Class 11 Geography Practice Assignments: CBSE Class 11 Geography Life on Earth Hindi Assignment
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❑ जैवमंडल और इसके घटक पर्यावरण के बहुत महत्वपूर्ण तत्व हैं।
❑ पारिस्थितिकी शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों ओइकोस और लोजी से मिलकर बना है। ओइकोस का शाब्दिक अर्थ घर तथा लोजी का अर्थ विज्ञान य अध्ययन से है। अर्थात्, पृथ्वी पर पौधों, मनुष्यों जंतुओं व सूक्ष्म जीवाणुओं के 'घर' के रूप में अध्ययन पारिस्थितिकी कहलाता है।
अतिलघु प्रश्न
प्रश्न 1. बायोम का अर्थ स्पष्ट करो?
Answer: पौधों व प्राणियों का समुदाय जो एक भौगोलिक क्षेत्र में पाया जाता है उसे बायोम कहते है।
In simple words: किसी बड़े भौगोलिक क्षेत्र में मिलने वाले पौधों और जीवों के समुदाय को बायोम कहते हैं।
Exam Tip: परिभाषा लिखते समय 'भौगोलिक क्षेत्र' और 'पौधों व प्राणियों का समुदाय' मुख्य शब्दावली हैं।
प्रश्न 2. पारिस्थितिक अनुकूलन से क्या अभिप्राय है?
Answer: विभिन्न प्रकार के पर्यावरण व विभिन्न परिस्थितियों में भिन्न भिन्न प्रकार के पारितन्त्र पाए जाते है में अलग-अलग प्रकार के पौधे व जीव जंतु धीरे-धीरे उसी पर्यावरण के अभ्यस्त हो जाते है अर्थात् स्वयं को पर्यावरण के अनुकूल ढाल लेते है। इसी को पारिस्थितिक अनुकूलन कहा जाता है।
In simple words: जीवों द्वारा अपने आपको वहाँ के पर्यावरण के अनुसार ढाल लेना अनुकूलन है।
Exam Tip: अनुकूलन की प्रक्रिया दीर्घकालीन होती है जिसमें जीव पर्यावरण के अनुसार खुद को ढालते हैं।
प्रश्न 3. शीतोष्ण घास भूमियों को संयुक्त राज्य अमेरिका में क्या कहते है?
Answer: प्रेयरी
In simple words: यूएसए की शीतोष्ण घास भूमि को प्रेयरी कहा जाता है।
Exam Tip: विश्व की प्रमुख घास भूमियों के स्थानीय नाम मानचित्र के प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 4. शीतोष्ण घास-भूमियों को अर्जेंटीना में क्या कहते है?
Answer: पम्पास
In simple words: अर्जेंटीना में शीतोष्ण घास के मैदानों को पम्पास कहते हैं।
Exam Tip: दक्षिण अमेरिका के घास के मैदानों को पम्पास नाम से जाना जाता है।
प्रश्न 5. शीतोष्ण घास-भूमियों को आस्ट्रेलिया व एशिया में क्या कहते है?
Answer: आस्ट्रेलिया - डॉउन, एशिया - स्टेपी।
In simple words: ऑस्ट्रेलिया में इन्हें डॉउन और एशिया में स्टेपी कहा जाता है।
Exam Tip: विभिन्न महाद्वीपों के घास मैदानों के नाम याद रखें।
प्रश्न 6. खाद्य श्रृंखला की प्रक्रिया क्या है?
