Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Hindi पद्यांशों का स्पष्टीकरण
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निम्नलिखित प्रत्येक पद्यांश का भावार्थ स्पष्ट कीजिए:
Question 1. साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय ।।
Answer: साधु का स्वभाव सूप (छाज) जैसा होना चाहिए। सूप अच्छे अनाज को अपने पास रखता है और कचरे को बाहर फेंक देता है। ठीक इसी प्रकार, साधु पुरुष को अच्छी बातें अपनानी चाहिए और बेकार की बातें छोड़ देनी चाहिए। एक साधु का अर्थ है एक समझदार व्यक्ति। दुनिया में अलग-अलग तरह की चीजें होती हैं। उनमें से कौन सी चीज काम की है और कौन सी अच्छी है, इसका ज्ञान होना बहुत ज़रूरी है। यह ज्ञान समझदारी से ही आता है। एक समझदार व्यक्ति अच्छे और बुरे को पहचान लेता है। उसे यह भी पता चल जाता है कि कौन सी चीज़ उपयोगी है और कौन सी बेकार। उसे यह भी ज्ञान होता है कि किसे अपनाना चाहिए और किसे छोड़ना चाहिए। जीवन को सफल और सही बनाने के लिए हर व्यक्ति में ऐसी समझदारी होनी चाहिए।
In simple words: एक साधु को सूप जैसा होना चाहिए, जो अच्छी चीजें रख ले और बेकार चीजें फेंक दे। इसी तरह, हमें जीवन में अच्छी बातों को अपनाना चाहिए और व्यर्थ बातों को छोड़ देना चाहिए।
Exam Tip: कबीर के दोहों में अक्सर प्रकृति के उदाहरणों से गहरी मानवीय शिक्षा दी जाती है। अपने उत्तर में दोहे का शाब्दिक अर्थ और फिर उसका नैतिक अर्थ दोनों समझाएँ।
Question 2. मेरे पैर डगमगाए, किन्तु फिर भी चल रहा हूँ,
चला रहा हूँ क्योंकि मैने विधि को न रुकते देखा।
Answer: कवि कहता है कि जीवन के मुश्किल रास्ते पर चलते-चलते मैं इतना थक गया हूँ कि मेरे पैर लड़खड़ाने लगे। फिर भी भगवान की गति देखकर मैं आगे बढ़ता रहा हूँ। मनुष्य के जीवन में कई बार बहुत ही मुश्किल परिस्थितियाँ आती हैं। यह जीवन-मार्ग बहुत कठिन हो जाता है। मुश्किलें इतनी बढ़ जाती हैं कि उनका सामना करना कठिन हो जाता है। निराशा इतनी ज़्यादा घेर लेती है कि जीने की इच्छा भी नहीं रहती। ऐसी स्थिति में मनुष्य को भाग्य के नियम को समझना चाहिए। भगवान का काम कभी रुकता नहीं – इसका मतलब है कि समय कभी एक जैसा नहीं रहता। वह हमेशा बदलता रहता है। इसलिए यदि आज समय मुश्किल है, तो कल अच्छा हो सकता है। आज का पतझड़ कल वसंत में बदल सकता है। इस तरह, सबसे बुरी स्थिति में भी व्यक्ति का आत्मविश्वास नहीं डगमगाना चाहिए। उसे हमेशा आशा से भरा रहना चाहिए। भाग्य के विधान पर विश्वास रखने वाला व्यक्ति कभी जीने का साहस नहीं खोता। जीवन के रास्ते पर उसके कदम भले लड़खड़ा जाएँ, फिर भी वह चलना नहीं छोड़ता।
In simple words: कवि कहता है कि जीवन में मुश्किलें आने पर भी वह चलता रहा, क्योंकि उसने कभी भाग्य को रुकते नहीं देखा। इंसान को हमेशा आशावादी रहना चाहिए और विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए।
Exam Tip: ऐसे भावार्थ वाले प्रश्नों में, पहले कविता की पंक्तियों का सीधा अर्थ बताएँ, फिर उसके पीछे छिपे गहरे जीवन दर्शन को स्पष्ट करें।
Question 3. भरा नहीं जो भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
