CBSE Class 11 History Changing Cultural Traditions Hindi Assignment

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बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएं

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले)

Question 1. इटली के तटीय बंदरगाहों के पुनर्जीवित होने के दो मुख्य कारण बताइये।
Answer: (1) बाइजेंटाइन साम्राज्य और इस्लामी देशों के बीच व्यापार में वृद्धि।
(2) मंगोलों का चीन के साथ व्यापार बढ़ने से इतालवी बंदरगाहों को विशेष प्रोत्साहन मिलना।
In simple words: बाइजेंटाइन, इस्लामी देशों और चीन के साथ व्यापार बढ़ने से इटली के बंदरगाह पुनर्जीवित हुए।

Exam Tip: व्यापारिक संबंधों और भौगोलिक स्थिति को मुख्य कारण के रूप में लिखें।

 

Question 2. 'रेनेसां व्यक्ति' शब्द की व्याख्या कीजिए।
Answer: 'रेनेसां व्यक्ति' वह मनुष्य है जिसकी अनेक रुचियाँ हों और जिसे अनेक प्रकार के हुनर तथा कलाओं में महारत प्राप्त हो। उस काल में ऐसे व्यक्तियों को बहुमुखी प्रतिभा संपन्न माना जाता था।
In simple words: एक ऐसा व्यक्ति जो कई कलाओं और विषयों में पारंगत हो, उसे रेनेसां व्यक्ति कहा जाता है।

Exam Tip: बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) शब्द का प्रयोग उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।

 

Question 3. वेनिस और जेनेवा यूरोप के अन्य क्षेत्रों से किस प्रकार भिन्न थे?
Answer: वेनिस और जेनेवा में धर्माधिकारी और सामंत राजनीतिक दृष्टि से शक्तिशाली नहीं थे। इन नगरों में चर्च का नियंत्रण कम था और नगर के धनी व्यापारियों तथा महाजनों का शासन में सक्रिय भाग था।
In simple words: इन नगरों में सामंतों या चर्च के बजाय व्यापारियों और महाजनों का प्रभाव था।

Exam Tip: राजनीतिक नियंत्रण और व्यापारियों की भूमिका पर विशेष बल दें।

 

Question 4. 'दि पाइटा' नामक चित्र के चित्रकार कौन हैं? इसमें क्या दर्शाया गया है?
Answer: 'दि पाइटा' नामक प्रसिद्ध चित्र के चित्रकार माइकेल एंजेलो हैं। इसमें माता मेरी को ईसा मसीह का शरीर धारण किए हुए दर्शाया गया है।
In simple words: इस चित्र में माइकेल एंजेलो ने ईसा मसीह और माता मेरी के मार्मिक प्रसंग को उकेरा है।

Exam Tip: चित्रकार का नाम और उसकी विषय-वस्तु दोनों का उल्लेख करना अनिवार्य है।

 

Question 5. यथार्थवाद से क्या अभिप्राय है?
Answer: यथार्थवाद से अभिप्राय यथार्थ चित्र बनाने की कोशिश से है। शरीर विज्ञान, रेखागणित, भौतिकी तथा सौंदर्य की उत्कृष्ट भावना ने इतालवी कला को नया रूप दिया, जिसे बाद में यथार्थवाद कहा गया।
In simple words: जीवन और प्रकृति को बिल्कुल वास्तविक रूप में चित्रित करना यथार्थवाद कहलाता है।

Exam Tip: शरीर विज्ञान और रेखागणित जैसे वैज्ञानिक आधारों का उल्लेख जरूर करें।

 

Question 6. 15वीं शताब्दी में किन लोगों को मानवतावादी कहा गया?
Answer: 15वीं शताब्दी में उन लोगों को मानवतावादी कहा गया जो भौतिक संपत्ति, गौरव और शक्ति से आकृष्ट थे तथा जिनकी अच्छे व्यवहारों और ज्ञान के प्रति गहरी दिलचस्पी थी।
In simple words: मानवतावादी वे लोग थे जो मनुष्य के संसारी विकास और अच्छी शिक्षा-दीक्षा में रुचि रखते थे।

