UP Board Solutions Class 9 Social Science Chapter 5 Prakritik Vanaspati Tatha Vanya Prani

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Detailed Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणि UP Board Solutions for Class 9 Social Science

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Class 9 Social Science Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणि UP Board Solutions PDF

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 1. वैकल्पिक प्रश्न-
(i) रबड़ का संबंध किस प्रकार की वनस्पति से है?
(क) टुंड्रा
(ख) हिमालय
(ग) मैंग्रोव
(घ) उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन
(ii) सिनकोना के वृक्ष कितनी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं?
(क) 100 सेमी
(ख) 70 सेमी
(ग) 50 सेमी
(घ) 50 सेमी से कम वर्षा
(iii) सिमलीपाल जीवमण्डल निचय कौन से राज्य में स्थित है?
(क) पंजाब
(ख) दिल्ली
(ग) ओडिशा
(घ) पश्चिम बंगाल
(iv) भारत में कौन-से जीवमण्डल निचय विश्व के जीवमण्डल निचयों के लिए गए हैं?
(क) मानस
(ख) मन्नार की खाड़ी
(ग) नीलगिरि
(घ) नंदादेवी
Answer:
(i) (घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन
(ii) (क) 100 सेमी
(iii) (ग) ओडिशा
(iv) (घ) नंदा देवी
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न वनस्पति प्रकारों और उनसे संबंधित वर्षा क्षेत्रों तथा भारत में प्रमुख जीवमण्डल निचयों से संबंधित बहुविकल्पीय उत्तरों को जानने के लिए है।

🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही विकल्प को पहचानना और उसे पूर्ण रूप से उत्तर में लिखना महत्वपूर्ण है।

 

संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न-

 

Question 1. पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं?
Answer: किसी भी क्षेत्र के पादप तथा प्राणी आपस में तथा अपने भौतिक पर्यावरण से आपस में संबंधित होते हैं और एक पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण करते हैं। इस प्रकार पारिस्थितिक तंत्र भौतिक पर्यावरण एवं इसमें निवास करने वाले जीव-जन्तुओं की पारस्परिक निर्भरता का तंत्र है। मनुष्य भी इस पारिस्थितिक तंत्र का अभिन्न अंग है। मनुष्य वनस्पति एवं वन्य जीवों का उपयोग करता है।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र जीवों और उनके भौतिक वातावरण के बीच का संबंध है, जिसमें वे एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें तथा मानव की भूमिका भी उल्लेखित करें।

 

Question 2. भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण किन तत्त्वों द्वारा निर्धारित होता है?
Answer: भारत में पादपों एवं जीवों के वितरण को निर्धारित करने वाले तत्त्व इस प्रकार हैं-जलवायु, मृदा, उच्चावच, अपवाह, तापमान, सूर्य का प्रकाश, वर्षण आदि।
In simple words: भारत में पेड़-पौधों और जानवरों का वितरण मुख्य रूप से जलवायु, मिट्टी, जमीन की ऊँचाई और बारिश जैसे प्राकृतिक कारकों पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: इन कारकों को सूचीबद्ध करते समय उनके महत्व को संक्षिप्त में समझाना अच्छा होगा।

 

Question 3. जीवमण्डल निचय से क्या अभिप्राय है? कोई दो उदाहरण दो।
Answer: जीवमण्डल निचय-जैवविविधता को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिए स्थापित क्षेत्रों को जीवमण्डल निचय कहते हैं। एक संरक्षित जीवमण्डल जिसका संरक्षण इस प्रकार किया जाता है कि न केवल इसकी जैविक भिन्नता संरक्षित की जाती है अपितु इसके संसाधनों का प्रयोग भी स्थानीय समुदायों के लाभ हेतु टिकाऊ तरीके से किया जाता है। उदाहरण, नीलगिरी, सुंदरबन।
In simple words: जीवमण्डल निचय विशेष क्षेत्र होते हैं जहाँ जैवविविधता को संरक्षित किया जाता है, साथ ही स्थानीय समुदायों को टिकाऊ तरीके से संसाधनों का उपयोग करने की अनुमति दी जाती है।

🎯 Exam Tip: परिभाषा के साथ-साथ उदाहरण देना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

 

Question 4. कोई दो वन्य प्राणियों के नाम बताइए जो कि उष्ण कटिबंधीय वर्षा और पर्वतीय वनस्पति में मिलते हैं।
Answer:
1. उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन-लंगूर, बंदर, हाथी।
2. पर्वतीय वनस्पति-घने बालों वाली भेड़, लाल पांडा, आइवेक्स।
In simple words: उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों में लंगूर और हाथी पाए जाते हैं, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में घने बालों वाली भेड़ और लाल पांडा जैसे जीव मिलते हैं।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट वनस्पति प्रकारों को विशिष्ट वन्यजीवों के साथ जोड़कर याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. निम्नलिखित में अंतर कीजिए-
(i) वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत।
(ii) सदाबहार और पर्णपाती वन।
Answer:
(i) वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत में अंतर-
प्राणी जगतवनस्पति जगत
1. भोजन की आदत के आधार पर प्राणियों को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है-1. शाकाहारी जीव, 2. मांसाहारी जीव।1. पौधों को दो वर्गों-फूल वाले पौधे तथा बिना फूल वाले पौधे के रूप में बाँटा जाता है।
2. कुछ वन्यप्राणी विलुप्त होने की स्थिति में हैं, उनके संरक्षण के लिए विशेष प्रयत्न किए जा रहे हैं।2. हमारे देश में विविध प्रकार की वनस्पति मिलती है। यहाँ उष्ण कटिबंधीय वनस्पति से लेकर ध्रुवीय वनस्पति तक के दर्शन होते हैं।
3. सूक्ष्म जीवाणु से लेकर विशालकाय ह्वेल तथा हाथी जीवों की श्रेणी प्राणी जगत कहलाती है।3. किसी प्रदेश या क्षेत्र में स्वतः ही पैदा होने वाले हरित स्वरूप को वनस्पति जगत कहते हैं।
4. प्राणियों को तीन वर्गों में बाँटा गया है-(i) थल-चर, (ii) जल-चर, (iii) नभ-चर।4. प्राकृतिक वनस्पति के आवरण में वन, झाड़ियों तथा घास भूमियों को शामिल किया जाता है।
5. हमारे देश के प्राणियों में भी विविधता पाई जाती है। यहाँ लगभग 89,000 जातियों के जीव-जन्तु पाए जाते हैं।5. भारत में पौधों की 47,000 प्रकार की जातियाँ पाई जाती हैं।
6. 2,500 जातियों की मछलियाँ तथा 2,000 जातियाँ पक्षियों की पाई जाती हैं।6. पौधों की 5,000 जातियाँ तो ऐसी हैं जो केवल भारत में पाई जाती हैं।

