai

 

(i) इस कहानी में भेड़िया किसका प्रतीक है? बूढ़े सियार ने भेड़िए का रूप क्यों बदला? [2 Marks]

Answer:
इस कहानी में भेड़िया समाज के क्रूर, हिंसक और छद्मवेषी राजनेताओं या शासक वर्ग का प्रतीक है जो सत्ता पाने के लिए जनता का शोषण करते हैं। बूढ़े सियार ने भेड़िए का रूप इसलिए बदला ताकि उसकी हिंसक और क्रूर प्रवृत्ति छिप जाए और वह भेड़ों की नजर में एक संत, अहिंसक और आदरणीय नेता के रूप में दिखाई दे सके।

Teacher's Note:
a) व्यंग्य प्रधान इस कहानी में प्रतीकों के अर्थ स्पष्ट होने चाहिए।
b) राजनीति में पाखंड और छद्मवेश धारण करने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष किया गया है।

 

(ii) सियार ने भेड़िए के मुँह में घास के तिनके क्यों खोंसे? ऐसा करके वह क्या सिद्ध करना चाहता था? [2 Marks]

Answer:
सियार ने भेड़िए के मुँह में घास के तिनके इसलिए खोंसे ताकि यह प्रतीक बने कि अब मांसाहारी और हिंसक भेड़िया शाकाहारी बन चुका है और वह हिंसा छोड़कर पूरी तरह सात्विक हो गया है। ऐसा करके वह भेड़ों को यह विश्वास दिलाना चाहता था कि अब वह भेड़िया उनका भक्षक नहीं बल्कि उनका रक्षक और संत है।

Teacher's Note:
a) राजनैतिक पाखंड और ढोंग का यह एक सटीक प्रतीकात्मक वर्णन है।
b) निरीह जनता को मूर्ख बनाने के हथकंडों को इसमें दर्शाया गया है।

 

(iii) सियार ने भेड़िए को किन बातों का ख्याल रखने को कहा? स्पष्ट कीजिए। [3 Marks]

Answer:
सियार ने भेड़िए को यह ख्याल रखने को कहा कि जब वह भेड़ों के सामने जाए तो अपनी हिंसक चाल-ढाल और गुर्राहट को छिपाकर रखे। उसे विनम्रता से बात करनी होगी, संतों जैसी मुद्रा बनानी होगी और यह दिखाना होगा कि वह उनका शुभचिंतक है। यदि उसने अपनी असली हिंसक प्रवृत्ति या दाँत दिखाए, तो भेड़ों का उस पर से विश्वास उठ जाएगा और उनका षड्यंत्र विफल हो जाएगा।

Teacher's Note:
a) पाखंडी नेता और उसके सलाहकार के बीच की रणनीति को स्पष्ट करें।
b) जनता को भ्रमित करने के लिए अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों का उल्लेख करें।

 

(iv) वन प्रदेश के चुनाव में भेड़ों ने अपना 'नेता' किसे चुना? उन्होंने 'भेड़ों के हित में पहला कौन सा कानून बनाया? क्या यह कानून भेड़ों के लिए हितकारी था? समझाइए। [3 Marks]

Answer:
वन प्रदेश के चुनाव में भेड़ों ने अपने ही छद्मवेषी शत्रु यानी उसी भेड़िए को अपना 'नेता' चुना जिसे सियार ने संत का रूप दिया था। उन्होंने भेड़ों के हित में पहला कानून यह बनाया कि वन में सभी पशु मिलजुलकर रहेंगे और कोई किसी को नहीं मारेगा, तथा कमजोर पशुओं की रक्षा के लिए भेड़िए को उनका संरक्षक नियुक्त किया गया। यह कानून भेड़ों के लिए बिल्कुल भी हितकारी नहीं था, बल्कि वह उनके सर्वनाश का मृत्यु-वारंट साबित हुआ, क्योंकि भेड़िए और सियार ने मिलकर धीरे-धीरे सभी भेड़ों को अपना शिकार बना लिया।

Teacher's Note:
a) भोली-भाली जनता के राजनैतिक शोषण और मूर्खता का व्यंग्यात्मक अंत प्रस्तुत किया गया है।
b) छद्म लोकतंत्र की विडंबना को उत्तर में भली-भाँति दर्शाना चाहिए।

 

साहित्य सागर - पद्य भाग
SAHITYA SAGAR - PADYA BHAG

 

Question 8
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी
ऊँचा खड़ा हिमालय, आकाश चूमता है,
नीचे चरण पले पड़, नित सिंधु झूमा है।
गंगा, यमुना, त्रिवेणी, नदियाँ लहर रही हैं।
जगमग छटा निराली, पग-पग पर छहर रही हैं।
वह पुण्यभूमि मेरी, वह स्वर्ण भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।

वह जन्मभूमि मेरी - सोहन लाल द्विवेदी
Wah Janmbhumi Meri - Sohan Lal Dwivedi

 

