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प्रश्न-अभ्यास
Question 1. लेखक को नवाब के किन-किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सक नहीं है?
Answer: जब लेखक सेकंड क्लास के डिब्बे में बैठे, नवाब साहब को देखकर उनके चेहरे पर असंतोष छा गया। उन्हें लगा जैसे उनके एकांत में बाधा पड़ गई हो। वे उदास मन से खिड़की के बाहर देखते रहे और लेखक को अनदेखा करने का नाटक करते रहे। इन हाव-भावों को देखकर लेखक को लगा कि नवाब साहब उनसे बात करने के लिए बिल्कुल इच्छुक नहीं हैं।
In simple words: लेखक को लगा कि नवाब उनसे बात नहीं करना चाहते थे क्योंकि नवाब ने उन्हें देखकर नाराजगी दिखाई और खिड़की से बाहर देखते हुए नजरअंदाज करने का नाटक किया।
Exam Tip: नवाब साहब के हाव-भावों का विस्तार से वर्णन करें, जैसे असंतोष, एकांत में बाधा, और अनदेखा करना, ताकि उत्तर प्रभावी लगे।
Question 2. नवाब साहब ने बहुत ही यल से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका अंततः सूंघकर खिड़की के बाहर फेंक दिया । उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा ? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है?
Answer: नवाबों की आदत होती है अपनी शान-शौकत का दिखावा करना। उन्होंने इसी प्रदर्शन के लिए खीरा काटा, नमक-मिर्च लगाया और अंत में सूंघकर खिड़की के बाहर फेंक दिया। असल में, वे अपनी नवाबी का प्रदर्शन करना चाहते थे। उनके अनुसार, खीरा जैसी छोटी चीज खाकर वे अपनी इज्जत नहीं गँवाना चाहते थे। खीरा खाकर पेट भरना आम लोगों का काम है। उनका यह व्यवहार नवाबी प्रदर्शन और अमीरी दिखाने की ओर इशारा करता है।
In simple words: नवाब ने खीरा काटकर, नमक-मिर्च लगाकर सूंघा और फेंक दिया क्योंकि वे अपनी नवाबी शान दिखाना चाहते थे। यह उनके दिखावटी और अहंकारी स्वभाव को बताता है।
Exam Tip: नवाब साहब की क्रियाओं को विस्तार से समझाएं और उनके पीछे के छिपे हुए अभिप्राय को स्पष्ट करें, जैसे शान-शौकत का प्रदर्शन और तुच्छ वस्तु से दूरी।
Question 3. बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती हैं ? यशपाल के इस विचार से आप कहां तक सहमत हैं?
Answer: 'लखनवी अंदाज़' के माध्यम से यशपाल कहते हैं कि यदि खीरा सूंघकर ही व्यक्ति को संतुष्टि मिल सकती है, तो बिना विचार, घटना और पात्रों के कहानी भी लिखी जा सकती है। मैं यशपालजी के इस विचार से सहमत नहीं हूँ। हर कहानी का कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है, उसमें पात्रों और घटनाओं के विचारों की प्रस्तुति होती है। उसमें किसी चरित्र का वर्णन होता है। इन सभी वजहों से कहानी में रोचकता आती है और पाठकों में पढ़ने की उत्सुकता बनी रहती है। कहानी में यह सब न होने पर वह केवल कोरी कल्पना बन जाएगी। इसलिए मेरे हिसाब से कहानी में विचार, घटना और पात्रों का होना जरूरी है। तभी कहानी आकर्षक होगी।
In simple words: यशपाल का कहना है कि बिना कहानी के तत्वों के भी कहानी बन सकती है। लेकिन, मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ क्योंकि कहानी के लिए उद्देश्य, पात्र और घटनाओं का होना जरूरी है ताकि वह रोचक लगे।
Exam Tip: यशपाल के विचार को स्पष्ट करें और फिर अपने तर्क के साथ अपनी असहमति या सहमति को मजबूत उदाहरणों से प्रस्तुत करें।
Question 4. आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?
Answer: मेरे अनुसार इस निबंध का और नाम हो सकता है -
• दिखावा प्रदर्शन
• थोड़ा अलग होना
• नवाबी दिखावा आदि
In simple words: इस निबंध के लिए कुछ अन्य नाम 'दिखावा प्रदर्शन', 'थोड़ा अलग होना', या 'नवाबी दिखावा' हो सकते हैं।
Exam Tip: सुझाए गए शीर्षक कहानी के मुख्य विषय, जैसे दिखावा या नवाबों के व्यवहार को दर्शाने वाले होने चाहिए।
रचना और अभिव्यक्ति
Question 5. क. नवाब साहब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
Answer: नवाब द्वारा खीरा काटने की प्रक्रिया इस प्रकार से वर्णित है: "नवाब साहब ने तौलिए पर रखे दो खीरों को खिड़की के बाहर धोया। उसके बाद उन्हें तौलिए से अच्छी तरह पोंछ लिया। उन्होंने अपनी जेब से चाकू निकाला। खीरे के सिर काटकर उन्हें अच्छी तरह से गोदकर झाग निकाला। फिर उन्हें काटकर फेंक दिया। उसके बाद खीरे को ध्यान से छीला। उसकी फाँके काटकर तौलिया बिछाकर उसे व्यवस्थित रूप से सजा देते हैं। फिर कटी हुई फांकों पर जीरा मिश्रित नमक-मिर्च छिड़का। इस प्रकार नवाब साहब खीरा खाने की तैयारी करते हैं। किन्तु वे मन-ही-मन उसका स्वाद लेते हैं। एक-एक खीरे की फांक उठाकर सूंघते हैं और खिड़की के बाहर फेंकते जाते हैं।"
In simple words: नवाब साहब ने पहले खीरों को धोया, पोंछा, सिर काटकर झाग निकाला, छीला, फाँकें बनाईं और तौलिए पर सजाकर नमक-मिर्च छिड़का। फिर वे फाँकों को सूंघकर खिड़की के बाहर फेंकते गए।
Exam Tip: खीरा तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को क्रमबद्ध रूप से और स्पष्टता से लिखें, हर चरण को विस्तार से बताएं।
Question. ख. किन-किन चीजों का रसास्वादन करने के लिए आप किस प्रकार की तैयारी करते हैं?
