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Detailed Chapter 17 आर्थिक समस्याएँ और चुनौतियाँ गरीबी और बे GSEB Solutions for Class 10 Social Science
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Class 10 Social Science Chapter 17 आर्थिक समस्याएँ और चुनौतियाँ गरीबी और बे GSEB Solutions PDF
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दीजिए:
Question 1. गरीबी निवारण के विविध उपाय समझाइए । अथवा गरीबी निवारण के विविध सरकारी उपायों का वर्णन कीजिए ।
Answer: स्वतंत्रता मिलने के बाद, देश में गरीबी हटाना ही नियोजन का मुख्य लक्ष्य रहा है। गरीबी खत्म करने के लिए सरकार ने अपनी योजना में चार तरह की रणनीतियाँ अपनाई थीं।
1. सरकार का मानना था कि योजना में बड़े और भारी उद्योगों को प्रोत्साहन देने और हरित क्रांति के कारण देश में रोजगार तथा आय में वृद्धि होने से आर्थिक विकास तेजी से आगे बढ़ेगा। साथ ही, समाज के धनी वर्ग तक ये लाभ पहुँचने से देश के अन्य वर्गों, खास तौर पर गरीब लोगों तक, धीरे-धीरे पहुंचेंगे और उनकी स्थिति बदलेगी, ऐसी आशा थी। हालाँकि, देश के धीमे आर्थिक विकास और विकास के लाभों के असमान बँटवारे के कारण गरीबी में जितनी कमी की उम्मीद थी, वह नहीं हो पाई है।
2. जमींदारी प्रथा खत्म करना, काश्तकारों की जमीन उन्हीं के पास रहे, इसके लिए काश्तकारी कार्यक्रम लागू करना, काश्तकारों को जमीन मालिकाना अधिकार दिलाना, जमीन की उच्चतम सीमा तय करने का कानून बनाना, अतिरिक्त जमीन को भूमिहीन किसानों को देना, काश्तकारी नियमों को लागू करना, जोतने वाले के अधिकार सुरक्षित करना, और जमीन की हदबंदी करना जैसे अनेक जमीन सुधार के कदम सरकार ने उठाए हैं। इन कार्यक्रमों की मदद से ग्रामीण इलाकों में आय की असमानता को कम करने का प्रयास किया गया है।
3. सरकार ने कृषि से जुड़े उद्योगों, डेयरी उद्योगों, छोटे-बड़े सिंचाई प्रोजेक्टों, गृह उद्योगों और लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया है। इनमें मशीनों का उपयोग कम होने से रोजगार के मौके बढ़े, साथ ही सरकार ने कई वस्तुओं के उत्पादन का काम ऐसे उद्योगों के लिए कानूनी तौर पर आरक्षित कर दिया है।
4. सरकार ने आय के बराबर बँटवारे के लिए कई कदम उठाए हैं, जिससे अमीर और गरीब के बीच का अंतर कम हो सके। साथ ही, अमीर और मध्यम वर्ग पर कर लगाए गए हैं।
5. धनी वर्ग द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली विलासिता और सुख-सुविधा की चीजों के उत्पादन को ज़्यादा महत्व न मिले, इसके लिए इन पर अधिक कर या टैक्स लगाए गए। दूसरी ओर, गरीब वर्ग की ज़रूरी और हर दिन इस्तेमाल होने वाली चीजों के उत्पादन को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी गई ताकि ये वस्तुएं बाजार भाव से भी कम दाम पर मिल सकें। ऐसी सार्वजनिक वितरण व्यवस्था स्थापित करने से गरीबों की उपयोगी वस्तुओं का उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार बढ़ेगा और उनका जीवन स्तर सुधरेगा। इनकी काम करने की क्षमता बढ़ सके, इसके लिए सरकार व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षा की सुविधा देती है, जिससे आखिर में आय में वृद्धि होती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, परिवार नियोजन, संचार, सड़क, सिंचाई, कौशल विकास के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किए गए हैं। ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के मौके बनाए गए हैं। शिक्षा प्रणाली में सुधार करके तकनीकी और व्यवसाय-उन्मुखी अध्ययन कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाया गया है।
In simple words: सरकार ने गरीबी हटाने के लिए कई रणनीतियाँ अपनाई हैं, जिनमें बड़े उद्योगों को बढ़ावा देना, भूमि सुधार करना, कृषि-आधारित उद्योगों को समर्थन देना, आय के असमान वितरण को कम करने के उपाय करना और विलासिता पर कर लगाना शामिल है। इससे रोजगार बढ़ेगा और जीवन स्तर बेहतर होगा।
Exam Tip: जब भी गरीबी निवारण के उपायों पर सवाल आए, तो सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों के चार प्रमुख स्तंभों पर ध्यान दें: औद्योगिक विकास, भूमि सुधार, ग्रामीण-कृषि विकास और सार्वजनिक वितरण प्रणाली.