(i) प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने हिमालय की किन विशेषताओं का वर्णन किया है? [2 Marks]

Answer:
कवि सोहन लाल द्विवेदी ने हिमालय की यह विशेषता बताई है कि वह अत्यंत ऊँचा है और मानो आकाश को चूम रहा है। यह देश के प्रहरी के रूप में अडिग खड़ा है और भारत की महिमा तथा गौरव को सर्वोच्च शिखर पर प्रतिष्ठित करता है।

Teacher's Note:
a) हिमालय के गौरवशाली और ऊँचे स्वरूप का काव्यात्मक वर्णन करें।
b) यह देश की शान और सुरक्षा का प्रतीक है।

 

(ii) 'सिन्धु' शब्द का क्या अर्थ है? इसके संदर्भ में कवि ने क्या कहा है? [2 Marks]

Answer:
'सिन्धु' शब्द का अर्थ समुद्र (महासागर) है। इसके संदर्भ में कवि ने कहा है कि भारत माता के चरणों में निरंतर समुद्र अपनी लहरों से पखारकर उनका अभिषेक करता है और उनके चरणों को चूमता रहता है।

Teacher's Note:
a) सिन्धु का शाब्दिक अर्थ और भारत की भौगोलिक स्थिति का काव्यात्मक संदर्भ दें।
b) दक्षिण में समुद्र द्वारा भारत माता की वंदना का भाव निहित है।

 

(iii) 'त्रिवेणी' में किन-किन नदियों की धाराओं का संगम है? यह कहाँ स्थित है तथा इसके महत्व को लिखिए। [3 Marks]

Answer:
'त्रिवेणी' में पवित्र नदियों गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती की धाराओं का संगम है। यह भारत के ऐतिहासिक और धार्मिक नगर प्रयाग (इलाहाबाद) में स्थित है। इसका महत्व यह है कि यह हमारी भारतीय संस्कृति, पवित्रता, आस्था और मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख केंद्र है जहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु स्नान और पुण्य लाभ के लिए आते हैं।

Teacher's Note:
a) तीनों नदियों के नाम और संगम स्थल (प्रयाग) का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) भारतीय संस्कृति में त्रिवेणी के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाएँ।

 

(iv) कवि ने भारत को 'पुण्यभूमि' और 'स्वर्णभूमि' क्यों कहा है? जन्मभूमि को कवि ने कौन-कौन से नए विशेष नामों से पुकारा है? कुछ नामों का वर्णन कीजिए। [3 Marks]

Answer:
कवि ने भारत को 'पुण्यभूमि' इसलिए कहा है क्योंकि यह संतों, महर्षियों, त्यागियों और देवताओं की पावन भूमि है, और इसे 'स्वर्णभूमि' इसलिए कहा है क्योंकि यहाँ की धरती अन्न उपजाकर सोने जैसी बहुमूल्य और समृद्ध है। जन्मभूमि को कवि ने 'जन्मभूमि', 'मातृभूमि', 'पुण्यभूमि' और 'स्वर्णभूमि' जैसे गौरवशाली विशेष नामों से पुकारा है।

Teacher's Note:
a) भारत की महिमा और उपमाओं के पीछे के कारणों को स्पष्ट करें।
b) कविता में प्रयुक्त विशेषणों का सटीक वर्णन आवश्यक है।

 

Question 9
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

"राजा के दरबार में जैये समया पाय।
साईं तहाँ न बैठिए, जहाँ कोउ देय उठाय
जहाँ कोउ देय उठाय बोल अनबोले रहिए
हँसिये नहीं हहाय, बात पूछे ते कहिए।।
कह गिरधर कविराय समयसों कीजै काजा
अति आतुर नहिं होय, बहुरि अनखैहैं राजा
Giridhar ki "Kundaliya" - Giridhar Kavirai

 

(i) राजा के दरबार में जाने से पहले किस बात का ध्यान रखना चाहिए और क्यों? [2 Marks]

Answer:
राजा के दरबार में जाने से पहले इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वहाँ उचित समय पर ही प्रवेश किया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि बिना उचित अवसर या समय के जाने पर अपमानित होना पड़ सकता है और राजा का कोपभाजन बनना पड़ सकता है।

Teacher's Note:
a) समय के महत्व और राजदरबार के शिष्टाचार का उल्लेख करें।
b) बिना अवसर के जाने पर तिरस्कार मिलने की संभावना रहती है।

 

(ii) राजदरबार में बैठने और बोलने से पहले किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? [2 Marks]

Answer:
राजदरबार में बैठने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि अपनी मर्जी से किसी के स्थान पर न बैठें, अन्यथा बेइज्जती करके कोई उठा सकता है। बोलने के संबंध में यह ध्यान रखना चाहिए कि जब तक पूछा न जाए, चुपचाप (अनबोले) रहें, बिना बात के ऊँचे स्वर में न हँसें और केवल पूछे जाने पर ही नपे-तुले शब्दों में उत्तर दें।

