GSEB Class 9 Hindi Vyakaran संधि (1st Language) Solutions

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GSEB Std 9 Hindi Vyakaran संधि (1st Language)

संधि यानी जोड़। भाषा में दो वर्षों के मेल से जो विकार उत्पन्न होता है उसे संधि कहते हैं। हिन्दी में अधिकांश संधियाँ संस्कृत से आए तत्सम शब्दों में होती हैं। संधि में पहले पद का अंतिम वर्ण बादवाले पद के प्रथम वर्ण के मेल से संधि होती है। जैसे – विद्यालय – विद्या + आलय \( (\text{आ} + \text{आ}) \)

- वेद + अंग \( (\text{वेद} + \text{अ} + \text{अंग}) = \text{वेदांग} (\text{अ} + \text{अ} = \text{आ}) \)

संधियाँ तीन प्रकार की होती हैं – स्वर संधि, व्यंजन संधि तथा विसर्ग संधि।

स्वर संधि :

दो स्वरों के आपसी मेल के कारण जब स्वरों में परिवर्तन होता है, तो उसे स्वर संधि कहते हैं। संस्कृत में स्वर संधि के निम्नलिखित पांच भेद माने गए हैं:

  • 1. दीर्घ संधि,
  • 2. गुण संधि,
  • 3. वृद्धि संधि,
  • 4. यण संधि और
  • 5. अयादि संधि ।।

 

1. दीर्घ स्वर संधि :

जब अ, इ, उ या आ, ई, उ के साथ क्रमशः अ या आ, इ या ई, उ या ऊ आते हैं तो वे ध्वनियाँ मिलकर क्रमशः आ, ई, ऊ हो जाती हैं। ये ध्वनियाँ ह्रस्व + हस्व, ह्रस्व + दीर्घ, दीर्घ + हस्व या दीर्घ + दीर्घ हो सकती हैं। जैसे -

  • समय + अनुकूल \( (\text{अ} + \text{अ} = \text{आ}) = \text{समयानुकूल} \)
  • परम + आनंद \( (\text{अ} + \text{आ} = \text{आ}) = \text{परमानंद} \)
  • रेखा + अंश \( (\text{आ} + \text{अ} = \text{आ}) = \text{रेखांश} \)
  • प्रभा + आकर \( (\text{आ} + \text{आ} = \text{आ}) = \text{प्रभाकर} \)
  • रवि + इन्द्र \( (\text{इ} + \text{इ} = \text{ई}) = \text{रवीन्द्र} \)
  • कपि + ईश \( (\text{इ} + \text{ई} = \text{ई}) = \text{कपीश} \)
  • योगी + इन्द्र \( (\text{ई} + \text{इ} = \text{ई}) = \text{योगीन्द्र} \)
  • नदी + ईश \( (\text{ई} + \text{ई} = \text{ई}) = \text{नदीश} \)
  • सु + उक्ति \( (\text{उ} + \text{उ} = \text{ऊ}) = \text{सूक्ति} \)

 

2. गुण संधि :

जब अ या आ के बाद इ या ई हो तो दोनों मिलकर 'ए', उ या ऊ हो तो 'ओ' तथा 'ऋ' हो तो 'अर्' हो जाता हैं। जैसे :

  • सुर + इन्द्र \( (\text{अ} + \text{इ} = \text{ए}) = \text{सुरेन्द्र} \)
  • सुर + ईश \( (\text{अ} + \text{ई} = \text{ए}) = \text{सुरेश} \)
  • महा + इन्द्र \( (\text{अ} + \text{ई} = \text{ए}) = \text{महेन्द्र} \)
  • महा + ईश \( (\text{अ} + \text{ई} = \text{ए}) = \text{महेश} \)
  • पर + उपकार \( (\text{अ} + \text{उ} = \text{ओ}) = \text{परोपकार} \)
  • महा + उदय \( (\text{आ} + \text{उ} = \text{ओ}) = \text{महोदय} \)
  • गंगा + ऊर्मि \( (\text{आ} + \text{ऊ} = \text{ओ}) = \text{गंगोर्मि} \)
  • देव + ऋषि \( (\text{अ} + \text{ऋ} = \text{अर}) = \text{देवर्षि} \)
  • महा + ऋषि \( (\text{आ} + \text{ऋ} = \text{अर}) = \text{महर्षि} \)
  • राजा + ऋषि \( (\text{आ} + \text{ऋ} = \text{अर}) = \text{राजर्षि} \)

 

3. वृद्धि संधि :

यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'ए' या 'ऐ' हो तो दोनों मिलकर 'ऐ' तथा 'ओ' या 'औ' हो तो दोनों मिलकर 'औ' हो जाते हैं : जैसे –

  • एक + एक \( (\text{अ} + \text{ए} = \text{ऐ}) = \text{एकैक} \)
  • मत + ऐक्य \( (\text{अ} + \text{ऐ} = \text{ऐ}) = \text{मतैक्य} \)
  • सदा + एव \( (\text{आ} + \text{ए} = \text{ऐ}) = \text{सदैव} \)
  • महा + ऐश्वर्य \( (\text{आ} + \text{ऐ} = \text{ऐ}) = \text{महैश्वर्य} \)
  • वन + औषधि \( (\text{अ} + \text{ओ} = \text{औ}) = \text{वनौषधि} \)
  • परम + औदार्य \( (\text{अ} + \text{औ} = \text{औ}) = \text{परमोदार्य} \)
  • महा + ओषध \( (\text{आ} + \text{ओ} = \text{औ}) = \text{महौषध} \)

 

4. यण संधि :

जब ह्रस्व या दीर्घ इ, उ या ऋ के बाद कोई असवर्ण हो तो वह क्रमशः य, व् और र् हो जाता है। जैसे -

  • यदि + अपि \( (\text{इ} + \text{अ} = \text{य}) = \text{यद्यपि} \)
  • इति + आदि \( (\text{इ} + \text{आ} = \text{या}) = \text{इत्यादि} \)
  • अति + उत्तम \( (\text{इ} + \text{उ} = \text{यु}) = \text{अत्युत्तम} \)
  • नि + ऊन \( (\text{इ} + \text{ऊ} = \text{यू}) = \text{न्यून} \)
  • प्रति + एक \( (\text{इ} + \text{ए} = \text{ये}) = \text{प्रत्येक} \)
  • दधि + ओदन \( (\text{इ} + \text{ओ} = \text{यो}) = \text{दध्योदन} \)
  • सखी + ऐक्य \( (\text{ई} + \text{ऐ} = \text{यै}) = \text{सख्यैक्य} \)
  • वाणी + औचित्य \( (\text{ई} + \text{औ} = \text{यौ}) = \text{वाण्यौचित्य} \)
  • मनु + अंतर \( (\text{उ} + \text{अ} = \text{व}) = \text{मन्वंतर} \)
  • सु + आगत \( (\text{उ} + \text{आ} = \text{वा}) = \text{स्वागत} \)
  • अनु + ईक्षण \( (\text{उ} + \text{ई} = \text{वी}) = \text{अन्वीक्षण} \)
  • अनु + एषण \( (\text{उ} + \text{ए} = \text{वे}) = \text{अन्वेषण} \)
  • लघु + ओष्ठ \( (\text{उ} + \text{ओ} = \text{वो}) = \text{लघ्वोष्ठ} \)
  • गुरु + औदार्य \( (\text{उ} + \text{औ} = \text{यौ}) = \text{गुरुदार्य} \)
  • वधु + ऐषणा \( (\text{ऊ} + \text{ऐ} = \text{वै}) = \text{वध्वैषणा} \)
  • पितृ + अनुमति \( (\text{ऋ} + \text{अ} = \text{र}) = \text{पित्रनुमति} \)
  • मातृ + आज्ञा \( (\text{ऋ} + \text{आ} = \text{रा}) = \text{मात्राज्ञा} \)
  • मातृ + इच्छा \( (\text{ऋ} + \text{इ} = \text{रि}) = \text{मात्रिक्षा} \)
  • मातृ + उपदेश \( (\text{क्रऋ} + \text{उ} = \text{रु}) = \text{मात्रुपदेश} \)

 

विशेष : संस्कृत में स्वर संधि का एक भेद 'अयादि संधि' भी है। किंतु हिन्दी में इस संधि से बने शब्दों (ने + अन्- नयन, पो + अक़ = पावक तथा ने + अक = नायक) को मूल शब्द माना जाता है। फिर भी सुविधा के लिए कुछ उदाहरण यहाँ दिये जा रहे हैं।

यदि एक ही पद के अंदर यदि कोई दो भिन्न स्वर (ए, ऐ, ओ, औ के अलावा) हों तो ए का अय, ऐ का आय; ओ का अव् औ का आव् हो जाता है। यह अयादि संधि होती है।

  • ने + अन = नयन
  • नै + इका = नायिका
  • गै + अक् = गायक
  • नै + अक = नायक
  • पो + अन = पवन
  • पौ + अक = पावक
  • गै + इका = गायिका
  • भो + अन = भवन
  • भौ + उक = भावुक
  • नौ + इक = नाविक

