Official GSEB Solutions for Class 9 Hindi: Chapter 04 कर्ण का जीवन दर्शन
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Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 04 कर्ण का जीवन दर्शन
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ऊँचे स्वर में पढ़िए और वाक्य में प्रयोग कीजिए :
Question 1.
Answer:
1. **अत्यल्प** – बहुत थोड़ा वाक्य : सांसारिक सुख-भोग बहुत कम आनंद देते हैं।
2. **चाकचिक्य** – चमक, चका-चौंध वाक्य : गाँव का दोस्त मुंबई की चकाचौंध पर बहुत मोहित हो गया।
3. **कनकाभ** – सुनहले वाक्य : राजमहल के सुनहरे शिखर हमारा ध्यान अपनी ओर खींच रहे थे।
4. **तपःक्षीण** – प्रभावहीन वाक्य : शाप के प्रभाव से ऋषि तुरंत शक्तिहीन हो गए।
5. **क्लेश** – कष्ट, वेदना वाक्य : पुत्र के खराब व्यवहार से पिता को बहुत दुख हुआ।
6. **झंझावात** – तूफान वाक्य : बर्फीले तूफानों में भी हमारे सैनिक देश की रक्षा करने में लगे हुए हैं।
7. **फणिबंध** – नागपाश वाक्य : पता नहीं, संकट के इस नागपाश से हमें कौन मुक्त करेगा?
In simple words: आपको दिए गए शब्दों के अर्थ और उदाहरण वाक्यों को पढ़ना है। यहाँ हर शब्द का अर्थ और उसका प्रयोग एक वाक्य में करके दिखाया गया है।
Exam Tip: जब भी शब्दार्थ और वाक्य-प्रयोग दिया जाए, तो अर्थ को समझकर वाक्य को इस तरह से बनाएं कि शब्द का सही प्रयोग दिखे।
संक्षेप में उत्तर दीजिए :
Question 1. विभव से क्या प्राप्त होता है?
Answer: धन-दौलत से मनुष्य को बहुत सारी चिंताएं और थोड़ी-सी खुशी मिलती है। इसके अलावा, उसे दिखावा करने का अवसर और कुछ समय का भोग-विलास भी प्राप्त होता है।
In simple words: धन से इंसान को बहुत सारी चिंताएं और थोड़ी-सी खुशी मिलती है, साथ ही दिखावे और कुछ समय के लिए सुख मिलता है।
Exam Tip: 'विभव' शब्द का अर्थ समझकर उसके परिणामों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 2. धन-संपत्ति किस लिए है?
Answer: धन-संपत्ति दूसरों की भलाई के लिए होती है।
In simple words: धन और संपत्ति परोपकार के लिए है।
Exam Tip: ऐसे सीधे प्रश्नों के उत्तर में मुख्य विचार को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 3. समृद्धि-सुख के अधीन मानव का क्या होता है?
Answer: सुख-समृद्धि के गुलाम मनुष्य का तेज और प्रभाव दिन-प्रतिदिन कम होता जाता है और उसकी हालत खराब होती चली जाती है।
In simple words: जो इंसान सुख और समृद्धि के पीछे भागता है, उसकी ताकत धीरे-धीरे घटती जाती है और उसकी स्थिति बिगड़ जाती है।
Exam Tip: उत्तर में यह स्पष्ट करें कि सुख-समृद्धि का अत्यधिक लालच इंसान के लिए कैसे हानिकारक होता है।
Question 4. फणिबंध कौन छुड़ाते हैं?
Answer: नागपाश से गरुड़ जैसे साहसी और बहादुर पुरुष ही मुक्त कराते हैं।
In simple words: नागपाश से वही लोग बचाते हैं जो गरुड़ जैसे वीर और साहसी होते हैं।
Exam Tip: उत्तर में तुलना का उपयोग करते हुए 'कौन' का जवाब दें और नायक के गुणों को बताएं।
निम्नलिखित पंक्तियों का भावार्थ लिखिए :
Question 1. वैभव-विलास की चाह नहीं, अपनी कोई परवाह नहीं,
बस यहीं चाहता हूँ केवल, दान की देव सरिता निर्मल,
करतल से झरती रहे. सदा,
निर्धन को भरती रहे. सदा।
Answer: कर्ण श्रीकृष्ण से कहते हैं कि हे केशव! आप मुझे राज्य देने का लालच दे रहे हैं, लेकिन मैं सुख-विलास का जीवन पसंद नहीं करता। मुझे अपनी कोई चिंता नहीं है। मुझे दान देने में रुचि है। इसलिए मैं सिर्फ यही चाहता हूँ कि मैं हमेशा गरीबों को दान देता रहूं और उनके दुखों को दूर करता रहूं।
In simple words: कर्ण श्रीकृष्ण से कहता है कि उसे धन-दौलत या ऐशो-आराम की इच्छा नहीं है। उसे बस यही चाहिए कि वह हमेशा गरीबों को दान दे और उनके दुखों को दूर करने में मदद करे।
Exam Tip: कविता की पंक्तियों के भावार्थ को लिखते समय, कवि के संदेश और पात्र की भावना को स्पष्ट करें।
Question 2. मैं गरुड़, कृष्ण ! मैं पक्षिराज, सिर पर न चाहिए मुझे ताज,
दुर्योधन पर है. विपद घोर, सकता न किसी विध उसे छोड,
रणखेत पाटना है. मुझको,
अहि.पाश काटना है. मुझको।
Answer: कर्ण श्रीकृष्ण से कहता है कि इस समय मेरी स्थिति गरुड़ पक्षी के समान है। मुझे राजमुकुट नहीं पहनना है। इस समय दुर्योधन बहुत बड़े संकट में है। युद्धरूपी नागपाश ने उसे जकड़ रखा है। मुझे दुर्योधन के इस नागपाश को काटना है, यानी दुर्योधन को युद्ध में जीत दिलानी है। मुझे गरुड़ की तरह अपना दायित्व निभाना है।
