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Detailed Chapter 09 सानियाँ एवं सबद GSEB Solutions for Class 9 Hindi
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Class 9 Hindi Chapter 09 सानियाँ एवं सबद GSEB Solutions PDF
प्रश्न-अभ्यास
Question 1. 'मानसरोवर' से कवि का क्या आशय है ?
Answer: 'मानसरोवर' से कवि का मतलब हृदयरूपी पवित्र सरोवर से है, जो हमारे हृदय में है।
In simple words: कवि के अनुसार, 'मानसरोवर' का अर्थ मन का पवित्र तालाब है जो हमारे दिल में बसा है।
Question 2. कवि ने सच्चे प्रेमी की क्या कसौटी बताई है ?
Answer: कवि सच्चे प्रेमी की पहचान बताते हुए कहते हैं कि उससे मिलने से मन की जहरीली सभी बुराइयाँ मिट जाती हैं और अच्छी भावनाएँ पैदा हो जाती हैं।
In simple words: कवि कहते हैं कि सच्चे प्रेमी से मिलने पर मन की सभी बुराइयाँ खत्म हो जाती हैं और अच्छी भावनाएँ आती हैं।
Question 3. तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्त्व दिया है ?
Answer: तीसरे दोहे में कवि ने वास्तविक ज्ञान पाने को महत्व दिया है। जिसे हासिल करने के बाद नम्रता आ जाती है। लोगों की आलोचना का प्रभाव नहीं पड़ता है।
In simple words: कवि ने सच्चे ज्ञान को महत्व दिया है, जिसे पाने पर विनम्रता आती है और लोगों की आलोचना का कोई असर नहीं होता।
Question 4. इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है ?
Answer: इस दुनिया में असली संत वही है जो मोह और माया की भावनाओं से दूर रहता है और धार्मिक लड़ाइयों में शामिल न होकर शुद्ध मन से ईश्वर की भक्ति करता है।
In simple words: सच्चा संत वह है जो दुनिया के मोह और माया से दूर रहकर, धार्मिक झगड़ों में फंसे बिना, साफ मन से भगवान की पूजा करता है।
Question 5. अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने किस तरह की संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है ?
Answer: अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने निम्नलिखित संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है
- अपने धर्म को सबसे अच्छा समझना और दूसरों के धर्म की बुराई करना। राम-रहीम के भेद में पड़कर अपने भगवान को नहीं पहचानना।
- काम के महत्व को न समझकर ऊँचे परिवार के घमंड में जीना।
In simple words: कबीर ने बताया है कि लोग अपने धर्म को श्रेष्ठ मानकर दूसरों की निंदा करते हैं, और राम-रहीम में भेद करते हैं। साथ ही, वे कर्म के बजाय ऊँचे कुल के घमंड में जीते हैं।
Question 6. किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कुल से होती है या उसके कर्मों से ? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Answer: दुनिया में जितने भी महान लोग हुए हैं, उन्हें आज हम याद करते हैं क्योंकि उनके अच्छे कामों की वजह से, न कि उनके ऊँचे परिवार में जन्म लेने के कारण। यदि बड़प्पन का पैमाना ऊँचा कुल होता, तो ऊँचे परिवार में पैदा होने वाले सभी लोग महान होते, पर ऐसा नहीं है। कबीर, सूर, तुलसी जैसे संत साधारण परिवारों में पैदा हुए थे, उनका बचपन मुश्किल भरा था। फिर भी वे अपने उत्तम कामों के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए। इसलिए यह सच है कि इंसान की पहचान उसके परिवार से नहीं, बल्कि उसके कामों से होती है।
In simple words: इंसान की पहचान उसके ऊँचे परिवार से नहीं, बल्कि उसके अच्छे कामों से होती है। कबीर जैसे महान लोग भी साधारण परिवार से थे, पर उन्होंने अपने कामों से नाम कमाया।
Question 7. काव्यसौन्दर्य स्पष्ट कीजिए – हस्ती चढ़िए ज्ञान को, सहज दुलीचा डारि। स्वान रूप संसार है, भूखन दे झन मारि।।
Answer: इस दोहे में ज्ञान को हाथी और दुनिया को कुत्ते से तुलना करके ज्ञान का महत्व बताया गया है। कबीर कहते हैं कि इंसान को ज्ञानरूपी हाथी की सवारी सरलता से बिछाकर करनी चाहिए। अगर कुत्ते जैसा संसार उसकी बुराई करता है, तो उसे उसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। यहाँ रूपक अलंकार का इस्तेमाल किया गया है। यह एक दोहा छंद है। इसमें 'हस्ती', 'स्वान', 'ज्ञान' जैसे संस्कृत के शब्द प्रयोग हुए हैं। दोहे की भाषा सधुक्कड़ी है। यहाँ सरल ज्ञान को महत्व दिया गया है।
In simple words: कबीर कहते हैं कि हमें ज्ञान के रास्ते पर आसानी से चलना चाहिए, जैसे हाथी चलता है। दुनिया कुत्ते जैसी है, जो बिना मतलब भौंकती रहती है, हमें उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए।
सबद
Question 8. मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढ़ता फिरता है ?
Answer: इंसान भगवान को मंदिर, मस्जिद, काबा, काशी, कैलाश जैसे पवित्र स्थानों और योग, वैराग्य व अन्य कई धार्मिक कामों में खोजता रहता है।
In simple words: लोग भगवान को मंदिर, मस्जिद, तीर्थों और धार्मिक कामों में ढूंढते रहते हैं।
Question 9. कबीर ने ईश्वर-प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है ?
