GSEB Class 9 Hindi Kshitij Solutions Chapter 6 प्रेमचंद के फटे जूते

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Detailed Chapter 06 प्रेमचंद के फटे जूते GSEB Solutions for Class 9 Hindi

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Class 9 Hindi Chapter 06 प्रेमचंद के फटे जूते GSEB Solutions PDF

प्रश्न-अभ्यास

 

Question 1. हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है, उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं ?
Answer: हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है, उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ उभरकर आती हैं -
1. प्रेमचंद का व्यक्तित्व बहुत ही सीधा-सादा था, उनके व्यवहार में कहीं भी दिखावा नहीं था । फटे जूते पहनना इसी बात का एक सबूत है।
2. उनका जीवन संघर्षों से भरा था । वे स्वाभिमानी व्यक्ति थे । किसी से कोई भी वस्तु माँगना उनके स्वभाव के विरुद्ध था । वे हमेशा स्वाभिमानी बने रहे ।
3. प्रेमचंद अपने जीवन-मूल्यों से कभी भी समझौता नहीं करते थे । इसलिए वे सामाजिक बुराइयों का डटकर सामना करते थे । वे किसी भी परिस्थिति के वश में नहीं थे ।
4. वे एक महान कहानीकार थे, उपन्यास के सम्राट माने जाते थे । अपनी रचनाओं में उन्होंने समाज की समस्याओं को उठाया और उनके समाधान की कोशिश की ।
5. वे बहुत ऊँचे विचारों वाले और आडंबरहीन व्यक्ति थे ।
In simple words: लेखक ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कई खास बातें बताई हैं, जैसे उनका सीधा-सादा होना, स्वाभिमानी होना, संघर्षों का सामना करना, और सामाजिक बुराइयों का विरोध करना। वे महान लेखक थे पर दिखावा नहीं करते थे।

Exam Tip: प्रेमचंद के व्यक्तित्व की विशेषताओं को बताते समय, उनके सादगीपूर्ण जीवन, स्वाभिमान और सामाजिक सरोकारों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 2. सही कथन के सामने (√) का निशान लगाइए ।
(क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अंगुली बाहर निकल आई है।
(ख) लोग तो इन चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए ।
(ग) तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है।
(घ) जिसे तुम पृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो ?
Answer: (ख) लोग तो इन चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए ।
In simple words: लेखक यह कहना चाहता है कि लोग दिखावा करने के लिए अपनी तस्वीरों को इस तरह से सजाते हैं जिससे वे असल में खुशबूदार लगें, भले ही असलियत कुछ और हो।

Exam Tip: MCQ प्रश्नों में, प्रत्येक विकल्प को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप उस विकल्प का चुनाव कर रहे हैं जो पाठ के मुख्य विचार या व्यंग्य को सही ढंग से दर्शाता है।

 

Question 3. नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए
क. जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है । अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं ।
Answer: यहाँ जूते का स्थान पाँव में है और टोपी का स्थान सिर पर (सम्मान का प्रतीक) है, लेकिन असलियत इसके उलट है । समाज में जिन लोगों के पास पैसा है, उनका महत्व अधिक है । समझदार और गुणी लोगों को अक्सर धनवानों के सामने झुकना पड़ता है । इसी वजह से लेखक ने कहा है कि एक जूते पर पचीसों टोपियाँ कुर्बान होती हैं ।
In simple words: लेखक कहता है कि समाज में पैसे वाले लोगों का मान-सम्मान ज्ञानी लोगों से ज्यादा होता है। इसलिए, एक 'जूता' (धन) कई 'टोपियों' (ज्ञान) से अधिक मूल्यवान हो गया है।

Exam Tip: व्यंग्य वाले प्रश्नों में, आपको सीधे अर्थ के बजाय उसके गहरे और प्रतीकात्मक अर्थ को समझाना होगा।

ख. तुम परदे का महत्त्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं।
Answer: दरअसल, परदे के पीछे लोग अपनी कमियों को छिपा सकते हैं । प्रेमचंद दिखावा और आडंबर से दूर रहने वाले व्यक्ति थे । वे जैसे बाहर से दिखते थे, वैसे ही भीतर से भी थे, इसलिए उन्हें परदे की कोई जरूरत नहीं थी । वहीं दूसरी ओर समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बाहरी दिखावा करने के लिए परदे पर कुर्बान होते हैं । इसका मतलब है कि वे अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश करते हैं ।
In simple words: प्रेमचंद दिखावा नहीं करते थे, वे जैसे थे वैसे ही दिखते थे। लेकिन समाज में बहुत से लोग अपनी कमियों को छिपाने और अच्छा दिखने के लिए दिखावा करते रहते हैं।

Exam Tip: इस तरह के व्यंग्यात्मक कथनों में, छिपे हुए विरोधाभास और सामाजिक टिप्पणी को उजागर करें।

ग. जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अंगुली से इशारा करते हो ?
Answer: प्रेमचंद जिस व्यक्ति या सामाजिक बुराई से नफरत करते हैं, उसकी तरफ हाथ की अंगुली से इशारा नहीं करते । ऐसा करने से वे अपने महत्व को कम नहीं करना चाहते । वैसे भी घृणित चीजों का स्थान पैरों के नीचे ही होता है । इसीलिए वे उस दिशा में अपनी पैर की अंगुली से इशारा करते हैं ।
In simple words: प्रेमचंद जिन्हें बुरा समझते थे, उन्हें अपने हाथ से नहीं बल्कि पैर की अंगुली से दिखाते थे। वे ऐसा करके अपना महत्व कम नहीं करना चाहते थे, क्योंकि बुरी चीजों का स्थान पैरों के नीचे ही होता है।

Exam Tip: इस कथन में प्रेमचंद के स्वाभिमान और उनके विरोध के तरीके पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 4. पाठ में एक जगह पर लेखक सोचता है कि 'फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी लेकिन अगले ही पल बह विचार बदलता है कि 'नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी ।' आपके अनुसार इस संदर्भ में प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती है ?
Answer: हमारे समाज में लोग दो तरह के कपड़े रखते हैं । किसी खास अवसर के लिए वे अच्छे कपड़े पहनते हैं और घर पर साधारण या पुराने कपड़े । पाठ में लेखक सोचते हैं कि यदि फोटो खिंचाने के लिए यह पोशाक है, तो पहनने के लिए इससे भी खराब होगी । बाद में लेखक ने अपनी सोच बदल दी । क्योंकि लेखक अच्छी तरह से जानते हैं कि प्रेमचंद का व्यक्तित्व दिखावे की दुनिया से अलग था । वे जैसे फोटो में दिख रहे थे, वैसे ही अपने जीवन में भी थे । प्रेमचंद का जीवन आडंबरों से दूर, सादगी भरा था ।
In simple words: लेखक ने पहले सोचा कि प्रेमचंद के पास फोटो के लिए तो यह पोशाक है, तो पहनने के लिए कैसी होगी। पर फिर उन्हें लगा कि प्रेमचंद दिखावा नहीं करते, वे जैसे दिखते हैं, वैसे ही अपने असल जीवन में भी हैं, इसलिए उनकी पोशाकें अलग नहीं होंगी।

Exam Tip: लेखक के विचारों में बदलाव का कारण बताते हुए, प्रेमचंद के सादगी भरे जीवन और दिखावे से दूर रहने के स्वभाव को प्रमुखता दें।

 

