Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Hindi Chapter 11 नीति के दोहे
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स्वाध्याय
1. निम्नलिखित दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Question 1. बिना पानी के सब कैसा होता है ?
(क) भयानक
(ग) व्याकुल
(घ) सुखा
Answer: (घ) सूना होता है।
जल के बिना सब कुछ वीरान हो जाता है।
In simple words: पानी के बिना, कोई भी वस्तु या जीवन संभव नहीं है, सब कुछ खाली और बेजान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्न रहीम के दोहों के मूल अर्थ को समझने की आपकी क्षमता का परीक्षण करते हैं।
Question 2. वसंतऋतु का नाता किसके साथ है?
(क) मोर
(ख) आम
(ग) पिक
(घ) पपीहा
Answer: (ग) पिक
वसंत का संबंध कोयल (पिक) से है।
In simple words: वसंत ऋतु में कोयल मधुर गीत गाती है, इसलिए यह ऋतु उससे संबंधित है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न दोहों में वर्णित प्रकृति और उसके पात्रों के बीच के संबंध को समझने की आवश्यकता पर बल देता है।
Question 3. रहीम जिह्वा की तुलना किससे करते हैं?
(क) पागल
(ख) जूती
(ग) पाताल
(घ) धरती
Answer: (क) पागल
रहीम ने जीभ की तुलना पागल व्यक्ति से की है।
In simple words: रहीम के अनुसार जीभ बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल देती है, जैसे एक पागल व्यक्ति करता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के माध्यम से रहीम के वाणी संयम पर दिए गए महत्व की जांच की जाती है।
Question 4. रहीम के अनुसार पशु से बदतर कौन है?
(क) जो तम देता है
(ख) जो मन देता है.
(ग) जो धन देता है.
(घ) जो कुछ नहीं देता है.
Answer: (घ) जो कुछ नहीं देता है.
रहीम मानते हैं कि वह व्यक्ति पशु से भी निम्न है जो दूसरों को कुछ भी नहीं देता।
In simple words: रहीम यह समझाते हैं कि जो व्यक्ति किसी को कुछ नहीं देता, वह पशु से भी निकृष्ट होता है, क्योंकि पशु भी अपनी क्षमतानुसार कुछ न कुछ देते हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न दान और परोपकार के महत्व पर रहीम के विचारों को दर्शाता है।
निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :
Question 1. रहीम के अनुसरार बड़ा कौन है?
Answer: रहीम के मतानुसार, महान व्यक्ति वह है जो निर्धनों का कल्याण करे, ठीक वैसे ही जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा की सहायता की थी।
In simple words: रहीम के लिए, सच्चा बड़प्पन गरीबों की मदद करने में है, जैसा कृष्ण ने सुदामा के लिए किया था।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न रहीम के परोपकार और मित्रता संबंधी विचारों को दर्शाता है, जिसमें बड़प्पन की परिभाषा निहित है।
Question 2. रहीम दीप के दृष्टांत द्वारा क्या कहना चाहते हैं?
Answer: कवि दीपक के उदाहरण से यह समझाना चाहते हैं कि जिस प्रकार दीपक के जलने पर प्रकाश फैलता है और बुझने पर अंधकार छा जाता है, ठीक उसी तरह, एक पुत्र का जन्म परिवार में खुशियां लाता है, लेकिन यदि वह बड़ा होकर कुपुत्र बन जाए, तो वह पूरे वंश की गरिमा को धूमिल कर देता है।
In simple words: दीपक का उदाहरण देकर रहीम बताते हैं कि जैसे दीपक जलने पर रोशनी और बुझने पर अंधेरा होता है, वैसे ही कुपुत्र बचपन में खुशी देता है पर बड़ा होकर परिवार का नाम खराब करता है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न रूपक अलंकार के माध्यम से रहीम के विचारों की गहराई और कुपुत्र के प्रभाव पर उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है।
Question 3. कवि रहीम के अनुसार दीनबन्धु कौन है?
