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Detailed Chapter 07 परशुराम लक्ष्मण संवाद GSEB Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi Chapter 07 परशुराम लक्ष्मण संवाद GSEB Solutions PDF
GSEB Solutions Class 11 Hindi Chapter 7 परशुराम-लक्ष्मण संवाद
GSEB Std 11 Hindi Textbook Solutions परशुराम-लक्ष्मण संवाद
GSEB Std 11 Hindi Digest परशुराम-लक्ष्मण संवाद Textbook Questions and Answers
स्वाध्याय
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से चुनकर लिखिए :
Question 1. शिवजी के धनुष को किसने तोड़ा था ?
(क) लक्ष्मणजी ने
(ख) श्रीरामजी ने
(ग) भरतजी ने
(घ) शत्रुघ्नजी ने
Answer: (ख) श्रीरामजी ने
In simple words: श्रीराम ने भगवान शिव के धनुष को तोड़ दिया था।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर पाठ में दिए गए संदर्भ के आधार पर दिया गया है, जो घटना के मुख्य पात्र की पहचान करता है।
Question 2. 'आप बिना कारण ही क्रोध क्यों कर रहे हैं' यह वाक्य कौन बोलता है ?
(क) भरत
(ख) श्रीराम
(ग) लक्ष्मण
(घ) सीताजी
Answer: (ग) लक्ष्मण
In simple words: लक्ष्मण परशुराम से कहते हैं कि वे अनावश्यक रूप से क्रोधित हो रहे हैं।
🎯 Exam Tip: संवाद के पात्रों को पहचानना और उनके कथनों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. 'मेरा फरसा बड़ा भयानक है यह गर्भ के बच्चों का भी नाश करनेवाला है' यह वाक्य कौन बोलता है?
(क) श्रीराम
(ख) परशुराम
(ग) लक्ष्मण
(घ) सीताजी
Answer: (ख) परशुराम
In simple words: परशुराम अपनी शक्ति और क्रोध का प्रदर्शन करते हुए कहते हैं कि उनका फरसा अत्यंत विनाशकारी है।
🎯 Exam Tip: यह कथन परशुराम के क्रोधी स्वभाव और उनकी शक्ति का प्रतीक है, जो पाठ की केंद्रीय विशेषताओं में से एक है।
Question 4. परशुराम लक्ष्मणजी को कैसा बालक कहते है?
(क) कम बुद्धिवाला
(ख) कुबुद्धि और कुटिल
(ग) सुबुद्धि-सुशील
(घ) सुबुद्धिवाला
Answer: (ख) कुबुद्धि और कुटिल
In simple words: परशुराम लक्ष्मण को मंदबुद्धि और धूर्त बालक मानते हैं क्योंकि वह उनका अनादर कर रहे थे।
🎯 Exam Tip: परशुराम के लक्ष्मण के प्रति व्यक्त किए गए विचार उनके क्रोध और लक्ष्मण के व्यंग्यात्मक जवाबों का परिणाम थे।
2. एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :
Question 1. शिवजी का धनुष तोड़नेवाले को परशुराम किसके समान अपना शत्रु कहते हैं ?
Answer: शिवजी का धनुष तोड़ने वाले को परशुराम सहस्रबाहु के बराबर अपना शत्रु घोषित करते हैं।
In simple words: परशुराम, शिव के धनुष तोड़ने वाले को अपने कट्टर दुश्मन सहस्रबाहु जैसा मानते हैं।
🎯 Exam Tip: सहस्रबाहु का संदर्भ परशुराम के अतीत के संघर्षों और उनके भयंकर क्रोध को दर्शाता है।
Question 2. परशुराम का व्यक्तित्व कैसा है?
Answer: परशुराम का व्यक्तित्व अत्यंत भयावह और उग्र है।
In simple words: परशुराम का स्वभाव बहुत ही क्रोधी और प्रभावशाली है।
🎯 Exam Tip: उनके व्यक्तित्व का वर्णन उनकी प्रचंड क्रोधी प्रवृत्ति और योद्धा के रूप को उजागर करता है।
Question 3. सहस्रबाहु की भुजाओं को काटनेवाले अस्त्र का नाम क्या था ?