Exam Tip: लैटिन शब्द 'ह्यूमेनिस्टस' (Humanistas) के संदर्भ को ध्यान में रखें।

 

Question 7. पाप स्वीकारोक्ति नामक दस्तावेज क्या था?
Answer: यह चर्च द्वारा जारी किया जाने वाला एक ऐसा दस्तावेज था जो व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति दिला सकता था (जिसे क्षमापत्र या इंडल्जेन्स भी कहा जाता था)।
In simple words: यह चर्च द्वारा बेचा जाने वाला पत्र था जिसके बारे में मान्यता थी कि इससे पाप धुल जाते हैं।

Exam Tip: चर्च के इस भ्रष्ट आचरण ने आगे चलकर प्रोटेस्टेंट सुधार आंदोलन को जन्म दिया।

 

Question 8. सूर्य केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत क्या था?
Answer: इस सिद्धांत के अनुसार सूर्य स्थिर है और पृथ्वी समेत सारे ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। इसे कॉपरनिकस ने प्रतिपादित किया था।
In simple words: इस सिद्धांत ने साबित किया कि ब्रह्मांड के केंद्र में पृथ्वी नहीं बल्कि सूर्य है।

Exam Tip: कॉपरनिकस का नाम और उनका यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण पुनर्जागरण की बड़ी उपलब्धि थी।

 

Question 9. मार्टिन लूथर किंग कौन थे?
Answer: मार्टिन लूथर एक जर्मन युवा भिक्षु थे जिन्होंने कैथोलिक चर्च की कुरीतियों के विरुद्ध अभियान छेड़ा और प्रोटेस्टेंट सुधार आंदोलन का आरंभ किया।
In simple words: वे जर्मन पादरी थे जिन्होंने चर्च की तानाशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई।

Exam Tip: प्रोटेस्टेंट सुधारवाद में इनके योगदान को प्रमुखता से लिखें।

 

लघु प्रश्न (5 अंक वाले)

Question 10. विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में अरबियों के योगदान की व्याख्या कीजिए।
Answer: अरब विद्वानों ने अतीत की पांडुलिपियों का संरक्षण तथा अरबी में उनका अनुवाद किया। इब्न सिना और इब्न रुश्द जैसे दार्शनिकों ने विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण ग्रंथ रचे। इन अनुवादों और ग्रंथों के जरिए यूरोप में ज्ञान का प्रसार हुआ।
In simple words: अरबों ने प्राचीन ग्रंथों को सुरक्षित रखकर और उनके अनुवाद कर विश्व को नया वैज्ञानिक ज्ञान दिया।

Exam Tip: इब्न सिना और इब्न रुश्द का विशेष रूप से उल्लेख करें।

 

Question 11. पैट्रार्क के विचारों के परिप्रेक्ष्य में मानवतावादी विषयों के अध्ययन के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पैट्रार्क के विचारों के अनुसार पुराकाल एक विशिष्ट सभ्यता थी जिसे प्राचीन यूनानियों और रोमनों के वास्तविक शब्दों के माध्यम से ही अच्छी तरह समझा जा सकता था। इसलिए प्राचीन लेखकों की रचनाओं के अध्ययन की आवश्यकता थी ताकि मानवीय मूल्यों को समझा जा सके।
In simple words: पैट्रार्क मानते थे कि प्राचीन रोमन और यूनानी साहित्य का अध्ययन करके ही सही मानवतावादी ज्ञान मिल सकता है।

Exam Tip: क्लासिकल यूनानी और रोमन साहित्य के अध्ययन पर पैट्रार्क के जोर को स्पष्ट करें।

 

