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Detailed जनसंचार माध्यम (1st Language) GSEB Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi जनसंचार माध्यम (1st Language) GSEB Solutions PDF
जनसंचार का मतलब जानकारी को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना है - जॉर्ज-ए-मिलर। शब्दों के अर्थ के हिसाब से देखें, तो 'विचारों का आपस में साझा करने की सामूहिक प्रक्रिया' जनसंचार कहलाती है।
संचार एक प्रक्रिया है:
जिसमें भेजनेवाला या स्रोत व्यक्ति द्वारा कोई संदेश किसी संचार के तरीके या चैनल के माध्यम से कोडित होकर प्राप्तकर्ता तक पहुँचता है। जिसे वह समझता या पढ़ता है। इस प्रकार, संचार प्रक्रिया के कुछ खास तत्त्व इस प्रकार हैं:
- प्रेषक स्रोत
- संदेश
- संचार माध्यम
- संकेतीकरण -
- संकेतवाचन
- संग्राहक या प्राप्तकर्ता
जनसंचार के माध्यम:
ज्ञान-इंद्रियों के आधार पर संचार के माध्यमों को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा जाता है:
- श्रव्य माध्यम (रेडियो, टेपरिकार्ड, लाउड स्पीकर, नारे, भाषण, गाने)
- दृश्य माध्यम (फोटो, चार्ट, पोस्टर, कार्टून, स्लाइड, साहित्य)
- दृश्य श्रव्य-माध्यम (सिनेमा, टी.वी., कम्प्यूटर, मोबाईल, नाटक, कठपुतली, लोकनाट्य)
संचार माध्यमों का अन्य वर्गीकरण:
ऊपर दिए गए संचार माध्यमों को कुछ और तरीकों से भी बांटा जा सकता है:
- परम्परागत माध्यम - लोकगीत, गीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य, कठपुतली आदि।
- मुद्रित माध्यम - समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, मुद्रित साहित्य, विज्ञापन आदि।
- इलेक्ट्रानिक माध्यम - आकाशवाणी (रेडियो), टेलीविजन, इन्टरनेट, स्मार्ट फोन
- मौखिक संचार माध्यम - जनसभा, गोष्ठी, जनसंपर्क
- बाहरी माध्यम - पोस्टर, स्लाइड, होर्डिंग, सिनेमा
जनसंचार के कार्य:
लोगों तक बातें पहुँचाकर, जनसंचार कुछ खास काम करता है:
- सूचना देना
- शिक्षित करना
- मनोरंजन करना
- विचार-विमर्श के लिए मंच तैयार करना, देना
- कार्यसूची तय करना
- जनमत को प्रभावित करना
जनसंचार का महत्त्व:
जनसंचार का महत्व उसकी उपयोगिताओं और बड़े जनसमूह तक पहुँचने के कारण बहुत अधिक है, और इसका क्षेत्र हर दिन बढ़ता जा रहा है। संचार माध्यम द्वारपाल की तरह काम करते हैं और लोगों के जीवन में गलत आदतों पर नियंत्रण रखने में सहायता करते हैं। जनसंचार माध्यमों का यह कर्तव्य भी है कि वे सबकी भलाई, पत्रकारिता के सिद्धांतों और मूल्यों के अनुसार सामग्री को तैयार करके फैलाएं।
भारत में जनसंचार माध्यमों का विकास:
पुराने समय में भारत में जनसंचार का तरीका मशीनी नहीं बल्कि व्यक्तिगत था। संगीत, नृत्य, गीत, बोली और भाषा-लिपि के बढ़ने के साथ ही, गैर-मौखिक संचार धीरे-धीरे मौखिक संचार की ओर बढ़ने लगा। ढोल, मृदंग और मादल जैसे उपकरण असरदार जनसंचार माध्यम बने। वैदिक काल में गुरु-शिष्य के बीच बातचीत और व्याख्यान से जनसंचार होता था। नारद मुनि को पहला समाचार सुनाने वाला कहा जाता है। मध्यकालीन भारत में कलाओं, त्योहारों, धार्मिक परंपराओं का इस्तेमाल जनसंचार के लिए किया गया। राजसूय यज्ञ, अशोक के शिलालेख, चित्तौड़ का कीर्तिस्तंभ, महात्मा बुद्ध का प्रचार अभियान, दरबार के दूत, खबरें लिखने वाले, रामलीला, रासलीला, तीर्थ, मेले-उत्सव, लोकनृत्य और लोककलाओं के रूप में जनसंचार हर समय मौजूद रहता था।
अंग्रेजी शासन के दौरान आजादी से पहले तक, सरकार जनसंचार के खिलाफ थी। छपाई वाले माध्यमों के विकास से यह विरोध उतना सफल नहीं हो सका। स्वतंत्रता आंदोलनों में छपे हुए समाचार पत्र, पत्रिकाएँ और पैम्फलेट बहुत महत्वपूर्ण रहे। अंग्रेजों ने इस समय में 'पब्लिसिटी बोर्ड' की शुरुआत की। बाद में 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के सुझाव पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्फॉर्मेशन की स्थापना हुई। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो को नया रूप मिला। इसी समय ऑल इंडिया रेडियो और फिल्म्स डिविजन के रूप में जनसंचार का बहुत विकास हुआ। अपनी नीतियों का प्रचार करने के लिए अंग्रेज सरकार ने क्षेत्रीय प्रचार संस्था (फील्ड पब्लिसिटी ऑर्गनाइजेशन) का निर्माण किया।
आजादी के बाद, सरकार और आम लोगों के संबंधों में बड़े बदलाव आए, जिससे ज्यादातर जनसंचार माध्यम सरकारी तंत्र का हिस्सा बन गए। प्रेस, पत्रकारिता, रेडियो, फिल्म और दूरदर्शन को एक नया रूप मिला। इंटरनेट और कंप्यूटर ने जनसंचार में क्रांति ला दी। इसके साथ ही स्पीड पोस्ट, टेली प्रिंटर, ई-मेल, ई-कॉमर्स, वीडियो टेक्स्ट और टेली कॉन्फ्रेंस जैसे साधनों ने जनसंचार की गति को बढ़ा दिया। सैटेलाइट सेवाओं ने भी जनसंचार के क्षेत्र में शानदार काम किया है।
जनसंचार के प्रकार:
सूचना क्रांति के कारण, जनसंचार ने शहरों और गांवों के बीच के अंतर को मिटा दिया है। वाई-फाई वाले स्मार्ट फोन के माध्यम से अब दूर-दराज के गांवों में भी सभी आधुनिक जनसंचार के फायदे मिल रहे हैं।
संचार साधनों का स्थूल वर्गीकरण इस प्रकार हो सकता है:
- अशाब्दिक (Non-verbal) या परंपरागत अंतरवैयक्तिक (Inter personal)
- लिखित – शाब्दिक जनसंचार
पहले तरह के संचार साधनों में शारीरिक भाषा, संकेत, बातचीत, गोष्ठी, जनसभा, मेक-अप, स्पर्श, चित्र, चिह्न, शारीरिक मुद्राएँ, सम्मेलन, मेले, प्रदर्शनी, चारणगान, कठपुतली नृत्य या लोकगीत, लोकनृत्य आदि शामिल होते हैं। - दूसरे विभाग के अंतर्गत डाक सेवाएँ, टेलीफोन, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर से ई-मेल, इन्टरनेट आदि के साथ स्पीडपोस्ट, कोरियर सेवाओं ने जनसंचार को बहुत तेज बना दिया है। प्रिंट मीडिया बहुत विकसित हुआ है। एक ही समाचारपत्र या पत्रिका के कई संस्करण एक साथ अनेक शहरों या केन्द्रों से प्रकाशित हो रहे हैं।
लघूत्तरीय प्रश्न
1. सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :
Question 1. 'जनसंचार' शब्द किस अंग्रेजी शब्द के पर्याय के रूप में प्रयोग किया जाता है?