Answer: इन पंक्तियों में कवि ने अपने देश के प्रति प्रेम को सच्चे व्यक्ति का लक्षण बताया है। कवि का मानना है कि हर व्यक्ति में अपनी मातृभूमि के लिए गहरा लगाव होना चाहिए। राष्ट्रप्रेम की प्रबल भावना केवल दयालु व्यक्ति में ही मिल सकती है। कुछ लोग बहुत संकीर्ण सोच वाले होते हैं। स्वार्थ की प्रबल भावना उनके हृदय को सूखा और कठोर बना देती है। उनके भावनाहीन हृदय अपने देशवासियों के प्रति संवेदनारहित होते हैं। उनके हृदय में राष्ट्रप्रेम के बीज कभी उगते ही नहीं। देशप्रेम की कविताएँ कभी उनके दिल को नहीं छूतीं। कवि कहता है कि ऐसे लोगों के नीरस हृदय को हृदय कहना बेकार है। उसे तो पत्थर ही कहना चाहिए। ऐसे पत्थर दिलवाले व्यक्ति कभी अपनी मातृभूमि के अच्छे पुत्र नहीं कहला सकते।
In simple words: कवि कहते हैं कि वह हृदय पत्थर जैसा है जिसमें अपने देश के लिए प्यार और भावनाएँ नहीं हैं। सच्चा मनुष्य वही है जिसके दिल में अपनी मातृभूमि के लिए गहरा प्रेम हो।
Exam Tip: देशप्रेम और मानवीय मूल्यों पर आधारित दोहों में, कवि के संदेश को स्पष्ट करते हुए उसके महत्व पर जोर देना चाहिए।
Question 4. जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।
तोहिं फूल के फूल हैं, बाको हैं तिरसूल ।।
Answer: यदि कोई तुम्हारे रास्ते में काँटे बोए, तो भी तुम उसके रास्ते में फूल ही बिछाओ। तुम्हें अपने फूलों के बदले फूल ही मिलेंगे, जबकि वह अपने काँटों के बदले त्रिशूल पाएगा। कहावत है कि जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। व्यक्ति को उसके कामों के अनुसार ही फल मिलता है। जो दूसरों की भलाई करता है, उसका भला होता है और जो बुराई करता है, उसका बुरा होता है। इसलिए हमें हमेशा अच्छा ही करना चाहिए। हमारे किए हुए उपकारों का हमें अच्छा फल ही मिलेगा।
In simple words: जो तुम्हें नुकसान पहुँचाए, उसके साथ भी भलाई करो। तुम्हें अच्छाई मिलेगी, जबकि उसे अपने बुरे कर्मों का फल मिलेगा।
Exam Tip: इस प्रकार के नीतिपरक दोहों में, कवि का सीधा संदेश प्रस्तुत करें और उसके पीछे छिपी नैतिकता को उजागर करें।
Question 5. वृक्ष कबहुँ नहिं भखें, नदी न संचै नीर।
परमारथ के कारनै, साधुन धरा शरीर ।।
Answer: इस दोहे में दूसरों की भलाई के महत्व को बताया गया है। दूसरों की भलाई करने की प्रेरणा हमें प्रकृति से मिलती है। प्रकृति के सभी रूप परोपकार में लगे रहते हैं। उन्हें अपनी नहीं, हमेशा दूसरों की ही चिंता रहती है। पेड़ फलों से लदे रहते हैं, पर वे अपने फल खुद कभी नहीं खाते। सच तो यह है कि वे फलते ही दूसरों को खिलाने के लिए हैं। इसी तरह नदी हमेशा बहती रहती है। मनुष्य, पशु, पक्षी उसका पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं, परंतु नदी अपना पानी खुद कभी नहीं पीती। कवि कहता है कि पेड़ और नदी की तरह साधु पुरुष भी अपना जीवन दूसरों की भलाई में लगा देते हैं। परोपकार में ही वे अपने जीवन की सार्थकता मानते हैं। उनका जन्म ही परोपकार के लिए होता है। सचमुच, वे पुरुष धन्य हैं जिन्होंने दूसरों की भलाई को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है।
In simple words: पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते और नदियाँ अपना पानी खुद नहीं पीतीं। इसी तरह, संत भी दूसरों की भलाई के लिए ही जीवन जीते हैं, क्योंकि उनका जन्म परोपकार के लिए ही होता है।