In simple words: कर्ण श्रीकृष्ण से कहता है कि वह गरुड़ जैसा है, उसे ताज नहीं चाहिए। दुर्योधन गहरे संकट में है और वह उसे छोड़ नहीं सकता। उसे युद्ध के मैदान में उतरना है और दुर्योधन को इस मुश्किल से निकालना है।
Exam Tip: कविता में पात्र के आत्म-परिचय और उसके संकल्प को साफ-साफ लिखें, और तुलनात्मक शब्दों (जैसे 'गरुड़') के महत्व को बताएं।
टिप्पणी लिखिए :
Question 1. कर्ण की अभिलाषा
Answer: कर्ण एक बहुत ही दानी पुरुष है। वह हर दिन जरूरतमंद लोगों को दान देता है। उसे राज्य प्राप्त करने की कोई इच्छा नहीं है। धन पाकर भोग-विलास में जीवन बिताना उसके स्वभाव के खिलाफ है। वह दयालु और उदार हृदय का है। गरीबों के प्रति उसके मन में दया है। उसकी यही इच्छा है कि वह अपनी दानशीलता से निर्धनों के दुखों को दूर करता रहे।
In simple words: कर्ण बहुत दानी है। उसे राज्य या सुख-विलास नहीं चाहिए। उसकी सबसे बड़ी इच्छा है कि वह अपनी दानशीलता से गरीब लोगों की मदद करता रहे और उनके दुखों को खत्म करे।
Exam Tip: टिप्पणी लिखते समय मुख्य विषय के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को संक्षेप में और सटीक ढंग से प्रस्तुत करें।
Question 2. कर्ण का मित्रधर्म
Answer: कर्ण का जीवन बहुत अन्याय और अपमान से भरा हुआ था। दुर्योधन ने ही उसे सम्मान दिया और अपना मित्र बनाया। कर्ण दुर्योधन के इस उपकार को कभी नहीं भूल पाया। महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले श्रीकृष्ण उसे पांडवों की ओर लेने गए। उन्होंने उसे राज्य देने का लालच भी दिया। परंतु कर्ण ने उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। उसने दुर्योधन का साथ छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। इस प्रकार कर्ण ने दुर्योधन के प्रति अपने मित्र-धर्म का पालन किया।
In simple words: कर्ण ने दुर्योधन के प्रति अपनी दोस्ती निभाई क्योंकि दुर्योधन ने ही उसे सम्मान दिया था। युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने राज्य का लालच दिया, लेकिन कर्ण ने दुर्योधन का साथ छोड़ने से मना कर दिया और अपनी दोस्ती पर कायम रहा।
Exam Tip: मित्र-धर्म जैसे नैतिक गुणों पर आधारित प्रश्नों में, चरित्र के कार्यों और उसके पीछे की प्रेरणा को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
विरोधी शब्द लिखिए :
Question 1.
1. निर्मल
2. निर्धन
3. प्रभूत
4. कोमल
5. अमृत
Answer:
1. मलीन
2. धनवान
3. कम
4. कठोर
5. विष
In simple words: दिए गए शब्दों के उल्टे अर्थ वाले शब्द यहाँ लिखे गए हैं।
Exam Tip: विरोधी शब्द लिखते समय, शब्द के मूल अर्थ के बिल्कुल विपरीत अर्थ वाले शब्द का चयन करें।
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द कोष्ठक में से ढूँढकर उन शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए:
Question 1.
1. सुखोपभोग
2. हथेली
3. प्रचूर
4. दरज
5. आंधी
6. पानी
7. गरल
8. चट्टान
| प्र | भू | त | सं | त |
|---|---|---|---|---|
| क | द | अं | ध | ड |
| र | रा | वि | ला | स |
| त | र | नि | शै | वा |
| ल | वि | ष | ल | रि |
1. सुखोपभोग – विलास
2. हथेली – करतल
3. प्रचुर – प्रभूत
4. दरज – दरार
5. आंधी – अंधड़
6. पानी – वारि
7. गरल – विष
8. चट्टान – शैल
वाक्य-प्रयोगः
1. राजा हमेशा विलास में डूबा रहता था।
2. बच्चे की करतल देखकर ज्योतिषी ने उसका भविष्य बता दिया।
3. वह गाँव में रहता था, पर उसके पास प्रभूत संपत्ति थी।
4. गरुड़ पहाड़ों की दरार में निवास करता है।
5. सारी रात अंधड़ ने कहर मचा दिया।
6. हमेशा स्वच्छ वारि पीना चाहिए।
7. देखते ही देखते साँप का विष बच्चे के शरीर में फैल गया।
8. शैल से उस पार झरना था।
In simple words: यहाँ दिए गए शब्दों के पर्यायवाची शब्द और उनका प्रयोग वाक्यों में किया गया है। आपको कोष्ठक में से सही शब्द ढूंढकर लिखने थे।
Exam Tip: समानार्थी शब्द और वाक्य-प्रयोग वाले प्रश्नों में, पहले सही पर्यायवाची ढूंढें, फिर वाक्य ऐसा बनाएं जो शब्द के अर्थ को सही ढंग से प्रकट करे।
अंदाज अपना-अपना : अपना मत स्पष्ट कीजिए :
Question 1. यदि कोई जरूरतमंद इन्सान आपसे मदद माँगे तो आप क्या करते?
