Step-by-Step Textbook Solutions for Class 9 Social Science Chapter 11 भारत की न्यायपालिका
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1. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए:
Question 1. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की आवश्यक योग्यताएँ बताइए ।
Answer: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के लिए ये आवश्यक योग्यताएँ चाहिए:
1. व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए ।
2. उसे भारत के किसी भी राज्य के उच्च न्यायालय में कम से कम 5 वर्ष तक न्यायाधीश के तौर पर काम करने का अनुभव होना चाहिए । अथवा
3. किसी भी उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष तक वकालत करने का अनुभव होना चाहिए ।
4. राष्ट्रपति के विचार में, वह एक प्रसिद्ध न्यायविद् या कानून का जानकर होना चाहिए ।
5. उसकी उम्र 65 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए ।
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है, साथ ही उच्च न्यायालय में 5 साल का न्यायाधीश अनुभव या 10 साल की वकालत का अनुभव होना चाहिए। राष्ट्रपति की राय में वह एक अच्छा कानून जानने वाला भी होना चाहिए और उसकी उम्र 65 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए।
Exam Tip: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यताओं को याद करने के लिए, नागरिकता, न्यायिक अनुभव या वकालत का अनुभव, राष्ट्रपति की राय और आयु सीमा जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 2. सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत सत्ताओं की जानकारी दीजिए ।
Answer: जब अदालत को सबसे पहले विवादों को सुनकर निर्णय देने की सत्ता मिलती है, तो उसे न्यायालय का मूलाधिकार कहा जाता है । इसमें ये शक्तियाँ शामिल हैं:
1. संघ सरकार या एक या एक से अधिक राज्यों के बीच होने वाले विवादों को सुलझाने की शक्ति प्राप्त है ।
2. एक तरफ भारत सरकार और दूसरी तरफ एक या उससे अधिक राज्यों के बीच विवाद, मतभेद या झगड़े के संबंध में समाधान करने की शक्ति है ।
3. दो या दो से अधिक राज्यों के बीच होने वाले झगड़ों या उत्पन्न विवादों के संबंध में निर्णय देने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के पास है ।
4. सर्वोच्च न्यायालय को संघ सरकार के किसी भी कानून अथवा संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े प्रश्नों के संबंध में निर्णय देने का अधिकार है ।
5. नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की सुरक्षा की शक्ति के अलावा, मूलभूत अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ जरूरी आदेश देने की शक्ति है ।
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय का मूलाधिकार वह शक्ति है जहाँ वह सबसे पहले विवादों को सुनता है और फैसला देता है। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच के विवादों को सुलझाना, संवैधानिक सवालों पर फैसला देना, और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना शामिल है।
Exam Tip: सर्वोच्च न्यायालय के मूलाधिकार को समझाते समय, यह याद रखें कि यह संघ, राज्य और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुख्य विवादों को सीधे निपटाने की प्राथमिक शक्ति है।
Question 3. सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के बाहर के विषयों के बारे में जानकारी दीजिए
Answer: सर्वोच्च न्यायालय स्वयं कोई कानून नहीं बना सकता है ।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नहीं, बल्कि कार्यपालिका द्वारा की जाती है ।
- विदेशी व्यक्तियों के आपराधिक कामों का विषय दो देशों की सरकार का मामला बन जाता है ।