Question 5. आपने यह व्यंग्य पढ़ा । इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बातें आकर्षित करती हैं ?
Answer: हरिशंकर परसाई एक प्रसिद्ध व्यंग्य लेखक हैं । केवल हंसी से अलग उनका व्यंग्य लेखन समाज में नई सोच पैदा करता है । प्रस्तुत पाठ में परसाईजी ने लेखक प्रेमचंद के फटे जूतों पर अपना व्यंग्य प्रस्तुत किया है । वे प्रेमचंद की पोशाक के जरिए दिखावा करने वाले लोगों पर कटाक्ष करते हैं । लेखक ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व को दिखाने के लिए जिन उदाहरणों का प्रयोग किया है, वे व्यंग्य को और अधिक प्रभावी बनाते हैं । समाज में फैली रूढ़ियाँ और बुराइयाँ व्यक्ति की राह में दिक्कत पैदा करती हैं, इसे लेखक ने बहुत अच्छे से दर्शाया है । व्यंग्य की भाषा कसी हुई और व्यंजनापूर्ण है, जो सभी को अपनी ओर खींचती है । लेखक ने कड़वी बातों को बहुत आसानी से समझाया है । लेखक अप्रत्यक्ष रूप से समाज के दोषों पर प्रहार करते हैं ।
In simple words: मुझे लेखक का व्यंग्यात्मक तरीका पसंद आया, जिसमें वे प्रेमचंद के जूतों के बहाने समाज के दिखावे और बुराइयों पर कटाक्ष करते हैं। उनके उदाहरण और सरल भाषा से व्यंग्य और भी प्रभावशाली बन जाता है।

Exam Tip: लेखक की शैली और उसके सामाजिक संदेश को उजागर करते हुए, व्यंग्य की प्रभावी प्रस्तुति पर ध्यान दें।

 

Question 6. पाठ में 'टीले' शब्द का प्रयोग किन संदों को इंगित करने के लिए किया होगा ?
Answer: सामान्य तौर पर 'टीला' मिट्टी या रेती का ढेर होता है । यहाँ यह शब्द जीवन के रास्ते में आने वाली बाधाओं और अड़चनों का प्रतीक है । प्रेमचंद इस शब्द से समाज की कुरीतियों और बुराइयों की ओर इशारा करते हैं । समाज की ये कुरीतियाँ और बुराइयाँ व्यक्ति और समाज के विकास में रुकावट डालती हैं । प्रेमचंद ने अपने जूते से ठोकर मार-मारकर उन्हें अपने और समाज के रास्ते से दूर करने की कोशिश की है ।
In simple words: 'टीले' शब्द का मतलब यहाँ जीवन की मुश्किलों और सामाजिक बुराइयों से है। प्रेमचंद ने अपनी कोशिशों से इन मुश्किलों को दूर करने का प्रयास किया था।

Exam Tip: प्रतीकात्मक शब्दों (जैसे 'टीला') के अर्थ को समझाते हुए, उनके सामाजिक संदर्भ और लेखक के उद्देश्य को स्पष्ट करें।

रचना और अभिव्यक्ति

 

Question 7. प्रेमचंद के फटे जूते को आधार बनाकर परसाई जी ने यह व्यंग्य लिखा है । आप भी किसी व्यक्ति की पोशाक को आधार बनाकर एक व्यंग्य लिखिए ।
Answer: आज हर व्यक्ति कम मेहनत में ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना चाहता है । अगर भगवान की कृपा हो जाए तो फिर बात ही क्या ? हमारे इलाके में एक सज्जन हैं जिन पर धन की कृपा हुई है और अब वे धीरे-धीरे अमीरी की दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं । ये माँ सरस्वती की तरह हमेशा सफेद कपड़ों में सजे रहते हैं और समाज के विकास की बातें करते रहते हैं । पर जानने वाले लोग जानते हैं कि उन्होंने केवल अपना ही विकास किया है । वे माँ सरस्वती के समान सफेद कपड़े पहनते हैं और भीतर से जितने भी गलत काम हैं, उन पर अपना हाथ आजमाते हुए आगे बढ़ रहे हैं । सफेद और काले का अद्भुत मेल हमने पहले कहीं नहीं देखा ।
In simple words: एक ऐसे व्यक्ति पर व्यंग्य किया गया है जो बाहर से तो सज्जन और समाजसेवी दिखता है, हमेशा सफेद कपड़े पहनता है, पर अंदर से वह बेईमान और स्वार्थी है, जिसने सिर्फ अपना फायदा देखा है।

Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में अपनी रचनात्मकता का प्रयोग करें, लेकिन व्यंग्य के मूल तत्वों (जैसे सामाजिक विसंगतियों पर कटाक्ष) को बनाए रखें।

 

Question 8. आपकी दृष्टि में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है ?
Answer: पहले लोग कपड़े सिर्फ तन ढकने के मकसद से पहनते थे । लेकिन समय के साथ-साथ लोगों की सोच में बदलाव आया है । आज लोग पहनावे को सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक मानने लगे हैं । वास्तव में समाज में पोशाक ही व्यक्ति का दर्जा तय करती है । अगर पहनावा अच्छा है तो आपको मान-सम्मान मिलेगा । यदि पहनावा ठीक नहीं है, तो उस व्यक्ति को नीची नज़र से देखा जाता है । समाज में अपनी प्रतिष्ठा और हैसियत दिखाने के लिए लोग अब आधुनिक फैशन के कपड़े पहनने लगे हैं । पहनावे को लेकर महिलाओं की सोच में भी बहुत बदलाव आया है । महिलाएँ किसी समारोह या अवसर पर कोई साड़ी पहनेंगी तो दूसरी बार उसे पहनने में शर्म महसूस करती हैं । नतीजतन, वार्डरोब (अलमारी) में महिलाओं के कपड़े ठूंस-ठूंस कर भरे होते हैं, फिर भी नए कपड़ों की संख्या में लगातार वृद्धि होती रहती है । आज पहनावा व्यक्ति की जरूरत न होकर फैशन का प्रतीक बन गया है ।
In simple words: अब लोग कपड़े सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि अपनी सामाजिक स्थिति दिखाने के लिए पहनते हैं। अच्छा पहनावा मान-सम्मान दिलाता है, जबकि साधारण पहनावे को कमतर समझा जाता है। खासकर महिलाओं में फैशन का चलन बहुत बढ़ गया है, जिससे कपड़े एक जरूरत से ज्यादा दिखावे का साधन बन गए हैं।

Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, वर्तमान सामाजिक दृष्टिकोण और फैशन के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालें, और पहनावे के बदलते महत्व को समझाएं।

भाषा-अध्ययन

 

Question 9. पाठ में आए मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
Answer: मुहावरों की सूचि इस प्रकार है :
• न्योछावर होना – एक माँ अपने बेटे की खुशी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देती है ।
• कुर्बान होना – स्वतंत्रता संग्राम में अनेक भारतवासी कुर्बान हो गए ।
• हौसले पस्त करना – समय पर बारिश न होने के कारण किसानों के हौसले टूट गए ।
• लहूलुहान होना – बस दुर्घटना में कई लोग खून से लथपथ हो गए ।
• चक्कर काटना – पके अमरूद तोड़ने के लिए लड़कों का समूह कब से इधर-उधर घूम रहा है ।
• ठोकर मारना – अमरेश ने अपने पिता की करोड़ों की दौलत को ठुकराकर देवयानी से शादी रचाई ।
• पहाड़ फोड़ना – रमेश स्कूल से आते ही बिस्तर पर ऐसे गिर गया मानो उसने पहाड़ फोड़ दिया हो ।
• संकेत करना – ट्रैफिक पुलिस के संकेत करते ही गाड़ियाँ चलने लगीं ।
In simple words: पाठ में कई मुहावरे इस्तेमाल हुए हैं। जैसे 'न्योछावर होना' मतलब सब कुछ त्याग देना, 'कुर्बान होना' मतलब बलिदान देना, 'हौसले पस्त करना' मतलब हिम्मत हार जाना, 'लहूलुहान होना' मतलब खून से भर जाना, 'चक्कर काटना' मतलब बार-बार घूमना, 'ठोकर मारना' मतलब ठुकरा देना, 'पहाड़ फोड़ना' मतलब बहुत मेहनत करना, और 'संकेत करना' मतलब इशारा करना।

Exam Tip: मुहावरों के अर्थ और वाक्य प्रयोग दोनों को सही ढंग से लिखें। अर्थ सटीक होना चाहिए और वाक्य में प्रयोग ऐसा हो जिससे मुहावरे का अर्थ स्पष्ट हो जाए।