Answer: कबीर ने ईश्वर-प्राप्ति के लिए निम्नलिखित प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है
- लोग मंदिरों में पूजा-पाठ और मस्जिदों में नमाज़ पढ़कर भगवान को पाना चाहते हैं, परन्तु भगवान नहीं मिलते हैं।
- लोग काबा, काशी, कैलाश जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा करके भगवान को ढूंढना चाहते हैं, पर भगवान वहाँ भी उपलब्ध नहीं होते हैं।
- लोग योग करके या संन्यासी बनकर भगवान को पाने की कोशिश करते हैं, फिर भी भगवान नहीं मिल पाते।
- धार्मिक रीति-रिवाजों से भी इंसान को भगवान नहीं मिलते हैं।
In simple words: कबीर ने मंदिरों, मस्जिदों में पूजा करने, तीर्थ यात्रा करने, योग करने और कर्मकांडों से भगवान मिलने के विश्वास को गलत बताया है।
Question 10. कबीर ने ईश्वर को 'सब स्वाँसों की स्वाँस में' क्यों कहा है ?
Answer: भगवान सभी जीवों में मौजूद हैं। जब तक वह हैं तभी तक जीव का जीवन है, इसलिए कबीर ने भगवान को 'सब साँसों की साँस' कहा है।
In simple words: कबीर ने कहा कि भगवान सभी के अंदर हैं, हर साँस में हैं, क्योंकि भगवान के बिना जीवन नहीं है।
Question 11. कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न करके आँधी से क्यों की है ?
Answer: कबीर ने ज्ञान के आने की तुलना सामान्य हवा से नहीं बल्कि आँधी से की है क्योंकि साधारण हवा में वह ताकत नहीं होती जो हालात बदल सके, लेकिन आँधी अपने साथ बहुत सी छोटी-बड़ी चीजें उड़ा ले जाती है। इसी तरह जब ज्ञान की आँधी चलती है, तो इंसान के मन की अज्ञानता और बुराइयों को अपने साथ उड़ाकर ले जाती है, यानी उसका मन माया, मोह, स्वार्थ जैसी सभी खराब आदतों से आज़ाद हो जाता है और उसका मन भगवान की भक्ति में लग जाता है।
In simple words: कबीर ने ज्ञान को आँधी जैसा बताया क्योंकि साधारण हवा चीजें नहीं बदलती, पर आँधी सब उड़ा ले जाती है। वैसे ही, ज्ञान की आँधी मन की अज्ञानता और बुराइयों को खत्म करके उसे पवित्र कर देती है।
Question 12. ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर यह असर होता है कि उसके मन का भ्रम खत्म हो जाता है, अज्ञानता समाप्त हो जाती है। वह दुनिया की मोह-माया से आज़ाद होकर भगवान की भक्ति में डूब जाता है।
In simple words: ज्ञान की आँधी से भक्त के मन का भ्रम और अज्ञान दूर होता है, और वह सांसारिक मोह छोड़कर भगवान की भक्ति में लीन हो जाता है।
Question 13. भाव स्पष्ट कीजिए। क. हिति चित्त की है चूंनी गिरानी, मोह बलिंडा तूटा। ख. आँधी पीछे जो जल बूठा, प्रेम हरिजन भींनाँ।
Answer:
(क) यहाँ ज्ञान की आँधी के कारण इंसान के मन का भ्रम और अज्ञान का पर्दा हट गया, जिससे इंसान के स्वार्थ के दोनों खंभे गिर गए और मोह की बल्ली भी टूट गई। इससे उसकी इच्छाओं का छप्पर टूटकर बिखर गया। उसके मन की बुराइयाँ खत्म हो गईं और मन साफ़ हो गया।
(ख) ज्ञानरूपी आँधी के बाद भक्तिरूपी ज्ञान की बारिश से मन प्रेम के पानी में भीग गया और भक्त खुश हो गया, मतलब ज्ञान मिलने के बाद मन शुद्ध हो जाता है।
In simple words: (क) ज्ञान की आँधी से मन के स्वार्थ, मोह और इच्छाओं के बंधन टूट गए, और मन की बुराइयाँ खत्म होकर मन साफ हो गया। (ख) ज्ञान के बाद भक्ति का प्रेम बरसा, जिससे भक्त का मन आनंदित और पवित्र हो गया।
रचना और अभिव्यक्ति
Question 14. संकलित साखियों और पदों के आधार पर कबीर के धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव संबंधी विचारों पर प्रकाश डालिए।
Answer: कबीर ने धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव पर बहुत जोर दिया है। उन्होंने बताया कि सभी धर्म एक ही ईश्वर तक पहुँचने के अलग-अलग रास्ते हैं। कबीर ने राम और रहीम को एक ही माना है, और वे किसी भी तरह के धार्मिक भेदभाव के खिलाफ थे। उनका मानना था कि इंसान को दिखावे और कर्मकांड छोड़कर सच्ची भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने समाज को एकता और प्रेम का संदेश दिया।
In simple words: कबीर ने सभी धर्मों को एक जैसा बताया। उन्होंने कहा कि राम और रहीम एक ही भगवान हैं और हमें बिना भेदभाव के सच्ची भक्ति करनी चाहिए। वह चाहते थे कि लोग मिलजुल कर रहें।
भाषा-अध्ययन
Question 15. निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रुप लिखिए। पखापखी, अनत, जोग, जगति, बैराग, निरपख
Answer:
- शब्द – तत्सम रूप
- पखापखी – पक्ष-विपक्ष
- अनत – अन्यत्र
- जोग – योग
- जुगति – युक्ति
- बैराग – वैराग्य
- निरपख – निष्पक्ष
In simple words: इन शब्दों के संस्कृत रूप इस प्रकार हैं: पखापखी का 'पक्ष-विपक्ष', अनत का 'अन्यत्र', जोग का 'योग', जुगति का 'युक्ति', बैराग का 'वैराग्य', और निरपख का 'निष्पक्ष' है।
अतिरिक्त प्रश्न
Question 1. 'प्रेमी मिले न कोय' – कबीर ऐसा क्यों कहते हैं ?