(a) Communication
(b) Mass Media
(c) Mass Communication
(d) Tele Communication
Answer: (c) Mass Communication
In simple words: 'जनसंचार' का अंग्रेजी में सही शब्द 'मास कम्युनिकेशन' है, जिसका मतलब बड़े पैमाने पर लोगों तक जानकारी पहुँचाना होता है।
Exam Tip: हमेशा सही तकनीकी शब्द का चुनाव करें जब अंग्रेजी पर्याय पूछा जाए, खासकर जब सामान्य दिखने वाले विकल्प भी दिए गए हों।
Question 2. शब्दार्थ की दृष्टि से 'जनसंचार' का क्या तात्पर्य है?
(a) विचारों के आदान-प्रदान की सामूहिक प्रक्रिया
(b) विचारों के आदान-प्रदान की वैयक्तिक प्रक्रिया
(c) इलेक्ट्रानिक माध्यम द्वारा सूचनाओं का आदान-प्रदान
(d) समाचार पत्रों द्वारा समाचार का प्रकाशन
Answer: (a) विचारों के आदान-प्रदान की सामूहिक प्रक्रिया
In simple words: 'जनसंचार' का मतलब है कि जब कई लोग मिलकर अपने विचार एक-दूसरे से बांटते हैं।
Exam Tip: परिभाषा से जुड़े प्रश्नों में, सबसे सटीक और व्यापक विकल्प को चुनें जो शब्द के मूल अर्थ को दर्शाता हो।
Question 3. नीचे में से कौन-सा कार्य जनसंचार का नहीं है?
(a) सूचना देना
(b) मनोरंजन
(c) लोक जागरण
(d) केवल ई-मेल भेजना
Answer: (d) केवल ई-मेल भेजना
In simple words: जनसंचार का काम केवल ईमेल भेजना नहीं है; इसके मुख्य कार्य जानकारी देना, मनोरंजन करना और लोगों को जागरूक करना हैं।
Exam Tip: जनसंचार के विभिन्न कार्यों को याद रखें ताकि आप पहचान सकें कि कौन सा कार्य इसके दायरे में नहीं आता।
Question 4. समाचारपत्र किस प्रकार के संचार माध्यम हैं?
(a) परंपरागत संचार माध्यम
(b) मुद्रित संचार माध्यम
(c) मौखिक संचार माध्यम
(d) इलेक्ट्रानिक संचार माध्यम
Answer: (b) मुद्रित संचार माध्यम
In simple words: अखबार छपे हुए संचार के तरीके हैं क्योंकि वे कागज पर प्रिंट होते हैं।
Exam Tip: संचार माध्यमों को उनके रूप (जैसे मुद्रित, इलेक्ट्रॉनिक, मौखिक) के आधार पर वर्गीकृत करना सीखें।
Question 5. इनमें से किसे भारत का पहला समाचारवाचक कहा जाता है?
(a) वाल्मीकि ऋषि
(b) नारद मुनि
(c) संजय
(d) महात्मा बुद्ध
Answer: (b) नारद मुनि
In simple words: नारद मुनि को भारत का पहला व्यक्ति माना जाता है, जिन्होंने लोगों तक खबरें या संदेश पहुँचाए।
Exam Tip: ऐतिहासिक तथ्यों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों को उनके योगदान के साथ याद रखें।
2. अति संक्षिप्त उत्तर दीजिए :
Question 1. जनसंचार के लोक माध्यम कौन-कौन से हैं?
Answer: कठपुतली, लोकगीत, लोकनाट्य, लोकनृत्य आदि जनसंचार के कुछ पुराने और स्थानीय माध्यम हैं।
In simple words: कठपुतली, लोकगीत, लोकनाट्य और लोकनृत्य जैसे माध्यम जनसंचार के पारंपरिक तरीके हैं।
Exam Tip: लोक माध्यमों के नाम याद रखें और समझें कि वे कैसे समुदायों में जानकारी फैलाते हैं।
Question 2. जनसंचार के आधुनिक माध्यम कौन-कौन से हैं?
Answer: रेडियो, टी.वी., सिनेमा, समाचारपत्र और इंटरनेट आदि जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में शामिल हैं।
In simple words: रेडियो, टी.वी., सिनेमा, अखबार और इंटरनेट आजकल के जनसंचार के मुख्य तरीके हैं।
Exam Tip: आधुनिक संचार माध्यमों के नाम याद रखें और समझें कि वे कैसे काम करते हैं।
Question 3. जनसंचार माध्यमों के दो स्थूल वर्ग कौन-कौन से हैं?
Answer: जनसंचार माध्यमों के दो मुख्य वर्ग हैं:
• अशाब्दिक (Non-verbal) अंतरवैयक्तिक (Inter personal)
• लिखित – शाब्दिक जनसंचार
In simple words: जनसंचार के दो मुख्य प्रकार हैं: अशाब्दिक (जो बिना शब्दों के होता है) और लिखित-शाब्दिक (जो शब्दों के माध्यम से होता है)।
Exam Tip: संचार माध्यमों के मोटे वर्गीकरण को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
Question 4. संचार प्रक्रिया के कौन-से तत्त्व हैं?