Answer: फल-फ्रूट खाने के लिए, भोजन के साथ सलाद आदि खाने के लिए हमें पहले से तैयारी करनी पड़ती है। फल खाने के लिए पहले उसे पानी से अच्छी तरह धोकर फिर काटकर प्लेट में व्यवस्थित रूप से सजाकर उस पर नमक-मिर्च स्वाद के अनुसार छिड़क देते हैं फिर उसे खाया जाता है। इसी प्रकार भोजन के साथ सलाद खाने के लिए ऐसी ही तैयारी करके खाने योग्य बनाया जाता है।
In simple words: फल या सलाद खाने से पहले हम उन्हें धोते हैं, काटते हैं, प्लेट में सजाते हैं और नमक-मिर्च जैसी चीजें डालते हैं ताकि वे स्वादिष्ट लगें।
Exam Tip: अपनी व्यक्तिगत तैयारी की प्रक्रिया को चरण-दर-चरण समझाएं और बताएं कि आप किन चीजों को खाते समय विशेष तैयारी करते हैं।
Question 6. खीरे के संबंध में नवाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता है। आपने नवाबों की और भी समकों और शौक के बारे में पढ़ा-सुना होगा। किसी एक के बारे में लिखिए ।
Answer: पाठ के संदर्भ में नवाब साहब का व्यवहार सनकी माना जाएगा। यदि खीरे को खाना ही नहीं था तो उसे धोकर, छीलकर, नमक-मिर्च लगाकर रखने की आवश्यकता ही नहीं थी। ऐसे कई सनक और शौक के विषय में हमें जानकारी है। उनमें से एक यह है कि "नवाब लोगों में दिखावे की संस्कृति अधिक होती है। उनके यहाँ कारों के काफिले होते हैं। दिखावा करने के लिए एक से एक बंदूकें होती हैं, इनका इस्तेमाल करने की कभी जरूरत ही नहीं पड़ती। अतः, इन वस्तुओं का अधिकाधिक संग्रह कर प्रदर्शन करना, डींगे हाँकना, सनकी व्यवहार की ओर इशारा करता है।”
In simple words: नवाब साहब का खीरे वाला व्यवहार सनकी था। नवाब अक्सर महंगी गाड़ियाँ और बंदूकें इकट्ठा करके दिखावा करते हैं, भले ही उन्हें उनकी जरूरत न हो, जो उनकी दिखावटी प्रवृत्ति को दिखाता है।
Exam Tip: नवाबों की किसी एक सनक या शौक को चुनकर उसे विस्तार से समझाएं, यह बताते हुए कि यह उनके दिखावटी स्वभाव को कैसे दर्शाता है।
Question 7. क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है ? यदि हाँ तो ऐसी सनको का अलेख कीजिए।
Answer: हाँ, सनक का सकारात्मक रूप हो सकता है। सनक का मतलब है किसी भी वस्तु या शौक का जुनून छा जाना। यानी किसी काम को करने के लिए दृढ़ निश्चय होना, धुन का पक्का होना। जो लोग किसी काम को लेकर सनकी होते हैं, वे अवश्य अपने लक्ष्य को पाकर रहते हैं। अलग-अलग लोगों को अलग तरह की सनक होती है – एक सनक का उल्लेख इस प्रकार है – पढ़ने की सनक सवार होना। धर्मवीर भारती को बचपन से पढ़ने की सनक सवार थी। खाना खाने बैठते तब भी पढ़ते रहते थे। पुस्तकालय में जब तक उनको कहा न जाय तब तक पुस्तकालय से बाहर नहीं निकलते थे। आगे चलकर वे हिन्दी साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार बने।
In simple words: हाँ, सनक का सकारात्मक पक्ष हो सकता है, जैसे किसी काम के प्रति जुनून। धर्मवीर भारती को पढ़ने की ऐसी सनक थी कि वे हमेशा पढ़ते रहते थे, और इसी कारण वे एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार बने।
Exam Tip: सकारात्मक सनक का अर्थ स्पष्ट करें और धर्मवीर भारती जैसे उदाहरणों के साथ उसे सिद्ध करें, जिससे उत्तर ठोस और विश्वसनीय लगे।
भाषा-अध्ययन
Question 8. निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छांटकर क्रिया-भेद भी लिखिए :
(क) एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे।
(ख) नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
(ग) ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत हैं।
(घ) अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।
(ङ) दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला।
(च) नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फांकों की ओर देखा।
(छ) नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए।
(ज) जेब से चाकू निकाला।
Answer: क्रियापद – भेद
(क) बैठे थे – अकर्मक क्रिया
(ख) नहीं दिखाया – सकर्मक क्रिया
(ग) आदत है – सकर्मक क्रिया
(घ) खरीदे होंगे – सकर्मक क्रिया
(ङ) निकाला – सकर्मक क्रिया
(च) देखा – सकर्मक क्रिया
(छ) लेट गए – अकर्मक क्रिया
(ज) निकाला – सकर्मक क्रिया
In simple words: क्रियापद वाक्य में किया गया काम होता है। क्रिया का भेद बताता है कि काम करने के लिए किसी वस्तु की जरूरत है या नहीं। यदि वस्तु (कर्म) की जरूरत हो तो सकर्मक, और यदि नहीं तो अकर्मक।
Exam Tip: प्रत्येक वाक्य में क्रियापद को सही ढंग से पहचानें और फिर कर्म की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर अकर्मक या सकर्मक भेद को स्पष्ट करें।
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :
Question 1. लेखक ने सेकन्ड क्लास का टिकट क्यों लिया ?