व्यंजन संधि :

किसी व्यंजन के बाद स्वर या व्यंजन के आने से होनेवाले परिवर्तन को व्यंजन संधि कहते हैं।

व्यंजन संधि के नियम :

यदि प्रथम शब्द के अंत में अघोष व्यंजन (वर्ग के प्रथम दो वर्ण) हो और दूसरे शब्द के आरंभ में सघोष व्यंजन (वर्ग के अंतिम तीन वर्ण) हो, तो पहले शब्द के अंत में आए अघोष व्यंजन के स्थान पर उसी वर्ग का सघोष व्यंजन हो जाता है; अर्थात् 'क' का 'ग्', 'ट्' का 'ड्', 'त्' का 'द्' और 'प्' का 'ब' हो जाता है।

उदाहरण :

  • दिक् + गज = दिग्गज \( (\text{क्} + \text{ग} = \text{ग्} + \text{ग} = \text{ग्ग}) \)
  • दिक् + अंबर = दिगंबर \( (\text{क्} + \text{अ} = \text{ग}) \)
  • सत् + गति = सद्गति \( (\text{त्} + \text{ग} = \text{द्} + \text{ग}) \)
  • षट् + आनन = षडानन \( (\text{ट्} + \text{आ} = \text{डा}) \)
  • सत् + आचार = सदाचार \( (\text{त्} + \text{आ} = \text{दा}) \)

 

2. वर्गों के प्रथम वर्ण के बाद 'न्' या 'म्' वर्ण आने पर उनके स्थान पर क्रमशः उसी वर्ण का पंचमाक्षर आता है। जैसे –

  • वाक् + मय = वाङ्गय
  • सत् + मार्ग = सन्मार्ग
  • जगत् + नाथ = जगन्नाथ
  • उत् + नत = उन्नत

'त्' या 'द्' के बाद यदि 'ज्' हो, तो त्/द् 'ज्' में बदल जाता है; जैसे –

  • सत् + जन = सज्जन
  • उत् + ज्वल = उज्ज्वल

'त्' के बाद यदि 'च' हो तो 'त्' का 'च' हो जाता है; जैसे –

  • उत् + चारण = उच्चारण
  • सत् + चरित्र = सच्चरित्र
  • सत् + चित् + आनंद = सच्चिदानंद

'त्' या 'द्' के बाद 'श्' हो तो 'त'/'द' का 'च' और 'श' का 'छ' हो जाता है; जैसे –

  • उत् + श्वास = उच्छ्वास
  • उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट

के बाद हो तो 'त्’ ध्वनि 'ल' में बदल जाती है; जैसे –

  • तत् + लीन = तल्लीन
  • उत् + लास = उल्लास
  • उत् + लेख = उल्लेख

विसर्ग संधि :

पहले शब्द के अंत में आए विसर्ग के बाद कोई स्वर या व्यंजन आने के कारण जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते

 

1. विसर्ग संधि के नियम :

विसर्ग के पूर्व यदि 'अ' हो और बाद में कोई घोष व्यंजन (वर्ग के अंतिम तीन वर्ण) या य, र, ल, व हो तो विसर्ग (:) के स्थान पर 'ओ' हो जाता है; जैसे –

  • तपः + वन = तपोवन
  • मनः + भाव = मनोभाव
  • मनः + रथ = मनोरथ
  • मनः + हर = मनोहर
  • तमः + गुण = तमोगुण
  • वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
  • अधः + गति = अधोगति

अपवाद : मनः + कामना = मनोकामना (विसर्ग के बाद 'क' है जो अघोष है।)

2. विसर्ग के बाद क् ख् या प्-फ हो तो विसर्ग ज्यों का त्यों रहता है; जैसे –

  • अधः + पतन = अध:पतन
  • प्रातः + काल = प्रातःकाल
  • अंतः + करण = अंतःकरण
  • अंत: + पुर = अंतःपुर

3. विसर्ग के बाद यदि 'श' या 'स' हो तो या तो विसर्ग यथावत् रहता है अथवा विसर्ग की जगह क्रमश: श्, स् हो जाता है; जैसे –

  • दुः + शासन = दुःशासन या दुश्शासन
  • निः + संदेह = निःसंदेह या निस्संदेह
  • निः + शंक = निःशंक या निश्शंक

4. यदि विसर्ग से पहले कोई स्वर हो और बाद में कोई स्वर या सघोष व्यंजन (तीसरा, चौथा, पाँचवा वर्ण – प्रत्येक वर्ग का) तो। विसर्ग का 'र' हो जाता है; जैसे –