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय अपने आप कोई कानून नहीं बना सकता। न्यायाधीशों को सरकार नियुक्त करती है, और विदेशों में अपराधों का मामला दो देशों की सरकारों के बीच का होता है।
Exam Tip: सर्वोच्च न्यायालय की सीमाओं को समझते समय, याद रखें कि वह कानून बनाने और न्यायाधीशों की नियुक्ति में सीधा हस्तक्षेप नहीं करता है, और अंतर्राष्ट्रीय अपराधों पर सीधे अधिकार नहीं रखता।
Question 4. महाभियोग क कार्यवाही समझाइए ।
Answer: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को एक खास कानूनी प्रक्रिया द्वारा ही उनके पद से हटाया जा सकता है ।
- न्यायाधीश को केवल प्रमाणित अनुशासनहीनता अथवा कार्यअक्षमता के आधार पर हटाया जा सकता है ।
- संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित किए गए प्रस्ताव के आधार पर ही पद से हटाया जा सकता है ।
- इस प्रक्रिया को महाभियोग कहते हैं ।
In simple words: महाभियोग एक ऐसी खास कानूनी प्रक्रिया है जिससे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को पद से हटाया जा सकता है। यह तभी होता है जब उनकी अनुशासनहीनता या काम न कर पाने की क्षमता प्रमाणित हो जाए और संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास हो।
Exam Tip: महाभियोग प्रक्रिया को समझाते समय, 'प्रमाणित दुर्व्यवहार या अक्षमता', 'संसद के दोनों सदनों' और 'दो-तिहाई बहुमत' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करना जरूरी है।
Question 5. फौजदारी मुकदमों की अपील के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय की अपील की सत्ताओं के बारे में चर्चा कीजिए ।
Answer: फौजदारी मामलों में, यदि निचली अदालत ने आरोपी को मृत्युदण्ड की सजा से मुक्त किया हो, लेकिन उच्च न्यायालय ने आरोपी को मृत्युदण्ड की सजा सुनाई हो, तब ऐसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है ।
- उच्च न्यायालय ने अपने अधीन किसी अधीनस्थ न्यायालय से किसी मामले को अपने पास मंगवाकर, आरोपी को मृत्युदण्ड की सजा सुनाई हो और ऐसा प्रमाणपत्र दिया हो कि सर्वोच्च न्यायालय में अपील हो सकती है ।
- सर्वोच्च न्यायालय अपने दिए गए फैसलों का खुद से पुनरावलोकन कर सकता है । अन्य किसी भी अदालत में चल रहे विवाद को अपने पास मंगवा सकता है ।
In simple words: फौजदारी मुकदमों में, अगर निचली अदालत मृत्युदंड से बरी करे लेकिन उच्च न्यायालय मृत्युदंड दे, तो सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय अपने फैसलों की समीक्षा भी कर सकता है और किसी भी अदालत से चल रहे विवाद को अपने पास मंगवा सकता है।
Exam Tip: फौजदारी अपीलों के बारे में बताते समय, निचली और उच्च न्यायालयों के मृत्युदंड के फैसलों में अंतर और सर्वोच्च न्यायालय की समीक्षा शक्ति को स्पष्ट करें।
Question 6. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद की योग्यताएँ बताइए ।
Answer: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के लिए ये योग्यताएँ चाहिए:
1. व्यक्ति भारत का नागरिक होना चाहिए ।
2. भारत के राज्यों में स्थित किसी भी निचली अदालत में कम से कम 10 वर्ष तक न्यायाधीश का अनुभव होना चाहिए । अथवा
3. उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष तक वकालत का अनुभव होना चाहिए ।
4. राष्ट्रपति की दृष्टि से वह न्यायविद्, संविधान का कुशल जानकर अथवा कानूनशास्त्री होना चाहिए ।
5. उसकी उम्र 62 वर्ष से कम होनी चाहिए ।
In simple words: उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति को भारतीय नागरिक होना चाहिए, निचले न्यायालयों में 10 साल का न्यायाधीश अनुभव या उच्च न्यायालय में 10 साल का वकालत अनुभव होना चाहिए। राष्ट्रपति की राय में वह कानून का जानकर हो और उसकी उम्र 62 साल से कम होनी चाहिए।