Answer: 'प्रेमी मिले न कोय' कबीर ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि दुनिया में सच्चे भगवान के भक्त बहुत कम हैं, अधिकतर लोग भक्ति का दिखावा करते हैं।
In simple words: कबीर कहते हैं कि उन्हें कोई सच्चा भक्त नहीं मिलता, क्योंकि अधिकतर लोग केवल भक्ति का दिखावा करते हैं।
Question 2. मानसरोवर के लबालब भरे जल में कौन क्या कर रहा है,
Answer: मानसरोवर के भरे हुए पानी में हंस खेल रहे हैं।
In simple words: मानसरोवर के भरे पानी में हंस क्रीड़ा कर रहे हैं।
Question 3. कबीर ने किसकी परवाह किए बिना प्रभु-भक्ति की प्रेरणा दी है ?
Answer: कबीर ने दुनिया की परवाह किए बिना भगवान की भक्ति करने की प्रेरणा दी है।
In simple words: कबीर ने संसार की परवाह किए बिना भगवान की भक्ति करने के लिए प्रेरित किया है।
Question 4. 'निरपन' का क्या अर्थ है ?
Answer: 'निरपख' का मतलब निष्पक्ष होता है।
In simple words: 'निरपख' का अर्थ है बिना किसी भेदभाव के।
Question 5. कबीर ने परमात्मा का निवास कहाँ बताया है ?
Answer: कबीर ने भगवान का वास इंसान की हर साँस में बताया है।
In simple words: कबीर कहते हैं कि भगवान हर इंसान की साँस में निवास करते हैं।
Question 6. 'काबा फिरि कासी भया' से क्या तात्पर्य है ?
Answer: 'काबा फिरि कासी भया' का अर्थ यह है कि इंसान के मन में राम और रहीम के बीच का फर्क खत्म हो गया।
In simple words: इसका मतलब है कि जब इंसान के मन से धार्मिक भेदभाव दूर हो जाता है, तो काबा और काशी में कोई अंतर नहीं रहता।
Question 7. 'सब स्वाँसों की स्वाँस में' अलंकार पहचानिए।
Answer: 'सब साँसों की साँस में' इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार मौजूद है।
In simple words: इस पंक्ति में 'स' वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।
भावार्थ और अर्थबोधन संबंधी प्रश्न
1. मानसरोवर सुभर जल, हंसा केलि कराहिं। मुकताफल मुकता चुर्गं, अब उड़ि अनत न जाहिं ।।1।।
भावार्थ : मानसरोवर स्वच्छ जल से अच्छी तरह भरा हुआ है। उसमें हंस क्रीडा करते हुए मोतियों को चुग रहे हैं। वे इस आनंददायक जगह को छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहते हैं। तात्पर्य यह कि जीवात्मा प्रभुभक्ति में जब लीन हो जाती है, तो उस सुख को छोड़कर उसे कहीं और सुख नहीं मिलता है।
Question 1. मानसरोवर में क्या भरा हुआ है ?
Answer: मानसरोवर में साफ़ पानी भरा हुआ है।
In simple words: मानसरोवर में स्वच्छ जल भरा है।
Question 2. हंस अन्यत्र क्यों नहीं जाना चाहते हैं ?
Answer: हंस मानसरोवर में खेलते हुए मोती चुन रहे हैं, इसलिए वे कहीं और नहीं जाना चाहते हैं।
In simple words: हंस मानसरोवर में मोती चुन रहे हैं और उन्हें वहाँ बहुत आनंद मिल रहा है, इसलिए वे कहीं और नहीं जाना चाहते।
Question 3. मानसरोवर किसका प्रतीक है ? उसकी क्या विशेषता है ?
Answer: मानसरोवर इंसान के मनरूपी तालाब का प्रतीक है। मनरूपी तालाब में ईश्वर की भक्ति और आनंद का साफ़ पानी भरा है, जहाँ से हंस जैसा जीव भक्तिरूपी मोती चुन रहा है और कहीं और नहीं जाना चाहता।
In simple words: मानसरोवर मन का प्रतीक है, जहाँ प्रभु की भक्ति का आनंद है। जीव इस आनंद को छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहता।
Question 4. हंस क्या कर रहे हैं ? वे कहीं और क्यों नहीं जाना चाह रहे हैं ?
Answer: हंस मानसरोवर के साफ़ पानी में खेल रहे हैं। वे मोती चुन रहे हैं। यह आनंद उन्हें कहीं और नहीं मिल सकता, क्योंकि मानसरोवर के अलावा किसी और तालाब में मोती नहीं होते हैं।
In simple words: हंस मानसरोवर में खेलते हुए मोती चुन रहे हैं। उन्हें यह आनंद कहीं और नहीं मिल सकता, इसलिए वे कहीं नहीं जाना चाहते।
Question 5. 'हंसा केलि कराहिं।' में कौन-सा अलंकार है ?