Answer: यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति मुझसे मदद मांगेगा तो सबसे पहले मैं उसकी जरूरत के बारे में पूछता। अगर मुझे उसकी जरूरत सच्ची लगती तो मैं निश्चित रूप से उसकी मदद करता। मदद करने में यदि दूसरों के सहयोग की आवश्यकता होती तो उनका सहयोग लेने में भी मैं संकोच नहीं करता।
In simple words: यदि कोई मुझसे मदद मांगेगा, तो मैं पहले उसकी जरूरत जानूंगा और अगर वह असली लगी, तो मैं उसकी मदद जरूर करूंगा, जरूरत पड़ने पर दूसरों से भी मदद लेने में नहीं हिचकिचाऊंगा।
Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में अपनी सोच और नैतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट और तर्कपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करें।
Question 2. आपको पता चले कि आपका दोस्त संकट में फँसा हुआ है तो आप क्या करेंगे?
Answer: संकट में फंसे हुए मित्र की मदद करना मेरा कर्तव्य है। इस कर्तव्य का पालन करके ही मैं मित्र-धर्म को निभा सकता हूँ और अपने आपको सच्चा दोस्त साबित कर सकता हूँ। इसलिए संकट में फंसे हुए मित्र को संकट से छुड़ाने में मैं कोई कसर नहीं छोड़ूंगा।
In simple words: दोस्त के संकट में होने पर मैं उसकी हर संभव मदद करूंगा, क्योंकि यह मेरा दोस्त होने का कर्तव्य है और इससे मैं अपनी सच्ची दोस्ती साबित कर पाऊंगा।
Exam Tip: मित्र-धर्म जैसे मूल्यों पर आधारित प्रश्नों में, अपने कर्तव्यों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।
Question 3. आपके पास जरूरत से ज्यादा धन-संपत्ति है, तो क्या करोंगे?
Answer: मेरे पास जरूरत से ज्यादा धन-संपत्ति होने पर मैं उसका उपयोग परोपकार में करूंगा। मैं अनाथआश्रम में वहां के जरूरतमंदों को उनकी जरूरी चीजें खरीदकर लाऊंगा। प्यासों के लिए प्याऊ बनवाऊंगा और गरीबों को अन्नदान दूंगा। इस तरह अपने पास जरूरत से ज्यादा धन-संपत्ति होने पर मैं उसका उपयोग दूसरों के दुख दूर करने में करूंगा।
In simple words: अगर मेरे पास बहुत धन होगा, तो मैं उसे परोपकार में लगाऊंगा, जैसे अनाथों के लिए सामान खरीदना, प्याऊ बनवाना और गरीबों को भोजन देना, ताकि दूसरों का दुख कम हो सके।
Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में सामाजिक जिम्मेदारी और परोपकार के लिए अपनी योजनाओं को क्रमबद्ध और स्पष्ट रूप से बताएं।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पांच-छः वाक्यों में लिखिए :
Question 1. कर्ण को राज्य की इच्छा क्यों नहीं है?
Answer: कर्ण एक त्यागी और दानी व्यक्ति है। उसे सुख-विलास में कोई रुचि नहीं है। राज्य मिलने पर सिर पर कई चिंताएं सवार हो जाती हैं। थोड़े समय के लिए ही हंसी-खुशी, चमक-दमक और भोग-विलास की चीजें उपलब्ध होती हैं। कर्ण इन क्षणिक चीजों को तुच्छ मानता है। इसलिए उसे राज्य की कोई इच्छा नहीं है।
In simple words: कर्ण को राज्य की इच्छा इसलिए नहीं है क्योंकि वह दानी और त्यागी है। उसे सुख-विलास पसंद नहीं और वह राज्य से मिलने वाली क्षणभंगुर चीजों को बेकार समझता है, साथ ही राज्य के साथ आने वाली चिंताओं से बचना चाहता है।
Exam Tip: कर्ण के चरित्र गुणों (त्यागी, दानी, विरक्त) और उसकी विचारधारा को स्पष्ट करते हुए उत्तर दें।
Question 2. दानी पुरुषों का स्वभाव कैसा होता है?
Answer: दानी पुरुष धन-दौलत को जमा करने की चीज नहीं मानते। वे अपना धन दूसरों को बांटने में ही रुचि रखते हैं। वे अपनी कीमती चीजें दूसरों को देने में संकोच नहीं करते। वे किसी से कुछ भी नहीं लेते। वे दूसरों को देने में सुख महसूस करते हैं। इस प्रकार दानी पुरुषों का स्वभाव दयालु और उदार होता है।
In simple words: दानी पुरुष धन जमा नहीं करते, बल्कि उसे बांटने में खुशी पाते हैं। वे दूसरों को चीजें देने में संकोच नहीं करते, न ही कुछ लेते हैं, जिससे उनका स्वभाव दयालु और उदार बनता है।
Exam Tip: दानी पुरुषों के स्वभाव के मुख्य बिंदुओं (दानशीलता, उदारता, निःस्वार्थता) को रेखांकित करें।
Question 3. कर्ण गरुड़ को अपना आदर्श क्यों मानता है? अथवा कर्ण स्वयं को गरुड़ क्यों मानता है?
Answer: गरुड़ कबूतरों की तरह महलों के सुनहले शिखरों में रहना पसंद नहीं करता। वह पहाड़ों या चट्टानों की दरारों में रहता है। नागपाश से मुक्त कराने की शक्ति गरुड़ में ही होती है। कर्ण का स्वभाव भी गरुड़ के समान है। वह राजपाट और सुख-विलास को पसंद नहीं करता। वह अपने मित्र दुर्योधन को युद्ध के नागपाश से छुड़ाना चाहता है। इस प्रकार गरुड़ जैसा स्वभाव होने के कारण कर्ण उसे अपना आदर्श मानता है।
In simple words: कर्ण खुद को गरुड़ जैसा मानता है क्योंकि गरुड़ महलों में नहीं, बल्कि पहाड़ों में रहता है और नागपाश से छुड़ाने की शक्ति रखता है। कर्ण भी राजसी सुख छोड़कर अपने मित्र दुर्योधन को संकट से निकालना चाहता है, इसलिए वह गरुड़ को अपना आदर्श मानता है।
Exam Tip: कर्ण और गरुड़ के बीच की समानताओं को स्पष्ट करें, खासकर उनकी जीवनशैली और संकल्पों को।
Question 4. सुख-समृद्धि के अधीन रहनेवाले मनुष्य की क्या दशा होती है?