Question 12. मुद्रण ने किस प्रकार मानवतावादी संस्कृति के प्रसार में सहायता की?
Answer: मुद्रण (छपाई की कला) के आविष्कार के कारण जो कुछ भी इटली में लिखा गया, वह विदेशों तक आसानी से पहुंच गया। इससे विचार, मत और ज्ञान का तेजी से प्रसारण हुआ। मुद्रण से पहले केवल कुछ ही हस्तलिखित प्रतियां होती थीं, लेकिन अब पुस्तकें बड़े पैमाने पर छपने लगीं।
In simple words: प्रिंटिंग प्रेस के आने से किताबें सस्ती और सुलभ हो गईं, जिससे मानवतावादी विचार घर-घर पहुँच गए।

Exam Tip: गुटेनबर्ग की प्रिंटिंग प्रेस और जनसंचार में उसकी भूमिका को रेखांकित करें।

 

Question 13. मध्यकालीन यूरोपीय समाज में महिलाओं की स्थिति स्पष्ट कीजिए।
Answer: मध्यकालीन यूरोपीय समाज में पारिवारिक निर्णयों तथा सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी बहुत सीमित थी। कारोबार चलाने में महिलाओं की कोई विशेष राय नहीं होती थी, यद्यपि दहेज को कारोबार में लगाया जाता था। व्यापारी महिलाओं की स्थिति कुछ भिन्न थी और वे कभी-कभी व्यवसाय संभालती थीं, लेकिन इसके अपवादस्वरूप उदाहरण ही मिलते हैं।
In simple words: महिलाओं की स्थिति घरों तक सीमित थी और उन्हें आर्थिक या पारिवारिक निर्णयों में अधिकार नहीं थे।

Exam Tip: वेनिस की फेदेले या मंटुआ की ईसाबेल जैसे कुछेक अपवादों का उल्लेख करना उपयुक्त रहेगा।

 

Question 14. कॉन्सेंटैनिन के अनुवाद नामक दस्तावेज क्या था? मानवतावादी विद्वानों की इसके प्रति प्रतिक्रिया से चर्च के विरोधी राजाओं को खुशी क्यों हुई?
Answer: यह संभवतः प्रथम ईसाई रोमन सम्राट कॉन्सेंटैनिन द्वारा जारी किया गया दस्तावेज था जिसमें पादरियों को न्यायिक और वित्तीय शक्तियां दी गई थीं। मानवतावादी विद्वान यह दर्शाने में सफल रहे कि यह दस्तावेज असली नहीं, अपितु परवर्ती काल में जालसाजी द्वारा तैयार किया गया था। इससे चर्च का दावा कमजोर पड़ा, जिससे राजाओं को बहुत खुशी हुई क्योंकि वे चर्च के राजनीतिक और वित्तीय नियंत्रण से मुक्ति चाहते थे।
In simple words: जब मानवतावादियों ने साबित किया कि चर्च का विशेषाधिकार वाला दस्तावेज फर्जी है, तो राजाओं को चर्च की पकड़ कमजोर करने का मौका मिल गया।

Exam Tip: लॉरेंजो वल्ला द्वारा इस जालसाजी के खुलासे का प्रसंग अवश्य दें।

 

Question 15. ब्रह्मांड के प्रति कोपरनिकस के सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत तथा ईसाइयों के विश्वास में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: कोपरनिकस का सिद्धांत यह था कि सूर्य स्थिर है और पृथ्वी समेत सारे ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर काटते हैं। इसके विपरीत, ईसाइयों का पारंपरिक विश्वास था कि पृथ्वी पापों से भरी है और पापों की अधिकता के कारण वह स्थिर है। उनके अनुसार पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है और उसके चारों ओर खगोलीय ग्रह घूम रहे हैं।
In simple words: कॉपरनिकस ने विज्ञान के आधार पर सूर्य को केंद्र बताया, जबकि चर्च मानता था कि पापों के कारण पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में स्थिर है।

Exam Tip: वैज्ञानिक दृष्टिकोण बनाम धार्मिक अंधविश्वास के इस अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 16. ईसाई मानवतावादी इंग्लैंड के टॉमस मोर और हालैंड के इरेसमस की चर्च के प्रति क्या अवधारणा थी?
Answer: वे चर्च को एक लालची और लूट-खसोट वाली संस्था मानते थे। उनके अनुसार पाप स्वीकारोक्ति दस्तावेज केवल धन ठगने का तरीका था। उन्होंने चर्च के पादरियों के पाखंड और भ्रष्ट तौर-तरीकों की कड़ी आलोचना की।
In simple words: इन विचारकों ने माना कि चर्च धर्म के नाम पर आम लोगों को लूट रहा है और उसमें सुधार की आवश्यकता है।