Exam Tip: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यताओं को याद करते समय, नागरिकता, न्यायिक/वकालत अनुभव की अवधि और अधिकतम आयु सीमा को ध्यान में रखें।
Question 7. अधीनस्थ न्यायालयों के बारे में जानकारी दीजिए ।
Answer: पूरे देश में अधीनस्थ न्यायालयों का संस्थागत ढाँचा और उनके काम, कुछ सामान्य भिन्नताओं को छोड़कर, एक समान है ।
- सभी अधीनस्थ न्यायालय संबंधित उच्च न्यायालय के पर्यवेक्षण के अंतर्गत काम करते हैं ।
- प्रत्येक जिले में दीवानी – फौजदारी न्यायालय होते हैं ।
- जिला न्यायालय का न्यायाधीश दीवानी दावों की सुनवाई करता है ।
- जब जिला न्यायाधीश फौजदारी मुकदमों की सुनवाई करता है तब उसे सेशन्स न्यायाधीश कहते हैं ।
- जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्य का राज्यपाल मुख्य न्यायाधीश के साथ विचार करके करता है ।
- जिला न्यायालय अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अर्जियों की सुनवाई करता है, संपत्ति संबंधी झगड़े, विवाह और तलाक संबंधी अर्जियों की सुनवाई करता है ।
In simple words: अधीनस्थ न्यायालय जिला स्तर पर काम करते हैं और उच्च न्यायालय के अधीन होते हैं। ये दीवानी और फौजदारी दोनों तरह के मामले सुनते हैं, जिनमें संपत्ति, विवाह, तलाक और अपीलों से जुड़े मामले शामिल हैं।
Exam Tip: अधीनस्थ न्यायालयों की संरचना और कार्यों को समझाते समय, उनके प्रकार (दीवानी, फौजदारी), जिला स्तर पर उनकी भूमिका और उच्च न्यायालय से उनके संबंध पर जोर दें।
2. निम्नलिखित विधानों को समझाइए:
Question 1. न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला है ।
Answer: देश में संघीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच के विवादों को सुलझाने के लिए संघीय शासन व्यवस्था में तटस्थ और निष्पक्ष न्यायपालिका की जरूरत होती है ।
- संविधान की सर्वोच्चता पर कोई प्रभाव न पड़े, इसलिए किसी भी कानून की धारा या उसमें किए गए प्रावधान संविधान के साथ संगत हैं या नहीं, इसकी जाँच करने के लिए न्यायपालिका एक महत्वपूर्ण अंग है ।
- विधायिका तथा कार्यपालिका द्वारा संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन न हो, इसकी जाँच के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, तटस्थ और निडर न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला है ।
In simple words: न्यायपालिका लोकतंत्र की नींव है क्योंकि यह निष्पक्ष रूप से विवादों को सुलझाती है, संविधान की रक्षा करती है, और यह सुनिश्चित करती है कि सरकार के अंग अपनी सीमाओं में रहें।
Exam Tip: इस कथन को समझाते समय, न्यायपालिका की तटस्थता, संविधान की सर्वोच्चता की सुरक्षा और विधायिका/कार्यपालिका पर नियंत्रण जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. सर्वोच्च न्यायालय संविधान तथा देश के नागरिकों के अधिकारों का रक्षक संरक्षक है ।
Answer: सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा के संदर्भ में कार्यपालिका के किसी भी कदम, कानून या आदेश को, जो संविधान के साथ संगत नहीं हैं, असंवैधानिक घोषित करने तथा ऐसे कानूनों या आदेशों को रद्द करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के पास है ।
- यह शक्ति संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को दी गयी है । इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय संविधान तथा नागरिकों के अधिकारों का रक्षक तथा संरक्षक की भूमिका निभाता है ।
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय संविधान और नागरिकों के अधिकारों का संरक्षक है। यह कार्यपालिका के उन कानूनों या आदेशों को रद्द कर सकता है जो संविधान के अनुरूप नहीं हैं और लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
Exam Tip: सर्वोच्च न्यायालय को नागरिकों के अधिकारों का संरक्षक बताते समय, उसकी संवैधानिक कानूनों की समीक्षा करने और असंवैधानिक कृत्यों को रद्द करने की शक्ति पर प्रकाश डालें।