(ii) सदाबहार और पर्णपाती वन में अंतर-
पर्णपाती वनसदाबहार वन
1. इन वनों में बहुत से पक्षी, छिपकली, सांप, कछुए आदि पाए जाते हैं।1. इन वनों में बहुत से पक्षी, चमगादड़, बिच्छु एवं घोंघे आदि पाए जाते हैं।
2. ये वन भारत के पूर्वी भागों, उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालय के पास की पहाड़ियों, झारखंड, पश्चिम ओडिशा, छत्तीसगढ़ तथा पूर्वी घाट के पूर्वी ढलानों, मध्य प्रदेश तथा बिहार में पाए जाते हैं।2. ये वन पश्चिमी घाट के ढलानों, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार, असम के ऊपरी भागों, तटीय तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा एवं भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में पाए जाते हैं।
3. इन वनों में पाए जाने वाले पेड़ों में सागोन, बाँस, साल, शीशम, चंदन, खैर, नीम आदि प्रमुख हैं।3. इन वनों में प्रायः पाये जाने वाले वृक्षों में आबनूस, महोगनी, रोजवुड आदि हैं।
4. ये उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 70 से 200 सेमी के बीच होती है।4. ये उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेमी या इससे अधिक होती है।
5. इन वनों में पौधे अपने पत्ते शुष्क गर्मी के मौसम में 6 से 8 सप्ताह के लिए गिरा देते हैं।5. इन वनों में पौधे अपने पत्ते वर्ष के अलग-अलग महीनों में गिराते हैं जिससे ये पूरे वर्ष हरे-भरे नजर आते हैं।
6. इन वनों में प्रायः पाये जाने वाले पशुओं में शेर और बाघ हैं।6. इन वनों में प्रायः पाये जाने वाले पशुओं में हाथी, बंदर, लैमूर, एक सींग वाले गैंडे और हिरण हैं।
In simple words: वनस्पति जगत पेड़-पौधों से संबंधित है और प्राणी जगत जीवों से, दोनों में उनकी विशेषताओं, वितरण और संरक्षण की आवश्यकता में भिन्नता होती है, जबकि सदाबहार और पर्णपाती वन वर्षा और पत्तियां गिराने की आदतों के आधार पर अलग होते हैं।

🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय प्रत्येक बिंदु पर दोनों के बीच तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करना और तालिकाओं का उपयोग करना अधिक प्रभावी होता है।

 

Question 4. भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति के नाम बताएँ और अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति का ब्यौरा दीजिए।
Answer: भारत में पायी जाने वाली प्रमुख वनस्पतियाँ इस प्रकार हैं-
1. उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन,
2. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन,
3. उष्ण कटिबन्धीय कैंटीले वन तथा झाड़ियाँ,
4. पर्वतीय वन,
5. मैंग्रोव वन।
इन वनों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-
1. पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान की कमी तथा ऊँचाई के साथ-साथ प्राकृतिक वनस्पति में भी अंतर दिखाई देता है। वनस्पति में जिस प्रकार का अंतर हम उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों से टुंड्रा की ओर देखते हैं उसी प्रकार का अंतर पर्वतीय भागों में ऊँचाई के साथ-साथ देखने को मिलता है।
2. 1000 मी से 2000 मी तक की ऊँचाई वाले क्षेत्रों में आई शीतोष्ण कटिबंधीय वन पाए जाते हैं। इनमें चौड़ी पत्ती वाले ओक तथा चेस्टनट जैसे वृक्षों की प्रधानता होती है।
3. 1500 से 3000 मी की ऊँचाई के बीच शंकुधारी वृक्ष जैसे चीड़, देवदार, सिल्वर-फर, स्पूस, सीडर आदि पाए जाते हैं।
4. ये वन प्रायः हिमालय की दक्षिणी ढलानों, दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत के अधिक ऊँचाई वाले भागों में पाए जाते हैं।
5. अधिक ऊँचाई पर प्रायः शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान पाए जाते हैं। प्रायः 3600 मी से अधिक ऊँचाई पर शीतोष्ण कटिबंधीय वनों तथा घास के मैदानों का स्थान अल्पाइन वनस्पति ले लेती है। सिल्वर-फर, जूनिपर, पाइन व बर्च इन वनों के मुख्य वृक्ष हैं।
In simple words: भारत में उष्णकटिबंधीय सदाबहार से लेकर पर्वतीय और मैंग्रोव तक कई वनस्पति प्रकार हैं, जिनमें ऊँचाई के साथ तापमान और वनस्पति में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं, जैसे 1000 मी पर शीतोष्ण वन और 3600 मी से ऊपर अल्पाइन वनस्पति।

🎯 Exam Tip: विभिन्न वनस्पति प्रकारों और उनकी ऊँचाई के साथ-साथ विशेषताओं को याद रखें; खासकर प्रमुख वृक्ष प्रजातियों पर ध्यान दें।

 

Question 5. भारत में बहुत संख्या में जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं, उदाहरण सहित कारण दीजिए।
Answer: भारत में बड़ी संख्या में जीव एवं पादप प्रजातियाँ संकटापन्न हैं। लगभग 1300 पादप प्रजातियाँ भारत में संकट में हैं जबकि 20 पादप प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं।
बहुत बड़ी संख्या में पादप और जीव प्रजातियों के संकटग्रस्त होने के निम्नलिखित कारण हैं-
1. कृषि, उद्योग एवं आवास हेतु वनों की तेजी से कटाई।
2. विदेशी प्रजातियों का भारत में प्रवेश।
3. व्यापारियों द्वारा अपने व्यवसाय के विकास के लिए जंगली जानवरों का बड़े पैमाने पर अवैध शिकार।
4. रासायनिक और औद्योगिक अवशिष्ट पदार्थों तथा तेजाबी जमाव के कारण जीवों की मृत्यु।
वास्तव में मानव द्वारा पर्यावरण से छेड़छाड़ तथा पेड़-पौधों एवं जीवों के अत्यधिक दोहन से पारिस्थितिक सन्तुलन बिगड़ गया है। इसी कारण पेड़-पौधों तथा वन्य प्राणियों की कुछ प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
In simple words: भारत में कई जीव और पादप प्रजातियाँ मानव गतिविधियों जैसे वनों की कटाई, प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों के प्रवेश और अवैध शिकार के कारण संकटग्रस्त हैं, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है।

🎯 Exam Tip: संकटग्रस्त प्रजातियों के कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएं और संख्यात्मक डेटा (जैसे 1300 पादप प्रजातियाँ) को शामिल करें।

 

Question 6. भारत वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी क्यों है?
Answer: भारत में लगभग प्रकृति की सभी विशेषताएँ विद्यमान हैं जैसे-पर्वत, मैदान, मरुस्थल, पठार, सागरीय तट, सदानीरा नदियाँ, द्वीप एवं मीठे तथा खारे पानी की झीलें। ये सभी कारक भारत में वनस्पति जगत एवं प्राणी जगत की वृद्धि एवं विकास के लिए अजैविक विविधता के लिए अनुकूल हैं। विश्व की कुल जैवविविधता का 12 प्रतिशत भारत में पाया जाता है। भारत में लगभग 47,000 विभिन्न जातियों के पौधे पाए जाने के कारण यह देश विश्व में दसवें स्थान पर और एशिया के देशों में चौथे स्थान पर है। भारत में लगभग 15,000 फूलों के पौधे हैं जो कि विश्व में फूलों के पौधे का 6 प्रतिशत है। इस देश में बहुत से बिना फूलों के पौधे हैं जैसे फर्न, शैवाल (एलेगी) तथा कवक (फंजाई) भी पाए जाते हैं। भारत में लगभग 89,000 जातियों के जानवर तथा ताजे और समुद्री पानी की विभिन्न प्रकार की मछलियाँ पाई जाती हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की मृदा, आर्द्रता एवं तापमान में अत्यधिक भिन्नता के साथ अलग-अलग प्रकार का वातावरण पाया जाता है। पूरे देश में वर्षा का वितरण भी असमान है। वनस्पति जगत एवं प्राणी जगत की विभिन्न प्रजातियों को अलग-अलग प्रकार की वातावरण संबंधी परिस्थितियाँ एवं विभिन्न प्रकार की मृदा चाहिए होती है। इसलिए भारत वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी है।
In simple words: भारत की भौगोलिक विविधता, जैसे पर्वत, नदियाँ, समुद्र तट, और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियाँ, यहाँ की समृद्ध वनस्पति और प्राणी जगत का मुख्य कारण हैं, जिससे यह विश्व की 12% जैवविविधता का घर है।

