GSEB Class 10 Hindi Rachana कहानी-लेखन Solutions

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 10 Hindi कहानी लेखन

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Gseb Std 10 Hindi Rachana कहानी-लेखन

प्रश्नपत्र में दी हुई रूपरेखा के आधार पर एक कहानी लिखने, उसे उचित शीर्षक देने और उससे मिलनेवाली सीख (बोध) लिखने के लिए कहा जाता है।

कहानी लिखते समय ध्यान में रखने योग्य बातें :

  1. सबसे पहले कहानी की रूपरेखा पढ़िए और उसका क्रमशः विस्तार कीजिए।
  2. कहानी पूरी होने के बाद अंत में एक-दो पंक्तियों में कहानी से मिलनेवाली सीख या बोध लिखिए। इसके लिए 1 अंक होता है। उचित सीख लिखने पर पूरे अंक दिए जाते हैं।
  3. कहानी के प्रसंग, मुख्य विचार या संदेश के आधार पर कहानी को छोटा-सा एवं आकर्षक शीर्षक दीजिए।
  4. कहानी लगभग 15-20 पंक्तियों में लिखनी होती है। कहानी में रूपरेखा के आधार पर तीन-चार परिच्छेद होने चाहिए। लेखन में विरामचिह का उचित प्रयोग करना चाहिए। कहानी की भाषा शुद्ध और मुहावरेदार होनी चाहिए। कहानी आरंभ से अंत तक रोचक होनी चाहिए।

कहानियों के नमूने

निम्नलिखित प्रत्येक रूपरेखा के आधार पर कहानी लिखकर शीर्षक एवं बोध लिखिए :

 

Question 1. एक गांव-गांव के बाहर रास्ते पर एक स्कूल-विद्यार्थियों का पढ़ने आना- एक विद्यार्थी का परीक्षा में चोरी करने का इरादा - पढ़ाई में ध्यान न देना-प्रथम परीक्षा में चोरी का मौका न मिलना-अनुत्तीर्ण होना- पछतावा होना-चोरी न करने का संकल्प-पढ़ाई में जुट जाना-अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होना-जीवन धन्य होना-चोरी न करने का इनाम-बोध।
Answer: संकल्प की शक्ति चंद्रपुर नाम के एक गाँव में थी। गाँव के बाहर एक अच्छी सड़क जाती थी। उसके पास एक विद्यालय था, जहाँ चंद्रपुर के ही नहीं, आसपास के गाँवों के बच्चे पढ़ने आते थे। सुरेश उसी विद्यालय में सातवीं क्लास का छात्र था। उसका मन पढ़ने में नहीं लगता था। खेलकूद और दोस्तों के साथ खेलने से उसे फुर्सत ही नहीं मिल पाती थी। उसके माता-पिता बहुत ही साधारण अवस्था में थे। सुरेश उनकी अकेली संतान था। कुछ ही समय में पहली परीक्षा आ गई। सुरेश ने पढ़ाई बिल्कुल नहीं की थी, पर उसे अपनी होशियारी पर बहुत विश्वास था। उसने परीक्षा में चीटिंग करके पास होने का फैसला किया। लेकिन परीक्षा में टीचर की नज़र बहुत तेज़ थी। सुरेश को चीटिंग करने का अवसर ही नहीं मिला। वह परीक्षा में बहुत बुरी तरह फेल हो गया। इससे उसके माता-पिता बहुत उदास हुए। उन्हें उदास देखकर सुरेश को भी बहुत अफ़सोस हुआ। सुरेश ने पक्का मन बना लिया कि अब वह परीक्षा में कभी चोरी नहीं करेगा और परिश्रम से पढ़ाई करके ही पास होगा। बस, फिर क्या था! वह दिन-रात एक करके पढ़ाई में लग गया। अगली परीक्षा में वह अच्छे नंबर्स से पास हुआ। उसके माता-पिता बहुत खुश हुए। सफलता पाकर सुरेश को भी अपना जीवन धन्य महसूस हुआ। सुरेश को लगा कि यह सफलता सचमुच उसके परिश्रम का ही पुरस्कार है।
In simple words: सुरेश, एक स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा था, जिसका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। वह परीक्षा में नकल करना चाहता था, लेकिन मौका नहीं मिला और फेल हो गया। उसे बहुत पछतावा हुआ, उसने चोरी न करने और मेहनत से पढ़ने का संकल्प लिया। अगली परीक्षा में वह अच्छे अंकों से पास हुआ, जिससे उसके माता-पिता बहुत खुश हुए और उसे लगा कि यह उसकी मेहनत का इनाम है।