Teacher's Note:
a) दरबारी शिष्टाचार और संयम बरतने की सीख दी गई है।
b) अत्यधिक चंचलता या बिना पूछे बोलना हानिकारक होता है।

 

(iii) 'अनखैहैं' शब्द का क्या अर्थ है? राजा कब और क्यों अनखैहैं हो जाते हैं? [3 Marks]

Answer:
'अनखैहैं' शब्द का अर्थ क्रोधित होना या नाराज होना है। राजा तब क्रोधित (अनखैहैं) हो जाते हैं जब कोई व्यक्ति दरबार में समय या मर्यादा का ध्यान रखे बिना अत्यधिक उतावलापन (अति आतुरता) दिखाता है, अनावश्यक बोलता है या बिना पूछे बीच में दखलंदाजी करता है।

Teacher's Note:
a) कठिन शब्द का अर्थ और राजा के क्रोध का कारण स्पष्ट करें।
b) अनुशासनहीनता राजा को नाराज करती है।

 

(iv) कवि गिरधर की कुण्डलियाँ हमें क्या सीख देती हैं? हमें कहाँ हँसना नहीं चाहिए? राजा के दरबार में कैसा आचरण करना चाहिए? [3 Marks]

Answer:
कवि गिरधर की कुण्डलियाँ हमें जीवन में समय की महत्ता, संयम, विवेक और उचित शिष्टाचार अपनाने की सीख देती हैं। हमें गंभीर सभाओं या राजदरबार में बिना बात के जोर-जोर से (हहाय कर) नहीं हँसना चाहिए। राजा के दरबार में अत्यंत अनुशासित, शांत, धैर्यवान और मर्यादित आचरण करना चाहिए तथा केवल तभी बोलना चाहिए जब राजा खुद कुछ पूछे।

Teacher's Note:
a) नीतिपरक उपदेशों को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
b) दरबारी जीवन और सामान्य शिष्टाचार के नियमों को रेखांकित करें।

 

Question 10
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

जसोदा हरि पालने झुलावै।
हलरावै दुलरावै मल्हारै जोइ सोइ कछु गावै।।
मेरे लाल को आउ निंदरिया काहे न आणि सुनावै।
तू काहे नहीं बेगहिं आवै, तोको कान्ह बुलावै।।
कबहुँ पलक मींदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।
सोवत जानि मौन है कै रहि, करि करि सैन बतावै।।
इहि अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै।
जो सुख सुर अमर मुनि दुर्लभ, सो नंद भामिनी पावै।।

सूर के पद - सूरदास
Sur ke Pad - Surdas

 

(i) श्रीकृष्ण को सुलाते हुए माता यशोदा क्या-क्या कर रही हैं? [2 Marks]

Answer:
श्रीकृष्ण को पालने में सुलाते हुए माता यशोदा उन्हें हल्के-ह हल्के झुला रही हैं, उन्हें दुलार रही हैं, तरह-तरह के सोहर और मल्हार गीत गा रही हैं और नींद की देवी (निंदरिया) को पुकार रही हैं कि वह जल्दी आकर उनके लाल को सुला दे।

Teacher's Note:
a) वात्सल्य रस से परिपूर्ण दृश्य का वर्णन करें।
b) यशोदा द्वारा की जा रही गतिविधियों (झुलाना, गाना, दुलारना) का जिक्र करें।

 

(ii) यशोदा माता नींद की देवी से क्या-कहती हैं और क्यों? [2 Marks]

Answer:
यशोदा माता नींद की देवी से कहती हैं कि वह तुरंत क्यों नहीं आ रही है? उसके कन्हैया उसे स्वयं बुला रहे हैं, इसलिए वह बिना देर किए आए और उनके लाल को अपनी सुंदरी गोद में सुला दे। वह ऐसा इसलिए कहती हैं ताकि उनकान्हा जल्दी से गहरी नींद में सो जाए।

Teacher's Note:
a) माता यशोदा का बाल-सुलभ बालमन और वात्सल्य भाव स्पष्ट करें।
b) नींद को बुलाने का अनूठा प्रसंग दिया गया है।

 

(iii) कृष्ण के सो जाने का अनुमान लगाकर यशोदा माता क्या करती हैं? यहाँ 'सैन' शब्द का क्या अर्थ है? [3 Marks]

Answer:
कृष्ण के पलकें मूँद लेने और अधर (होंठ) फरकाने पर जब यशोदा माता को लगता है कि कन्हैया सो गए हैं, तो वह एकदम चुप हो जाती हैं और पास खड़े लोगों को इशारों (सैन) से चुप रहने के लिए कहती हैं ताकि बालक की नींद न खुले। यहाँ 'सैन' शब्द का अर्थ 'इशारा' (सेंत/संकेत) है।

Teacher's Note:
a) माँ की सावधानी और ममता का सुंदर अंकन किया गया है।
b) 'सैन' शब्द के अर्थ (इशारा) को अवश्य स्पष्ट करें।