🎯 Exam Tip: भारत की भौगोलिक विशेषताओं को जैवविविधता से जोड़कर समझाएं और संख्यात्मक आंकड़े (जैसे 12% जैवविविधता, 47,000 पौधों की जातियाँ) प्रस्तुत करें।

मानचित्र कौशल

 

Question 1. भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित दिखाएँ और अंकित करें-
1. उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन
2. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन
3. दो जीवमण्डल निचय भारत के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी भागों में।
Answer:
(1) & (2)
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह मानचित्र भारत में वनस्पति के प्रकारों को दर्शाता है। इसमें गहरे रंग वाले क्षेत्र उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों को इंगित करते हैं, जो मुख्यतः पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं। हल्के रंग वाले क्षेत्र उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वनों को दर्शाते हैं, जो भारत के अधिकांश मध्य और पूर्वी भागों में फैले हुए हैं। यह मानचित्र मुख्य भौगोलिक विशेषताओं और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को भी दिखाता है। (3) दिए गए मानचित्र में जीवमंडल निचय नहीं दिखाए गए हैं, इन्हें एक अलग मानचित्र पर चिह्नित किया जाना चाहिए।
In simple words: यह प्रश्न भारत के मानचित्र पर वर्षा वन, पर्णपाती वन और विभिन्न जीवमण्डल निचयों को चिह्नित करने के लिए है, जिससे छात्रों को भौगोलिक वितरण की समझ हो।

🎯 Exam Tip: मानचित्र कौशल के प्रश्नों में, आपको सटीक क्षेत्रों की पहचान करनी होगी और उन्हें मानचित्र पर सही ढंग से अंकित करना होगा। विवरण के लिए लेबल और रंग कोड का उपयोग करें।

परियोजना कार्य

 

Question 1. निम्नलिखित परियोजना कार्य पूरे करें:
1. अपने पड़ोस में पाए जाने वाले कुछ ओषधि पादप का पता लगाएँ।
2. किन्हीं दस व्यवसायों के नाम ज्ञात करो जिन्हें जंगल और जंगली जानवरों से कच्चा माल प्राप्त होता है।
3. वन्य प्राणियों का महत्त्व बताते हुए एक पट्यांश या गद्यांश लिखिए।
4. वृक्षों का महत्त्व बताते हुए एक नुक्कड़ नाटक की रचना करो और उसका अपने गली-मुहल्ले में मंचन करो।
5. अपने या अपने परिवार के किसी भी सदस्य के जन्मदिन पर किसी भी पौधे को लगाइए और देखिए कि वह कैसे बड़ा होता है और किस मौसम में जल्दी बढ़ता है?
Answer:
1. अर्जुन, तुलसी, मरबा, करी पत्ता, नीम, जामुन, कीकर आदि।
2. लकड़ी व्यवसाय, फर्नीचर, कागज, लाख, गोंद, भवन निर्माण, जूते, चमड़े का सामान, सींग, खास, ब्रुस आदि।
3. यह कार्य स्वयं करें।
4. विद्यार्थी स्वयं करें।
5. विद्यार्थी स्वयं करें।
In simple words: इस परियोजना कार्य में औषधीय पौधों की पहचान, जंगल-आधारित व्यवसायों की सूची, वन्यजीवों और वृक्षों के महत्व पर लेखन/नाट्य प्रस्तुति, और एक पौधे के विकास का अवलोकन जैसे विभिन्न व्यावहारिक और रचनात्मक कार्य शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: परियोजना कार्य में रचनात्मकता, अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोग का प्रदर्शन करें। जिन कार्यों को स्वयं करने के लिए कहा गया है, उनमें व्यक्तिगत अनुभव और अवलोकन को शामिल करें।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. भारत के उत्तरी पश्चिमी भाग में कैंटीले वन पाए जाने के दो कारण बताइए।
Answer: भारत के उत्तरी पश्चिमी भाग में कॅटीले वन पाए जाने के कारण इस प्रकार हैं-
1. यह प्रदेश मरुस्थलीय है और यहाँ की मिट्टी रेतीली है।
2. इस प्रदेश में वर्षा बहुत कम होती है।
In simple words: उत्तरी पश्चिमी भारत में कैंटीले वन कम बारिश और रेतीली मिट्टी वाले मरुस्थलीय क्षेत्र के कारण पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक विशेषताओं को वनस्पति के प्रकारों से जोड़कर याद रखें।

 

Question 2. कॅटीले वन में कौन-कौन से वृक्ष और जानवर पाए जाते हैं?
Answer: कॅटीले वनों में खजूर, अकासिया, नागफनी, यूफोरबिया, कीकर, खैर, बबूल आदि वृक्ष पाए जाते हैं। इन वनों में प्रायः चूहे, लोमड़ी, खरगोश, शेर, सिंह, भेड़िए, घोड़े, जंगली गधा तथा ऊँट पाए जाते हैं।
In simple words: कैंटीले वनों में खजूर, बबूल जैसे वृक्ष और चूहे, लोमड़ी, ऊँट जैसे जानवर मिलते हैं, जो शुष्क परिस्थितियों में जीवित रह सकते हैं।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट वनस्पति प्रकारों से संबंधित प्रमुख वृक्षों और जानवरों के नाम याद रखें।

 

Question 3. मैंग्रोव वनों में पाए जाने वाले वृक्ष और जानवरों का उल्लेख कीजिए।
Answer: मैंग्रोव वन में गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में सुंदरी वृक्ष पाए जाते हैं जिनसे मजबूत लकड़ी प्राप्त होती है। नारियल, ताड़, क्योड़ा, ऐंगार के वृक्ष भी इन भागों में पाए जाते हैं। इस क्षेत्र का रॉयल बंगाल टाइगर प्रसिद्ध जानवर है। इसके अतिरिक्त कछुए, मगरमच्छ, घड़ियाल एवं कई प्रकार के साँप भी इन जंगलों में मिलते हैं।
In simple words: मैंग्रोव वनों में सुंदरी, नारियल और ताड़ जैसे वृक्ष पाए जाते हैं, और यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर, कछुए और मगरमच्छ जैसे जानवर निवास करते हैं।

🎯 Exam Tip: मैंग्रोव वनों की अनूठी विशेषताओं और उनमें पाए जाने वाले विशिष्ट पौधों और जीवों पर ध्यान दें।