  • दुः + उपयोग = दुरुपयोग
  • दुः + दशा = दुर्दशा
  • निः + उपाय = निरुपाय
  • अंत: + मन = अंतर्मन
  • निः + मल = निर्मल
  • निः + आकार = निराकार
  • निः + धन = निर्धन
  • अंतः + मुख = अंतर्मुख
  • अंत: + गोल = अंतर्गोल
  • दुः + जन = दुर्जन
  • बहिः + गोल = बहिर्गोल
  • पुनः + जन्म = पुनर्जन्म

यदि विसर्ग के बाद 'च' या 'छ्' अघोष ध्वनि हो तो विसर्ग का 'श्' हो जाता है; जैसे -

  • निः + चल = निश्चल
  • हरिः + चंद्र = हरिश्चंद्र
  • निः + छल = निश्छल
  • प्रायः + चित = प्रायश्चित

6. यदि विसर्ग के पहले 'इ' या 'उ' हो और बाद में क, प या फ हो, तो विसर्ग का ए हो जाता है;

जैसे -

  • निः + कपट = निष्कपट
  • धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
  • दुः + प्रचार = दुष्प्रचार
  • चतुः + कोण = चतुष्कोण
  • निः + फल = निष्फल

यदि विसर्ग के बाद 'त्' अघोष ध्वनि हो तो विसर्ग का 'स्' हो जाता है; जैसे -

  • निः + तेज = निस्तेज
  • नमः + ते = नमस्ते

यदि 'अ' के बाद विसर्ग हो और बाद में कोई स्वर हो, तो विसर्ग का लोप हो जाता है; जैसे – अत: + एव = अतएव यदि विसर्ग के बाद 'र' हो तो विसर्ग का 'र' हो कर उसका लोप हो जाता है और विसर्ग के पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है;

जैसे -

  • निः + रोग = नीरोग
  • निः + रव = नीरव

विसर्ग संधि हिन्दी के लिए अप्रस्तुत है, किंतु अर्थबोध के लिए इसका महत्त्व है, अत: इसे जानना चाहिए।

विशेष : स्वर संधि, व्यंजन संधि तथा विसर्ग संधि के नियम हिन्दी तत्सम शब्दों (संस्कृत शब्दों) पर ही लागू होते हैं। हिन्दी में जब दो भिन्न शब्द एक ही शब्द के रूप में अथवा सामासिक पद के रूप में प्रयुक्त होते हैं; जैसे – राम + अभिलाषा = राम-अभिलाषा ही रहता है, रामाभिलाषा नहीं बनता।

हिन्दी की संधियाँ

मानक हिन्दी में अधिकांश संधियाँ संस्कृत से आए तत्सम शब्दों में हैं। इसका कारण यह है कि संस्कृत एक योग्यत्मक भाषा है। इसके विपरीत हिन्दी एक वियोगात्मक भाषा है, अत: उसमें संधियों का प्रायः अभाव-सा है। हिन्दी भाषा की संधियों में निम्नलिखित प्रवृत्तियाँ दिखलाई देती हैं :

  1. ह्रस्वीकरण
  2. दीर्धीकरण
  3. महाप्राणीकरण
  4. अल्पप्राणीकरण
  5. सामीप्य के कारण लोप
  6. सादृश्य के कारण लोप
  7. आगम

(1) ह्रस्वीकरण :

इसमें पूर्वपद के दीर्घ या संयुक्त स्वर ह्रस्व बन जाते हैं। यानी 'आ' 'अ' में 'ई' 'इ' में, 'ऊ' 'उ' में तथा 'ए' 'इ' और 'ओ' 'ऊ' में बदल गए हैं। जैसे -

  • काठ + फोड़वा = कठफोड़वा
  • आम + चूर = अमचुर
  • बात + रस = बतरस
  • हाथ + कड़ी = हथकड़ी
  • कान + पट्टी = कनपट्टी
  • लड़का + पन = लड़कपन
  • कान + कटा = कनकटा
  • बच्चा + पन = बचपन
  • कान + कौआ = कनकौआ
  • बहू + एँ = बहुएँ
  • काठ + पुतली = कठपुतली
  • चाकू + ओं = चाकुओं
  • मूंछ + कटा = मुँछकटा
  • हिन्दू + ओं = हिन्दुओं
  • छोटा + भैया = छुटभैया
  • डाकू + ओं = डाकुओं
  • एक + तारा = इकतारा
  • मीठा + बोला = मिठबोला