Answer: लेखक अपनी नई कहानी के संबंध में सोच-विचार कर सकने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देख पाने के लिए उन्होंने सेकंड क्लास का टिकट खरीदा। हालाँकि, इसमें यात्रा करने के लिए अधिक दाम चुकाने पड़ते हैं।
In simple words: लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट इसलिए लिया ताकि वह नई कहानी के बारे में सोच सकें और खिड़की से बाहर के नज़ारे देख सकें, भले ही यह महंगा था।
Exam Tip: लेखक के टिकट खरीदने के दो मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताएं: कहानी लेखन और प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन।
Question 2. नवाब साहब को लेखक के सामने झिझक क्यों हो रही थी?
Answer: लेखक का आना नवाब साहब को पसंद नहीं आया। वे यह नहीं चाहते थे कि कोई सफेदपोश व्यक्ति उन्हें मध्यम दर्जे में सफर करते देखे। यदि नवाब को खीरे जैसी मामूली चीज खाते कोई देखता तो उनकी नवाबी शान मिट्टी में मिल जाती। इसलिए नवाब को लेखक के सामने झिझक महसूस हो रही थी।
In simple words: नवाब साहब को लेखक के सामने झिझक हो रही थी क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें सेकंड क्लास में खीरा खाते हुए देखे, जिससे उनकी नवाबी शान कम हो जाती।
Exam Tip: नवाब साहब की झिझक का मुख्य कारण उनकी नवाबी शान और दिखावा था; इसे अपने उत्तर में प्रमुखता से उजागर करें।
Question 3. लेखक ने खीरा खाने से इंकार क्यों किया?
Answer: पहली बार जब नवाब साहब ने खीरा खाने के लिए पूछा तो लेखक ने मना कर दिया था। अतः जब दूसरी बार पूछा गया, तो अपने आत्मसम्मान की सुरक्षा के लिए उन्होंने खीरा खाने से फिर मना कर दिया।
In simple words: लेखक ने आत्मसम्मान के कारण खीरा खाने से मना कर दिया क्योंकि उन्होंने पहली बार मना कर दिया था।
Exam Tip: लेखक के इंकार के पीछे के आत्मसम्मान के महत्व को बताएं, यह दिखाते हुए कि पहली बार के इंकार के बाद पीछे हटना उन्हें उचित नहीं लगा।
Question 4. नवाब साहब ने खीरे का क्या किया?
Answer: नवाब साहब ने खीरे को धो-पोंछकर, छीलकर और काटकर उसे तौलिए पर व्यवस्थित रूप से सजा दिया। उन्होंने एक-एक फाँक सूंघकर खिड़की के बाहर फेंक दी।
In simple words: नवाब साहब ने खीरे को धोकर, छीलकर और काटकर तौलिए पर सजाया, फिर एक-एक फाँक सूंघकर खिड़की से बाहर फेंक दी।
Exam Tip: नवाब साहब की खीरा संबंधी सभी क्रियाओं को क्रमवार और संक्षेप में समझाएं, यह दर्शाते हुए कि उन्होंने खीरा खाया नहीं, बल्कि केवल उसका प्रदर्शन किया।
Question 5. डिब्बे में घुसते ही लेखक ने क्या देखा?
Answer: लेखक ने दौड़कर ट्रेन पकड़ी। जैसे ही वे डिब्बे में दाखिल हुए, उन्होंने देखा कि एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सभ्य व्यक्ति पालथी मारकर बैठे हैं। उनके सामने दो ताज़े, चिकने खीरे तौलिए पर रखे हुए थे।
In simple words: लेखक ने डिब्बे में देखा कि लखनऊ के नवाबी व्यक्ति आराम से बैठे हैं, और उनके सामने तौलिए पर दो खीरे रखे हैं।
Exam Tip: लेखक द्वारा डिब्बे में घुसते ही देखे गए मुख्य दृश्यों का वर्णन करें, जिसमें नवाब साहब और उनके सामने रखे खीरे शामिल हों।
Question 6. नवाब साहब के खीरे खाने के नये तरीका का वर्णन कीजिए।
Answer: नवाब साहब ने खाने के लिए खीरे को धोकर काटा और उसे व्यवस्थित रूप से सजाया। उसके बाद वे खीरे को होंठों तक लाए, खीरे की सुगंध और स्वाद की कल्पना से संतुष्ट होकर उन्होंने खीरे की एक-एक फाँक को खिड़की के बाहर फेंक दिया। इसका मतलब था कि खीरे को खाने के बजाय केवल सूंघकर स्वाद की कल्पना करके उसे फेंक देना उनका एक नया तरीका था।
In simple words: नवाब साहब ने खीरे को काटा, सजाया, होंठों तक लाए, सूंघा और फिर खिड़की से बाहर फेंक दिया। यह उनका खीरा खाने का एक नया और अनोखा तरीका था।
Exam Tip: नवाब साहब के 'खाने' के नए तरीके को विस्तार से बताएं, जिसमें सूंघने और फेंकने की क्रिया पर जोर दें।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तारपूर्वक लिखिए :
Question 1. 'लेखक ने लखनवी अंदाज पाठ में नवाबी परम्परा पर करारा व्यंग्य किया है।' स्पष्ट कीजिए।
Answer: लेखक इस पाठ के माध्यम से यह दर्शाना चाहते हैं कि नवाब लोग अपनी नवाबी दिखाने के लिए झूठे आडंबर करते हैं। प्रस्तुत पाठ में नवाब साहब केवल सूंघकर ही पेट भरने का नाटक करते हैं, और सूंघने मात्र से ही उनकी भूख शांत हो जाती है, यहाँ तक कि वे डकार भी लेते हैं। वास्तविकता तो यह है कि व्यक्ति की भूख भोजन की प्रशंसा करने या सूंघने मात्र से शांत नहीं हो सकती। कल्पना करने से पेट नहीं भर सकता। उनकी नवाबी शान अब नहीं बची है, यह इस बात से ज़ाहिर होता है कि वे सेकंड क्लास में यात्रा कर रहे थे। फिर भी न जाने क्यों नवाब लोग अपनी नवाबी परंपरा का दिखावा करते हैं। लेखक ने इस पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि बिना खाए व्यक्ति की भूख शांत हो सकती है, तो बिना विचार, घटना और पात्र के कहानी भी लिखी जा सकती है।
In simple words: लेखक ने 'लखनवी अंदाज़' में नवाबों के झूठे दिखावे पर व्यंग्य किया है। नवाब सिर्फ सूंघकर पेट भरने का नाटक करते हैं, जो उनकी खोखली नवाबी शान को दर्शाता है। लेखक कहते हैं कि अगर सूंघने से भूख मिट सकती है, तो बिना कहानी के तत्वों के भी कहानी लिखी जा सकती है।