 

(iv) सूरदास के इष्टप्रभु का नाम बताइए? उनकी रचनाएँ किस भाषा में लिखी हैं? उनकी कोई दो पुस्तकों के नाम बताइए? [3 Marks]

Answer:
सूरदास के इष्टप्रभु श्री कृष्ण (गोपीनाथ) हैं। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में लिखी गई हैं। उनकी दो प्रसिद्ध पुस्तकों के नाम 'सूरसागर' और 'सूरसारावली' (या साहित्य लहरी) हैं।

Teacher's Note:
a) भक्त诗人 सूरदास का परिचय और उनकी भाषा (ब्रजभाषा) की जानकारी दें।
b) ग्रंथों के नाम स्पष्ट रूप से लिखें।

 

एकांकी संचय
EKANKI SANCHAY

 

Question 11
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

यों तो इस झंझट से छुटकारा पाने का सरल उपाय यही है कि तुम्हें बाग वाला मकान दे दिया जाए - वह पड़ा भी बेकार है और अभी मैं उससे किसी तरह की भी काम लेने का इरादा नहीं रखता, पर तुम तो जानते हो बेटा, मेरे जीते जी यह असंभव है।

सूखी डाली - उपेन्द्रनाथ 'अश्क'
Sukhi dali - Upendra Nath 'Ashka'

 

(i) प्रस्तुत कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं? [2 Marks]

Answer:
प्रस्तुत कथन के वक्ता दादा मूलराज हैं और श्रोता उनका बड़ा पोता बेला (या परिवार का कोई सदस्य/बेटा जो मकान के बँटवारे की बात कर रहा है) है।

Teacher's Note:
a) एकांकी के पात्रों और उनके आपसी रिश्तों को पहचानें।
b) मूलराज परिवार को टूटने से बचाने के लिए अपनी जिद पर अड़े हैं।

 

(ii) श्रोता को बागवाला मकान क्यों चाहिए और इसके लिए उसने क्या तर्क दिया? [2 Marks]

Answer:
श्रोता को बागवाला मकान इसलिए चाहिए था क्योंकि संयुक्त परिवार में आए दिन होने वाले क्लेश, स्वतंत्रता की कमी और बढ़ते तनाव से छुटकारा पाकर वह अपनी पत्नी के साथ अलग शांतिपूर्वक रह सके। इसके लिए उसने यह तर्क दिया कि वह मकान फिलहाल बेकार पड़ा है और उससे कोई काम नहीं लिया जा रहा है, अतः उसे अलग दे देने से घर का रोज-रोज का झगड़ा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

Teacher's Note:
a) संयुक्त परिवार में विघटन की मानसिकता को स्पष्ट करें।
b) मकान के बँटवारे की माँग के पीछे के कारणों को दर्शाएँ।

 

(iii) वक्ता ने इस समस्या के हल के लिए क्या किया? क्या वे समस्या के समाधान में सफल हुए? [3 Marks]

Answer:
वक्ता (दादा मूलराज) ने इस समस्या के हल के लिए परिवार को तोड़ने या अलग मकान देने के बजाय सबको एक साथ जोड़े रखने का निर्णय लिया और परिवार में आई नई बहू बेला के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार कर उसकी सूझबूझ से पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोए रखा। हाँ, वे अंततः इस समस्या के समाधान में पूर्णतः सफल रहे और परिवार टूटने से बच गया।

Teacher's Note:
a) दादा मूलराज के दृढ़ संकल्प और संयुक्त परिवार की महत्ता को समझाएँ।
b) अंत में परिवार का बिखराव टल जाता है।

 

(iv) 'परिवार का एक सिरा किसी समझदार व्यक्ति के हाथ में होने से परिवार में एकता बनी रहती है।' क्या आप इस कथन से सहमत हैं? एकांकी के संदर्भ में तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए। [3 Marks]

Answer:
हाँ, हम इस कथन से पूरी तरह सहमत हैं। 'सूखी डाली' एकांकी में दादा मूलराज परिवार के वही समझदार और मुखिया 'सिरे' हैं जिनके मजबूत हाथों में कमान होने के कारण ही बिखराव की कगार पर पहुँचा संयुक्त परिवार अंत तक एकजुट बना रहता है। यदि घर का मुखिया समझदार और दृढ़निश्चयी न हो, तो छोटी-छोटी बातों पर परिवार तिनके की तरह बिखर जाते हैं, जैसा कि इस एकांकी में दादाजी ने अपनी दूरदर्शिता से सिद्ध किया।

Teacher's Note:
a) संयुक्त परिवार की प्रासंगिकता और मुखिया के महत्व पर अपने विचार तर्कसंगत रूप से रखें।
b) एकांकी के केंद्रीय संदेश को उत्तर का आधार बनाएँ।

 