Question 2. गरीबी निवारण कार्यक्रम के अधीन 'कृषिक्षेत्र' तथा 'ग्रामोदय से भारत उदय' के तहत भारत सरकार द्वारा किये गये उपायों । का वर्णन कीजिए ।
Answer:
(1) कृषि क्षेत्र:
(अ) प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: राष्ट्रीय कृषि योजना के तहत कृषि वृद्धि दर बढ़े, कृषि से जुड़े विभाग बढ़ें, सिंचाई की सुविधाएँ बेहतर हों। जमीन को सिंचाई के तहत लाना, ड्रिप सिंचाई का उपयोग करना, हर खेत में पानी पहुँचाना, पानी की कमी दूर करने के लिए छोटे-बड़े, मध्यम आकार के चेकडैम बनाना जैसे कई कदम उठाकर किसानों को जोखिम और कर्ज से बचाना और रोजगार के जरिए आय प्रदान करके गरीबी से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।
(ब) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: इसके तहत कृषि बीमा योजना को और बेहतर बनाकर प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को होने वाले नुकसान के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास की खरीद, बोनस और फसल के नुकसान का भुगतान शुरू किया गया है। मूल्यों में स्थिरता बनाए रखने के लिए 'क्षतिमुक्त कृषिभाव आयोग' की स्थापना की गई है।
(क) राष्ट्रीय पेयजल कार्यक्रम: इसके तहत खेतों को पानी पहुँचाना, नहरों की संरचना में सुधार करना, जमीन के कटाव को रोकना, अनुसूचित जनजाति के किसानों को नए ट्यूबवेल देना, क्षारीय पानी के प्रवेश को रोकने के लिए कार्यक्रम लागू करना, तालाबों का निर्माण, वाटरशेड विकास, टंकी निर्माण, बरसात का पानी इकट्ठा करना, वृक्षारोपण करना, नहरों की लाइनिंग बनाना, चेकडैमों का जीर्णोद्धार करना जैसे रोजगार कार्यक्रमों को ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि से जुड़े गरीब परिवारों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद मिली है।
(ड) ई-नाम योजना: इससे राष्ट्रीय कृषि बाजार का विस्तार हुआ है, जिससे किसान ऑनलाइन अपने उत्पादों को सूचीबद्ध कर सकते हैं। व्यापारी किसी भी जगह से उन उत्पादों के लिए बोली लगा सकते हैं। बिचौलियों और दलालों से होने वाले नुकसान से किसानों को बचाकर अधिक मूल्य और प्रतिस्पर्धा से ज़्यादा आर्थिक लाभ मिले, यही इस योजना का मुख्य लक्ष्य है।
(2) ग्रामोदय से भारत उदय:
इस कार्यक्रम द्वारा किसान-केंद्रित योजनाओं में जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए तारबंदी की आर्थिक सहायता, कमी या सूखे के समय पशुधन की सुरक्षा के लिए घास उत्पादन और पशु शेल्टर बनाने की सहायता, अत्याधुनिक सैटेलाइट और ड्रोन टेक्नोलॉजी से बारिश की भविष्यवाणी और खनिज क्षेत्रों की खोज करना, जमीन का सर्वे करके रिकॉर्ड बनाना, खेती में मशीनीकरण के लिए ट्रैक्टर और मिनी ट्रैक्टर की खरीद पर कम ब्याज दर पर लोन और सब्सिडी की सहायता, बागवानी फसलों की गुणवत्ता में सुधार, कृषि कर्ज समितियों में कंप्यूटराइजेशन, कपास, दालों, मसालों के उत्पादन के लिए नई टेस्टिंग लैबोरेटरी की स्थापना, पोषणयुक्त भाव सुनिश्चित करना, जल संग्रह के लिए जलाशयों से गाद हटाकर उन्हें गहरा और बड़ा करना, खेत तालाबों का निर्माण करना, जलाशयों की नहरों और तटबंधों की सफाई और लंबाई बढ़ाना, जल मंदिरों का निर्माण, पुनः स्थापना और चेकडैमों की मरम्मत और जल संग्रह क्षमता बढ़ाना जैसे अनेक काम किए गए हैं। इसमें कृषि के अलावा समय में रोजगार मिले और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी संपत्ति का निर्माण हो। इस तरह किसानों को कर्ज से उभारने के प्रयासों के तहत केंद्र और राज्य सरकार ने इस योजना में कई तरह की सहायता प्रदान की है।
In simple words: गरीबी हटाने के लिए सरकार ने कृषि क्षेत्र में कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे सिंचाई बढ़ाना, फसल बीमा देना, पीने का पानी उपलब्ध कराना और ई-नाम से किसानों को बेहतर दाम दिलाना। 'ग्रामोदय से भारत उदय' कार्यक्रम ग्रामीण विकास पर केंद्रित है, जिसमें किसानों को नुकसान से बचाना, पशुधन की सुरक्षा करना, आधुनिक कृषि तकनीकें अपनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना शामिल है।
Exam Tip: गरीबी निवारण के कार्यक्रमों को कृषि और ग्रामीण विकास के संदर्भ में अलग-अलग करके याद रखें। 'कृषि क्षेत्र' में सिंचाई, फसल बीमा और बाजार की भूमिका को हाइलाइट करें, जबकि 'ग्रामोदय' में समग्र ग्रामीण सशक्तिकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को फोकस करें.
