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Detailed Chapter 17 शकुन्तलाप्रत्याख्यानम् GSEB Solutions for Class 11 Sanskrit
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Class 11 Sanskrit Chapter 17 शकुन्तलाप्रत्याख्यानम् GSEB Solutions PDF
शकुन्तलाप्रत्याख्यानम् Exercise
Question 1. नापेक्षितो गुरुजनः इति कः वदति?
(क) शकुन्तला
(ख) गौतमी
(ग) राजा
(घ) शारद्वतः
Answer: (ख) गौतमी
In simple words: यह कथन गौतमी द्वारा कहा गया है, जिसका अर्थ है 'गुरुजनों की अपेक्षा नहीं की गई'।
🎯 Exam Tip: Identify key speakers for specific dialogues in the text to score full marks in character-based questions.
Question 2. प्रायेण कुत्र विकाराः मूर्छन्ति?
(क) ऐश्वर्यमत्तेषु
(ख) पदोन्मत्तेषु
(ग) मदोन्मत्तेषु
(घ) क्रुद्धेषु
Answer: (क) ऐश्वर्यमत्तेषु
In simple words: विकार सामान्यतः ऐश्वर्य के अभिमान में लीन लोगों में प्रबल होते हैं।
🎯 Exam Tip: Understanding the philosophical statements and their implications is crucial for higher-order thinking questions.
Question 3. जाते ! मा लज्जस्व - इत्यत्र जाता शब्दस्य क; अर्घः?
(क) भगिनी
(ख) जननी
(ग) पुत्री
(घ) वधूः
Answer: (ग) पुत्री
In simple words: यहाँ 'जाते' शब्द का प्रयोग पुत्री को संबोधित करने के लिए किया गया है, जिसका अर्थ 'हे पुत्री' है।
🎯 Exam Tip: Pay attention to vocative forms and their meanings in Sanskrit dialogues to understand character relationships.
Question 4. शक्रावताराभ्यन्तरे शकुन्तलायाः किं प्रभ्रष्टम्?
(क) नूपुरम्
(ख) पुष्पमाला
(ग) अङ्गुलीयकम्
(घ) भुजबन्धः
Answer: (ग) अङ्गुलीयकम्
In simple words: शक्रावतार तीर्थ के भीतर शकुन्तला की अंगूठी खो गई थी।
🎯 Exam Tip: Remember specific plot points and lost items as they often drive the narrative and character actions.
Question 5. दीर्घापाङ्गः कः वर्तते?
(क) मृगः
(ख) खगः
(ग) गजः
(घ) मयूरः
Answer: (क) मृगः
In simple words: 'दीर्घापाङ्ग' नामक मृग एक बाल हिरण था जिसे शकुन्तला ने पाला था।
🎯 Exam Tip: Identify and recall significant characters or elements, even minor ones, that play a role in the story's development.
2. निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरं संस्कृतभाषायां लिखत :
Question 1. शकुन्तलायाः अवगुण्ठनं का अपनयति?
Answer: गौतमी शकुन्तला का घूंघट हटाती है।
In simple words: शकुन्तला का पर्दा गौतमी द्वारा उठाया जाता है।
🎯 Exam Tip: Focus on direct answers to "who" and "what" questions based on the text for precise responses.
Question 2. दुष्यन्तः चिन्तयन्नपि किं न स्मरति?
Answer: राजा दुष्यन्त विचार करते हुए भी शकुन्तला को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करना याद नहीं कर पाते हैं।
In simple words: दुष्यन्त सोचने पर भी शकुन्तला को अपनी पत्नी के रूप में ग्रहण करना याद नहीं कर पाते।
🎯 Exam Tip: Recall the central conflict or misunderstanding in the plot, which often revolves around memory or recognition.
Question 3. शकुन्तलायाः अङ्गुलिः कीदृशी आसीत्?
Answer: शकुन्तला की उंगली बिना अंगूठी के थी।
In simple words: शकुन्तला की उंगली में अंगूठी नहीं थी।
🎯 Exam Tip: Specific details like the missing ring are crucial as they form key turning points in the narrative.
Question 4. सर्वः कुत्र विश्वसिति ?
Answer: सभी अपनी ही जाति के लोगों पर विश्वास करते हैं।
In simple words: हर कोई अपनी ही जाति के सदस्यों पर भरोसा करता है।
🎯 Exam Tip: Understand the moral or ethical statements made by characters, as they often reveal deeper themes.
Question 5. परभृताः स्वम् अपत्यजातम् कथं पोषयन्ति?
Answer: कोयलें अपने बच्चों का पालन-पोषण दूसरे पक्षियों द्वारा करवाती हैं।
In simple words: कोयलें अपने बच्चों को अन्य पक्षियों द्वारा पालती हैं।
🎯 Exam Tip: Note any natural analogies or examples used in the text to illustrate broader points.
3. Find Out The Names Of The Speakers Of The Following Sentences And Write Into Brackets:
Question. 1. किम् अत्र भवती मया परिणीतपूर्वा।
Answer: (राजा)
In simple words: इस वाक्य में राजा दुष्यन्त शकुन्तला से पूछते हैं कि क्या उन्होंने उससे पहले विवाह किया था।
🎯 Exam Tip: Accurately identifying the speaker of each dialogue is vital for understanding character roles and plot progression.
Question. 2. मूर्च्छन्त्यमी विकाराः प्रायेणैश्वर्यमत्तेषु।
Answer: (शार्ङ्गरवः)
In simple words: यह कथन शार्ङ्गरव का है, जिसमें वे कहते हैं कि अहंकार से भरे लोगों में दोष बढ़ जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Connect philosophical observations to specific characters, as these often reveal their wisdom or perspective.