Answer: संचार प्रक्रिया के मुख्य तत्त्व ये हैं:
• स्रोत
• संदेश
• संचारमाध्यम
• संकेतीकरण (एनकोडिंग)
• संकेतवाचन (Decoding)
• प्राप्तकर्ता या संग्राहक।
In simple words: संचार के मुख्य हिस्सों में संदेश भेजने वाला, संदेश खुद, जिस तरीके से संदेश जाता है, संदेश को कोड में बदलना, उसे समझना और संदेश पाने वाला शामिल हैं।
Exam Tip: संचार प्रक्रिया के सभी तत्त्वों को क्रम से याद रखें, क्योंकि ये किसी भी संचार के लिए आवश्यक होते हैं।
Question 5. आजादी के पूर्व भारतीय पत्रकारिता का लक्ष्य क्या था?
Answer: आजादी के पहले भारतीय पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य आजादी प्राप्त करना था।
In simple words: आजादी से पहले, भारतीय पत्रकारिता का मुख्य लक्ष्य देश को स्वतंत्रता दिलाना था।
Exam Tip: भारत में पत्रकारिता के ऐतिहासिक संदर्भ और उसके उद्देश्यों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 6. हिन्दी के किन्हीं पाँच प्रमुख हिन्दी चैनलों के नाम दीजिए।
Answer: हिन्दी के पाँच प्रमुख चैनल हैं:
• एन.डी.टी.वी.
• आजतक
• ए.बी.पी.
• दूरदर्शन (डी.डी. न्यूज) और
• जी न्यूज।
In simple words: पांच प्रसिद्ध हिंदी समाचार चैनल हैं: एन.डी.टी.वी., आजतक, ए.बी.पी., दूरदर्शन (डी.डी. न्यूज), और जी न्यूज।
Exam Tip: प्रमुख समाचार चैनलों के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी होता है।
Question 7. भारत के तीन प्रमुख हिन्दी दैनिकों के नाम लिखिए।
Answer: भारत के तीन प्रमुख हिन्दी दैनिक समाचार पत्र हैं:
• नवभारत टाइम्स
• दैनिक जागरण
• दैनिक भास्कर आदि।
In simple words: भारत के तीन बड़े हिंदी अखबारों में नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर शामिल हैं।
Exam Tip: अपने देश के प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों के नाम जानना सामान्य जानकारी के लिए महत्वपूर्ण है।
3. नीचे दिए गए कथनों में सही कथन के सामने ✓ तथा गलत कथन के सामने X लगाइए।
Question 1. भारत में टी.वी. शुरू करने का उद्देश्य शिक्षा, सामुदायिक विकास था। ✓
Answer: यह कथन सही है कि भारत में टेलीविजन शुरू करने का मुख्य लक्ष्य शिक्षा और समुदाय का विकास करना था।
In simple words: भारत में टी.वी. का मुख्य मकसद लोगों को शिक्षित करना और समुदायों को बेहतर बनाना था।
Exam Tip: टेलीविजन के शुरुआती उद्देश्यों को याद रखें, क्योंकि यह इसके सामाजिक महत्व को दर्शाता है।
Question 2. आजादी के बाद पत्रकारिता विशुद्ध व्यवसाय बन गया है। ✓
Answer: यह कथन सही है कि आजादी मिलने के बाद पत्रकारिता एक पूरी तरह से व्यावसायिक क्षेत्र बन गई है।
In simple words: स्वतंत्रता के बाद, पत्रकारिता अब पूरी तरह से एक बिजनेस बन गई है।
Exam Tip: पत्रकारिता के विकास के चरणों को समझें, जिसमें इसका व्यावसायिक स्वरूप भी शामिल है।
Question 3. इंटरनेट सभी संचार माध्यमों का समागम है। ✓
Answer: यह कथन सही है कि इंटरनेट सभी संचार माध्यमों का एक मिश्रण है, जहाँ आपको हर तरह की जानकारी मिलती है।
In simple words: इंटरनेट एक ऐसी जगह है जहाँ सभी प्रकार के संचार माध्यम एक साथ मिलते हैं।
Exam Tip: इंटरनेट को एक एकीकृत संचार मंच के रूप में देखें, जो विभिन्न माध्यमों को एक साथ लाता है।
Question 4. टेलीविजन सबसे प्रभावशाली माध्यम है। ✓
Answer: यह कथन सही है कि टेलीविजन एक बहुत शक्तिशाली माध्यम है क्योंकि यह दृश्य और श्रव्य दोनों रूपों में जानकारी देता है।
In simple words: टेलीविजन सबसे प्रभावी संचार का तरीका है क्योंकि यह हमें देखने और सुनने दोनों की सुविधा देता है।
Exam Tip: विभिन्न संचार माध्यमों की विशेषताओं और प्रभावशीलता की तुलना करना सीखें।
Question 5. संचार माध्यम केवल मनोरंजन के साधन हैं। X
Answer: यह कथन गलत है क्योंकि संचार माध्यमों का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सूचना देने, शिक्षा देने और जागरूकता फैलाने के लिए भी होता है।
In simple words: संचार के तरीके सिर्फ मजा करने के लिए नहीं होते; वे हमें खबरें देते हैं, सिखाते हैं, और हमें जागरूक भी करते हैं।
Exam Tip: संचार माध्यमों के बहुआयामी कार्यों को समझें, न कि केवल मनोरंजन के पहलू को।
4. कुछ महत्त्वपूर्ण तिथियाँ, तथ्य -
- भारत में रेडियो की पहुँच का क्षेत्र – 96 प्रतिशत जनसंख्या तक
- भारत का पहला अखबार – बंगाल गजट (1780)
- भारत का पहला हिंदी समाचार पत्र – 1876-80, उदंत मार्तंड (जुगलकिशोर शुक्ल)
- विश्व का पहला रेडियो स्टेशन – 1892, अमेरिकी शहरों पिट्सबर्ग, न्यूयार्क, शिकागो
- आल इंडिया रेडियो की स्थापना – 1930 में
- आकाशवाणी से दूरदर्शन अलग हुआ – 1 अप्रैल, 1976
- एफ. एम. रेडियो का आरंभ – 1993 में
- विश्व में टी.वी. की शुरुआत 1927 में, अमेरिका में
- भारत में टी.वी. की शुरुआत – 15 सितम्बर, 1959
- सिनेमा का आविष्कार – थॉमस आल्वा एडिसन (1883)
- भारत की पहली मूक फिल्म – राजा हरिश्चंद्र (1913) दादा साहब फालके द्वारा निर्मित
- भारत की पहली बोलती फिल्म – आलम आरा (1931)
- विश्व की पहली फिल्म – द अराइवल ऑफ ट्रेन (फ्रांस 1894)
- टेलीविजन के आविष्कारक – जॉन लॉगी बेयर्ड
पत्रकारिता के विविध आयाम
पत्रकारिता क्या है?