Answer: सुख-समृद्धि के अधीन रहने से मनुष्य धीरे-धीरे अपना प्रभाव खो देता है। राजपाट, राजमुकुट और मणियों से जड़ा सिंहासन उसका तेज छीन लेते हैं। उसकी धन प्राप्त करने की लालसा हर दिन बढ़ती जाती है। परंतु यही लालसा अंत में उसका विनाश करती है। इस प्रकार सुख-समृद्धि के अधीन रहनेवाले मनुष्य की अंत में बहुत खराब हालत होती है।
In simple words: जो इंसान सुख-समृद्धि का गुलाम बन जाता है, वह धीरे-धीरे अपनी चमक खो देता है। राजसी चीजें उसका तेज छीन लेती हैं, और धन की बढ़ती लालसा अंत में उसे नष्ट कर देती है, जिससे उसकी स्थिति खराब हो जाती है।
Exam Tip: सुख-समृद्धि के अत्यधिक लगाव के नकारात्मक परिणामों को क्रमबद्ध तरीके से बताएं।
Question 5. कैसा व्यक्ति पुरुष नहीं कहला सकता?
Answer: चाँदनी रात का आनंद लेनेवाला और फूलों की छाया में पलनेवाला व्यक्ति सांसारिक दृष्टि से भाग्यशाली होता है, ऐश-आराम का जीवन उसे सुंदर-कोमल बना देता है, परंतु ऐसे व्यक्ति में साहस और पौरुष नहीं होता। पौरुष पाने के लिए कष्टों का अमृत पीना पड़ता है, आंधी और धूप सहन करनी पड़ती है। संघर्षों में जी कर विघ्नों पर विजय पानेवाला व्यक्ति ही सच्चा पुरुष कहलाता है।
In simple words: जो व्यक्ति केवल सुख-सुविधाओं में रहता है और कष्टों, धूप-आंधी जैसे संघर्षों का सामना नहीं करता, वह पुरुष नहीं कहला सकता। सच्चा पुरुष वही है जो कठिनाइयों को पार कर जीत हासिल करता है।
Exam Tip: सच्चे पुरुष के गुणों को स्पष्ट करें और उन गुणों के विपरीत वाले व्यक्ति की पहचान बताएं।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :
Question 1. गरुड कहाँ रहता है?
Answer: गरुड़ पहाड़ों में निवास करता है। चट्टानों की फटी दरारें ही उसका घर होती हैं।
In simple words: गरुड़ पहाड़ों में रहता है, उसका घर चट्टानों की दरारें होती हैं।
Exam Tip: सीधे उत्तर वाले प्रश्नों में, मुख्य जानकारी को संक्षेप में और सटीक ढंग से प्रस्तुत करें।
Question 2. परोपकारी मनुष्य क्या करते हैं?
Answer: परोपकारी मनुष्य धन का कभी संग्रह नहीं करते। वे अपने धन को जरूरतमंद लोगों में बांट देते हैं।
In simple words: परोपकारी लोग धन जमा नहीं करते, बल्कि उसे जरूरतमंदों में बांट देते हैं।
Exam Tip: परोपकारी व्यक्ति के मुख्य कार्य को स्पष्ट रूप से और संक्षेप में बताएं।
Question 3. कर्ण दुर्योधन का साथ क्यों नहीं छोड़ सकता?
Answer: दुर्योधन के सामने युद्ध का गहरा संकट है। इसलिए सच्चा मित्र होने के कारण कर्ण मुश्किल के समय उसका साथ नहीं छोड़ सकता।
In simple words: दुर्योधन पर बड़ी मुसीबत है, इसलिए कर्ण एक सच्चे दोस्त के नाते उसे मुश्किल समय में अकेला नहीं छोड़ सकता।
Exam Tip: कर्ण के मित्र-धर्म और दुर्योधन की स्थिति के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।
निमलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
Question 1. कर्ण की एकमात्र इच्छा क्या है?
Answer: कर्ण की एकमात्र इच्छा है कि उसके हाथों से हमेशा दान की निर्मल नदी बहती रहे और निर्धनों के दुख दूर करती रहे।
In simple words: कर्ण बस यही चाहता है कि वह हमेशा दान देता रहे और गरीबों के दुखों को खत्म करे।
Exam Tip: एक वाक्य वाले उत्तर में, मुख्य बिंदु को बिना किसी अतिरिक्त जानकारी के सीधे बताएं।
Question 2. किस तरह के लोग कंचन का भार नहीं होते?
Answer: कर्ण जैसे दानी पुरुष कंचन का भार नहीं ढोते।
In simple words: दानी लोग सोने (कंचन) का भार नहीं उठाते।
Exam Tip: इस प्रश्न में 'कंचन का भार' का लाक्षणिक अर्थ समझकर उत्तर दें, जो धन के प्रति अनासक्ति को दर्शाता है।
Question 3. कर्ण स्वयं को किसके समान बताता है?
Answer: कर्ण स्वयं को पक्षिराज गरुड़ के समान बताता है।
In simple words: कर्ण खुद को पक्षियों के राजा गरुड़ जैसा कहता है।
Exam Tip: प्रश्न में जिस 'समानता' का उल्लेख किया गया है, उसे ठीक से पहचानकर उत्तर दें।
Question 4. कर्ण को कौन-सा अहिपाश काटना है?
Answer: कर्ण को दुर्योधन पर आई विपत्तिरूपी नागपाश काटना है।
In simple words: कर्ण को दुर्योधन पर आई मुसीबत के नागपाश को तोड़ना है।
Exam Tip: 'अहिपाश' के लाक्षणिक अर्थ (विपत्ति) को स्पष्ट करें और उसे किससे जोड़ें, यह भी बताएं।
Question 5. वैभव-हेतु ललचाने का क्या परिणाम होता है?