Answer: 'हंसा केलि कराहिं।' में 'क' अक्षर बार-बार आने के कारण अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: इस पंक्ति में 'क' वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
2. प्रेमी ढूँढत मैं फिरौं, प्रेमी मिले न कोइ। प्रेमी की प्रेमी मिलै, सब विष अमृत होइ ।।2।।
भावार्थ : कबीर कहते हैं कि मैं प्रेमी अर्थात् प्रभु-भक्त को ढूंढ रहा था, परन्तु अपने अहंकार के कारण मुझे कोई प्रभु-भक्त नहीं मिला। लेकिन जब एक प्रभु-भक्त से दूसरा प्रभु-भक्त मिलता है तो हृदय में मौजूद सभी जहरीली बुराइयाँ अमृतरूपी अच्छाइयों में बदल जाती हैं।
Question 1. 'प्रेमी' किसे कहा गया है ?
Answer: ईश्वर के भक्त को प्रेमी कहा गया है।
In simple words: प्रेमी का अर्थ है सच्चा भक्त, जो भगवान से प्रेम करता है।
Question 2. कवि किसे ढूँढ रहा है ? वह सफल क्यों नहीं हो रहा है ?
Answer: कवि ईश्वर के भक्त को ढूंढ रहा है। सच्चे भक्त बहुत कम हैं, ज़्यादातर लोग भक्ति का दिखावा करते हैं, इसीलिए वह अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो पा रहा है।
In simple words: कवि सच्चे भक्त को ढूंढ रहे हैं, पर उन्हें ऐसे लोग नहीं मिल रहे क्योंकि ज़्यादातर लोग सिर्फ भक्ति का दिखावा करते हैं।
Question 3. प्रेमी से प्रेमी मिलने पर क्या असर होता है ?
Answer: प्रेमी का मतलब सच्चा भगवान का भक्त। जब दो सच्चे भक्त एक-दूसरे से मिलते हैं, तो उनके दिल की सभी बुराइयाँ खत्म हो जाती हैं और उन खराब आदतों की जगह अच्छी बातें आ जाती हैं।
In simple words: जब दो सच्चे भक्त मिलते हैं, तो उनके मन की सारी बुराइयाँ दूर हो जाती हैं और अच्छाइयाँ उनकी जगह ले लेती हैं।
Question 4. 'प्रेमी ढूँढ़त मैं फिरौं' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
Answer: 'प्रेमी ढूँढ़त मैं फिरौं' इस पंक्ति में श्लेष अलंकार है। यहाँ 'प्रेमी' शब्द के दो अर्थ निकलते हैं - प्रेम करने वाला व्यक्ति और सच्चा ईश्वर भक्त।
In simple words: इस पंक्ति में 'प्रेमी' शब्द के दो अर्थ होने के कारण श्लेष अलंकार है, यह प्रेम करने वाले और भगवान के भक्त दोनों को दर्शाता है।
3. हस्ती चढ़िए ज्ञान को, सहज दुलीचा डारि। स्वान रूप संसार है, पूँकन दे झख मारि ।।3।।
भावार्थ : कबीर कहते हैं कि तुम ज्ञानरूपी हाथी पर सरलता से कालीन बिछाकर अपने रास्ते पर बेफिक्र होकर चलते रहो। यह दुनिया कुत्ते जैसी है जो हाथी को चलते देखकर बिना कारण भौंकती रहती है। इसका मतलब है कि ज्ञान पाने में लगे व्यक्ति को देखकर दुनिया के लोग उसकी बुराई करते रहते हैं, पर उसे दुनिया वालों की आलोचना की परवाह नहीं करनी चाहिए।
Question 1. संसार को किस तरह बताया गया है ?
Answer: दुनिया को कुत्ते के जैसा बताया गया है, जो बिना किसी कारण के किसी की आलोचना करता रहता है।
In simple words: संसार को भौंकते हुए कुत्ते के समान बताया गया है, जो बिना वजह निंदा करता रहता है।
Question 2. ज्ञान-प्राप्ति के मार्ग में कबीर ने किसे आवश्यक माना है ?
Answer: ज्ञान पाने के रास्ते में कबीर ने सरलता को ज़रूरी बताया है।
In simple words: ज्ञान पाने के लिए कबीर ने सहजता और सरलता को बहुत ज़रूरी माना है।
Question 3. अंतिम पंक्ति में कबीर क्या कहते हैं ?
Answer: आखिरी पंक्ति में कबीर कहते हैं कि साधक को लोगों की बुराई की चिंता किए बिना ज्ञान पाने के रास्ते पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
In simple words: अंतिम पंक्ति में कबीर कहते हैं कि ज्ञान पाने वाले को लोगों की निंदा की परवाह किए बिना अपने मार्ग पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
Question 4. कबीर ने ज्ञान-प्राप्ति का क्या उपाय बताया है ?