Exam Tip: कहानी-लेखन में, दिए गए बिंदुओं को क्रम से विकसित करें और कहानी को एक स्पष्ट सीख या संदेश के साथ समाप्त करें। शीर्षक कहानी के मुख्य विचार को दर्शाता हो।

 

Question 2. भीड़ के लोगों का एक आदमी पर पत्थर फेंकना - एक महात्मा का आना-लोगों द्वारा उस व्यक्ति के पापों की शिकायत महात्मा से न्याय की मांग- महात्मा का न्याय - "ठीक है, पत्थर मारो, पर पहला पत्थर वह उठाए जो पूर्ण निष्पाप हो"-किसी का आगे न बढ़ना-भीड़ का चुप रहना - महात्मा का उपदेश - बोध।
Answer: एक महात्मा का न्याय
एक दिन सुबह रामपुर की मुख्य सड़क पर सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए थे। सभी लोग बीच में खड़े एक व्यक्ति पर पत्थर फेंक रहे थे। कई लोग उसे बुरा-भला भी बोल रहे थे। बहुत शोरगुल हो रहा था। वह व्यक्ति किसी तरह स्वयं को बचाने की कोशिश कर रहा था। भाग्य से उस तरफ से एक महान संत जा रहे थे। लोग उनका बहुत आदर करते थे। महात्मा ने भीड़ और शोर देखकर जैसे ही रुके, लोगों ने उनसे उस व्यक्ति के गुनाहों की शिकायत करना शुरू कर दिया। किसी ने कहा, 'यह बहुत बड़ा पापी है।' दूसरे ने बोला, 'यह चोर है, उसे दंड मिलना चाहिए।' तब तीसरे ने कहा, 'यह गलत काम करने वाला है, इसे सज़ा दो।' इतने में कुछ लोग महात्मा से निवेदन करने लगे, 'आप ही न्याय करें। इसे क्या सज़ा देनी चाहिए?' सबकी बातें ध्यान से सुनकर महात्मा ने बोला, "रुको, मैं फैसला करता हूँ। यह पापी है, गलत काम करने वाला है। इसे सज़ा मिलनी ही चाहिए। ठीक है, पत्थर फेंको, पर पहला पत्थर वह व्यक्ति उठाए जो पूरी तरह बेदाग हो, और किसी को उसे पत्थर फेंकने का हक नहीं है।" महात्मा की बात सुनकर भीड़ पूरी तरह खामोश हो गई। कोई एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा। ऐसा कौन है, जो पूरी तरह निर्दोष हो? फिर महात्मा ने धीरे से कहा, "सुनो दोस्तों, इस संसार में छोटे-मोटे अपराध तो सभी करते हैं। हमें गलतियाँ करने वालों को दंड देने की जगह उन्हें प्यार से बेहतर बनाना चाहिए।" महात्मा ने उस व्यक्ति को सीख देकर भेज दिया। महात्मा के बर्ताव और सीख का लोगों पर बहुत गहरा असर हुआ।
In simple words: एक बार लोग एक अपराधी पर पत्थर फेंक रहे थे। एक महात्मा ने आकर कहा कि पहला पत्थर वही फेंके जो खुद पूरी तरह निर्दोष हो। कोई आगे नहीं बढ़ा, और महात्मा ने समझाया कि हमें दूसरों को दंड देने की जगह प्रेम से सुधारना चाहिए।

Exam Tip: कहानी में किसी समस्या और उसके नैतिक समाधान को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ। महात्मा जैसे पात्रों के संवादों को प्रभावशाली बनाने के लिए सीधी और सरल भाषा का उपयोग करें।

 

