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Detailed Chapter 08 भारतीय संविधान की रचना और लक्षण GSEB Solutions for Class 9 Social Science
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Class 9 Social Science Chapter 08 भारतीय संविधान की रचना और लक्षण GSEB Solutions PDF
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
Question 1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में कौन-से आदर्शों का उल्लेख किया गया है ?
Answer: प्रस्तावना में संविधान के उद्देश्यों, भारत को एक लोककल्याणकारी राज्य बनाने और उच्च भावना के आदर्शों का उल्लेख किया गया है। इन आदर्शों में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व शामिल हैं।
In simple words: संविधान की प्रस्तावना भारत को एक अच्छा राज्य बनाने और न्याय, स्वतंत्रता, समानता जैसे बड़े विचारों को बताती है।
Exam Tip: प्रस्तावना में उल्लिखित मुख्य आदर्शों जैसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये संविधान की मूल भावना को दर्शाते हैं।
Question 2. सर्वत्र व्यस्क मताधिकार से क्या आशय है ?
Answer: भारत में 18 वर्ष की आयु वयस्क मानी जाती है। इस उम्र से अधिक उम्र के व्यक्ति को किसी भी जाति, भाषा, लिंग, आय, धर्म, संपत्ति या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव किए बिना मतदान करने का अधिकार है। भारत में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाला प्रत्येक नागरिक आम चुनाव, लोकसभा, राज्यसभा और स्थानीय स्वराज्य की संस्थाओं में अपनी पसंद के उम्मीदवार को मत देकर चुन सकता है। इसे सर्वत्र वयस्क मताधिकार कहा जाता है।
In simple words: इसका मतलब है कि भारत में 18 साल या उससे ऊपर के सभी लोगों को, बिना किसी भेदभाव के वोट देने की आजादी है, और वे अपनी पसंद का नेता चुन सकते हैं।
Exam Tip: वयस्क मताधिकार की परिभाषा में आयु सीमा (18 वर्ष) और 'कोई भेदभाव नहीं' जैसे प्रमुख वाक्यांशों को शामिल करें।
Question 3. भारत का संविधान संघीय है । इस पर अपने विचार व्यक्त कीजिए ।
Answer: संविधान के अनुसार, भारत राज्यों का एक संघ है। इस तरह, भारत एक संघीय राज्य है। इसके इकाई राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
- संघ सरकार को कई महत्वपूर्ण शक्तियाँ दी गई हैं। संघीय व्यवस्था में केंद्र सरकार और राज्यों की राज्य सरकारों के बीच सत्ता का स्पष्ट विभाजन किया गया है।
- इसमें राज्य सरकार अपने क्षेत्र में, अपने कार्यक्षेत्र को ध्यान में रखते हुए कानून बना सकती है। संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच सत्ता का स्पष्ट विभाजन किया गया है। दोनों अपनी शक्तियों का उपयोग करते हैं।
- संघीय शासन व्यवस्था में तटस्थ, निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायतंत्र की व्यवस्था की गई है, जो केंद्र और राज्यों के बीच सत्ता और कार्य विभाजन को लेकर उत्पन्न किसी भी विवाद के संबंध में संविधान की व्याख्या करके विवाद का समाधान करता है।
संघ और राज्यों के बीच कार्यों और अधिकारों का विभाजन:
- भारत का परिसंघ दो प्रकार की सरकारों से बना है: संघ सरकार और राज्य सरकारें। संविधान में दोनों प्रकार की सरकारों के कार्यक्षेत्र और शक्तियों का स्पष्ट और निश्चित विभाजन किया गया है। संविधान में संघ तथा राज्यों के कार्यों और शक्तियों की अलग-अलग सूची दी गई है।
- संघसूची: संघसूची में राष्ट्रीय महत्व के विषय जैसे संरक्षण, विदेश संबंध, परमाणु ऊर्जा, वित्त और बैंकिंग, तार और डाक तथा रेलवे आदि शामिल हैं। संघ सूची में शामिल विषयों के संबंध में कानून बनाने और उनमें संशोधन करने की शक्ति संसद के पास है। संघसूची में 97 विषयों को शामिल किया गया है।