Exam Tip: लेखक के व्यंग्य को स्पष्ट करने के लिए नवाब साहब के खीरे सूंघने और डकारने के उदाहरण का उपयोग करें, और बताएं कि यह उनकी झूठी शान को कैसे उजागर करता है।
Question 2. लेखक ने नवाब साहब द्वरा खीरे खाने के आग्रह को क्यों नकार दिया होगा ? तर्क सहित उत्तर लिखिए।
Answer: जब लेखक सेकंड क्लास के डिब्बे में चढ़े, जहाँ नवाब साहब सामने की बर्थ पर बैठे थे, तो नवाब साहब ने लेखक के आने पर उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया और खिड़की के बाहर देखने लगे। उनके हाव-भाव से लगा कि लेखक का आना उन्हें पसंद नहीं आया। लेखक भी स्वाभिमानी स्वभाव के थे। वे भला नवाबों के सामने क्यों झुकनेवाले थे। जब पहली बार नवाब साहब ने खीरे खाने का आग्रह किया, तो लेखक ने मना कर दिया। नवाब साहब ने लेखक के आने पर न तो उत्सुकता दिखाई कि वे कौन हैं और न ही उनसे बात करने की कोशिश की। इसी कारण लेखक ने नवाब साहब द्वारा खीरा खाने के आग्रह को मना कर दिया होगा।
In simple words: लेखक ने नवाब साहब के खीरे खाने के आग्रह को अस्वीकार कर दिया क्योंकि नवाब ने पहले लेखक को अनदेखा किया था, और लेखक भी स्वाभिमानी थे।
Exam Tip: लेखक के आत्मसम्मान और नवाब साहब की प्रारंभिक उदासीनता के बीच संबंध स्थापित करके उत्तर को स्पष्ट करें।
Question 3. लेखक और नवाब साहब दोनों में से आप किसके स्वभाव को अच्छा कहेंगे? क्यों ?
Answer: मेरे अनुसार लेखक और नवाब साहब दोनों में से मैं नवाब साहब को ही अच्छा कहूँगा, क्योंकि नवाब साहब अपनी नवाबी अंदाज़ में दिखावा ज़रूर करते हैं, किन्तु लेखक से बातचीत की पहल वही करते हैं। लेखक का समाज में नाम-प्रतिष्ठा सब कुछ है, किन्तु उन्होंने सामने से नवाब साहब से बातचीत करने की कोई कोशिश नहीं की। वे भी गर्व से भरे हुए शक्ति का दिखावा ही करते हैं। वे चाहते तो स्वयं पहल करके नवाब साहब से बातचीत शुरू कर शिष्टाचार का परिचय दे सकते थे। किन्तु उन्होंने तो बातचीत करने के बजाय आँखें चुरा लीं। नवाब साहब दो बार उनसे खीरा खाने का आग्रह करते हैं, यहाँ पर भी लेखक के भावों में कोई बदलाव नहीं आता और वे इंकार कर देते हैं। यहाँ पर लेखक अपने अहंकारी स्वभाव का प्रदर्शन करता है। अतः मेरे अनुसार नवाब साहब का स्वभाव लेखक से अधिक अच्छा है।
In simple words: मैं नवाब साहब के स्वभाव को लेखक से बेहतर मानूंगा क्योंकि नवाब ने बातचीत की शुरुआत की, जबकि लेखक ने अपने आत्मसम्मान के कारण उनसे बात करने से इनकार कर दिया, जो एक अहंकारी स्वभाव दर्शाता है।
Exam Tip: दोनों पात्रों के स्वभाव का विश्लेषण करें और अपने चुनाव के लिए स्पष्ट तर्क दें, जिसमें उनके व्यवहार और प्रतिक्रियाओं का उल्लेख हो।
Question 4. 'लखनवी अंदाज़' कहानी के माध्यम से लेखक समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?
अथवा
लखनवी अंबाज कहानी का संदेश अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: 'लखनवी अंदाज़' कहानी में लेखक ने नवाबी परंपरा पर तीखा व्यंग्य किया है। नवाब साहब की नवाबी भले ही चली गई हो, किन्तु वे आज भी वास्तविकता से दूर हैं। वे सेकंड क्लास में यात्रा करते हैं, साथ ही उम्मीद करते हैं कि उन्हें ऐसा करते कोई न देखे। वे खीरे को मात्र सूंघकर पेट भरने का दिखावा करते हैं और उदर-पूर्ति का दिखावा करने के लिए झूठी डकार भी निकालते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि भूख केवल सूंघने से शांत नहीं हो सकती। उसके लिए भोजन ज़रूरी है। लेखक बताना चाहते हैं कि व्यक्ति को सच्चाई में जीना चाहिए। हमें बनावटी जीवन-शैली या झूठे दिखावे की आदत छोड़ देनी चाहिए। हमें हर इंसान को समान मानकर उसके साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए। ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए कि हम दूसरों के उपहास का पात्र बनें। लेखक यही संदेश इस पाठ के द्वारा देना चाहते हैं।
In simple words: 'लखनवी अंदाज़' से लेखक हमें यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें दिखावा छोड़कर सच्चाई में जीना चाहिए, बनावटी आदतों से बचना चाहिए और सभी के साथ समान और मित्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए।
Exam Tip: कहानी के माध्यम से दिए गए मुख्य सामाजिक संदेशों को संक्षेप में और स्पष्टता से बताएं, जैसे दिखावा छोड़ना और वास्तविकता में जीना।
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
1. मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन चल पड़ने की उतावली में फूंकार रही थी। आराम से सेकंड क्लास में जाने के लिए दाम अधिक लगते हैं। दूर तो जाना नहीं था। भीड़ से बचकर, एकांत में नयी कहानी के संबंध में सोच सकने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देख सकने के लिए टिकट सेकंड क्लास का हौ ले लिया। गाड़ी छूट रही थी। सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर, ज़रा दौड़कर उसमें चढ़ गए। अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था। एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताजे-चिकने खोरे तौलिए पर रखे थे। डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखाई दिया। सोचा, हो सकता है, यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों।
Question 1. लेखक ने सेकन्ड क्लास का टिकट क्यों खरीदा?