 

Question 4. उष्ण कटिबंधीय वन क्यों पूरे भारत वर्ष में पाए जाते हैं?
Answer: उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन पूरे भारत में इसलिए पाए जाते हैं क्योंकि उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन, मानसूनी वन के विशिष्ट वन हैं और भारत में भी मानसूनी जलवायु पायी जाती है।
In simple words: उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन पूरे भारत में इसलिए फैले हुए हैं क्योंकि वे मानसूनी जलवायु के अनुकूल होते हैं, जो भारत में व्यापक रूप से पाई जाती है।

🎯 Exam Tip: भारत की मानसूनी जलवायु और पर्णपाती वनों के बीच सीधा संबंध समझें।

 

Question 5. भारत में शेर व बाघ कहाँ पाए जाते हैं?
Answer: भारतीय शेरों को प्राकृतिक वास स्थल गुजरात में गिर जंगल है। बाघ मध्य प्रदेश तथा झारखंड के वनों, पश्चिम बंगाल के सुंदरबन तथा हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
In simple words: भारत में शेर गुजरात के गिर जंगल में मिलते हैं, जबकि बाघ मध्य प्रदेश, झारखंड, सुंदरबन और हिमालयी क्षेत्रों के वनों में पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास स्थलों को राज्य और वन क्षेत्र के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. ये सदैव हरे-भरे रहते हैं। ये किसी ऋतु विशेष में अपनी पत्तियाँ नहीं गिराते हैं।
2. ये वन 200 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भली-भाँति पनपते हैं।
In simple words: उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन पूरे वर्ष हरे-भरे रहते हैं और 200 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पनपते हैं।

🎯 Exam Tip: वर्षा वनों की प्रमुख विशेषताओं, जैसे सदाबहार प्रकृति और उच्च वर्षा की आवश्यकता, पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 7. स्पष्ट कीजिए कि भारत एक जैवविविधता वाला देश है?
Answer: भारत विश्व के मुख्य 12 जैवविविधता वाले देशों में से एक है। लगभग 47000 विभिन्न जातियों के पौधे पाए जाने के कारण यह देश विश्व में दसवें स्थान पर और एशिया के देशों में चौथे स्थान पर है। भारत में लगभग 15000 फूलों के पौधे हैं जोकि विश्व में फूलों के पौधों का 6 प्रतिशत है। भारत में लगभग 89000 जातियों के जानवर तथा विभिन्न प्रकार की मछलियाँ, ताजे तथा समुद्री पानी की पाई जाती हैं।
In simple words: भारत अपनी विशाल भौगोलिक और जलवायु विविधता के कारण पौधों और जानवरों की हजारों प्रजातियों का घर है, जिससे यह विश्व के शीर्ष जैवविविधता वाले देशों में से एक है।

🎯 Exam Tip: जैवविविधता के महत्व और भारत की स्थिति को दर्शाने वाले संख्यात्मक आंकड़ों और उदाहरणों को शामिल करें।

 

Question 8. भारत में पाए जाने वाले कँटीले वनों की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: भारत में पाए जाने वाले कॅटीले वनों की विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. इन वृक्षों के वृक्ष छितरे होते हैं।
2. इन वृक्षों की जड़े लम्बी होती हैं जो अरीय आकृति में फैली होती हैं।
In simple words: कैंटीले वनों के वृक्ष दूर-दूर फैले होते हैं और इनकी जड़ें लंबी व फैली हुई होती हैं, जिससे वे पानी की तलाश कर सकें।

🎯 Exam Tip: कैंटीले वनों की अनुकूलन विशेषताओं पर ध्यान दें जो उन्हें शुष्क वातावरण में जीवित रहने में मदद करती हैं।

 

Question 9. देशज और विदेशज पौधों में अंतर बताइए।
Answer: वह वनस्पति जो कि मूलरूप से भारतीय है उसे 'देशज' पौधे कहते हैं लेकिन जो पौधे भारत के बाहर से आए हैं उन्हें 'विदेशज' पौधे कहते हैं।
In simple words: देशज पौधे वे हैं जो भारत में स्वाभाविक रूप से उगते हैं, जबकि विदेशज पौधे वे हैं जो बाहर से लाए गए हैं।

🎯 Exam Tip: देशज और विदेशज पौधों की परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

 

Question 10. प्रवासी पक्षियों के बारे में बताइए।
Answer: भारत के कुछ दलदली भाग प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध हैं। शीत ऋतु में साइबेरियन सारस बहुत संख्या में आते हैं। इन पक्षियों का एक मनपसंद स्थान कच्छ का रन है। जिस स्थान पर मरुभूमि समुद्र से मिलती है वहाँ लाल सुंदर कलंगी वाली फ्लैमिगोए हजारों की संख्या में आती हैं और खारे कीचड़ के ढेर बनाकर उनमें घोंसले बनाती हैं और बच्चों को पालती हैं। देश में अनेकों दर्शनीय दृश्यों में से यह भी एक है।
In simple words: भारत में दलदली क्षेत्र प्रवासी पक्षियों का महत्वपूर्ण गंतव्य हैं, जैसे साइबेरियन सारस और फ्लैमिगो, जो प्रजनन के लिए आते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रवासी पक्षियों के आगमन के कारण और उनके पसंदीदा स्थानों का उल्लेख करें।

 

Question 11. ज्वारीय वनों की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: ज्वारीय वनों की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. सुंदरी नामक वृक्ष इस वन का प्रमुख वृक्ष है।
2. ज्वारीय वन खारे और ताजे पानी दोनों में पनप सकते हैं।
In simple words: ज्वारीय वन, जिन्हें मैंग्रोव भी कहते हैं, सुंदरी वृक्षों के लिए प्रसिद्ध हैं और ये खारे तथा ताजे पानी दोनों में पनप सकते हैं।

🎯 Exam Tip: ज्वारीय वनों की पर्यावरणीय अनुकूलन विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 12. भारत के दो संकटापन्न वन्यजीवों के नाम बताइए तथा जीव आरक्षित क्षेत्र स्थापित करने के दो उद्देश्य बताइए।
Answer: बाघ एवं गैंडा भारत के दो संकटापन्न जीव हैं।
जीव आरक्षित क्षेत्र स्थापित करने के दो उद्देश्य हैं-
1. पेड़-पौधों की प्रजातियों की रक्षा करना।
2. वन्य प्राणियों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाना।
In simple words: बाघ और गैंडा भारत के संकटापन्न वन्यजीव हैं, और जीव आरक्षित क्षेत्र पेड़-पौधों तथा वन्यजीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए स्थापित किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संकटापन्न जीवों के नाम और उनके संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों (जैसे जीव आरक्षित क्षेत्र) के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 13. पारिस्थितिकी तंत्र के असंतुलित होने को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: मनुष्यों द्वारा पादपों और जीवों के अत्यधिक उपयोग के कारण पारिस्थितिक तन्त्र असंतुलित हो गया है। उदाहरणस्वरूप लगभग 1300 पादप प्रजातियाँ संकट में हैं तथा 20 प्रजातियाँ विनष्ट हो चुकी हैं। काफी वन्य जीवन प्रजातियाँ भी संकट में हैं और कुछ विनष्ट हो चुकी हैं।
In simple words: मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप कई पादप और जीव प्रजातियाँ संकटग्रस्त या विलुप्त हो चुकी हैं।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक असंतुलन के मानवजनित कारणों और उसके परिणामों को उदाहरणों के साथ समझाएं।