Exam Tip: प्रकृति के उदाहरणों का उपयोग करके परोपकार के महत्व को समझाते समय, यह दर्शाएँ कि कैसे प्रकृति निस्वार्थ भाव से सेवा करती है।
Question 6. नीच निचाई नहिं तजै, सज्जन हू के संग।
तुलसी चंदन बिटप बसि, बिनु विष भए न भुजंग।
Answer: हर व्यक्ति का अपना एक मूल स्वभाव होता है। वह कहीं भी रहे, अपने उस स्वभाव का प्रमाण दिए बिना नहीं रहता। दुष्ट व्यक्ति अपनी दुष्टता कभी नहीं छोड़ सकता। वह सज्जन के साथ रहे तो भी सज्जन नहीं बन सकता। जंगल में ज़हरीले साँप चंदन के पेड़ से लिपटे रहते हैं, फिर भी वे अपने ज़हर को छोड़ते नहीं। आमतौर पर यह माना जाता है कि संगति का असर पड़ता है, परंतु यह पूरी तरह से सच नहीं है। दुष्ट, झूठे, बेईमान और चोर व्यक्ति अच्छे लोगों के साथ रहकर भी अपने बुरे गुणों से छुटकारा नहीं पाते। इसलिए चोर को पुजारी बना दिया जाए, तो मंदिर में भी वह चोरी करना नहीं भूलेगा।
In simple words: दुष्ट व्यक्ति सज्जन के साथ रहकर भी अपनी बुराई नहीं छोड़ता, जैसे चंदन के पेड़ पर लिपटे साँप ज़हर रहित नहीं होते। बुरी संगत अच्छे स्वभाव वाले व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुँचा सकती।
Exam Tip: तुलसीदास जी के दोहों में मानवीय स्वभाव की गहराई होती है। उत्तर में व्यक्ति के मूल स्वभाव की दृढ़ता को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।
Question 7. जो जल बादै नाव में, घर में बाढ़ दाम।
दोनों हाथ उलीचिए, यदि सज्जन को काम ।।
Answer: जब नाव में पानी भर जाता है, तब नाव के डूबने की स्थिति आ जाती है। उस स्थिति में सही यही है कि नाव में से पानी को दोनों हाथों से बाहर निकाल दिया जाए। नाव को और उसमें बैठे लोगों को बचाने का यही एक उपाय है। इसी प्रकार घर में संपत्ति का ज़्यादा बढ़ना अच्छा नहीं है। संपत्ति के कारण परिवार में झगड़ा होता है। परिवार के लोग कई तरह के गलत आदतों के शिकार हो जाते हैं और उनके जीवन में कई तरह की बुराइयाँ आ जाती हैं। इनके कारण परिवार धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है। इसलिए जब घर में संपत्ति ज़्यादा हो जाए तो उसका सही उपयोग करना चाहिए। उसे जन-कल्याण के कामों में लगाना चाहिए। सही उपयोग से ही धन की शोभा बढ़ती है और घर के माहौल में सुख-शांति रहती है। इस प्रकार, संपत्ति के सागर में घर की नाव को डूबने से बचाने के लिए उसे परोपकार में लगाना ही समझदारी है।
In simple words: यदि नाव में पानी भर जाए या घर में धन ज़्यादा हो जाए, तो उसे तुरंत बाहर निकालना चाहिए। नाव से पानी और घर से धन का सही उपयोग कर दूसरों की भलाई में लगाना ही समझदारी है, नहीं तो दोनों ही नुकसान पहुँचा सकते हैं।
Exam Tip: इस दोहे में धन के सही उपयोग का महत्व बताया गया है। उत्तर में धन को केवल इकट्ठा करने के बजाय उसे समाज सेवा में लगाने की प्रेरणा को स्पष्ट करें।
Question 8. ऊँचे बैठे ना लहैं, गुन बिनु बड़पन कोड़।
बैठो देवल शिखर पर, बायस गरुड़ न होइ।।