Exam Tip: ईसाई मानवतावादियों के सुधारवादी दृष्टिकोण पर बल दें।

 

दीर्घ प्रश्न (10 अंक वाले)

Question 17. चौदहवीं शताब्दी को 'पुनर्जागरण' काल कहना कहाँ तक उचित है?
Answer: पुनर्जागरण की अवधारणा पर अब इतिहासकार पुनर्विचार करते हैं। यह कहना कि पुनर्जागरण से पहले का 12वीं व 13वीं सदी का काल पूरी तरह अंधकारमय था और उसके बाद अचानक महान सांस्कृतिक सृजन हुआ, पूर्ण रूप से उचित नहीं है। इंग्लैंड के पीटर बर्क ने सुझाव दिया कि बर्कहार्ट के विचार अतिशयोक्तिपूर्ण थे और उन्होंने इस काल के फर्क को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। वास्तविकता यह है कि इटली में पुनर्जागरण से जुड़े तत्व 12वीं व 13वीं सदी में फ्रांस आदि में साहित्यिक व कलात्मक रचनाओं के रूप में पहले ही पनपने लगे थे। इसके अलावा, इस समय के बदलावों में केवल रोम व यूनान की क्लासिकी सभ्यता का ही हाथ नहीं था, बल्कि एशिया की विकसित प्रौद्योगिकी व कार्यकुशलता का भी महत्वपूर्ण योगदान था। अतः इस काल को अत्यधिक नाटकीय रूप से 'अंधकार युग' से निकालकर देखना चाहिए।
In simple words: आधुनिक शोध बताते हैं कि पुनर्जागरण रातों-रात नहीं आया, बल्कि इसकी जड़ें मध्यकाल में ही मौजूद थीं और इसमें एशियाई योगदान भी था।

Exam Tip: पारंपरिक दृष्टिकोण और आधुनिक इतिहासकारों (जैसे पीटर बर्क) के तर्कों का तुलनात्मक उल्लेख करें।

 

Question 18. यूरोप के सर्वप्रथम विश्वविद्यालय इटली में क्यों स्थापित हुए? उन्होंने मानवतावादी विचारधारा के प्रसार में क्या योगदान किया?
Answer: यूरोप के सबसे पहले विश्वविद्यालय इटली में स्थापित होने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
(1) 11वीं सदी से पादुआ और बोलोनिया नगर व्यापार व वाणिज्य से संबंधित प्रमुख केंद्र बन चुके थे।
(2) वकीलों व नोटरी को बड़े पैमाने पर व्यापार के लिए नियमों को लिखने, व्याख्या करने व समझौते तैयार करने के लिए प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता थी।
(3) इसलिए पादुआ और बोलोनिया विश्वविद्यालय विधिशास्त्र (Law) अध्ययन के प्रमुख केंद्र बने।

मानवतावादी विचारधारा के प्रसार में योगदान:
- फ्रांसेस्को पेट्रार्क के प्रयत्नों से कानून को रोमन संदर्भ में पढ़ा गया व वहाँ के प्राचीन लेखकों की रचनाओं को भी शामिल किया गया।
- नई संस्कृति में धार्मिक शिक्षा के परे भी ज्ञान की अवधारणा विकसित हुई।
- नए विश्वविद्यालयों में व्याकरण, अलंकारशास्त्र, कविता, इतिहास व नीतिदर्शन विषय पढ़ाए जाने लगे।
- इन विषयों को पढ़ाने वाले अध्यापक मानवतावादी कहलाए।
- ये विषय धार्मिक न होकर उस कौशल पर बल देते थे जो व्यक्ति के चर्चा व वाद-विवाद से विकसित होता था।
- ह्यूमेनेटिज लैटिन शब्द ह्यूमेनिटास से बना, जिसने इटली के जीवंत बौद्धिक नगरों में मानवतावादी विचारधारा को घर-घर पहुँचाया।
In simple words: व्यापार की जरूरतों के कारण इटली में कानून और शिक्षा के केंद्र बने, जहाँ से मानवतावादी विचारों, शिक्षा और धर्म-निरपेक्ष ज्ञान का प्रसार हुआ।