Question 3. उच्च न्यायालय का स्थान कड़ी रूप है ।
Answer: भारत की न्यायपालिका के सर्वोच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के बीच के स्तर का उच्च न्यायालय होता है ।
- उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के परामर्श से करता है । यह राज्य के सबसे बड़े न्यायालय के रूप में कार्य करता है ।
- उच्च न्यायालय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है तथा सरकार के वे कानून जो नागरिक अधिकारों का हनन करते हैं, उन्हें रद्द करता है ।
- इस प्रकार केंद्र और राज्य सरकारों, जनता और सरकार तथा सर्वोच्च और जिला न्यायालयों के बीच की कड़ी उच्च न्यायालय है ।
In simple words: उच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है। यह राज्य का सबसे बड़ा न्यायालय है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और केंद्र-राज्य-जनता के बीच संतुलन बनाता है।
Exam Tip: उच्च न्यायालय की भूमिका को 'कड़ी' के रूप में समझाते समय, उसकी केंद्रीय स्थिति (सर्वोच्च और जिला न्यायालयों के बीच), राज्य में सर्वोच्च न्यायिक अधिकार, और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दें।
Question 4. लोक अदालतें आकर्षण का केन्द्र बनी है ।
Answer: गरीबों और शोषितों को सस्ता और तेज न्याय दिलाने के लिए लोक अदालतों का गठन किया गया है जो छुट्टी के दिनों में भी काम करती हैं ।
- यहाँ दोनों पक्षों के बीच उन्हें संतुष्टि मिले, इस तरह शांति और सुलह से समाधान होता है, जिसमें किसी भी पक्ष की हार या जीत नहीं होती है ।
- लोक अदालत में पैसे और समय की बचत होती है । वर्षों से रुके या लंबित मुकदमों का तेज समाधान होता है ।
- लोक अदालत के निर्णयों को कानूनी मान्यता प्राप्त है । इसी कारण लोक अदालतें आज लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई हैं ।
In simple words: लोक अदालतें गरीबों को सस्ता और त्वरित न्याय देने के लिए बनाई गई हैं। ये दोनों पक्षों के लिए संतोषजनक समाधान देती हैं, समय और पैसे बचाती हैं, और इनके फैसलों को कानूनी मान्यता मिलती है, जिससे ये लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गई हैं।
Exam Tip: लोक अदालतों के आकर्षण के कारणों को बताते समय, 'सस्ता और त्वरित न्याय', 'सुलह का माध्यम', 'समय और पैसे की बचत' और 'कानूनी मान्यता' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 5. विधायिका तथा कार्यपालिका गैर जिम्मेंदार बन जाय तब न्यायपालिका की सक्रियता आशीर्वाद सिद्ध होता है |
Answer: नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की सुरक्षा के संदर्भ में कार्यपालिका के किसी भी कदम, कानून अथवा आदेश जो संविधान से संगत नहीं होता उसे गैर-संवैधानिक घोषित करके रद्द कर सकता है ।
- संविधान का अर्थघटन एक महत्वपूर्ण अंग है ।
- जहाँ पर कार्यपालिका तथा जाग्रत न्यायपालिका हो, वहाँ का न्यायतंत्र हमेशा सक्रिय रहना आवश्यक है ।
- लेकिन कई बार कार्यपालिका तथा प्रशासनिक कार्यपालिका की निष्क्रियता एवं गैर-जिम्मेदारी के कारण तथा विधायिका की निरंकुशता के परिणामस्वरूप एक जाग्रत, निडर, स्वतंत्र, निष्पक्ष न्यायपालिका महत्वपूर्ण न्यायिक सक्रियता दिखाती है ।
In simple words: जब विधायिका और कार्यपालिका अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाती, तो न्यायपालिका की सक्रियता लोगों के लिए फायदेमंद होती है। यह संविधान की व्याख्या करती है, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है, और यह सुनिश्चित करती है कि सरकार के अंग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न करें।