Question 12
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

"आत्म रक्षा का कोई और उपाय न देखकर महाबली दैत्य वन के सरोवर में घुस गए और उसके जल-स्तंभ में छिपकर बैठे रहे। पर न जाने कैसे पांडवों को इसकी सूचना मिल गई और वे तत्काल रथ पर चढ़कर वहाँ पहुँच गए।"

महाभारत की एक साँझ - भारत भूषण अग्रवाल
Mahabharat ki Ek saanjh - Bharat Bhushan Agrawal

 

(i) प्रस्तुत कथन के वक्ता एवं श्रोता का संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2 Marks]

Answer:
प्रस्तुत कथन के वक्ता संजय (या कथा प्रसंग के अनुसार युद्ध की स्थिति का वर्णन करने वाला पात्र) हैं, जो धृतराष्ट्र को महाभारत के युद्ध के अंतिम क्षणों का आँखों देखा हाल सुना रहे हैं। इसके श्रोता हस्तिनापुर के अंधे महाराज धृतराष्ट्र हैं जो युद्ध के परिणामों को लेकर चिंतित हैं।

Teacher's Note:
a) एकांकी के पात्रों (संजय और धृतराष्ट्र) के संवाद संदर्भ को स्पष्ट करें।
b) महाभारत के अंतिम दिन की परिस्थितियों का परिचय दें।

 

(ii) दुर्योधन स्वयं को दोषी क्यों नहीं मान रहा था तथा युधिष्ठिर को क्या कह रहा था? [2 Marks]

Answer:
दुर्योधन स्वयं को इसलिए दोषी नहीं मान रहा था क्योंकि उसका मानना था कि उसने अकेले युद्ध नहीं किया बल्कि कौरवों और पांडवों दोनों पक्षों द्वारा युद्ध के सभी नियमों का उल्लंघन किया गया है। वह युधिष्ठिर पर अधर्म और छल से अपने भाइयों तथा गुरुओं की हत्या करने का आरोप लगा रहा था।

Teacher's Note:
a) दुर्योधन की हताशा और आत्मरक्षा की मानसिकता को समझें।
b) युद्ध के अंत में उसके द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख करें।

 

(iii) पांडवों को सूचना किसके द्वारा प्राप्त हुई थी? पांडवों ने दुर्योधन को युद्ध के लिए कैसे ललकारा और क्या शर्त रखी? [3 Marks]

Answer:
पांडवों को सरोवर में दुर्योधन के छिपने की सूचना एक शिकारी या जासूस (या वन के ग्वालों) के माध्यम से प्राप्त हुई थी। पांडवों ने दुर्योधन को ललकारते हुए कहा कि छिपने से कायरता साबित होती है, यदि उनमें क्षत्रिय कुल का बल और साहस है तो वे बाहर आकर गदा युद्ध करें। उन्होंने यह शर्त रखी कि पांडवों में से कोई भी एक भाई (भीम) अकेले उनसे गदा युद्ध करेगा।

Teacher's Note:
a) दुर्योधन के सरोवर में छिपने के प्रसंग और पांडवों के ललकारने की घटना को लिखें।
b) गदा युद्ध की शर्त का स्पष्ट उल्लेख करें।

 

(iv) 'महाभारत की एक साँझ' शीर्षक के औचित्य पर प्रकाश डालिए। [3 Marks]

Answer:
'महाभारत की एक साँझ' एकांकी का शीर्षक पूर्णतः सार्थक औरौचित्यपूर्ण है। यह शीर्षक महाभारत युद्ध के ठीक उस अंतिम संध्या (साँझ) का सजीव चित्रण करता है जब कौरव सेना का सर्वनाश हो चुका है, दुर्योधन पराजित होकर सरोवर में छिपा है और हस्तिनापुर के भविष्य पर अंधकार छा गया है। यह एकांकी उसी एक निर्णायक शाम की विभीषिका और दुरवस्था को केंद्र में रखकर लिखी गई है।

Teacher's Note:
a) शीर्षक की सार्थकता और उसके पीछे के प्रतीकात्मक अर्थ को समझाएँ।
b) युद्ध की अंतिम संध्या की त्रासदी इस एकांकी का मुख्य आधार है।

 

Question 13
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

"मैं जानता था, तुम वहाँ नहीं जा सकोगे और जाने से भी क्या होता है। जब तुम उस नीची श्रेणी की विजातीय भाभी को घर नहीं ला सकता, तब तक प्रेम और ममता की दुहाई व्यर्थ है। तुम सब निर्मम हो निर्मम...!"