कभी-कभी पूर्वपद का स्वर लुप्त हो जाता है। जैसे –

  • पानी + चक्की = पनचक्की
  • घोड़ा + दौड़ = घुड़दौड़
  • पानी + घाट = पनघट
  • छोटा + पन = छुटपन
  • लेना + देना = लेन-देन

दीर्धीकरण : इस तरह की संधि में पूर्वपद का आखिरी ह्रस्व स्वर दीर्घ हो जाता है।

जैसे -

  • उत्तर + खंड = उत्तराखंड
  • दक्षिण + खंड = दक्षिणाखंड
  • मूसल + धार = मूसलाधार
  • मिलना + जुलना = मिलना-जुलना = मेल-जोल

(3) महाप्राणीकरण :

इस संधि में पूर्वपद के अल्पप्राण से उत्तर पद का महाप्राण मिलता है और उसे (अल्पप्राण को) उसी वर्ग के महाप्राण में बदल देता है।

जैसे -

  • सब + ही = सभी
  • तब + ही = तभी
  • अब + ही = अभी
  • कब + ही = कभी

 

(4) अल्प प्राणीकरण :

हिन्दी में कभी-कभी पूर्वपद के अंतिम महाप्राण ध्वनि का अल्प प्राणीकरण हो जाता है।

जैसे -

  • ताख पर – ताक पर
  • दूध वाला – दूदवाला

आगम : संधि के समय कभी-कभी दो स्वरों के बीच 'य' का आगम होता है।

जैसे -

  • रोटी + ओं = रोटियों
  • कली + ओं = कलियों
  • नदी + ओं = नदियों
  • नाली + ओं = नालियों

(6) सामीप्य के कारण लोप

  • किस + ही = किसी
  • इस + ही = इसी
  • जिस + ही = जिसी
  • विस + ही = विसी
  • इस + ही = इसी
  • उस + ही = उसी

(7) सादृश्य के कारण लोप

  • यह ही = यही
  • वह + ही = वही
  • तुम + ही = तुम्ही स्वर

परिवर्तन : यह परिवर्तन प्रायः सामासिक शब्दों में होता है; जैसे –

  • घोड़ा + सवार = घुड़सवार
  • घोड़ा + दौड़ = घुड़दौड़
  • पानी + डुब्बी = पनडुब्बी
  • पान + डब्बा = पनडब्बा

 

संधि विच्छेद

पाठ-1. दो बैलों की कथा

  • एकाध = एक + आधा
  • दुर्बल = दुः + बल
  • अनादर = अन् + आदर
  • निश्चय = निः + चय
  • संगठित = सम् + गठित
  • अनायास = अन् + आयास
  • निरापद = निर + आपद
  • उन्मत्त = उत् + मत्त

पाठ-2. ल्हासा की ओर

  • सर्वोच्च = सर्व + उच्च
  • दुर्ग = दुः + ग (गमन)
  • हिमालय = हिम + आलय
  • मनोवृत्ति = मनः + वृत्ति

पाठ-3. उपभोक्तावाद की संस्कृति

  • सम्मोहन = सम् + मोहन
  • संसाधन = सम् + साधन
  • अनंत = अन् + अंत

पाठ-4. साँवले सपनों की याद

  • पर्यावरण = परि + आवरण
  • संभव = सम् + भव
  • स्वभाव = सु + भाव
  • समर्पित = सम् + अर्पित

पाठ-5. नानासाहब की पुत्री

  • भिखमंगा = भीख + माँगना
  • दुर्ग = दुः + र्ग
  • वृद्धावस्था = वृद्ध + अवस्था
  • निरपराध = निर् + अपराध

पाठ-6. प्रेमचंद के फटे जूते

  • साहित्यिक = साहित्य + इक
  • आनुपातिक = अनुपात + इक
  • घृणित = घृणा + इत

पाठ-7. मेरे बचपन के दिन

  • वातावरण = वात (हवा) + आवरण
  • छात्रावास = छात्र + आवास (छात्रा + आवास)
  • निराहार = निर् + आहार

पाठ-8. एक कुत्ता और एक मैना

  • दर्शनार्थी = दर्शन + अर्थी
  • अनवस्था = अन् + अवस्था
  • अधिकांश = अधिक + अंश
  • दर्शनीय = दर्शन + ईय
  • अन्यान्य = अन्य + अन्य
  • उत्तरायण = उत्तर + अयन

अभ्यासार्थ

 