Answer: इसमें कोई संदेह नहीं कि ऊँचे पद का अपना महत्व है। राजा, मंत्री, बड़े अधिकारी आदि का सम्मान उनके पद के कारण ही होता है। परंतु केवल ऊँचा पद पाकर ही कोई सच्चा सम्मान नहीं पा सकता। लोग पद की अपेक्षा गुणों को ही ज़्यादा महत्व देते हैं। गुणहीन व्यक्ति ऊँचे पद पर बैठा हो तो भी वह कभी लोकप्रिय नहीं हो सकता। कौआ यदि मंदिर के शिखर पर बैठा हो, तो भी वह विष्णु-वाहन गरुड़ की तरह सम्मान नहीं पा सकता। गांधीजी के पास कोई पद नहीं था, फिर भी भारत की लाखों जनता उन्हें 'बापू' कहकर पुकारती थी और राष्ट्रपिता का आदर देती थी। इसलिए ऊँचे पद की अपेक्षा व्यक्ति के गुण ही उसे सच्ची लोक चाहत दिलाते हैं।
In simple words: केवल ऊँचा पद पाने से बड़ापन नहीं मिलता, गुणों के बिना कोई सम्मान नहीं मिलता। जैसे, मंदिर के शिखर पर बैठा कौआ गरुड़ नहीं बन सकता, वैसे ही गुणहीन व्यक्ति ऊँचाई पर भी आदर नहीं पाता।
Exam Tip: इस दोहे में व्यक्ति के गुणों के महत्व पर जोर दिया गया है। उत्तर में पद और गुण के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए उदाहरणों से अपनी बात को पुष्ट करें।
Question 9. रहिमन जल राखे बिनु, लघु जिय पियत अघाय।
उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाय ।।
Answer: इस दोहे में कवि रहीम ने उन छोटी चीजों के महत्व को बताया है जो अपने गुण और स्वभाव से बड़ी चीजों की अपेक्षा ज़्यादा प्रशंसनीय हैं। रहीम कहते हैं कि कीचड़ का पानी बहुत गंदा देखकर लगता नहीं कि वह किसी के लिए उपयोगी है, पर वह बेकार नहीं होता। हजारों छोटे-छोटे जीव उसे पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं और जीवित रहते हैं। उसकी तुलना में समुद्र का जलरा. दिखती तो बहुत बड़ी है, पर वह किसी के पीने लायक नहीं होती। कोई प्राणी सागर का पानी पीकर अपनी प्यास शांत नहीं कर सकता। इसलिए जहाँ प्यास बुझाने का प्रश्न है, वहाँ सागर का पानी किसी काम का नहीं है। संसार उसके किनारे से प्यासा ही लौटता है। उसकी अपेक्षा कीचड़ का जल लाखों गुना अच्छा है। इसलिए वस्तु का मूल्यांकन उसके आकार-प्रकार के आधार पर नहीं, उसकी उपयोगिता के आधार पर ही करना चाहिए।
In simple words: रहीम कहते हैं कि कीचड़ का थोड़ा पानी भी छोटे जीवों की प्यास बुझाता है, जबकि विशाल समुद्र का पानी किसी के काम नहीं आता और दुनिया प्यासी रह जाती है। इसका मतलब है कि किसी चीज़ का महत्व उसकी उपयोगिता पर निर्भर करता है, न कि उसके आकार पर।
Exam Tip: रहीम के दोहों में अक्सर छोटे और बड़े के तुलनात्मक महत्व को समझाया जाता है। उत्तर में मुख्य बिंदु यह होना चाहिए कि किसी वस्तु की उपयोगिता ही उसका वास्तविक महत्व होती है।
Question 10. फरिश्ते से बेहतर है इन्सान बनना,
मगर इसमें पड़ती है मेहनत ज्यादा।।
Answer: फरिश्ते महान होते हैं। वे देवताओं जैसे माने जाते हैं। देवताओं की तरह फरिश्तों के प्रति भी श्रद्धा-भक्ति व्यक्त की जाती है। लेकिन हर आदमी फरिश्ता नहीं बन सकता। हर आदमी को फरिश्ता बनने की ज़रूरत भी नहीं है। ज़रूरत इस बात की है कि आदमी एक अच्छा इंसान बने। वास्तव में इंसान बनना आसान नहीं है। इंसान बनने के लिए काफी धैर्य चाहिए। सच्चरित्रता, प्रामाणिकता, त्याग और बलिदान जैसे गुणों को अपनाए बिना कोई व्यक्ति इंसान नहीं बन सकता। इन गुणों को अपनाना कोई मामूली बात नहीं है। सचमुच, इंसान बनना फरिश्ता बनने से ज़्यादा कठिन है।