Answer: सहस्रबाहु की भुजाओं को काटने वाले अस्त्र का नाम परशु (फरसा) था।
In simple words: परशुराम ने अपने फरसे से सहस्रबाहु की भुजाएँ काटी थीं।
🎯 Exam Tip: यह तथ्य परशुराम के प्रमुख हथियार और उनकी शक्ति को दर्शाता है।
Question 4. परशुराम के क्रोधरूपी अग्नि को बढ़ते देखकर कौन शीतल वचन बोलता हैं ?
Answer: परशुराम के क्रोध की अग्नि को बढ़ता देख श्रीरामचंद्रजी शांत और मधुर वचन बोलते हैं। वे परशुरामजी से कहते हैं, "हे नाथ, शंकरजी का धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास (सेवक) होगा।"
In simple words: श्रीराम परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए विनम्रतापूर्वक बोलते हैं कि धनुष तोड़ने वाला उनका ही कोई दास होगा।
🎯 Exam Tip: श्रीराम का शांत स्वभाव और विनम्रता उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएं हैं, जो इस स्थिति में उनके आचरण में स्पष्ट होती हैं।
3. दो-दो वाक्यों में उत्तर दीजिए :
Question 1. परशुराम का फरसा कैसा है और वह किसका नाश करनेवाला है?
Answer: परशुराम का फरसा बहुत विकराल है। यह इतना भयानक है कि गर्भ में पल रहे बच्चों को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है।
In simple words: परशुराम का फरसा अत्यंत शक्तिशाली और विनाशकारी है, जो गर्भस्थ शिशुओं का भी संहार कर सकता है।
🎯 Exam Tip: फरसे के इस वर्णन से परशुराम के क्रोध की चरम सीमा और उनकी निर्दयता का पता चलता है।
Question 2. श्रीरामजी परशुराम को कैसा मुनि बताते हैं?
Answer: (टिप्पणी : इस प्रश्न का उत्तर पद्यांश में नहीं है।)
In simple words: पाठ्य सामग्री में श्रीराम द्वारा परशुराम के मुनि रूप का सीधा वर्णन उपलब्ध नहीं है।
🎯 Exam Tip: यदि पाठ में प्रत्यक्ष उत्तर न हो, तो यह इंगित करना महत्वपूर्ण है कि जानकारी अनुपलब्ध है।
Question 3. लक्ष्मणजी के कठोर बचन सुनकर परशुरामजी अपने हाथ क्या उठा लेते हैं ?
Answer: लक्ष्मणजी के कटु वचनों को सुनकर परशुराम अपने हाथ में अपना फरसा उठा लेते हैं।
In simple words: लक्ष्मण की तीखी बातों से क्रोधित होकर परशुराम अपना फरसा पकड़ लेते हैं।
🎯 Exam Tip: यह दृश्य परशुराम के शीघ्र क्रोधित होने वाले स्वभाव और उनकी तात्कालिक प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
4. पाँच-छः पंक्तियों में उत्तर लिखिए:
Question 1. परशुरामजी का क्रोध शांत करने के लिए श्रीरामजी ने क्या कहा ?
Answer: अपने प्रिय शिवधनुष के टूटने पर परशुरामजी का क्रोध अत्यधिक बढ़ गया था। वे धनुष तोड़ने वाले को अपना परम शत्रु मानकर उसे कठोर दंड देने को तैयार थे। उन्होंने श्रीराम से उस व्यक्ति का नाम पूछा। श्रीराम ने परशुरामजी को शांत करने के उद्देश्य से कहा, "आप इतनी क्रोधित क्यों हो रहे हैं? शंकरजी का धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास या सेवक होगा। आपका क्या आदेश है? आप मुझसे क्यों नहीं कहते? उस दास पर इतना क्रोध करने की क्या आवश्यकता है?"
In simple words: श्रीराम ने परशुराम को शांत करने के लिए विनम्रतापूर्वक कहा कि धनुष तोड़ने वाला उनका ही कोई सेवक होगा और उनसे पूछा कि वे इतनी क्रोध क्यों कर रहे हैं।
🎯 Exam Tip: श्रीराम के कथन उनकी विनम्रता, समस्या-समाधान की इच्छा और क्रोध को शांत करने की क्षमता को दर्शाते हैं।
Question 2. परशुरामजी का क्रोध देखकर लक्ष्मणजी क्या कहते हैं ?