- राज्यसूची: राज्यसूची में कानून और व्यवस्था, स्थानीय स्वराज्य की संस्थाएँ, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, राज्य का आंतरिक व्यापार और वाणिज्य जैसे 66 विषयों को शामिल किया गया है। इन विषयों के संबंध में कानून बनाने तथा उनमें संशोधन करने का अधिकार राज्यों के विधानमंडलों का है।
- समवर्ती सूची (संयुक्त सूची): इसमें शामिल विषयों के संबंध में संघ सरकार और राज्य सरकारें दोनों कानून बना सकती हैं। यदि जहाँ संघ और राज्य सरकार के कानून के बीच कोई मतभेद होता है, वहाँ संघ सरकार का कानून ही प्रभावी होता है। इसमें दीवानी और फौजदारी संबंधी मामले, विवाह और तलाक, शिक्षा, आर्थिक आयोजन, व्यापारी संघ आदि 47 विषयों को शामिल किया गया है।
- अवशिष्ट विषय (शेष सत्ता): सत्ता के विभाजन में जो विषय शामिल नहीं हुए हैं, उन्हें अवशिष्ट विषय कहते हैं। इन विषयों के संबंध में कानून बनाने की शक्ति संसद के पास है।
In simple words: भारत का संविधान संघीय है, मतलब यहाँ दो तरह की सरकारें हैं - केंद्र और राज्य। इन दोनों की शक्तियाँ अलग-अलग सूचियों में बँटी हैं, जैसे संघसूची, राज्यसूची और समवर्ती सूची। अगर कभी केंद्र और राज्य के कानूनों में टकराव होता है, तो केंद्र का कानून लागू होता है।
Exam Tip: संघीय व्यवस्था की मुख्य विशेषताओं और विभिन्न सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती) के प्रमुख विषयों को विस्तार से बताएं। न्यायिक समीक्षा की भूमिका का उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है।
Question 4. संसदीय शासन पद्धति के लक्षण लिखिए ।
Answer: संसदीय लोकतंत्र का अर्थ है कि जहाँ पूरी जनता या उसका बहुसंख्यक हिस्सा शासन की शक्ति का उपयोग अपने उन प्रतिनिधियों के माध्यम से करता है, जिन्हें वह समय-समय पर चुनता है।
गार्नर के अनुसार, "संसदात्मक शासन" वह शासन प्रणाली है, जिसमें वास्तविक कार्यपालिका, यानी मंत्रिमंडल, व्यवस्थापिका या उसके लोकप्रिय सदन के प्रति और अंत में निर्वाचक मंडल के प्रति अपनी राजनीतिक नीतियों तथा कार्यों के लिए कानूनी तौर पर उत्तरदायी होती है, और राज्य का प्रधान नाममात्र का तथा अनुत्तरदायी होता है।
रचना: संसदीय पद्धति में संसद सर्वोच्च होती है और वह लोगों का प्रतिनिधित्व करती है। संघ की विधायिका को संसद कहते हैं। भारतीय संसद के दो सदन हैं: ऊपरी सदन राज्यसभा और निम्न सदन लोकसभा। लोकसभा में जिस दल को बहुमत मिलता है, उस दल की सरकार बनती है।
संघ में राष्ट्रपति के नाम से संघ का प्रशासन मंत्रिमंडल प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चलता है और राज्यों में राज्यपाल के नाम से मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिमंडल प्रशासन चलाता है। मंत्रिमंडल, विधानमंडल (संसद) के प्रति उत्तरदायी होता है। विधानमंडल लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा गठित होता है। इस तरह, विधानमंडल (संसद) सर्वोच्च है।
In simple words: संसदीय शासन में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है, जो सरकार बनाते हैं। मंत्रिमंडल संसद के प्रति जवाबदेह होता है, और राष्ट्रपति केवल नाममात्र का प्रमुख होता है।
Exam Tip: संसदीय शासन प्रणाली के मुख्य लक्षणों जैसे कार्यपालिका की जवाबदेही, संसद की सर्वोच्चता और नाममात्र के प्रमुख का उल्लेख अवश्य करें।
Question 5. सुग्रथित न्यायतंत्र अर्थात् क्या ?