Answer: कवि रहीम के मतानुसार, जो व्यक्ति गरीब और असहाय लोगों पर कृपा करता है, वही वास्तव में दीनबंधु है, जो ईश्वर के समान होता है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि जो गरीबों पर दया करता है, वही भगवान के समान दीनबंधु कहलाता है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न दीनबंधु की सही परिभाषा और रहीम के सामाजिक सरोकारों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. रहीम ने किन लोगों को पशु से भी बदतर बताया है?
Answer: रहीम उन व्यक्तियों को पशु से भी अधिक हीन मानते हैं जो, हिरण के संगीत पर मोहित होकर अपना जीवन त्याग देने के विपरीत, किसी से प्रभावित होने या लाभ उठाने के बाद भी उसे कुछ भी वापस नहीं देते।
In simple words: हिरण अपनी मधुर आवाज़ पर जान दे देता है, लेकिन जो लोग किसी से प्रभावित होकर भी कुछ नहीं देते, रहीम उन्हें पशु से भी बदतर मानते हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न दान, कृतज्ञता और मानवीय मूल्यों के महत्व पर रहीम के गहन चिंतन को उजागर करता है।
निम्नलिखित प्रश्नों के दो-दो वाक्यों में उत्तर दीजिए:
Question 1. संगति का नतीजा कैसा होता है?
Answer: रहीम के अनुसार, मनुष्य चाहे कितना भी समझदार क्यों न हो, वह संगति के प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। अच्छी संगति का परिणाम शुभ होता है, जबकि बुरी संगति का परिणाम हानिकारक। इसे स्वाति नक्षत्र की बूंद के उदाहरण से समझा जा सकता है: केले के पत्ते पर गिरने से वह सामान्य जल रहता है, सांप के मुंह में जाने पर विष बन जाता है, और सीप में पड़ने पर मोती में बदल जाता है।
In simple words: संगति का प्रभाव हर इंसान पर पड़ता है - अच्छी संगति अच्छे परिणाम देती है, और बुरी संगति बुरे। जैसे स्वाति नक्षत्र की बूंद विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग रूप लेती है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न रहीम के दोहे 'जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल होय' के केंद्रीय विचार को स्पष्ट करने और उदाहरणों के माध्यम से समझाने की क्षमता का मूल्यांकन करता है।
Question 2. रहीम किन्हें. बड़ा आदमी कहते हैं?
Answer: कवि रहीम गरीबों के हित पर विशेष बल देते हैं। उनके मतानुसार, वे लोग ही सच्चे अर्थों में बड़े या महान कहलाते हैं जो निर्धन और असहाय लोगों की सहायता करते हैं।
In simple words: रहीम कहते हैं कि महान वे हैं जो गरीबों की मदद करते हैं और उनका भला करते हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न रहीम के नैतिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के प्रति उनके दृष्टिकोण को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. रहीम जिह्वा को बावरी क्यों कहते हैं?
Answer: रहीम जीभ को 'बावरी' (पागल) इसलिए कहते हैं क्योंकि बोलते समय यह अनियंत्रित हो जाती है और कभी-कभी अनुचित बातें बोल देती है, जिसके परिणामस्वरूप बोलने वाले को इसके कटु परिणामों का सामना करना पड़ता है, यहां तक कि उसे दंड भी भुगतना पड़ सकता है।
In simple words: जीभ को 'बावरी' इसलिए कहा गया है क्योंकि वह बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल देती है, जिससे बोलने वाले को बाद में परेशानी उठानी पड़ती है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न वाणी संयम के महत्व और रहीम के गहरे मनोवैज्ञानिक अवलोकन को दर्शाता है।
Question 4. कौआ और कोयल का भेद कब खुलता है?