In simple words: इंसान बनना फ़रिश्ते से बेहतर है, पर इसमें बहुत मेहनत लगती है। एक अच्छा इंसान बनने के लिए धैर्य, ईमानदारी और त्याग जैसे गुणों को अपनाना ज़रूरी है।
Exam Tip: इस दोहे में मानवीय मूल्यों और सदाचार के महत्व पर जोर दिया गया है। उत्तर में मनुष्य के सद्गुणों को विकसित करने की आवश्यकता को स्पष्ट करें।
Question 11. अति परचै तै होत है, अरुचि अनादर भाय।
मलयगिरि की भीलनी चंदन देत जराय।।
Answer: चंदन एक बहुत कीमती लकड़ी है। चंदन के पेड़ मलयगिरि पर होते हैं। इस पवित्र लकड़ी को लोग महंगे दामों में खरीदते हैं। परंतु मलयगिरि पर रहने वाली भीलनी के लिए तो वह एक साधारण लकड़ी है! वह उसे ईंधन के रूप में जलाती है। इसका कारण यह है कि जहाँ चंदन के पेड़ हैं, वहीं वह रहती है। इसलिए चंदन से उसकी अत्यधिक जान-पहचान ने चंदन के प्रति उसके मन में आदर और प्रेम नहीं रहने दिया है। इसी प्रकार किसी से भी ज़्यादा जान-पहचान अच्छी नहीं है। इससे आपस का आदरभाव कम हो जाता है। रोज़ मिलने वाले व्यक्ति के प्रति कभी-कभी अरुचि भी होती है। इस प्रकार यदि हम अपना आदर-मान बनाए रखना चाहते हैं, तो हमें लोगों के साथ ज़्यादा परिचय रखने से बचना चाहिए।
In simple words: बहुत ज़्यादा जान-पहचान से अनादर और अरुचि पैदा हो जाती है। जैसे मलयगिरि की भीलनी चंदन को जलाने के लिए उपयोग करती है, क्योंकि वह उसके लिए साधारण लकड़ी है।
Exam Tip: इस दोहे में सामाजिक संबंधों की गहराई बताई गई है। उत्तर में अत्यधिक निकटता से आदर में कमी आने की संभावना को समझाएँ।
Question 12. जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकल कुसंग।
चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग।।
Answer: रहीमजी कहते हैं कि बुरी संगति अच्छे स्वभाव वाले व्यक्ति का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। चंदन के पेड़ पर साँप लिपटे रहते हैं, फिर भी चंदन पेड़ पर उनके ज़हर का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसमें संदेह नहीं कि अच्छाई में अद्भुत शक्ति होती है। गुलाब का फूल काँटों में पलता और खिलता है, पर उसमें काँटों की चुभन नहीं होती, सुगंध और मनमोहक सुन्दरता होती है। कमल का फूल भी कीचड़ में खिलता है, पर उसकी साफ़ और सुन्दर पंखुड़ियों की छवि पर कीचड़ का कोई असर नहीं होता। रावण की लंका में रहकर भी विभीषण का स्वभाव राक्षसों जैसा नहीं था। इस तरह यदि हम अच्छे हैं, तो बुरे लोगों के बीच रहकर भी अच्छे ही रहेंगे।
In simple words: रहीम कहते हैं कि उत्तम स्वभाव वाले व्यक्ति पर बुरी संगति का असर नहीं होता, जैसे चंदन के पेड़ पर साँप लिपटे होने पर भी चंदन ज़हर रहित रहता है।
Exam Tip: इस दोहे में व्यक्ति के आंतरिक गुणों की शक्ति पर जोर दिया गया है। उत्तर में यह स्पष्ट करें कि दृढ़ चरित्र वाला व्यक्ति बाहरी प्रभावों से अप्रभावित रहता है।
Question 13. अपनी पहुँच बिचारि कै, करतब करिये दौर ।
ते ते पांव पसारिये, जेती लांबी सौर ।।