Answer: संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, भारत में स्वतंत्र, निष्पक्ष, संलग्न और सुग्रथित न्यायपालिका की व्यवस्था स्थापित की गई है। इसमें सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय, बीच में राज्य स्तर पर उच्च न्यायालय और निचले स्तर पर अधीनस्थ और जिला न्यायालय, इसके अतिरिक्त विशेष न्यायालय हैं। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय सभी को मानना होता है। न्यायपालिका कार्यपालिका से स्वतंत्र है।
In simple words: सुग्रथित न्यायतंत्र का मतलब है कि भारत में न्याय देने वाली व्यवस्था स्वतंत्र है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय सबसे ऊपर है, फिर उच्च न्यायालय और नीचे जिला न्यायालय आते हैं। सभी को सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मानना पड़ता है।
Exam Tip: न्यायतंत्र की संरचना (सर्वोच्च, उच्च, जिला न्यायालय) और इसकी स्वतंत्रता पर जोर दें। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों की बाध्यकारी प्रकृति का उल्लेख करें।
Question 6. संविधान में सुधार के लिए किये गये प्रावधानों को स्पष्ट कीजिए ।
Answer: समय और परिस्थितियों के अनुसार भारतीय संविधान में सुधार से संबंधित प्रावधानों को तीन भागों में विभाजित किया गया है:
(1) कुछ परिस्थितियों में संसद में उपस्थित तथा मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के सामान्य बहुमत से सुधार किया जा सकता है।
(2) कुछ परिस्थितियों में संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के 2/3 सदस्यों के स्पष्ट बहुमत द्वारा संविधान में परिवर्तन किया जा सकता है।
(3) संविधान के कुछ भाग में सुधार करने के लिए दोनों सदनों के बहुमत के साथ ही उपस्थित तथा मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत के साथ आधे से अधिक राज्यों के विधानसभाओं की स्वीकृति आवश्यक है। इस प्रकार, संशोधन की प्रक्रिया से भारत का संविधान कठोर और लचीला है।
In simple words: संविधान में बदलाव तीन तरीकों से हो सकते हैं: पहला, सामान्य बहुमत से; दूसरा, संसद के दोनों सदनों में 2/3 बहुमत से; और तीसरा, संसद के 2/3 बहुमत के साथ आधे से अधिक राज्यों की मंजूरी से।
Exam Tip: संविधान संशोधन के तीनों तरीकों को स्पष्ट रूप से समझाएं, क्योंकि यह भारतीय संविधान की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। 'कठोर और लचीला' प्रकृति का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. आर्थिक, सामाजिक समानता के बिना राजनैतिक समानता अधूरी है ? समझाइए ।
Answer: समाजवादी समाज रचना में राष्ट्रीय संपत्ति का न्यायपूर्ण वितरण व्यवस्था पर राज्य का स्वामित्व होना चाहिए। राज्य को विविध क्षेत्रों तथा व्यवसायों में कार्यरत लोगों के बीच आय की असमानता को कम करने का प्रयास करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति या समूह के हाथ में संपत्तियों का केंद्रीकरण नहीं होना चाहिए। समाज के सभी लोगों को स्वस्थ और गौरवपूर्ण विकास के लिए अवसर तथा सुविधाएँ मिलनी चाहिए, सामाजिक कल्याण स्थापित हो, अमीर-गरीब का भेद दूर हो, और लोगों का जीवन स्तर ऊँचा होना चाहिए। इस प्रकार, राजनीतिक समानता का तभी वास्तविक अर्थ होता है जब आर्थिक और सामाजिक समानता भी मौजूद हो।
In simple words: बिना आर्थिक और सामाजिक बराबरी के, वोट देने और चुनाव लड़ने की आजादी अधूरी है। अगर सब लोग बराबर नहीं हैं, तो राजनीति में भी असली समानता नहीं आ पाती।
Exam Tip: आर्थिक और सामाजिक समानता के अभाव में राजनीतिक अधिकारों के वास्तविक उपयोग पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को स्पष्ट करें। 'समाजवादी' आदर्शों पर ध्यान दें।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के बारे में संक्षेप में बताइएः