Exam Tip: न्यायिक सक्रियता के महत्व को समझाते समय, 'कार्यपालिका की निष्क्रियता', 'नागरिक अधिकारों की सुरक्षा', 'संविधान की व्याख्या' और 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता' जैसे मुख्य अवधारणाओं को शामिल करें।
Question 6. सर्वोच्च न्यायालय को नजीरी अदालत कहते हैं ।
Answer: नजीरी अदालत यानी ऐसी अदालत जिसके रिकॉर्ड्स सबूतों के रूप में महत्वपूर्ण होते हैं । जब इन प्रमाणों को प्रस्तुत किया जाता है तब इनकी वैधानिकता के समक्ष कोई विरोध नहीं कर सकता ।
- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय या फैसले स्थायी दस्तावेज माने जाते हैं, जो सभी को स्वीकार्य होते हैं ।
- इसका उपयोग अधीनस्थ न्यायालयों के मुकदमों में निर्णय के समय संदर्भ के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनकी अवगणना करने वाला सजा का पात्र होता है ।
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय को नजीरी अदालत इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसके फैसले और रिकॉर्ड्स को कानूनी सबूत माना जाता है। ये फैसले सभी अधीनस्थ न्यायालयों के लिए बाध्यकारी होते हैं, और उनका अनादर करने पर दंड मिल सकता है।
Exam Tip: सर्वोच्च न्यायालय को नजीरी अदालत क्यों कहा जाता है, यह बताते समय, उसके फैसलों की 'कानूनी बाध्यता', 'रिकॉर्ड्स का महत्व' और 'अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रभाव' पर जोर दें।
Question 7. सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश सेवा निवृत्त होने के बाद किसी भी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकता है |
Answer: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है, जिसे संसद कानून बनाकर बदल सकती है ।
- वह असाधारण स्थितियों या अवसरों में जाँच के लिए नियुक्त की गई समिति का काम कर सकता है ।
- वह सेवानिवृत्त होने के बाद भारत के किसी भी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकता है । क्योंकि वह देश के सबसे बड़े न्यायिक पद से सेवानिवृत्त होता है ।
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश 65 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होता है। सेवानिवृत्ति के बाद, वह भारत में किसी भी अदालत में वकालत नहीं कर सकता क्योंकि उसने देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर सेवा की है।
Exam Tip: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति के बाद वकालत पर प्रतिबंध के पीछे के तर्क को समझाते समय, 'न्यायिक पद की गरिमा' और 'स्वतंत्रता बनाए रखने' जैसे कारणों को ध्यान में रखें।
3. संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:
Question 1. न्यायपालिका की स्वतंत्रताः
Answer: लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में मुख्य रूप से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका अपना काम, कार्यपालिका से स्वतंत्र होकर करती है ।
- न्यायपालिका सरकार की तरफदारी करने वाली नहीं होनी चाहिए ।
- भारत की न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए संविधान में प्रावधान किए गए हैं ।
- न्यायाधीशों की नियुक्तियाँ निश्चित योग्यताओं के आधार पर कार्यपालिका व्यवस्थित तरीके से करती है ।
- न्यायाधीशों को कार्यपालिका अपनी मनमानी से, पद से हटा नहीं सकती ।
- न्यायाधीशों की नियुक्तियाँ निश्चित अवधि के लिए की जाती हैं ।
- उनके वेतन और सेवा शर्तों में भी कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता ।
- न्यायाधीशों के कर्तव्यों की अवधि में, उनके आचरण के विषय में संसद या विधानसभा में चर्चा नहीं हो सकती ।
In simple words: न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मतलब है कि वह सरकार के किसी भी अंग से प्रभावित हुए बिना, निष्पक्ष रूप से काम करे। संविधान ने न्यायाधीशों की नियुक्ति, कार्यकाल, वेतन और सुरक्षा के लिए विशेष नियम बनाए हैं ताकि वे स्वतंत्र होकर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर सकें।