 

Question 14. पारिस्थितिकी तंत्र के असन्तुलन का प्रमुख कारण बताइए।
Answer: पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन का मुख्य कारण लालची व्यापारियों का अपने व्यवसाय के लिए अत्यधिक शिकार करना है। रासायनिक और औद्योगिक अवशिष्ट तथा तेजाबी जमाव के कारण प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों का प्रवेश, कृषि तथा निवास के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन के कारण हैं।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन के मुख्य कारण अवैध शिकार, प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों का प्रवेश और वनों की अंधाधुंध कटाई हैं।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करने वाले विभिन्न मानवीय गतिविधियों को सूचीबद्ध करें और उनके प्रभावों को संक्षेप में समझाएं।

 

Question 15. मकाक किस वन्यप्राणी की प्रजाति है? इसकी विशेषता भी बताइए।
Answer: मकाक बंदर की एक प्रजाति है। इसके मुँह पर चारों ओर बाल उगे होते हैं जो एक आभामण्डल जैसा दिखायी देता है।
In simple words: मकाक एक बंदर की प्रजाति है जिसकी पहचान उसके चेहरे के चारों ओर उगे बालों से होती है, जो उसे एक विशेष आभा देते हैं।

🎯 Exam Tip: वन्यजीवों की प्रजातियों के नाम और उनकी विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं पर ध्यान दें।

 

Question 16. पारिस्थितिकी तंत्र को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पृथ्वी पर एक जीव दूसरे जीव से अंतर्संबंधित है, एक के बिना दूसरे की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसे पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।
In simple words: पारिस्थितिकी तंत्र वह प्रणाली है जिसमें सभी जीव एक-दूसरे और अपने पर्यावरण पर निर्भर रहते हैं।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा में 'पारस्परिक निर्भरता' के पहलू को उजागर करें।

 

Question 17. प्राकृतिक वनस्पति से क्या तात्पर्य है?
Answer: प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है वनस्पति का वह भाग जो कि मनुष्य की सहायता के बिना अपने आप पैदा होता है और लंबे समय तक उस पर मानवी प्रभाव नहीं पड़ता।
In simple words: प्राकृतिक वनस्पति उन पौधों को कहते हैं जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वाभाविक रूप से उगते और विकसित होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक वनस्पति की परिभाषा में 'मानवीय हस्तक्षेप के अभाव' पर जोर दें।

 

Question 18. जीवमण्डल निचय से क्या तात्पर्य है?
Answer: एक संरक्षित जीवमण्डल जिसका संरक्षण इस प्रकार किया जाता है कि न केवल उसकी जैविक भिन्नता संरक्षित की जाती है अपितु इसके संसाधनों का प्रयोग भी स्थानीय समुदायों के लाभ हेतु टिकाऊ तरीके से किया जाता है।
In simple words: जीवमण्डल निचय वे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहाँ जैवविविधता की रक्षा की जाती है और स्थानीय समुदाय टिकाऊ तरीके से संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: जीवमण्डल निचय की दोहरी भूमिका (संरक्षण और टिकाऊ उपयोग) को स्पष्ट करें।

 

Question 19. राष्ट्रीय उद्यान किसे कहते हैं?
Answer: राष्ट्रीय उद्यान से आशय उन सुरक्षित स्थलों से है जहाँ पर जानवरों को उनकी नस्ले सुरक्षित रखने के लिए रखा जाता है। कार्बेट नेशनल पार्क और काजीरंगा नेशनल पार्क इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
In simple words: राष्ट्रीय उद्यान ऐसे संरक्षित क्षेत्र हैं जहाँ वन्यजीवों की नस्लों को सुरक्षित रखा जाता है, जैसे कार्बेट और काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय उद्यान की परिभाषा में 'संरक्षण' और 'नस्लों की सुरक्षा' पर ध्यान दें और उदाहरण दें।

 

Question 20. वन्य प्राणियों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
Answer:
1. भारत में विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु पाए जाते हैं। उनकी देखभाल न होने से जीवों की कई जातियाँ या तो लुप्त हो गयीं या विलुप्ति के कगार पर हैं। इन जीवों के महत्त्व को देखते हुए अब इनका संरक्षण आवश्यक हो गया है।
2. पारिस्थितिकी संतुलन में भी वन्य प्राणियों का अत्यधिक महत्त्व है। अतः इनका संरक्षण आवश्यक है।
In simple words: वन्य प्राणियों का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि उनकी अनेक प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं, और वे पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

🎯 Exam Tip: वन्यजीव संरक्षण की आवश्यकता के दो प्रमुख कारणों - प्रजातियों की रक्षा और पारिस्थितिक संतुलन - पर जोर दें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वनों के क्षेत्र को बढ़ाना क्यों आवश्यक है?
Answer: भारत में वनों को बढ़ाना निम्न कारणों से आवश्यक है-
1. वन वन्य प्राणियों को संरक्षण प्रदान करते हैं।
2. वन अकाल की स्थिति से देश को बचाते हैं।
3. वनों से मरुस्थल का विस्तार होने पर प्रतिबंध लगता है तथा मृदा अपरदन रुकता है।
4. वन वायुमंडल से नमी आकर्षित कर वर्षा कराने में सहायक हैं।
5. भारत में वनों का कुल क्षेत्र (22.5%) है जो वांछनीय सीमा (33.3%) से बहुत कम है।
6. पारितंत्र को बनाए रखने के लिए तथा कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा वायुमंडल में वांछनीय मात्रा तक रखने के लिए वनों का विस्तार अधिक क्षेत्र पर चाहिए।
In simple words: वनों का क्षेत्र बढ़ाना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे वन्यजीवों का संरक्षण करते हैं, मरुस्थलीकरण और मृदा अपरदन को रोकते हैं, वर्षा लाने में मदद करते हैं, और पारिस्थितिकी संतुलन तथा वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।

🎯 Exam Tip: वनों के पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक लाभों को सूचीबद्ध करें और भारत में वन आवरण की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करें।

 

Question 2. उन प्रमुख वनस्पति प्रदेशों के नाम लिखिए जिनसे आबनूस और सुंदरी वृक्ष संबंधित हैं। उन दो राज्यों के नाम लिखिए जहाँ हाथी पाए जाते हैं। प्राचीन जलोढ़क (बांगर) की दो विशेषताएँ दीजिए।
Answer: दो वनस्पतियों के नाम-
1. आबनूस-उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन।
2. सुंदरी – ज्वारीय वन।
दो राज्यों के नाम जहाँ हाथी पाये जाते हैं- (उत्तर उपलब्ध नहीं है)
प्राचीन जलोढ़क (बांगर) की दो विशेषताएँ-
1. प्राचीन जलोढ़क उस क्षेत्र में मिलती है जहाँ अब बाढ़ का पानी नहीं पहुँचता।
2. यह कम उपजाऊ होती है।
In simple words: आबनूस उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों से और सुंदरी ज्वारीय वनों से संबंधित हैं। प्राचीन जलोढ़क, या बांगर, पुराने बाढ़ रहित क्षेत्रों में पाई जाती है और कम उपजाऊ होती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न वृक्षों को उनके वनस्पति प्रकार से जोड़ें और विभिन्न प्रकार की मिट्टियों (जैसे बांगर) की विशेषताओं को स्पष्ट करें। यदि उत्तर में कुछ जानकारी अनुपलब्ध हो, तो अन्य भागों पर अधिक ध्यान दें।