Question 1. प्रस्तावना
Answer: प्रस्तावना संविधान की आत्मा होने के कारण उसका विशेष महत्व है।
- प्रस्तावना के द्वारा किसी भी कानून के निर्माण तथा उसे समझने, उसकी व्याख्या करने में मार्गदर्शन प्राप्त होता है।
- कानून का उद्देश्य तथा उसके आदर्श, कानून के निर्माण के पीछे संसद की क्या नीति है, यह समझने में प्रस्तावना सहायक होती है।
- किस प्रकार की समस्याओं के समाधान के लिए कानूनों का निर्माण किया जाता है, इसका स्पष्ट निर्देश हमें प्रस्तावना से प्राप्त होता है।
- इस प्रकार प्रस्तावना संविधान का सार है।
In simple words: प्रस्तावना संविधान का मुख्य हिस्सा है, जो हमें कानूनों को बनाने और समझने में मदद करती है। यह संविधान के सभी मुख्य विचारों और लक्ष्यों को संक्षेप में बताती है।
Exam Tip: प्रस्तावना को 'संविधान की आत्मा' के रूप में संदर्भित करें और इसके महत्व को कानूनों की व्याख्या और उद्देश्यों को समझने में इसके मार्गदर्शन के रूप में बताएं।
Question 2. प्रस्तावना संविधान निर्माताओं की मानसिकता को समझने के लिए चाबी (कुंजी) स्वरूप है ।
Answer: प्रस्तावना में संविधान के मूलभूत उद्देश्यों, आदर्शों तथा सिद्धांतों को महत्व दिया गया है।
- प्रस्तावना में संविधान के उद्देश्यों के साथ भारत में लोककल्याणकारी राज्य स्थापित करने की उच्च भावना तथा आदर्शों को सिद्ध करने की इच्छा का स्पष्टीकरण किया गया है।
- इस प्रकार प्रस्तावना द्वारा संविधान निर्माताओं की मानसिकता का परिचय प्राप्त होता है।
In simple words: प्रस्तावना को पढ़कर हमें पता चलता है कि संविधान बनाने वाले लोग क्या चाहते थे। यह संविधान के मुख्य लक्ष्य और विचारों को समझने का एक तरीका है।
Exam Tip: समझाएं कि प्रस्तावना संविधान के आदर्शों और लक्ष्यों को कैसे प्रकट करती है, जिससे संविधान निर्माताओं के दृष्टिकोण की जानकारी मिलती है।
Question 3. प्रस्तावना दिशासूचक यंत्र के समान है ।
Answer: कानून के किसी भी भाग या जानकारी में अस्पष्टता या विसंगति उत्पन्न होने पर, या यदि कानून का उद्देश्य स्पष्ट न होता हो, तो उस समय प्रस्तावना कानून को समझने तथा उसकी व्याख्या करने में सहायक सिद्ध होती है। इस प्रकार संविधान में समाहित प्रावधानों को समझने में यह एक दिशा सूचक यंत्र की भूमिका निभाती है।
In simple words: जब कानून को समझना मुश्किल हो, तो प्रस्तावना एक नक्शे की तरह काम करती है। यह हमें सही रास्ता दिखाती है और कानून के असली मतलब को समझने में सहायता करती है।
Exam Tip: प्रस्तावना की तुलना दिशासूचक यंत्र से करते हुए, स्पष्ट करें कि यह कानूनी व्याख्या में कैसे मदद करती है और संविधान के प्रावधानों को समझने के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है।
Question 4. भारतीय संविधान में संघीय शासन तथा एकतंत्रीय शासन दोनों का समन्वय है ।
Answer: भारत में केंद्र और राज्य सरकारें अस्तित्व में हैं, केंद्र सरकार को संघ सरकार कहते हैं।
- आपातकाल की तीन परिस्थितियों में हमारी संघीय शासन व्यवस्था पूरी तरह से एकतंत्रीय व्यवस्था में बदल जाती है।
- आपातकाल लागू रहने तक संघीय शासन व्यवस्था बनी रहती है।
In simple words: भारतीय संविधान में केंद्र और राज्य दोनों की सरकारें हैं, जिससे यह संघीय है। लेकिन आपातकाल के समय, सारी शक्ति केंद्र सरकार के पास चली जाती है, जिससे यह एकतंत्रीय बन जाता है।
Exam Tip: भारतीय संविधान की दोहरी प्रकृति (संघीय और एकतंत्रीय) को आपातकालीन प्रावधानों के संदर्भ में समझाएं, जहां शक्तियों का केंद्रीकरण होता है।
Question 5. भारत एक धर्मनिर्पेक्ष राज्य है ।