Answer: परशुरामजी का क्रोध देखकर लक्ष्मणजी कहते हैं कि आप हमें बार-बार अपना फरसा दिखाकर क्यों डरा रहे हैं? क्या आप केवल फूंक मारकर पहाड़ को उड़ाना चाहते हैं? यहां कोई कुम्हड़े का कोमल फल नहीं है जो तर्जनी उंगली दिखाने मात्र से मुरझा जाएगा। मुझे भी आप पर बहुत क्रोध आ रहा है, लेकिन आप भृगुपुत्र और ब्राह्मण हैं, इसलिए मैंने अपने क्रोध पर नियंत्रण रखा है। हमारे कुल में देवता, ब्राह्मण, संत और गाय पर हथियार नहीं उठाया जाता। इन्हें मारने से पाप लगता है और अपयश मिलता है। इसलिए आप हमें मारेंगे तो भी हम आपके चरण पकड़ेंगे। पर मैं यह अवश्य कहूंगा कि आपको ये हथियार धारण करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपके शब्द ही करोड़ों वज्र के समान हैं।
In simple words: लक्ष्मण परशुराम को उनके फरसे से डराने का उपहास करते हैं, कहते हैं कि वे ब्राह्मण होने के कारण उन पर शस्त्र नहीं उठाएंगे, और उनके शब्दों को ही वज्र के समान शक्तिशाली बताते हैं।
🎯 Exam Tip: लक्ष्मण का कथन उनकी निडरता, व्यंग्यात्मकता और ब्राह्मणों के प्रति पारंपरिक सम्मान को उजागर करता है, जबकि वे परशुराम के क्रोध को चुनौती देते हैं।
5. मानक हिन्दी रूप लिखिए:
Question 1.
1. संभु
2. छति
3. कोही
4. पहारू
5. गाई
6. गारी
7. सोभा
Answer:
1. संभु - शंभु
2. छति - क्षति
3. कोही - क्रोधी
4. पहारू - पहाड़
5. गाई - गाय
6. गारी - गाली
7. सोभा - शोभा
In simple words: यह शब्दों के प्राचीन रूपों को उनके आधुनिक, मानक हिंदी रूपों में परिवर्तित करता है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में शब्दों के मानक रूप को पहचानना और सही वर्तनी लिखना आवश्यक है।
6. निम्नलिखित चौपाई का भावार्थ समझाइए :
Question 1. 'भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी। सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरे कुल इन्ह पर न सुराई ।'
Answer: जब परशुरामजी क्रोध में अपने फरसे और भुजाओं की शक्ति का बहुत अधिक बखान करते हैं और लक्ष्मण को अपने माता-पिता के शोक का कारण न बनने की चेतावनी देते हैं, तब लक्ष्मणजी उन्हें उत्तर देते हैं: "हे मुनि, मैं आपको भृगुवंशी समझकर और आपका यज्ञोपवीत देखकर (अर्थात् आपको ब्राह्मण जानकर) अपने क्रोध को नियंत्रित कर रहा हूँ और आप जो कुछ भी कह रहे हैं, उसे सहन कर रहा हूँ। हमारे कुल की यह परंपरा है कि देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्तों और गायों पर वीरता नहीं दिखाई जाती।"
In simple words: लक्ष्मण परशुराम को भृगुवंशी और ब्राह्मण मानकर अपने क्रोध को शांत रखते हैं और कहते हैं कि उनके कुल में इन पर शस्त्र उठाना वर्जित है।
🎯 Exam Tip: इस चौपाई का भावार्थ लक्ष्मण के संयम, ब्राह्मणों के प्रति सम्मान और अपने कुल की मर्यादा के पालन को दर्शाता है।
GSEB Solutions Class 11 Hindi परशुराम-लक्ष्मण संवाद Important Questions and Answers
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाँच-छः वाक्यों में लिखिए :
Question 1. परशुरामजी को लक्ष्मण पर क्रोध क्यों आया ?