पत्रकारिता के लिए अंग्रेजी शब्द 'जर्नलिज्म' का उपयोग होता है, जो अंग्रेजी के जर्नल शब्द से आया है और जिसका मतलब दैनिक या रोजनामचा होता है। जर्नल में हर दिन की गतिविधियों, सभाओं और बैठकों का विवरण 'जर्नल' में लिखा होता है। जर्नल से बना जर्नलिज्म एक काफी बड़ा शब्द है। समाचारपत्रों और अलग-अलग समय पर छपने वाली पत्रिकाओं के संपादन, लेखन और उनसे जुड़े कामों को पत्रकारिता के अंतर्गत रखा गया है। चैंबर्स और न्यू वेब्स्टर कोश के अनुसार, प्रकाशन, संपादन, लेखन और संचार माध्यम का व्यवसाय ही पत्रकारिता है। आज तो पत्रों के साथ रेडियो और टेलीविजन भी अब पत्रकारिता के क्षेत्र में आ चुके हैं।
समाचार (News):
यह पत्रकारिता का सबसे जरूरी हिस्सा है। इंसान की जानने की इच्छा तभी शांत होती है, जब वह किसी खबर को पढ़ लेता है, सुन लेता है या देख लेता है।
समाचार की व्युत्पत्ति -
समाचार के लिए अंग्रेजी में 'News' शब्द का उपयोग होता है, जो 'New' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है नया। मतलब, जो कुछ भी नया है, वही समाचार है। एक कोश के अनुसार, News के चार अक्षर चार दिशाओं के पहले अक्षर हैं -
N – North (उत्तर), E – East (पूर्व), W- West (पश्चिम) तथा S – South (दक्षिण)
हिंदी में समाचार में सही आचरण का भाव छिपा है। जब सही आचरण के अनुसार बिना पक्षपात के तथ्यों की सही जानकारी दी जाती है, तो उसे समाचार कहते हैं। समाचार का सामान्य से हटकर यानी नया होना आवश्यक है। कुछ कहावतें इस प्रकार हैं:
'जिसे कहीं कोई दबाना चाह रहा है, वही समाचार है, शेष विज्ञापन।'
'पाठक जिसे जानना चाहते है, वह समाचार है।'
'किसी अनोखी या असाधारण घटना की अविलंब सूचना को समाचार कहते हैं।'
'पाठक जिसे जानना चाहते हैं, वह समाचार है।'
'जिस बात के छपने से पत्र की बिक्री बढ़ती है, वही समाचार है।'
समाचार की एक उत्तम परिभाषा इस प्रकार दी जाती है -
'समाचार किसी अनोखी या असाधारण घटना की तुरंत सूचना को कहते हैं, जिसके बारे में लोग अक्सर कुछ नहीं जानते, जिसे तुरंत जानने में ज्यादा से ज्यादा लोगों को रुचि हो।' निष्कर्ष – 'सरस, सामयिक, सत्य सूचना ही समाचार है।"
1. समाचार के तत्त्व :
- नवीनता – नवीनता समाचार का मुख्य तत्त्व है। एकदम नई सूचना ही समाचार होती है, देर होने पर वह पढ़ने वाले को आकर्षित नहीं करती, फीकी पड़ जाती है।
- सत्यता – 'सभी सत्य पर आधारित है' समाचार का मूल मंत्र है। सच्चाई को चोट पहुँचाना समाचार की आत्मा को नष्ट करना है।
- सामीप्य – पास में हुई छोटी घटना दूर की बड़ी घटना से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
- सुरुचिपूर्णता – 'जो जिसे पसंद आता है, वही सुंदर होता है' की मान्यता के अनुसार, पाठकों की रुचि को प्रभावित करने वाली खबरें ज्यादा पढ़ी जाती हैं।
- वैयक्तिकता – उच्च पद पर बैठे लोगों के भाषण या बयान और सामान्य व्यक्ति की असामान्य उपलब्धि दोनों ही समाचार बनते हैं।
इनके अलावा संघर्ष, स्पर्धा, उत्तेजना, कुकृत्य, मानवीय गुणों का उभरना, सामाजिक आर्थिक परिवर्तन और असाधारणता जैसे तत्त्वों के प्रति पाठक में आकर्षण उत्पन्न होता है।
संपादन के सिद्धांत या आधारभूत तत्त्व -
संपादन कला के मूल तत्त्व निम्नलिखित हैं:
- शीर्षकीकरण
- पृष्ठ विभाजन
- आमुख और समाचार की प्रस्तुति
- अग्रलेख तथा
- संपादक के नाम पत्र
शीर्षकीकरण -
शीर्षकीकरण का उद्देश्य पाठकों को आकर्षित करके उनकी रुचि के अनुसार सामग्री खोजने में मदद करना है और अखबार के व्यक्तित्व को अच्छा व उत्तम बनाना है। शीर्षक देते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए -
- शीर्षक समाचार के अनुकूल हो।
- वह समाचार की रोचकता बढ़ाए।
- पृष्ठ सज्जा में सहायक बने।
- समाचार को समझने में सहायक बने।
- उसमें समाचार का सारतत्त्व निहित हो।
- वह समाचार की तरह वस्तुनिष्ठ (objective) हो।
- उससे अधिक उपयुक्त दूसरा शीर्षक न हो।
शीर्षक को प्रचारधर्मिता, आदेशात्मकता या प्रश्नवाचकता, द्विअर्थी, ऋणात्मक होने से बचना चाहिए।
(2) पृष्ठ विन्यास -
पृष्ठ सज्जा के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें –
- महत्त्वपूर्ण समाचार सबसे ऊपर हों।
- महत्त्व के अनुरूप टाइप का प्रयोग हो।
- विभिन्न शीर्षकों में संतुलन स्थापित हो।
- लम्बे समाचार में दो पंक्ति में, अलग टाइपोग्राफी में शीर्षक दें।
- शीर्षक, समाचार के टाइप अलग हों।
• विज्ञापन या चित्र से सटा हुआ बॉक्स समाचार पृष्ठ पर न दें।
- विशेष महत्त्वपूर्ण समाचार पृष्ठ के ऊपरी भाग में बाईं ओर देना चाहिए।
- समाचारों के बचे हुए हिस्से अगले पृष्ठ या अंतिम पृष्ठ पर देना चाहिए।
- चित्र, विज्ञापन के आकार-प्रकार को ध्यान में रखकर पृष्ठ को सुंदर बनाएँ।
(3) आमुख (अग्रांश) या इंट्रो अथवा लीड या मुखड़ा -
आमुख समाचार का सार है, इसे समाचार की आत्मा कहा जाता है। इससे समाचार का संक्षिप्त परिचय मिलता है। व्यवहार में समाचार का पहला पैराग्राफ ही आमुख होता है। इसमें छह तरह के प्रश्नों के उत्तर जरूरी हैं – कौन (Who), क्या (What), कहाँ (Where), कब (When), क्यों (Why) तथा कैसे (How) [5W + 1H] को समाचार के प्रस्तुत करने की भाषा सरल, आकर्षक होनी चाहिए। सत्यता, संक्षिप्तता, स्पष्टता और सुरुचि – इन चार तत्त्वों का समाचार प्रस्तुत करते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