 

Question 10. प्रेमचंद के व्यक्तित्व को उभारने के लिए लेखक ने जिन विशेषणों का उपयोग किया है उनकी सूची बनाइए।
Answer: हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व का सही मूल्यांकन करने के लिए अनेक विशेषणों का उपयोग किया है, मुख्य रूप से नीचे दिए गए हैं:
1. जनता के लेखक
2. साहित्यिक पुरखे
3. महान कथाकार
4. उपन्यास-सम्राट
5. युग-प्रवर्तक गयांश
In simple words: लेखक ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व को समझाने के लिए उन्हें 'जनता का लेखक', 'साहित्यिक पुरखे', 'महान कथाकार', 'उपन्यास-सम्राट' और 'युग-प्रवर्तक' जैसे शब्दों से बुलाया है।

Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, लेखक द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी विशेषणों को सूचीबद्ध करें और सुनिश्चित करें कि वे पाठ से ही लिए गए हों।

Gseb Solutions Class 9 Hindi प्रेमचंद के फटे जूते Important Questions and Answers

आशय स्पष्ट कीजिए ।

 

Question 1. 'आवत जात पन्हैया घिस गई बिसर गयो हरि नाम ।'
Answer: प्रस्तुत पंक्तियाँ अष्टछाप के प्रसिद्ध ब्रजभाषा कवि कुंभनदास द्वारा लिखी गई हैं । एक बार अकबर बादशाह ने उन्हें फतेहपुर सीकरी बुलाया । जहाँ उन्हें सम्मानित किया गया । लेकिन आने-जाने में उनके जूते घिस गए और वे भगवान का नाम लेना भी भूल गए । उन्हें भगवान का नाम याद करने का समय ही नहीं मिला । और जिन्हें देखने मात्र से कष्ट होता है, उनको भी झुककर सलाम करना पड़ा ।
In simple words: कुंभनदास जी को अकबर बादशाह के बुलाने पर फतेहपुर सीकरी जाना पड़ा। इस यात्रा में उनके जूते घिस गए और वे भगवान का नाम लेना भी भूल गए, जिससे उन्हें बहुत पछतावा हुआ।

Exam Tip: इन पंक्तियों का अर्थ समझाते समय, कवि और प्रसंग का उल्लेख करें और फिर उसके गहरे संदेश को स्पष्ट करें।

 

Question 2. 'सभी नदियाँ पहाड़ थोड़े ही फोड़ती हैं, कोई रास्ता बदलकर घूमकर भी तो चली जाती हैं।'
Answer: प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से लेखक कहना चाहते हैं कि सभी नदियाँ पहाड़ को तोड़कर रास्ता बनाते हुए आगे नहीं बढ़ती हैं, बल्कि कुछ नदियाँ पहाड़ को तोड़े बिना बगल से निकल जाती हैं । इसका मतलब है कि समाज में कुछ लोग रास्ते में आने वाली बाधाओं से डटकर सामना करते हैं । लेकिन कुछ लोग आसान रास्ता चुनते हैं, यानी बाधाओं को छोड़कर दूसरे रास्ते से आगे बढ़ जाते हैं ।
In simple words: लेखक यह समझाना चाहते हैं कि जीवन में सभी लोग मुश्किलों का सामना करके आगे नहीं बढ़ते; कुछ लोग मुश्किलों से बचकर आसान रास्ता भी चुन लेते हैं।

Exam Tip: इस प्रतीकात्मक कथन की व्याख्या करते समय, नदियों और पहाड़ों के माध्यम से लेखक द्वारा दिए गए जीवन दर्शन को स्पष्ट करें।

अतिरिक्त लघुत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

Question 1. प्रेमचंद फोटो में कैसे दिख रहे हैं ?
Answer: फोटो में प्रेमचंद अपनी पत्नी के साथ बैठे हैं । उन्होंने कुर्ता-धोती पहनी है और सिर पर मोटे कपड़े की टोपी पहनी है । कनपटी चिपकी हुई है, गालों पर हड्डियाँ दिख रही हैं, और घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बनाती हैं ।
In simple words: प्रेमचंद फोटो में अपनी पत्नी के साथ बैठे हैं, कुर्ता-धोती पहने हैं, टोपी लगाए हैं। उनके गालों पर हड्डियां दिख रही हैं और घनी मूंछें हैं।

Exam Tip: प्रेमचंद के वर्णन में उनकी वेशभूषा और शारीरिक बनावट के मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 2. लेखक ने प्रेमचंद के जूतों का वर्णन किस प्रकार किया है ?
Answer: लेखक के अनुसार प्रेमचंद ने कैनवास के जूते पहने हैं, जिनके फीते बेतरतीब तरीके से बंधे हैं । लापरवाही से उपयोग करने पर फीतों के सिरों पर की लोहे की पत्ती निकल जाती है, और छेदों में फीते डालने में परेशानी होती है । तब भी फीतों को जैसे-तैसे कस लिया गया है और बाएँ जूते में एक बड़ा छेद हो गया है ।
In simple words: लेखक बताते हैं कि प्रेमचंद ने कैनवास के ढीले-ढाले फीतों वाले जूते पहने थे, जो लापरवाही से इस्तेमाल करने के कारण फट गए थे, खासकर बाएँ जूते में एक बड़ा छेद हो गया था।

Exam Tip: जूतों के वर्णन में उनके फटे होने, फीतों के ढीलेपन और कैनवास सामग्री का उल्लेख करें।

 

Question 3. लेखक की दृष्टि प्रेमचंद के जूतों पर क्यों अटक गई ?
Answer: प्रेमचंद ने जो जूते पहने हैं, उनमें से बाएँ पैर के जूते में एक बड़ा-सा छेद है और प्रेमचंद की अंगुली बाहर निकल आई है । इस दृश्य को देखते ही लेखक की दृष्टि प्रेमचंद के जूतों पर रुक गई ।
In simple words: लेखक की नज़र प्रेमचंद के जूतों पर इसलिए अटक गई क्योंकि उनके बाएँ जूते में बड़ा छेद था जिससे उनकी अंगुली बाहर दिख रही थी।

Exam Tip: प्रश्न के सीधे उत्तर के लिए, लेखक की उत्सुकता का कारण स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 4. प्रेमचंद ने अपने जूते को ढकने का प्रयास क्यों नहीं किया होगा ?
Answer: प्रेमचंद यथार्थवादी लेखक थे । उन्हें सीधा-सादा जीवन पसंद था । वे जैसा असल में थे, फोटो में भी वैसा ही दिखना चाहते होंगे, इसलिए उन्होंने अपने जूतों को धोती से ढकने की कोशिश नहीं की होगी ।
In simple words: प्रेमचंद सच बोलने वाले लेखक थे और दिखावा पसंद नहीं करते थे। वे चाहते थे कि फोटो में भी वे वैसे ही दिखें जैसे असल में थे, इसलिए उन्होंने अपने जूते छिपाने की कोशिश नहीं की।

Exam Tip: प्रेमचंद के स्वभाव (यथार्थवादी, सादगी पसंद) को उनके कार्यों (जूते न ढकना) से जोड़कर उत्तर दें।

 

Question 5. प्रेमचंद के चेहरे पर अधूरी मुसकान क्यों थी ?
Answer: फोटो खिंचवाते समय फोटोग्राफर ने 'रेडी प्लीज़' कहा होगा । तब दर्द के गहरे तल में कहीं पड़ी मुस्कान को धीरे-धीरे खींचकर ऊपर निकाल रहे होंगे कि फोटोग्राफर ने बीच में ही क्लिक कर लिया होगा । उनकी मुस्कान पूरी तरह से नहीं आ पाई थी, इसीलिए लेखक ने प्रेमचंद की मुस्कान को अधूरी कहा है ।
In simple words: प्रेमचंद की मुस्कान अधूरी थी क्योंकि फोटोग्राफर ने 'रेडी प्लीज़' कहने पर, वे अपने अंदर के दर्द के बावजूद मुस्कान लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इससे पहले कि मुस्कान पूरी तरह आती, फोटोग्राफर ने फोटो खींच ली।