1. (क) संधि कीजिए।
(1) विद्या + अर्थी
(2) देव + आलय
(3) नर + अधम
(4) विद्या + आलय
(5) गिरि + इंद्र
(6) गिरि + ईश
(7) रजनी + ईश
(8) वेद + अंत
(9) सत्य + आग्रह
(10) दया + आनंद
(11) रवि + इन्द्र
(12) नदी + ईश
(13) मही + ईश
(14) लघु + उत्तर
(15) भानु + उदय
(16) वधू + ऊर्जा
(17) वधू + उत्सव
(18) देव + ईश
(19) सुर + इंद्र
(20) देव + ऋषि
(21) महा + ऋषि
(22) पर + उपकार
(23) महा + इंद्र
(24) जल + ऊर्मि
(25) महा + उत्सव
(26) उमा + ईश
(27) एक + एक
(28) परम + ईश्वर
(29) सदा + एव
(30) वन + ओषध
(31) महा + ऐश्वर्य
(32) यदि + अपि
(33) अति + आचार
(34) वि + आपक
(35) अति + अंत
(36) पितृ + आज्ञा
(37) अनु + एषण
(38) सु + अच्छ
(39) सु + आगत
(40) देवी + आगमन
(41) प्रति + एक
(42) अति + अधिक
(43) प्रति + उपकार
(44) इति + आदि
(45) मत + ऐक्य
(46) वि + आप्त
(47) नव + ऊढ़ा
(48) वीर + उचित
(49) रमा + इंद्र
(50) वीर + अंगना
Answer:
(1) विद्यार्थी
(2) देवालय
(3) नराधम
(4) विद्यालय
(5) गिरीन्द्र
(6) गिरीश
(7) रजनीश
(8) वेदांत
(9) सत्याग्रह
(10) दयानंद
(11) रवीन्द्र
(12) नदीश
(13) महीश
(14) लघूत्तर
(15) भानूदय
(16) वधूर्जा
(17) वधूत्सव
(18) देवेश
(19) सुरेन्द्र
(20) देवर्षि
(21) महर्षि
(22) परोपकार
(23) महेन्द्र
(24) जलोर्मि
(25) महोत्सव
(26) उमेश
(27) एकैक
(28) परमेश्वर
(29) सदैव
(30) वनौषध
(31) महैश्वर्य
(32) यद्यपि
(33) अत्याचार
(34) व्यापक
(35) अत्यंत
(36) पित्राज्ञा
(37) अन्वेषण
(38) स्वच्छ
(39) स्वागत
(40) देव्यागमन
(41) प्रत्येक
(42) अत्यधिक
(43) प्रत्युपकार
(44) इत्यादि
(45) मतैक्य
(46) व्याप्त
(47) नवोढ़ा
(48) वीरोचित
(49) रमेन्द्र
(50) वीरांगना

 

(ख) संधि विच्छेद कीजिए :
(1) दिग्गज
(2) दिगंबर
(3) षडानन
(4) सद्गुण
(5) भगवद्गीता
(6) चिदानंद
(7) सुबन्त
(8) जगन्नाथ
(9) उल्लेख
(10) सज्जन
(11) उच्छ्वास
(12) सच्चरित्र
(13) मनोभाव
(14) निराशा
(15) अंतर्मुखी
(16) निष्पक्ष
(17) दुष्कर्म
(18) दुशासन
(19) निष्कपट
(20) निश्चल
Answer:
(1) दिक् + गज
(2) दिक् + अम्बर
(3) षट् + आनन
(4) सत् + गुण
(5) भगवत् + गीता
(6) चित् + आनंद
(7) सुप् + अंत
(8) जगत् + नाथ
(9) उत् + लेख
(10) सत् + जन
(11) उत् + श्वास
(12) सत् + चरित्र
(13) मनः + भाव
(14) निः + आशा
(15) अंतः + मुखी
(16) निः + पक्ष
(17) दुः + कर्म
(18) दुः + शासन
(19) निः + कपटी
(20) निः + चल

Exam Tip: Remember that 'षट्' is commonly used for 'छ:' in compounds. Practice identifying the root words and the correct prefixes/suffixes for accurate sandhi-vichhed.