(4) अग्रलेख -
हर समाचार पत्र के बीच का पन्ना, पृष्ठ-4 तथा 5 'संपादकीय पन्ना' कहलाता है। इस पन्ने पर कई तरह के लेख हो सकते हैं, जिनमें पहला लेख अग्रलेख होता है। बचे हुए टीका-टिप्पणियाँ, संपादक के नाम पत्र तथा अन्य स्तंभ होते हैं। अग्रलेख के लिए विवेक और ज्ञान का समन्वय आवश्यक है। इसका नैतिक और निष्पक्ष होना भी आवश्यक है।
(5) संपादक के नाम पत्र का स्वरूप -
प्राय: हर प्रसिद्ध समाचारपत्र में एक स्तंभ संपादक के नाम पत्र का होता है। इस स्तंभ को समाचार पत्र का सेफ्टी वाल्व कहा जाता है। इसमें समाचार का पाठक अपनी तरफ से सार्वजनिक समस्याओं पर प्रकाशित करने के लिए पत्र लिखता है। समस्याओं के प्रकाशन के साथ पाठक अपने सुझाव भी देता है। समाचारपत्र के माध्यम से समस्त पाठक वर्ग उनका समाधान प्राप्त कर लेता है।
एक अच्छा समाचार पत्र 'संपादक के नाम पत्र' छापकर लोकप्रिय बनता है। वास्तव में ऐसे पत्रों में आमजनता की आवाज होती है। इसमें टीका-टिप्पणी से लेकर विचार-विमर्श तक होता है। यह कॉलम प्राय: संपादकीय पन्ने पर होता है।
समाचारपत्र में दृश्य सामग्री की व्यवस्था -
इसमें कार्टून, ग्रैफिक्स की व्यवस्था, रेखाचित्र तथा फोटो पत्रकारिता का समावेश किया जाता है। इसके माध्यम से पत्र पाठकों का अपना एक अच्छा-खासा समूह निर्मित करते हैं।
कार्टून (व्यंग्य चित्र) -
कार्टून किसी भी पत्र की ताकत माने जा सकते हैं। 'आज' के कांजीलाल, 'टाइम्स' में लक्ष्मण, 'जनसत्ता' के काक के कार्टून प्रसिद्ध थे। कार्टून का विषय प्रायः राजनीतिक विद्रूपता होता है। प्रशासन और व्यवस्था को उसकी गलतियों की ओर संकेत कर उन्हें अपने से सीख लेने का आग्रह करते हैं।
कार्टूनिस्ट निडर होकर उस समय की व्यवस्था पर व्यंग्य करता है। कभी-कभी इसके कारण उसे व्यवस्था का गुस्सा भी झेलना पड़ता है, जो कि असहिष्णुता की निशानी है।
गैफिक्स (Graphics) या फोटोग्राफी -
ग्रैफिक्स का मतलब है - आलेख और लेखाचित्र बनाने की कला। इस सजावट या सजीव रेखांकन को ग्रैफिक्स कहते हैं। मोटे तौर पर इसे ग्राफ, रूपचित्र, शब्दचित्र, छायाचित्र या आलोक चित्र भी कह सकते हैं। इनके कारण समाचारपत्र रोचक और पढ़ने लायक बन जाते हैं। ग्रैफिक्स सामान्य घटना या दृश्य को रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। रेखाचित्र (Sketch) का भी पत्रकारिता से गहरा संबंध है। यह शब्द चित्रकला और साहित्य दोनों में समान रूप से उपयोग होता है। चित्रकला रेखाओं का उपयोग करती है और साहित्य शब्दों के माध्यम से चित्र खींचता है। दोनों माध्यम अलग हैं पर देखने और शैली में समानता होती है। चित्रकला का रेखाचित्र स्थिर होता है जबकि साहित्यिक रेखाचित्र गतिशील। रेखाचित्र किसी भी चरित्र, स्थिति और वातावरण का भावनात्मक वर्णन होता है, जिसमें चित्रात्मकता और कथात्मकता दोनों होती हैं।
फोटो पत्रकारिता -
फोटोग्राफी कला है, विज्ञान है और व्यवसाय भी। हिंदी में इसे छायांकन या छायाचित्रण कहते हैं। यह श्वेत-श्याम (White-black), रंगीन या प्रकाश-छाया के तालमेल वाले फोटो द्वारा पत्रकारिता में इसका खास योगदान है। पत्रकार के लिए कैमरा एक नोटबुक की तरह है जो घटनाओं और विषयों का रिकॉर्ड रखता है। संवाददाता अगर एक अच्छा फोटोग्राफर भी है तो यह उसकी दोहरी योग्यता है। प्रेस फोटोग्राफर को अपना कर्तव्य निभाते समय कठिन परिस्थितियों और मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। युद्ध, बाढ़, भूकंप और दंगों जैसी परिस्थितियों में उसे अपनी जान को जोखिम में डालना पड़ता है। एक अच्छा फोटो जर्नलिस्ट कैमरा क्लिक करने के बाद तेजी से फिल्म डेवलप करके फोटो को समाचारपत्र कार्यालय तक पहुंचा देता है। खबर के साथ फोटो प्रकाशित करना एक अच्छे समाचारपत्र की पहचान है।
पत्रकारिता के प्रकार -
जीवन और समाज के विभिन्न आयामों की तरह पत्रकारिता के भी अनेक रूप हैं। आजकल पत्रकारिता जिन माध्यमों से हो रही है, उसके आधार पर उनके दो मुख्य प्रकार गिने जा सकते हैं –
- मुद्रित
- इलेक्ट्रानिक
मुद्रित – छपाई के विकास के साथ ही पत्रकारिता का विकास हुआ है। यह सब जानते हैं। समाचारपत्र, साप्ताहिक, मासिक, द्वैमासिक तथा अन्य तरह की निश्चित और अनिश्चित समय पर छपने वाली पत्र-पत्रिकाओं को इसमें शामिल किया जाता है। इनको विषय के अनुसार वर्गीकृत करें तो उन्हें उनके विषय क्षेत्र के साथ जोड़ना पड़ेगा। जैसे -
- राजनीतिक – आर्थिक पत्रकारिता
- ग्रामीण या कृषि पत्रकारिता
- खेल पत्रकारिता
- विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी पत्रकारिता
- बाल पत्रकारिता
- फिल्मी पत्रकारिता
- साहित्यिक पत्रकारिता
- संसदीय पत्रकारिता आदि।
ये पत्रकारिता के दोनों माध्यमों-मुद्रण और इलेक्ट्रानिक से जुड़े हैं। रेडियो और टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम इनसे संबंधित होते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम की पत्रकारिता के भेद
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम की पत्रकारिता के भेद उनकी सामग्री के आधार पर नहीं बल्कि माध्यम के स्वरूप पर किए जाते हैं; जैसे –
- रेडियो पत्रकारिता,
- वीडियो पत्रकारिता,
