GSEB Class 10 Hindi Kshitij Solutions Chapter 9 संगतकार

Official GSEB Solutions for Class 10 Hindi: Chapter 09 संगतकार

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Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 09 संगतकार

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प्रश्न 1. संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है?
Answer: संगतकार के माध्यम से कवि उन व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाहता है जो अपने मुखिया की सफलता में विनम्रतापूर्वक सहायता करते हैं। ये लोग जीवन के हर क्षेत्र में काम करते हुए अपने मुख्य व्यक्ति को थोड़ा नीचे रहकर अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वे नींव की ईंट की तरह ही छिपे रहकर, अदृश्य रहते हुए भी, नींव को मजबूती प्रदान करते हैं और भवन को ऊँचाई तक ले जाते हैं। वे अपनी पहचान को पीछे रखकर दूसरे की कामयाबी में सहायक होते हैं।
In simple words: कवि ऐसे लोगों के बारे में बात कर रहे हैं जो दूसरों की सफलता में चुपचाप मदद करते हैं. वे खुद को पीछे रखकर, नींव की तरह मज़बूत सहारा देते हैं, ताकि कोई और आगे बढ़ सके.

Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में, संगतकार के गुण और उसके योगदान को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए, साथ ही उसके त्याग और विनम्रता का उल्लेख भी जरूरी है.

 

प्रश्न 2. संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं ?
Answer: संगतकार जैसे व्यक्ति प्रायः जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मिल जाते हैं। जैसे:
1. शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले कई अध्यापक विद्यालय के प्राचार्य के काम में संगतकार जैसी भूमिका निभाकर उन्हें यशस्वी बनाते हैं।
2. सेना और पुलिस के जवान अपने वरिष्ठ अधिकारियों के लिए हमेशा संगतकार की भूमिका में दिखते हैं।
3. राजनीति के क्षेत्र में मुख्य नेता को सहायता करने वाले एक बड़े नेता समूह होते हैं, जो अपने नेता के लिए संगतकार की तरह काम करते हैं।
4. गायक-गायिकाओं के संगतकार तो विश्व प्रसिद्ध हैं; वे गाने और बजाने, दोनों ही क्षेत्रों से जुड़े रहते हैं।
In simple words: सहायक लोग केवल संगीत में ही नहीं, बल्कि हर जगह पाए जाते हैं. जैसे शिक्षक, सैनिक, पुलिस और राजनेता के सहायक, ये सभी अपने मुखिया को सफल बनाने में मदद करते हैं.

Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्न का उत्तर देते समय, आपको विभिन्न क्षेत्रों से उदाहरण देकर अपनी बात को प्रमाणित करना चाहिए.

 

प्रश्न 3. संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं ?
Answer: संगतकार निम्नलिखित तरीकों से मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं -
1. मुख्य गायक-गायिका के स्वर में अपना स्वर मिलाकर उसे प्रभावी बनाते हैं।
2. मुख्य गायक-गायिका के तारसप्तक में चले जाने पर अपने स्वर से उसे संभाल लेते हैं।
3. मुख्य गायक-गायिका के राग से भटक जाने पर स्थायी पंक्ति को बार-बार दोहराकर उसे संभलने का अवसर देते हैं।
4. संगतकार मुख्य गायक-गायिका के स्वर में अपना स्वर मिलाकर उसे इस बात का अहसास दिलाते हैं कि वह अकेला नहीं है।
In simple words: संगतकार मुख्य गायक को कई तरीकों से मदद करते हैं. वे अपनी आवाज़ मिलाकर, ऊँची आवाज़ में सहारा देकर, और रास्ता भटकने पर सही राह दिखाकर उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने में सहायता करते हैं.

Exam Tip: उत्तर में संगतकार की भूमिका के मुख्य पहलुओं को सूचीबद्ध करना आवश्यक है, जिससे उनकी सहायता के विभिन्न रूप स्पष्ट हो सकें.