Question 3. गरीबी निवारण के मुख्य सरकारी उपायों की जानकारी दीजिए।
Answer: स्वतंत्रता मिलने के बाद, देश में गरीबी हटाना ही नियोजन का मुख्य लक्ष्य रहा है। गरीबी खत्म करने के लिए सरकार ने अपनी योजना में चार तरह की रणनीतियाँ अपनाई थीं।
1. सरकार का मानना था कि योजना में बड़े और भारी उद्योगों को प्रोत्साहन देने और हरित क्रांति के कारण देश में रोजगार तथा आय में वृद्धि होने से आर्थिक विकास तेजी से आगे बढ़ेगा। साथ ही, समाज के धनी वर्ग तक ये लाभ पहुँचने से देश के अन्य वर्गों, खास तौर पर गरीब लोगों तक, धीरे-धीरे पहुंचेंगे और उनकी स्थिति बदलेगी, ऐसी आशा थी। हालाँकि, देश के धीमे आर्थिक विकास और विकास के लाभों के असमान बँटवारे के कारण गरीबी में जितनी कमी की उम्मीद थी, वह नहीं हो पाई है।
2. जमींदारी प्रथा खत्म करना, काश्तकारों की जमीन उन्हीं के पास रहे, इसके लिए काश्तकारी कार्यक्रम लागू करना, काश्तकारों को जमीन मालिकाना अधिकार दिलाना, जमीन की उच्चतम सीमा तय करने का कानून बनाना, अतिरिक्त जमीन को भूमिहीन किसानों को देना, काश्तकारी नियमों को लागू करना, जोतने वाले के अधिकार सुरक्षित करना, और जमीन की हदबंदी करना जैसे अनेक जमीन सुधार के कदम सरकार ने उठाए हैं। इन कार्यक्रमों की मदद से ग्रामीण इलाकों में आय की असमानता को कम करने का प्रयास किया गया है।
3. सरकार ने कृषि से जुड़े उद्योगों, डेयरी उद्योगों, छोटे-बड़े सिंचाई प्रोजेक्टों, गृह उद्योगों और लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया है। इनमें मशीनों का उपयोग कम होने से रोजगार के मौके बढ़े, साथ ही सरकार ने कई वस्तुओं के उत्पादन का काम ऐसे उद्योगों के लिए कानूनी तौर पर आरक्षित कर दिया है।
4. सरकार ने आय के बराबर बँटवारे के लिए कई कदम उठाए हैं, जिससे अमीर और गरीब के बीच का अंतर कम हो सके। साथ ही, अमीर और मध्यम वर्ग पर कर लगाए गए हैं।
5. धनी वर्ग द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली विलासिता और सुख-सुविधा की चीजों के उत्पादन को ज़्यादा महत्व न मिले, इसके लिए इन पर अधिक कर या टैक्स लगाए गए। दूसरी ओर, गरीब वर्ग की ज़रूरी और हर दिन इस्तेमाल होने वाली चीजों के उत्पादन को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी गई ताकि ये वस्तुएं बाजार भाव से भी कम दाम पर मिल सकें। ऐसी सार्वजनिक वितरण व्यवस्था स्थापित करने से गरीबों की उपयोगी वस्तुओं का उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार बढ़ेगा और उनका जीवन स्तर सुधरेगा। इनकी काम करने की क्षमता बढ़ सके, इसके लिए सरकार व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षा की सुविधा देती है, जिससे आखिर में आय में वृद्धि होती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, परिवार नियोजन, संचार, सड़क, सिंचाई, कौशल विकास के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किए गए हैं। ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के मौके बनाए गए हैं। शिक्षा प्रणाली में सुधार करके तकनीकी और व्यवसाय-उन्मुखी अध्ययन कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाया गया है।
In simple words: स्वतंत्रता के बाद से, गरीबी खत्म करना सरकार का मुख्य लक्ष्य रहा है। उन्होंने बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया, भूमि सुधार लागू किए, कृषि आधारित उद्योगों को सहायता दी, आय के समान वितरण के लिए उपाय किए, और विलासिता की वस्तुओं पर कर लगाया। व्यावसायिक शिक्षा और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया गया है।
Exam Tip: गरीबी निवारण के मुख्य उपायों की चर्चा करते समय, सरकारी नीतियों के ऐतिहासिक संदर्भ और विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कृषि, उद्योग, और सामाजिक कल्याण) में उनके प्रभावों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. बेरोजगारी घटाने के प्रयास स्वरूप सरकारी योजना और कार्यक्रमों (मुख्य चार) सविस्तार समझाइए ।
Answer: बेरोजगारी कम करने के लिए सरकार के प्रयास नीचे दिए गए हैं:
1. भारत में तेज आर्थिक वृद्धि दर को वार्षिक 10% के उच्च लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए व्यापक कदम उठाना। सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में पूंजी निवेश की मात्रा बढ़ाना और रोजगार के अवसर बढ़ाना। अर्थव्यवस्था में कृषि सहित छोटे और कुटीर उद्योगों सहित सभी विभागों में और प्रदेशों में तेज और संतुलित विकास करके रोजगार के नए क्षेत्र खोलना। सरकार रोजगार बढ़ाने के लिए कई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, शिक्षण-प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए हैं।