संस्कार और भावना - विष्णु प्रभाकर
Sanskar aur bhawana - Vishnu Prabhakar

 

(i) प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? 'तुम वहाँ नहीं जा सकोगे' ऐसा वक्ता ने श्रोता से क्यों कहा? [2 Marks]

Answer:
प्रस्तुत कथन की वक्ता प्रोमिला (या अमोल की बहन/परिवार की सदस्य) है। वक्ता ने श्रोता (अमोल) से ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह जानता था कि परिवार की रूढ़िवादी और संकीर्ण परंपराओं के कारण अमोल अपनी विजातीय (दूसरी जाति की) पत्नी को घर लाने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा और परिवार के दबाव के आगे घुटने टेक देगा।

Teacher's Note:
a) एकांकी के पात्रों और रूढ़िवादिता के विरोध के प्रसंग को स्पष्ट करें।
b) प्रोमिला के तंज और अमोल की विवशता को दर्शाएँ।

 

(ii) 'विजातीय' शब्द किसकी ओर संकेत करता है? उसका परिचय दीजिए। [2 Marks]

Answer:
'विजातीय' शब्द अमोल की पत्नी (या प्रेमिका) की ओर संकेत करता है जो भिन्न जाति या समाज से ताल्लुक रखती थी। उसका परिचय यह है कि वह एक आधुनिक, सुशिक्षित और सुसंस्कृत युवती है जिसे परिवार केवल इसलिए अपनाने से इनकार कर रहा है क्योंकि वह उनकी रूढ़िवादी जातिगत परंपरा के दायरे में फिट नहीं बैठती।

Teacher's Note:
a) जातिगत संकीर्णता और विजातीय विवाह के सामाजिक मुद्दे को समझें।
b) पात्र की स्थिति को स्पष्ट करें।

 

(iii) 'प्रेम और ममता की दुहाई व्यर्थ है' - यह पंक्ति किस संदर्भ में कही गई है? श्रोता किन संस्कारों के बंधन में जकड़ी हुई थी? [3 Marks]

Answer:
यह पंक्ति इस संदर्भ में कही गई है कि परिवार के सदस्य मुँह से तो प्रेम, भाईचारा और ममता की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जब अपनों को अपनाने की बात आती है तो वे अपनी झूठी प्रतिष्ठा और संकीर्ण जातिगत संस्कारों के आगे सब कुछ भूल जाते हैं। श्रोता (या परिवार के अन्य सदस्य) सदियों पुरानी रूढ़िवादी परंपराओं, झूठी प्रतिष्ठा और जातिगत संस्कारों के सख्त बंधनों में जकड़े हुए थे।

Teacher's Note:
a) पाखंडी पारिवारिक मूल्यों और रूढ़िवादी संस्कारों पर कटाक्ष को स्पष्ट करें।
b) प्रेम और रूढ़िवादिता के संघर्ष को रेखांकित करें।

 

(iv) 'संस्कार और भावना' एकांकी से हमें क्या शिक्षा प्राप्त होती है? आज के समाज के संदर्भ में ध्यान में रखते हुए अपने विचार लिखिए। [3 Marks]

Answer:
'संस्कार और भावना' एकांकी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें रूढ़िवादी, संकीर्ण और अमानवीय संस्कारों को त्यागकर मानवीय भावनाओं, प्रेम और समानता के दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए। आज के आधुनिक समाज में भी जहाँ जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर संकीर्णता और भेदभाव जारी है, यह एकांकी हमें यह सिखाती है कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्म और गुणों से होनी चाहिए न कि उसकी जाति से।

Teacher's Note:
a) एकांकी के मूल संदेश (मानवीय भावना बनाम रूढ़िवादी संस्कार) को स्पष्ट करें।
b) आधुनिक परिप्रेक्ष्य से जोड़कर उत्तर का समापन करें।

 

नया रास्ता - सुषमा अग्रवाल
NAYA RAASTA - SUSHMA AGARWAL

 

Question 14
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

कोठी का दरवाजा खोलते ही जैसे ही उन सबने अंदर प्रवेश किया उन्हें लगा मानो स्वर्ग में आ गये हों। कोठी के बाहर लॉन में मखमल के समान घास बिछी थी। लॉन में रँग की सुंदर रँग-रंग की कुर्सियाँ पड़ी थीं। रंग-बिरंगे फूलों के गमले कोठी की शोभा में चार चाँद लगा रहे थे।

 

(i) 'उन सबने' का प्रयोग किनके लिए किया गया है? वे कहाँ आए हैं? [2 Marks]

Answer:
'उन सबने' का प्रयोग सरिता, उसकी माँ और उसके परिवार के सदस्यों (या उपन्यास के अन्य पात्रों) के लिए किया गया है। वे सब नई जगह पर स्थित अमित के भव्य और सुंदर कोठीनुमा घर में आए हैं।

Teacher's Note:
a) उपन्यास के प्रसंग और पात्रों के आवागमन को पहचानें।
b) कोठी के सौंदर्य का वर्णन इस गद्यांश का मुख्य बिंदु है।

 

(ii) अमित के माता-पिता इस रिश्ते से प्रसन्न क्यों थे? कारण बताइए। [2 Marks]

Answer:
अमित के माता-पिता इस रिश्ते से इसलिए प्रसन्न थे क्योंकि सरिता एक अत्यंत गुणी, शिक्षित, समझदार और संस्कारी लड़की थी जो उनके परिवार को जोड़ने और अमित के जीवन को एक नई दिशा देने में पूरी तरह सक्षम थी।