Exam Tip: व्यापारिक विकास, विधिशास्त्र की आवश्यकता और मानवतावादी विषयों (व्याकरण, इतिहास, दर्शन) के नाम अवश्य लिखें।

 

निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़िए और अंत में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-

"कला प्रकृति में रची-बसी होती है। जो इसके सार को पकड़ सकता है वही इसे प्राप्त कर सकता है.... इसके अतिरिक्त आप अपनी कला को गणित द्वारा दिखा सकते हैं। जिंदगी की अपनी आकृति से आपकी कृति जितनी जुड़ी होगी उतना ही सुंदर आपका चित्र होगा। कोई भी आदमी केवल आपके कल्पना मात्र से एक सुंदर आकृति नहीं बना सकता जब तक उसने अपने आप को जीवन की प्रतिछवि से न भर लिया हो।"
-अल्बर्ट डूरर (Albrecht Durer, 1571-1528)

Question 1. इस चित्र के चित्रकार का नाम बताइये।
Answer: इस चित्र के चित्रकार अल्बर्ट डूरर (Albrecht Durer) हैं।
In simple words: इसके रचनाकार अल्बर्ट डूरर हैं।

Exam Tip: चित्रकार का पूरा नाम और काल-खंड याद रखें।

 

Question 2. कला के संबंध में डूरर के विचार स्पष्ट कीजिए।
Answer: डूरर का मानना था कि कला प्रकृति में रची-बसी होती है और इसे गणित तथा वास्तविक जीवन के अनुभवों के आधार पर ही उत्कृष्ट बनाया जा सकता है। केवल कोरी कल्पना से सुंदर कलाकृति नहीं बनाई जा सकती।
In simple words: कला के लिए प्रकृति, गणित और जीवन का वास्तविक अनुभव होना आवश्यक है।

Exam Tip: प्रकृति और गणित के संयोजन पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 3. यह चित्र किस संस्कृति का आभास कराता है?
Answer: यह चित्र सोलहवीं शताब्दी की उस इतालवी संस्कृति का आभास कराता है जहाँ लोग गहरे रूप से धार्मिक होने के साथ-साथ मनुष्य की योग्यता पर भी विश्वास करते थे।
In simple words: यह चित्र धार्मिकता और मानवीय क्षमताओं के समन्वय वाली संस्कृति को दर्शाता है।

Exam Tip: सोलहवीं शताब्दी की इतालवी संस्कृति का संदर्भ दें।

 

Question 4. इटली के लोगों को मनुष्य की किस योग्यता पर विश्वास था?
Answer: इटली के लोगों को इस बात पर भरोसा था कि मनुष्य निकट पूर्णता को प्राप्त कर सकता है और दुनिया तथा ब्रह्मांड के अनगिनत रहस्यों को अपनी बुद्धि व प्रयासों से सुलझा सकता है।
In simple words: उन्हें विश्वास था कि मनुष्य अपनी योग्यता से ब्रह्मांड के सारे रहस्य जान सकता है।

Exam Tip: मानवतावादी सोच और मनुष्य की असीम क्षमताओं के विश्वास को रेखांकित करें।

 

निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़िए और अंत में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-