 

प्रश्न 4. भाव स्पष्ट कीजिए -
और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊंचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

Answer: संगतकार की आवाज़ में एक झिझक स्पष्ट सुनाई देती है क्योंकि वह जानबूझकर अपने स्वर को मुख्य गायक के स्वर से ऊपर नहीं जाने देता। इसके लिए वह बहुत प्रयास करता है। यह उसकी अयोग्यता या असफलता नहीं है, बल्कि उसकी मानवता है, ताकि मुख्य गायक, जो उसका आदरणीय है, उसकी आवाज़ कहीं दब न जाए। मुख्य गायक की पहचान और अस्तित्व कम न हो। कवि ने इसे संगतकार का मानवीय गुण माना है।
In simple words: संगतकार जानबूझकर अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से कम रखते हैं, ताकि मुख्य गायक की आवाज़ दब न जाए. यह उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी अच्छाई और इंसानियत है.

Exam Tip: इस भावार्थ को स्पष्ट करते समय, संगतकार के त्याग और मानवीयता पर जोर देना चाहिए, और यह बताना चाहिए कि यह उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि एक सकारात्मक गुण है.

 

प्रश्न 5. किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पानेवाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। किसी एक उदाहरण द्वारा इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
Answer: प्रसिद्ध लोगों के जीवन को पास से देखने पर पता चलता है कि उनकी प्रसिद्धि में घर-परिवार, गाँव-समाज तथा सहकर्मियों का योगदान या सहयोग अवश्य रहता है। शिवाजी को छत्रपति बनने में नेपथ्य में रह गए व्यक्तियों – माता जीजाबाई, गुरु रामदास, कोंणदेव तथा उनके सेनापतियों और सैनिकों का प्रचंड योगदान रहा है। इन सभी ने शिवाजी को एक महान शासक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, भले ही वे सीधे तौर पर सामने न आए हों। उनका समर्थन और मार्गदर्शन ही शिवाजी की सफलता का आधार बना।
In simple words: किसी भी सफल व्यक्ति के पीछे कई लोगों का योगदान होता है, जैसे परिवार, दोस्त और साथी. शिवाजी महाराज की सफलता में उनकी माँ जीजाबाई और गुरु रामदास जैसे लोगों ने बहुत मदद की.

Exam Tip: उत्तर देते समय, एक स्पष्ट उदाहरण का उपयोग करें और समझाएं कि कैसे विभिन्न लोग पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, भले ही वे सीधे श्रेय न लें.

 

प्रश्न 6. 'कभी-कभी तारसप्तक की ऊंचाई पर पहुंचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नजर आता है, उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है। इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मुख्य गायक अपनी आवाज़ को ऊँचा करते हुए तारसप्तक तक ले जाते हैं, तब कभी-कभी उनकी आवाज़ बिखरने लगती है और स्वर बैठने लगता है। मुख्य गायक की इस स्थिति में संगतकार उसे समझते हैं। निराश हुए मुख्य गायक को सहारा देने के लिए संगीत की स्थायी पंक्ति (टेक) को गाकर स्वर के बचा लेने की भूमिका से बचाने के साथ ही उसे इस बात का भी अनुभव करवाते हैं कि मुख्य गायक अकेला नहीं है। संगतकार अपनी स्थिरता और समर्थन से मुख्य गायक को फिर से लय में लाने में मदद करते हैं, जिससे पूरा गायन बिना किसी बाधा के चलता रहता है।
In simple words: जब मुख्य गायक बहुत ऊँची आवाज़ में गाते हुए थक जाते हैं और उनका स्वर बिगड़ने लगता है, तब संगतकार उन्हें सहारा देते हैं. वे स्थायी पंक्ति गाकर उन्हें याद दिलाते हैं कि वे अकेले नहीं हैं और गायन को संभाल लेते हैं.

Exam Tip: संगतकार की इस भूमिका में उसके भावनात्मक और तकनीकी समर्थन दोनों को उजागर करें, और बताएं कि वह कैसे मुख्य गायक को आत्मविश्वास और स्थिरता प्रदान करता है.