Answer: धन के लिए लालच करने का यह परिणाम होता है कि वह लालच ही मनुष्य को नष्ट कर देता है।
In simple words: धन के लालच में फंसने पर, वह लालच ही इंसान को बर्बाद कर देता है।
Exam Tip: लालच के हानिकारक परिणाम को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 6. दानी पुरुषों का स्वभाव कैसा होता है?
Answer: दानी पुरुषों का स्वभाव दयालु और उदार होता है।
In simple words: दानी लोग दयालु और उदार होते हैं।
Exam Tip: दानी पुरुषों के मुख्य स्वभावगत गुणों को सीधा और स्पष्ट बताएं।
विभाग 1 : पालाक्षी
सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
Question 1.
1. सांसारिक सुख भोगने की इच्छा ........ की नहीं थी। (कर्ण, दुर्योधन)
2. राज्य से प्राप्त ........ मनुष्य साथ नहीं ले जाता। (पुरस्कार, वैभव)
3. कर्ण के आदर्शवाले मनुष्य ........ का भार नहीं होते। (कंकड़, कंचन)
4. दान की देव सरिता निर्मल, करतल से ........ रहे सदा। (झरती, खाली)
5. गरुड़ ........ में नहीं होता। (जंगलों, महलों)
Answer:
1. कर्ण
2. वैभव
3. कंचन
4. झरती
5. महलों
In simple words: दिए गए विकल्पों में से सही शब्द चुनकर खाली स्थानों को भरिए।
Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, वाक्य के अर्थ और संदर्भ के अनुसार सबसे उपयुक्त शब्द चुनें।
निम्नलिखित विधान 'सही' हैं या 'गनत' यह बताइए :
Question 1.
1. कर्ण त्यागी और दानी पुरुष था।
2. कर्ण सर्प के समान है।
3. परोपकारी मनुष्य धन का संग्रह करते हैं।
4. धन-संपत्ति परोपकार के लिए नहीं होती।
Answer:
1. सही
2. गलत
3. गलत
4. गलत
In simple words: बताएं कि दिए गए वाक्य सही हैं या गलत।
Exam Tip: सही-गलत वाले प्रश्नों में, हर कथन को ध्यान से पढ़कर उसकी सत्यता की जांच करें।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :
Question 1.
1. कर्ण किसे तुच्छ प्रलोभन बता रहा है?
2. राजमहलों की चोटियाँ किसका घर बनती हैं?
3. मनुष्य के तेज को कौन हर लेता है?
4. गरुड़ किसके बन्धन से छुटकारा दिलाते हैं?
Answer:
1. राज्य को
2. कबूतरों का
3. सुख-समृद्धि
4. साँप के
In simple words: दिए गए प्रश्नों का उत्तर एक-एक शब्द में दें।
Exam Tip: एक-शब्द वाले उत्तर में, केवल अपेक्षित शब्द लिखें, कोई अतिरिक्त विवरण न दें।
निम्नलिखित प्रश्नों के साथ दिए गए विकल्पों में सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :
Question 1. मुझ-से मनुष्य जो होते हैं, ........ का भार न ढोते हैं।
(a) यौवन
(b) सपनों
(c) कंचन
(d) अपनों
Answer: (c) कंचन
In simple words: मेरे जैसे लोग सोने का भार नहीं उठाते।
Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें और जो सबसे सटीक हो, उसे चुनें।
Question 2. प्रासादों के कनकाभ शिखर, होते.... के ही घर।
(a) सुंदरियों
(b) कबूतरों
(c) आँसुओं
(d) गरुड़ों
Answer: (b) कबूतरों
In simple words: महलों के सुनहरे शिखर कबूतरों के घर होते हैं।
Exam Tip: कविता की पंक्तियों को याद करते हुए सही शब्द चुनें जो पंक्ति को पूरा करता हो।
Question 3. गरुड़ कहाँ नहीं होता है?
(a) महलों में
(b) घोंसलों में
(c) पहाड़ों में
(d) जंगलों में
Answer: (a) महलों में
In simple words: गरुड़ पक्षी महलों में नहीं रहता है।
Exam Tip: गरुड़ के स्वभाव और आवास से संबंधित जानकारी को याद रखें।
Question 4. नर विभव-हेतु ........ है।
(a) पछताता
(b) मदमाता
(c) निर्माता
(d) ललचाता
Answer: (d) ललचाता
In simple words: इंसान धन के लिए लालच करता है।
Exam Tip: वाक्य को पूरा करने वाले सबसे उपयुक्त क्रिया शब्द का चुनाव करें।
Question 5. ........ पाटना है मुझको, अहिपाश काटना है मुझको।
(a) मैदान
(b) आकाश
(c) रणखेत
(d) रणभूमि
Answer: (c) रणखेत
In simple words: मुझे युद्ध का मैदान भरना है और नागपाश को काटना है।
Exam Tip: कविता की पंक्तियों को सही ढंग से याद करें और सटीक शब्द का उपयोग करें।
विभाग 2 : व्याकरणलक्षी
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :
Question 1.
1. विलास
2. करतल
3. तुच्छ
4. प्रचुर
5. दरज
6. प्रासाद
7. शिखर
8. आंधी
9. वारि
10. विष
11. शैल
12. अयन
13. कोमल
14. भुजंग
15. आतप
Answer:
1. सुखोपभोग
2. हथेली
3. क्षुद्र
4. प्रभूत
5. दरार
6. राजमहल
7. चोटी
8. अंधड़
9. पानी
10. गरल
11. चट्टान
12. गमन
13. मृदु
14. सर्प
15. धूप
In simple words: दिए गए शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द यहाँ लिखे गए हैं।
Exam Tip: पर्यायवाची शब्द लिखते समय, हर शब्द के लिए सबसे सटीक समानार्थी शब्द चुनें।
निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए :
Question 1.