Answer: कबीर ज्ञान पाने का तरीका बताते हुए कहते हैं कि साधक को ज्ञानरूपी हाथी की सवारी सरलता से कालीन बिछाकर करनी चाहिए। उसे कभी किसी की बुराई की चिंता नहीं करनी चाहिए।
In simple words: कबीर कहते हैं कि ज्ञान पाने के लिए सरलता से ज्ञान के मार्ग पर चलते रहना चाहिए और लोगों की निंदा को अनदेखा करना चाहिए।
Question 5. दो तत्सम शब्द ढूँढकर लिखिए।
Answer: तत्सम शब्द हैं – (1) हस्ती (हाथी) (2) ज्ञान (जानकारी)
In simple words: इस दोहे से दो तत्सम शब्द हैं: 'हस्ती' और 'ज्ञान'।
4. पखापखी के कारनँ, सब जग रहा भुलान। निरपन होइ के हरि भजै, सोई संत सुजान ।।4
भावार्थ : पक्ष और विपक्ष के चक्कर में पड़कर लोग जाति, धर्म और संप्रदाय में बंट गए हैं। वे अपने पक्ष को उत्तम मानते हैं और दूसरे की आलोचना करते हैं। इसी दुनियावी झमेले में पड़कर वे अपने जीवन का सही मकसद भूल गए हैं। कबीर कहते हैं कि जो धर्म-संप्रदाय के झगड़ों में फंसे बिना भगवान की भक्ति करते हैं, असल में वही संत और ज्ञानी हैं।
Question 1. पनापनी के कारण संसार की क्या स्थिति हो गई है ?
Answer: पखापखी के कारण दुनिया जाति, धर्म और समुदाय में बंट गई है। लोग अपने असली मकसद से भटक गए हैं। वे अपने पक्ष को सबसे अच्छा मानते हैं और दूसरों की बुराई करते हैं।
In simple words: पक्ष और विपक्ष के कारण दुनिया जाति और धर्म में बंट गई है, लोग अपना असली उद्देश्य भूल गए हैं, और एक-दूसरे की निंदा करते हैं।
Question 2. निष्पक्ष होकर हरि भक्ति कौन करता है ?
Answer: निष्पक्ष होकर भगवान की भक्ति वे लोग करते हैं जो सच्चे जानकार होते हैं।
In simple words: सच्चे ज्ञानी ही बिना किसी भेदभाव के भगवान की भक्ति करते हैं।
Question 3. प्रस्तुत दोहे का केन्द्रीय भाव बताइए।
Answer: इस दोहे के ज़रिए कबीर कहना चाहते हैं कि इंसान को पक्ष और विपक्ष के झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए, यानी हिंदू-मुसलमान के चक्कर में न फंसकर भगवान की भक्ति करनी चाहिए।
In simple words: इस दोहे का मुख्य संदेश है कि हमें धार्मिक भेदभाव या पक्ष-विपक्ष के झगड़ों से दूर रहकर सच्चे मन से भगवान की भक्ति करनी चाहिए।
Question 4. 'सोई संत सुजान' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
Answer: 'सोई संत सुजान' इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: 'सोई संत सुजान' इस पंक्ति में 'स' वर्ण की बार-बार आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है।
Question 5. 'पखापनी' और 'निरपन' शब्दों का शुद्ध रूप लिखिए।
Answer:
- पखापखी – पक्ष-विपक्ष
- निरपख – निष्पक्ष
In simple words: 'पखापनी' का सही रूप 'पखापखी' (पक्ष-विपक्ष) है और 'निरपन' का सही रूप 'निरपख' (निष्पक्ष) है।
5. हिंदू मूआ राम कहि, मुसलमान ख़ुदाइ। कहै कबीर सो जीवता, जो दुहुँ के निकटि न जाइ ।।5।।
भावार्थ : कबीर निराकार ब्रह्म के भक्त हैं। वे उसकी पूजा करने की शिक्षा देते हुए कहते हैं कि हिंदू राम का नाम लेते और मुसलमान खुदा का नाम लेते हुए मर जाते हैं। जबकि राम और खुदा एक ही हैं। आखिर में वे कहते हैं कि जो इन दोनों के झगड़े में न फंसकर भगवान की भक्ति करता है, वही इस दुनिया में सही मायने में जीवन जीता है।
Question 1. हिन्दू और मुसलमान प्रभु को किन नामों से पुकारते हैं ?
Answer: हिंदू अपने भगवान को 'राम' और मुसलमान 'खुदा' के नाम से बुलाते हैं।
In simple words: हिंदू भगवान को 'राम' और मुसलमान 'खुदा' कहते हैं।
Question 2. कबीर किसके जीवन को सार्थक मानते हैं ?
Answer: कबीर उस इंसान के जीवन को सफल मानते हैं जो राम-रहीम के झगड़ों में नहीं पड़ता। जो खुद को किसी धर्म या समुदाय के बंधन में नहीं बांधता, बल्कि सच्चे भगवान (निराकार ब्रह्म) की पूजा करता है।
In simple words: कबीर कहते हैं कि जो व्यक्ति धार्मिक झगड़ों से दूर रहकर, बिना किसी भेदभाव के सच्चे भगवान की पूजा करता है, उसका जीवन ही सफल है।
Question 3. साखी में 'दुहूँ' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया है ?
Answer: साखी में 'दुहूँ' शब्द का इस्तेमाल राम और खुदा के लिए किया गया है।
In simple words: इस साखी में 'दुहूँ' शब्द राम और खुदा दोनों के लिए इस्तेमाल हुआ है।
Question 4. प्रस्तुत सारनी की प्रासंगिकता बताइए।
Answer: यह साखी आज भी बहुत मायने रखती है। पूरा समाज धर्म और समुदाय में बंट गया है। लोग किसी न किसी संप्रदाय से जुड़कर धार्मिक कट्टरता का शिकार हो जाते हैं।
In simple words: यह साखी आज भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज भी समाज धर्म और संप्रदायों में बंटा हुआ है, जिससे लोग धार्मिक रूप से कट्टर हो जाते हैं।
6. काबा फिरि कासी भया, रामहिं भया रहीम। मोट चून मैदा भया, बैठि कबीरा जीम ।।6।।
भावार्थ : कबीर कहते हैं कि जब तक मुझे ज्ञान नहीं था, तब तक मैं अज्ञानियों की तरह धर्म-जाति आदि के भेदों में फंसा हुआ था। ज्ञान मिलने के बाद मैं राम-रहीम, हिंदू-मुसलमान के फर्क से ऊपर उठ गया हूँ। अब मेरे लिए काबा और काशी में कोई अंतर नहीं रहा। मन की बुराइयों के कारण जिसे मोटा आटा समझता था, अब वह मैदा हो गया है, जिसे मैं आराम से खा रहा हूँ, यानी अब उनके मन में किसी तरह का भेद नहीं बचा है।
Question 1. 'काबा फिर कासी भया' का आशय बताइए।
Answer: 'काबा फिर कासी भया' का मतलब यह है कि मन में अब किसी तरह का भेद नहीं बचा।
In simple words: इसका अर्थ है कि मन से धार्मिक भेदभाव पूरी तरह खत्म हो गया है।
Question 2. 'रामहिं भया रहीम' का भाव क्या है ?