2. श्रम-प्रधान उत्पादन पद्धति पर आधारित लागत से वस्तुएँ बनाने वाली इकाइयों, छोटे और लघु उद्योगों, ग्रामोद्योगों, हथकरघा और हस्तकला कारीगरों से जुड़े हुनर उद्योगों का विकास किया गया है। इसके लिए योजनाओं में प्रोत्साहन नीतियाँ लागू की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के अलावा, मौसमी बेरोजगारी कम करने के लिए खेतों में एक से अधिक बार फसल लेने की पद्धति विकसित करना, नई जमीन को जुताई में लाना, प्रत्येक खेत को पानी और बिजली की सुविधाएँ उपलब्ध कराना, छोटी-बड़ी सिंचाई योजनाएँ, बाँध, चेकडैम, जलाशयों, नहरें, ट्यूबवेल, सड़कें बनाना, कृषि से जुड़ी गतिविधियाँ, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी उद्योग, वनीकरण कार्यक्रम जैसे कार्यक्रमों द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में कम पूंजी निवेश से लोगों को रोजगार दिया जाता है। इसके अनुसार रोजगार-उन्मुख योजना होनी चाहिए। ग्रामीण रोजगार के अवसरों का विकास करना चाहिए, जिससे लोग वहीं रोजगार पा सकें और रोजगार के लिए शहरों में पलायन कम हो सके और रोजगार की माँग घटे। कृषि क्षेत्र में बागवानी खेती, जैविक खाद-आधारित खेती, शुष्क खेती और बहुलक्षी फसल पद्धति (सब्जी-फलों की खेती) की तरफ अधिक प्रोत्साहन दिया गया।
3. ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता और मात्रा बढ़े, इस पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
4. ग्रामीण क्षेत्र में मानव विकास को स्थायी बनाने के लिए, स्वास्थ्य, शिक्षा, पीने का शुद्ध पानी, पौष्टिक आहार, बिजली, सड़क, बैंकिंग, बीमा, इंटरनेट, संचार, मनोरंजन की सुविधाएँ बढ़ाना, जल संचयन की गतिविधियाँ, सार्वजनिक और स्थायी संपत्ति का निर्माण करके स्थानीय उद्योगों के विकास और प्रोत्साहन देना, रोजगार-उन्मुख कार्यक्रम अपनाना, ग्रामीण लोगों के जीवन की गुणवत्ता और मात्रात्मक सुधार लाना मुख्य उद्देश्य था।
In simple words: बेरोजगारी कम करने के लिए, सरकार ने आर्थिक विकास दर बढ़ाने, पूंजी निवेश बढ़ाने और नए रोजगार क्षेत्र खोलने पर ध्यान दिया है। उन्होंने छोटे उद्योगों और कृषि से जुड़े क्षेत्रों को बढ़ावा दिया है, जिसमें सिंचाई, पशुपालन और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इसके अलावा, ग्रामीण शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और मानव विकास को स्थायी बनाने पर भी जोर दिया गया है।
Exam Tip: बेरोजगारी घटाने के सरकारी प्रयासों का वर्णन करते समय, हमेशा आर्थिक वृद्धि, उत्पादन पद्धतियों, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे चार मुख्य स्तंभों को शामिल करें। यह एक व्यापक उत्तर प्रदान करेगा।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मुद्दासर दीजिए:
Question 1. गरीबी अर्थात् क्या ? गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीनेवाले लोगों के लक्षण बताइए ।
Answer: गरीबी – जब समाज का एक बड़ा हिस्सा अपने जीवन की बुनियादी और आवश्यक जरूरतों जैसे भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की न्यूनतम मात्रा भी पाने में नाकाम रहकर जीवन गुजारता है, तब समाज की ऐसी स्थिति को व्यापक या गंभीर गरीबी कहते हैं। ऐसी स्थिति में समाज में रहने वाले लोग गरीब कहलाते हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले लोगों के लक्षण:
- जिस व्यक्ति को दो समय का पर्याप्त भोजन नहीं मिलता।
- रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में खुली जगह नहीं मिल पाती।
- छोटी या गंदी बस्तियों, झोंपड़पट्टियों में रहना पड़ता है।
- उसकी आय निर्धारित अपेक्षित आय से कम हो।
- उसकी आयु सीमा राष्ट्रीय औसत आयु से भी कम होती है।
- जो ज्यादातर निरक्षर हो।
- जिनको लगातार पौष्टिक भोजन न मिलने से छोटी-बड़ी बीमारियों से जूझना पड़ता है।
- जिनके बच्चों को परिवार की आय बढ़ाने के लिए बाल मजदूरी करनी पड़ती है।
- जिनके बच्चों में कुपोषण के कारण शिशु मृत्यु दर की मात्रा अधिक होती है।
In simple words: गरीबी का मतलब है जब लोग अपनी मूलभूत ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाते। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को पर्याप्त खाना, साफ जगह, अच्छी शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं मिलतीं, उनकी आय कम होती है, वे अक्सर निरक्षर होते हैं, और उनके बच्चों को काम करना पड़ता है या वे कुपोषण का शिकार होते हैं।
Exam Tip: गरीबी को परिभाषित करते समय, मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करें। गरीबी रेखा के नीचे के लोगों के लक्षणों में आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी संकेतकों को शामिल करें।
Question 2. भारत में गरीबी का वर्णन कीजिए ।
Answer: योजना आयोग के 2011-12 के मानदंडों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च Rs. 816 और शहरों में Rs. 1000 से कम वाले व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे माने जाते हैं।
- इसके आधार पर भारत में 2011-12 में 27 करोड़ लोग गरीब थे, जो कुल जनसंख्या का 21.9% था।
- UNDP – 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2011-12 में गरीबी की मात्रा कुल जनसंख्या के 21.92% थी, जिसमें से ग्रामीण क्षेत्र में 25.7% और शहरी क्षेत्र में 13.7% जनसंख्या गरीब थी। इसका मतलब भारत की कुल जनसंख्या के 26.93 करोड़ लोग गरीब थे।
- ग्रामीण क्षेत्र में 21.65 करोड़ और शहरी क्षेत्र में 5.28 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीते थे।