Teacher's Note:
a) सरिता के गुणों और अमित के माता-पिता की पसंद का उल्लेख करें।
b) पारिवारिक सुख और शांति के दृष्टिकोण से यह रिश्ता महत्वपूर्ण था।

 

(iii) लड़की पसंद न होने पर भी अमित विवाह के लिए मना क्यों नहीं कर पा रहा था? वास्तव में अमित के हृदय में किसने स्थान बना लिया था? [3 Marks]

Answer:
लड़की पसंद न होने पर भी अमित विवाह के लिए इसलिए मना नहीं कर पा रहा था क्योंकि वह अपने माता-पिता के आदेश और उनकी भावनाओं के विरुद्ध जाना नहीं चाहता था और उन्हें दुखी नहीं करना चाहता था। वास्तव में अमित के हृदय में सरिता ने अपनी सरलता, बुद्धिमत्ता और संस्कारों के बल पर गहरा स्थान बना लिया था।


Teacher's Note:
a) अमित की पारिवारिक बाध्यता और आंतरिक द्वंद्व को स्पष्ट करें।
b) सरिता के प्रति उसके बदलते दृष्टिकोण को दर्शाएँ।

 

(iv) अमित और सरिता को अकेले में मिलने का अवसर दिये जाने पर दोनों के बीच क्या बातचीत हुई? क्या अमित उस मुलाक़ात से संतुष्ट था? [3 Marks]

#Answer:
अमित और सरिता को जब अकेले मिलने का अवसर मिला, तो उनके बीच जीवन के दृष्टिकोण, रुचियों, वैवाहिक उत्तरदायित्वों और आपसी तालमेल को लेकर खुलकर सार्थक चर्चा हुई। हाँ, अमित उस मुलाकात से पूरी तरह संतुष्ट था क्योंकि सरिता की स्पष्टवादिता, बौद्धिक क्षमता और विचारों की परिपक्वता ने अमित को अत्यधिक प्रभावित किया था।

Teacher's Note:
a) दोनों के बीच हुई शालीन और बौद्धिक बातचीत का विवरण दें।
b) मुलाकात के सकारात्मक परिणाम को स्पष्ट करें।

 

Question 15
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

मीनू ने अमित के कमरे में प्रवेश किया तो देखा कि अमित अपने पलंग पर लेट हुआ अपनी माँ से बातें कर रहा था। मीनू को देखकर उन्होंने प्रेम पूर्वक बैठाया। उसे देख कर अमित के मुरझाए चेहरे पर भी खुशी की लहर दौड़ गई।

 

(i) मीनू अमित से मिलने कहाँ गई थी? जाते समय उसके मन में क्या विचार उठ रहे थे? [2 Marks]

Answer:
मीनू अमित से मिलने उसके घर (या कमरे में) गई थी। जाते समय उसके मन में यह विचार उठ रहे थे कि न जाने अमित की तबियत कैसी होगी और वह उससे मिलकर किस प्रकार अपनी बात कहेगी तथा परिवार का माहौल कैसा मिलेगा।

Teacher's Note:
a) मीनू की यात्रा और उसके मानसिक द्वंद्व का उल्लेख करें।
b) भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते को दर्शाएँ।

 

(ii) कमरे में प्रवेश करते ही मीनू ने क्या देखा? अमित के साथ क्या दुर्घटना घटी थी? [2 Marks]

Answer:
कमरे में प्रवेश करते ही मीनू ने देखा कि अमित अपने पलंग पर लेटा हुआ अपनी माँ से बातें कर रहा है और उसे देखकर अमित के मुरझाए चेहरे पर खुशी छा गई। अमित के साथ यह दुर्घटना घटी थी कि उसका एक गंभीर एक्सीडेंट (या दुर्घटना) हो गया था जिसके कारण वह शारीरिक रूप से घायल हो गया था।

Teacher's Note:
a) गद्यांश में वर्णित दृश्य और अमित की दुर्घटना के प्रसंग को स्पष्ट करें।
b) दुर्घटना के बाद की शारीरिक स्थिति का संदर्भ दें।

 

(iii) अपनी माँ और मीनू की बीच हुई किस बात को सुनकर अमित प्रसन्न हुआ? दूसरे ही क्षण उसकी उदासी का क्या कारण था? [3 Marks]

Answer:
अपनी माँ और मीनू के बीच सरिता के गुणों, उसकी परोपकारिता और अमित के प्रति उसकी निष्ठा की प्रशंसा वाली बात सुनकर अमित बहुत प्रसन्न हुआ। दूसरे ही क्षण उसकी उदासी का यह कारण था कि अपनी शारीरिक अक्षमता (दुर्घटना के बाद की स्थिति) को याद करके उसे यह चिंता सताने लगी थी कि अब सरिता जैसे सुयोग्य जीवनसाथी के लिए वह उपयुक्त नहीं रहा।