Answer: संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, भारत का अपना कोई धर्म नहीं है।
- धार्मिक मामलों में राज्य का कोई हस्तक्षेप या पक्षपात नहीं रहेगा।
- देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छानुसार धर्म पालन करने की स्वतंत्रता है।
- राज्य धर्म के आधार पर कोई भी भेदभाव नहीं कर सकता।
- सभी नागरिकों को अपनी इच्छानुसार पूजा, प्रार्थना तथा धर्म पालन का अधिकार है।
- सरकार व्यक्ति के अपनी मान्यता, व्यवस्था तथा श्रद्धा रखने के साथ उसको प्रचार-प्रसार करने के नागरिक अधिकार पर राज्य कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता।
In simple words: भारत एक धर्मनिर्पेक्ष देश है, मतलब सरकार का कोई अपना धर्म नहीं है। सभी लोगों को अपनी पसंद का धर्म मानने और उसका प्रचार करने की पूरी आजादी है।
Exam Tip: धर्मनिर्पेक्षता के मुख्य सिद्धांतों जैसे राज्य का कोई धर्म न होना, नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता, और धर्म के आधार पर भेदभाव न करने पर जोर दें।
Question 6. भारत एक लोकतंत्रात्मक गणराज्य है ।
Answer: लोकतंत्रात्मक राज्य का अर्थ है जनता का, जनता द्वारा तथा जनता के लिए चलने वाला राज्य।
- इस प्रणाली में वास्तविक सत्ता जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से बने मंत्रिमंडल के पास होती है, जो संसद के प्रति जवाबदेह होता है।
- भारत एक गणतंत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ कोई भी नागरिक जो संविधान में निर्धारित योग्यता पूरी करता है, वह वयस्क मताधिकार द्वारा निर्वाचित होता है।
- वह किसी भी वंशानुगत विरासत के अंतर्गत इस पद को प्राप्त नहीं कर सकता। पाँच वर्ष तक वह अपने पद पर रह सकता है।
In simple words: भारत एक ऐसा देश है जहाँ जनता खुद सरकार चुनती है और सरकार जनता के लिए काम करती है। यहाँ कोई भी पद वंशानुगत नहीं होता, बल्कि लोग वोट देकर अपने नेता चुनते हैं।
Exam Tip: लोकतंत्रात्मक गणराज्य की परिभाषा में 'जनता का शासन' और 'वंशानुगत पद' की अनुपस्थिति पर प्रकाश डालें।
Question 7. भारत एक अखण्ड और अविभाज्य संघ राज्य है ।
Answer: भारत एक संघीय देश है और संविधान के निर्देशों के अनुसार ही देश का प्रशासन चलता है।
- भारत का संविधान भारत के घटक राज्यों के बीच हुए किसी भी समझौते का परिणाम नहीं है।
- भारत का संविधान भारत के सभी नागरिकों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर बनाया गया है।
- इसलिए किसी भी राज्य को भारतीय परिसंघ से अलग होने की स्वतंत्रता नहीं है।
- इसलिए भारत एक अखण्ड और अविभाज्य संघ राज्य है।
In simple words: भारत एक संघीय देश है जहाँ राज्य, केंद्र से अलग नहीं हो सकते। यह एक साथ रहने वाले राज्यों का संघ है, जिसे कोई भी राज्य छोड़कर नहीं जा सकता।
Exam Tip: 'अखण्ड' और 'अविभाज्य' शब्दों के महत्व को समझाएं, जिसमें यह बताया जाए कि भारत के राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
Question 8. भारत संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित तथा ब्यौरेवार दस्तावेज है ।
Answer: भारत के संविधान में वर्तमान में 395 अनुच्छेद तथा 9 परिशिष्ट हैं।
- भारत के संविधान में राष्ट्रीय चिह्न, गीत, राष्ट्रीय सूत्र आदि की घोषणा की गई है।
- हमारे संविधान में नागरिकों के मूलभूत अधिकारों, कर्तव्यों, राजनीति के मार्गदर्शक सिद्धांतों, सरकार के अंग तथा उनके कार्यों, प्रशासन से संबंधित सूचनाओं, न्यायपालिका की व्यवस्था जैसी कई बातों का समावेश किया गया है।
- इसलिए, भारतीय संविधान विश्व में सबसे विस्तृत और विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।