 

प्रश्न 7. सफलता के चरम शिखर पर पहुंचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है तब उसके सहयोगी उसे किस प्रकार संभालते हैं ?
Answer: सफलता के सबसे ऊँचे शिखर पर पहुँचने के समय लड़खड़ाने वाले व्यक्ति को उसके सहयोगी इस प्रकार संभालते हैं: वे उसे विश्वास दिलाते हैं कि सब उसके साथ हैं और उसका आत्मबल बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं। स्वयं आगे बढ़कर एक सुरक्षा कवच बनकर उसके साहस की प्रशंसा करते हैं। उसके लड़खड़ाने के कारणों की खोजबीन करके उनका समाधान ढूँढने में सहयोगी अपनी सारी ऊर्जा लगा देते हैं। पूर्ण आत्मीयता के साथ उसकी देखभाल करते हैं, जिससे वह व्यक्ति फिर से उठ खड़ा हो और अपनी यात्रा जारी रख सके।
In simple words: जब कोई व्यक्ति सफलता के रास्ते पर लड़खड़ाता है, तो उसके साथी उसे हिम्मत देते हैं. वे उसे बताते हैं कि सब उसके साथ हैं, उसकी समस्याओं को हल करने में मदद करते हैं और उसे पूरा सहयोग देते हैं.

Exam Tip: इस उत्तर में सहयोगियों की भूमिका को मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक दोनों दृष्टिकोणों से स्पष्ट करें, जिसमें भावनात्मक समर्थन और समस्या-समाधान शामिल हो.

Hindi Digest Std 10 GSEB संगतकार Important Questions and Answers

भावार्थग्रहण संबंधी प्रश्न

 

प्रश्न 1. भटके स्वर को संगतकार कब संभालता है ? इसका मुख्य गायक पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: संगतकार मुख्य गायक के भटके स्वर को उस समय संभाल लेता है जब कभी मुख्य गायक गाते समय बीच के अंतरे की जटिल तान में भटककर सरगम की सीमा पार कर जाता है और अनहद में चला जाता है। इससे मुख्य गायक को सहारा मिलता है और उसका गायन प्रभावशाली बना रहता है। संगतकार की मदद से मुख्य गायक को अपनी गलती का एहसास होता है और वह वापस सही लय में आ जाता है, जिससे उसका आत्मविश्वास बना रहता है।
In simple words: संगतकार मुख्य गायक की आवाज़ को तब संभालते हैं जब वह गायन में भटक जाता है. इससे मुख्य गायक को मदद मिलती है और उसका गाना अच्छा बना रहता है.

Exam Tip: संगतकार के हस्तक्षेप का समय और उसके मुख्य गायक पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए, जिससे उत्तर पूर्ण लगे.

 

प्रश्न 2. संगतकार की अहमियत कब पता चलती है ?
Answer: वैसे तो संगतकार का महत्व हमेशा ही बना रहता है, लेकिन जब कभी मुख्य गायक सरगम को पार कर अनहद में चला जाता है, तब पुनः स्थायी को बार-बार दोहराकर सरगम की ओर वापस लाने का काम करने वाले संगतकार की अहमियत का पता चलता है। इस दौरान संगतकार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर मुख्य गायक को सही रास्ते पर वापस लाते हैं, जिससे पूरा प्रदर्शन सफल होता है। उनकी असली कीमत ऐसे संकट के समय ही सबसे ज्यादा उभर कर सामने आती है।
In simple words: संगतकार का महत्व तब पता चलता है जब मुख्य गायक गायन में भटक जाते हैं. ऐसे समय में, संगतकार ही स्थायी पंक्ति दोहराकर मुख्य गायक को सही रास्ते पर लाते हैं.

Exam Tip: उत्तर में संगतकार की आवश्यकता को संकट के समय में उसकी निर्णायक भूमिका से जोड़कर स्पष्ट करें.

 

प्रश्न 3. यहां नौसिखिया किसे कहा गया है?
Answer: नौसिखिया का अर्थ है नया सीखने वाला। नौसिखिया यहाँ पर मुख्य गायक को उसके गायन के शुरुआती दिनों की याद दिलाने के लिए उपयोग किया गया है। जब मुख्य गायक नौसिखिया थे, तब भी वह ऐसा ही काम करते थे, यानी उन्हें भी सीखने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था। यह शब्द मुख्य गायक के विनम्र स्वभाव और अपनी शुरुआती गलतियों को स्वीकार करने की भावना को दर्शाता है।
In simple words: नौसिखिया का मतलब है नया सीखने वाला. यहाँ यह शब्द मुख्य गायक के शुरुआती दिनों को याद दिलाने के लिए इस्तेमाल हुआ है, जब वह भी नया था.

Exam Tip: 'नौसिखिया' शब्द के शाब्दिक अर्थ के साथ-साथ कविता में इसके प्रतीकात्मक प्रयोग को भी समझाना आवश्यक है.