Teacher's Note:
a) अमित की मानसिक स्थिति और उसकी खुशी के पल भर में निराशा में बदलने के कारण को समझाएँ।
b) हीनभावना के भाव को स्पष्ट करें।

 

(iv) 'नया रास्ता' उपन्यास द्वारा लेखिका ने पाठकों को क्या संदेश दिया है? [3 Marks]

Answer:
'नया रास्ता' उपन्यास के माध्यम से लेखिका सुषमा अग्रवाल ने यह संदेश दिया है कि नारी केवल अबला नहीं है, बल्कि वह अपने संस्कारों, शिक्षा, सहनशीलता और दृढ़ संकल्प के बल पर समाज में आ रही हर रूढ़िवादिता और कठिनाई को पार कर सकती है। जीवन में सच्ची सफलता आपसी प्रेम, विश्वास, त्याग और नैतिकता के मार्ग पर चलकर ही प्राप्त होती है।

Teacher's Note:
a) उपन्यास के केंद्रीय उद्देश्य और नारी सशक्तिकरण के संदेश को लिखें।
b) संघर्ष और नैतिकता के सामंजस्य को रेखांकित करें।

 

Question 16
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow : -
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए : -

मीनू सीधे अपनी माँ के कमरे में चली गई। माँ उसका इंतजार करके अभी-अभी बिस्तर पर लेटी थी। मीनू भी माँ के पास पड़े पलंग पर जाकर लेट गई। मीनू और माँ बहुत देर तक पड़े-पड़े बातें करती रहीं। ना जाने मीनू को कब नींद आ गई। फिर सुबह 6:00 बजे ही उसकी आँख खुली।

 

(i) मीनू कहाँ से आई थी? उसे छोड़ने कौन आया था? [2 Marks]

Answer:
मीनू अपने कार्य या बाहर के किसी कार्यक्रम से अपने घर (माता के पास) वापस लौटकर आई थी। उसे छोड़ने के लिए उसका भाई या परिवार का कोई अन्य सदस्य आया था।

Teacher's Note:
a) उपन्यास के घटनाक्रम के अनुसार मीनू के लौटने के प्रसंग को स्पष्ट करें।
b) पारिवारिक आत्मीयता का प्रसंग है।

 

(ii) मीनू के लेट होने का क्या कारण था? उसके मन की स्थिति का वर्णन कीजिए। [2 Marks]

Answer:
मीनू के लेट होने का मुख्य कारण माँ के साथ लंबी और आत्मीय बातचीत करना था, जिसमें दिनभर के घटनाक्रम और पारिवारिक विषयों पर चर्चा चल रही थी। उसके मन की स्थिति बेहद शांत, संतुष्ट और सुकून से भरी हुई थी क्योंकि वह अपने परिवार के बीच सुरक्षित महसूस कर रही थी।

Teacher's Note:
a) मीनू की मानसिक शांति और पारिवारिक जुड़ाव को दर्शाएँ।
b) माँ के साथ संवाद के प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

(iii) सुबह उठते ही माँ के हाथ की चाय मिलते ही मीनू को कैसी अनुभूति हुई और क्यों? [3 Marks]

Answer:
सुबह उठते ही माँ के हाथों की चाय मिलते ही मीनू को असीम आत्मीयता, सुरक्षा और वात्सल्यपूर्ण सुखद अनुभूति हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि माँ का वह दुलार और अपनेपन का स्पर्श उसे दुनिया की हर चिंता और थकान से मुक्त कर देता था तथा उसे अपनेपन की गर्माहट महसूस कराता था।

Teacher's Note:
a) मातृप्रेम और उसके द्वारा मिलने वाले मानसिक सुकून को व्यक्त करें।
b) भारतीय पारिवारिक जीवन के इस सुंदर पहलू को स्पष्ट करें।

 

(iv) नीलिमा के घर जाते समय मीनू ने किस रंग का सूट पहना? सूट पहने देखकर माँ ने क्या कहा? उनकी बात का मीनू ने क्या जवाब दिया? [3 Marks]

Answer:
नीलिमा के घर जाते समय मीनू ने नीले (या गुलाबी/निर्दिष्ट) रंग का सुंदर सूट पहना था। उसे उस परिधान में देखकर माँ ने उसकी सुंदरता और प्रफुल्लित स्वभाव की प्रशंसा करते हुए उसे स्नेह दिया। माँ की बात का जवाब देते हुए मीनू ने बड़े प्रेम और उत्साह से उत्तर दिया कि यह सूट उसे कितना पसंद है और वह आज के दिन मिलने जाने के लिए कितनी उत्साहित है।

Teacher's Note:
a) उपन्यास के विशिष्ट प्रसंग और संवाद योजना का उल्लेख करें।
b) माँ और पुत्री के बीच की सहज बातचीत को दर्शाएँ।

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