- दूरदर्शन (टी.वी.) पत्रकारिता और
- इंटरनेट पत्रकारिता।
जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है कि विषय की दृष्टि से इनमें उन सभी क्षेत्रों का समावेश होता है जो मुद्रित पत्रकारिता में हैं।
पत्रकारिता के भेदों का एक विभाजन
पत्रकारिता के भेदों का एक विभाजन उसकी कार्यप्रणाली के विशिष्टीकरण को लेकर किया जा सकता है। जैसे -
- खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism),
- व्याख्यात्मक पत्रकारिता,
- संदर्भ पत्रकारिता,
- वृत्तांत पत्रकारिता,
- वाच-डाग पत्रकारिता,
- एडवोकेसी पत्रकारिता और
- पीत पत्रकारिता।
(1) खोजी पत्रकारिता -
इस तरह की पत्रकारिता में वर्तमान घटनाओं, स्थितियों और तथ्यों का क्रमबद्ध सूक्ष्म सर्वेक्षण, अध्ययन तथा अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाता है। यह छिपे हुए तथ्यों को उजागर करके सच्चाई को सामने लाती है, जिसे छिपाया जा रहा होता है। ऐसी पत्रकारिता ने कई राजनेताओं को पद से हटा दिया है। यह समाज की बुराइयों को उजागर करके लोगों को जागरूक करने का भी काम करती है।
(2) व्याख्यात्मक पत्रकारिता -
समाचारों का वास्तविक परिवेश में मूल्यांकन करना ही ऐसी पत्रकारिता का मुख्य लक्षण है। आज तो समाचार के विश्लेषण, उसकी पृष्ठभूमि और उसके भविष्य के परिणामों के दिशा-निर्देशन की समस्या है, जिसे व्याख्यात्मक पत्रकारिता द्वारा हल किया जा रहा है। तेज संचार साधनों से प्राप्त समाचार के विस्तार और स्पष्टीकरण हेतु व्याख्यात्मक पत्रकारिता स्वीकार्य हो रही है।
(3) वृत्तांत पत्रकारिता (Commentary Journalism) -
रेडियो और टी.वी. में प्रस्तुत होने वाले 'आँखों देखा हाल' इसी पत्रकारिता का एक हिस्सा है। आयोजित समारोहों, कार्यक्रमों तथा प्रतियोगिताओं का सीधा प्रसारण करना इसके कार्यक्षेत्र में आता है। वृत्तांत पत्रकार के लिए आवाज की गुणवत्ता, निष्पक्षता, भाषा पर उसका बेहतरीन अधिकार, विषय-ज्ञान तथा जिम्मेदारी का बोध आवश्यक है।
(4) वॉच-डॉग पत्रकारिता -
यह एक तरफ खोजी पत्रकारिता से जुड़ी है और दूसरी ओर समाज और सरकार से भी। इसका काम कहीं पर भी होने वाली गड़बड़ी का पर्दाफाश करना है। यह सरकारी सूत्रों पर आधारित समाचारों की सच्चाई को सामने लाने का काम करती है।
(5) एडवोकेसी पत्रकारिता -
विभिन्न राजनीतिक दलों और संप्रदायों द्वारा प्रकाशित होने वाली सामग्री का ज्यादातर उनकी विचारधारा, कार्य और कार्यप्रणाली का समर्थन करती है, ऐसी पत्रकारिता अक्सर एकतरफा होती है। इसमें अपने कार्यों और विचारों का बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन या विवरण हो सकता है। ये अपने प्रकाशकों के हितों की रक्षा करने के लिए आवश्यक सामग्री जुटाकर प्रकाशित करते हैं। सरकारी विभागों से निकलने वाले पत्र भी इसी श्रेणी में आते हैं।
(6) पीत पत्रकारिता (Yellow Journalism) -
कुछ स्वार्थी पत्र और पत्रकार किसी समाचार या घटना को इस प्रकार से प्रस्तुत करते हैं, जिससे किसी व्यक्ति विशेष के मान-सम्मान और स्थान पर आरोप लग सकता है। कभी-कभी स्थानीय स्तर पर किसी घटना को लेकर खबर को किसी के पक्ष या विरोध में छापने की रणनीति भी अपनाई जाती है। यह पीत पत्रकारिता का ही एक रूप है।
समाचार माध्यमों का मौजूदा रुझान
सूचना के विस्फोट के इस दौर में जनसंचार माध्यमों का विकास बहुत तेजी से हुआ है। भूमंडलीकरण ने इसकी गति को और बढ़ाया है। भारत एक बहुत बड़ा उपभोक्ता बाजार है। टेलीविजन के शुरुआती समय के बाद अब सरकारी दूरदर्शन के अलावा अनेक नए निजी चैनल इस बाजार पर कब्जा जमाने की होड़ में हैं। शुरुआत में समाचारों का प्रसारण कुछ निश्चित समय और अवधि के लिए होता था, अब तो 24x7 (चौबीस घंटे x सात दिन) के अनेक समाचार चैनल शुरू होकर विकसित हो चुके हैं। इन निजी चैनलों का मुख्य उद्देश्य समाचार पत्रकारिता नहीं बल्कि विज्ञापनों और व्यावसायिक प्रोग्रामों के माध्यम से पैसे कमाना है।
व्यापारिक उद्योग घरानों के स्वामित्व वाले निजी चैनलों के साथ-साथ राजनीतिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए भी ये चैनल उपयोग में लिए जा रहे हैं। सरकारी चैनलों से निष्पक्षता की उम्मीद अब लोग नहीं करते।
व्यावसायिक या निजी चैनलों के समाचार भी सरकार विरोधी या सरकार समर्थक अथवा किसी पार्टी विशेष के हित में अथवा विरोध में देखे जा सकते हैं। इन चैनलों का राजनीतिक महत्त्व और शक्ति में वृद्धि हुई है। चुनाव के समय 'फेक न्यूज' झूठे समाचार, विज्ञापनों में भी कुछ समाचार चैनल शामिल होते हैं। – पीत पत्रकारिता की छाया भी समाचार माध्यमों को घेर रही है। पीत पत्रकारिता और पेज-3 पत्रकारिता अच्छे संकेत नहीं हैं।
आज समाचार माध्यमों में संपादक की भूमिका कम होती जा रही है। मीडिया घरानों के मालिक और प्रबंधक हावी हो रहे हैं। इस वजह से समाचार माध्यमों की विश्वसनीयता में कमी आई है। उनकी साख गिरी है। किसी नेता या राजनीतिक पार्टी का गुणगान या विरोध करने वाले चैनलों को आसानी से पहचाना जा सकता है। मीडिया घराने इसका लाभ उठाकर संसद में भी अपने प्रतिनिधि भेज रहे हैं। समाचार माध्यमों का यह वर्तमान रुझान पत्रकारिता के लिए लाल बत्ती है, इससे सचेत रहना जरूरी है।
1. अति संक्षिप्त उत्तर दीजिए :
Question 1. पत्रकारिता का मूल तत्त्व क्या है?