 

Question 2. (क) संधि कीजिए :
(1) विद्या + अर्थी
(2) देव + आलय
(3) नर + अधम
(4) विद्या + आलय
(5) गिरि + इंद्र
(6) गिरि + ईश
(7) रजनी + ईश
(8) वेद + अंत
(9) सत्य + आग्रह
(10) दया + आनंद
(11) रवि + इन्द्र
(12) नदी + ईश
(13) मही + ईश
(14) लघु + उत्तर
(15) भानु + उदय
(16) वधू + ऊर्जा
(17) वधू + उत्सव
(18) देव + ईश
(19) सुर + इंद्र
(20) देव + ऋषि
(21) महा + ऋषि
(22) पर + उपकार
(23) महा + इंद्र
(24) जल + ऊर्मि
(25) महा + उत्सव
(26) उमा + ईश
(27) एक + एक
(28) परम + ईश्वर
(29) सदा + एव
(30) वन + ओषध
(31) महा + ऐश्वर्य
(32) यदि + अपि
(33) अति + आचार
(34) वि + आपक
(35) अति + अंत
(36) पितृ + आज्ञा
(37) अनु + एषण
(38) सु + अच्छ
(39) सु + आगत
(40) देवी + आगमन
(41) प्रति + एक
(42) अति + अधिक
(43) प्रति + उपकार
(44) इति + आदि
(45) मत + ऐक्य
(46) वि + आप्त
(47) नव + ऊढ़ा
(48) वीर + उचित
(49) रमा + इंद्र
(50) वीर + अंगना
Answer:
(1) विद्यार्थी
(2) देवालय
(3) नराधम
(4) विद्यालय
(5) गिरीन्द्र
(6) गिरीश
(7) रजनीश
(8) वेदांत
(9) सत्याग्रह
(10) दयानंद
(11) रवीन्द्र
(12) नदीश
(13) महीश
(14) लघूत्तर
(15) भानूदय
(16) वधूर्जा
(17) वधूत्सव
(18) देवेश
(19) सुरेन्द्र
(20) देवर्षि
(21) महर्षि
(22) परोपकार
(23) महेन्द्र
(24) जलोर्मि
(25) महोत्सव
(26) उमेश
(27) एकैक
(28) परमेश्वर
(29) सदैव
(30) वनौषध
(31) महैश्वर्य
(32) यद्यपि
(33) अत्याचार
(34) व्यापक
(35) अत्यंत
(36) पित्राज्ञा
(37) अन्वेषण
(38) स्वच्छ
(39) स्वागत
(40) देव्यागमन
(41) प्रत्येक
(42) अत्यधिक
(43) प्रत्युपकार
(44) इत्यादि
(45) मतैक्य
(46) व्याप्त
(47) नवोढ़ा
(48) वीरोचित
(49) रमेन्द्र
(50) वीरांगना

Exam Tip: For 'संधि कीजिए' questions, pay close attention to the specific rules for स्वर, व्यंजन, and विसर्ग संधि. Identifying the type of sandhi first helps you apply the correct transformation.

 

Question 2. (ख) संधि कीजिए :
(1) निः + तेज
(2) निः + छल
(3) धनुः + टंकार
(4) दुः + उपयोग
(5) निर् + रस
(6) निर् + रोग
(7) दुः + गति
(8) निः + संदेह
(9) निः + गुण
(10) मनः + हर
(11) अधः + गति
(12) अतः + एव
Answer:
(1) निस्तेज
(2) निश्छल
(3) धनुष्टंकार
(4) दुरुपयोग
(5) नीरस
(6) नीरोग
(7) दुर्गति
(8) निस्संदेह
(9) निर्गुण
(10) मनोहर
(11) अधोगति
(12) अतएव

Exam Tip: In 'संधि कीजिए', observe the changes occurring at the juncture of the two words. For example, 'निः' often converts to 'निश्', 'निस्', or drops out with lengthening of the preceding vowel depending on the following letter.

 

Question 3. संधि विच्छेद कीजिए :
(1) वयोवृद्ध
(2) दुर्भावना
(3) निराकार
(4) दुष्प्रकृति
(5) निस्संदेह
(6) मनोयोग
(7) निष्पाप
(8) निश्चल
(9) स्वच्छंद
(10) संयोग
(11) संदेह
(12) उच्छिष्ट
(13) उन्मत्त
(14) तन्मय
(15) उन्मुख
(16) निष्ठुर
(17) दिग्दर्शन
(18) अन्वय
(19) ममेरा
(20) कंठोष्ठ्य
Answer:
(1) वयः + वृद्ध
(2) दुः + भावना
(3) निः + आकार
(4) दुः + प्रकृति
(5) निः + संदेह
(6) मनः + योग
(7) निः + पाप
(8) निः + चल
(9) उत् + शिष्ट
(10) सम् + योग
(11) सम् + देह
(12) उत् + शिष्ट
(13) उत् + मत्त
(14) तत् + मय
(15) उत् + मुख
(16) निः + तुर
(17) दिक् + दर्शन
(18) अनु + अय
(19) मामा + एरा
(20) कंठ + ओष्ठ

Exam Tip: When doing 'संधि विच्छेद', try to find the original root words and then apply the inverse sandhi rules. This helps in correctly splitting the combined word.

