GSEB Class 11 Hindi Solutions Chapter 2 कट गए पेड़ पर देसिन भई छाँव रे

NCERT Solutions for Class 11 Hindi: Chapter 02 कट गए पेड़ पर देसिन भई छाँव रे

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GSEB Solutions Class 11 Hindi पूरक वाचन Chapter 2 कट गए पेड़ पर देसिन भई छाँव रे

GSEB Std 11 Hindi Textbook Solutions Purak Vachan Chapter 2 कट गए पेड़ पर देसिन भई छाँव रे

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

 

Question 1. पेड़ों के कटने का गाँवों और शहरों पर क्या असर हुआ है?
Answer: पेड़ों के अत्यधिक कटान के कारण, गाँवों की हरी-भरी छाया एक स्वप्न में बदल गई है, मानो वह किसी परदेसी की तरह दूर देश चली गई हो। वृक्षों के नष्ट होने से शहरी क्षेत्र अब गाँवों तक फैल चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप गाँवों का आकार सिकुड़ता जा रहा है। इस प्रकार, वृक्षों की कटाई ने गाँवों और शहरों दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
In simple words: वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से गाँवों की हरियाली खत्म हो गई है, शहर फैल रहे हैं, और गाँवों का स्वरूप बदल रहा है, जिससे दोनों ही प्रभावित हुए हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में पेड़ों की कटाई के सामाजिक और भौगोलिक प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. मनुष्य ने मौसम के प्रति किस तरह निर्दयता दिखाई है?
Answer: मनुष्य ने वृक्षों का बेरहमी से कटान करके मौसम के प्रति अपनी निर्दयता प्रदर्शित की है। जबकि यह सर्वविदित है कि हरे-भरे वृक्ष ही पर्याप्त वर्षा का कारण बनते हैं, और उनकी अनुपस्थिति में सूखे का सामना करना पड़ सकता है, फिर भी इंसान ने मौसम की इस पीड़ा को अनदेखा किया है। इस प्रकार, प्रकृति की उपेक्षा करके मानव ने मौसम के प्रति संवेदनहीनता दिखाई है।
In simple words: मनुष्य बेरहमी से पेड़ काट रहा है, यह जानते हुए भी कि पेड़ वर्षा लाते हैं और पेड़ों के बिना सूखा पड़ेगा, जिससे वह मौसम की पीड़ा को नजरअंदाज कर रहा है।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न प्रकृति के प्रति मानवीय असंवेदनशीलता को उजागर करता है; उत्तर में कारण और परिणाम दोनों का उल्लेख करें।

 

Question 3. पेड़ों की कटाई का पंछियों पर क्या प्रभाव हुआ है?
Answer: पक्षी स्वाभाविक रूप से पेड़ों पर ही अपने घोंसले बनाते हैं। वृक्षों के कटने से उनके आश्रयस्थल पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं, जिससे उन्हें अपने घोंसले बनाने के लिए कोई स्थान नहीं मिल पा रहा है। उदाहरण के तौर पर, कौआ भी छाया की तलाश में इधर-उधर भटकता फिरता है। इस प्रकार, वृक्षों के अंधाधुंध कटान का पक्षी जीवन पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
In simple words: पेड़ों के कटने से पक्षियों के घर उजड़ गए हैं, और उन्हें रहने या छाया ढूंढने के लिए जगह नहीं मिल रही है, जिससे उनका जीवन मुश्किल हो गया है।

🎯 Exam Tip: पक्षी जीवन पर पेड़ों की कटाई के प्रत्यक्ष प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करें, विशेषकर उनके निवास स्थान के विनाश पर।

 

Question 4. सावन के बारे में कवि क्या सोचकर दुःखी हैं?
Answer: कवि इस बात से दुःखी हैं कि सावन का वास्तविक आनंद तभी आता है जब वर्षा होती है और वनस्पतियाँ खिल उठती हैं। परंतु, पेड़ों के लगातार कटने से वर्षा ने जैसे रूठना सीख लिया है। अब चंपा की मनमोहक सुगंध केवल एक सपना बनकर रह गई है और बेला के पौधों पर फूल नहीं आते। इसके अतिरिक्त, पेड़ों की अनुपस्थिति के कारण अब झूले भी नहीं डाले जा सकते। इस तरह, वर्षा की कमी के कारण सावन के पारंपरिक सौंदर्य और उल्लास के अभाव को देखकर कवि व्यथित हैं।
In simple words: कवि दुःखी हैं क्योंकि पेड़ों के कटने से वर्षा कम हो गई है, सावन की खुशबू, फूल और झूले सब गायब हो गए हैं, जिससे सावन का असली मज़ा नहीं रहा।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में कवि की भावनाओं को स्पष्ट करें, जिसमें सावन के पारंपरिक सौंदर्य और वर्षा की कमी के बीच संबंध दर्शाया गया हो।