Question. 3. तपोवनसंवर्धितोऽनभिज्ञोऽयं जनः कैतवस्य।
Answer: (गौतमी)
In simple words: गौतमी कहती हैं कि यह व्यक्ति जो तपोवन में पला-बढ़ा है, छल-कपट से अनभिज्ञ है।
🎯 Exam Tip: Recognize statements that highlight a character's innocence or lack of worldly experience, usually made by their protectors.
Question. 4. पावकः खलु वचनोपन्यासः।
Answer: (शकुन्तला)
In simple words: शकुन्तला यह कहती है कि कहे गए वचन तो साक्षात अग्नि के समान हैं, जो उसे जला रहे हैं।
🎯 Exam Tip: Identify exclamations or strong emotional statements as indicators of a character's internal state.
Question. 5. श्रोतव्यम् इदानी संवृत्तम्।
Answer: (राजा)
In simple words: राजा यह कहते हैं कि अब सुनने का समय आ गया है, यानी वे अब बात सुनने के लिए तैयार हैं।
🎯 Exam Tip: Pay attention to phrases that indicate a shift in the conversation or a character's willingness to engage.
Question. 6. अनार्य आत्मनोहृदयानुमानेन पश्यसि।
Answer: (शकुन्तला)
In simple words: शकुन्तला राजा को संबोधित करते हुए कहती है कि वे अपने नीच हृदय के अनुमान से दूसरों को देख रहे हैं।
🎯 Exam Tip: Note character confrontations and accusations, which often reveal the intensity of their emotions and conflicts.
Question. 7. इदं तत्प्रत्युत्पन्नमतिः स्त्रैणम्।
Answer: (राजा)
In simple words: राजा यह टिप्पणी करते हैं कि यह स्त्रियों का स्वाभाविक स्वभाव है कि वे तुरंत प्रतिउत्तर देने में कुशल होती हैं।
🎯 Exam Tip: Recognize general observations about human nature (or specifically female nature in this context) attributed to characters.
Question. 8. उदारः कल्पः।
Answer: (राजा)
In simple words: राजा इस बात को एक उत्तम सुझाव या विकल्प मानते हैं।
🎯 Exam Tip: Identify phrases where characters express agreement or approval, indicating a potential solution or path forward.
Question. 9. हा धिक्। अङ्गुलीयकशून्या मेऽगुलिः।
Answer: (शकुन्तला)
In simple words: शकुन्तला अपनी उंगली को बिना अंगूठी के देखकर निराशा व्यक्त करती है, यह उसकी पहचान का अंतिम चिह्न था।
🎯 Exam Tip: Crucial moments of discovery or loss, especially those that impede resolution, should be highlighted.
Question. 10. अनृतमयवाङ्गधुभिराकृष्यन्ते विषयिणः।
Answer: (राजा)
In simple words: राजा यह तर्क देते हैं कि विषय-लोलुप लोग झूठी और मीठी बातों से आकर्षित हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Understand how characters generalize about human behavior, especially when defending their own actions or beliefs.
Question. 11. शान्तं पापम्। किं मां पातयितुमीहसे।
Answer: (राजा)
In simple words: राजा इन शब्दों से अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हैं और पूछते हैं कि क्या उन्हें गिराने का प्रयास किया जा रहा है।
🎯 Exam Tip: Pay attention to phrases that express rejection of accusations or a challenge to the opponent's intentions.
4. पर्यायपदानि लिखत।
Question. 1. अनुरागः
Answer: प्रणवः, स्नेहः, प्रीतिः
In simple words: 'अनुराग' का अर्थ है प्रेम या लगाव।
🎯 Exam Tip: Learning synonyms enriches vocabulary and helps in understanding nuanced meanings in classical texts.
Question. 2. पावकः
Answer: अग्निः, अनलः, वह्निः, कृशानुः
In simple words: 'पावक' शब्द अग्नि या आग का पर्यायवाची है।
🎯 Exam Tip: Mastering synonyms for common terms improves comprehension and allows for more varied expression.
Question. 3. उदकम्
Answer: जलम्, नीरम्, सलिलम्, अम्बु, अम्भः, वारि, तोयम्, अप, कम् (आपः)
In simple words: 'उदकम्' का अर्थ पानी या जल है, जिसके कई अन्य पर्यायवाची शब्द हैं।
🎯 Exam Tip: Broaden your vocabulary by recognizing multiple synonyms for essential natural elements like water.
Question. 4. परभृतः
Answer: कोकिलः, पिकः
In simple words: 'परभृत' कोयल को कहते हैं, क्योंकि वह अपने अंडे दूसरे पक्षियों के घोंसले में देती है।
🎯 Exam Tip: Understand the etymological reasons behind names (like 'परभृत' for cuckoo) as they add depth to meaning.