In simple words: भारत का संविधान दुनिया के सबसे बड़े लिखित दस्तावेजों में से एक है। इसमें 395 नियम और 9 परिशिष्ट हैं, जिसमें हमारे अधिकार, सरकार कैसे काम करेगी, और न्याय के बारे में सब कुछ विस्तार से लिखा है।
Exam Tip: संविधान के विस्तृत होने के कारणों का उल्लेख करें, जैसे कि इसमें अनेक विषयों, अधिकारों और संस्थाओं का समावेश है। अनुच्छेदों और परिशिष्टों की संख्या का उल्लेख करना भी सहायक होगा।
3. संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:
Question 1. दोहरी नागरिकता
Answer: अमेरिका जैसे देशों में दोहरी नागरिकता दी जाती है। एक व्यक्ति के पास एक देश (USA) की नागरिकता होती है, और दूसरी उस राज्य की नागरिकता होती है जिसमें वह रहता है। भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है, जहाँ व्यक्ति केवल देश का नागरिक होता है, किसी विशेष राज्य का नहीं।
In simple words: दोहरी नागरिकता मतलब एक साथ दो देशों की नागरिकता होना, जैसे अमेरिका में जहाँ राज्य और देश दोनों की नागरिकता मिलती है। भारत में ऐसा नहीं है, यहाँ सिर्फ देश की एक नागरिकता होती है।
Exam Tip: दोहरी नागरिकता के उदाहरण के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका का उल्लेख करें और इसके विपरीत भारत की एकल नागरिकता व्यवस्था को स्पष्ट करें।
Question 2. संसदीय शासन पद्धति
Answer: जनता द्वारा चुने गए सदस्यों के विधानमंडल में बहुमत प्राप्त दल की सरकार द्वारा चलने वाली शासन पद्धति को संसदीय शासन पद्धति कहते हैं। इसमें कार्यपालिका (मंत्रिमंडल) विधायिका (संसद) के प्रति जवाबदेह होती है।
In simple words: संसदीय शासन वो तरीका है जहाँ लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, और वो विधानमंडल में बहुमत वाली पार्टी की सरकार चलाते हैं। ये सरकार विधानमंडल के प्रति जवाबदेह होती है।
Exam Tip: संसदीय शासन पद्धति की मुख्य विशेषता यह है कि कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है, इसे अवश्य उल्लेख करें।
Question 3. उत्तरदायी सरकार
Answer: संसदीय सरकार में संयुक्त उत्तरदायित्व के सिद्धांत पर कार्य किए जाने के कारण इसे उत्तरदायी सरकार कहा जाता है। इसमें मंत्रिमंडल के सदस्य अपने सभी कार्यों और नीतियों के लिए संसद और जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।
In simple words: उत्तरदायी सरकार का मतलब है कि सरकार को अपने काम के लिए संसद और लोगों को जवाब देना पड़ता है।
Exam Tip: 'संयुक्त उत्तरदायित्व' शब्द पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि यह उत्तरदायी सरकार की पहचान है।
Question 4. संघसूची
Answer: संघसूची में कुल 97 विषय हैं, जिन पर कानून बनाने का अधिकार संघ की संसद को है। इसमें संरक्षण, विदेशी मामले, परमाणु शक्ति, वित्त, बीमा, बैंकिंग, डाक-तार, रेलवे आदि का समावेश है। ये विषय राष्ट्रीय महत्व के होते हैं।
In simple words: संघसूची में 97 ऐसे विषय हैं जिन पर कानून बनाने की शक्ति सिर्फ केंद्र सरकार के पास है, जैसे देश की रक्षा या विदेश मामले।
Exam Tip: संघसूची में विषयों की संख्या (97) और कुछ प्रमुख विषयों के उदाहरणों को याद रखें।
Question 5. राज्यसूची
Answer: जिन विषयों पर कानून बनाने की सत्ता राज्य सरकार (विधानसभा) को होती है, उसे राज्य सूची कहते हैं। इसमें 66 विषय हैं, जो स्थानीय और क्षेत्रीय महत्व के होते हैं। उदाहरण के लिए, कानून और व्यवस्था, कृषि, शिक्षा आदि।
In simple words: राज्यसूची में 66 ऐसे विषय हैं जिन पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार के पास है, जैसे कृषि या पुलिस।
Exam Tip: राज्यसूची में विषयों की संख्या (66) और कुछ प्रमुख विषयों के उदाहरणों को याद रखें।
Question 6. समवर्ती सूची