- भारत में सबसे अधिक गरीबी की मात्रा छत्तीसगढ़ (36.93%) में है, जबकि सबसे कम गरीबी गोवा (5.09%) में है।
- गुजरात में गरीबी की मात्रा 16.63% थी। भारत में औसतन 30% से अधिक गरीबी की मात्रा छत्तीसगढ़, असम, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा आदि में है।
In simple words: 2011-12 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 27 करोड़ लोग गरीब थे, जो कुल आबादी का 21.9% हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी शहरी क्षेत्रों से ज़्यादा है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज़्यादा गरीबी है, जबकि गोवा में सबसे कम।
Exam Tip: भारत में गरीबी का वर्णन करते समय, योजना आयोग और UNDP जैसे प्रमुख स्रोतों के आंकड़ों का उल्लेख करें। ग्रामीण-शहरी विभाजन और विभिन्न राज्यों के बीच के अंतर को हाइलाइट करना भी महत्वपूर्ण है।
Question 3. गरीबी उद्भव होने के कारणों की चर्चा कीजिए ।
Answer: गरीबी के उत्पन्न होने के मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:
- कृषि क्षेत्र में अपर्याप्त विकास और अपर्याप्त सिंचाई की सुविधाओं के कारण कृषि क्षेत्र में मिलने वाली आय कम होती है।
- कृषि के अलावा अन्य समय में वैकल्पिक रोजगार के अवसरों का अभाव।
- ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य रोजगार के लिए आवश्यक ज्ञान, शिक्षा, कौशल के प्रशिक्षण का अभाव एक महत्वपूर्ण कारण है।
- जाति प्रथा और रूढ़ियों, परंपराओं के कारण रीति-रिवाजों के अलावा अत्यधिक खर्च के कारण लोग कर्ज में डूब जाते हैं। इस तरह, गैर-उत्पादक खर्चों में वृद्धि से गरीबी बढ़ती है। निरक्षरता के अधिक होने से लोग शोषण और अन्याय का शिकार बनते हैं, और सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में लाभ नहीं उठा पाते।
- आर्थिक नीतियों के निर्माण में मानवीय आवश्यकताओं और उनके आर्थिक हितों की उपेक्षा हुई है।
- व्यापारिक फसलों को प्रोत्साहन मिला और खाद्य पदार्थों का उत्पादन कम हो गया। अनाज, दालों आदि की कमी हुई और कीमतें बढ़ गईं, जिससे दो समय का पर्याप्त भोजन न मिलने से गरीबी उत्पन्न हुई।
- आर्थिक सुधारों के लागू होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था टूट गई, कुटीर और लघु उद्योगों को नुकसान हुआ, पलायन बढ़ा, और कृषि की आय कम हुई।
- गरीब कुपोषण और विभिन्न बीमारियों के शिकार हैं, स्वास्थ्य संबंधी खर्च बढ़ा है। आय स्थिर रही है, चिकित्सा और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ गया है।
- टेक्नोलॉजी में परिवर्तन आए हैं। पारंपरिक व्यवसाय, कुटीर उद्योग नष्ट हो गए और बेरोजगारी बढ़ी है।
- जनसंख्या दर बढ़ी, मृत्यु दर कम हुई, औसत आय बढ़ी, और श्रम की माँग से पूर्ति अधिक होने से बेरोजगारी बढ़ी। दूसरी तरफ उनके जीवन की आवश्यक वस्तुओं की माँग के सामने उत्पादन कम हुआ और मूल्य बढ़ गया। क्रय शक्ति कम हुई, जीवन स्तर गिरा और अंततः गरीबी बढ़ गई।
In simple words: गरीबी के कई कारण हैं, जैसे कृषि का धीमा विकास, ग्रामीण रोजगार की कमी, सामाजिक रूढ़ियों पर ज़्यादा खर्च, गलत आर्थिक नीतियाँ, खाद्यान्न की कमी और कीमतों में वृद्धि, ग्रामीण उद्योगों का पतन, बढ़ती जनसंख्या, और तकनीकी बदलावों से बेरोजगारी। ये सभी कारक गरीबी को बढ़ाते हैं।
Exam Tip: गरीबी के कारणों की व्याख्या करते समय, आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और जनसंख्या संबंधी कारकों को विस्तृत रूप से समझाएं। कृषि क्षेत्र की समस्याओं और असमान विकास पर विशेष जोर दें।
Question 4. सामाजिक सुरक्षा और अन्न सुरक्षा के सरकार के कार्यक्रम बताइए ।
Answer: सामाजिक सुरक्षा और अन्न सुरक्षा के लिए सरकार ने नीचे दिए गए कार्यक्रम चलाए हैं:
- ग्रामोदय से भारत उदय योजना
- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना।
- आदिवासी महिलाओं के लिए पशुपालन हेतु 'संकलित डेयरी विकास योजना'।
- जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजना।
- मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना।
- माँ अन्नपूर्णा योजना।
- सांसद आदर्श ग्राम योजना।
- महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना।
- मिशन मंगलम
- दंतोपत कारीगर ब्याज सहायता योजना।
- ज्योति ग्रामोद्योग विकास योजना।
- वाजपेयी बेंकेबल योजना।
In simple words: सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और अन्न सुरक्षा के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे 'ग्रामोदय से भारत उदय', 'दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना', आदिवासी महिलाओं के लिए डेयरी योजना, जैविक खेती प्रोत्साहन, ग्रामीण सड़क योजना, 'माँ अन्नपूर्णा योजना', मनरेगा, और विभिन्न स्वरोजगार और उद्योग विकास योजनाएं।
Exam Tip: सामाजिक और अन्न सुरक्षा कार्यक्रमों का उल्लेख करते समय, कम से कम 5-7 प्रमुख योजनाओं के नाम और उनके उद्देश्यों को याद रखें, जैसे मनरेगा (रोजगार), माँ अन्नपूर्णा (अन्न सुरक्षा), और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाएं।
Question 5. धनिक भारत में गरीब रहते है । समझाइए ।