 

स्वयं हल कीजिए : 1. संधि विच्छेद कीजिए :
Answer:
सदाचार = सत् + आचार
महेश = महा + ईश
राजर्षि = राजा + ऋषि
चंद्रोदय = चंद्र + उदय
प्रत्यूष = प्रति + ऊष
अधःपतन = अधः + पतन
अनंत = अन् + अंत
दिगंत = दिक् + अंत
मतानुसार = मत + अनुसार
मनोरोगी = मनः + रोगी
यशोदा = यशः + दा
संतुष्ट = सम् + तुष्ट
समादर = सम् + आदर
निर्जन = निः + जन
निर्मल = निः + मल
दुर्जन = दुः + जन
उल्लेख = उत् + लेख
सप्तर्षि = सप्त + ऋषि
सुरेन्द्र = सुर + इंद्र
दिवाकर = दिवा + कर
निस्संदेह = निः + संदेह
In simple words: To do sandhi-vichhed, you need to break down the combined word into its original two parts. This involves recognizing the specific sound changes that happened when the words were joined together.

Exam Tip: For 'स्वयं हल कीजिए' sections, practice is key. Try to identify the core components of each word and recall the specific sandhi rules that apply to vowel (स्वर), consonant (व्यंजन), and visarga (विसर्ग) changes.

 

2. संधि कीजिए :
Answer:
निः + उपाय = निरुपाय
दुः + दशा = दुर्दशा
नी + रोग = नीरोग
निः + फल = निष्फल
पुनः + चर्चा = पुनश्चर्चा
नमः + शिवाय = नमःशिवाय
सम् + कृति = संस्कृति
उत् + थान = उत्थान
नमः + कार = नमस्कार
यशः + दा = यशोदा
तपः + मय = तपोमय
मनः + नय = मनोमय
उत्तर + अयन = उत्तरायण
सम् + तोष = संतोष
मनः + रथ = मनोरथ
उत् + चारण = उच्चारण
विः + सम = विषम
उत्तम + अंश = उत्तमांश
स्व + ईर = स्वर
अभि + इष्ट = अभीष्ट
पितृ + ऋण = पितृण
कुश + आसन = कुशासन
क्षिति + ईश = क्षितीश
उप + इंद्र = उपेंद्र
आज्ञा + अनुपालन = आज्ञानुपालन
अधि + ईश्वर = अधीश्वर
पूर्ण + इंदु = पूर्णेन्दु
व्यवस्था + अनुसार = व्यवस्थानानुसार
देवी + इच्छा = देवीच्छा
परम + ईश्वर = परमेश्वर
दीक्षा + अंत = दीक्षांत
मही + ईश = महीश
यथा + इष्ट = यथेष्ट
दिन + अंत = दिनांत
नदी + ईश = नदीश
राका + ईश = राकेश
पद + आघात = पदाघात
पृथ्वी + ईश्वर = पृथ्वीश्वर
नील + उत्पल = नीलोत्पल
वार्ता + आलाप = वार्तालाप
धातु + ऊष्मा = धातूष्मा
जल + ऊर्मि = जलोर्मि
महा + औदार्य = महौदार्य
महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
सदा + एव = सदैव
यदि + अपि = यद्यपि
प्रति + उपकार = प्रत्युपकार
नि + ऊन = न्यून
दधि + ओदन = दध्योदन
वधू + आगमन = वध्वागमन
जगत् + हित = जगद्धित
जगत् + गुरु = जगद्गुरु
दिक् + नाम = दिङ्नाम
उत् + लास = उल्लास
ऋक् + वेद = ऋग्वेद
उत् + मत्त = उन्मत्त
तत् + पर = तत्पर
उत् + श्वास = उच्छ्वास
सम् + कलन = संकलन
सम् + तोष = संतोष
सम् + हार = संहार
अभि + सेक = अभिषेक
सु + सुप्त = सुषुप्त
सम् + अयन = समयन
In simple words: To combine words using sandhi, you need to follow specific rules for how sounds change when they meet. This means identifying the type of sandhi and applying the correct sound transformation.

Exam Tip: Remember that combining words with sandhi often changes vowels or consonants at the joining point. Pay careful attention to the specific transformations, such as 'निः' becoming 'निस्' or 'निर', or vowels combining to form a different, longer vowel.

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