Answer: लेखक भीड़ से बचकर एकांत में अपनी नई कहानी के संबंध में सोचना चाहते थे तथा खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सेकंड क्लास का टिकट खरीदा।
In simple words: लेखक ने भीड़ से बचने, एकांत में सोचने और प्राकृतिक दृश्यों को देखने के लिए सेकंड क्लास का टिकट खरीदा।
Exam Tip: प्रश्न के अनुसार, लेखक के सेकंड क्लास टिकट खरीदने के दो मुख्य कारण (एकांत और प्रकृति दर्शन) स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 2. लेखक के अनुमान के अनुसार डिब्बा कैसा था ?
Answer: लेखक का अनुमान था कि डिब्बा खाली होगा, किन्तु ऐसा नहीं था। वहाँ एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारकर बैठे थे।
In simple words: लेखक ने सोचा था कि डिब्बा खाली होगा, लेकिन वह खाली नहीं था; वहाँ एक नवाब साहब बैठे थे।
Exam Tip: लेखक के अनुमान और वास्तविक स्थिति के बीच का अंतर स्पष्ट करें, जिसमें डिब्बे में नवाब साहब की उपस्थिति का उल्लेख हो।
Question 3. नवाब की आंखों में असंतोष का भाव क्यों दिखाई दिया ?
Answer: गाड़ी छूटने ही वाली थी। लेखक के अचानक उस सेकंड क्लास के डिब्बे में कूद जाने से नवाब के एकांत चिंतन में बाधा पड़ी, इसलिए उनकी आँखों में असंतोष का भाव दिखाई दिया।
In simple words: लेखक के अचानक डिब्बे में आने से नवाब साहब के एकांत में खलल पड़ा, इसलिए उनकी आँखों में नाराजगी दिखी।
Exam Tip: नवाब साहब की आँखों में असंतोष का कारण स्पष्ट रूप से बताएं, जो उनके एकांत में बाधा पड़ने से जुड़ा था।
Question 4. प्रतिकूल तथा सज्जन शब्द का विलोम शब्द लिखिए।
Answer: 'प्रतिकूल' का विलोम शब्द है 'अनुकूल' तथा 'सज्जन' का विलोम शब्द है 'दुर्जन'।
In simple words: 'प्रतिकूल' का उल्टा 'अनुकूल' होता है, और 'सज्जन' का उल्टा 'दुर्जन' होता है।
Exam Tip: दिए गए शब्दों के विलोम शब्द सही-सही लिखें और वर्तनी की जाँच कर लें।
2. नवाब साहब ने संगीत के लिए उत्साह नहीं दिखाया। हमनें भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखे चुरा लीं। ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब को असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और सब गंवारा न हो कि शहर का कोई सफेदपोश उन्हें मंझले दर्जे में सफर करता देखे। अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खौरे खरौदे होंगे और अब किसी सफेदपोश के सामने खीरा कैसे खाएं? हम कनखियों से नवाब साहब की ओर देख रहे थे। नवाब साहब कुछ देर गाड़ी की खिड़की से बाहर देखकर स्थिति पर गौर करते रहे।
Question 1. लेखक ने सामने की बर्थ पर बैठकर अपनी आंखें क्यों चुराईं?
Answer: लेखक जब ट्रेन के उस सेकंड क्लास डिब्बे में चढ़े, तो नवाब ने संगति के लिए कोई उत्साह नहीं दिखाया। इसलिए, उनके सामने की बर्थ पर बैठकर लेखक ने आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं।
In simple words: लेखक ने अपनी आँखें इसलिए चुराईं क्योंकि नवाब साहब ने उन्हें देखकर कोई रुचि नहीं दिखाई, और लेखक भी अपने आत्मसम्मान की रक्षा करना चाहते थे।
Exam Tip: लेखक की आँखें चुराने के पीछे का कारण उनके आत्मसम्मान और नवाब साहब की उदासीनता से जोड़कर बताएं।
Question 2. लेखक ने नवाब साहब के विषय में क्या अनुमान लगाया ?