Question 3. जंगल में बारहसिंगा - तालाब में पानी में अपने सुंदर सींगों का प्रतिबिंब देखना- उनकी सुंदरता पर गर्व- अपने पतले पैरों को देखकर दुःखी होना- अचानक एक चीते का आना- बारहसिंगा का पतले पैरों के बल भागना-एक झाड़ी में सींगों का उलझ जाना - निकलने का असफल प्रयत्न - प्रायश्चित्त - 'मेरी सुंदरता ही मेरी मौत का कारण।'
Answer: सुंदरता का महत्व अथवा बारहसिंगा के सींग
एक घना जंगल था। उसमें एक बारहसिंगा निवास करता था। एक दिन पानी पीने के लिए बारहसिंगा झील के किनारे पहुंचा। झील के साफ शीशे जैसे पानी में उसने अपनी छवि देखी। अपने मुड़े-तुड़े खूबसूरत सींगों को देखकर उसे बहुत अभिमान हुआ, लेकिन अपने पतले पैरों को देखकर वह उदास हो गया। उसने कहा, "काश! मेरे पैर भी मेरे सींगों जैसे सुंदर होते।" ठीक उसी समय एक चीता वहाँ आ गया। उसे देखते ही बारहसिंगा अपने पतले पैरों की ताकत से तेज़ी से भागा, लेकिन रास्ते में एक झाड़ी पार करते हुए उसके सींग झाड़ी में फंस गए। बहुत कोशिश करने पर भी वह झाड़ी में से सींगों को बाहर निकालने में सफल नहीं हो पाया। अब चीते से अपना बचाव असंभव देखकर उसे बहुत अफ़सोस हुआ और उसने कहा, "हाय! मेरे जिन सुंदर सींगों पर मुझे घमंड था, उन्हीं के कारण आज मेरी जान जा रही है।" तुरंत ही चीते ने उसे मार डाला।
In simple words: एक बारहसिंगा को अपने सुंदर सींगों पर गर्व था, लेकिन पतले पैरों पर दुख। जब एक चीता आया, तो उसके पतले पैरों ने उसे भागने में मदद की, लेकिन उसके सुंदर सींग झाड़ी में फंस गए। वह बाहर नहीं निकल पाया और मर गया। उसे समझ आया कि सुंदरता से ज़्यादा उपयोगिता महत्वपूर्ण है।

Exam Tip: कहानी लिखते समय, पात्रों की भावनाओं और उनकी सोच को स्पष्ट करें, खासकर जब वे किसी चीज़ पर गर्व करते हैं या पछताते हैं। अंत में, सीख को कहानी से सीधे जोड़ें।

 

Question 4. एक विद्यार्थी - परीक्षा में असफल होना-निराशा - घर छोड़कर जंगल में जाना - पेड़ पर मकड़ी को बार-बार चढ़ने का प्रयत्न करते देखना - सफलता का मार्ग मिलना-ध्यान से पढ़ना -सफल होना-बोध।
Answer: सफलता का रहस्य
दिनेश नौवीं क्लास का छात्र था। वह पढ़ाई के मामले में लापरवाह था। इसी कारण वह पढ़ाई में बहुत कमजोर रहा। इसका नतीजा यह हुआ कि वार्षिक परीक्षा में वह बुरी तरह फेल हो गया। इस हार ने उसे बहुत हताश कर दिया। एक दिन खुदकुशी करने की सोचकर वह अपने गाँव के पास के जंगल में चला गया। उसने एक बड़े पेड़ की शाखा में रस्सी बाँध दी। रस्सी का फंदा अपने गले में डालकर वह अपनी जान देना चाहता था। वह रस्सी का फंदा बना ही रहा था कि उसकी नज़र एक मकड़ी पर पड़ी जो पेड़ पर चढ़ रही थी। मकड़ी पेड़ की सबसे ऊपर वाली टहनी पर जाना चाहती थी, लेकिन थोड़ी ऊपर चढ़कर नीचे गिर जाती थी। इतने के बावजूद भी मकड़ी ने हिम्मत नहीं हारी और बार-बार प्रयास करती रही। आखिर में वह ऊँची टहनी पर पहुंच गई। मकड़ी की हिम्मत और कोशिश देखकर दिनेश बहुत प्रेरित हुआ। उसे सफलता का रास्ता मिल गया। उसके मन में जोश भर गया। खुदकुशी करने का विचार छोड़कर वह घर वापस आ गया। उस दिन से वह बहुत ध्यान लगाकर पढ़ने लगा। अंत में उसकी मेहनत रंग लाई और वह वार्षिक परीक्षा में अच्छे अंक पाकर पास हो गया।
In simple words: दिनेश नाम का एक छात्र पढ़ाई में कमजोर था और परीक्षा में फेल होने के बाद बहुत निराश हो गया। आत्महत्या के इरादे से जंगल गया, जहाँ उसने एक मकड़ी को बार-बार कोशिश करते देखा। मकड़ी से प्रेरणा लेकर, उसने मेहनत से पढ़ाई की और आखिर में सफल हो गया।