Exam Tip: प्रेमचंद की मुस्कान की 'अधूरी' प्रकृति को उनके आंतरिक संघर्ष और बाहरी दिखावे के बीच के अंतर से जोड़कर समझाएं।

 

Question 6. लेखक ने प्रेमचंद के लिए ट्रेजडी शब्द का प्रयोग क्यों किया है ?
Answer: प्रेमचंद हिंदी के बहुत बड़े साहित्यकार थे । वे युग-प्रवर्तक, उपन्यास-सम्राट, महान कथाकार के रूप में प्रसिद्ध थे । इतने बड़े साहित्यकार के पास फोटो खिंचवाने के लिए एक जोड़ी अच्छे जूते भी नहीं थे । इसलिए लेखक ने प्रेमचंद की इस स्थिति को दिखाने के लिए ट्रेजडी शब्द का प्रयोग किया है ।
In simple words: लेखक ने प्रेमचंद की स्थिति को 'ट्रेजडी' इसलिए कहा क्योंकि इतने महान साहित्यकार होने के बावजूद उनके पास फोटो खिंचवाने के लिए भी अच्छे जूते नहीं थे, जो एक दुखद बात थी।

Exam Tip: 'ट्रेजडी' शब्द के प्रयोग का कारण बताते हुए प्रेमचंद की महानता और उनकी आर्थिक स्थिति के विरोधाभास को स्पष्ट करें।

 

Question 7. फोटो खिंचाने के लिए लोग कौन-कौन-सी वस्तुएँ मांगते हैं ? क्यों ?
Answer: फोटो में अच्छा दिखने के लिए लोग जूते, कोट, दूसरे की बीवी, गाड़ी तक माँगने में संकोच नहीं करते । ऐसा करके वे केवल बाहरी दिखावा करते हैं । दूसरों के सामने अपना प्रभाव जमाने की कोशिश करने के लिए वे ऐसा करते हैं ।
In simple words: लोग फोटो में अच्छा दिखने के लिए जूते, कोट, और यहाँ तक कि गाड़ी जैसी चीजें भी दूसरों से माँगने में झिझकते नहीं, क्योंकि वे सिर्फ दिखावा करके दूसरों पर अपनी धाक जमाना चाहते हैं।

Exam Tip: उन वस्तुओं की सूची बनाएं जो लोग दिखावे के लिए मांगते हैं, और इस व्यवहार के पीछे की प्रेरणा (प्रभाव जमाना, दिखावा) को समझाएं।

 

Question 8. लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है ?
Answer: जूता धन और समृद्धि का प्रतीक है और टोपी ज्ञान का । समाज में जो लोग धनवान हैं, जिनके पास पैसा है, समाज उनका मान-सम्मान करता है । ज्ञानी व्यक्तियों को धनवानों से कम आँका जाता है । कई बार धनवानों के सामने ज्ञानी व्यक्तियों को भी झुकना पड़ता है । इसीलिए लेखक ने कहा है कि जूता हमेशा टोपी से ज्यादा कीमती रहा है ।
In simple words: लेखक ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि समाज में धन (जूते का प्रतीक) को ज्ञान (टोपी का प्रतीक) से ज़्यादा महत्व दिया जाता है। अक्सर ज्ञानी लोगों को भी पैसे वालों के सामने झुकना पड़ता है।

Exam Tip: 'जूता' और 'टोपी' के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें और सामाजिक पदानुक्रम में धन के महत्व पर जोर दें।

 

Question 9. लेखक ने अपने जूते से प्रेमचंद के जूतों को क्यों बेहतर माना है ?
Answer: लेखक का जूता ऊपर से अच्छा दिखता है पर अंगूठे के नीचे का तला फट गया है । उसका अंगूठा जमीन से रगड़ खाता है और तीखी मिट्टी से रगड़कर खून से लथपथ हो जाता है । दूसरी तरफ प्रेमचंद का जूता अंगूठे के पास ऊपर से फटा है जिसमें से अंगुली दिखती जरूर है पर पूरा पाँव सुरक्षित है । इसीलिए लेखक ने अपने जूते से प्रेमचंद का जूता अच्छा माना है ।
In simple words: लेखक ने अपने जूते को प्रेमचंद के जूते से बेहतर माना क्योंकि लेखक का जूता नीचे से घिसकर अंगूठे को लहूलुहान कर देता था, जबकि प्रेमचंद के जूते में छेद होने पर भी उनका पूरा पैर सुरक्षित रहता था।

Exam Tip: दोनों जूतों की स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण करें और लेखक के तर्क को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 10. लेखक ने कुंभनदास का उदाहरण देकर क्या सिद्ध करना चाहा है ?
Answer: लेखक का मानना है कि चक्कर लगाने से जूता फटता नहीं, बल्कि घिस जाता है । इसी बात को साबित करने के लिए लेखक ने कुंभनदास का उदाहरण दिया है । फतेहपुर सीकरी आने-जाने में उनका जूता घिस गया था । चलने से जूता घिसता है, फटता नहीं ।
In simple words: लेखक कुंभनदास का उदाहरण देकर यह दिखाना चाहते हैं कि लंबी यात्रा या बार-बार चलने से जूते घिसते हैं, फटते नहीं। प्रेमचंद का जूता फटने का मतलब सिर्फ चलने से ज्यादा कुछ था।

Exam Tip: कुंभनदास के उदाहरण के माध्यम से लेखक का मुख्य बिंदु (जूते का घिसना बनाम फटना) को स्पष्ट करें।

 

Question 11. लेखक के अनुसार प्रेमचंद का जूता क्यों फटा होगा ?
Answer: लेखक के अनुसार प्रेमचंद का जूता इसलिए फटा होगा क्योंकि वे सामाजिक बुराइयों और कुरीतियों (जो टीलों के समान हैं) से समझौता नहीं करते थे। उन्होंने उन बुराइयों को ठोकर मार-मार कर रास्ते से हटाने की कोशिश की होगी, जिससे उनका जूता फट गया होगा। यह उनकी संघर्षशील प्रवृत्ति और आदर्शवादी स्वभाव को दर्शाता है।
In simple words: प्रेमचंद का जूता इसलिए फटा होगा क्योंकि वे समाज की बुराइयों को बर्दाश्त नहीं करते थे और उन्हें दूर करने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे, जिससे उनके जूते फट गए।

Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में प्रेमचंद के आदर्शवादी स्वभाव और सामाजिक कुरीतियों के प्रति उनके संघर्ष को कारण के रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 12. लेखक ने 'सदियों से परत-दर-परत' कहकर किस विडंबना की ओर इशारा किया है ?
Answer: लेखक ने 'सदियों से परत-दर-परत' कहकर समाज में सदियों से चली आ रही सामाजिक कुरीतियों, रूढ़ियों और बुराइयों की ओर इशारा किया है, जो हमारे समाज में परत-दर-परत जमती जा रही हैं । लोग उन्हें बिना सोचे-समझे अपनाते रहते हैं । इनकी जड़ें समाज में भीतर तक गहरी हो गई हैं, जिन्हें चाहकर भी दूर नहीं किया जा सकता । यह हमारे समाज की सबसे बड़ी विडंबना है ।
In simple words: लेखक ने 'सदियों से परत-दर-परत' कहकर समाज की उन पुरानी बुराइयों और रूढ़ियों की ओर ध्यान दिलाया है, जो बहुत समय से चली आ रही हैं और जिन्हें लोग बिना सोचे-समझे अपनाते रहते हैं, और जिन्हें हटाना बहुत मुश्किल हो गया है।

Exam Tip: 'परत-दर-परत' के प्रतीकात्मक अर्थ को सामाजिक बुराइयों के गहराने और उनके स्थायी होने की विडंबना से जोड़ें।

दीर्घ उत्तरी प्रश्नोत्तर

 