Answer: लक्ष्मण ने परशुरामजी से कहा कि बचपन में उन्होंने खेल-खेल में कई धनुष तोड़े थे, तब तो परशुराम को कभी इतना क्रोध नहीं आया। फिर इस धनुष में ऐसी क्या विशेष बात थी कि वे अब अपने आपे से बाहर हो रहे हैं। सभी धनुष एक जैसे ही होते हैं। राम ने इस पुराने धनुष को तोड़ा तो इसमें कौन सा बड़ा नुकसान हो गया? लक्ष्मण ने आगे कहा कि राम ने उसे तोड़ा नहीं, बल्कि वह उनके छूने मात्र से टूट गया था। शिव-धनुष को सामान्य धनुष बताकर और इस प्रकार उपहास करके लक्ष्मण ने परशुराम को अत्यधिक क्रोधित कर दिया।
In simple words: लक्ष्मण ने शिवधनुष को सामान्य धनुष बताकर और श्रीराम के उसे सिर्फ छूने से टूटने की बात कहकर परशुराम के क्रोध को भड़काया।
🎯 Exam Tip: लक्ष्मण के व्यंग्यात्मक वचन और धनुष के प्रति उनके हल्के रवैये ने परशुराम के क्रोध को चरम सीमा पर पहुँचा दिया था, जो इस प्रश्न का मुख्य उत्तर है।
Question 2. परशुरामजी ने मुनि विश्वामित्र से क्या कहा?
Answer: परशुरामजी ने मुनि विश्वामित्र से कहा कि यह बालक (लक्ष्मण) मंदबुद्धि और दुष्ट है। इस शरारती बालक के सिर पर मृत्यु नाच रही है। यह अपने कुल का नाश करने वाला है। यह सूर्यवंश और चंद्रवंश दोनों को कलंकित करने वाला है। यह पूर्णतः निरंकुश और नासमझ है। मैं जोर देकर कह रहा हूँ कि अगर इसने मेरी बात नहीं मानी तो अगले ही पल यह काल के मुँह में समा जाएगा और इसका दोषी मैं नहीं हूँगा। यदि आप इसे बचाना चाहते हैं तो मेरे बल, प्रताप और क्रोध के बारे में बताकर इसे नियंत्रित कीजिए।
In simple words: परशुराम ने विश्वामित्र से कहा कि लक्ष्मण एक मूर्ख और अनियंत्रित बालक है जो अपने कुल का नाश करेगा, और उन्होंने विश्वामित्र से उसे रोकने के लिए अपनी शक्ति और क्रोध के बारे में बताने को कहा।
🎯 Exam Tip: परशुराम का विश्वामित्र से किया गया कथन लक्ष्मण के प्रति उनकी तीव्र नाराजगी और उसे शांत करने की उनकी हताशा को प्रकट करता है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
Question 1. लक्ष्मण ने शिवधनुष को किसके समान बताया?
Answer: लक्ष्मण ने शिवधनुष को उस धनुष के समान बताया जिसे बच्चे खेल में तोड़ते हैं।
In simple words: लक्ष्मण ने शिवधनुष को एक साधारण खिलौने जैसा धनुष कहा।
🎯 Exam Tip: यह उत्तर लक्ष्मण के व्यंग्य और परशुराम के क्रोध को भड़काने वाले उनके स्वभाव को दर्शाता है।
Question 2. लक्ष्मण ने राम को निरपराधी क्यों बताया?
Answer: लक्ष्मण ने राम को निरपराधी बताया क्योंकि शिवधनुष बिना उनके तोड़े केवल उनके छूने से ही टूट गया था।
In simple words: लक्ष्मण ने कहा कि राम निर्दोष हैं क्योंकि धनुष उनके छूते ही टूट गया था, उन्होंने उसे तोड़ा नहीं था।
🎯 Exam Tip: यह कथन श्रीराम की निरपराधता पर बल देता है और धनुष टूटने की घटना को एक आकस्मिक घटना के रूप में प्रस्तुत करता है।
Question 3. कुम्हड़े की बतिया की क्या विशेषता बताई जाती है?