Exam Tip: प्रेरणादायक कहानियों में, मुख्य पात्र के संघर्ष, प्रेरणा स्रोत और अंत में उसकी सफलता को स्पष्ट रूप से उजागर करें। सीख को कहानी के मुख्य संदेश से जोड़ना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. दो मित्र - समुद्र में तूफान - नौका टूटना - दोनों का एक ही तख्ते का सहारा लेना- तख्ते केवल एक का भार संभालने में समर्थ - 'मेरी मां को संभालना' इस सूचना के साथ अविवाहित मित्र का तख्ते को छोड़ देना - दूसरे मित्र का बचना-सीख।
Answer: सच्ची दोस्ती अथवा मित्र ऐसा हो!
श्यामू और रामू बहुत अच्छे दोस्त थे। वे दोनों मछुआरे थे और सागर के पास एक गाँव में रहते थे। श्यामू की शादी हो चुकी थी और वह एक बच्चे का पिता बन गया था। रामू अभी अकेला था, उसकी शादी नहीं हुई थी। एक दिन दोनों दोस्त एक ही नाव में बैठकर समुद्र में मछलियाँ पकड़ने के लिए निकले। वे सागर में बहुत दूर तक चले गए। ठीक उसी समय अचानक आसमान का रंग बदलने लगा। तेज़ हवा चलने लगी और सागर में बहुत ऊँची-ऊँची लहरें उठने लगीं। दोनों दोस्त जिस नाव में बैठे थे, वह पुरानी हो चुकी थी। तूफानी लहरों के झटकों से वह टूट गई। उसका एक लकड़ी का टुकड़ा अलग हो गया। दोनों मित्र उस लकड़ी के टुकड़े पर बैठकर किनारे तक पहुँचने की कोशिश करने लगे, लेकिन वह टुकड़ा सिर्फ़ एक व्यक्ति का वज़न ही उठा सकता था। दोनों को लगा कि अगर वे इसी तरह टुकड़े पर रहे तो वे दोनों ही डूब जाएंगे। इस स्थिति में रामू ने बोला, "श्यामू, तुम इस टुकड़े पर ही रहो। मैं इसे छोड़ रहा हूँ। तुम्हारी पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी है। मेरी तो बस एक बूढ़ी माँ है। तुम मेरी माँ का भी ध्यान रखना।" श्यामू चिल्लाया – "नहीं।" लेकिन तब तक रामू ने टुकड़ा छोड़ दिया और देखते ही देखते वह तेज़ लहरों में समा गया। श्यामू किसी तरह किनारे तक पहुँच गया। रामू के बलिदान पर पूरे गाँव में दुख का माहौल था। सबकी ज़ुबान पर एक ही बात थी, "दोस्त हो तो रामू जैसा हो!"
In simple words: दो दोस्त नाव में मछली पकड़ने गए, तभी तूफान आ गया और नाव टूट गई। उन्हें एक ही लकड़ी का सहारा मिला, जो सिर्फ एक का भार उठा सकती थी। शादीशुदा दोस्त के परिवार के लिए, अविवाहित दोस्त ने अपनी जान दे दी, जिससे सच्ची दोस्ती और त्याग का उदाहरण बना।

Exam Tip: त्याग और निस्वार्थता दर्शाने वाली कहानियों में, भावनाओं और कठिन विकल्पों को स्पष्ट करें। संवादों का उपयोग पात्रों के चरित्र और उनके बलिदान को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए करें।

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