Answer: लेखक ने नवाब साहब की असुविधा और संकोच की वजह से अनुमान लगाया कि नवाब साहब ने बिल्कुल अकेले यात्रा कर सकने के विचार से सेकंड क्लास का टिकट किफायती तौर पर खरीदा होगा, और अब उन्हें यह पसंद नहीं आ रहा होगा कि शहर का कोई सफेदपोश उन्हें मध्यम दर्जे में सफर करते देखे।
In simple words: लेखक ने अनुमान लगाया कि नवाब साहब ने अकेले यात्रा करने और पैसे बचाने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लिया होगा, और अब वे नहीं चाहते होंगे कि कोई उन्हें इस दर्जे में देखे।
Exam Tip: लेखक के अनुमान के दो मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करें: किफायत के लिए अकेले यात्रा और सफेदपोश व्यक्ति द्वारा देखे जाने का संकोच।
Question 3. 'हम कनखियों से नवाब साहब की ओर देख रहे थे।' वाक्य का प्रकार बताइए।
Answer: 'हम कनखियों से नवाब साहब की ओर देख रहे थे।' यह सरल वाक्य का प्रकार है।
In simple words: यह वाक्य एक 'सरल वाक्य' है, जिसका अर्थ है कि इसमें केवल एक ही मुख्य क्रिया और कर्ता है।
Exam Tip: वाक्य के प्रकार को पहचानते समय, उसमें एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय की उपस्थिति पर ध्यान दें।
3. लखनऊ स्टेशन पर खीरा बेचनेवाले खीरे के इस्तेमाल का तरीका जानते हैं। ग्राहक के लिए जीरा-मिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया भी हाजिर कर देते हैं। नवाब साहब ने बहुत करीने से खीरे की फांकों पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की सुखी बुरक दी। उनकी प्रत्येक भाव-भंगिमा और जबड़ों के स्फुरण से स्पष्ट था कि उस प्रक्रिया में उनका मुख खीरे से रसास्वादन की कल्पना से प्लावित हो रहा था। हम कनखियों से देखकर सोच रहे थे, मियाँ रईस बनते हैं, लेकिन लोगों की नजरों से बच सकने के ख्याल में अपनी असलियत पर उतर आए हैं। नवाब साहब ने फिर एक बार हमारी ओर देख लिया, 'वल्लाह, शौक कीजिए, लखनऊ का बालम खीरा है!' नमक-मिर्च छिड़क दिए जाने से ताजे खीरे को पनियाती फाँकं देखकर पानी मुंह में जरूर आ रहा था, लेकिन इनकार कर चुके थे। आत्मसम्मान निबाहना ही उचित समझा।
Question 1. ग्राहक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए खीरा बेचनेवाले क्या करते हैं?
Answer: ग्राहक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए खीरा बेचनेवाले खीरे के इस्तेमाल का तरीका जानते हैं। वे ग्राहक के लिए जीरा-मिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया भी तैयार कर के देते हैं।
In simple words: खीरा बेचनेवाले ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए खीरे के साथ जीरा-नमक और लाल मिर्च की पुड़िया भी देते हैं।
Exam Tip: खीरा बेचनेवालों की रणनीति को स्पष्ट रूप से बताएं, जिसमें खीरे के साथ दिए जाने वाले मसालों का उल्लेख हो।
Question 2. लेखक के मुंह में पानी क्यों आ रहा था ?
Answer: नवाब ने खीरे की फाँके काटकर उसे व्यवस्थित रूप से सजा दिया था। उन फांकों पर उन्होंने जीरा मिश्रित नमक और लाल मिर्च की सूखी परत डाल दी थी। नमक-मिर्च छिड़क दिए जाने से ताज़े खीरे की रसीली फाँके देखकर लेखक के मुँह में पानी आ रहा था।
In simple words: नवाब द्वारा खीरे पर नमक-मिर्च छिड़कने के बाद, उसकी ताज़ी और रसीली फाँकों को देखकर लेखक के मुँह में पानी आ गया था।
Exam Tip: लेखक के मुँह में पानी आने का कारण स्पष्ट रूप से बताएं, जिसमें खीरे की ताज़गी और उस पर लगे मसालों का वर्णन हो।
Question 3. 'लाल मिर्च' तथा 'नमक मिर्च का समासभेद बताइए।
Answer: समास भेद निम्नानुसार है –
लाल मिर्च – कर्मधारय समास
नमक मिर्च – द्वन्द्व समास
In simple words: 'लाल मिर्च' एक कर्मधारय समास है क्योंकि इसमें एक शब्द दूसरे की विशेषता बताता है, जबकि 'नमक मिर्च' एक द्वन्द्व समास है क्योंकि इसमें दोनों शब्द समान महत्व के होते हैं।
Exam Tip: समास के भेद को पहचानते समय, शब्दों के संबंध और उनकी प्रधानता पर ध्यान दें।
4. नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फांकों की ओर देखा। खिड़की के बाहर देखकर दीर्घ निश्वास लिया। खीरे की एक फाँक उठाकर होठों तक ले गए। फाँक को सूंघा। स्वाद के आनंद में पलके मुंद गईं। मुंह में भर आए पानी का घुट गले से उतर गया। तब नवाब साहब ने फांक को खिड़की से बाहर छोड़ दिया। नवाब साहब खीरे की फांकों को नाक के पास ले जाकर वासना से रसास्वादन कर खिड़की के बाहर फेंकते गए।
Question 1. नवाब साहब ने कटे हुए खीरे का क्या किया?
Answer: नवाब साहब कटे हुए खीरे को नाक के पास ले जाकर सूंघा और एक-एक करके उन्होंने खीरे की सभी फाँकों को खिड़की के बाहर फेंक दिया।
In simple words: नवाब साहब ने कटे हुए खीरे की फाँकों को केवल सूंघा और फिर उन्हें खिड़की से बाहर फेंक दिया।
Exam Tip: नवाब साहब की खीरे को लेकर की गई क्रियाओं को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएं, जिसमें सूंघने और फेंकने की प्रक्रिया शामिल हो।
Question 2. नवाब साहब अपने खीरा खाने के ढंग के माध्यम से क्या दिखाना चाहते थे?
Answer: नवाब साहब खीरे की सुगंध का स्वाद लेकर तृप्त होने के अपने विचित्र तरीके से अपनी रईसी और नवाबी का प्रदर्शन करना चाहते थे। वे लेखक को यह दिखाना चाहते थे कि नवाब लोग खीरे जैसी साधारण-सी वस्तु का स्वाद भी इसी प्रकार लेते हैं।
In simple words: नवाब साहब खीरे को सूंघकर अपनी रईसी और नवाबी का प्रदर्शन करना चाहते थे, यह दिखाते हुए कि वे साधारण चीज़ों का स्वाद भी अनोखे तरीके से लेते हैं।
Exam Tip: नवाब साहब के खीरा खाने के ढंग के पीछे के उद्देश्य को बताएं, जो उनकी रईसी और नवाबी का दिखावा था।
Question 3. 'लजीज' और 'नामुराद' शब्द का अर्थ लिखिए।
Answer: 'लजीज' का अर्थ है स्वादिष्ट और 'नामुराद' का अर्थ है बेकार चीज।
In simple words: 'लजीज' का मतलब स्वादिष्ट और 'नामुराद' का मतलब बेकार होता है।
Exam Tip: दिए गए शब्दों के अर्थ सटीक और स्पष्ट रूप से लिखें।
अति लघुत्तरी-प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए।
Question 1. आराम से सेकन्ड क्लास में जाने के लिए यात्रियों को क्या करना पड़ता है?