Answer: कौवे और कोयल का अंतर उनके रूप-रंग से नहीं पहचाना जा सकता, क्योंकि वे देखने में समान लगते हैं। उनका वास्तविक भेद तब उजागर होता है जब वसंत ऋतु का आगमन होता है, और कोयल अपनी मधुर 'कुहू-कुहू' की ध्वनि से स्वयं को प्रकट करती है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि उनमें से कौन कोयल है और कौन कौआ।
In simple words: कौआ और कोयल दिखने में एक जैसे होते हैं; उनका असली भेद वसंत ऋतु में उनकी आवाज़ से पता चलता है जब कोयल मीठा गाती है।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न व्यक्ति के आंतरिक गुणों की पहचान और दिखावे से परे वास्तविक पहचान के महत्व पर रहीम के विचार को रेखांकित करता है।
भावार्थ स्पष्ट कीजिए:
Question 1. पानी गए न कबरै, मोती, मानुष चून।
Answer: कवि रहीम 'पानी' के बहुआयामी महत्व को समझाते हुए कहते हैं कि पानी के बिना जीवन और वस्तुएं निरर्थक हैं। बिना जल के न तो मोतियों में चमक आती है, न मनुष्य जीवित रह सकता है, और न ही चूना उपयोगी रहता है। इस दोहे का एक अन्य अर्थ यह भी है कि 'पानी' को 'इज्जत' (सम्मान) या 'तेज' (चमक) के रूप में देखा जाए, तो सम्मान या चमक खो जाने पर व्यक्ति या वस्तु अपना मूल महत्व खो देती है।
In simple words: रहीम 'पानी' शब्द के तीन अर्थ बताते हैं: जल, चमक (मोती के लिए) और प्रतिष्ठा (मनुष्य के लिए)। इन तीनों के बिना मोती, मनुष्य और चूना बेकार हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न 'श्लेष' अलंकार के माध्यम से रहीम के शब्दों की गहराई और बहुअर्थी व्याख्या को समझने की क्षमता का परीक्षण करता है।
Question 2. ओछो काम बड़े करें, तौ न बड़ाई होय। ज्यों रहीम हनुमंत को, गिरधर कहै. न कोय ॥
Answer: कवि रहीम यह स्पष्ट करते हैं कि यदि कोई साधारण या छोटे कद का व्यक्ति भी कोई असाधारण कार्य कर दे, तो भी उसे उस कार्य के लिए उचित यश या सम्मान नहीं मिलता। वे हनुमानजी का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने लंका तक पहाड़ उठाया था, फिर भी उन्हें 'गिरधर' (गिरि को धारण करने वाला) नहीं कहा जाता, यह उपाधि केवल श्रीकृष्ण के लिए आरक्षित है।
In simple words: रहीम कहते हैं कि छोटे व्यक्ति द्वारा किए गए बड़े काम को अक्सर पहचान नहीं मिलती, जैसे हनुमानजी ने पहाड़ उठाया, पर उन्हें 'गिरधर' नहीं कहा गया।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न व्यक्ति के सामाजिक कद और उसके कार्यों की मान्यता के बीच के अंतर पर रहीम के सूक्ष्म अवलोकन को दर्शाता है।
Question 3. बारे उजियारौ लगै, बढ़े अँधेरो होय॥ रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गई सरग पताल।
Answer: कवि रहीम दीपक के उदाहरण से समझाते हैं कि जिस प्रकार दीपक के जलने पर प्रकाश फैलता है और बुझने पर अंधकार हो जाता है, उसी तरह एक कुपुत्र का जन्म परिवार में प्रारंभिक प्रसन्नता लाता है, परंतु जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, उसकी गलत हरकतें पूरे कुल की प्रतिष्ठा को धूमिल कर देती हैं।