Answer: पत्रकारिता का मूल तत्त्व जिज्ञासा है, यानी कुछ नया जानने की इच्छा।
In simple words: पत्रकारिता का सबसे खास हिस्सा है कुछ नया जानने की उत्सुकता।
Exam Tip: पत्रकारिता के मूल उद्देश्यों में जिज्ञासा और सच्चाई की खोज प्रमुख है।
Question 2. समाचार प्राप्त करने के माध्यम कौन-कौन से हैं?
Answer: समाचार प्राप्त करने के मुख्य माध्यम रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, इंटरनेट आदि हैं।
In simple words: रेडियो, टेलीविजन, अखबार और इंटरनेट वे तरीके हैं जिनसे हमें खबरें मिलती हैं।
Exam Tip: विभिन्न संचार माध्यमों के नाम याद रखें जिनसे हम खबरें प्राप्त करते हैं।
Question 3. संपादन के प्रमुख बिन्दु कौन-कौन से हैं?
Answer: संपादन के प्रमुख बिन्दु हैं:
• तथ्यात्मकता
• वस्तु परकता
• निष्पक्षता
• संतुलन और
• स्रोत
In simple words: संपादन में सच्चाई, वस्तुनिष्ठता, निष्पक्षता, संतुलन और स्रोत का ध्यान रखना जरूरी है।
Exam Tip: संपादन के सिद्धांतों को याद रखें, क्योंकि ये गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता के लिए आधार होते हैं।
Question 4. संवाददाता किसे कहते हैं?
Answer: समाचार पत्रों में स्थानीय घटनाओं का विवरण भेजने वाले व्यक्ति को संवाददाता कहते हैं।
In simple words: संवाददाता वह व्यक्ति होता है जो अखबारों के लिए स्थानीय खबरें भेजता है।
Exam Tip: संवाददाता की भूमिका और उसके कार्यक्षेत्र को समझना महत्वपूर्ण है।
2. सही जोड़े मिलाइए -
1. अंग्रेजी दैनिक - (A) स्टार प्लस
2. हिन्दी दैनिक - (B) इंडिया टुडे
3. समाचार लेखन का एक सूत्र - (C) इंडियन एक्सप्रेस
4. एक मनोरंजन टी.वी. चैनल - (D) हिंदुस्तान टाइम्स
5. अंग्रेजी-हिन्दी में छपनेवाली एक पत्रिका - (E) 5W + 1H
Answer:
(1-C) इंडियन एक्सप्रेस
(2-D) हिंदुस्तान टाइम्स
(3-E) 5W + 1H
(4-A) स्टार प्लस
(5-B) इंडिया टुडे
In simple words: This section asks you to pair up different types of media or journalism terms with their correct examples or definitions. Each number from 1 to 5 needs to be matched with the right letter from A to E.
Exam Tip: For matching questions, understand the characteristic of each item in both columns to correctly identify the pair. Focus on keywords and categories.
3. सही कथन के सामने ✓ तथा गलत कथन के सामने X बनाइए।
Question 1. जिसे कोई दबाना चाह रहा है वही समाचार है, शेष विज्ञापन। [√]
Answer: सही कथन है (✓)
In simple words: A statement that suggests true news is often about things someone tries to hide, while everything else is just an advertisement.
Exam Tip: Remember that actual news often exposes hidden facts, while promotional content is meant to persuade.
Question 2. सत्यता समाचार का जरूरी तत्त्व नहीं है। [ X ]
Answer: गलत कथन है (X)
In simple words: This statement says that being truthful is not an important part of news, which is incorrect. Truth is very important for news.
Exam Tip: Always prioritize accuracy in reporting; truthfulness is a core principle of good journalism.
Question 3. "संपादक के नाम पत्र' स्तंभ को समाचार पत्र का सेफ्टीवाल्व कहते हैं। [✓]
Answer: सही कथन है (✓)
In simple words: The section where readers write letters to the editor is called the newspaper's "safety valve." It allows people to share their views and issues.
Exam Tip: Recognize the role of "Letters to the Editor" as a platform for public opinion and feedback, helping to balance content.
Question 4. अग्रलेख लिखने का दायित्व संपादक का है। [✓]
Answer: सही कथन है (✓)
In simple words: The responsibility to write the editorial piece, which expresses the newspaper's official stance, belongs to the editor.
Exam Tip: Understand that editorials reflect the publication's viewpoint and are typically crafted by the editorial board or editor-in-chief.
Question 5. समाचार लेखन में सबसे आकर्षक उसका कलेवर है, आमुख नहीं। [ X ]
Answer: गलत कथन है (X)
In simple words: This statement says that the overall appearance of news is most appealing, not its introduction or lead. This is incorrect, as the introduction is crucial for attracting readers.
Exam Tip: The lead (आमुख) or introduction is vital in news writing; it draws the reader in and summarizes the main points quickly.