5. Explain With Reference To Context:
Question 1. मूर्च्छन्त्यमी विकाराः प्रायेणैश्वमत्तेषु :
Answer:
**सन्दर्भ:** यह पंक्ति पाठ्यपुस्तक के 'शकुन्तलाप्रत्याख्यानम्' नामक अध्याय से ली गई है। यह अंश कालिदास के 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक से उद्धृत है। इसमें सगर्भा शकुन्तला, दो ऋषिकुमारों और तापसवृद्धा गौतमी के साथ राजा दुष्यन्त के पास पहुंचती है, लेकिन ऋषि के शाप के कारण राजा शकुन्तला से किए गए विवाह को भूल जाते हैं और उसे स्वीकार नहीं करते।
**अनुवाद:** ऐश्वर्य से मदमस्त लोगों में ये दोष (विकार) बढ़ जाते हैं।
यह कथन ऋषि कण्व के आश्रम से शकुन्तला को विदा करने आए ऋषिकुमार शार्ङ्गरव का है। जब ऋषिकुमार और तापसवृद्धा गौतमी शकुन्तला को लेकर राजा दुष्यन्त के पास पहुंचते हैं, तो राजा दुष्यन्त उन्हें देखकर और उनकी बातें सुनकर आश्चर्यचकित होते हैं। वे शकुन्तला से किए गए विवाह को ऋषि के शाप के कारण भूल चुके होते हैं। जब राजा शकुन्तला से पूछते हैं कि क्या उन्होंने पहले उनसे विवाह किया था, तो शकुन्तला और तापसवृद्धा गौतमी सभी राजा के इस बदले हुए व्यवहार से विचलित हो जाते हैं। ऐसे में ऋषिकुमार शार्ङ्गरव राजा से कहते हैं कि ऐश्वर्य के अहंकार में डूबे लोगों में ऐसे विकार अक्सर बढ़ जाते हैं। वे अपने वचनों पर स्थिर नहीं रहते और उन्हें पूरा नहीं करते। शार्ङ्गरव इस सामान्य व्यवहार को जानते हुए और ऋषि के शाप से अनभिज्ञ होने के कारण अपने विचार व्यक्त करते हैं और राजा से शकुन्तला को स्वीकार करने की अपेक्षा करते हैं।
In simple words: शार्ङ्गरव यह कथन तब कहते हैं जब राजा दुष्यन्त शकुन्तला को पहचानने से इनकार करते हैं, जिसका अर्थ है कि ऐश्वर्य के अभिमान में लोग अपने दायित्वों को भूल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: When explaining with reference to context, always provide a clear "सन्दर्भ" and "अनुवाद", followed by a detailed explanation connecting the quote to the plot and character motivations.
Question 2. सर्वः सगन्धेषु विश्वसिति।
Answer:
**अर्थ:** सभी अपनी ही जाति के लोगों पर विश्वास करते हैं।
यह कथन शकुन्तला द्वारा कहा गया है।
**सन्दर्भ:** यह पंक्ति पाठ्यपुस्तक के 'शकुन्तलाप्रत्याख्यानम्' नामक अध्याय से ली गई है। यह अंश कालिदास के 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक से उद्धृत है। इसमें सगर्भा शकुन्तला, दो ऋषिकुमारों और तापसवृद्धा गौतमी के साथ राजा दुष्यन्त के पास पहुंचती है, लेकिन ऋषि के शाप के कारण राजा शकुन्तला से किए गए विवाह को भूल जाते हैं और उसे स्वीकार नहीं करते।
जब राजा दुष्यन्त शकुन्तला को स्वीकार नहीं करते और अपने विवाह को स्मरण नहीं कर पाते, तब शकुन्तला राजा द्वारा दिए गए स्मृति-चिह्न, अंगूठी, दिखाने के लिए अपनी उंगलियों में ढूंढती है। लेकिन शक्रावतार में शचीतीर्थ की वंदना करते समय उसकी अंगुली से अंगूठी गिर जाती है, जिससे वह स्मृति-चिह्न दिखाने में असफल रहती है।
इस स्थिति में शकुन्तला आश्रम में घटित एक घटना याद दिलाती है। वह राजा को बताती है कि एक दिन नवमालिका के मंडप में उनके हाथ में कमल-पत्र के पात्र में जल था। तब दीर्घापाङ्ग नामक एक बाल हिरण वहां उपस्थित था। राजा ने उसे पहले अपने हाथ से जल पिलाने के लिए बुलाया, लेकिन अपरिचित होने के कारण उसने राजा के हाथ से जल नहीं पिया। इसके बाद, उसने शकुन्तला के हाथ से जल पिया और उसके प्रति स्नेह दर्शाया। तब राजा ने कहा था कि सभी अपनी ही जाति पर विश्वास करते हैं, और चूंकि हिरण तथा शकुन्तला दोनों वनवासी हैं, इसलिए हिरण को शकुन्तला पर अत्यधिक विश्वास था। इस प्रकार, शकुन्तला इस घटना का वर्णन करके राजा को अपने पुराने प्रेम और विवाह को याद दिलाने का प्रयास करती है।
In simple words: शकुन्तला इस कथन का उपयोग राजा को यह याद दिलाने के लिए करती है कि कैसे हिरण ने अरण्यवासी होने के कारण केवल उस पर ही विश्वास किया था, अपने और राजा के रिश्ते को दर्शाते हुए।
🎯 Exam Tip: Analyze how characters use past events or anecdotes to argue their point or evoke memory, especially in moments of crisis.