निकलो मकियावेली (Niccolo Machiavelli) अपने ग्रंथ दि प्रिंस (1513) के पंद्रहवें अध्याय में मनुष्य के स्वभाव के बारे में लिखते हैं -
"कल्पनादिक बातों को यदि अलग कर दें और केवल उन्हीं विषयों के बारे में सोचें जो वास्तव में हैं, मैं यह कहता हूं कि जब भी मनुष्य के बारे में चर्चा होती है (विशेषकर राजकुमारों के बारे में, जो जनता की नजर में रहते हैं) तो इनमें अनेक गुण देखे जाते हैं जिनके कारण वे प्रशंसा या निंदा के योग्य बने हैं। उदाहरण के लिए कुछ को दांनी माना जाता है और अन्य को कंजूस। कुछ लोगों को हितैषी माना जाता है तो अन्य को लोभी कहा जाता है, कुछ निर्दयी और कुछ दयालु। एक व्यक्ति अविश्वसनीय और दूसरा विश्वसनीय; एक व्यक्ति कामुक, दूसरा पवित्र, एक निष्कपट दूसरा चालाक; एक अडियल दूसरा लचीला; एक गंभीर दूसरा छछोरा; एक धार्मिक दूसरा संदेही इत्यादि।
मकियावेली यह मानते थे कि 'सभी मनुष्य बुरे हैं और वे अपने दुष्ट स्वभाव को प्रदर्शित करने में सदैव तत्पर रहते हैं क्योंकि कुछ हद तक मनुष्य की इच्छाएं अपूर्ण रह जाती हैं।' मकियावेली ने देखा कि इसके पीछे, प्रमुख कारण हैं कि मनुष्य अपने समस्त कार्यों में अपना स्वार्थ देखता है।"

Question 1. मनुष्य अपने किन गुणों के कारण निंदा अथवा प्रशंसा के योग्य होते हैं?
Answer: मनुष्य अपने व्यवहार के विभिन्न गुणों जैसे दानी होना या कंजूस होना, हितैषी होना या लोभी होना, दयालु या निर्दयी होना, तथा विश्वसनीय या चालाक होने के कारण प्रशंसा अथवा निंदा के योग्य बनते हैं।
In simple words: इंसान अपने अच्छे या बुरे सामाजिक व्यवहार के कारण ही प्रशंसा या आलोचना का पात्र बनता है।

Exam Tip: मकियावेली द्वारा गिनाए गए मानवीय गुणों के द्वंद्व को स्पष्ट करें।

 

Question 2. मकियावेली ने मनुष्य के स्वभाव के विषय में क्या विचार प्रस्तुत किये?
Answer: मकियावेली का विचार था कि सभी मनुष्य मूलतः बुरे होते हैं और अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर अपने दुष्ट स्वभाव को प्रदर्शित करने में सदैव तत्पर रहते हैं क्योंकि उनकी इच्छाएं पूरी तरह कभी नहीं भरतीं।
In simple words: मकियावेली के अनुसार इंसान स्वभाव से स्वार्थी और अवसरवादी होता है।

Exam Tip: स्वार्थ और अपूर्ण इच्छाओं को मकियावेली के सिद्धांत का केंद्र बिंदु बताएं।

 

Question 3. उपरोक्त विवरण किस पुस्तक से लिया गया है?
Answer: उपरोक्त विवरण मकियावेली द्वारा रचित प्रसिद्ध पुस्तक 'दि प्रिंस' (The Prince) से लिया गया है।
In simple words: यह मकियावेली की प्रसिद्ध पुस्तक 'दि प्रिंस' का अंश है।

Exam Tip: पुस्तक का नाम और उसका रचना वर्ष (1513) याद रखें।

 

निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़िए और अंत में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-