Question 1. पाठ के आधार पर प्रेमचंद की वेशभूषा और उनकी स्वाभाविक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
अथवा
प्रेमचंद की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।

Answer: पाठ के आधार पर प्रेमचंद की वेशभूषा और उनकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :
**वेशभूषा :** प्रेमचंद की वेशभूषा बहुत ही साधारण थी । उन्होंने मोटे कपड़े की टोपी और कुर्ता तथा धोती पहनी थी । कैनवास के जूते पहने थे । बाएँ पैर का जूता अंगूठे के ऊपरी हिस्से से फटा था, जिसमें से पैर की अंगुलियाँ दिख रही थीं । इतने बड़े साहित्यकार होने पर भी उनकी यह सादगी देखते ही बनती थी । पहनावा उनके लिए कोई मायने नहीं रखता था । प्रेमचंद जीवन-मूल्यों को अधिक महत्व देते थे ।
**स्वभावगत विशेषताएँ :** प्रेमचंद बहुत ही सीधे-सादे स्वभाव के थे । उनके व्यक्तित्व में कहीं भी दिखावा नहीं था । वे बहुत ही स्वाभिमानी थे । किसी भी वस्तु को माँगना उनके व्यक्तित्व के खिलाफ था । अन्यथा वे जूते माँगकर भी पहन सकते थे । वे उच्च विचारों वाले और आडंबरहीन व्यक्ति थे । वे जिस हाल में थे, उसी में खुश रहते थे । वे जैसी स्थिति में थे, फोटो में भी वे वैसा ही दिखना चाहते थे । वे अपनी कमजोरियों, अपनी गरीबी और कमियों को छिपाना नहीं चाहते थे । अतः वे बहुत ही सीधे-सादे और सरल स्वभाव के थे ।
In simple words: प्रेमचंद की वेशभूषा बहुत सादी थी - कुर्ता-धोती, टोपी, और फटे कैनवास के जूते। वे दिखावे से दूर, स्वाभिमानी, उच्च विचार वाले और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे, जो जीवन-मूल्यों को प्राथमिकता देते थे और अपनी गरीबी या कमियों को छिपाना नहीं चाहते थे।

Exam Tip: उत्तर को वेशभूषा और स्वभावगत विशेषताओं के अलग-अलग उपशीर्षकों में विभाजित करें ताकि जानकारी स्पष्ट और व्यवस्थित रहे।

 

Question 2. लेखक के अनुसार जूता फटने के पीछे कौन-कौन से कारण हो सकते हैं ?
Answer: लेखक के अनुसार जूता फटने के पीछे कई कारण हो सकते हैं –
1. प्रेमचंद बहुत अधिक चक्कर काटते होंगे ।
2. बनिए के तकाजे से बचने के लिए मील-दो मील का चक्कर लगाकर घर लौटते रहे होंगे ।
3. किसी सख्त चीज को ठोकर मारते रहे होंगे। कोई चीज जो सदियों से परत-दर-परत जम गई है, शायद उन्होंने ठोकर मार-मारकर अपना जूता फाड़ लिया होगा । कोई टीला जो रास्ते पर खड़ा हो गया था, उस पर उन्होंने अपने जूते से ठोकर मारा होगा । बार-बार ठोकर मारने से शायद जूता फट गया होगा ।
In simple words: लेखक के अनुसार प्रेमचंद का जूता फटने के कई कारण हो सकते हैं - शायद वे बहुत चलते थे, या साहूकारों से बचने के लिए लंबा रास्ता तय करते थे, या फिर उन्होंने रास्ते में आने वाली किसी सख्त चीज़ या सामाजिक बुराई (टीले) को बार-बार ठोकर मारकर हटाने की कोशिश की होगी।

Exam Tip: जूता फटने के संभावित कारणों को तार्किक रूप से सूचीबद्ध करें, और प्रेमचंद के जीवन-दर्शन से संबंधित प्रतीकात्मक कारणों को भी शामिल करें।

 

Question 3. लेखक ने 'प्रेमचंद के फटे जूते' पाठ में प्रेमचंद की आर्थिक स्थिति का वर्णन करते-करते जाने-अनजाने अपनी आर्थिक स्थिति का भी वर्णन किया है । उदाहरण सहित समझाइए ।
Answer: लेखक हरिशंकर परसाई, प्रेमचंद की एक फोटो देखकर परेशान हो जाते हैं, जिसमें उनके बाएँ पैर का जूता फटा है और उसमें से उनके पैर की अंगुली झाँक रही है । उस फटे जूते के बारे में विचार करते-करते वे अपने जूते का भी जिक्र करने लगते हैं । वे कहते हैं कि 'मेरा जूता भी कोई अच्छा नहीं है । यों ऊपर से अच्छा दिखता है । अंगुली बाहर नहीं निकलती, पर अंगूठे के नीचे का तला फट गया है । अंगूठा जमीन से घिसता है और तीखी मिट्टी पर कभी रगड़ खाकर लहूलुहान हो जाता है । पूरा तला गिर जाएगा, पूरा पंजा छिल जाएगा, मगर अंगुली बाहर नहीं दिखेगी ।' यह अंश इस बात का सबूत है कि लेखक की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी । लेकिन वे प्रेमचंद की तरह फटे जूते पहनकर फोटो खिंचवाने की हिम्मत नहीं रखते थे । वे परदे के जरिए उसे रोकना चाहते थे और वास्तविकता का दिखाना नहीं चाहते थे ।
In simple words: लेखक ने प्रेमचंद के फटे जूते के बारे में लिखते-लिखते अपनी खुद की आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनका जूता ऊपर से तो ठीक दिखता है, पर नीचे से घिस चुका है और अंगूठा लहूलुहान हो जाता है। वे दिखावा पसंद करते थे और अपनी गरीबी को छिपाना चाहते थे, जबकि प्रेमचंद दिखावा नहीं करते थे।

Exam Tip: लेखक द्वारा अपनी और प्रेमचंद की आर्थिक स्थिति के वर्णन में तुलनात्मक विश्लेषण करें, और दिखावे तथा वास्तविकता के अंतर को उजागर करें।

बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर

 

Question 1. प्रेमचंद किसके साथ फोटो खिंचा रहे हैं ?
(क) अपनी बेटी के साथ
(ख) अपने परिवारजनों के साथ
(ग) अपनी पत्नी के साथ
(घ) अपने मित्र के साथ
Answer: (ग) अपनी पत्नी के साथ
In simple words: प्रेमचंद फोटो में अपनी पत्नी के साथ बैठे हुए हैं, जैसा कि लेखक ने पाठ में बताया है।

Exam Tip: सीधे तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए, पाठ में दी गई जानकारी को सीधे याद रखें।

 

Question 2. फोटोग्राफर के 'रेडी-प्लीज़' कहने पर प्रेमचंद ने क्या किया होगा ?
(क) परम्परा के अनुसार मुसकान लाने की कोशिश की होगी ।
(ख) चेहरे पर गंभीरता का भाव लाने की कोशिश की होगी ।।
(ग) जोरों से हँसने का प्रयास किया होगा ।
(घ) चेहरे को सँवारने की कोशिश की होगी ।
Answer: (क) परम्परा के अनुसार मुसकान लाने की कोशिश की होगी ।
In simple words: जब फोटोग्राफर ने 'रेडी-प्लीज़' कहा, तो प्रेमचंद ने पारंपरिक रूप से मुस्कुराने की कोशिश की, भले ही उनके भीतर दर्द था।

Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पाठ में वर्णित पात्र के व्यवहार और उसकी आंतरिक स्थिति के बीच संबंध स्थापित करें।

 

Question 3. उस जमाने में टोपी और जूते की क्या कीमत रही होगी ?
(क) टोपी : आठ आने और जूता : पाँच रुपये ।
(ख) टोपी : चार आने और जूते दो रुपये ।
(ग) टोपी पाँच रुपये और जूता आठ आने ।
(घ) टोपी 10 रुपये और जूता 50 रुपये ।
Answer: (क) टोपी : आठ आने और जूता : पाँच रुपये ।
In simple words: उस समय टोपी (सम्मान का प्रतीक) की कीमत आठ आने थी, जबकि जूता (धन का प्रतीक) पाँच रुपये का था, जो यह दर्शाता है कि धन का महत्व सम्मान से कहीं अधिक था।