Answer: 'रामहि भया रहीम' का अर्थ यह है कि मेरी धार्मिक अज्ञानता खत्म हो गई है।
In simple words: इसका मतलब है कि राम और रहीम एक ही हैं, और धार्मिक अंधविश्वास दूर हो गया है।
Question 3. कबीर के मन से धार्मिक भेदभाव मिटने से क्या परिवर्तन हुआ ?
Answer: कबीर के मन से धार्मिक भेदभाव खत्म होने के बाद उनकी धार्मिक अज्ञानता पूरी तरह मिट गई। अब उनके लिए राम-रहीम, काबा और काशी में कोई फर्क नहीं रहा। वे बहुत सरलता से जीवन जी रहे हैं।
In simple words: धार्मिक भेदभाव खत्म होने के बाद कबीर के मन से अज्ञानता दूर हो गई, उनके लिए राम-रहीम और काबा-काशी एक समान हो गए, और वे सरलता से जीवन जीने लगे।
Question 4. कबीर ने दोहे के माध्यम से क्या संदेश दिया है ?
Answer: कबीर का संदेश यह है कि हमें कट्टर या धार्मिक रूप से अंधा नहीं होना चाहिए। राम और रहीम में कोई अंतर नहीं है।
In simple words: कबीर ने संदेश दिया है कि हमें धार्मिक रूप से कट्टर नहीं होना चाहिए, क्योंकि राम और रहीम में कोई फर्क नहीं है।
7. ऊँचे कुल का जनमिया, जे करनी ऊँच न होई। सुबरन कलस सुरा भरा, साधू निंदा सोइ ।।7
भावार्थ : कबीर कहते हैं कि ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई ऊँचा नहीं कहलाता। ऊँचा अर्थात् बड़ा बनने के लिए उसे अच्छे कर्म करने ही पड़ते हैं। उसमें कुल की कोई भूमिका नहीं होती है। दृष्टांत देते हुए वे कहते हैं कि जिस प्रकार शराब यदि सोने के पात्र में भरी हो तो सज्जनों के लिए पेय नहीं बन जाती है। सज्जन उसकी निन्दा ही करते हैं। ठीक उसी तरह ऊँचे कुल में जन्म लेकर यदि व्यक्ति नीच कर्म करता है तो वह निन्दा का ही पात्र है।
Question 1. कवि ने किसे ऊँचा कहा है ?
Answer: अच्छे काम करने वाले व्यक्ति को कवि ने ऊँचा बताया है।
In simple words: कवि ने अच्छे कर्म करने वाले को ही ऊँचा माना है।
Question 2. सोने का पात्र कब निन्दनीय हो जाता है ?
Answer: सोने के बर्तन में जब शराब भर दी जाती है, तब वह निंदा के लायक हो जाता है।
In simple words: सोने के बर्तन में शराब भरने पर वह निंदनीय बन जाता है।
Question 3. ऊँचे कुल से कवि का क्या आशय है ?
Answer: ऊँचे कुल से कवि का मतलब है – सुख और समृद्धि से भरा हुआ अच्छा परिवार, जिसकी समाज में इज्जत हो।
In simple words: ऊँचे कुल से कवि का अर्थ है एक समृद्ध और प्रतिष्ठित परिवार।
Question 4. दोहे में किसे महत्त्वपूर्ण बताया गया है ?
Answer: दोहे में अच्छे कामों को खास महत्व दिया गया है।
In simple words: इस दोहे में व्यक्ति के अच्छे कर्मों को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है।
Question 5. सज्जन किसकी निन्दा करते हैं ?
Answer: ऊँचे परिवार में पैदा होकर अच्छे काम न करने वाले लोगों की सज्जन लोग निंदा करते हैं।
In simple words: सज्जन लोग ऐसे व्यक्ति की निंदा करते हैं जो ऊँचे कुल में पैदा होकर भी अच्छे काम नहीं करता।
Question 6. 'सुबरन कलस सुरा भरा, साधू निंदा सोई' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
Answer: 'सुबरन कलस सुरा भरा, साधू निंदा सोइ' इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: इस पंक्ति में 'स' वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।
सबद (पद)
1. मोकों कहाँ ढूँढे बंदे, मैं तो तेरे पास में। ना मैं देवल ना मैं मसजिद, ना काबे कैलास में। ना तो कौने क्रिया-कर्म में, नहीं योग बैराग में। खोजी होय तो तुरते मिलिहौं, पल भर की तालास में। कहै कबीर सुनौ भई साधो, सब स्वाँसों की स्वाँस में।।
भावार्थ : इंसान भगवान को पाने के लिए कई तरह के रीति-रिवाज और कर्म करता है, लेकिन उसे भगवान के दर्शन नहीं होते हैं। कबीर के अनुसार निराकार ब्रह्म खुद इंसान से कहते हैं कि हे इंसान! तुम मुझे खोजने के लिए कहाँ-कहाँ भटक रहे हो। मैं तुम्हें किसी मंदिर या मस्जिद में नहीं मिलूँगा, और न ही किसी तीर्थस्थान पर। मैं किसी बाहरी दिखावे से भी नहीं मिल सकता। योगी या वैरागी बनकर भी तुम मुझे नहीं पा सकते। जो मुझे सच्चे मन से खोजता है, उसे मैं तुरंत मिल जाता हूँ क्योंकि मैं तो हर प्राणी की हर साँस में रहता हूँ। इसलिए, बाहर भटकने के बजाय अपने मन में खोजो।
Question 1. क्रिया-कर्म से कबीर का क्या तात्पर्य है ?