 

प्रश्न 4. मुख्य गायक को कब आभास होने लगता है कि आवाज़ उसका साथ नहीं दे रहा है?
Answer: मुख्य गायक की आवाज़ तारसप्तक तक पहुँचने के बाद जब कमजोर होने लगती है, गला बैठने लगता है, प्रेरणा साथ छोड़ने लगती है, और उसका उत्साह मंद पड़ने लगता है, तब उसे यह अनुभव होने लगता है कि उसकी आवाज़ अब उसका साथ नहीं दे रही है। इस स्थिति में वह अपनी क्षमता पर संदेह करने लगते हैं और उन्हें लगता है कि उनका प्रदर्शन बिगड़ रहा है।
In simple words: जब मुख्य गायक की आवाज़ कमजोर पड़ने लगती है, गला बैठ जाता है, और उत्साह कम हो जाता है, तब उन्हें लगता है कि उनकी आवाज़ अब उनका साथ नहीं दे रही है.

Exam Tip: मुख्य गायक की आंतरिक और बाहरी स्थिति का वर्णन करें जिससे उसे अपनी आवाज़ के साथ छोड़ देने का एहसास होता है.

 

प्रश्न 5. 'आवाज़ से राख जैसा गिरता हुआ' से क्या तात्पर्य है ?
Answer: मुख्य गायक की आवाज़ तारसप्तक तक पहुँचकर कमजोर होने लगती है। आवाज़ के कमजोर होने की प्रक्रिया को कवि ने 'राख जैसा कुछ गिरता हुआ' कहा है। इसका अर्थ है कि आवाज़ में पहले जैसी शक्ति और चमक नहीं रहती, वह धीरे-धीरे मंद पड़ जाती है, जैसे आग बुझने पर राख बच जाती है। यह गायक की थकान और निराशा को दर्शाता है।
In simple words: 'आवाज़ से राख जैसा गिरता हुआ' का मतलब है कि मुख्य गायक की आवाज़ थक कर धीमी और कमजोर हो गई है, जैसे आग बुझकर राख बन जाती है.

Exam Tip: इस पंक्ति के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें और बताएं कि यह मुख्य गायक की शारीरिक और मानसिक स्थिति को कैसे दर्शाता है.

 

प्रश्न 6. कठिन परिस्थिति में संगतकार मुख्य गायक को क्या अहसास दिलाता है ? कैसे ?
Answer: कठिन परिस्थिति में संगतकार मुख्य गायक को यह अहसास दिलाते हैं कि आप अकेले नहीं हैं। बिगड़ते हुए राग को अपना स्वर देकर उसे संवार देते हैं। इस तरह वह गायन को संभाल लेते हैं और बिगड़ने से बचा लेते हैं। संगतकार अपने धैर्य और समर्थन से मुख्य गायक को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं, जिससे वह अपनी प्रस्तुति जारी रख पाता है। वे उसे याद दिलाते हैं कि उसके पीछे हमेशा एक मजबूत सहारा मौजूद है।
In simple words: मुश्किल समय में संगतकार मुख्य गायक को बताते हैं कि वे अकेले नहीं हैं. वे अपनी आवाज़ मिलाकर बिगड़े हुए गाने को ठीक करते हैं और उसे खराब होने से बचा लेते हैं.

Exam Tip: संगतकार के भावनात्मक समर्थन और व्यावहारिक हस्तक्षेप दोनों को उत्तर में शामिल करें, जिससे उसकी भूमिका पूरी तरह से स्पष्ट हो.

 

प्रश्न 7. 'संगतकार' की आवाज़ में कौन-सी हिचक स्पष्ट सुनाई देती है ?
Answer: संगतकार की आवाज़ में अपनी आवाज़ को मुख्य गायक/गायिका की आवाज़ से ऊँचा न उठाने की हिचक स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। यह हिचक उसके सम्मान, विनम्रता और समर्पण की निशानी है। वह जानबूझकर अपनी प्रतिभा को मुख्य गायक के सामने दबने नहीं देता, बल्कि उसे सहायता प्रदान करने के लिए अपनी आवाज़ को नियंत्रित रखता है। यह उसकी मानवीयता और जिम्मेदारी की भावना को दिखाता है।
In simple words: संगतकार की आवाज़ में एक झिझक सुनाई देती है, जो यह दिखाती है कि वह जानबूझकर अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं उठाना चाहते. यह उनकी विनम्रता और समर्पण का प्रतीक है.