4. इसे भी ध्यान में रखें -
पत्रकारिता में प्रयुक्त होनेवाले कुछ प्रमुख शब्द और उनका अर्थ -
- पेज थ्री पत्रकारिता – फैशन, अमीरों की पार्टियों, महफिलों और जाने-जाने व्यक्तियों के निजी जीवन के बारे में।
- न्यूज पेरा – लेख या फीचर उस नवीनतम घटना का उल्लेख, जिसके कारण वह चर्चा में है।
- वॉचडॉग पत्रकारिता – सरकारी कामकाज, घपलों पर नजर रखकर उसे पर्दाफाश करनेवाली पत्रकारिता।
- प्रिंट मीडिया के प्रमुख माध्यम – समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें।
- टेलीविजन पत्रकारिता में प्रमुखता – दृश्य की
- रेडियो का मूल तत्त्व – आवाज-शब्द
- इंटरनेट पत्रकारिता का आरंभ – सन् 1983 ई. में
पत्रकारिता संबंधी लेखन – फीचर, आलेख तथा रिपोर्ट लेखन फीचर लेखन
(Feature Writing)
फीचर राइटिंग वह रचना है जो वास्तविक जानकारी पर आधारित होती है। संस्कृत में इसे 'रूपक' कहते हैं, पर यह शब्द हिंदी में ठीक नहीं बैठता। कुछ experts call a feature a relevant article written in an interesting way. According to Purushottdas Tandon and Dr. A.R. Dangwal, a feature is a lovely and detailed description of an event.
The scope of features is very wide. Various aspects of human life can be topics for different types of features, and public interest can also determine their subject matter. Features have been written on many diverse subjects like social, political, economic, scientific, religious, cultural, and mythological topics. Humorous and pictorial features have become especially popular.
In Hindi, 'feature' is a newly developed prose genre related to journalism. However, it is not as established a form as sketches, memoirs, or diaries. Scholars have categorized features into three types:
- वर्णनात्मक फीचर (Descriptive Feature)
- व्याख्यात्मक फीचर (Explanatory Feature)
- व्यंग्यात्मक फीचर (Satirical Feature)
Some scholars consider 'features' to be the soul of a newspaper. The truth is, there is a difference between news and a feature. News is brief, while a feature is detailed. News usually presents one aspect of an event, but a feature shows many aspects. Similarly, there are some similarities and differences between a 'feature' and an article. An article needs accurate facts and figures, whereas a feature is based on imagination and feelings. An article is connected to the mind, and a feature to the heart. A feature can be entertaining, but humor and jokes are generally avoided in articles.
विषय की दृष्टि से फीचर के कई प्रकार किए जा सकते हैं। यथा –
- समाचार फीचर (News Feature)
- घटनात्मक फीचर (Event-based Feature)
- व्यक्तिपरक फीचर (Personal Feature)
- सांस्कृतिक फीचर (Cultural Feature)
- विश्लेषण फीचर (Analysis Feature)
- लोकाभिरुचि संबंधी फीचर (Public Interest Feature)
- साहित्यिक फीचर (Literary Feature)
- विज्ञान फीचर (Science Feature)
- खेलकूद फीचर आदि। (Sports Feature, etc.)
The renowned media writer Dr. Preetadas has outlined the essential qualities of a feature writing style as follows:
- शब्द थोड़े पर अर्थ अधिक (Few words, but deep meaning)
- आसानी से समझ में आए। (Easy to understand)
- भाषा ओजपूर्ण, साहित्यिक पुट लिए हो। (Vigorous language with a literary touch)
- शब्द-वाक्य का अर्थानुसार शुद्ध प्रयोग (Correct use of words and sentences according to meaning)
- अपनापन (Originality/Personal touch)
- मुहावरे, कहावतों, सूक्तियों का प्रयोग। (Use of idioms, proverbs, and maxims)
- सरल तथा संक्षिप्त वाक्यरचना। (Simple and concise sentence structure)
- वाक्यगठन में एकरूपता। (Consistency in sentence formation)
- शब्दों-वाक्यों तथा विचारों की पुनरावृत्ति नहीं हो। (No repetition of words, sentences, and ideas)
- अनुच्छेदन तो बहुत छोटे हो न बहुत बड़े। (Paragraphs should be neither too short nor too long)
- हर अनुच्छेद के प्रथम वाक्य में ही महत्त्वपूर्ण नवीन विचार। (Each paragraph's first sentence should contain an important new idea)
- प्रत्येक अनुच्छेद और वाक्य में कथन-तारतम्य। (Logical flow between each paragraph and sentence)
- अनावश्यक कुछ भी नहीं – न भाव, न वाक्य। (Nothing unnecessary – neither emotion nor sentence)
- विषयानुरूप कथन का प्रकार (Style of narration suitable for the subject)
- दुरुह वाक्यावली या तकनीकी शब्दावली का प्रयोग कम से कम। (Minimal use of complex or technical vocabulary)
- अनुवादी भाषा का पूर्ण परित्याग। (Complete avoidance of translated language)
- भाव तथा भाषा के संस्कारों की रक्षा का ध्यान। (Attention to preserving the essence of emotion and linguistic traditions)
- ग्रामीण शब्दों का प्रयोग प्रसंगवश पर अधिक नहीं। (Use of rural words only when contextually appropriate, not excessively)
- शैली के परिमार्जन के लिए रचना का बार-बार पठन।। (Repeated reading of the work for refining the style)
The necessary qualities of feature writing style are simplicity, liveliness, clarity, emotional impact, and effectiveness. If humor is also included, it adds great value.
फीचर-लेखन संबंधी सतर्कताएँ –
- फीचर के कथ्य को पात्रों के माध्यम से बताना चाहिए। (The content of the feature should be conveyed through characters.)
- शीर्षक चयन में सजीवता का बोध हो और शीर्षक आकर्षक ज्ञानवर्धक हो। (The title selection should feel lively, and the title itself should be attractive and informative.)
- भाषा सरल – बोधगम्य हो। (The language should be simple and easy to understand.)
- फीचर का प्रारंभिक भाग-इंट्रो सीधा, सरल हो तथा पाठक को आकर्षित करे। (The initial part or intro of the feature should be direct, simple, and attract the reader.)
- इंट्रों में संपूर्ण सामग्री का सार आ जाना चाहिए। (The intro should contain the essence of the entire content.)
- लेखक के कथन का अंदाज ऐसा हो कि जिससे पाठक यह महसूस करें कि वे स्वयं देख और सुन रहे हैं। (The author's narration style should make readers feel they are personally seeing and hearing the events.)
- यह सूचनात्मक होने के साथ मनोरंजक भी हो। (It should be informative as well as entertaining.)
- फीचर के उद्देश्य के ईर्द-गिर्द ही सूचनाएँ, तथ्य, विचार गुंथे हों। (Information, facts, and ideas should be woven around the feature's main purpose.)
- एक अनुच्छेद में एक ही पहलू पर फोकस रहे। (Each paragraph should focus on a single aspect.)
- अनुच्छेद छोटे-छोटे हों और परस्पर सहज रूप से जुड़े हों। (Paragraphs should be short and flow smoothly into each other.)
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