Answer: एक स्तर से दूसरे स्तर पर ऊर्जा के प्रवाह को खाद्य श्रृंखला कहते है।
In simple words: ऊर्जा का एक पोषण स्तर से दूसरे स्तर पर पहुँचना खाद्य श्रृंखला है।
Exam Tip: खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदिशीय होता है।
विस्तृत प्रश्न
प्रश्न 1. पारिस्थितिक असंतुलन के चार कारक कौन-कौन से है? स्पष्ट करो।
Answer: संसार में जीवों तथा भौतिक पर्यावरण में संतुलन बना रहता है लेकिन जब ये संतुलन बिगड़ जाता है तब पारिस्थितिक असंतुलन पैदा हो जाता है। इसके कई कारण है :-
1. जनसंख्या में वृद्धि :- लगातार जनसंख्या वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर जनसंख्या का दबाव बढ़ता जाता है और पारिस्थितिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
2. वन सम्पदा का विनाश :- वन सम्पदा का विनाश (मानव व प्रकृति दोनों के द्वारा) से भी पारिस्थितिक असंतुलन की स्थिति पैदा हो जाती है। अत्याधिक वर्षा से बाढ़ द्वारा मृदा अपरदन या सूखे से भी वन नष्ट हो जाते है।
3. तकनीकी प्रगति :- लगातार प्रगति के कारण औद्योगिक क्षेत्र बढ़ता जा रहा है और इनसे निकलने वाला धूँआ व अपशिष्ट पदार्थ वातावरण को दूषित कर पारिस्थितिक संतुलन को बिगड़ रहा है।
4. मांसाहारी पशुओं की कमी :- मांसाहारी पशुओं की कमी से शाकाहारी पशुओं की मात्रा बढ़ जाती है और उनके द्वारा वनस्पति (घास-झाड़ियां) अधिक मात्रा में खाई जाती हैं जिससे पहाड़ियों पर वनस्पति का आवरण कम हो जाता है और मृदा अपरदन की तीव्रता बढ़ जाती है जिससे पारिस्थितिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
In simple words: वनों की कटाई, जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण और जीवों के प्राकृतिक संतुलन में बाधा पारिस्थितिक असंतुलन के प्रमुख कारण हैं।
Exam Tip: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में चारों बिंदुओं को उचित हेडिंग के साथ स्पष्ट करें।
प्रश्न 2. पारितन्त्र क्या है? पारितन्त्र के प्रकारों का वर्णन कीजिए?
Answer: किसी विशेष क्षेत्र में किसी विशेष समूह के जीवधारियों का भूमि, जल तथा वायु से ऐसा अन्तर्सम्बन्ध जिसमें ऊर्जा प्रवाह व पोषण श्रृंखलाएं स्पष्ट रूप से समायोजित हों, उसे पारितन्त्र कहा जाता है।
पारितन्त्र के प्रकार : पारितन्त्र मुख्यतः दो प्रकार के हैं
1) स्थलीय पारितन्त्र
2) जलीय पारितन्त्र
1) स्थलीय पारितन्त्र :- स्थानीय पारितन्त्र को पुनः बायोम में विभक्त किया जा सकता है। बायोम, पौधों व प्राणियों का एक समुदाय है, जो एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में पाया जाता है। वर्षा, तापमान, आर्द्रता व मिट्टी आदि। बायोम की प्रकृति तथा सीमा निर्धारित करते हैं। विश्व के कुछ प्रमुख पारितन्त्र वन, घास क्षेत्र, मरुस्थल और टुण्डा पारितन्त्र है।
2) जलीय पारितन्त्र :- जलीय पारितन्त्र को समुद्री पारितन्त्र व ताजे जल के पारितन्त्र में बांटा जाता है। समुद्री पारितन्त्र में महासागरीय, ज्वारनदमुख, प्रवालभित्ति पारितन्त्र सम्मिलित है। ताजे जल के पारितन्त्र मे झीलें, तालाब, सरिताएँ कच्छ व दलदल शामिल है।
In simple words: जीव और पर्यावरण के परस्पर तंत्र को पारितन्त्र कहते हैं, जो मुख्य रूप से स्थलीय और जलीय होते हैं।
Exam Tip: पारितन्त्र की परिभाषा देते समय जैविक और अजैविक घटकों के मध्य अंतर्संबंध का उल्लेख अवश्य करें।
प्रश्न 3. पारितन्त्र की संरचना की दृष्टि से जैविक व अजैविक कारकों का वर्णन करें?