1506 में अंग्रेजी भाषा में बाइबल का अनुवाद करने वाले, लूथरवादी अंग्रेज, विलियम टिंडेल (William Tyndale 1494-1536) ने प्रोटेस्टेंटवाद का इस तरह समर्थन किया:
"इस बात से सब लोग सहमत होंगे कि वे आपको धर्मग्रंथ के ज्ञान से दूर रखने के लिए यह चाहते थे कि धर्मग्रंथ के अनुवाद आपकी मातृभाषा में उपलब्ध न हो सकें। जिससे दुनिया अंधकार में ही रहे और वे (पुरोहित वर्ग) लोगों के अंतःकरण (conscience) में बने रहें जिससे उनके द्वारा बनाए व्यर्थ के अंधविश्वास और झूठे धर्मसिद्धांत चलते रहें; जिसके रहते उनकी ऊंची आकांक्षाएं और अतृप्त लोलुपता पूरी हो सके। इस तरह वे राजा, संभ्रांत वर्ग और यहां तक कि अपने को ईश्वर से भी ऊंचा बना सके... जिस बात ने मुझे मुख्य रूप से न्यू टेस्टामेंट का अनुवाद करने की प्रेरणा दी। मुझे अपने अनुभवों से ज्ञात हुआ कि सामान्य लोगों को किसी भी सच्चाई की तब तक जानकारी नहीं हो सकती जब तक उनके पास अपने धर्मग्रंथ के मातृभाषा में अनुवाद उपलब्ध न हों। इन अनुवादों से ही वे धर्मग्रंथ की परिपाटी, क्रम और अर्थ समझ सकेंगे।"

Question 1. धर्मग्रंथों का मातृभाषा में उपलब्ध होना क्यों आवश्यक है?
Answer: धर्मग्रंथों का मातृभाषा में होना इसलिए आवश्यक है ताकि सामान्य लोग बिना किसी पुरोहित की मध्यस्थता के धर्मग्रंथ की सच्चाई, परिपाटी और उसका सही अर्थ स्वयं समझ सकें।
In simple words: मातृभाषा में अनुवाद होने से आम लोग धर्म की वास्तविक बातें खुद पढ़ और समझ सकते हैं।

Exam Tip: पादरियों के एकाधिकार को समाप्त करने के तर्क को समझाएं।

 

Question 2. पुरोहित वर्ग, लोगों के अंतःकरण में क्यों बने रहना चाहते थे?
Answer: पुरोहित वर्ग लोगों के मन पर राज करना चाहता था ताकि उनके झूठे अंधविश्वास और धर्मसिद्धांत चलते रहें और उनकी लोलुपता तथा उच्च महत्वाकांक्षाएं पूरी होती रहें।
In simple words: पुरोहित वर्ग अपना स्वार्थ और प्रभाव बनाए रखने के लिए लोगों को भ्रम में रखता था।

Exam Tip: पुरोहितों के निहित स्वार्थ और आर्थिक लालच की बात लिखें।

 

Question 3. विलियम टिंडेल ने इस अनुच्छेद के द्वारा ईसाई धर्म की किस विचारधारा का समर्थन किया है?
Answer: विलियम टिंडेल ने प्रोटेस्टेंटवाद और लूथरवादी सुधारवादी विचारधारा का समर्थन किया है, जो चर्च के पाखंड के खिलाफ थी और बाइबल को आम लोगों की भाषा में सुलभ कराने पर जोर देती थी।
In simple words: उन्होंने चर्च के भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रोटेस्टेंट सुधार आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया।

Exam Tip: प्रोटेस्टेंट सुधार आंदोलन और बाइबल के स्थानीय भाषा में अनुवाद के महत्व को जोड़कर लिखें।

 

दिये गये इटली के मानचित्र में निम्नलिखित राज्यों को अंकित कीजिए / पहचानिए:
कोर्सिका, सार्डिनिया, जेनेवा, फ्लोरेंस, पादुआ

Question 1.दिये गये मानचित्र में इटली के 1-5 राज्य दिखाए गए हैं उन्हें पहचानकर उनके नाम लिखिए।
Answer:
1. पादुआ (Padua)
2. कोर्सिका (Corsica)
3. फ्लोरेंस (Florence)
4. सार्डिनिया (Sardinia)
5. सिसिली (Sicily)
In simple words: मानचित्र में दिए गए अंकों के आधार पर ये प्रमुख इतालवी क्षेत्र और द्वीप हैं।

Exam Tip: मानचित्र कार्य में उत्तर भारत या यूरोप के भौगोलिक स्थानों का सही अभ्यास करें। मानचित्र में सही स्थान पर राज्यों के नाम अंकित करें।

 

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