Question 3. अनृतमयवाङ्गधुभिराष्कृष्यन्ते विषयिणः।
Answer:
**अनुवाद:** विषय-लोलुप लोग असत्य और मीठी बातों से आकर्षित होते हैं। इस कथन के वक्ता राजा दुष्यन्त हैं।
**सन्दर्भ:** यह पंक्ति पाठ्यपुस्तक के 'शकुन्तलाप्रत्याख्यानम्' नामक अध्याय से ली गई है। यह अंश कालिदास के 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक से उद्धृत है। इसमें सगर्भा शकुन्तला, दो ऋषिकुमारों और तापसवृद्धा गौतमी के साथ राजा दुष्यन्त के पास पहुंचती है, लेकिन ऋषि के शाप के कारण राजा शकुन्तला से किए गए विवाह को भूल जाते हैं और उसे स्वीकार नहीं करते।
तापसवृद्धा गौतमी और शार्ङ्गरव के आग्रह और शकुन्तला को देखने के बाद भी राजा शकुन्तला के साथ हुए विवाह को याद नहीं कर पाते हैं। राजा को अपने पिछले विवाह-प्रसंग को याद दिलाने के लिए शकुन्तला राजा द्वारा दी गई अंगूठी दिखाना चाहती है, लेकिन दुर्भाग्यवश वह अंगूठी उसके पास नहीं है। अतः शकुन्तला आश्रम में घटित संस्मरणों का वर्णन करके राजा को अपने पुराने प्रेम को याद दिलाने का प्रयास करती है।
किन्तु शकुन्तला अपने इस प्रयास में भी विफल हो जाती है। बालमृग द्वारा राजा दुष्यन्त के हाथों से जल ग्रहण न कर शकुन्तला के हाथों से जल ग्रहण करने पर राजा कहते हैं कि सभी को अपनी जाति में विश्वास होता है। शकुन्तला और हिरण दोनों के वनवासी होने के कारण हिरण को शकुन्तला में अधिक विश्वास था।
राजा इस घटना का वर्णन करने पर, सामान्य व्यवहार को जानते हुए कहते हैं कि विषय-लोलुप लोग असत्य और मधुर वाणी से आकर्षित होते हैं। समाज में अधिकांशतः विषय-लोलुप लोग ऐसी मीठी बातों से मोहित होते हैं। लेकिन इस कथन से राजा का संयम, न्यायप्रियता और चारित्रिक उत्कृष्टता प्रकट होती है। इससे ज्ञात होता है कि राजा विषय-लोलुप लोगों की तरह किसी के मीठे शब्दों के जाल में या रूप में आकर्षित होकर धर्म के मार्ग से विचलित नहीं हो सकते।
In simple words: राजा दुष्यन्त यह कहते हैं कि सांसारिक लोग मीठे और झूठे वचनों से आसानी से आकर्षित हो जाते हैं, जिसका उपयोग वे शकुन्तला की बातों को अविश्वसनीय बताने के लिए करते हैं।
🎯 Exam Tip: Pay attention to how characters use philosophical or generalized statements to justify their skepticism or disinterest, especially when denying a previous commitment.
6. Write A Critical Note On:
Question 1. Mental state of Shakuntala
Answer:
**शकुन्तला की मनःस्थिति:** कालिदास ने 'अभिज्ञान-शाकुन्तलम्' नाटक में शकुन्तला को भारतीय नारी के उत्कृष्ट आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया है। जब राजा दुष्यन्त उसे अपनी सहधर्मचारिणी के रूप में स्वीकार नहीं करते, तो यह शकुन्तला के लिए वज्रपात जैसा प्रतीत होता है। राजा दुष्यन्त के मुख से निकले वचन उसे साक्षात् अग्नि के समान अनुभव होते हैं। राजा द्वारा न पहचाने जाने पर शकुन्तला गहन विषाद में डूब जाती है।
वह दुःखपूर्वक कहती है, "हृदय! अब तुम्हें आशंका है।" इस दुःख और पीड़ा की अवस्था में भी शकुन्तला धैर्य बनाए रखती है। वह राजा को अपने विवाह की याद दिलाने के लिए दृढ़ता से प्रयास करती है, लेकिन राजा द्वारा दी गई अंगूठी न मिलने पर वह आश्रम में घटित एक मधुर संस्मरण सुनाती है। हालांकि, राजा इस बात को कहते हुए कि "विषयी जन इस प्रकार के मधुरालाप से आकृष्ट होते हैं" शकुन्तला के तर्क को स्वीकार नहीं करते।
पाठ में दिए गए अंशों के अनुसार, अंत में शकुन्तला को यह कहना पड़ता है कि उसे स्वच्छंदचारिणी माना जा रहा है, और इस प्रकार वह रोने लगती है।
In simple words: शकुन्तला की मानसिक स्थिति अत्यंत दुखद और निराशाजनक थी, क्योंकि राजा दुष्यन्त द्वारा उसे अस्वीकार किए जाने पर भी उसने धैर्य बनाए रखा और अपनी पहचान सिद्ध करने का प्रयास किया।
🎯 Exam Tip: When analyzing a character's mental state, describe their emotional journey, key actions, and significant dialogues that reveal their inner turmoil and resilience.
Question 2. Arguments of Rishikumars - Sharnagarava and Shardwata
Answer:
**ऋषिकुमार शार्ङ्गरव और शारद्वत के तर्क:** महर्षि कण्व के आश्रम से शकुन्तला को उसके पति के घर पहुंचाने के लिए उसके साथ दो ऋषिकुमार, शार्ङ्गरव और शारद्वत, तथा तापस वृद्धा गौतमी राजा दुष्यन्त के राज-प्रासाद में उपस्थित होते हैं। ये दोनों ऋषिकुमार धर्मज्ञ, धीर, विनयी, स्पष्टवक्ता और व्यवहार कुशल हैं।
जब राजा दुष्यन्त पूछते हैं कि "भगवान् कण्व क्या आज्ञा दे रहे हैं?", तो शार्ङ्गरव अत्यंत कुशलता से राजा से निवेदन करते हैं कि उनकी पुत्री शकुन्तला के साथ उनके द्वारा किया गया विवाह स्वीकार्य है, अतः वे सगर्भा शकुन्तला को सहधर्मचरण हेतु स्वीकार करें। यह महर्षि कण्व की आज्ञा है। राजा द्वारा शकुन्तला को न पहचानने की अवस्था में शार्ङ्गरव आश्चर्यचकित होकर कहते हैं कि यह कैसे हो सकता है?
वे कहते हैं, "आप ही नितांत लोक व्यवहार में कुशल हैं।" शार्ङ्गरव यह समझाना चाहते हैं कि राजा जैसे लोकव्यवहार में कुशल व्यक्ति द्वारा ऐसा अनुचित व्यवहार शोभा नहीं देता। इसके बाद, राजा द्वारा किए गए विवाह के प्रति उनकी आशंका देखकर शार्ङ्गरव कहते हैं, "क्या किए गए कार्य के प्रति द्वेष, धर्म के प्रति अवज्ञा या विमुखता नहीं है?"