1. शिखर
2. तुच्छ
3. अल्प
4. बिखेरना
Answer:
1. तलहटी
2. महान
3. अधिक
4. बटोरना
In simple words: दिए गए शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द यहाँ लिखे गए हैं।
Exam Tip: विरोधी शब्द लिखते समय, शब्द के मूल अर्थ के बिल्कुल विपरीत अर्थ वाले शब्द का चयन करें।
निम्नलिखित शब्दों का संधि-विग्रह करके लिखिए :
Question 1.
1. अत्यल्प
2. सुखोपभोग
3. परोपकार
4. सिंहासन
5. निर्मल
6. कनकाभ
Answer:
1. अत्यल्प = अति + अल्प
2. सुखोपभोग = सुख + उपभोग
3. परोपकार = पर + उपकार
4. सिंहासन = सिंह + आसन
5. निर्मल = निर् + मल
6. कनकाभ = कनक + आभ
In simple words: दिए गए शब्दों को तोड़कर उनके मूल भागों को संधि-विग्रह के रूप में लिखिए।
Exam Tip: संधि-विग्रह करते समय, शब्दों को उनके सही मूल शब्दों और संधि के नियमों के अनुसार अलग करें।
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से विशेषण पहचानकर लिखिए :
Question 1.
1. विलासी राजा प्रजा के प्रति ध्यान नहीं देता था।
2. हमारे राज्य में स्वर्णिम गुजरात योजना के अंतर्गत कई कार्यक्रम होते हैं।
3. झंझावाती हवा में गरीबों के झोंपड़े नष्ट हो गए।
4. समृद्ध देश की यह निशानी होती है कि उसमें सभी लोग सुखी होते हैं।
5. धन-वैभव को ही अग्रिमता देनेवाले लोग तुच्छ हैं।
Answer:
1. विलासी
2. स्वर्णिम
3. झंझावाती
4. समृद्ध
5. तुच्छ
In simple words: दिए गए वाक्यों में से वे शब्द पहचानिए जो किसी संज्ञा की विशेषता बताते हैं।
Exam Tip: विशेषण को पहचानने के लिए, यह देखें कि कौन सा शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, संख्या, मात्रा आदि) बता रहा है।
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से कर्तृवाचक संज्ञा पहचानकर लिखिए :
Question 1.
1. आजकल लोकप्रतिनिधि सेवक की भूमिका कम ही अदा करते हैं।
2. कभी-कभी संपत्ति का भोगी उसका मालिक नहीं होता।
3. भयंकर स्वप्नों को देखकर व्यक्ति की नींद उड़ जाती है।
4. सुनार ने स्वर्ण से अति प्राचीन कलात्मक मूर्तियाँ बनाई।
Answer:
1. सेवक
2. भोगी
3. भयंकर
4. सुनार
In simple words: दिए गए वाक्यों में से काम करने वाले व्यक्ति या वस्तु (कर्ता) को बताने वाली संज्ञा को पहचानकर लिखिए।
Exam Tip: कर्तृवाचक संज्ञा वह होती है जो क्रिया को करने वाले का बोध कराए। इसे पहचानने के लिए 'कौन' या 'किसने' से प्रश्न करें।
निम्नलिखित शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए :
Question 1.
1. मंदिर या पहाड़ का सबसे ऊंचा भाग
2. कनक जैसी आभावाला
3. रेखा की तरह अवकाश
4. जिसका तेज (तप) क्षीण हो गया है
5. फणिधर नाग का बंधन
6. पक्षियों में राजा
Answer:
1. शिखर
2. कनकाभ
3. दरार
4. तपःक्षीण
5. फणिपाश
6. पक्षिराज
In simple words: दिए गए शब्दसमूहों के लिए एक ही शब्द में उत्तर दें।
Exam Tip: शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखते समय, पूरे वाक्यांश के अर्थ को संक्षेप में व्यक्त करने वाले सबसे उपयुक्त शब्द का चयन करें।
Question 1. निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग पहचानकर लिखिए :
1. प्रयत्न
2. प्रलोभन
3. प्रभूत
4. निर्मल
5. अत्यल्प
6. प्रभाव
7. निर्धन
8. अमृत
9. अतिरिक्त
10. प्रतिदिन
11. दुर्दशा
12. प्रचुर
13. विजय
14. परोपकार
Answer:
1. प्रयत्न – प्र + यत्न
2. प्रलोभन – प्र + लोभन
3. प्रभूत – प्र + भूत
4. निर्मल – नि: (निस) + मल
5. अत्यल्प – अति + अल्प
6. प्रभाव – प्र + भाव
7. निधन – निः + धन
8. अमृत – अ + मृत
9. अतिरिक्त – अति + रिक्त
10. प्रतिदिन – प्रति + दिन
11. दुर्दशा – दुः (दुस) + दशा
12. प्रचुर – प्र + चुर
13. विजय – वि + जय
14. परोपकार – पर + उपकार
In simple words: उपसर्ग पहचानने के लिए, मूल शब्द को अलग करें और जो शब्दांश उसके पहले जोड़ा गया है, उसे उपसर्ग के तौर पर लिखें.
Exam Tip: Always identify the root word first, then separate the prefix. Many prefixes change their form (like नि: for निर्/नि) when joining the root word.