Answer: हर व्यक्ति की क्षमता की एक सीमा होती है। व्यक्ति को अपनी क्षमता की सीमा को समझकर ही काम करना चाहिए। अपनी शक्ति से ज़्यादा काम करने का परिणाम अच्छा नहीं होता। पैर उतने ही फैलाने चाहिए, जितनी चादर की लंबाई हो। चादर की लंबाई से ज़्यादा पैर फैलाने पर या तो चादर फट जाएगी या पैर चादर के बाहर रहेंगे। इसी तरह हमें उतना ही काम करना चाहिए जितनी हममें शक्ति या योग्यता हो। जिस तरह चादर की लंबाई से ज़्यादा पैर फैलाना मूर्खता है, उसी तरह अपनी सामर्थ्य का विचार किए बिना किसी काम में लग जाना भी सरासर नादानी है। ऐसी नादानी बाद में पछतावे का कारण बनती है।
In simple words: अपनी क्षमता को देखकर ही काम करना चाहिए। उतने ही पैर फैलाने चाहिए जितनी लंबी चादर हो। अपनी सीमा से बाहर काम करने से केवल पछतावा होता है।
Exam Tip: यह दोहा यथार्थवादी योजना और आत्म-ज्ञान के महत्व पर केंद्रित है। उत्तर में अपनी सीमाएँ जानने और उनके अनुसार कार्य करने की सलाह पर जोर दें।
Question 14. श्रम जीवन का सार है, श्रम मानव का हार।
श्रम करना है गुण महा, श्रम सच्चा व्यवहार ।।
Answer: इन पंक्तियों में मेहनत के महत्व को रेखांकित किया गया है। जीवन में मेहनत का बड़ा महत्व है। मेहनत ही जीवन का आधार है। मनुष्य बड़े-बड़े सपने भले देख ले, परंतु वह उनकी पूर्ति मेहनत के बल पर ही कर सकता है। मेहनत करके ही किसान अन्न पैदा करता है। मेहनत करके ही मज़दूर तरह-तरह की वस्तुएँ बनाते हैं। मेहनत के द्वारा ही गृहस्थ अपने परिवार का पालन करता है। जो विद्यार्थी मेहनत करते हैं, वे ही अच्छी सफलता पाते हैं और भविष्य में कुशल डॉक्टर, इंजीनियर, नेता या व्यापारी बनते हैं। इसीलिए कवि ने मेहनत को जीवन का सार कहा है क्योंकि मेहनत के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं है। मेहनत से ही मनुष्य की शोभा बढ़ती है, उसका सम्मान होता है। इसमें संदेह नहीं कि मेहनत ही मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है। मेहनत करने वाला मनुष्य ही व्यवहार में ईमानदार होता है। झूठ और बेईमानी का सहारा आलसी लोग ही लेते हैं। मेहनत से बचने के लिए वे तरह-तरह की बहानेबाजी करते हैं। सचमुच, मेहनत के पौधे पर ही जीवन को सफल करने वाले सुगंधित फूल खिलते हैं।
In simple words: मेहनत ही जीवन का सार है और मनुष्य का गहना है। यह सबसे बड़ा गुण और सच्चा व्यवहार है, जिसके बिना कोई भी सपना पूरा नहीं हो सकता और न ही जीवन सफल बन सकता है।
Exam Tip: इस दोहे में परिश्रम के महत्व पर जोर दिया गया है। उत्तर में यह समझाएँ कि परिश्रम ही सफलता और सम्मान का मूल आधार है।
Question 15. बुरे लगत सिख के वचन, हिए बिचारौ आप।
करवे भेषज बिन पिये, मिटै न तन को ताप ।।
Answer: ऐसे बहुत कम लोग हैं, जिन्हें दूसरों की सलाह अच्छी लगती है। छोटों से गलती होती है तो बड़े उन्हें टोकते हैं और वैसी गलती फिर न करने के लिए समझाते हैं। वे छोटों के आलस्य, लापरवाही, अधीरता आदि दोषों को दूर करने के लिए उन्हें तरह-तरह की शिक्षा देते हैं, पर छोटों को उनकी सलाह ज़हर जैसी लगती है। वे बड़ों की ज्ञान भरी बातें सुनना भी पसंद नहीं करते। उन्हें यह पता नहीं कि बिना कड़वी दवा पिए शरीर का बुखार दूर नहीं होता। बड़ों की ज्ञान भरी बातें भी कड़वी दवा जैसी होती हैं। वे सुनने में भले बुरी लगें, पर उनको मानने से कल्याण ही होता है। इसलिए हमें अपने से बड़ों के उपदेशों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