In simple words: रहीम कहते हैं कि दीपक की तरह, कुपुत्र का जन्म शुरुआत में खुशी देता है (रोशनी), पर बड़ा होकर वह परिवार का नाम खराब करता है (अंधेरा)।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न दीपक और कुपुत्र के बीच समानता स्थापित कर रहीम के नैतिक उपदेश को समझने की क्षमता का आकलन करता है।
Question 4. आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल ।
Answer: कवि रहीम हमें अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने की सीख देते हैं। वे समझाते हैं कि जीभ एक पागल की तरह होती है, जो बोलते समय अनियंत्रित होकर कुछ भी अनुचित बोल देती है। जीभ तो स्वयं बोलकर वापस मुंह में चली जाती है, लेकिन उसके कटु वचनों का परिणाम सिर को भुगतना पड़ता है, अर्थात व्यक्ति को इसके कारण अपमान या दंड सहना पड़ता है।
In simple words: रहीम हमें वाणी पर नियंत्रण रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि जीभ बेकाबू होकर कुछ भी बोल देती है, जिससे सिर को उसके कटु परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न वाणी के दुरुपयोग के गंभीर परिणामों और संयमित भाषण के महत्व पर रहीम के विचार को स्पष्ट करता है।
व्याकरण
समानार्थी शब्द लिखिए :
कदली = केला
भुजंग = साँप
सून = शून्य
पिक = कोयल
दीनबंधु = ईश्वर, भगवान
मृग = हिरन
कपाल = माथा
बावरी = पागल
विरुद्धार्थी शब्द लिखिए :
गरीब - अमीर
कपूत - सपूत
बड़ाई - निंदा
अधिक - कम
पानी - आग
शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए :
महत्त्व - त्व
उदारता - ता
संगति - इ
बडप्पन - पन
बडाई - ई
जीवित - इत
आनंदित - इत
कलंकित - इत
खुशी - ई
शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए :
अनमोल - अन
कपूत - क
नालायक - ना
प्रभाव - प्र
शब्दों के मानक शब्द रूप लिखिए :
मानुष - मनुष्य
जोग - योग
गुन - गुण
सरग - स्वर्ग
आस - आशा
सरवर - सरोवर
पियास - प्यास
नीति के दोहे Summary in Gujarati
ભાવાત્મક અનુવાદ :
કવિ રહીમ કહે છે કે પાણી ખૂબ કીમતી વસ્તુ છે. આપણે પાણીની કદર કરવી જોઈએ. પાણી વિના બધું વ્યર્થ છે. પાણી વગર મોતી ઉત્પન્ન થઈ શકતું નથી અને મનુષ્ય જીવતો રહી શકતો નથી. પાણી વિના ખાવા(પાન વગેરેમાં)નો ચૂનો ચૂનો રહેતો નથી.
અહીં કવિએ પાણીનો બીજા અર્થમાં પ્રયોગ કર્યો છે. તેઓ કહે છે કે મનુષ્ય પોતાના તેજ, પોતાની ઇજ્જતને હંમેશાં સાચવી રાખવી જોઈએ. તેજ વિના કે ઇજ્જત વગર બધું વ્યર્થ છે. જે મોતીનું તેજ (ચમક) જતી રહે છે તે મોતી મોતી રહેતું નથી અને જે મનુષ્યની ઇજ્જત જતી રહે છે એ મનુષ્ય મનુષ્ય રહેતો નથી. એવી જ રીતે જે ચૂનાનું સત્ત્વ (પાણી) જતું રહે છે, તે ચૂનો કશા કામનો હોતો નથી. અર્થાત્ તેનું તેજ સમાપ્ત થઈ જાય છે.
કવિ રહીમ કહે છે કે જે મહાનુભાવ ગરીબોનું હિત કરે છે તે બહુ મહાન હોય છે. ગરીબ સુદામાં ભગવાન શ્રીકૃષ્ણની મિત્રતાને યોગ્ય ન હતા, પરંતુ શ્રીકૃષ્ણ ગરીબ સુદામા સાથે મિત્રતા નિભાવી. આનાથી શ્રીકૃષ્ણની મહાનતા સાબિત થાય છે.