 

Question 5. आखिरी एक दाँव कौन-सा बचा है?
Answer: कवि के अनुसार, वर्तमान स्थिति में जब शहर गाँवों की ओर तेजी से विस्तार कर रहे हैं और वृक्षों का व्यापक विनाश हो चुका है, तब गाँवों को बचाने और उनके पर्यावरण को हरा-भरा रखने का केवल एक ही अंतिम समाधान शेष है। वह समाधान यह है कि सभी लोग अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें। इस एकमात्र उपाय से गाँवों का वातावरण पुनः पहले जैसा सुखमय और आनंददायक बन पाएगा।
In simple words: कवि कहते हैं कि पेड़ों के विनाश और शहरों के फैलाव से गाँवों को बचाने का आखिरी तरीका सिर्फ ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना है, जिससे गाँव फिर से सुंदर और सुखमय बन सकें।

🎯 Exam Tip: अंतिम उपाय के रूप में वृक्षारोपण के महत्व को रेखांकित करें और इसके सकारात्मक परिणामों का वर्णन करें।

कट गए पेड़ पर देसिन भई छाँव रे Summary in Hindi

विषय-प्रवेश :
इस कविता में अंधाधुंध रूप से वृक्षों के काटे जाने के परिणाम स्वरूप होनेवाले दुष्परिणामों पर मार्मिक और दिल को छू लेनेवाली व्यथा का वर्णन किया गया है। कविता में आहवान किया गया है कि अब केवल एक ही उपाय बचा है कि सब लोग पेड़ लगाएं।

कविता का सरल अर्थ :
कवि कहता है कि गांवों के हरे-भरे सारे पेड़ कट गए हैं। इसके कारण पेड़ों की छाया सपना हो गई है। वह किसी परदेसिन की तरह दूर देश चली गई है। पेड़ों के कटने से शहर अब गांवों तक पसर गए हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि गाँव छोटे होते जा रहे हैं।

कवि कहता है कि मनुष्य इतना निर्दय हो गया है कि वह बेरहमी से पेड़ों की कटाई कर रहा है। उसे मौसम की पीड़ा की भी चिंता नहीं है। अर्थात् उसे मालूम है कि पेड़ों के कारण ही अच्छी बरसात होती है। पेड़ कट जाएँगे, तो सूखे का सामना करना पड़ेगा। फिर भी उसे मौसम पर तरस नहीं आ रहा है। पेड़ों के कट जाने से पंछियों के आशियाने उजड़ गए हैं। बेचारे पंछी अपने घोंसले भला कहाँ बनाएं? कौआ बेहाल होकर इधर-उधर छाया ढूंढ़ता फिरता है।

पेड़ों के कट जाने से वर्षा न होने से वनस्पतियों पर बुरा असर हुआ है। अब चंपा की सुगंध सपना हो गई है। बेला के पौधों में फूल ही नहीं आते। हम तो यह भी भूल गए हैं कि कभी सावन में झूले भी पड़ते थे, क्योंकि झूले तो बड़े-बड़े पेड़ों पर ही पड़ते थे। अब गाँवों में पेड़ ही नहीं रहे, तो झूले पड़े किस पर!

कवि कहते हैं कि शहर गाँवों की ओर फैलते जा रहे हैं। पेड़ों का विनाश हो गया है। अब तो केवल एक ही आखिरी उपाय बच गया है गाँवों को बचाने और परिसर को हराभरा रखने का - सब लोग पेड़ लगाएं, पेड़ लगाएं। इससे सब कुछ फिर पहले जैसा सुखमय हो जाएगा, सुहाना हो जाएगा।

कट गए पेड़ पर देसिन भई छाँव रे शब्दार्थ :
• परदेसिन - जो (स्त्री) परदेस में चली गई हो।
• भई - हुई।
• फैलना - प्रसार होना।
• सिमटना - सिकुड़ते जाना।
• मनुख - मनुष्य।
• पीड़- पीड़ा।
• पंछी - चिड़िया।
• नीड़ - घोंसला।
• कागा - कौआ।
• चंपा - सुगंधित सुनहले रंग का फूल।
• बेला - सुगंधित सफेद रंग का फूल।
• भूले - भूल गए।
• दीव - तरीका।

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