Answer: भारत में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन और असीमित प्राकृतिक उपहार हैं।
- लेकिन इन प्रचुर संसाधनों का सही ढंग से उपयोग करने की क्षमता, शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल की कमी के कारण, और वर्षों से दोषपूर्ण योजना के कारण इन प्राकृतिक संसाधनों का लोगों के कल्याण और सुख के लिए इतना उपयोग नहीं हो सका, जिससे लोगों में गरीबी की मात्रा कम नहीं हुई है।
- इसलिए कहा जाता है कि 'धनी भारत में गरीब लोग रहते हैं'।
In simple words: भारत में बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन हैं, लेकिन शिक्षा, कौशल और सही योजना की कमी के कारण इन संसाधनों का पूरा लाभ नहीं उठाया जा सका। इसी वजह से, भले ही देश धनी हो, यहाँ के कई लोग गरीब हैं।
Exam Tip: इस अवधारणा की व्याख्या करते समय, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता और उनके उपयोग में आने वाली बाधाओं (जैसे शिक्षा, कौशल और योजना की कमी) के बीच के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 6. बेरोजगारी के कारण बताइए ।
Answer: बेरोजगारी का सबसे मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि है। केवल सैद्धांतिक ज्ञान, प्रायोगिक ज्ञान का अभाव, तकनीकी ज्ञान और कौशल की कमी, पूरी तरह से रोजगार उत्पन्न करने में विफलता, कृषि क्षेत्र में बारिश की अनियमितता और अधिक जोखिम, कृषि व्यवसाय में रुचि का कम होना, कृषि में सिंचाई की अपर्याप्त सुविधा, कृषि के अतिरिक्त समय में वैकल्पिक रोजगार की कमी, कुटीर उद्योग, गृह उद्योग और लघु उद्योगों की कमजोर स्थिति, जाति प्रथा, संयुक्त परिवार व्यवस्था, पारंपरिक व्यवसाय और पारिवारिक धंधों में ही लगे रहना, अन्य नए काम करने के साहस की कमी, ज्ञान, कौशल, प्रशिक्षण और अनुभव की कमी, श्रम की अगतिशीलता, मानव श्रम का दोषपूर्ण नियोजन, औद्योगिक विकास की धीमी दर, बचत की कम दर जिससे पूंजी निर्माण दर में कमी आदि बेरोजगारी के कारण हैं।
In simple words: बेरोजगारी का मुख्य कारण जनसंख्या में वृद्धि है। इसके अलावा, तकनीकी कौशल की कमी, कृषि में अनिश्चितता, वैकल्पिक रोजगार के अवसरों का अभाव, छोटे उद्योगों की कमजोर स्थिति, पुरानी परंपराओं से चिपके रहना, नए काम न सीखना, और औद्योगिक विकास की धीमी गति भी बेरोजगारी को बढ़ाती है।
Exam Tip: बेरोजगारी के कारणों का विश्लेषण करते समय, जनसंख्या वृद्धि को प्राथमिक कारण के रूप में उजागर करें, और फिर शिक्षा, कौशल, कृषि संबंधी समस्याओं और औद्योगिक विकास के कारकों को विस्तृत करें।
Question 7. बेरोजगारी के प्रभाव बताइए ।
Answer: बेरोजगारी के कारण गरीबी की मात्रा बढ़ रही है।
- लोगों का जीवन स्तर नीचे जा रहा है।
- शिक्षा, स्वास्थ्य की समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
- आर्थिक विकास प्रभावित होता है।
- प्रति व्यक्ति और राष्ट्रीय आय कम हो रही है।
- बचत की कम दर, पूंजी निर्माण की कम दर होती है।
In simple words: बेरोजगारी के कारण गरीबी बढ़ती है, लोगों का जीवन स्तर गिरता है, शिक्षा और स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ती हैं, आर्थिक विकास धीमा हो जाता है, और प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय कम हो जाती है। इससे बचत और पूंजी निर्माण की दर भी घट जाती है।
Exam Tip: बेरोजगारी के प्रभावों को बताते समय, आर्थिक और सामाजिक दोनों पहलुओं को शामिल करें, जैसे गरीबी में वृद्धि, जीवन स्तर में गिरावट, और आर्थिक विकास पर नकारात्मक असर।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दीजिए:
Question 1. सापेक्ष गरीबी और निरपेक्ष गरीबी – समझाइए ।
Answer:
- निरपेक्ष गरीबी: समाज के जो लोग अनाज, दाल, दूध, सब्जी, कपड़े जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं को न्यूनतम बाजार भाव पर भी प्राप्त करने में समर्थ नहीं होते, उसे निरपेक्ष गरीबी कहते हैं।
- सापेक्ष गरीबी: समाज के अलग-अलग आय वाले वर्गों में से यदि कोई समूह अन्य से कम आय प्राप्त करता है, तो उसे सापेक्ष गरीबी कहते हैं। उदाहरण के लिए, Rs. 10,000, Rs. 20,000 और Rs. 30,000 आय वाले तीन व्यक्ति हैं। A व्यक्ति की आय B व्यक्ति की आय से कम होने से A व्यक्ति गरीब माना जाता है, इसी तरह C व्यक्ति के सापेक्ष A और B व्यक्ति की आय कम होने से वे गरीब माने जाते हैं।
In simple words: निरपेक्ष गरीबी तब होती है जब लोग अपनी मूलभूत ज़रूरतें भी पूरी नहीं कर पाते। सापेक्ष गरीबी तब होती है जब किसी व्यक्ति या समूह की आय दूसरे समूह की तुलना में कम होती है, भले ही वे अपनी मूलभूत ज़रूरतें पूरी कर पा रहे हों।
Exam Tip: निरपेक्ष गरीबी को मूलभूत आवश्यकताओं के संदर्भ में परिभाषित करें, जबकि सापेक्ष गरीबी को आय के असमान वितरण और तुलनात्मक आधार पर समझाएं। उदाहरण देकर स्पष्ट करना सहायक होता है।
Question 2. एग्रो बिजनेस पोलिसी तथा 'ई-नाम योजना' की जानकारी दीजिए ।