Exam Tip: न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर टिप्पणी लिखते समय, 'नागरिक अधिकारों की रक्षा', 'कार्यपालिका से अलगाव', 'संविधान में प्रावधान', और 'न्यायाधीशों की सुरक्षा' जैसे मुख्य बिंदुओं को उजागर करें।
Question 2. उच्च न्यायालय का अपीली क्षेत्राधिकारः
Answer: उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में राज्य की निचली अदालतों के निर्णयों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है, इसे अपील क्षेत्राधिकार कहते हैं ।
- उच्च न्यायालय अपने अधीनस्थ न्यायालयों या ट्रिब्यूनल न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील स्वीकार कर उस पर सुनवाई करता है ।
- जिले के फौजदारी न्यायालय का न्यायाधीश जब आरोपी को उसके अपराध के बदले चार साल से अधिक की सजा सुनाई हो, तो उस फैसले के विरुद्ध पक्षकार उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है ।
- सेशन्स कोर्ट के मृत्युदण्ड के निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील हो सकती है ।
- ट्रिब्यूनल्स के फैसले से नाराज पक्षकार भी उच्च न्यायालय में अपील कर न्याय प्राप्त कर सकता है ।
In simple words: उच्च न्यायालय का अपीली क्षेत्राधिकार उसे निचली अदालतों और ट्रिब्यूनलों के फैसलों के खिलाफ अपील सुनने की शक्ति देता है। इसमें फौजदारी मामलों में चार साल से अधिक की सजा या मृत्युदंड के फैसलों के खिलाफ अपील भी शामिल है।
Exam Tip: अपीली क्षेत्राधिकार को समझाते समय, 'निचली अदालतों के विरुद्ध अपील', 'फौजदारी और सिविल मामलों में शक्ति' और 'सेशन्स कोर्ट के मृत्युदंड' जैसे उदाहरणों का उल्लेख करें।
Question 3. नजीरी अदालत:
Answer: नजीरी अदालत यानी ऐसी अदालत जिसके रिकॉर्ड्स सबूतों के रूप में महत्वपूर्ण होते हैं । जब इन प्रमाणों को प्रस्तुत किया जाता है तब इनकी वैधानिकता के समक्ष कोई विरोध नहीं कर सकता ।
- जब इन प्रमाणों को प्रस्तुत किया जाता है तब इनकी वैधानिकता के समक्ष कोई विरोध नहीं कर सकता है ।
- सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए निर्णय या चुकादे स्थायी दस्तावेज माने जाते हैं, जो सबको स्वीकार्य होते हैं ।
- इसका उपयोग अधीनस्थ न्यायालयों के मुकदमों में निर्णय के समय संदर्भ के रुप में किया जाता है । इनकी अवगणना तथा तिरस्कार करनेवाला सजा का पात्र होगा ।
In simple words: नजीरी अदालत वह अदालत है जिसके रिकॉर्ड्स को कानूनी सबूत माना जाता है। सर्वोच्च न्यायालय एक नजीरी अदालत है, जिसके फैसले सभी के लिए बाध्यकारी होते हैं और जिनका अनादर करने पर दंड मिलता है।
Exam Tip: नजीरी अदालत की परिभाषा देते समय, 'रिकॉर्ड्स को कानूनी प्रमाण', 'बाध्यकारी प्रभाव' और 'अनादर पर दंड' जैसे मुख्य तत्वों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 4. लोक अदालतें और सार्वजनिक हित के दावेः
Answer: गरीबों और शोषितों को त्वरित और सस्ता न्याय दिलाने के लिए, न्याय प्रक्रिया में होने वाले विलम्ब के निवारण के लिए लोक अदालतों का गठन किया जाता है ।
- सर्वोच्च अदालत सार्वजनिक हित के दावों को, सार्वजनिक अर्जी के रूप में, स्वीकार करने के लिए केवल पोस्टकार्ड या सामान्य पत्र द्वारा की गई शिकायत को भी ध्यान में लेती है, उसके विषय में उचित कदम उठा सकती है ।
In simple words: लोक अदालतें गरीबों को जल्दी और सस्ता न्याय प्रदान करने के लिए बनाई गई हैं, जिससे अदालती देरी कम हो। सर्वोच्च न्यायालय जनहित याचिकाओं को पोस्टकार्ड जैसी साधारण शिकायतों के रूप में भी स्वीकार करता है और उन पर आवश्यक कार्रवाई करता है।