કવિ રહીમ કહે છે કે સંગતિનો ખૂબ પ્રભાવ પડે છે. જેની સાથે આપણો સંબંધ હોય, તેના જેવો પ્રભાવ આપણા પર પડશે. રહીમ ઉદાહરણ આપતાં કહે છે કે સ્વાતિ નક્ષત્રમાં પાણીનું ટીપું તો એક જેવું હોય છે પણ તે કેળાનાં પાંદડાં પર પડે તો પાણીનું ટીપું જ રહે છે, સાપના મોંમાં પડે તો તે ઝેર બની જાય છે અને છીપમાં પડે તો મોતી બની જાય છે !
કવિ રહીમ કહે છે કે મનુષ્યના સદગુણો અને દુર્ગુણોનો પરિચય એની વાણીથી થાય છે. જ્યાં સુધી કાગડો અને કોયલ બોલે નહીં ત્યાં સુધી બને એક જેવાં દેખાય છે, પરંતુ જ્યારે વસંતઋતુમાં કોયલ મીઠા સ્વરમાં બોલે છે ત્યારે ખબર પડે છે કે કોણ કાગડો છે અને કોણ કોયલ?
કવિ રહીમ નાલાયક કુપુત્રની તુલના દીપક સાથે કરતાં કહે છે કે કુપુત્ર અને દીપક બંનેની હાલત એક જેવી હોય છે. દીપકને પ્રગટાવવામાં આવે, તો ચારે બાજુ પ્રકાશ ફેલાઈ જાય છે. જો તેને ઓલવી નાખવામાં આવે તો અંધારું છવાઈ જાય છે, એવી જ રીતે જ્યારે કોઈ બાળક જન્મ લે છે ત્યારે તેનું કુળ એના જન્મથી પ્રસન્ન થાય છે, પણ જેમ જેમ તે મોટે થાય છે ત્યારે પોતાનાં કૃત્યોથી કુળને લંક્તિ કરે છે..
કવિ રહીમ મોટી અને નાની વ્યક્તિઓ વિષે કહે છે કે જો કોઈ નાની વ્યક્તિ મોટું કામ કરે છે, તો એનું મહત્ત્વ ગણાતું નથી. એનું ઉદાહરણ આપતાં તેઓ કહે છે કે હનુમાનજીએ પહાડ ઉપાડ્યો હતો પણ તેમને કોઈ 'ગિરિધર' કહેતું નથી.
કવિ રહીમ કહે છે કે ગરીબ માણસ દરેકની સામે આશાભરી નજરે જુએ છે કે કદાચ ક્યાંકથી કંઈ મળી જાય, પરંતુ ગરીબની તરફ કોઈની નજર જતી નથી. કવિ રહીમ કહે છે કે જે વ્યક્તિ ગરીબ તરફ જુએ છે અર્થાત્ એની સહાયતા કરે છે, તે દીનદુખિયાનો મદદગાર એટલે ઈશ્વર સમાન હોય છે.
કવિ રહીમ કહે છે કે હરણ મધુર સ્વર પર પ્રસન્ન થઈને પોતાનો જીવ આપી દે છે. મનુષ્ય ધનપ્રાપ્તિ માટે પશુ કરતાંય વધારે પ્રસન્ન થાય છે, પણ આના કરતાં પણ તેને કંઈ પ્રાપ્ત થતું નથી.
કવિ રહીમ કહે છે કે મનુષ્ય પોતાની જીભ કાબૂમાં રાખવી જોઈએ, પરંતુ જીભ તો અક્કલ વગરની હોય છે. તે આડી-અવળી જાણે કેટલીય વાતો બોલતી રહે છે. જીભ તો કડવી વાત કહીને મોંની અંદર જતી રહે છે, પરંતુ તેનું માઠું પરિણામ માથાને ભોગવવું પડે છે, કારણ કે જીભે કરેલી કડવી વાતોને લીધે માથાને જોડાનો માર સહન કરવો પડે છે.