शार्ङ्गरव के इस प्रकार समझाने पर भी जब राजा दुष्यन्त कहते हैं - "यह असत्य पूर्ण काल्पनिक प्रश्न कहाँ से?", तब शार्ङ्गरव निर्भीकता से कहते हैं - "ऐश्वर्यमत्त जनों में ये विकार अभिवर्धित होते हैं।"
इस प्रकार निस्संकोच राजा से अपने विचार व्यक्त करते हुए, जब शकुन्तला को देखने पर भी राजा विचारमग्न होते हैं, तो शार्ङ्गरव राजा से पूछते हैं - "हे राजन्! मौन क्यों हैं?" शार्ङ्गरव के इस प्रश्न के उत्तर में राजा कहते हैं कि वे विवाह को याद नहीं कर पा रहे हैं। तब दूसरे ऋषिकुमार शारद्वत राजा से कहते हैं कि वे एक विश्वासोत्पादक उत्तर प्रदान करें।
कालिदास की लेखन शैली से इन दोनों ऋषिकुमारों के चरित्र में उदात्तता, कर्मनिष्ठता, सत्यनिष्ठा और धर्मपरायणता के साथ अभयत्व का भी दर्शन होता है, जो अपने तर्कों से राजा को सत्य-दर्शन कराने में समर्थ हैं।
In simple words: ऋषिकुमार शार्ङ्गरव और शारद्वत ने राजा दुष्यन्त को शकुन्तला को स्वीकार करने के लिए स्पष्ट और धर्मसम्मत तर्क दिए, उसकी प्रतिष्ठा की रक्षा की और राजा के व्यवहार पर प्रश्न उठाया।
🎯 Exam Tip: Analyze the rhetorical strategies and moral arguments presented by supporting characters, especially when they challenge the protagonist's actions.
Question 3. Confusion of Dushyanta in recognising Shakuntala
Answer:
**शकुन्तला के अभिज्ञान में दुष्यन्त की दुविधा:** राजा दुष्यन्त धर्म-परायण, लोकव्यवहार में निपुण और प्रजा-प्रिय थे। महर्षि कण्व के आश्रम में शकुन्तला के प्रति आकर्षित होकर उन्होंने विवाह किया था, लेकिन दुर्वासा ऋषि के शाप के कारण वे उसे भूल गए थे। दोनों ऋषिकुमारों और तापस वृद्धा गौतमी के कहने पर भी राजा शकुन्तला के साथ अपने विवाह को याद नहीं कर पाए। गौतमी द्वारा शकुन्तला का घूंघट उठाने के बाद भी वे उसे पहचान नहीं पाते हैं।
अब शकुन्तला के पास राजा द्वारा दी गई स्मृति-चिह्न अंगूठी भी शचीतीर्थ के जल में गिर जाती है। अतः शकुन्तला के पास स्मृति-चिह्न के रूप में दिखाने के लिए कुछ भी शेष नहीं रहता।
अब वह केवल आश्रम में घटित संस्मरणों के माध्यम से अपने पिछले विवाह को याद दिलाने का प्रयास करती है, किन्तु सब कुछ व्यर्थ हो जाता है।
यहां राजा दुष्यन्त की दुविधा यह है कि वे शकुन्तला को अपरिचित होने के कारण स्वीकार नहीं कर सकते। किसी अन्य अपरिचित स्त्री को अचानक पत्नी के रूप में स्वीकार करना अधर्म और अन्यायपूर्ण होता। अतः ऐसा अनर्थ करना उनके लिए सर्वथा अनुचित था।
दूसरी ओर, तपोनिष्ठ, धर्मपरायण ऋषिकुमारों, तापसवृद्धा गौतमी और शकुन्तला के वचनों का तिरस्कार, अपमान या उनकी अवज्ञा भी अनुचित थी। इस प्रकार राजा दुष्यन्त न तो शकुन्तला को स्वीकार कर सकते थे और न ही त्याग सकते थे।
किन्तु स्मृति-चिह्न के अभाव में एक न्यायप्रिय, नैतिकतापूर्ण और धर्मपरायण राजा के लिए किसी स्त्री को पत्नी के रूप में स्वीकार करना अयोग्य है। अतः वे उसे स्वीकार करने में असमर्थ रहते हैं।
In simple words: राजा दुष्यन्त की दुविधा शकुन्तला को न पहचानने और स्मृति-चिह्न के अभाव के कारण उत्पन्न हुई, जिससे वे उसे स्वीकार या अस्वीकार करने की स्थिति में धर्मसंकट में पड़ गए।
🎯 Exam Tip: Focus on the cause of the confusion (Durvasa's curse, lost ring) and its implications for Dushyanta's moral dilemma, highlighting his internal conflict.
7. Write An Analytical Note On:
Question 1. आर्यपुत्रः
Answer:
संस्कृत साहित्य में 'आर्यपुत्र' शब्द का प्रयोग पति के अर्थ में होता है। 'आर्यपुत्र' का सामान्य अर्थ समाज के सम्मानित और प्रतिष्ठित व्यक्ति का पुत्र होता है। 'आर्यस्य पुत्रः इति आर्यपुत्रः' – इस प्रकार यहां 'आर्य' शब्द का आशय ससुर के अर्थ में लिया जाता है, जिसका अर्थ है 'ससुर का पुत्र' यानी 'पति'।
संस्कृत नाटकों में विशेष रूप से यह शब्द पति को संबोधित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
In simple words: 'आर्यपुत्र' संस्कृत नाटकों में पति को संबोधित करने का एक सम्मानजनक तरीका है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'आर्य का पुत्र' है।
🎯 Exam Tip: Understand key Sanskrit terminologies used in classical literature, especially honorifics and their specific meanings in dramatic contexts.