 

Question 3. उन प्रमुख वनस्पति प्रदेशों के नाम लिखिए जिनसे साल तथा रोजवुड वृक्ष संबंधित हैं। एक सींग वाले गैंडे कहाँ पाए जाते हैं? दो क्षेत्रों के नाम बताइए। नवीन जलोढ़क (खादर) की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer:
• वृक्ष : वनस्पति के प्रकार
• साल : उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन
• रोजवुड : उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन।
एक सींग वाले गैंडे निम्नलिखित क्षेत्रों में पाए जाते हैं-
1. काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क,
2. मानस राष्ट्रीय पार्क।
नवीन जलोढ़क की विशेषताएँ-
1. नवीन जलोढ़क प्रतिवर्ष बाढ़ के समय प्राप्त होती है।
2. यह बांगर की अपेक्षा अधिक उपजाऊ होती है।
3. इसमें सिंचाई के बिना भी साक् सब्जियों की खेती की जाती है।
In simple words: साल वृक्ष उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वनों से और रोजवुड उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों से जुड़े हैं। एक सींग वाले गैंडे काजीरंगा और मानस राष्ट्रीय पार्कों में पाए जाते हैं। नवीन जलोढ़क (खादर) प्रतिवर्ष बाढ़ से बनने वाली नई और अधिक उपजाऊ मिट्टी है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न वृक्षों और उनके वनस्पति प्रकारों को सही ढंग से मिलाएं, एक सींग वाले गैंडे के निवास स्थान याद रखें, और नवीन जलोढ़क (खादर) की विशेषताओं को प्राचीन जलोढ़क से तुलना करके समझें।

 

Question 4. पारितंत्र के संरक्षण के तीन उपाय लिखिए।
Answer: पारितंत्र के संरक्षण के तीन उपाय इस प्रकार हैं-
1. हर प्रकार के प्रदूषण जैसे-वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण को रोका जाए। उपर्युक्त उपायों में सरकार के साथ मानवीय प्रयासों का विशेष महत्त्व है। उनको अपने पारितंत्र के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी है।
2. जंगली जीवों तथा वन-संपदा के शिकार तथा काटने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
3. मृदा अपरदन पर रोक लगाई जाए।
In simple words: पारितंत्र के संरक्षण के लिए प्रदूषण पर नियंत्रण, वन्यजीवों और वनों के अवैध शिकार/कटाई पर प्रतिबंध, और मृदा अपरदन को रोकना आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: संरक्षण के उपायों को स्पष्ट और व्यावहारिक बिंदुओं में प्रस्तुत करें, जिसमें सरकारी और व्यक्तिगत प्रयासों का उल्लेख हो।

 

Question 5. ज्वारीय वनों की तीन विशेषताएँ बताइए।
Answer:
1. ज्वारीय क्षेत्र में मिलने के कारण इन वनों को ज्वारीय वन कहा जाता है। ज्वारीय वन सुंदरी नामक वृक्षों के लिए प्रसिद्ध हैं। अतः इन वनों को सुंदरी वन भी कहा जाता है। सुंदरी, ताड़, गरान (मैंग्रोव) आदि इन वनों के मुख्य वृक्ष हैं। ऐसे वन गंगा, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, कृष्णा, गोदावरी और महानदी के डेल्टा प्रदेशों में मिलते हैं। व्यापारिक दृष्टि से इन वनों का विशेष महत्त्व है।
2. ये वन तट के सहारे नदियों के ज्वारीय क्षेत्र में पाए जाते हैं।
3. ज्वारीय क्षेत्र में मीठे व ताजे जल का मिलन होता है। अतः इन वनों के वृक्षों में, ऐसे जल में पनपने की क्षमता होती है।
In simple words: ज्वारीय वन, जिन्हें सुंदरी वन भी कहते हैं, डेल्टा प्रदेशों में पाए जाते हैं, ये नदियों के तटों पर खारे और ताजे पानी के मिश्रण वाले क्षेत्रों में उगते हैं और व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

🎯 Exam Tip: ज्वारीय वनों की पारिस्थितिक विशेषताओं (जैसे जल सहनशीलता) और उनके भौगोलिक वितरण पर ध्यान दें।

 

Question 6. गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टा में ज्वारीय वन क्यों पाए जाते हैं? इन वनों की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Answer: गंगा और ब्रह्मपुत्र के डेल्टा प्रदेश में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनों की भाँति ज्वारीय वन पाए जाते हैं।
ज्वारीय वनों की विशेषताएँ-
1. ज्वारीय क्षेत्र में ताजे पानी एवं खारे पानी की सुलभता निरंतर बनी रहती है।
2. डेल्टाई क्षेत्र में मृदा की उर्वरता वनों को और अधिक सघन बनाने और समृद्ध करने में सहायक होती है। इन वृक्षों की नीचे की डालियाँ भूमि में पहुँचकर जड़ों का रूप धारण कर लेती हैं। इससे सघनता और बाढ़ जाती है।
In simple words: गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में ज्वारीय वन इसलिए पाए जाते हैं क्योंकि यहाँ ताजे और खारे पानी का मिश्रण और उपजाऊ मिट्टी होती है, जिससे ये घने और बाढ़ से सुरक्षित रहते हैं।

🎯 Exam Tip: डेल्टा क्षेत्रों में ज्वारीय वनों के विकास के लिए अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझाएं।

 

Question 7. सदाबहार वन पश्चिमी घाटों के पश्चिमी ढालों पर क्यों पाए जाते हैं? दो कारण बताइए।
Answer: भारत में सदाबहार वन पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर पाए जाते हैं।
क्योंकि-
1. यहाँ 200 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा होती है।
2. यहाँ वर्षभर उच्च तापमान पाया जाता है। वर्षा की अधिकता एवं उच्च तापमान के कारण पश्चिमी घाट में पश्चिमी ढालों पर सदाबहार वन पाए जाते हैं।
In simple words: पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढालों पर सदाबहार वन इसलिए पाए जाते हैं क्योंकि यहाँ 200 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा और पूरे वर्ष उच्च तापमान रहता है, जो इन वनों के विकास के लिए आदर्श परिस्थितियाँ हैं।

🎯 Exam Tip: सदाबहार वनों के वितरण के लिए आवश्यक जलवायु परिस्थितियों (वर्षा और तापमान) को स्पष्ट रूप से इंगित करें।

 