Answer: जिन विषयों पर कानून बनाने की सत्ता केंद्र और राज्य सरकार दोनों को प्राप्त होती है, उसे समवर्ती सूची कहते हैं। इसमें 47 विषय हैं। यदि केंद्र और राज्य के कानूनों में कोई मतभेद होता है, तो केंद्र सरकार का कानून प्रभावी होता है।
In simple words: समवर्ती सूची में 47 विषय हैं जिन पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों कानून बना सकती हैं। अगर कोई टकराव होता है, तो केंद्र सरकार का कानून माना जाता है।
Exam Tip: समवर्ती सूची में विषयों की संख्या (47) और केंद्र-राज्य कानूनों में टकराव की स्थिति में केंद्र की प्रधानता को स्पष्ट करें।
Question 7. शेष सत्ताएँ
Answer: जिन विषयों के संदर्भ में केंद्र तथा राज्यों के बीच सत्ता का स्पष्ट विभाजन नहीं किया गया है, ऐसे विषयों का समावेश शेष सत्ता में किया गया है। इन पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार (संसद) का है। ये विषय आमतौर पर भविष्य में उत्पन्न होने वाली नई प्रौद्योगिकियों या मुद्दों से संबंधित हो सकते हैं।
In simple words: शेष सत्ताएँ उन विषयों पर कानून बनाने की शक्ति हैं जो न तो केंद्र सूची में हैं, न राज्य में, और न ही समवर्ती सूची में। इस पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास होता है।
Exam Tip: शेष सत्ताएँ उन विषयों के लिए होती हैं जो किसी भी सूची में शामिल नहीं हैं, और इन पर केवल केंद्र सरकार ही कानून बना सकती है।
Question 8. समाजवाद
Answer: राष्ट्रीय संपत्ति का न्यायपूर्ण वितरण हो, उत्पादन तथा वितरण व्यवस्था पर राज्य का स्वामित्व हो, और आय की समानता हो, इस प्रकार की समाज व्यवस्था को समाजवाद कहते हैं। इसका उद्देश्य समाज में आर्थिक असमानता को कम करना और सभी नागरिकों के लिए समान अवसर प्रदान करना है।
In simple words: समाजवाद मतलब एक ऐसी व्यवस्था जहाँ देश की सारी दौलत सब में बराबर बंटे, और सरकार ही चीजों को बनाने और बांटने का काम देखे, ताकि कोई अमीर-गरीब का बड़ा फर्क न रहे।
Exam Tip: समाजवाद की मुख्य विशेषताओं जैसे संपत्ति का न्यायपूर्ण वितरण, राज्य का स्वामित्व और आय की समानता पर जोर दें।
Question 9. लोकतंत्र
Answer: लोकतंत्र एक ऐसी राज्य व्यवस्था है, जिसमें देश की जनता को सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय प्राप्त हो तथा लोगों को शासन व्यवस्था में शामिल होने का अधिकार प्राप्त हो। इसमें जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर सरकार बनाती है।
In simple words: लोकतंत्र मतलब लोगों का शासन, जहाँ सभी को न्याय मिलता है और सभी को सरकार बनाने में भाग लेने का मौका मिलता है।
Exam Tip: लोकतंत्र की परिभाषा में 'जनता का शासन', 'न्याय' और 'भागीदारी' जैसे प्रमुख तत्वों को शामिल करें।
Question 10. न्यायिक समीक्षा
Answer: न्यायिक समीक्षा संविधान का एक विशिष्ट लक्षण है। केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जो कार्य या प्रशासन किया जाता है, उस पर निगरानी रखने का उत्तरदायित्व न्यायालय को सौंपा गया है। न्यायालय यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी कानून या सरकारी कार्य संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन न करे।
In simple words: न्यायिक समीक्षा का मतलब है कि अदालतें सरकार के बनाए गए कानूनों और कामों की जाँच करती हैं। वे देखती हैं कि सरकार का कोई भी काम संविधान के नियमों के खिलाफ तो नहीं है।
Exam Tip: न्यायिक समीक्षा की परिभाषा में न्यायालय की भूमिका को बताएं कि वह कानूनों और सरकारी कार्यों की संवैधानिक वैधता की जाँच करता है।
4. निम्नलिखित विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए:
Question 1. संविधान निर्माण का कार्य कब पूरा हुआ ?