Answer: अजैविक कारक में तापमान वर्षा सूर्य का प्रकाश, आर्द्रता, मृदा की स्थिति व अकार्बनिक तत्व (कार्बन-डाई-ऑक्ससाइड, जल, नाइट्रोजन, कैल्शियम फास्फोरस, पोटेशियम आदि) सम्मिलित है।
अजैविक कारक में उत्पादक, उपभोक्ता (प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक) तथा अपघटक शामिल है। उत्पादकों के सभी हरे पौधे सम्मिलित हैं, जो प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन बनाते हैं। प्राथमिक उपभोक्ताओं में शाकाहारी जन्तु जैसे हिरण, बकरी, चूहे और सभी पौधों पर निर्भर जीव शामिल है। द्वितीयक श्रेणी के उपभोक्ताओं में सभी मांसाहारी जैसे सांप, बाघ, शेर आदि शामिल है। तृतीयक उपभोक्ताओं में वो मांसाहारी जीव शामिल है जो दूसरे मांसाहारी जीवों पर निर्भर हैं, जैसे बाज और नेवला। अपघटक वे हैं जो मृत जीवों पर निर्भर है जैसे कौवा और गिद्ध तथा कुछ अन्य अपघटक जैसे बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीवाणु जो मृतकों को अपघटित कर उन्हें सरल पदार्थों में परिवर्तित करते हैं।
In simple words: पारितन्त्र दो मुख्य घटकों से बना है - अजैविक (निर्जीव कारक) और जैविक (पादप और जीव)।
Exam Tip: उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक के बीच पोषण स्तर का अंतर स्पष्ट रूप से समझाइए।
प्रश्न 4. खाद्य-श्रृंखला क्या है? इसके दो प्रकारों का उदाहरण सहित वर्णन करें?
Answer: किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के समस्त जीव भोजन के लिए परस्पर एक दूसरें पर निर्भर रहते हैं। इस प्रकार समस्त जीव एक दूसरे पर निर्भर होकर भोजन श्रृंखला बनाते हैं इससे पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य ऊर्जा का प्रवाह होता है। खाद्य ऊर्जा का एक स्तर से दूसरे स्तर पर ऊर्जा प्रवाह की खाद्य श्रृंखला कहलाती है।
सामान्यतः दो प्रकार की खाद्य श्रृंखलाएं पाई जाती है।
(1) चराई खाद्य श्रृंखला
(2) अपरत खाद्य श्रृंखला
(1) चराई खाद्य श्रृंखला पौधों (उत्पादक) से आरम्भ होकर मांसाहारी (तृतीयक उपभोक्ता) तक जाती है, जिसमें शाकाहारी मध्यम स्तर पर है। हर स्तर पर ऊर्जा का हास होता है जिसमें श्वसन, उत्सर्जन व विघटन प्रक्रियाएं सम्मिलित है।
(2) अपरत खाद्य श्रृंखला चराई खाद्य श्रृंखला से प्राप्त मृत पदार्थों पर निर्भर है और इसमें कार्बनिक पदार्थ का अपघटन सम्मिलित है।
In simple words: भोजन के लिए जीवों का एक-दूसरे पर क्रमबद्ध रूप से निर्भर रहना खाद्य श्रृंखला है, जो मुख्यतः चराई और अपरत प्रकार की होती है।
Exam Tip: खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है, इसे ध्यान में रखें।
प्रश्न 5. विश्व के बोरियल बायोम का तीन बिन्दुओं में वर्णन करे?
Answer: 1. बोरियल बायोम या टैगा शंकुधारी वन, शीतल और छोटी अवधि की ग्रीष्म ऋतु तथा बहुत ठंडी और लम्बी शीत ऋतु जलवायु विशेष प्रदेशों में पाए जाते हैं। यहाँ वर्षा मुख्यतः हिमपात के रूप में 40 से 100 सें.मी. तक होती है।
2. इन वनों में यूरेशिया व उत्तर अमेरिका का उच्च अक्षांशीय भाग, साइबेरिया का कुछ भाग, अलास्का कनाडा व स्कैंडिनेविया के देश शामिल है।
3. यहाँ मिट्टी की अपेक्षाकृत पतली परत है जिसमें अम्लीय व पोषक तत्वों की कमी होती है। यहाँ सदाबहार कोणधारी वन उगते है जिसमें पाइन स्प्रूस व फर के वृक्ष प्रमुख है। यहाँ चील, भालू, हिरण, खरगोश, भेड़िया व चमगादड़ आदि प्रमुख प्राणी पाए जाते हैं।
In simple words: बोरियल बायोम ठंडे प्रदेशों के शंकुधारी वनों का क्षेत्र है जहाँ लंबी सर्दी और कम वर्षा होती है।
Exam Tip: बोरियल बायोम की मुख्य विशेषताएं जैसे शंकुधारी वृक्ष और ठंडी जलवायु को मुख्य बिंदुओं में लिखें।
प्रश्न. खाद्य जाल को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: खाद्य श्रृंखलाएं पृथ्क् अनुक्रम न होकर एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। उदाहरणार्थ - एक चूहा जो अन्न पर निर्भर है, वह अनेक द्वितीयक उपभोक्ताओं का भोजन है और तृतीयक मांसाहारी अनेक द्वितीयक जीवों से अपने भोजन की पूर्ति करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक मांसाहारी जीव एक से अधिक प्रकार के शिकार पर निर्भर है। परिणामस्वरूप खाद्य श्रृंखलाएं आपस में एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। जातियों के इस प्रकार के जुड़े होने (अर्थात जीवों की खाद्य श्रृंखलाओं के विकल्प उपलब्ध होने पर) को खाद्य जाल कहा जाता है.