(क) कम दाम देना पड़ता है।
(ख) अधिक दाम देना पड़ता है।
(ग) रुपये नहीं देना पड़ता है।
(घ) टिकट लेना पड़ता है।
Answer: (ख) अधिक दाम देना पड़ता है।
In simple words: सेकंड क्लास में आराम से यात्रा करने के लिए यात्रियों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
Exam Tip: प्रश्न के अनुसार, सेकंड क्लास यात्रा के लिए अपेक्षित लागत को सही विकल्प के साथ स्पष्ट करें।
Question 2. लेखक को कौन-सी पुरानी आदत हैं?
(क) कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
(ख) लिखने रहने की पुरानी आदत है।
(ग) सोते रहने की पुरानी आदत है।
(घ) ट्रेन में सफर करने की पुरानी आदत है।
Answer: (क) कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
In simple words: लेखक को लगातार कल्पना करते रहने की एक पुरानी आदत थी।
Exam Tip: लेखक की बताई गई पुरानी आदत को सही विकल्प के साथ पहचानें और लिखें।
Question 3. लेखक ने खीरा खाने से क्यों इन्कार कर दिया?
(क) खीरा खाना पसन्द नहीं था।
(ख) खीरा देखकर उनके मुंह में पानी आ रहा था।
(ग) आत्मसम्मान की रक्षा के लिए।
(घ) पेट खराब होने के कारण।
Answer: (ग) आत्मसम्मान की रक्षा के लिए
In simple words: लेखक ने अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए खीरा खाने से मना कर दिया।
Exam Tip: लेखक के इंकार के पीछे के मुख्य कारण को सही विकल्प के साथ स्पष्ट करें, जिसमें उनके आत्मसम्मान पर जोर दिया गया हो।
Question 4. नवाब साहब ने नमक-मिर्च लगी खीरें की फांकों का क्या किया?
(क) लेखक को दे दिया
(ख) नवाब साहब खुद खा गए
(ग) खिड़की के बाहर फेंक दिया
(घ) करीने से सजा दिया।
Answer: (ग) खिड़की के बाहर फेंक दिया
In simple words: नवाब साहब ने नमक-मिर्च लगी खीरे की फांकों को खिड़की के बाहर फेंक दिया।
Exam Tip: नवाब साहब द्वारा खीरे की फांकों के साथ की गई अंतिम क्रिया को सही विकल्प के साथ बताएं।
सविग्रह समासभेद बताइए :
• भावपरिवर्तन – भाव में परिवर्तन – तत्पुरुष समास
• रसास्वादन – रस का आस्वाद – तत्पुरुष समास
• ज्ञान-चक्षु – ज्ञान के चक्षु – तत्पुरुष समास
• ज्ञान-चक्षु – ज्ञान रूपी चक्षु – कर्मधारय समास
भाववाचक संज्ञा बनाइए:
- प्रतिकूल – प्रतिकूलता
- सज्जन – सज्जनता
- नाजुक – नजाकत
- नफीस – नफासत
- सुर्ख – सुर्खी
विलोम शब्द लिखिए :
- प्रतिकूल × अनुकूल
- निर्जन × जनमेदनि
- असंतोष × संतोष
- असुविधा × सुविधा
- किफ़ायत × फिजूलखर्ची
- स्वर्ग × नरक
दो-दो समानार्थी शब्द दीजिए:
- आराम – विश्राम, विराम
- सज्जन – भद्र, सद्पुरुष
- उत्साह – उल्लास, जोश
- किफ़ायत – मितव्ययिता
- तृष्णा – लोभ, लालच
संधि-विच्छेद कीजिए:
- सज्जन = सत् + जन
- निर्जन = निः(निर्) + जन
- निश्वास = निः + श्वास
- रसास्वादन = रस + आस्वादन
उपसर्ग/प्रत्यय अलग कीजिए :
- सतृष्ण – उपसर्ग
- पनियाती – प्रत्यय आती
- प्लावित – प्रत्यय
- प्राकृतिक – प्रत्यय
- खानदानी – प्रत्यय ई
- किफ़ायती – प्रत्यय ई
विशेषण बनाइए:
- प्रतिकूलता – प्रतिकूल
- सज्जनता – सज्जन
- नजाकत – नाजुक
- नफासत – नफीस
- सुर्थी – सुर्ख
- संतोष – संतोषी, संतुष्ट
पाठ से संयुक्त क्रियाएं छोटिए :
- कह दिया - कहना और देना से
- सुनाई दिया – सुनना और देना से
- देख लिया – देखने और लेना से
- खुल गए – खुलना और जाना से
- बन सकती – बनना और सकना
- फेंकते गए – फेंकना और जाना से
- लेट गए – लेटना और जाना से
- पोंछ लिए – पोंछना और लेना से
- भर जाने – भरना और जाना से
- डाल देता है – डालना-देना-होना से
लखनवी अंदाज़ Summary in Hindi
लेखक- परिचय :