Exam Tip: हिचक को केवल कमजोरी के रूप में नहीं, बल्कि संगतकार के एक नैतिक और मानवीय गुण के रूप में व्याख्या करें.

अतिरिक्त – प्रश्न

 

प्रश्न 1. किसी भी क्षेत्र में संगतकार वर्ग के लोग प्रतिभावान होते हुए भी मुख्य या शीर्षस्था पर क्यों नहीं पहुंच पाते?
Answer: संगतकार वर्ग के लोग प्रतिभावान होने के बावजूद स्वयं को सदैव सहायक के रूप में काम करते हैं, जिससे उनकी वैसी ही आदत बन जाती है। इस कारण उनमें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन स्वतंत्र रूप से करने का साहस नहीं आता। कभी-कभी मुख्य व्यक्ति भी सतर्क होकर संगतकार को मुख्य व्यक्ति की भूमिका में आने का अवसर नहीं देते, जिससे वे संकुचित स्वभाव के बने रह जाते हैं। यह उनकी स्वयं की सीमाएं और सामाजिक संरचना दोनों का परिणाम है।
In simple words: संगतकार जैसे प्रतिभाशाली लोग मुख्य भूमिका में इसलिए नहीं आ पाते क्योंकि वे हमेशा सहायक का काम करते हैं. उन्हें खुद को स्वतंत्र रूप से दिखाने की हिम्मत नहीं मिलती, और मुख्य लोग भी उन्हें आगे बढ़ने का मौका नहीं देते.

Exam Tip: उत्तर में संगतकार की आंतरिक प्रवृत्ति (आदत) और बाहरी कारक (मुख्य व्यक्ति का अवसर न देना) दोनों को शामिल करें, जिससे विश्लेषण संतुलित हो.

 

प्रश्न 2. संगतकार की क्या भूमिका होती है ? इसके द्वारा कवि समाज के किस तरह के व्यक्तियों की तरफ इशारा कर रहा है ?
Answer: संगतकार मुख्य गायक/गायिका के साथ सहयोग में गाने या बजाने वाला वह व्यक्ति है जो मुख्य गायक के पीछे-पीछे टेक की पंक्ति स्थायी गाता है और अपनी उपस्थिति का अहसास कराते हुए उसका साथ देने के लिए उसके समीप रहता है। इस कविता के माध्यम से कवि यह कहना चाहते हैं कि समाज के हर क्षेत्र में संगतकार जैसे व्यक्ति होते हैं, जो मुख्य व्यक्ति की सफलता और प्रसिद्धि में चुपचाप योगदान देने को सदैव तैयार रहते हैं और उसे ही अपना कर्तव्य मानते हैं। वे ऐसे सहायक होते हैं जो बिना किसी श्रेय के दूसरों को सफल बनाते हैं।
In simple words: संगतकार वह व्यक्ति है जो मुख्य गायक को गाने या बजाने में मदद करता है. कवि ऐसे सहायक लोगों की ओर इशारा कर रहे हैं जो समाज में दूसरों की सफलता के लिए चुपचाप काम करते हैं और इसे अपना कर्तव्य मानते हैं.

Exam Tip: संगतकार की भूमिका को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और फिर उसे समाज के व्यापक संदर्भ से जोड़कर समझाएं कि कवि किन व्यक्तियों की बात कर रहा है.

 

प्रश्न 3. संगतकार चाहकर भी अपना स्वर मुख्य गायक से कभी ऊँचा नहीं करता है। क्या यह उसका दायित्वबोध है या और कुछ ?
Answer: संगीत के आयोजन में संगतकार कभी भी चाहकर भी अपना स्वर मुख्य गायक से ऊँचा नहीं करते, वास्तव में यह संगतकार का दायित्व बोध ही है। क्योंकि यदि संगतकार का स्वर मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा हो जाएगा तो संगीत आयोजन का उद्देश्य और सफलता प्रभावित होगी। यदि संगतकार को ऐसा लगने लगे कि मेरा स्वर मुख्य गायक से श्रेष्ठ है, उत्तम है तो मुख्य गायक की प्रतिभा कमजोर होगी जो पूरे आयोजन को प्रभावित करे बिना नहीं रहेगी। इसलिए उत्तम संगतकार सदैव सहयोगी की भूमिका में ही रहना उचित और श्रेष्ठकर मानता है। यह उसकी पेशेवर नैतिकता और समर्पण का प्रतीक है।
In simple words: संगतकार अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं उठाते, यह उनकी जिम्मेदारी है. अगर वे ऐसा करेंगे तो पूरे संगीत कार्यक्रम और मुख्य गायक के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा. एक अच्छा संगतकार हमेशा सहायक की भूमिका में ही रहता है.