In simple words: जब कई सारी खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में मिल जाती हैं तो उसे खाद्य जाल कहते हैं।
Exam Tip: खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में अंतर स्पष्ट होना चाहिए; खाद्य जाल अधिक जटिल और वास्तविक होता है।
प्रश्न 6. जैव भू-रासायनिक चक्र क्या है? इसके प्रकारों का वर्णन करें।
Answer: विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि पिछले 100 करोड़ वर्षों में वायुमंडल व जलमंडल की संरचना में रासायनिक घटकों का संतुलन लगभग एक जैसा अर्थात बदलाव रहित रहा है। रासायनिक ऊतकों से होने वाले चक्रीय प्रवाह के द्वारा बना रहता है। यह चक्र जीवों द्वारा रासायनिक तत्वों के अवशोषण से आरंभ होता है और उनके वायु, जल व मिट्टी में विघटन से पुनः आरंभ होता है। ये चक्र मुख्यतः सौर ताप से संचालित होते हैं। जैवमंडल मे जीवधारी व पर्यावरण के बीच में रासायनिक तत्वों के चक्रीय प्रवाह को जैव भू-रासायनिक चक्र कहा जाता है।
(1) गैसीय चक्र
(2) तलछटी चक्र
(1) गैसीय चक्र :- यहाँ पदार्थ का भंडार/स्त्रोत वायुमंडल व महासागर हैं।
(2) तलछटी चक्र :- यहाँ पदार्थ का प्रमुख भंडार पृथ्वी की भूपर्पटी पर पाई जाने वाली मिट्टी, तलछट व अन्य चट्टाने है।
In simple words: पर्यावरण और जीवों के बीच रासायनिक तत्वों का चक्रीय प्रवाह जैव भू-रासायनिक चक्र कहलाता है, जो गैसीय और तलछटी हो सकता है।
Exam Tip: जैव भू-रासायनिक चक्रों में ऊर्जा का स्रोत सौर ऊर्जा है तथा यह चक्रीय रूप में चलते हैं।
प्रश्न 7. पारिस्थितिक संतुलन क्या है? वर्णन करो।
Answer: किसी पारितंत्र या आवास में जीवों के समुदाय में परस्पर गतिक साम्य्रता की अवस्था ही पारिस्थितिक संतुलन है। इसे पारितंत्र में हर प्रजाति की संख्या के एक स्थायी संतुलन के रूप में तभी रह सकता है, जब किसी पारिस्थितिकी तंत्र में निवास करने वाले विभिन्न जीवों की सापेक्षिक संख्या में संतुलित हो। यह इस तथ्य पर भी निर्भर करता है कि कुछ जीव अपने भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर करते हैं। उदाहरणार्थय घास के विशाल मैदानों में हिरण, जेबरा, भैंस आदि शाकाहारी जीव अधिक संख्या में होते हैं। दूसरी और बाघ व शेर जैसे मांसाहारी जीव अपने भोजन के लिए शाकाहारी जीवों पर निर्भर करते हैं और उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम होती है।
In simple words: पारितंत्र में विभिन्न जीवों की संख्या और उनके बीच का संतुलन पारिस्थितिक संतुलन कहलाता है।
Exam Tip: संतुलन बनाए रखने में उत्पादक और उपभोक्ताओं (विशेषकर शाकाहारी और मांसाहारी) का अनुपात महत्वपूर्ण होता है।
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