Answer: एग्रो बिजनेस पॉलिसी 2016 द्वारा राज्य सरकार ने प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट के निर्यात में सहायता, एग्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना करके 10 लाख लोगों को रोजगार देने की योजना बनाई है, जिससे गरीबी कम की जा सके। ई-नाम योजना के तहत किसानों के लिए एक राष्ट्रीय कृषि बाजार बनाया गया है, जिसमें किसान ऑनलाइन अपने उत्पादों को सूचीबद्ध कर सकते हैं। व्यापारी किसी भी जगह से उन उत्पादों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य बिचौलियों और दलालों से होने वाले नुकसान से किसानों को बचाना, उन्हें अधिक मूल्य और प्रतिस्पर्धा से ज़्यादा आर्थिक लाभ दिलाना है।
In simple words: एग्रो बिजनेस पॉलिसी 2016 खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देती है और ई-नाम योजना किसानों को ऑनलाइन अपने उत्पाद बेचने की सुविधा देती है। ये दोनों योजनाएं किसानों को बेहतर मूल्य और रोजगार के अवसर देकर गरीबी कम करने में मदद करती हैं।
Exam Tip: एग्रो बिजनेस पॉलिसी और ई-नाम योजना का वर्णन करते समय, उनके मुख्य उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करें: खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देना, रोजगार सृजन, और किसानों को बेहतर बाजार पहुँच और मूल्य दिलाना।
Question 3. मनरेगा कार्यक्रम स्पष्ट कीजिए ।
Answer: मनरेगा रोजगार-उन्मुख कार्यक्रम 'अपने गाँव में अपना काम, साथ में उचित दाम' के नारे के साथ बहुत ही उपयोगी योजना है। इसमें राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वयस्क लोग जो शारीरिक श्रम कर सकते हैं और बिना कुशल काम करने के इच्छुक हैं, ऐसे प्रत्येक परिवार की जीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को वित्तीय वर्ष में 100 दिन (रोजाना सात घंटे) वेतनयुक्त रोजगार देने का लक्ष्य है। सरकार द्वारा निर्धारित दर पर दैनिक वेतन चुकाया जाता है। यदि काम माँगने पर सरकार काम देने में असमर्थ हो, तो नियम के अनुसार उसे 'बेरोजगारी भत्ता' चुकाया जाएगा। ग्रामीण विकास कार्य, व्यक्तिगत शौचालय बनाना, व्यक्तिगत कुएँ, जमीन समतल करना, बागवानी कार्य, इंदिरा आवास योजना के मजदूरी कार्य, पशुओं के छप्पर, जैविक खाद बनाना, मुर्गी-बतख के लिए शेड, मछली सुखाने के यार्ड, नहरों की सफाई, जल संग्रहण के कार्य, मार्गों के पास वनीकरण जैसे अनेक कार्य करवाकर प्रत्येक परिवार को निश्चित वेतनयुक्त रोजगार देने की गारंटी देकर उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर लाने और जीवन स्तर सुधारने का कार्य करती है।
In simple words: मनरेगा एक महत्वपूर्ण योजना है जो ग्रामीण वयस्कों को उनके अपने गाँव में 100 दिनों का सवेतन रोजगार देने का लक्ष्य रखती है। यह ग्रामीण विकास के काम करवाकर लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने और उनका जीवन स्तर बेहतर बनाने में मदद करती है, और यदि काम उपलब्ध न हो तो बेरोजगारी भत्ता भी देती है।
Exam Tip: मनरेगा का वर्णन करते समय, इसके मुख्य प्रावधानों जैसे 100 दिन का रोजगार, दैनिक वेतन, बेरोजगारी भत्ता और ग्रामीण विकास कार्यों को शामिल करें। इसका मुख्य लक्ष्य गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार है।
Question 4. औद्योगिक बेरोजगारी अर्थात् क्या ?
Answer: औद्योगिक क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों के कारण यदि व्यक्ति को कम या लंबे समय के लिए बेरोजगार रहना पड़ता है, तो ऐसी स्थिति को औद्योगिक बेरोजगारी के रूप में जाना जाता है।
In simple words: औद्योगिक बेरोजगारी तब होती है जब किसी व्यक्ति को उद्योगों में बदलाव या मंदी के कारण थोड़े समय या लंबे समय के लिए काम नहीं मिल पाता।
Exam Tip: औद्योगिक बेरोजगारी को परिभाषित करते समय, इसे औद्योगिक क्षेत्र में संरचनात्मक या तकनीकी परिवर्तनों से जोड़कर बताएं, जिससे रोजगार के अवसरों पर असर पड़ता है।
Question 5. विश्व श्रम बाजार की संकल्पना स्पष्ट कीजिए ।
Answer: दुनिया के देश जब अपने श्रमिकों का आदान-प्रदान करते हैं, उसे विश्व श्रम बाजार कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों का एक देश से दूसरे देश में रोजगार, व्यापार, प्रशिक्षण या उच्च शिक्षा के लिए जाना अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता कहलाता है। शैक्षिक ज्ञान, उच्च तकनीकी ज्ञान कौशल की प्राप्ति, विदेशों में अधिक आय, अधिक सुविधा और बेहतर नौकरी की तलाश, बुद्धि धन का बहिर्गमन (ब्रेन-ड्रेन) अंतरराष्ट्रीय स्तर का पलायन है।
In simple words: विश्व श्रम बाजार वह जगह है जहाँ दुनिया भर के देश अपने श्रमिकों का आदान-प्रदान करते हैं। जब लोग रोजगार या बेहतर अवसरों के लिए एक देश से दूसरे देश जाते हैं, तो इसे अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता या ब्रेन-ड्रेन कहते हैं।
Exam Tip: विश्व श्रम बाजार की संकल्पना को समझाते समय, 'अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता' और 'ब्रेन-ड्रेन' जैसे संबंधित शब्दों का उपयोग करें और उनके कारणों (जैसे बेहतर आय, सुविधाएँ, शिक्षा) पर प्रकाश डालें।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए:
Question 1. भारत में गरीबी की सबसे अधिक मात्रा किस राज्य में है ?