Exam Tip: इस उत्तर में संगतकार के दायित्वबोध को स्पष्ट करें और बताएं कि यह केवल उसकी इच्छा नहीं, बल्कि पूरे प्रदर्शन की सफलता के लिए एक अनिवार्य गुण है.

 

प्रश्न 4. संगतकार कविता में कवि क्या संदेश देना चाहता है ?
Answer: 'संगतकार' कविता के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि मुख्य गायक की गायकी को सफल बनाने के दायित्व बोध से संगतकार कभी भी मुख्य गायक से अपनी आवाज़ को ऊँचा नहीं करते। इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि वह कमजोर हैं या असफल हैं। कवि आगे कहते हैं कि यह संगतकार की विफलता नहीं अपितु मानवता है जो अपने अस्तित्व को छिपाए रखकर मुख्य गायक के लिए रास्ता बनाते हैं। कवि इस कविता के माध्यम से समाज में उन गुमनाम नायकों के महत्व को उजागर करते हैं जो दूसरों की सफलता में निस्वार्थ भाव से योगदान देते हैं।
In simple words: कवि 'संगतकार' कविता से यह संदेश देना चाहते हैं कि सहायक लोग जानबूझकर अपनी प्रतिभा को नहीं दिखाते. यह उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि इंसानियत है, ताकि मुख्य कलाकार सफल हो सकें.

Exam Tip: कविता के केंद्रीय संदेश को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से व्यक्त करें, जिसमें संगतकार के महत्व और मानवीय गुण पर जोर दिया जाए.

 

प्रश्न 5. मुख्य गायक और संगतकार की परंपरा के औचित्य पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: मुख्य गायक/गायिका और संगतकार की परंपरा सदियों से हमारे देश में चली आ रही है। हमारे गायकी के घराने इसी परंपरा का प्रतिफल हैं। इस परंपरा को समाप्त नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इसका महत्व निर्विवाद है। इसलिए ऐसा लगता है कि यह परंपरा उचित ही है। आज के युग में जहाँ सभी परंपराओं में परिवर्तन हो रहा है या किया जा रहा है, वहाँ इस परंपरा में मुख्य गायक और संगतकार के अंत: संबंधों में भी कुछ परिवर्तन तो आया है किंतु वह पूरी तरह नहीं बदला है। दोनों का पारस्परिक संबंध इस परंपरा को टिकाए हुए है और इसे भविष्य में भी जारी रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: मुख्य गायक और संगतकार की परंपरा बहुत पुरानी है और इसका महत्व बहुत है. आज भी इसमें कुछ बदलाव आए हैं, लेकिन यह परंपरा बनी हुई है, जो दोनों के रिश्तों को मजबूत करती है.

Exam Tip: परंपरा के ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान प्रासंगिकता दोनों पर चर्चा करें, साथ ही इसके महत्व को उजागर करें.

 

प्रश्न 6. 'संगतकार' कविता में संगतकार त्यागमूर्ति है, कैसे ?
Answer: 'संगतकार' त्याग की मूर्ति हैं, क्योंकि उसका पूरा जीवन मुख्य गायक के लिए समर्पित हो जाता है। उसकी सामर्थ्य और योग्यता मुख्य गायक की सफलता को अर्पित हो जाती है। संगतकार कभी भी मुख्य गायक को पीछे छोड़कर उससे आगे निकलने का प्रयास नहीं करते। यह संभव है कि संगतकार के मन में उससे आगे निकलने की भावना हो, तब वह या तो उसे दबा देता है अथवा मुख्य गायक से अलग होकर अपनी अलग टीम बना सकता है। दोनों ही स्थितियों में त्याग अनिवार्य बन जाता है, क्योंकि वह अपने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर दूसरों की सफलता को प्राथमिकता देते हैं।
In simple words: संगतकार त्याग की मूर्ति हैं क्योंकि वे अपना पूरा जीवन मुख्य गायक की सफलता के लिए समर्पित कर देते हैं. वे कभी खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं करते, बल्कि अपनी इच्छाओं को दबाकर दूसरों को सफल बनाते हैं.