Question 8. भारत के उत्तर पश्चिमी भाग में कैंटीले वन क्यों पाए जाते हैं? दो कारण बताइए।
Answer: भारत में कॅटीले वन उत्तर-पश्चिमी भागों में ही सीमित हैं।
यहाँ इनके पाए जाने के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-
1. जहाँ 75 सेमी से कम वर्षा होती है, साथ ही वार्षिक और दैनिक तापांतर अधिक पाया जाता है।
2. ये वन कॅटीले इसलिए हैं, जिससे ये पशुओं से तथा मनुष्यों से अपनी रक्षा कर सकें। इन वनों के वृक्षों की किस्में सीमित होती हैं। कीकर, बबूल, खैर और खजूर इन वनों के उपयोगी वृक्ष हैं। इनकी जड़े लंबी और अरीय आकृति में फैली होती हैं।
In simple words: उत्तरी-पश्चिमी भारत में कैंटीले वन कम वर्षा, उच्च तापमान और स्वयं को बचाने के लिए कांटेदार प्रकृति के कारण पाए जाते हैं, जिनकी जड़ें पानी की तलाश में लंबी और फैली हुई होती हैं।

🎯 Exam Tip: कैंटीले वनों के विकास के लिए पर्यावरणीय (कम वर्षा, उच्च तापांतर) और रक्षात्मक (कांटेदार प्रकृति) कारणों पर ध्यान दें।

 

Question 9. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन शुष्क ऋतु में अपनी पत्तियाँ क्यों गिरा देते हैं?
Answer: उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन सामान्यतः 75 सेमी से 200 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। वर्षा भी 4 महीनों तक ही सीमित रहती है। शुष्क ऋतु के प्रारंभ होते ही पर्णपाती वनों में वृक्ष अपनी पत्तियाँ गिराना प्रारंभ कर देते हैं, जिससे लंबी और शुष्क ऋतु को सहन करने की क्षमता उनमें रहे और वे अपने को जीवित रख सकें। ये शुष्क, ऋतु में 6 से लेकर 8 सप्ताह तक अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। प्रत्येक जाति के वृक्षों के पतझड़ का समय अलग-अलग होता है।
In simple words: उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन शुष्क ऋतु में पानी बचाने और जीवित रहने के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में वर्षा सीमित होती है।

🎯 Exam Tip: पर्णपाती वनों के पत्तियों को गिराने के पीछे के जैविक कारण और जल संरक्षण की उनकी रणनीति को स्पष्ट करें।

 

Question 10. वन्य प्राणियों की लुप्त होने वाली जातियों के संरक्षण के लिए क्या-क्या उपाय किए जा रहे हैं? दो उदाहरण दीजिए।
Answer: भारत में वन्य प्राणियों की लुप्त होने वाली जातियों के संरक्षण हेतु अपनाए गए उपाय इस प्रकार हैं-
1. विभिन्न वन्य प्राणियों की संख्या की गणना समय-समय पर की जाती है जिससे उनके घटने या बढ़ने की जानकारी प्राप्त की जा सके तथा उपचारिक कदम उठाए जा सकें।
2. लुप्त होने वाली जातियों का पता लगाकर उनके संरक्षण के लिए विशेष आंदोलन चलाए गए हैं जैसे प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट रिनौ, प्रोजेक्ट बस्टारड आदि।
3. जीव आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की जा रही है, जिससे वन्य प्राणियों को सुरक्षित अगली पीढ़ी को सौंपा जा सके।
In simple words: लुप्तप्राय वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उनकी गणना, विशेष परियोजनाओं (जैसे प्रोजेक्ट टाइगर), और जीव आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना जैसे उपाय किए जा रहे हैं।

🎯 Exam Tip: वन्यजीव संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे प्रमुख उपायों को सूचीबद्ध करें और उनके उदाहरण दें।

 

Question 11. पश्चिमी राजस्थान में मिट्टी और प्राकृतिक वनस्पति के संरक्षण के दो उपाय सुझाइए।
Answer: पश्चिमी राजस्थान वर्षा के अभाव में पूर्णतः मरुस्थल है। मरुस्थलों में पवन मृदा को स्थानांतरित करती रहती है।
1. मिट्टी को पवन के प्रहार से बचाने का एकमात्र उपाय है कि इन क्षेत्रों में पानी पहुँचाया जाए। पानी के पहुँचने से वनस्पति एवं कृषि फसलों का साम्राज्य बन जाएगा और पवन का प्रहार प्रभावहीन हो जाएगा।
2. प्राकृतिक वनस्पति का यहाँ लगभग अभाव उसे बनाए रखने के लिए पशुओं से उसे बचाकर रखने की आवश्यकता है।
In simple words: पश्चिमी राजस्थान में मिट्टी और वनस्पति के संरक्षण के लिए जल उपलब्धता बढ़ाना और मौजूदा प्राकृतिक वनस्पति को पशुओं से बचाना महत्वपूर्ण है, ताकि मृदा अपरदन को रोका जा सके।

🎯 Exam Tip: मरुस्थलीय क्षेत्रों में मिट्टी और वनस्पति संरक्षण के लिए विशिष्ट और व्यावहारिक उपायों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 12. वनों का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
Answer: नवीनीकरण, संसाधन वन वातावरण की प्राकृतिक गुणवत्ता को बनाए रखने और उसमें वृद्धि करने में वन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निम्नलिखित कारणों से वन महत्त्वपूर्ण हैं-
1. ये पवन तथा तापमान को नियंत्रित करते हैं और वर्षा लाने में भी सहायता करते हैं।
2. इनसे मृदा को जीवाश्म मिलता है और वन्य प्राणियों को आश्रय।
3. ये विभिन्न उपभोक्ता सामग्री जैसे जलावन, ओषधि तथा जड़ी बूटियाँ उपलब्ध कराते हैं।
4. ये कई समुदायों को जीविका प्रदान करते हैं।
5. ये हमारे वातावरण की वायु प्रदूषण से रक्षा करने में सहायता करते हैं।
6. वन स्थानीय वातावरण को बदल देते हैं।
7. ये मृदा अपरदन को नियंत्रित करते हैं।
8. ये नदियों के प्रवाह को रोकते हैं।
9. ये बहुत सारे उद्योगों के आधार हैं।
10. ये मनुष्य को जड़ी-बूटी व ओषधियाँ उपलब्ध कराते हैं तथा उन्हें स्वयं को कई बीमारियों से सुरक्षित रखने में सहायता करते हैं।
In simple words: वन पर्यावरणीय संतुलन, जल चक्र, मृदा संरक्षण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और जैवविविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं, साथ ही हमें लकड़ी, औषधि और रोजगार जैसे कई संसाधन भी प्रदान करते हैं।

🎯 Exam Tip: वनों के बहुआयामी महत्व (पर्यावरण, आर्थिक, सामाजिक) को विस्तार से समझाएं, जिसमें प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया हो।

 

Question 13. वनस्पति एवं प्राणी जगत की सुरक्षा क्यों आवश्यक है?
Answer: निम्नलिखित कारणों से वनस्पति एवं प्राणी जगत की सुरक्षा करना आवश्यक है-
1. पौधे हमें भोजन, आश्रय तथा अन्य कई लाभदायक चीजें प्रदान करते हैं। औषधीय पादप जैसे सर्पगंधा व जामुन मानव जाति के लिए अत्यधिक महत्त्व के हैं।
2. प्रत्येक प्रजाति पारिस्थितिक तंत्र में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अतः उनका संरक्षण अति आवश्यक है।
3. पालतू पशु हमें दूध उपलब्ध कराते हैं। वे हमें मांस, अंडे, मछली आदि भी उपलब्ध कराते हैं तथा परिवहन में सहायता करते हैं।
4. कीट पतंगे हमारी फसलों तथा फलदार पौधों के परागण में सहायता करते हैं तथा हानिकारक कीटों पर जैविक नियंत्रण करने में सहायक हैं।
In simple words: वनस्पति और प्राणी जगत का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि वे हमें भोजन, औषधि और आश्रय प्रदान करते हैं, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं, और कृषि तथा अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