Question 1. निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :
1. सांसारिक
2. सेवक
3. भयंकर
4. प्रभावहीन
5. स्वर्णिम
6. शीतलता
7. मणिमय
8. क्षणिक
9. ज़रूरतमंद
10. दयालु
11. आवश्यकता
12. बर्फीला
13. समृद्धि
14. विलासी
15. झंझावाती
Answer:
1. सांसारिक – संसार + इक
2. सेवक – सेवा + क
3. भयंकर – भय + कर
4. प्रभावहीन – प्रभाव + हीन
5. स्वर्णिम – स्वर्ण + इम
6. शीतलता – शीतल + ता
7. मणिमय – मणि + मय
8. क्षणिक – क्षण + इक
9. ज़रूरतमंद – ज़रूरत + मंद
10. दयालु – दया + लु
11. आवश्यकता – आवश्यक + ता
12. बर्फीला – बर्फ + ईला
13. समृद्धि – समृद्ध + इ
14. विलासी – विलास + ई
15. झंझावाती – झंझावात + ई
In simple words: प्रत्यय वह शब्दांश होता है जो किसी शब्द के आखिर में जुड़कर उसका अर्थ बदल देता है. प्रत्यय पहचानने के लिए, मूल शब्द को अलग करें और उसके बाद के अंश को प्रत्यय के रूप में लिखें.
Exam Tip: Similar to prefixes, identify the base word first. The remaining part at the end of the word will be the suffix. Pay attention to how the base word might change slightly.
कर्ण का जीवन-दर्शन Summary in Gujarati
કર્ણ શ્રીકૃષ્ણને કહે છે કે, મને ધન-દોલત અને સાંસારિક સુખોપભોગની ઇચ્છા નથી. હું મારા જીવનની પરવાહ કરતો નથી. મારી તો ફક્ત એ જ ઇચ્છા છે કે, મારા હાથથી દાનની પવિત્ર નદી હંમેશાં વહેતી રહે અને નિર્ધનને સુખી કરતી રહે.
હે કેશવ, જે રાજ્યોનું આપ મને પ્રલોભન આપી રહ્યા છો એ તો બહુ તુચ્છ વસ્તુ છે. વૈભવને પ્રાપ્ત કરીને મનુષ્ય શું મેળવે છે? વૈભવ પ્રાપ્ત કરીને તેને પુષ્કળ ચિંતાઓ પ્રાપ્ત થાય છે, જરા જેટલી ખુશી મળે છે, થોડીઘણી ચમકદમક અને થોડા વખત માટે સુખોપભોગ પ્રાપ્ત થાય છે. આ બધી વસ્તુઓ તેણે અહીં જ છોડી દેવી પડે છે અને ખાલી હાથે જ અહીંથી જવું પડે છે.
કર્ણ શ્રીકૃષ્ણને કહે છે કે, તેના જેવા મનુષ્ય સોનાનો ભાર સહન કરતા નથી – સુખ-વૈભવમાં જીવન વિતાવતા નથી. તેઓ લોકોમાં વહેંચી દેવા માટે જ ધન પ્રાપ્ત કરે છે. એમની બહુમૂલ્ય વસ્તુઓ લોકોમાં વહેંચી દેવા માટે જ હોય છે. તેઓ સંસારમાંથી કશું લઈ જતા નથી. પોતાના હૃદયનું દાન જ કરે છે. અર્થાત્ દુઃખી લોકો પર દયા કરે છે.
સોના જેવા ચમકતા રાજમહેલોનાં શિખરો કબૂતરોનું જ ઘર બને છે. ગરુડ પક્ષી કદી મહેલમાં રહેતાં નથી અને એ સોનેરી પથારી પર સૂતાં નથી. તેમના નિવાસ પહાડોમાં જ હોય છે. પહાડો પર પડેલી તિરાડો જ તેમનું ઘર બને છે.
कर्ण का जीवन-दर्शन Summary in English
Karna tells Shrikrishna, "I do not want wealth and worldly happiness. I do not care for my life. My only wish is that the holy river of charity should always flow from my hands and make the poor happy."
O Keshav, the kingdoms you are tempting me with are very trivial. What does a person gain by getting riches? By gaining wealth, one gets many worries, a little joy, some splendor, and momentary pleasure. All these things one has to leave here and go empty-handed.
Karna tells Shrikrishna, "People like me cannot carry the burden of gold – they do not live a lavish life. They get wealth only to share it among others. Their valuable possessions are meant for distribution among people. They take nothing with them from this world. They donate their heart, which means they show mercy to the poor."
The glittering golden palace tops become home to pigeons. Eagles never live in palaces and do not sleep on golden beds. Their dwelling place is in the mountains. The cracks in the mountains are their homes.