Exam Tip: उत्तर में त्याग के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करें, जिसमें व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का बलिदान और दूसरों की सफलता को प्राथमिकता देना शामिल हो.

संगतकार Summary in Hindi

कवि – परिचय :

मंगलेश डबराल का जन्म उत्तराखंड के काफल पानी गाँव (जिला-टेहरी-गढ़वाल) में सन् 1948 में हुआ और शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई। पत्रकारिता को आपने अपना कार्यक्षेत्र बनाया। आरंभ में दिल्ली में 'हिंदी पेट्रियट', 'प्रतिपक्ष' और 'आसपास' में काम किया। तत्पश्चात् भारत भवन, भोपाल से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका 'पूर्वग्रह' में सहायक संपादक हुए।

इलाहाबाद तथा लखनऊ से प्रकाशित 'अमृत प्रभात' में भी थोड़े दिनों तक नौकरी की। सन् 1983 में 'जनसत्ता' अखबार में साहित्य संपादक बने। कुछ समय तक "सहारा समय" में संपादन कार्य करने के बाद 'नेशनल बुक ट्रस्ट' से जुड़े। मंगलेश डबराल के चार कविता संकलन प्रकाशित हैं – 'पहाड़ पर लालटेन', 'घर का रास्ता', 'हम जो देखते हैं' और 'आवाज भी एक जगह है।'

कविता के अतिरिक्त वे साहित्य, सिनेमा, समूह माध्यमों और संस्कृति के सवालों पर लगातार लेखन करते रहे हैं। मंगलेशजी की ख्याति एक अनुवादक के रूप में भी है। मंगलेश डबराल की कविताओं में सामंती बोध तथा पंजीवादी छल-छद्म दोनों का प्रतिकार है। उनका यह प्रतिकार किसी प्रचार या नारेबाजी के बिना प्रतिपक्ष में एक सुंदर स्वप्न के रूप में साकार होता है।

उनका सौंदर्यबोध सूक्ष्म है और भाषा पारदर्शी। कविताओं के लिए उन्हें पहल सम्मान तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनकी कविताएं भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अनेक यूरोपीय भाषाओं – अंग्रेजी, जर्मन, रूसी, स्पेनिश और बल्गारी इत्यादि में अनुवादित होकर प्रकाशित हो चुकी हैं।

'संगतकार' संगीत-नृत्य विद्या से जुड़ा शब्द है, जिसका मतलब है गायन या वादन में गायक या नर्तक के लिए गाने वाला या वाद्य बजाने वाला सहयोगी कलाकार।

यह कविता गायन में मुख्य गायक का साथ देने वाले सहयोगी कलाकार – 'संगतकार' के महत्व का चित्रण करती है। संगतकार का महत्व दृश्य-श्राव्य माध्यमों के लिए तो सही है ही, समाज और इतिहास में भी ऐसे अनेक उदाहरण देखे जा सकते हैं, जहाँ नायक की सफलता में कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह कविता हमारे अंदर यह सूक्ष्म संवेदनाशीलता विकसित करती है कि प्रत्येक संगतकार का अपना-अपना महत्व है और उसका मंच पर दिखाई न देना उसकी कमजोरी नहीं अपितु मानवीयता है। कविता की बिम्बात्मकता और संगीत की सूक्ष्म समझ इस कविता को इस तरह गतिमान करते हैं मानो हम इसे अपने सम्मुख प्रत्यक्ष करते हैं।
1. मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती वह आवाज़ सुंदर कमजोर कांपती हुई थी

वह मुख्य गायक का छोटा भाई है
या उसका शिष्य
या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार
मुख्य गायक की गरज में
वह अपनी गूंज मिलाता आया है प्राचीन काल से
गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को संभाले रहता है
जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
जब वह नौसिखिया था।

भावार्थ:

कवि का कथन है कि मुख्य गायक की चट्टान जैसी भारी आवाज़ का साथ देने वाली सुंदर, कमजोर काँपती हुई आवाज संगतकार की थी। संगतकार मुख्य गायक का छोटा भाई या उसका शिष्य अथवा दूर-दराज से पैदल चलकर उसके पास गायन सीखने के लिए आने वाला कोई रिश्तेदार हो सकता है।

संगतकार पुराने समय से ही मुख्य गायक की ऊँची और गंभीर आवाज़ में अपना स्वर मिलाता चला आ रहा है। जब कभी मुख्य गायक संगीत की कठिन तानों में भटक जाता है यानी स्वर के साथ ठीक से गा नहीं पाता, उस समय संगतकार ही उसके स्वर को संभालता है। कभी-कभी मुख्य गायक इतना भटक जाता है कि अनहद् की गूंज में लड़खड़ाता है, तब संगतकार गीत के प्रथम चरण-अंतरा को गा-गाकर परिस्थिति को बिगड़ने से संभाल लेता है, संभाले रखता है।

इस भूमिका में उसे ऐसा प्रतीत होता है मानो वह मुख्य गायक के छूट गए सामानों को समेट रहा हो। ऐसा करके वह मुख्य गायक को यह अहसास दिलाता है कि जब मुख्य गायक नौसिखिया था तब वह भी ऐसा ही करता था।
2. तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढांढस बंधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है

और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग
और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊंचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

भावार्थ :

कवि के मतानुसार संगतकार का महत्व केवल मुख्य गायक की सहायता करने के कारण ही नहीं है, बल्कि उसके अपने मानवीय गुणों के कारण भी उसका महत्व है। कवि का कथन है कि मुख्य गायक जब उच्च (तार) स्वर में गाते हैं तब उसकी आवाज़ तारसप्तक तक पहुँच जाती है। तार स्वर में गाने के कारण उसका गला बैठने लगता है, आवाज़ भर्राने लगती है, प्रेरणा उसका साथ छोड़ने लगती है, उसका उत्साह कम होने लगता है।

उसे यह लगने लगता है कि उसकी आवाज़ उसका साथ नहीं दे रही है। निराशा गायक पर अपना प्रभाव दिखलाने लगती है तब संगतकार उसे ढाढ़स बंधाते हुए प्रोत्साहित करते हैं। संगतकार मुख्य गायक का साथ देकर उसे इस बात की प्रतीति कराते हैं कि वह अकेला नहीं है। उसे संकेत देते हैं कि राग बिगड़ गया है, तुम इसे फिर से गा सकते हो।

संकोचवश संगतकार अपनी आवाज़ को मुख्य गायक की आवाज़ जितनी ऊँची नहीं करते। उसमें ऐसा कर सकने की सामर्थ्य नहीं है, ऐसी बात नहीं है अथवा वैसा करने में वह विफल हो जाते हैं बल्कि यह उसकी मानवीयता है। वह मुख्य गायक को अपनी श्रद्धा का पात्र मानते हैं अतः उसकी बराबरी नहीं करते। संगतकार की यह मानवीय संवेदना वास्तव में प्रशंसनीय है।

शब्दार्थ-टिप्पण :

  • संगतकार – मुख्य गायक के साथ-साथ गानेवाला, बाद्यकार, सहयोगी
  • मुख्य गायक – पहले गानेवाला गायक, प्रमुख
  • गायक – गरज ऊंची गंभीर आवाज़
  • अंतरा – गीत को टेक, गीत का पहला चरण
  • जटिल – कठिन
  • तान – संगीत के स्वर का विस्तार
  • सरगम संगीत के स्वर
  • लांघकर – पार करके
  • समेटना – इकट्ठा करता हुआ
  • नौसिखिया – सीखने के लिए नया-नया आया व्यक्ति
  • अनहद – हद (सीमा) न हो जिसका, हद के बाहर
  • स्थायी – टेक, टेक की पंक्ति,
  • तारसप्तक – मध्य सप्तक के ऊपर की ध्वनि
  • सप्तक – संगीत के सात स्वर (सा रे ग म प ध और नी)
  • अस्त होना – छिपना, डूबना
  • राख-जैसा कुछ गिरता हआ – बुझता स्वर
  • ढाढस बंधाना – सांत्वना देना
  • हिचक – संकोच, झिझक
  • विफलता – असफलता
  • मनुष्यता – मानवता

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