Answer: कुम्हड़े की बतिया की यह विशेषता बताई जाती है कि वह तर्जनी उँगली दिखाने पर मुरझा जाती है।
In simple words: कुम्हड़े की बतिया बहुत नाजुक होती है और तर्जनी उँगली दिखाने मात्र से मुरझा जाती है।
🎯 Exam Tip: यह उपमा लक्ष्मण द्वारा अपनी निडरता और परशुराम के क्रोध के प्रति अपनी उपेक्षा को व्यक्त करने के लिए प्रयोग की गई थी।
समानार्थी शब्द लिखिए :
• दास = सेवक
• रिपु = शत्रु
• ममता = मोह, प्रेम
• सकल = सारा
• नयन = नेत्र
• भूप = राजा
• मृदु = कोमल
• हरिजन = ईश्वरभक्त
• गिरा = वाणी
• कायर = भीरु, डरपोक
• अभिमान = घमंड
• भानु = सूर्य
विरुद्धार्थी शब्द लिखिए :
• दास × स्वामी
• अरि × मित्र
• अपमान × सम्मान
• सम × विषम
• मृदु × कठोर
• कायर × वीर
• देव × दानव
• सुर × असुर
शब्दों के मानक शब्द रूप लिखिए :
• परसु - परशु
• लखन - लक्ष्मण
• बिस्व - विश्व
• इहाँ - यहाँ
• कीरति - कीर्ति
• बंस - वंश
• सुजसु - सुयश
• सूर - शूर
शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए :
• संबंधित - इत
• लडाई - ई
• विदित - इत
• दोही - ई
• घातक - क
• अपमान - मान
• बहादूरी - ई
• प्रचारित - इत
• भृगुवंशी - ई
शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए :
• सुकीर्ति - सु
• दुसद - दु
• सुयश - सु
• अकारण - अ
• कुबुद्धि - कु
• प्रताप - प्र
• विनम्र - वि
• दुबार - दु
• विख्यात - वि
• महामुनि - महा
• अभिमान - अभि
परशुराम-लक्ष्मण संवाद Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
परशुराम-लक्ष्मण संवाद तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस' के बालकांड से लिया गया है। सीता-स्वयंवर के अवसर पर रामचंद्र ने शंकरजी का धनुष तोड़ा था। इस घटना से परशुराम के क्रोध की सीमा नहीं रही। वे राम से कहते हैं कि जिसने इस धनुष को तोड़ा है, वह मेरा दुश्मन है। वह समाज से बाहर आ जाए, वरना सभी राजा मारे जाएंगे। इस पर लक्ष्मण परशुराम से खरी-खरी बातें करते हैं। इस पद्यांश में परशुराम-लक्ष्मण संवाद से संबंधित चौपाइयाँ, दोहे दिए गए हैं।
महाकाव्यांश (चौपाइयों) का सरल अर्थ :
नाथ शंभुधनु ....... मुनि कोही।
श्री रामचंद्र ने परशुरामजी से कहा, "हे नाथ! शंकरजी का धनुष तोड़ने वाला आपका कोई एक दास (सेवक) ही होगा। आपका क्या आदेश है? आप मुझसे क्यों नहीं कहते?" यह सुनकर क्रोधी मुनि रुष्ट होकर बोले
सेवकु सो जो ..... रिपु मोरा।
परशुराम ने कहा, “सेवक तो वह है, जो सेवा का काम करे। शत्रु का काम करके तो लड़ाई ही करनी चाहिए। हे राम! सुनो, जिसने शंकरजी का यह धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान मेरा शत्रु है।"
सो बिलगाउ ........ अपमाने।
“(जिसने यह धनुष तोड़ा हो) वह इस समाज से बाहर आ जाए। नहीं तो सभी राजागण मारे जाएंगे।” मुनि परशुराम के ये वचन सुनकर लक्ष्मण मुस्काए। उन्होंने परशुरामजी का अपमान करते हुए कहा
बहु धनुहीं....... भृगुकुलकेतू।
"हे गोस्वामी। बचपन में हमने अनेक धनुहियाँ तोड़ी थीं, पर आपने कभी इस तरह क्रोध नहीं किया था। इस धनुष पर आपको इतनी ममता भला क्यों है?" लक्ष्मण के ये वचन सुनकर भृगुवंश की ध्वजा स्वरूप परशुरामजी ने कुपित होकर कहा
दो.-रे नप बालक काल........ सकल संसार।
"अरे राजपुत्र, काल के वश होने से तुझे बोलते समय कुछ होश नहीं है। शंकरजी का यह धनुष सारे संसार में विख्यात है। इस धनुष को तुम धनुही के समान मानते हो।"
लखन कहा ... नयन के भोरे।
लक्ष्मनजी ने हंसकर कहा, "हे देव! सुनिए। हमारी समझ से तो सभी धनुष एक-से ही हैं। पुराने धनुष को तोड़ने में क्या हानि या क्या लाभ? श्री रामचंद्रजी ने इस धनुष को भ्रम में नए धनुष के रूप में देखा था।
छुअत टूट ......... सुभाउ न मोरा।
“देव! यह धनुष तो छूते ही टूट गया था। इसमें रघुनाथजी का कोई दोष नहीं है। हे मुनि आप अकारण गुस्सा क्यों होते हैं!” यह सुनकर परशुराम ने अपने फरसे की ओर देखकर कहा, "अरे दुष्ट तूने मेरे स्वभाव के बारे में सुना नहीं है।"
बालकु बोलि...... छत्रियकुल द्रोही।
परशुराम ने लक्ष्मण से कहा, "बालक मानकर मैं तुम्हारा वध नहीं कर रहा हूँ। हे मूर्ख, क्या तू मुझे निरा मुनि समझ रहा है? मैं बालब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हूँ। क्षत्रिय कुल के शत्रु के रूप में तो मैं सारे संसार में विख्यात हूं।"
भुजबल भूमि .... महीपकुमारा।
परशुराम कहते हैं, "अपनी भुजाओं के बल से मैंने पृथ्वी को राजाओं से रहित कर दिया और अनेक बार उस पृथ्वी को ब्राह्मणों को दे डाला। हे राजकुमार! सहस्रबाहु की भुजाओं को काटने वाले मेरे इस फरसे को देखो!”