કવિ રહીમ કહે છે કે જેની પાસેથી કંઈ મળવાની ઉમ્મીદ હોય તેની જ આશા રાખવી જોઈએ. કોઈ સુકા તળાવ પર પાણી પીવા જવાથી શું મળવાનું છે? સૂકા સરોવર પાસે જળથી તરસ કેવી રીતે છિપાય?
नीति के दोहे Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
कवि रहीम नीतिशास्त्र में पारंगत थे। उनके नीतिपरक दोहों में उनकी सूक्ष्म दृष्टि की झलक मिलती है। प्रस्तुत दोहों में उन्होंने तेज और इज्जत के महत्व, गरीबों का हित करना, संगति का फल, वाणी का प्रभाव, योग्यता, बड़े-छोटे का भेद, गरीबी, कृपणता, जिह्वा की विशेषता तथा उदारता आदि के बारे में अनमोल बातें कही हैं।
दोहों का सरल अर्थ :
रहिमन पानी............. मानुष चून।।
कवि रहीम कहते हैं कि पानी बहुत मूल्यवान चीज है। हमें पानी का आदर करना चाहिए। वे कहते हैं कि पानी के बिना सब कुछ व्यर्थ है। पानी के अभाव में न मोती उत्पन्न हो सकते हैं, न मनुष्य जीवित रह सकता है और न खाने योग्य चूना बनता है। कवि ने 'पानी' शब्द को दूसरे अर्थ में भी लिया है। वे कहते हैं कि मनुष्य को अपने तेज और इज्जत को हमेशा बनाए रखना चाहिए। तेज और इज्जत के बिना सब कुछ व्यर्थ है। जिस मोती की चमक चली जाती है, वह मोती नहीं रह जाता और जिस मनुष्य की इज्जत चली जाती है, वह मनुष्य नहीं रह जाता। इसी तरह जिस चूने का सत्व (पानी) चला जाता है, वह चूना भी किसी काम का नहीं रहता। अर्थात् इनका महत्व समाप्त हो जाता है।
जे गरीब............ मिताई जोग।।
कवि रहीम कहते हैं कि जो महानुभाव गरीबों का भला करते हैं, वे अत्यंत महान लोग होते हैं। गरीब सुदामा भगवान कृष्ण की मित्रता के योग्य नहीं थे, पर कृष्ण ने गरीब सुदामा से मित्रता निभाई। इससे कृष्ण की महानता सिद्ध होती है।
कदली सी. फल दीन।
रहीम कवि कहते हैं कि मनुष्य पर संगति का बड़ा प्रभाव पड़ता है। जिसके साथ आपका उठना-बैठना होगा, आप पर वैसा ही प्रभाव पड़ेगा। उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि स्वाति नक्षत्र के पानी की बूंद तो एक जैसी ही होती है, पर वह केले के पेड़ पर पड़ती है, तो पानी की बूंद रह जाती है, सांप के मुंह में पड़ती है, तो वह जहर बन जाती है और जब वह सीप में पड़ जाती है, तो मोती बन जाती है।
दोनों रहिमन................ वसंत के माहिं ॥
कवि रहीम कहते हैं कि व्यक्ति की अच्छाई और बुराई की पहचान उसकी वाणी से होती है। वे कहते हैं कि जब तक कौआ और कोयल बोलते नहीं, तब तक दोनों देखने में एक जैसे लगते हैं। मगर जब वसंत ऋतु में कोयल मीठे स्वर में बोलती है, तब पता चल जाता है कि कौन कौआ है और कौन कोयल?