Question 2. आत्मगतम् :
Answer:
संस्कृत साहित्य में नाटकों में प्रायः पात्रों के अभिनय को निर्देशित करने के लिए इस शब्द का प्रयोग होता है। 'आत्मगतम्' का आशय है मनोभाव। 'आत्मगतम्' के निर्देशन के पश्चात्, दिया गया वाक्य नाटक का पात्र मंच के अग्रभाग में आकर ऊंची आवाज में श्रोताओं को सुनने के लिए बोलता है, किन्तु नाटक के अन्य पात्र उस वाक्य को न सुनने का अभिनय करते हैं। इस प्रकार यह 'स्वगतोक्ति' है।
इसमें पात्र के मन में चल रहे विचारों को श्रोता समझ सकें, किन्तु नाटक के अन्य पात्र नहीं। दूसरे शब्दों में कहें तो 'आत्मगतम्' एक मनोगत भाव है। 'आत्मगतम्' के माध्यम से दर्शक नाटक के पात्र के हृदयस्थ भाव या मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व को जान लेते हैं। लेकिन मंच पर उपस्थित अन्य पात्र इसे सुन नहीं पाते हैं।
In simple words: 'आत्मगतम्' एक नाट्य तकनीक है जहां एक पात्र अपने मन की बात ऊंची आवाज में कहता है जिसे दर्शक सुन सकते हैं, लेकिन मंच पर मौजूद अन्य पात्रों को यह सुनाई नहीं देता है, जिससे पात्र के आंतरिक विचार प्रकट होते हैं।
🎯 Exam Tip: Familiarize yourself with common dramatic conventions (like 'आत्मगतम्') as they are essential for interpreting classical Sanskrit plays.
Question 3. अभिज्ञानम् :
Answer:
'अभिज्ञानम्' का अर्थ है 'परिचय चिह्न'। जिसके माध्यम से व्यक्ति का परिचय स्वयं कुछ कहे बिना ही हो जाता है। राजा दुष्यन्त ने शकुन्तला के पास से राज-प्रासाद में लौटते समय पहचान के रूप में अपनी राज-मुद्रिका दी थी। लेकिन दुर्भाग्यवश वह खो गई थी।
अतः, पहचान-पत्र रूपी मुद्रिका के न मिलने पर शकुन्तला के साथ आए ऋषिकुमार और तपस्विनी गौतमी आदि विचलित हो जाते हैं। इस प्रकार शकुन्तला का अभिज्ञान न होने पर राजा दुष्यन्त शकुन्तला को स्वीकार नहीं कर पाते हैं।
In simple words: 'अभिज्ञानम्' वह पहचान चिह्न होता है जो किसी व्यक्ति की पहचान बिना कहे करा दे, जैसे कि दुष्यन्त द्वारा दी गई अंगूठी, जिसके खो जाने से शकुन्तला की पहचान संकट में पड़ गई।
🎯 Exam Tip: Recognize the significance of symbolic objects (like the 'अभिज्ञानम्') in literature, as they often drive the plot and represent deeper themes of identity and memory.
शकुन्तलाप्रत्याख्यानम् स्वाध्याय
1. योग्यं विकल्पं चित्वा उत्तरं लिखत।
Question 1. अनृतमयवाङ्गधुभिः के आकृष्यन्ते?
(क) विद्वांसः
(ख) मुनयः
(ग) विषयिणः
(घ) महिलाः
Answer: (ग) विषयिणः
In simple words: विषय-लोलुप लोग झूठी और मीठी बातों से आसानी से आकर्षित हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Remember the character's perspective on human weaknesses, as this theme often recurs in classical literature.
Question 2. सर्वः कस्मिन् विश्वसिति?
(क) गन्धेषु
(ख) सगन्धेषु
(ग) सुगन्धेषु
(घ) दुर्गन्धेषु
Answer: (ख) सगन्धेषु
In simple words: हर कोई अपनी ही जाति या वर्ग के लोगों पर अधिक भरोसा करता है।
🎯 Exam Tip: Understand common human tendencies and social observations made by characters in the text.
2. निम्नलिखितानां प्रश्नानां उत्तरं संस्कृतभाषायां लिखत।
Question 1. शकुन्तला दुष्यन्तस्य शङ्कानिवारणार्थं किं दर्शयितुमिच्छति?
Answer: शकुन्तला दुष्यन्त की शंका दूर करने के लिए अपनी अंगूठी दिखाना चाहती है।
In simple words: शकुन्तला दुष्यन्त की शंका दूर करने हेतु अंगूठी दिखाना चाहती थी।
🎯 Exam Tip: Identify the specific objects or actions characters use to prove their claims in critical moments.
Question 2. मृगपोतकस्य नाम किम् अस्ति?
Answer: मृगपोतक का नाम दीर्घापाङ्गः है।
In simple words: बाल हिरण का नाम दीर्घापाङ्ग था।
🎯 Exam Tip: Recall the names of significant, even minor, characters or animals as they often symbolize key relationships or events.
Question 3. विषयिणः कथम् आकृष्यन्ते?
Answer: विषय-लोलुप लोग झूठी और मीठी बातों से आकर्षित होते हैं।
In simple words: सांसारिक व्यक्ति असत्य और मीठी वाणी से आकर्षित होते हैं।
🎯 Exam Tip: Understand the behavioral patterns attributed to different types of individuals in the text.
Question 4. तपोवनसंवर्धितः जनः कस्य अनभिज्ञः?