कर्ण का जीवन-दर्शन Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
कर्ण कुंती का पुत्र था। पांडवों में वह सबसे बड़ा और श्रेष्ठ भी था। उसकी दोस्ती दुर्योधन से हुई। अन्याय और अपमान से भरे कर्ण के जीवन में दुर्योधन ने हमेशा उसका साथ दिया। कर्ण दुर्योधन के इस उपकार को कभी नहीं भूल पाया। कर्ण एक कुशल योद्धा था। महाभारत युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने उसे पांडवों के पक्ष में लाने की कोशिश की। उन्होंने उसे राज्य देने का लालच भी दिया, लेकिन कर्ण ने दुर्योधन का साथ छोड़ने से मना कर दिया। 'रश्मिरथी' खंडकाव्य से लिए गए इस अंश में कर्ण की महानता दिखती है।
कविता का सार :
कर्ण की इच्छा : कर्ण एक दानी पुरुष है। उसे संसार के सुखों की परवाह नहीं है। उसकी बस यही इच्छा है कि वह गरीबों को हमेशा दान देता रहे।
राज्य पाने की लालसा नहीं : कर्ण राज्य को एक छोटी और क्षणिक चीज मानता है। राजा बनकर मिलने वाले सुखों में उसकी कोई रुचि नहीं है। उसके अनुसार धन का इस्तेमाल परोपकार के लिए करना चाहिए।
गरुड़ को अपना आदर्श मानना : कर्ण का आदर्श गरुड़ पक्षी है, जो महल में रहना पसंद नहीं करता। गरुड़ पहाड़ों पर ही रहता है। महलों के शिखर तो कबूतरों के घर होते हैं। कर्ण का मानना है कि कष्टों और संघर्षों में रहकर ही मनुष्य महान बनता है। वही लोगों को खुश कर सकता है।
कविता का अर्थ :
"वैभव-विलास ........ सदा।"
कर्ण श्रीकृष्ण से कहता है कि उसे धन-दौलत और संसार के सुख भोगने की कोई इच्छा नहीं है। वह अपने जीवन की परवाह नहीं करता। उसकी बस यही चाहत है कि उसके हाथों से दान की पवित्र नदी हमेशा बहती रहे और गरीबों को खुशहाल बनाती रहे।
"तुच्छ है, राज्य ......... ले जाना है।"
हे केशव, जिस राज्य का आप मुझे लालच दे रहे हैं, वह बहुत ही तुच्छ वस्तु है। वैभव पाकर इंसान को क्या मिलता है? वैभव पाकर उसे ढेर सारी चिंताएं और नाममात्र की हंसी-खुशी मिलती है। थोड़ी-बहुत चमक-दमक और थोड़े समय के लिए सुखोपभोग मिल जाता है। पर ये सारी चीजें उसे यहीं छोड़ देनी पड़ती हैं और खाली हाथ ही यहां से जाना पड़ता है।
"मुझ-से ....... देते हैं।"
कर्ण श्रीकृष्ण से कहता है कि 'हे कृष्ण' उसके जैसे मनुष्य सोने का भार नहीं ढोते – वे सुख-वैभव का जीवन नहीं बिताते। वे लोगों में बांटने के लिए ही धन कमाते हैं। उनकी बहुमूल्य वस्तुएं लोगों में बांट देने के लिए ही होती हैं। वे संसार से कभी कुछ नहीं लेते। अपने हृदय का दान ही करते हैं – दुखियों पर दया करते हैं।
"प्रासादों के ..... दरारों में।”
सोने जैसी चमक-दमक वाले राजमहलों की चोटियां कबूतरों के ही घर बनती हैं। गरुड़ पक्षी कभी महल में नहीं होता। वह सुनहरे बिछौने पर नहीं सोता। उसका निवास तो पहाड़ों में ही होता है। पहाड़ों की फटी दरारें ही उसका घर बनती हैं।
"होकर समद्धि-सुख ...... खाता है।"
धन-दौलत के सुख का गुलाम बनकर मनुष्य अपनी चमक खो देता है। राजपद, मुकुट और मणियों से जड़े हुए सिंहासन इंसान के तेज को छीन लेते हैं - उसे शक्तिहीन बना देते हैं। मनुष्य धन-संपत्ति पाने के लिए ललचाता है, पर यही धन-संपत्ति उसे नष्ट कर देती है।
"चाँदनी ......... हिला सकता।”
चांदनी और फूलों की छाया (बहुत अधिक सुख-सुविधा) में पलकर इंसान सुंदर और कोमल भले बन जाए, लेकिन कष्टों का अमृत पिए बिना, धूप और आंधी सहे बिना न वह पुरुष कहला सकता है और न ही मुश्किलों को पार कर सकता है।
"उड़ते जो ........ जुड़ाते हैं।"
जो आंधी-तूफानों में उड़ते हैं, झरनों का पानी पीते हैं, सारा आकाश जिनका घर है और जहरीले सांप ही जिनका भोजन हैं, ऐसे गरुड़ ही सांप के बंधन से छुटकारा दिलाते हैं और धरती के हृदय को ठंडक देते हैं।
"मैं गरुड़ ...... मुझको।”
हे कृष्ण! मैं ऐसा ही गरुड़ पक्षी हूँ। मुझे अपने सिर पर मुकुट नहीं चाहिए। इस समय दुर्योधन भयंकर मुश्किल में फंसा हुआ है। मैं किसी भी तरह उसे छोड़ नहीं सकता। मुझे तो युद्धक्षेत्र में उतरना है और दुर्योधन के नागपाश को काटना है।
कर्ण का जीवन-दर्शन शब्दार्थ :
1. वैभव – धन-दौलत।
2. विलास – सुखोपभोग।
3. परवाह – चिंता।
4. सरिता – नदी।
5. निर्मल – स्वच्छ, पवित्र।
6. करतल – हथेली।
7. तुच्छ – क्षुद्र, निकृष्ट।
8. केशव – कृष्ण।
9. नर – मनुष्य।
10. प्रभूत – अधिक, प्रचुर।
11. अत्यल्प – बहुत थोड़ा।
12. हास – हंसी-खुशी।
13. चाकचिक्य – चमक, चका-चौंध।
14. गंवाना – खोना।
15. कंचन – सोना।
16. बिखराना – बांटना।
17. रतन – रत्न
18. प्रासाद – राजमहल।
19. कनकाभ – सुनहले।
20. शिखर – चोटी, ऊंचा भाग।
21. शैल – पर्वत, चट्टान।
22. दरार – रेखा की तरह अवकाश।
23. अधीन – दास, सेवक, गुलाम।
24. तपःक्षीण – प्रभावहीन।
25. सत्ता – राजपाट।
26. तेज हरण – प्रभाव नष्ट करना, कांति दूर करना।
27. क्लेश – कष्ट, वेदना।
28. आतप – तेज, धूप।
29. अंधड़ – आंधी।
30. झंझावात – तूफान।
31. वारि – पानी।
32. प्रपात – झरना।
33. अयन – घर (गमन)।
34. भुजंग – विषैला सांप।
35. फणिबंध – नागपाश।
36. पक्षिराज – गरुड़।
37. विपद – आपत्ति।
38. घोर – भयंकर।
39. रणखेत – युद्ध का मैदान।
40. अहिपाश – नागपाश।
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