दो०- मातु पितहि ........ अति घोर ।
“हे राजा के बालक। तू अपने माता-पिता को शोक करने के लिए बाध्य मत कर! मेरा फरसा बहुत विकराल है। यह गर्भ के बच्चों को भी नष्ट कर डालता है।"
बिहसि लखनु ....... फूकि पहारू।
लक्ष्मणजी ने हंसकर विनम्र भाव से कहा, “अरे, मुनीश्वर आप अपने आप को बहुत बड़ा योद्धा समझते हैं। बार-बार मुझे कुल्हाड़ी दिखा रहे हैं। आप फूंक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हैं।"
इहाँ कुम्हड़ ....... अभिमाना।
"यहाँ कोई कुम्हड़े का छोटा कच्चा फल (बतिया) नहीं है, जो तर्जनी उँगली को देखकर मर जाएगा। कुल्हाड़ी और धनुषबाण देखकर ही मैंने कुछ अभिमान सहित कहा था।”
भगुसुत समुझि ....... पर न सुराई।
लक्ष्मणजी कहते हैं, "आपको भृगु का पुत्र समझकर और आपका यज्ञोपवीत देखकर मैं आप जो कुछ कहते जा रहे हैं, उसे अपने क्रोध पर नियंत्रण रखकर सहता जा रहा हूँ। देवता, ब्राह्मण भगवान के भक्त और गाय - इन पर हमारे कुल में वीरता नहीं दिखाई जाती।”
बधे पापु ...... बान कुठारा।
"क्योंकि इनका वध करने से पाप लगता है और इनसे हार जाने पर अपयश होता है। इसलिए आप मुझे मारें, तो भी मुझे आपके पैर पड़ना चाहिए। आपका एक-एक वचन करोड़ों वज्र के समान है। धनुषबाण और फरसा तो आप व्यर्थ ही धारण करते हैं।"
दो-जो बिलोकि........ गिरा गभीर।
"इन्हें (धनुषबाण और फरसे को) देखकर मैंने कुछ अनुचित कहा हो, तो उसे, हे धीर महामुनि! क्षमा कीजिए।" लक्ष्मणजी की यह बात सुनकर भृगुवंशमनि परशुरामजी ने क्रोध में भरे हुए कहा
कौसिक सुनहु ....... अबुध असंकू ।
परशुराम ने कहा, "हे विश्वामित्र! सुनिए! यह बालक बहुत कुबुद्धि और कुटिल है। काल के वश होकर यह अपने कुल का घातक बन रहा है। यह सूर्यवंशरूपी पूर्ण चंद्र का कलंक है। यह एकदम उदंड़, मूर्ख और निडर है।"
काल कवलु ...... रोषु हमारा।
"अभी क्षणभर में यह काल का ग्रास बन जाएगा। मैं पुकारकर कहे देता हूँ कि फिर मुझे दोष मत देना। यदि तुम इसे बचाना चाहते हो, तो हमारा प्रताप, बल और क्रोध बतलाकर इसे समझाकर मना कर दो।”
लखन कहेउ ....... भाँति बहु बरनी।
लक्ष्मणजी ने कहा, "हे मुनि आपका सुयश, आपसे अधिक दूसरा कौन बखान कर सकता है। आपने स्वयं अपने मुंह से अपनी करनी का बखान अनेक बार अनेक प्रकार से किया है।
नहिं संतोषु ...... पावहु सोभा।
लक्ष्मणजी कहते हैं कि यदि इतने पर भी आपको संतोष न हुआ हो, तो फिर कुछ और कह डालिए। अपना क्रोध रोककर असह्य दुःख मत सहिए। आप वीरता का व्रत धारण करनेवाले, धैर्यवान और क्षोभ रहित हैं। आप गाली देते हुए शोभा नहीं पाते हैं।