(A) उत्तर प्रदेश
(B) उड़ीसा
(C) छत्तीसगढ़
(D) बिहार
Answer: (C) छत्तीसगढ़
In simple words: भारत में सबसे ज़्यादा गरीब लोग छत्तीसगढ़ राज्य में रहते हैं।
Exam Tip: ऐसे तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए, नवीनतम सर्वेक्षणों और सरकारी रिपोर्टों के आंकड़ों को याद रखने का प्रयास करें।
Question 2. भारत में 2011-12 में गरीबी कितनी थी ? (करोड़ में)
(A) 21.65
(B) 26.93
(C) 36.93
(D) 21.92
Answer: (D) 21.92
In simple words: 2011-12 में, भारत में लगभग 21.92 करोड़ लोग गरीब थे।
Exam Tip: जनसंख्या संबंधी आंकड़ों को याद करते समय, सटीक प्रतिशत या करोड़ में संख्या को ध्यान में रखें, क्योंकि ये अक्सर सीधे पूछे जाते हैं।
Question 3. महिला सशक्तिकरण, कौशल्यवर्धक प्रशिक्षण, स्वरोजगारी और बाजार के साथ जोड़ने के लिए कौन-सी सरकारी योजना में रखा गया है ?
(A) प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना
(B) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
(C) मिशन मंगलम् योजना
(D) एग्रो बिजनेश पोलिसी-
Answer: (C) मिशन मंगलम् योजना
In simple words: महिलाओं को सशक्त बनाने, कौशल सिखाने और उन्हें स्वरोजगार तथा बाजार से जोड़ने के लिए 'मिशन मंगलम्' योजना बनाई गई है।
Exam Tip: सरकारी योजनाओं के नामों और उनके उद्देश्यों को ठीक से याद रखें। खासकर उन योजनाओं पर ध्यान दें जो विशिष्ट सामाजिक समूहों (जैसे महिलाएँ) के सशक्तिकरण पर केंद्रित हैं।
Question 4. 2016 भारत के किस राज्य में बेरोजगारी सबसे अधिक पायी जाती है ?
(A) बिहार
(B) झारखंड
(C) केरल
(D) छत्तीसगढ़
Answer: (D) छत्तीसगढ़
In simple words: 2016 में, भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे ज़्यादा बेरोजगारी दर्ज की गई थी।
Exam Tip: राज्य-वार डेटा वाले प्रश्नों के लिए, नवीनतम आंकड़ों और रिपोर्टों के आधार पर शीर्ष राज्यों को याद रखें।
Question 5. अन्न सुरक्षा एक्ट के अधीन गुजरात में कौन-सी योजना अमल में रखी गयी ?
(A) माँ अन्नपूर्णा योजना
(B) मनरेगा
(C) अंत्योदय योजना
(D) सुकन्या समृद्धि योजना
Answer: (A) माँ अन्नपूर्णा योजना
In simple words: अन्न सुरक्षा अधिनियम के तहत, गुजरात में 'माँ अन्नपूर्णा योजना' को लागू किया गया है।
Exam Tip: किसी विशिष्ट अधिनियम (जैसे अन्न सुरक्षा एक्ट) से जुड़ी राज्य-स्तरीय योजनाओं को याद रखें। यह दर्शाता है कि आप कानूनों और उनके कार्यान्वयन को समझते हैं।
Question 6. युवा बेरोजगारों को नये विचारों के साथ उद्योग साहसी बनकर स्वरोजगार की तरफ कौन-सी योजना प्रेरित करती है ?
(A) मेक इन इण्डिया
(B) स्टार्टअप इण्डिया
(C) डिजिटल इण्डिया
(D) स्वच्छ भारत अभियान
Answer: (B) स्टार्टअप इण्डिया
In simple words: 'स्टार्टअप इंडिया' योजना युवा बेरोजगारों को नए विचारों के साथ उद्यमी बनने और स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित करती है।
Exam Tip: सरकारी योजनाओं के उद्देश्यों को समझें। जो योजनाएँ नवाचार, उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देती हैं, उनमें 'स्टार्टअप इंडिया' जैसे विकल्प प्रमुख होते हैं।
Question 7. बेरोजगारी निवारण के लिए कौन-सी संस्था नोकरीदाताओं को मदद करती है ?
(A) रोजगार विनिमय केन्द्र
(B) श्रम मंत्रालय
(C) मॉडल केरियर सेन्टर
(D) ग्रामपंचायत
Answer: (A) रोजगार विनिमय केन्द्र
In simple words: बेरोजगारी को कम करने के लिए, रोजगार विनिमय केंद्र नौकरी चाहने वालों को नियोक्ताओं से जुड़ने में मदद करते हैं।
Exam Tip: रोजगार से संबंधित संस्थाओं के कार्यों को जानें। 'रोजगार विनिमय केंद्र' का मुख्य कार्य नौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं को एक साथ लाना है।
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