Exam Tip: कीमतों को याद रखने के साथ-साथ, उनके प्रतीकात्मक महत्व को भी समझें जैसा कि पाठ में वर्णित है।

 

Question 4. निम्न में से प्रेमचंद के लिए किस विशेषण का प्रयोग नहीं किया गया है ?
(क) उपन्यास-सम्राट
(ख) महान कथाकार
(ग) युग-प्रवर्तक
(घ) महाकवि
Answer: (घ) महाकवि
In simple words: प्रेमचंद के लिए 'उपन्यास-सम्राट', 'महान कथाकार', और 'युग-प्रवर्तक' जैसे विशेषणों का प्रयोग किया गया है, लेकिन उन्हें 'महाकवि' नहीं कहा गया है।

Exam Tip: पाठ में दिए गए विशेषणों को ध्यान से पढ़ें और पहचानें कि कौन सा विकल्प उनमें शामिल नहीं है।

 

Question 5. अकबर ने फतेहपुर सीकरी किसे बुलवाया था ?
(क) हरिशंकर परसाई को
(ख) प्रेमचंद को
(ग) सूरदास को
(घ) कुंभनदास को
Answer: (घ) कुंभनदास को
In simple words: अकबर बादशाह ने प्रसिद्ध ब्रजभाषा कवि कुंभनदास को फतेहपुर सीकरी में बुलाया था।

Exam Tip: पाठ में उल्लेखित ऐतिहासिक या साहित्यिक संदर्भों को याद रखें।

 

Question 6. 'आवत जात पन्हैया घिस गई, बिसर गयो हरि नाम ।' किसकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ हैं ?
(क) सूरदास की
(ख) नाभादास की
(ग) कुंभनदास की
(घ) हरिदास की
Answer: (ग) कुंभनदास की
In simple words: यह प्रसिद्ध पंक्ति कुंभनदास द्वारा कही गई थी, जिसका अर्थ है कि दुनियावी कामों में उलझकर इंसान भगवान का नाम भूल जाता है।

Exam Tip: साहित्य से संबंधित प्रश्नों में, कवि या लेखक के नाम को उनकी प्रसिद्ध पंक्तियों या रचनाओं से जोड़ना सीखें।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

 

प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं । सिर पर किसी मोटे कपडे की टोपी, करता और धोती पहने हैं । कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियाँ उभर आई हैं, पर घनी मूंछे चेहरे को भरा-भरा बतलाती है। पाँवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बँधे हैं । लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है । तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं ।

 

Question 1. प्रेमचंद की वेशभूषा का वर्णन कीजिए ।
Answer: प्रेमचंद ने धोती-कुर्ता पहन रखा है, उनके सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी है । पोशाक एकदम सादी है । उनके पैरों में कैनवास का जूता है, जो जूते फटे हुए हैं ।
In simple words: प्रेमचंद ने कुर्ता-धोती पहनी है और सिर पर मोटी टोपी लगाई है। उनके जूते कैनवास के हैं और वे फटे हुए हैं। कुल मिलाकर उनकी पोशाक बहुत सादी है।

Exam Tip: वेशभूषा का वर्णन करते समय, प्रत्येक वस्तु का उल्लेख करें और उसकी स्थिति (जैसे 'फटे हुए जूते') को भी स्पष्ट करें।

 

Question 2. प्रेमचंद के जूते बेतरतीब से क्यों बंधे हैं ?
Answer: प्रेमचंद ने जो जूते पहने हैं उनका उपयोग लापरवाही से होने के कारण फीतों के सिरों पर लोहे की पत्ती निकल आई है, जिस वजह से फीते छेदों में नहीं जा सकते । इसलिए उनके जूते बेतरतीब तरीके से बाँध लिए गए हैं ।
In simple words: प्रेमचंद के जूते बेतरतीब ढंग से बंधे थे क्योंकि लापरवाही से इस्तेमाल के कारण फीतों के सिरे पर लगी लोहे की पत्तियां निकल गई थीं, जिससे फीतों को छेदों में डालना मुश्किल हो गया था।

Exam Tip: जूते के बेतरतीब ढंग से बंधे होने का कारण बताते हुए, फीतों की स्थिति और उसके प्रभाव को समझाएं।

 

Question 3. 'लापरवाही' में से उपसर्ग व प्रत्यय दोनों अलग कीजिए ।
Answer: ला उपसर्ग तथा ई प्रत्यय है ।
In simple words: 'लापरवाही' शब्द में 'ला' उपसर्ग है और 'ई' प्रत्यय है।

Exam Tip: उपसर्ग और प्रत्यय को अलग करते समय, मूल शब्द को पहचानें और फिर उसके आगे और पीछे लगे हुए अंशों को लिखें।

 

दाहिने पाँव का जूता ठीक है, मगर बाएँ जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अँगुली बाहर निकल आई है। मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है। सोचता हूँ – फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी ? नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी – इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है । यह जैसा है, वैसा ही फोटो में खिंच जाता है।

 

Question 1. लेखक की दृष्टि जूते पर जाकर क्यों अटक गई ?
Answer: लेखक प्रेमचंद का फोटो देख रहे थे । उनकी दृष्टि जूतों पर जाकर इसलिए रुक गई क्योंकि उनके बाएँ पैर के जूते में एक बड़ा छेद हो गया था और उससे उनकी अंगुलियाँ दिखाई दे रही थीं ।
In simple words: लेखक की नज़र प्रेमचंद के जूते पर इसलिए रुक गई क्योंकि उनके बाएँ जूते में बड़ा छेद था जिससे उनकी अंगुली दिख रही थी।

Exam Tip: प्रश्न के सीधे उत्तर के लिए, लेखक की उत्सुकता का कारण स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 2. सोचता हूँ – फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है, तो पहनने की कैसी होगी ? का आशय स्पष्ट कीजिए ।
Answer: लेखक सोचते हैं कि इतने बड़े कथाकार यदि फोटो में इस प्रकार के कपड़े में खिंचते हैं, तो उनके रोजमर्रा के पहनने के कपड़े तो इससे भी खराब हालत में होंगे ।
In simple words: लेखक यह सोचते हैं कि अगर फोटो खिंचवाने के लिए प्रेमचंद ने ऐसे कपड़े पहने हैं, तो उनके रोज़ाना पहनने वाले कपड़े इससे भी ज्यादा पुराने या फटे होंगे।

Exam Tip: इस कथन का आशय समझाते हुए, प्रेमचंद की सादगी और उनकी आर्थिक स्थिति के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 3. पोशाक के संदर्भ में प्रेमचंद में कौन-सा गुण नहीं है और क्यों ?
Answer: प्रेमचंद में पोशाक बदलने का गुण नहीं है । उनमें दिखावे की भावना नहीं है । वे भीतर-बाहर एक जैसे थे ।
In simple words: प्रेमचंद दिखावा नहीं करते थे, इसलिए उनमें पोशाक बदलने का गुण नहीं था। वे जैसे बाहर से दिखते थे, वैसे ही अंदर से भी थे।

Exam Tip: प्रेमचंद की ईमानदारी और दिखावे से दूरी को उनके 'पोशाक न बदलने' के गुण से जोड़ें।

 

Question 4. 'मेरी दृष्टि इस जूते पर अटक गई है ।' में वाक्य का कौन-सा प्रकार है ?
Answer: यह सरल वाक्य है ।
In simple words: यह एक सीधा और सरल वाक्य है, जिसमें कोई उपवाक्य या जटिल संरचना नहीं है।

Exam Tip: वाक्य के प्रकार की पहचान के लिए, उसकी संरचना और उसमें उपवाक्यों की उपस्थिति पर ध्यान दें।

 