Answer: क्रिया-कर्म का मतलब पूजा, जप, तप, हवन या किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठानों से है।
In simple words: क्रिया-कर्म का अर्थ है पूजा, जप, तप, हवन जैसे धार्मिक रीति-रिवाज।
Question 2. मनुष्य जीवनभर ईश्वर को कहाँ ढूँढता रहता है ?
Answer: इंसान पूरी ज़िंदगी भगवान को मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे जैसे धार्मिक जगहों और काबा-काशी-कैलाश जैसे तीर्थस्थानों में ढूंढता रहता है। वह कभी योग-साधना जैसे काम करता है तो कभी संन्यासी बनकर भगवान को खोजता है।
In simple words: लोग भगवान को मंदिरों, मस्जिदों, तीर्थस्थानों और योग-वैराग्य जैसी धार्मिक क्रियाओं में ढूंढते रहते हैं।
Question 3. ईश्वर को पलभर में कौन प्राप्त कर सकता है ?
Answer: खोजी व्यक्ति, यानी जो सच्चे मन से भगवान की भक्ति करता है, वह भगवान को तुरंत ही पा सकता है।
In simple words: जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान की भक्ति करता है, वह उन्हें पलभर में पा सकता है।
Question 4. कबीर ने किन बातों पर विशेष बल दिया है ?
Answer: कबीर ने भगवान को अपने अंदर ही तलाशने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि भगवान को मंदिर, मस्जिद या धार्मिक स्थलों पर नहीं खोजा जा सकता।
In simple words: कबीर ने जोर दिया है कि भगवान को बाहरी स्थानों पर नहीं, बल्कि अपने अंदर खोजना चाहिए।
2. संतों भाई आई ग्याँन की आँधी रे। भ्रम की टाटी सबै उडाँनी, माया रहै न बाँधी।। हिति चित्त की दै यूँनी गिराँनी, मोह बलिंडा तूटा। त्रिस्त्रों छाँनि परि घर ऊपरि, कुबधि का भाँडाँ फूटा।। जोग जुगति करि संतौं बाँधी, निरचू चुवै व पाँणी। कूड़ कपट काया का निकस्या, हरि की गति जब जाँणी।। आँधी पीछे जो जल चूठा, प्रेम हरि जन भींनौं। कहै कबीर भाँन के प्रगटे उदित भया तम खीनों।।
भावार्थ : कबीर ज्ञान का महत्व बताते हुए कहते हैं कि हे संतों! ज्ञान की आँधी आई है। उसके प्रभाव से भ्रम की दीवार उड़ गई है। अब वह माया की रस्सी से बंधी नहीं है। स्वार्थ के दोनों खंभे और मोह की बल्लियाँ टूट गई हैं। इच्छाओं का छप्पर ऊपर गिर जाने से घर में रखे कुबुद्धि के सभी बर्तन टूट गए हैं। संतों ने योग-साधना के तरीके से एक ऐसा मजबूत छप्पर बनाया है, जिससे थोड़ा भी पानी नहीं टपकता। संतों ने जब ईश्वर का रहस्य जान लिया तो उनके शरीर से सभी विकार खत्म हो गए। इस ज्ञानरूपी आँधी के बाद भगवान के प्रेम की जो बारिश हुई है उसमें सभी भीग गए हैं। ज्ञान के आगमन के बाद अज्ञान का अंधकार नष्ट हो गया है।
Question 1. कबीर ने कैसी आँधी आने की बात कही है ?
Answer: कबीर ने ज्ञान की आँधी आने की बात बताई है।
In simple words: कबीर ने ज्ञान की आँधी आने की बात की है, जो मन को शुद्ध करती है।
Question 2. शरीर का कूड़ कपट किसे कहा गया है ?
Answer: शरीर के अंदर का कूड़ कपट मोह-माया, लालच, धोखाधड़ी, बुरी सोच और दुनियावी इच्छाओं को कहा गया है।
In simple words: शरीर का कूड़ कपट मोह, माया, लालच, कपट, कुबुद्धि और सांसारिक वासनाएँ हैं।
Question 3. साधारण आँधी और ज्ञान की आँधी के विषय में कबीर ने क्या कहा है ?