जो रहीम गति ... .... अंधेरो होय ॥
कवि रहीम नालायक कुपुत्र की तुलना दीपक से करते हुए कहते हैं कि कुपुत्र और दीपक दोनों की हालत एक जैसी होती है। दीपक जला देने पर चारों ओर प्रकाश फैल जाता है। यदि उसे बुझा दिया जाए, तो अंधेरा छा जाता है। उसी प्रकार जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसका कुल इस जन्म से प्रफुल्लित हो उठता है। पर ज्यों-ज्यों वह बड़ा होता जाता है, त्यों-त्यों वह अपनी करतूतों से अपने कुल को कलंकित करता रहता है।
ओछो काम........... कहै न कोय ॥
कवि रहीम बड़े और छोटे व्यक्तियों के बारे में बताते हुए कहते हैं कि यदि कोई छोटा व्यक्ति कोई बड़ा काम करता है, तो उसकी बड़ाई नहीं होती है। इसका उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि हनुमानजी ने भी पहाड़ उठाया था, पर उन्हें कोई गिरधर नहीं कहता।
दीन सबन............. सम होय ॥
कवि रहीम कहते हैं कि गरीब व्यक्ति हर किसी की ओर आशाभरी नजरों से देखते हैं कि जाने कहाँ से कुछ मिल जाए। पर गरीब की ओर किसी की भी नजर नहीं जाती। रहीमजी कहते हैं कि जो व्यक्ति गरीबों की ओर देखता है, यानी उनकी सहायता करता है, वह दीन-दुखियों का सहायक यानी ईश्वर की भांति होता है।
नाद रीझि कछु न देत ॥
कवि रहीम कहते हैं कि हिरन मधुर आवाज पर रीझ कर अपनी जान दे देता है। पुरुष धनप्राप्ति के लिए पशु से भी अधिक रीझता है, पर इतना करने पर भी उसे कुछ भी प्राप्त नहीं होता।
रहिमन जिह्वा ............ खात कपाल ॥
कवि रहीम कहते हैं कि मनुष्य को अपनी जिह्वा को वश रखना चाहिए, वरना जिह्वा तो बावली होती है। वह इधर-उधर की जाने क्या-क्या बातें बकती रहती है। जीभ तो कड़वी बातें कहकर मुंह के भीतर चली जाती है, पर उसका बुरा परिणाम सिर को भोगना पड़ता है। क्योंकि जीभ की कही हुई कड़वी बातों के लिए जूते सिर को सहने पड़ते हैं।
तासों ही कुछ पियास।
कवि रहीम कहते हैं, जिससे कुछ मिलने की उम्मीद हो, उसी की आशा करनी चाहिए। किसी खाली सरोवर पर पानी पीने के लिए जाने से क्या मिलनेवाला है? खाली सरोवर के पास जाने से प्यास कैसे बुझेगी?
नीति के दोहे शब्दार्थ :
पानी - जल
पानी - इज्जत, तेज
ऊबर - बचे
सून - शून्य, सूना
चून - चूना
हित - भला, मित्र
बड़ - महान
बापुरो - दीन-हीन, बेचारा
जोग - योग्य
कदली - केला
सीप - सीपी
भुजंग - साप
स्वाति - स्वाति नक्षत्र
गुन - गुण
संगति - साथ
तैसो - वैसा
जौं-लौं - जब तक
जानि परत - जान पड़ना
पिक - कोयल
माँहिं - में
गति - दशा
दीप - दीपक
कपूत - बुरी चाल-चलनवाला पुत्र, कुपुत्र
सोय - वही
बारे - जलाने पर
बढ़े - बुझने पर
बढ़े - बढ़ना
ओछो - छोटा
बड़ाई - बड़प्पन
गिरधर - भगवान कृष्ण
लखत - देखते हैं
दीनबंधु - भगवान, गरीबों के भाई
नाद - आवाज
रीझि - मोहित होना, खुश होना
हेत - हेतु के लिए
जिहवा - जीभ
बावरी - पगली
सरग-पताल - उल्टा-सीधा
आपु - खुद, स्वयं
केपाल - सिर
तासों - उसी से
जाकी - जिसकी
आस - आशा
रीते - खाली, सूखे
पियास - प्यास
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