मैं चेहरे की तरफ़ देखता हूँ। क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरख्खे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अँगुली बाहर दिस्य रही है ? क्या तुम्हें इसका ज़रा भी अहसास नहीं है ? ज़रा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है ? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा नीचे खींच लेने से अँगुली ढक सकती है ? मगर फिर भी तुम्हारे चेहरे पर बड़ी बेपरवाही, बड़ा विश्वास है !
फोटोग्राफर ने जब 'रेडी-प्लीज़' कहा होगा, तब परंपरा के अनुसार तुमने मुसकान लाने की कोशिश की होगी, दर्द के गहरे कुएँ के तल में कहीं पड़ी मुसकान को धीरे-धीरे खींचकर ऊपर निकाल रहे होंगे कि बीच

 

Question 1. साहित्यिक पुरख्ने शब्द का प्रयोग लेखक ने किसके लिए किया है ? क्यों ?
Answer: साहित्यिक पुरख्ने शब्द का प्रयोग लेखक ने प्रेमचंदजी के लिए किया है । क्योंकि वे लेखक की पुरानी पीढ़ी के बहुत पहले के रचनाकार हैं ।
In simple words: लेखक ने प्रेमचंद के लिए 'साहित्यिक पुरखे' शब्द का इस्तेमाल किया क्योंकि प्रेमचंद लेखक की पुरानी पीढ़ी के एक महान रचनाकार थे।

Exam Tip: 'पुरखे' शब्द के अर्थ (पूर्वज) को ध्यान में रखते हुए, इसे प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान और काल से जोड़कर समझाएं।

 

Question 2. प्रेमचंद की मुस्कान अधूरी क्यों रह गई थी ?
Answer: प्रेमचंद को फोटोग्राफर ने 'रेडी प्लीज़' कहा होगा । तब वे दर्द के गहरे कुएँ के तल में कहीं पड़ी मुस्कान को धीरे-धीरे खींचकर ऊपर निकाल रहे होंगे । तभी बीच में ही फोटोग्राफर ने फोटो खींचकर 'थैंक यू' कह दिया होगा । इसलिए प्रेमचंद की मुस्कान अधूरी रह गई होगी ।
In simple words: प्रेमचंद की मुस्कान अधूरी इसलिए रह गई क्योंकि वे अंदर के दर्द के बावजूद मुस्कुराने की कोशिश कर रहे थे, और इससे पहले कि उनकी मुस्कान पूरी होती, फोटोग्राफर ने फोटो खींच ली।

Exam Tip: प्रेमचंद की अधूरी मुस्कान के पीछे के आंतरिक दर्द और फोटोग्राफर की जल्दी को मुख्य कारण के रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 3. लेखक के अनुसार अधूरी मुसकान कैसी है ?
Answer: लेखक के अनुसार अधूरी मुस्कान विचित्र है । उसमें उपहास है, व्यंग्य है ।
In simple words: लेखक के लिए प्रेमचंद की अधूरी मुस्कान अनोखी है, क्योंकि उसमें हंसी के साथ-साथ एक गहरा व्यंग्य भी छिपा हुआ है।

Exam Tip: अधूरी मुस्कान को केवल दुख के रूप में न देखकर, उसमें निहित व्यंग्यात्मक पहलू को भी उजागर करें।

 

Question. 'दर्द' और 'कोशिश' का अर्थ लिखिए।
Answer: 'दर्द' का अर्थ पीड़ा तथा 'कोशिश' का अर्थ प्रयत्न है ।
In simple words: 'दर्द' का मतलब तकलीफ और 'कोशिश' का मतलब प्रयास करना है।

Exam Tip: शब्दों के अर्थ लिखते समय, सरल और सामान्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

यह केसा आदमी है, जो खुद तो फटे जूते पहने फोटो खिचा रहा है, पर किसी पर हंस भी रहा है ! फोटो ही खिंचाना था, तो ठीक जूते पहन लेते, या न खिचाते । फोटो न खिंचाने से क्या बिगड़ता था। शायद पत्नी का आग्रह रहा हो और तुम, 'अच्छा, चल भई' कहकर बैठ गए होंगे । मगर यह कितनी बड़ी 'ट्रेजड़ी' है कि आदमी के पास फोटो खिंचाने को भी जूता न हो । मैं तुम्हारी यह फोटो देखते-देखते, तुम्हारे क्लेश को अपने भीतर महसूस करके जैसे रो पड़ना चाहता हूँ, मगर तुम्हारी आँखों का यह तीखा दर्द भरा व्यंग्य मुझे एकदम रोक देता है।

 

Question 1. लेखक के अनुसार प्रेमचंद को फोटो खिंचाने के लिए क्या करना चाहिए था ?
Answer: लेखक के अनुसार प्रेमचंद को फोटो खिंचाने के लिए ठीक-ठाक जूता पहनना चाहिए था । अन्यथा फोटो नहीं खिंचाना चाहिए था ।
In simple words: लेखक को लगता है कि प्रेमचंद को फोटो खिंचवाने के लिए या तो अच्छे जूते पहनने चाहिए थे, या फिर फोटो खिंचवानी ही नहीं चाहिए थी।

Exam Tip: इस प्रश्न में लेखक की राय को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें, जिसमें दिखावे और सादगी के बीच का अंतर निहित है।

 

Question 2. प्रेमचंद ने किसके आग्रह पर फोटो खिंचवाया होगा ? क्यों ?
Answer: प्रेमचंद ने अपनी पत्नी के आग्रह पर फोटो खिंचवाया होगा । क्योंकि शायद वे अपनी पत्नी की बात रखना चाहते होंगे । इसलिए जैसे थे उसी हालत में उन्होंने फोटो खिंचवा ली होगी ।
In simple words: प्रेमचंद ने शायद अपनी पत्नी के कहने पर फोटो खिंचवाई होगी, क्योंकि वे उनकी बात टालना नहीं चाहते थे और उसी सादे रूप में फोटो खिंचवा ली।

Exam Tip: प्रेमचंद के फोटो खिंचवाने के पीछे के संभावित कारण (पत्नी का आग्रह) को उनके स्वभाव (स्वाभिमानी, सादगी पसंद) से जोड़कर समझाएं।

 

Question 3. 'ट्रेजडी' शब्द का अर्थ लिखिए ।
Answer: 'ट्रेजडी' शब्द का अर्थ है – दुःखद घटना ।
In simple words: 'ट्रेजडी' का मतलब एक दुखद घटना या कोई ऐसी बात है जिससे बहुत दुख होता है।

Exam Tip: शब्दों के अर्थ लिखते समय, सरल और सामान्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

मेरा जूता भी कोई अच्छा नहीं है । यों ऊपर से अच्छा दिखता है । अँगुली बाहर नहीं निकलती, पर अंगूठे के नीचे तला फट गया है । अँगूठा जमीन से घिसता है और पैनी मिट्टी पर कभी रगड़ खाकर लहूलुहान भी हो जाता है । पूरा तला गिर जाएगा, पूरा पंजा छिल जाएगा, मगर अँगुली बाहर नहीं दिखेगी । तुम्हारी अंगुली दिखती है, पर पाँव सुरक्षित है। मेरी अंगुली ढंकी है, पर पंजा नीचे घिस रहा है । तुम परदे का महत्त्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं।

 

Question 1. लेखक और प्रेमचंद के जूतों में क्या अंतर है ?
Answer: लेखक का जूता ऊपर से अच्छा दिखता है, लेकिन अंगूठे के नीचे तला घिसकर फट गया है । प्रेमचंद के जूतों में अंगूठे के पास फटा हुआ है और उसमें से अंगुलियाँ बाहर निकल आई हैं । प्रेमचंद का जूता फटा दिखता तो है, पर परसाई जी का नहीं ।
In simple words: लेखक का जूता ऊपर से ठीक दिखता है पर नीचे से घिसा हुआ है, जबकि प्रेमचंद का जूता ऊपर से फटा है और उनकी अंगुली दिखती है, लेकिन पैर अंदर से सुरक्षित है।