दो० – सूर समर ....... कथहिं प्रतापु।
"शूरवीर तो युद्ध में करनी (बहादुरी का कार्य) करते हैं। वे अपने बारे में कुछ कहकर अपने को प्रचारित नहीं करते। शत्रु को युद्ध में मौजूद देखकर कायर ही अपने प्रताप की डींग हाँका करते हैं।"
परशुराम-लक्ष्मण संवाद शब्दार्थ :
• शंभुधनु - शंकरजी का धनुष।
• भंजनिहारा - तोड़ने वाला।
• केउ - कोई।
• दास - सामान्य जन, सेवक।
• आयस - आदेश।
• किन - क्यों।
• रिसाइ - क्रोध से ।
• अरि - दुश्मन ।
• लराई - लड़ाई।
• तोरा - तोड़ा है।
• रिपु - दुश्मन ।
• बिलगाउ - अलग हो जाए।
• बिहाइ - छोड़कर।
• जैहहि - जाएंगे।
• लखन - लक्ष्मण।
• परसु - फरसा।
• अपमाने - अपमान करते हुए।
• धनुहीं - छोटा धनुष।
• लरिकाई - बचपन में।
• असि - ऐसा ।
• हेतू - कारण से।
• भृगुकुल केतू - भृगु के कुल के शीर्ष व्यक्ति।
• काल बस - मृत्यु के वशीभूत होना।
• संभार - संभालकर।
• तिपुरारि - महादेव, शंकर।
• बिदित - जाना हुआ।
• छति - हानि ।
• जून - पुराना।
• दोसू - दोष ।
• बिनु काज - निरर्थक।
• सठ - दुष्ट।
• सुभाउ - स्वभाव।
• बोलि - समझकर, मानकर।
• बधउँ नहिं - वध नहीं करता है।
• मोही - मुझे।
• द्रोही - दुश्मन ।
• भूप - राजा।
• भुजबल - भुजाओं की शक्ति से।
• महिदेवन्ह - पृथ्वी के देवताओं ने (ब्राह्मणों ने)। महीसकिसोर - राजा का पुत्र।
• बानी - वाणी।
• भटमानी - अहंकारी, वीर।
• कुठारू - कुल्हाड़ी।
• पहारू - पहाड़।
• कुम्हड़ - कुम्हड़ा।
• बतिया - नाजुक फल।
• तरजनी - अंगूठे और मध्यमा के बीच की उँगली।
• सरासन - धनुषबाण।
• जनेउ - जनेऊ ।
• बिलोकी - देखकर।
• महिसुर - ब्राह्मण।
• हरिजन - भगवान के भक्त।
• गाई - गाय। पापु - पाप।
• कुलिस - वज्र, कुठार।
• कुठारा - गहरी चोट।
• छमहुँ - क्षमा करें।
• धीर - धीरज रखने वाले।
• गिरौं- वाणी, बोली।
• कुल घालकु - अपने कुल के लिए घातक।
• कलंकू - कलंक जैसा।
• निपट - बिलकुल ।
• अबुध - बेवकूफ ।
• असंकू - निडर, ढीठ।
• काल कवलु - काल का आहार होना, मृत्यु को प्राप्त होना।
• खोरि - दोष ।
• प्रतापु - प्रताप।
• सुजसु - सुकीर्ति।
• दुसह दुख - जो दुःख सहा न जा सके।
• सहहू - सहन कर रहा हूँ।
• गारी - गाली।
• वीरवती - वीरता को धारण करने वाले।
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GSEB Solutions Class 11 Hindi Chapter 07 परशुराम लक्ष्मण संवाद
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