Answer: तपोवन में पला-बढ़ा व्यक्ति छल-कपट से अनभिज्ञ होता है।
In simple words: तपोवन में पले-बढ़े व्यक्ति छल-कपट से अनभिज्ञ होते हैं।
🎯 Exam Tip: Recognize characteristics associated with specific environments or upbringings described in the narrative.
Question 5. आपन्न सत्त्वा का?
Answer: शकुन्तला गर्भवती है।
In simple words: शकुन्तला गर्भवती थी।
🎯 Exam Tip: Note important status or condition of key characters, as they often have significant plot implications.
4. पर्यायपदानि लिखत।
Question 1. दुहिता -
Answer: पुत्री, आत्मजा, सुता
In simple words: 'दुहिता' शब्द पुत्री या बेटी का पर्यायवाची है।
🎯 Exam Tip: Expand your Sanskrit vocabulary by learning multiple synonyms for common family relations.
Question 2. विधिः -
Answer: दैवम्, प्रारब्धम्, नियतिः
In simple words: 'विधि' का अर्थ भाग्य, प्रारब्ध या नियति है।
🎯 Exam Tip: Understand the different terms used to denote destiny or fate in Sanskrit literature.
Question 3. कैतवम् -
Answer: कपटम्, छलम्
In simple words: 'कैकवम्' का अर्थ कपट या छल है।
🎯 Exam Tip: Learn synonyms for abstract concepts like deception, which are often central to dramatic conflicts.
5. ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए।
Question 1. प्रतिगृह्यताम् सहधर्माचरणायेति :
Answer:
**अनुवाद:** (हे राजन्!) आप धर्म के आचरण के लिए शकुन्तला को स्वीकार करें। उपर्युक्त कथन कण्व मुनि के आश्रम से राजा दुष्यन्त के महल में आए हुए ऋषिकुमार शार्ङ्गरव द्वारा व्यक्त किया गया है।
**सन्दर्भ:** यह पंक्ति पाठ्यपुस्तक के 'शकुन्तलाप्रत्याख्यानम्' नामक पाठ से ली गई है। यह अंश कालिदास के 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक से उद्धृत है। इस अंश में सगर्भा शकुन्तला को दो ऋषिकुमार और तापसवृद्धा गौतमी राजा दुष्यन्त के पास पहुंचाने के लिए आते हैं, किन्तु ऋषि के शाप के कारण राजा शकुन्तला के साथ किए गए विवाह को भूल जाते हैं और उसे स्वीकार नहीं करते।
गौतमी और दो ऋषिकुमार कण्व के आश्रम से शकुन्तला को दुष्यन्त के राज-प्रासाद में पहुंचाने के लिए पहुंचते हैं। दुष्यन्त उनसे मिलते हैं। कुशल-क्षेम के समाचार पूछने के बाद राजा दुष्यन्त पूछते हैं, "भगवान् कण्व क्या आज्ञा प्रदान की है?"
इस प्रश्न के उत्तर में शार्ङ्गरव यह उपर्युक्त वाक्य कहते हैं। ऋषिकुमार शार्ङ्गरव के इस वाक्य में उनका गाम्भीर्य और भारतीय संस्कृति में स्त्री के उत्कृष्ट स्थान का परिलक्षण होता है। भारतीय संस्कृति के अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठानों और पुरुषार्थ चतुष्टय की पूर्ति में पत्नी का स्थान महत्वपूर्ण होता है। पत्नी के बिना धार्मिक अनुष्ठान पूरे नहीं हो सकते।
यहां शार्ङ्गरव अपनी संपूर्ण बौद्धिक परिपक्वता के साथ धार्मिक क्रियाओं की सिद्धि के लिए शकुन्तला को स्वीकार करने हेतु राजा से निवेदन करते हैं। शार्ङ्गरव के मन में यह भी निहित भाव है कि राजा उसे ऋषिकन्या या अनाथ मानकर किसी भी प्रकार उसका अनादर न करें।
इस प्रकार विनयपूर्वक निर्भीकता के साथ अपने मनोभाव राजा से अभिव्यक्त करने के कारण शार्ङ्गरव के स्पष्टवक्ता होने का गुण भी ज्ञात होता है।
In simple words: शार्ङ्गरव राजा दुष्यन्त से शकुन्तला को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का आग्रह करते हैं, क्योंकि धर्म के अनुसार पत्नी के बिना कोई भी धार्मिक कार्य संपन्न नहीं होता।
🎯 Exam Tip: When analyzing such statements, focus on the speaker's authority, cultural context (role of women, dharma), and the diplomatic implications of the dialogue.
