GSEB Class 10 Hindi प्रयोजनमूलक हिन्दी Solutions

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Class 10 Hindi प्रयोजनमूलक हिन्दी GSEB Solutions PDF

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GSEB Std 10 Hindi प्रयोजनमूलक हिन्दी

विषय-प्रवेश :

प्राचीन काल में संचार के माध्यम बहुत कम विकसित थे। लोग अपनी जानकारी दूसरों तक पहुंचाने के लिए जानवरों, पक्षियों, और खुद मनुष्यों का उपयोग करते थे। धीरे-धीरे बैलगाड़ियों, घोड़ों, साइकिलों, मोटरों, और ट्रकों का इस्तेमाल जानकारी को दूर-दूर भेजने के लिए होने लगा। जब प्रिंटिंग तकनीक आई, यह काम समाचारपत्रों को मिल गया।

पिछले कुछ सालों में संचार के माध्यमों में बहुत बड़े बदलाव हुए हैं। सैटेलाइट की मदद से दूरदर्शन, आकाशवाणी, फैक्स, ई-मेल, मोबाइल, और डाक व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। कंप्यूटर ने भी एक क्रांति ला दी है। इंटरनेट की मदद से कोई भी घटना देश या पूरी दुनिया में तुरंत टीवी पर दिखाई जा सकती है। यहां आजकल के कुछ संचार माध्यमों के बारे में उपयोगी जानकारी दी गई है।

समाचारपत्रः

समाचारपत्र जनसंचार का एक छपा हुआ माध्यम है। हर सुबह, समाचारपत्र खबरें लेकर लोगों के पास आते हैं। यह अब लोगों की जिंदगी का एक बहुत जरूरी हिस्सा बन गया है। आजकल समाचारपत्र शिक्षा, खेल, मनोरंजन, साहित्य, और विज्ञापन के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। ब्रिटिश शासन के दौरान समाचारपत्रों का बहुत महत्व था। आजादी की लड़ाई में इनका बड़ा योगदान रहा। लोगों को आजादी के लिए तैयार करने में इन्होंने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'बंगाल गजट, हिंदुस्तान टाइम्स, नेशनल हेरॉल्ड, पायोनियर, मुंबई मिरर, केसरी, वन्दे मातरम्, प्रताप, हरिजन, यंग इंडिया, अल हिलाल' आदि उस समय के प्रसिद्ध समाचारपत्र थे। इन समाचारपत्रों से उस समय के हिंदुस्तान की सही तस्वीर का पता चलता है।

आकाशवाणी:

सन् 1901 में मारकोनी नामक वैज्ञानिक ने रेडियो का आविष्कार किया था। इसकी सहायता से देश-विदेश में होनेवाले कार्यक्रम सुने जा सकते हैं। इसमें आवाज को एक विशेष यंत्र द्वारा ध्वनि तरंगों के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। ऑल इंडिया रेडियो, बी.बी.सी. लंदन जैसी संस्थाएँ समाचार, मौसम, और अन्य कार्यक्रम प्रसारित करती हैं। इससे हम गीत, समाचार, और विज्ञापन सुनते हैं।

टी.वी. (दूरदर्शन):

सन् 1926 में जे. एल. बेयर्ड ने टेलीविजन का आविष्कार किया था। भारत में 1959 में दिल्ली में पहला दूरदर्शन केंद्र स्थापित हुआ था। सैटेलाइट की सहायता से, टीवी सेट के माध्यम से दूरदर्शन से प्रसारित कार्यक्रम देखे जाते हैं। अब टीवी केंद्रों की संख्या बहुत बढ़ गई है। इन केंद्रों से तरह-तरह के कार्यक्रम दिखाए जाते हैं। टीवी पर उचित समय पर और मनोरंजक कार्यक्रम ही देखने चाहिए, वरना आंखें कमजोर हो सकती हैं।

STD, ISD, PCO:

STD का पूरा नाम Subscriber Trunk Dialling है। STD में पहले कोड नंबर मिलाकर, इसके बाद ग्राहक का नंबर लगाकर बात की जाती है। हर शहर या राज्य का एक अलग कोड होता है। इसकी व्यवस्था डाक विभाग ने की थी।

ISD का पूरा नाम International Subscriber Dialling है। इससे कोड मिलाकर किसी भी देश के निवासी ग्राहक से बात की जा सकती है। अब मोबाइल के युग में इसका चलन कम हो गया है।