(A) ई.स. 1948
(B) ई.स. 1949
(C) ई.स. 1950
(D) ई.स. 1947
Answer: (B) ई.स. 1949
In simple words: भारत का संविधान 1949 में बनकर तैयार हो गया था।
Exam Tip: संविधान निर्माण की तिथि (26 नवंबर, 1949) को याद रखना महत्वपूर्ण है, जब यह कार्य पूरा हुआ था।
Question 2. संघ सूची में कितने विषयों का समावेश किया गया है ?
(A) 66
(B) 47
(C) 97
(D) 87
Answer: (C) 97
In simple words: संघ सूची में कुल 97 विषय शामिल हैं जिन पर केंद्र सरकार कानून बना सकती है।
Exam Tip: संघ सूची में शामिल विषयों की संख्या को ठीक से याद रखें।
Question 3. भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे ?
(A) कन्हैयालाल मुन्शी
(B) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(C) श्यामाप्रसाद
(D) सरदार पटेल
Answer: (B) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
In simple words: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय संविधान सभा के मुख्य अध्यक्ष थे।
Exam Tip: संविधान सभा के अध्यक्ष का नाम, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 4. भारतीय संविधान कब लागू किया गया ?
(A) 26 नवम्बर, 1949
(B) 26 जनवरी, 1950
(C) 15 अगस्त, 1947
(D) 9 दिसम्बर, 1946
Answer: (B) 26 जनवरी, 1950
In simple words: भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को पूरी तरह से लागू किया गया था।
Exam Tip: भारतीय संविधान के लागू होने की तिथि (26 जनवरी, 1950) को याद रखें, जो गणतंत्र दिवस के रूप में मनाई जाती है।
Question 5. संविधान सभा में कुल कितने सदस्य थे ?
(A) 389
(B) 545
(C) 250
(D) 166
Answer: (A) 389
In simple words: भारतीय संविधान सभा में कुल 389 सदस्य थे जिन्होंने संविधान बनाने का काम किया।
Exam Tip: संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या (389) एक महत्वपूर्ण संख्यात्मक तथ्य है जिसे याद रखें।
Question 6. भारत गणतंत्रात्मक राष्ट्र है, क्योंकि ............
(A) वह सार्वभौम राष्ट्र है ।
(B) वह लोकतंत्रात्मक राज्य है ।
(C) राष्ट्रपति का चुनाव निश्चित समय के लिए किया जाता है ।
(D) प्रजा को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है ।
Answer: (C) राष्ट्रपति का चुनाव निश्चित समय के लिए किया जाता है ।
In simple words: भारत को गणतंत्र इसलिए कहते हैं क्योंकि यहाँ राष्ट्रपति का चुनाव एक तय समय पर होता है, न कि यह पद वंशानुगत है।
Exam Tip: गणतंत्र का मुख्य लक्षण यह है कि राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति) वंशानुगत नहीं होता, बल्कि एक निश्चित अवधि के लिए चुना जाता है।
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