In simple words: बड़ों की सलाह भले कड़वी लगे, पर वह शरीर के बुखार को दूर करने वाली कड़वी दवा जैसी होती है। उन्हें माने बिना कष्ट दूर नहीं होते, इसलिए हमें उन्हें सुनना और मानना चाहिए।
Exam Tip: यह दोहा सलाह के महत्व और उसे स्वीकार करने की आवश्यकता पर केंद्रित है। उत्तर में यह स्पष्ट करें कि भले ही सलाह अप्रिय लगे, वह हमेशा फायदेमंद होती है।
Question 16. अपनी सीमाओं में रहकर जीना सीखो,
क्यों विष पी रहे हो, अमृत पीना सीखो।
Answer: आज मनुष्य का हृदय असंतोष से भरा हुआ है। जितना भी मिलता है, उसे कम ही लगता है। अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए वह अन्याय का आचरण करने में भी नहीं हिचकिचाता। ऐसे मनुष्य से कवि कहता है कि तुम मनुष्य हो। इसलिए मनुष्यता के दायरे में रहकर ही तुम्हें जीना चाहिए। प्रेम, दोस्ती, सद्भाव, भाईचारा, करुणा आदि मानवता के रूप हैं। इन्हीं में जीवन का अमृत समाया हुआ है। इनको जीवन में उतारने से ही तुम्हें सुख-शांति का अनुभव हो सकता है। अन्याय, शोषण, घृणा, ईर्ष्या, द्वेष आदि वृत्तियाँ तो ज़हर के रूप हैं। इनसे जीवन में अशांति ही मिलती है। ये दूषित भाव ही जीवन में दुख के कारण बनते हैं। ये दानवीय वृत्तियाँ समाज में दारुण विषमता लाती हैं। इसलिए मानव होकर तुम दानव बनने की कोशिश मत करो। मानवता की राह पर चलकर ही तुम आनंद, खुशी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सकते हो।
In simple words: कवि मनुष्य को अपनी मानवीय सीमाओं में रहकर प्रेम, सद्भाव और करुणा के साथ जीने की सलाह देते हैं। अन्याय और घृणा जैसे विष को छोड़कर मानवता का अमृत अपनाना चाहिए, जिससे जीवन सुखमय और सम्मानपूर्ण बन सके।
Exam Tip: इस पद्यांश में नैतिक आचरण और मानवीय मूल्यों पर जोर दिया गया है। उत्तर में सकारात्मक मानवीय गुणों को अपनाने के महत्व पर प्रकाश डालें।
Question 17. जो गुण जानत सोई आदर देत।
कोकिल अंबहिं लेत, काग निबौरी लेत ।।
Answer: सब लोग गुणों की परख नहीं कर सकते। सच्चा जौहरी ही हीरे की परख कर सकता है। इसी प्रकार जो जिसका गुण जानता है, वही उसका आदर करता है। कोयल आम के फल का स्वाद जानती है, इसलिए वह आम के फल खाती है। कौआ आम की महिमा नहीं जानता, इसलिए वह आमों की उपेक्षा करता है। वह आम के बदले नीम का फल अर्थात् निबौरी खाता है। हमारे समाज में गुणी व्यक्तियों की कमी नहीं है, परंतु उनके गुणों को पहचानने वाले बहुत कम लोग होते हैं। गुणों की परख न होने के कारण वे गुणी व्यक्ति से दूर भागते हैं और उसकी योग्यता का लाभ नहीं ले पाते। हमारे पास व्यक्ति के गुणों को, उसकी खूबियों को पहचानने की दृष्टि होनी चाहिए। ऐसी दृष्टि होने पर ही हम गुणवान व्यक्ति का सम्मान कर सकते हैं और उसके दुर्लभ गुणों से प्रेरणा प्राप्त कर अपनी योग्यता बढ़ा सकते हैं।
In simple words: गुणों को पहचानने वाला ही आदर देता है। जैसे कोयल आम के महत्व को जानती है और उसे खाती है, पर कौआ नीम की निबौरी खाता है क्योंकि वह आम की महिमा नहीं जानता।
Exam Tip: यह दोहा गुणों की पहचान और उनके महत्व को दर्शाता है। उत्तर में यह समझाएँ कि गुणवान व्यक्ति का सम्मान तभी होता है जब उसके गुणों को पहचानने वाला कोई मौजूद हो।
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