PCO का पूरा नाम Public Call Office है। इससे निश्चित इलाके में टेलीफोन द्वारा ग्राहक का नंबर डायल करके बात की जा सकती है।

कम्प्यूटर (Computer) :

कम्प्यूटर के लिए हिंदी में 'संगणक' शब्द का प्रयोग होता है। यह मनुष्य के मस्तिष्क से भी तेज गति से काम करता है। यह प्राप्त सामग्री को अपनी मेमोरी यूनिट में भी रखता है। आज का संगणक न्यूमैन नामक वैज्ञानिक की देन है। 1893 में चार्ल्स बेवेज ने एक विशेष प्रकार की मशीन का आविष्कार किया था। इस वजह से चार्ल्स बेवेज को आधुनिक कम्प्यूटर का जनक कहा जा सकता है। आजकल लगभग सभी क्षेत्रों में कम्प्यूटर का उपयोग होता है। संचार क्रांति में कम्प्यूटर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है।

डी.टी.पी. (Desk Top Publishing) :

डी.टी.पी. का पूरा नाम Desk Top Publishing है। इसके आविष्कार से अब कंपोजिंग का सारा काम एक मेज पर करना संभव हो गया है। कम्प्यूटर पर विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से डिस्क कार्ड लगाकर टाइप की गई सामग्री को अलग-अलग पृष्ठों में बांटना आसान हो गया है। वर्तनी जाँच (Spelling check) की मदद से टाइप की गई सामग्री को संशोधित किया जा सकता है।

ई-मेल (E-mail) :

ई-मेल का मतलब है – इलेक्ट्रॉनिक मेल। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो दो कंप्यूटर यूजर्स के बीच संदेश भेजने का काम करती है। 1960 से 1970 तक इस प्रकार की संदेश भेजने की पद्धति में कई तरह से सुधार हुए। आजकल इलेक्ट्रॉनिक मेल की प्रक्रिया को ई-मेल के रूप में जाना जाता है।

यह प्रक्रिया इंटरनेट के माध्यम से होती है। कुछ समय पहले दोनों कंप्यूटर यूजर्स का ऑनलाइन होना जरूरी था। आजकल यह ई-मेल व्यवस्था स्टोर एंड, फॉरवर्ड मॉडल पर निर्भर है। ई-मेल सर्वर संदेश को स्वीकार कर, फॉरवर्ड कर डिलीवर करते हैं, और स्टोर करते हैं। इसलिए भेजनेवाला या पानेवाला कंप्यूटर का ऑनलाइन होना अब जरूरी नहीं है।

पत्रलेखन :

पत्र लिखना एक कला है। पत्र में सरलता, अपनेपन की भावना, संदर्भ के अनुसार भाषा, और शिष्टाचार का पालन होना जरूरी है। यह विचारों को एक-दूसरे तक पहुंचाने का एक उत्तम साधन है।

पत्र तीन प्रकार के होते हैं :

  • निजी या व्यक्तिगत
  • व्यावसायिक तथा
  • सरकारी एवं अर्धसरकारी।

पत्र के प्रमुख अंग इस प्रकार हैं :

1. पत्र लिखनेवाले का पता एवं दिनांक
2. संबोधन
3. पत्र का विषय
4. अभिवादन
5. पत्र का मुख्य भाग
6. हस्ताक्षर के पूर्व प्रयुक्त शब्दावली तथा
7. पता।

पत्राचार :

मनुष्य अपने भावों और विचारों को व्यक्त करने के लिए भाषा का लिखित और मौखिक प्रयोग करता है। ये डाक विभाग की मदद से बहुत दूर-दूर तक पहुंचाए जा सकते हैं।

पत्र दो प्रकार के होते हैं :

1. अनौपचारिक
2. औपचारिक। निजी संबंधों में अपनेपन के तरीके से नाते, रिश्तेदार, स्नेही स्वजनों और मित्रों को लिखे गए पत्र अनौपचारिक पत्र कहलाते हैं। इसी तरह सरकारी, प्रशासनिक, और कार्यालयों को लिखे गए पत्र औपचारिक पत्र कहे जाते हैं। इस श्रेणी में आवेदनपत्र और शिकायती पत्र भी आते हैं।

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