यशपाल का जन्म सन् 1903 में पंजाब के फिरोजपुर छावनी में हुआ था। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा काँगड़ा से प्राप्त की। बाद में लाहौर के नेशनल कॉलेज से उन्होंने बी.ए. किया। वहाँ की क्रांतिकारी धारा से जुड़ने के बाद कई बार जेल भी गए। उनकी मृत्यु सन् 1976 में हुई। यशपाल हिन्दी साहित्य के आधुनिक कथाकारों में प्रमुख हैं। उनकी रचनाओं में आम व्यक्ति के सरोकारों की उपस्थिति है। उन्होंने यथार्थवादी शैली में अपनी रचनाएँ लिखी हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक विषमता, राजनैतिक पाखण्ड और रूढ़ियों के खिलाफ कड़ा प्रहार दिखाई पड़ता है। उनकी कहानियों में 'ज्ञानदान', 'तर्क का तूफान', 'पिंजरे की उड़ान', 'वो दुलिया', 'फूलों का कुर्ता', 'देशद्रोही' उल्लेखनीय हैं। 'झूठा सच' उनका प्रसिद्ध उपन्यास है जो देशविभाजन की त्रासदी पर आधारित है। इसके अतिरिक्त 'अमिता', 'दिव्या', 'पार्टी कामरेड', 'दादा कामरेड', 'मेरी तेरी उसकी बात' आदि उनके प्रमुख उपन्यास हैं। भाषा की स्वाभाविकता और जीवन्तता उनकी रचनाओं की विशेषता है। साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया। प्रस्तुत पाठ 'लखनवी अंदाज़' में दिखावा पसंद लोगों की शैली का वर्णन किया है। एक नवाब जो ट्रेन में इनके साथ सफर करता है, वह अपनी नवाबी का प्रदर्शन करते हुए खीरे की फांकों को खाने की जगह सूंघकर स्वाद लेता हैं और सूंघते हुए खीरे की एक-एक फाँक को खिड़की के बाहर फेंकते जाते हैं। इसके बाद डकार लेकर तृप्त होने का नाटक करते हैं। इस व्यवहार को देखकर लेखक सोचते हैं कि बिना घटना, विचार और पात्रों के नई कहानी भी लिखी जा सकती है।
पाठ का सार (भाव) :
लेखक की रेलयात्रा : लेखक सेकंड क्लास में जाना नहीं चाहते थे, क्योंकि उसके दाम अधिक थे। किन्तु वहाँ भीड़ कम होगी और वे अपनी नई कहानी के संबंध में सोच सकेंगे और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य को देख सकेंगे, इसलिए उन्होंने सेकंड क्लास की टिकट लेकर यात्रा करना शुरू किया। गाड़ी छूटनेवाली थी। दौड़कर डिब्बे में चढ़ गए।
लेखक को अनुमान था कि डिब्बा खाली होगा: लेखक को अनुमान था कि डिब्बा खाली होगा, लेकिन उसने देखा कि एक बर्थ पर लखनऊ के नवाबी अंदाज़ में एक सफेदपोश सज्जन पालथी मारकर बैठे हैं, जिनके सामने तौलिए पर दो चिकने खीरे रखे हैं। लेखक का अचानक वहाँ आ जाना उन्हें अच्छा नहीं लगा। नवाब साहब ने लेखक में कोई रुचि नहीं दिखाई और न लेखक ने अपनी ओर से कोई कोशिश की।
नवाब साहब का लेखक के प्रति उदासीनता : लेखक सामने बैठे नवाब साहब के विषय में सोचने लगा कि नवाब साहब ने किफायत की दृष्टि से सेकंड क्लास का टिकट खरीदा होगा। अब उन्हें यह पसंद नहीं आ रहा होगा कि कोई सेकंड क्लास में सफर करता हुआ उन्हें देखे। सफर का वक्त काटने के लिए उन्होंने खीर लिए होंगे। हो सकता है उन्हें किसी के सामने खीरा खाने में संकोच हो रहा होगा। नवाब साहब लेखक के प्रति उदासीन होकर खिड़की के बाहर देखते रहे।
नवाब साहब का भाव परिवर्तन : अचानक नवाब साहब ने लेखक को देखकर संबोधन किया 'आदाब-अर्ज', 'जनाब खीरे का शौक फरमाएगे', नवाब का यह भाव-परिवर्तन लेखक को अच्छा नहीं लगा। लेखक समझ गए
शब्दार्थ और टिप्पणीः
- मुफस्सिल - केन्द्रीय स्थान और उसके आस-पास
- स्थानीय उतावली - जल्दीबाजी
- प्रतिकूल - विपरीत
- निर्जन - एकांत
- सफेद पोश - भद्रव्यक्ति
- ठाली-बैठना - कुछ काम न करना
- लथेड़ लेना - लपेट लेना
- एहतियात - सावधानी
- करीने से - ढंग से
- किफायत - कम खर्च
- कनखियाँ - तिरछी नजर से देखना
- गौर करना - ध्यान से देखना
- सुखी - लाली
- भाव-भंगिमा - मन के विचार को प्रकट करनेवाली शारीरिक क्रिया
- भाप लेना - समझ जाना
- स्परन - फड़कना, प्लावित
- होना - पानी भर जाना
- शराफत - सज्जनता, शालीनता
- गुमान - घमंड
- पनियाती - रसौली
- तलब - इच्छा
- मेदा - पेट
- सतृष्ण - इच्छा सहित
- तसलीम - सम्मान में
- तहजीब - शिष्टता
- नफासत - स्वच्छता
- नफीस - बढ़िया
- एब्सट्रेक्ट - सूक्ष्म
- सकील - आसानी से न पचनेवाला
- नामुराद - बेकार चीज
- ज्ञान-चक्षु - ज्ञान रूपी चक्षु
- लजीज - स्वादिष्ट
- सिर खम करना - सिर झुकाना
मुहावरे और अर्थ :
- कनखियों से देखना - तिरछे देखना, आंखों की कारों से देखना।
- पानी मुंह में आना - खाने की तीव्र इच्छा होना।
वाक्य प्रयोग :
- विवाह के समय दुल्हन दूल्हे को कनखियों से देख रही थी।
- स्वादिष्ट व्यंजनों की सुगंध मात्र से अविनाश के मुंह में पानी भर गया।
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