Answer: साधारण आँधी आने पर घर के छप्पर गिर जाते हैं, और अंदर रखे बर्तन टूट जाते हैं। ज्ञान की आँधी आने पर मन के स्वार्थ के खंभे और मोह-माया का छप्पर गिर जाता है, और मन के सभी दोष, कपट, लालच तथा सांसारिक इच्छाएँ खत्म हो जाती हैं।
In simple words: साधारण आँधी घर-बार और वस्तुओं को नष्ट करती है, जबकि ज्ञान की आँधी मन के स्वार्थ, मोह और सभी बुराइयों को खत्म कर देती है, जिससे मन शुद्ध होता है।
कविता
आ रही रवि की सवारी
नव किरण का रथ सजा है,
कलि-कुसुम से पथ सजा है,
बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाकधारी।
आ रही रवि की सवारी।
विहग बंदी और चारण
गा रहे हैं कीर्ति गायन
छोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी।
आ रही रवि की सवारी।
चाहता, उछलूँ विजय कह
पर ठिठकता देखकर यह
रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी।
आ रही रवि की सवारी।
उपर्युक्त कविता के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
Question 1. सूर्य किस पर सवार होकर आ रहा है ?
Answer: सूर्य अपनी किरणों के रथ पर सवार होकर आ रहा है।
In simple words: सूरज अपनी चमकती हुई किरणों के रथ पर सवार होकर आ रहा है।
Exam Tip: कविता-आधारित प्रश्नों में, उत्तर सीधे कविता की पंक्तियों से लिया जाना चाहिए और उसे सरल शब्दों में प्रस्तुत करना चाहिए।
Question 2. सूर्य के स्वागत में बादल किस तरह खड़े नजर आ रहे हैं ?
Answer: सूर्य का अभिनंदन करने के लिए बादल रंगीन वस्त्र धारण कर खड़े दिख रहे हैं।
In simple words: सूरज का स्वागत करने के लिए बादल रंगीन कपड़े पहनकर खड़े हुए हैं।
Exam Tip: कविताओं में प्रकृति का मानवीकरण अक्सर किया जाता है; ऐसे में, प्राकृतिक तत्वों को मानवीय क्रियाएँ करते हुए दर्शाने पर ध्यान दें।
Question 3. सूर्यरूपी राजा की प्रशंसा में कौन-कौन कीर्तिगीत गा रहे हैं ?
Answer: सूरज रूपी राजा की स्तुति में पक्षी रूपी भाट और बंदीजन यशगान कर रहे हैं।
In simple words: पक्षी और बंदी राजा सूरज की तारीफ में गीत गा रहे हैं।
Exam Tip: रूपक अलंकार के प्रयोग को समझें, जहाँ एक वस्तु को दूसरी वस्तु का रूप दे दिया जाता है, जैसे यहाँ सूर्य को राजा का रूप दिया गया है।
Question 4. राह में भिखारी बनकर कौन खड़ा है ?
Answer: मार्ग में चंद्रमा एक भिक्षुक के रूप में उपस्थित है।
In simple words: रास्ते में चाँद एक भिखारी की तरह खड़ा है।
Exam Tip: कविता में प्रतीकात्मकता को पहचानें; यहाँ चंद्रमा का भिखारी के रूप में खड़ा होना उसकी शक्तिहीनता या फीके पड़ने का संकेत है।
Question 5. 'रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी' में कौन-सा अलंकार है ?
Answer: 'रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी' पंक्ति में अनुप्रास अलंकार मौजूद है।
In simple words: इस पंक्ति में 'रा' अक्षर बार-बार आया है, इसलिए यह अनुप्रास अलंकार है।
Exam Tip: अनुप्रास अलंकार तब होता है जब एक ही वर्ण या अक्षर बार-बार प्रयोग किया जाता है, जिससे काव्य में सुंदरता आती है।
सानियाँ एवं सबद Summary in Hindi
कविता-परिचय :
शब्दार्थ-टिप्पण
- सुभर – अच्छी तरह भरा हुआ
- केलि – क्रीड़ा
- मुकताफल – मोती
- कराहीं – करना
- उड़ि – उड़कर
- अनत – अन्यत्र
- फिरौं – घूमता हूँ
- हस्ती – हाथी
- दलीचा – कालीन
- स्वान – कुत्ता
- झख्ख मारना – समय बरबाद करना
- पखापनी – पक्ष-विपक्ष
- कारने – कारण
- भुलान – भूला हुआ
- निरपन – निष्पक्ष
- सुजान – चतुर
- मुआ – मर गया
- सो – वही
- जीवता – जीता है
- दुहुँ – दोनों
- निकटि – निकट
- काबा – मुसलमानों का पवित्र तीर्थस्थल
- कासी – हिन्दुओं का पवित्र तीर्थस्थल
- मोट – मोटा
- चून – आटा
- जीम – भोजन करना
- कुल – खानदान
- जनमिया – जन्म लेकर
- करनी – कर्म
- सुबरन – सोने का
- कलस – घड़ा
- सुरा – मदिरा, शराब
- मोको – मुझको
- देवल – मंदिर
- तुरतै – तुरंत
- टाटी – परदे के लिए लगाए गए घास, फूस और बाँस आदि की फट्टियों का पल्ला
- उड़ॉनी – उड़ गई
- हिति – स्वार्थ
- चित्त – मन
- धूनी – स्तंभ, टेक
- बलिंडा – छप्पर की मजबूत मोटी लकड़ी, बल्ली
- त्रिस्नाँ – तृष्णा
- छाँनि – छप्पर
- कुबधि – कुबुद्धि
- भाँडाँ फूटा – भेद खुला
- जोग – योग साधना
- जुगति – उपाय
- निरचू – थोड़ा भी
- चुये – टपकना
- बूठा – बरसा
- भीनों – भीग गया
- भाँन – भानु, सूर्य
- तम – अंधकार
- खीनों – क्षीण हुआ
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