Question 2. पावकः खलु वचनोपन्यासः।
Answer:
**अनुवाद:** कहा हुआ यह वचन साक्षात् अग्नि के समान है।
**सन्दर्भ:** यह पंक्ति पाठ्यपुस्तक के 'शकुन्तलाप्रत्याख्यानम्' नामक पाठ से ली गई है। यह अंश कालिदास के 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक से उद्धृत है। इसमें सगर्भा शकुन्तला को दो ऋषिकुमार और तापसवृद्धा गौतमी राजा दुष्यन्त के पास पहुंचाने के लिए आते हैं, किन्तु ऋषि के शाप के कारण राजा शकुन्तला के साथ किए गए विवाह को भूल जाते हैं और उसे स्वीकार नहीं करते।
ऋषिकुमार और गौतमी दुष्यन्त से कहते हैं कि शकुन्तला के साथ उनका विवाह हुआ है, और महर्षि कण्व ने इसे स्वीकार कर लिया है, अतः अब वे उसे सहधर्मचारिणी के रूप में स्वीकार करें। इस प्रस्तावना के प्रत्युत्तर में राजा दुष्यन्त पूछते हैं, "यह क्या लाया गया है - या व्यवहार में यह क्या रखा है? यहां क्यों किसी अन्य की धरोहर लाकर रखी है?" दुष्यन्त के ऐसे कठोर वचनों को सुनकर आहत हुई शकुन्तला यह वाक्य कहती है। इस वाक्य के माध्यम से शकुन्तला के आहत हृदय की वेदना अभिव्यक्त होती है।
एक संपूर्ण भारतीय नारी का आदर्श शकुन्तला के चरित्र में चित्रित होता है। पूरी तरह से दुष्यन्त को समर्पित और पहले से विवाहित शकुन्तला, जब दुष्यन्त के मुख से ऐसे अनुचित वचन सुनती है और राजा उसे पहचानते या स्वीकार नहीं करते, तो उसे ऐसा प्रतीत होता है मानो दुष्यन्त के वचन साक्षात् अग्नि के रूप में उसकी देह को जला रहे हैं।
In simple words: शकुन्तला यह कथन राजा दुष्यन्त के अस्वीकृति भरे और कठोर वचनों के जवाब में कहती है, यह व्यक्त करते हुए कि उसके लिए राजा के शब्द अग्नि के समान पीड़ादायक हैं।
🎯 Exam Tip: Analyze how figurative language (like "वचनोपन्यासः पावकः") intensifies the emotional impact and highlights the character's suffering.
शकुन्तलाप्रत्याख्यानम् Summary In Hindi
महाकवि कालिदास संस्कृत साहित्य के सुप्रसिद्ध कवि हैं। उनकी ख्याति देश-देशान्तर में फैली हुई है। महाकवि कालिदास ने तीन नाटक, दो महाकाव्य तथा दो खंडकाव्य इस प्रकार कुल सात कृतियों की रचना की है। तीन नाटकों में रचना के क्रम अनुसार प्रथम 'मालविकाग्निमित्रम्', द्वितीय 'विक्रमोर्वशीयम्' तथा तृतीय 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' हैं।
संयोग से उनकी उत्कृष्टता का क्रम भी यही बन गया है। कालिदास की नाट्यकला में उत्तरोत्तर सौन्दर्य बढ़ता रहा है। इस प्रकार 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' कालिदास की सर्वाधिक सुन्दर कृति मानी जाती है।
इस पाठ में दिया गया नाट्यांश 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' के पांचवें अंक से उद्धृत किया गया है। चतुर्थांक में कण्व के आश्रम से शकुन्तला को पतिगृह गमनार्थ विदाई दी जाती है, तत्पश्चात् पंचमांक में शकुन्तला राजा दुष्यन्त के राजमहल में पहुंचती है।
पतिगृह भेजने के लिए शकुन्तला के साथ तापस-वृद्धा गौतमी और गुरुकुल के अन्य दो ऋषिकुमार, शार्ङ्गरव और शारद्वत, गए हैं। गौतमी शकुन्तला का परिचय देकर राजा दुष्यन्त से उसे स्वीकार करने हेतु निवेदन करती है। ऋषि दुर्वासा के शाप के प्रभाव से राजा दुष्यन्त शकुन्तला के साथ किए गए विवाह का स्मरण नहीं कर पाते हैं तथा शकुन्तला को इस रूप में पहचान भी नहीं पाते हैं।
अतः राजा दुष्यन्त शकुन्तला को स्वीकार नहीं करते हैं। इस अवसर पर राजा, शकुन्तला, गौतमी तथा दो ऋषिकुमारों के मध्य घटित संवाद-विवाद - 'शकुन्तला प्रत्याख्यान' के रूप में संपादित कर यहां प्रस्तुत किया गया है।
शकुन्तलाप्रत्याख्यानम् शब्दार्थ
शकुन्तलाप्रत्याख्यानम् = शकुन्तला का प्रत्याख्यान, शकुन्तला का अस्वीकार - शकुन्तलायाः प्रत्याख्यानम् - षष्ठी तत्पुरुष समास
आज्ञापयति = आज्ञा देता है - आ + ज्ञा धातु - प्रेरणार्थक, वर्तमान काल, अन्य पुरुष, एकवचन।
मिथः समयात् = परस्पर की सहमति से।
मदीयाम् = मेरी।
दुहितरम् = पुत्री को - दुहितृ - स्त्रीलिङ्ग, द्वितीया विभक्ति, एकवचन।
उपायंस्त = परिणय किया, विवाह किया - उप + यम्, अ.भू. अ. ए. व.।
प्रीतिमता = प्रेमयुक्त - प्रीतिमत् - तृतीया विभक्ति एकवचन।
अनुज्ञातम् = आज्ञा, अनुमति दी - अनु + ज्ञा धातु, क्त प्रत्यय - कर्मणि भूतकृदन्त।
आपन्न सत्त्वा = सगर्भा - आपन्नं - सत्त्वं यस्याः सा - बहुव्रीहि समास
प्रतिगृह्यन्ताम् = स्वीकार करो - प्रति + ग्रह - क.प्र. आज्ञाः, अ.पु., ए.व.।
सहधर्मचरणाय = सहधर्म चरणार्थ - प्रायः धार्मिक कार्यों में पति के लिए पत्नी को साथ रखना अनिवार्य होता है। इस प्रकार के धर्माचरण के लिए।
वक्तुकामा = कहने की इच्छा करनेवाला, कहने का इच्छुक - वक्तुं कामः यस्याः सा - बहुव्रीहि समास।
वचनावसरः = कहने का अवसर - वचनस्य अवसरः।
पृष्टः = पूछा गया - पृच्छ् धातु + क्त - कर्मणि भूत कृदन्त।
बन्धुजनः = सगे सम्बन्धी।
चिरं अनुरागे = चिरं काले अनुरागे - सप्तमी तत्पुरुष समास।
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