Exam Tip: लोक अदालतों और जनहित याचिकाओं को समझाते समय, 'त्वरित और सस्ता न्याय', 'न्याय प्रक्रिया में विलंब कम करना' और 'आम नागरिकों के लिए सुलभता' जैसे बिंदुओं पर जोर दें।
Question 5. अधीनस्थ न्यायालयः
Answer: जिला न्यायालय के नीचे के न्यायालयों को अधीनस्थ न्यायालय कहा जाता है ।
- इन न्यायालयों को सिविल जज सरकार के विरुद्ध मुकदमों के अलावा विवाह, तलाक, भरण-पोषण, जमीन संपादन, मुआवजा संबंधी दावों आदि मुकदमों को सुनने की शक्ति रखता हैं ।
In simple words: अधीनस्थ न्यायालय जिला स्तर पर होते हैं और जिला न्यायालय के अधीन काम करते हैं। वे सिविल मामलों जैसे विवाह, तलाक, संपत्ति और मुआवजे से संबंधित मुकदमों की सुनवाई करते हैं।
Exam Tip: अधीनस्थ न्यायालयों पर टिप्पणी लिखते समय, 'जिला न्यायालय के अधीन', 'सिविल मामलों की सुनवाई' और 'विभिन्न प्रकार के विवादों' पर ध्यान केंद्रित करें।
4. निम्नलिखित विकल्पों में से योग्य विकल्प चुनिए:
Question 1. सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की निवृत्ति आयुसीमा है ।
(A) 65 तथा 58
(B) 65 तथा 60
(C) 60 तथा 65
(D) 65 तथा 62
Answer: (D) 65 तथा 62
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं, जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 साल की उम्र में रिटायर होते हैं।
Exam Tip: न्यायिक पदों की सेवानिवृत्ति आयु हमेशा याद रखें, क्योंकि यह एक सीधा तथ्य-आधारित प्रश्न है।
Question 2. जिला न्यायाधीशों की योग्यता के अन्तर्गत वकील के रूप में कितने वर्ष का अनुभव आवश्यक है ?
(A) तीन वर्ष
(B) सात वर्ष
(C) दस वर्ष
(B) सात वर्ष
Answer: (B) सात वर्ष
In simple words: जिला न्यायाधीश बनने के लिए वकील के रूप में कम से कम सात साल का अनुभव होना जरूरी है।
Exam Tip: न्यायिक पदों के लिए आवश्यक अनुभव वर्षों की संख्या याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. मिजोरम तथा त्रिपुरा की उच्च न्यायालय किस राज्य में स्थित है ?
(A) मेघालय
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) असम
(D) नागालैण्ड
Answer: (C) असम
In simple words: मिजोरम और त्रिपुरा का उच्च न्यायालय असम राज्य में स्थित है, जो गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
Exam Tip: पूर्वोत्तर राज्यों के न्यायिक क्षेत्राधिकारों को याद रखें, क्योंकि कई छोटे राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय होता है।
Question 4. मुफ्त कानूनी सेवा सत्ता मण्डल का मुख्य कार्यालय कहाँ स्थित है ?
(A) बडोदरा
(B) राजकोट
(C) अहमदाबाद
(D) गाँधीनगर
Answer: (C) अहमदाबाद
In simple words: मुफ्त कानूनी सेवा प्रदान करने वाले मंडल का मुख्य कार्यालय अहमदाबाद शहर में है।
Exam Tip: महत्वपूर्ण कानूनी और सरकारी निकायों के मुख्यालय के स्थानों को याद रखना सामान्य ज्ञान का हिस्सा है।
Question 5. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है ? ।
(A) प्रधानमंत्री
(B) राष्ट्रपति
(C) उपराष्ट्रपति
(D) कानून मंत्री
Answer: (B) राष्ट्रपति
In simple words: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
Exam Tip: विभिन्न उच्च पदों की नियुक्तियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और प्रक्रियाओं को हमेशा याद रखें।
Question 6. ग्राहक की शिकायत दूर करने के लिए किस संस्था की रचना की गयी है ? ।
(A) मुफ्त कानूनी सहायता
(B) दीवानी कोर्ट
(C) ग्राहक फोरम
(D) स्मॉल कॉज कोर्ट
Answer: (C) ग्राहक फोरम
In simple words: ग्राहकों की शिकायतों को सुलझाने के लिए ग्राहक फोरम नामक एक विशेष संस्था बनाई गई है।
Exam Tip: उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित संस्थाओं और उनके कार्यों को याद रखें, क्योंकि यह सामान्य नागरिक से जुड़े विषय हैं।
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