Exam Tip: दोनों जूतों की स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण करें, ध्यान रहे कि लेखक के जूते अंदर से खराब हैं जबकि प्रेमचंद के जूते ऊपर से फटे हैं।

 

Question 2. लेखक ने प्रेमचंद के जूते को अपने जूते से बेहतर क्यों माना है ?
Answer: लेखक के जूते नीचे से घिस गए थे । नीचे का तला फट गया था । उसमें अंगूठा जमीन से घिसता है और तीखी मिट्टी पर कभी रगड़ खाकर खून से लथपथ हो जाता था । प्रेमचंद के जूते में से केवल अंगुली दिखती है लेकिन पाँव सुरक्षित हैं । इसलिए लेखक ने प्रेमचंद के जूते को अपने जूते से बेहतर माना है । प्रेमचंदजी के जूते का फटना दिखता तो है, इसलिए यह बेहतर है ।
In simple words: लेखक ने प्रेमचंद के जूते को अपने जूते से अच्छा माना क्योंकि लेखक का जूता नीचे से घिसकर पैर को चोट पहुंचाता था, जबकि प्रेमचंद के जूते में छेद होने पर भी उनका पैर सुरक्षित रहता था, भले ही अंगुली दिखती हो।

Exam Tip: लेखक के तर्क को स्पष्ट करें कि भले ही प्रेमचंद के जूते फटे हों, वे उनके अपने जूतों से बेहतर क्यों थे, खासकर चोट से बचाव के मामले में।

 

Question 1. लेखक के मुताबिक प्रेमचंद का जूता कैसे फटा होगा ?
Answer: लेखक के अनुसार, प्रेमचंद का जूता कई वजहों से फटा होगा। शायद उन्होंने बहुत अधिक चक्कर लगाए होंगे, या व्यापारी से बचने के लिए कई मील तक चलकर घर लौटते रहे होंगे। यह भी हो सकता है कि रास्ते में किसी टीले को बार-बार टक्कर मारने से उनका जूता फट गया हो।
In simple words: लेखक सोचते हैं कि प्रेमचंद का जूता कई कारणों से फटा होगा, जैसे बहुत ज्यादा घूमना, बनिया से बचने के लिए लंबा चलना, या रास्ते में किसी कठोर चीज को बार-बार ठोकर मारना।

Exam Tip: When explaining possible causes, provide a range of logical reasons based on the text to give a complete answer.

 

Question 2. कुंभनदास का जूता कैसे फटा था ? उन्हें क्यों पछतावा हुआ ?
Answer: बादशाह अकबर ने कुंभनदास को बुलाया था, इसलिए वे पैदल ही फतेहपुर सीकरी गए थे। आते-जाते समय उनका जूता घिस गया था। आवागमन में वे ईश्वर का नाम याद करना भूल गए थे। उन्हें इसी बात पर बहुत खेद था।
In simple words: कुंभनदास का जूता अकबर के बुलाने पर फतेहपुर सीकरी पैदल जाते हुए घिस गया था। उन्हें इस बात का दुख था कि इस यात्रा में वे भगवान का नाम लेना भूल गए।

Exam Tip: For historical references or anecdotes, mention the key figures and the specific event that led to the outcome.

 

Question 3. 'पन्हैया', 'बिसर' शब्द का अर्थ लिखिए ।
Answer:
पन्हैया - जूता (Shoe)
बिसर - भूल जाना (To forget)
In simple words: 'पन्हैया' का मतलब 'जूता' है और 'बिसर' का मतलब 'भूल जाना' है।

Exam Tip: When defining words, provide the simple meaning directly.

 

Question 1. प्रेमचंद ने टीले पर अपना जूता क्यों आजमाया ?
Answer: असल में, यहाँ 'टीला' शब्द सामाजिक बुराइयों और गलत रीति-रिवाजों के समूह के लिए उपयोग किया गया है, जो किसी व्यक्ति के विकास को रोकते हैं। प्रेमचंद ने इन सामाजिक कुरीतियों को समाज से समाप्त करने के लिए ही टीले पर अपना जूता आज़माया होगा, ताकि उन्हें रास्ते से हटाया जा सके।
In simple words: प्रेमचंद ने टीले पर अपना जूता इसलिए आज़माया क्योंकि 'टीला' समाज की बुरी प्रथाओं का प्रतीक है। वे इन बाधाओं को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे ताकि समाज आगे बढ़ सके।

Exam Tip: When a question refers to symbolic language, explain the symbolism clearly and connect it back to the character's actions and intentions.

 

Question 2. प्रस्तुत गद्यांश में टीला किसका प्रतीक है ?
Answer: इस गद्यांश में, 'टीला' समाज में फैली पुरानी परंपराओं और बुराइयों के कारण पैदा होने वाली रुकावटों का संकेत है, जो किसी व्यक्ति और समाज के विकास में बाधा डालती हैं।
In simple words: इस कहानी में 'टीला' उन सामाजिक कुरीतियों और रुकावटों को दर्शाता है जो लोगों के विकास को रोकती हैं।

Exam Tip: Clearly identify the symbolic meaning of key terms used in the text.

 

Question 3. रास्ता बदलकर जानेवाली नदियाँ किसका प्रतीक हैं ?
Answer: रास्ता बदलने वाली नदियाँ उन समझौता करने वाले लोगों को दर्शाती हैं, जो सामाजिक बुराइयों और गलत रीति-रिवाजों को देखकर भी नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और उनसे बचकर अपना रास्ता बदल लेते हैं।
In simple words: रास्ता बदलने वाली नदियाँ उन लोगों का प्रतीक हैं जो सामाजिक बुराइयों से सीधे टकराने के बजाय उनसे बचकर निकल जाते हैं।

Exam Tip: Explain the symbolic representation fully, detailing the characteristics of the people or concepts being symbolized.

 

Question 1. लेखक के अनुसार प्रेमचंद का जूता क्या संकेत करता है ?
Answer: लेखक के मुताबिक, प्रेमचंद का फटा जूता यह दर्शाता है कि वे जिन चीज़ों से नफरत करते हैं, उन्हें हाथ की उंगली से नहीं, बल्कि पैर की उंगली से दिखाते हैं।
In simple words: लेखक कहते हैं कि प्रेमचंद का जूता यह बताता है कि वे जिन बातों से घृणा करते हैं, उन्हें सीधे-सीधे हाथ से नहीं, बल्कि पैर की उंगली से इशारा करके दर्शाते हैं।

Exam Tip: Link the physical description (the torn shoe) to the deeper, symbolic meaning of the character's actions.

 

Question 2. लेखक ने प्रेमचंद की व्यंग्यभरी मुस्कान का क्या अर्थ निकाला ?
Answer: लेखक ने प्रेमचंद की व्यंग्यात्मक मुस्कान का अर्थ यह निकाला कि प्रेमचंद खुद लेखक पर या हम सभी लोगों पर हँस रहे हैं। वे उन लोगों पर हँसते हैं जो अपनी कमियाँ छुपाकर और मेहनत से काम करते हुए आगे बढ़ रहे हैं, या जो सामाजिक बुराइयों से बचकर अपना रास्ता बदल लेते हैं।
In simple words: लेखक का मानना है कि प्रेमचंद की मुस्कान एक कटाक्ष है। वे उन लोगों पर हँस रहे हैं जो अपनी कमजोरियाँ छिपाते हैं या समाज की बुराइयों से बचने के लिए रास्ता बदल लेते हैं।

Exam Tip: Analyze the deeper meaning of a character's expression, connecting it to their observations about society and human behavior.

 

Question 3. 'संकेत' तथा 'बाजू' शब्द का अर्थ लिखिए ।
Answer:
'संकेत' का मतलब है इशारा (hint), और 'बाजू' का मतलब है बगल (side).
In simple words: 'संकेत' का अर्थ है 'इशारा' और 'बाजू' का अर्थ है 'बगल'।

Exam Tip: Provide clear and concise definitions for the requested words.

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FAQs

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