🎯 Exam Tip: वनस्पति और प्राणी जगत के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों को सूचीबद्ध करें, विशेष रूप से पारिस्थितिक तंत्र में उनकी भूमिका पर जोर दें।

 

Question 14. पारिस्थितिकी तंत्र का अर्थ स्पष्ट कीजिए। पारिस्थितिकी तंत्र के अंगों तथा उनकी परस्पर निर्भरता के बारे में संक्षेप में लिखिए।
Answer: किसी क्षेत्र विशेष के समस्त पेड़-पौधे एवं जीव-जन्तु उनके भौतिक वातावरण में परस्पर निर्भर तथा एक-दूसरे से संबंधित होते हैं। इस प्रकार एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं। इस प्रकार पारिस्थितिकी तंत्र पारस्परिक निर्भरता से निर्मित भौतिक वातावरण एवं उसमें रहने वाले जीवों का तंत्र है। पौधे, प्राणी, मनुष्य तथा वातावरण पारिस्थितिक तंत्र के विभिन्न अंग हैं।
पौधे पृथ्वी का प्रमुख प्राकृतिक अंग हैं जो सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन बना सकते हैं। पौधे किसी भी देश के प्राकृतिक संसाधनों की रीढ़ हैं। किसी क्षेत्र के पादपों की प्रकृति काफी हद तक उस क्षेत्र के प्राणी जीवन को प्रभावित करती है। जब वनस्पति बदल जाती है तो प्राणी जीवन भी बदल जाता है। मानव भी पारिस्थितिक तंत्र का एक अभिन्न अंग है। वे वनस्पति तथा वन्य जीवन का उपभोग करते हैं। किसी भी क्षेत्र के पादप तथा प्राणी आपस में तथा अपने भौतिक पर्यावरण से अंतर्संबंधित होते हैं।
In simple words: पारिस्थितिकी तंत्र में सभी जीव और उनका भौतिक वातावरण एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं, जिसमें पौधे, प्राणी और मनुष्य जैसे विभिन्न अंग मिलकर काम करते हैं ताकि जीवन संभव हो सके।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा में 'पारस्परिक निर्भरता' को केंद्र बिंदु बनाएं और उसके विभिन्न घटकों (पौधे, प्राणी, मनुष्य) के योगदान को स्पष्ट करें।

दीर्घ उतरीय प्रश्न

Question 1. भारत में प्रयुक्त होने वाले कुछ औषधीय पादपों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए। ये औषधीय पादप किन रोगों का उपचार करते हैं?
Answer: भारत में प्रयोग में लाए जाने वाले औषधीय पादपों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-
1. कचनार : फोड़ा (अल्सर) व दमा रोगों के लिए प्रयोग होता है। इस पौधे की जड़ और कली पाचन शक्ति में सहायता करती है।
2. अर्जुन : ताजे पत्तों को निकाला हुआ रस कान के दर्द के इलाज में सहायता करता है। यह रक्तचाप की नियमितता के लिए भी लाभदायक है।
3. बबूल : इसके पत्ते आँख की फुसी के लिए लाभदायक हैं। इससे प्राप्त गोंद का प्रयोग शारीरिक शक्ति की वृद्धि के लिए होता है।
4. नीम : जैव और जीवाणु प्रतिरोधक है।
5. तुलसी पादप : जुकाम और खाँसी की दवा में इसका प्रयोग होता है।
6. सर्पगंधा : यह रक्तचाप के निदान के लिए प्रयोग होता है।
7. जामुन : पके हुए फल से सिरका बनाया जाता है जो कि वायुसारी और मूत्रवर्धक है और इसमें पाचन शक्ति के भी गुण हैं। बीज का बनाया हुआ पाउडर मधुमेह रोग में सहायता करता है।
In simple words: भारत में विभिन्न औषधीय पौधे पाए जाते हैं जैसे कचनार (फोड़ा, दमा), अर्जुन (कान दर्द, रक्तचाप), बबूल (आँखों की फुंसी, शक्ति), नीम (जीवाणु प्रतिरोधक), तुलसी (जुकाम, खाँसी), सर्पगंधा (रक्तचाप) और जामुन (पाचन, मधुमेह), जो विभिन्न बीमारियों के उपचार में सहायक हैं।

🎯 Exam Tip: औषधीय पौधों के नाम और उनके उपयोग याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रश्न अक्सर विभिन्न परीक्षाओं में पूछा जाता है।

 

Question 2. भारत में वन्य जीवन पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
Answer: भारत प्राणी संपत्ति में एक सम्पन्न देश है। भारत में उच्चावच, वर्षण तथा तापमान आदि में भिन्नता के कारण जैव एवं वानस्पतिक विविधता पायी जाती है। भारत में जीवों की 89000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ 1200 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह कुल विश्व का 13 प्रतिशत है। यहाँ मछलियों की 2500 प्रजातियाँ हैं जो विश्व का लगभग 12 प्रतिशत है। भारत में विश्व के 5 से 8 प्रतिशत तक उभयचरी, सरीसृप तथा स्तनधारी जानवर भी पाए जाते हैं। स्तनधारी जानवरों में हाथी सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। ये असोम, कर्नाटक और केरल के उष्ण तथा आर्द्र वनों में पाए जाते हैं। एक सींग वाले गैंडे अन्य जानवर है जो पश्चिमी बंगाल तथा असोम के दलदली क्षेत्रों में रहते हैं। कच्छ के रन तथा थार मरुस्थल में क्रमशः जंगली गधे तथा ऊँट रहते हैं। भारतीय भैंसा, नील गाय, चौसिंघा, गैजल तथा विभिन्न प्रजातियों वाले हिरण आदि कुछ अन्य जानवर हैं जो भारत में पाए जाते हैं। यहाँ बन्दरों, बाघों एवं शेरों की भी अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। भारतीय बाघों का प्राकृतिक वास स्थल गुजरात में गिर जंगल है। बाघ मध्य प्रदेश तथा झारखंड के वनों, पश्चिमी बंगाल के सुंदरवन तथा हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। लद्दाख की बर्फीली ऊँचाइयों में याक पाए जाते हैं जो गुच्छेदार सींगों वाला बैल जैसा जीव है, जिसका भार लगभग एक टन होता है। तिब्बतीय बारहसिंघा, भारल (नीली भेड़), जंगली भेड़ तथा कियांग (तिब्बती जंगली गधे) भी यहाँ पाए जाते हैं। कहीं-कहीं लाल पांडा भी कुछ भागों में मिलते हैं। नदियों, झीलों तथा समुद्री क्षेत्रों में कछुए, मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाते हैं। घड़ियाल, मगरमच्छ की प्रजाति का एक ऐसा प्रतिनिधि है जो विश्व में केवल भारत में पाया जाता है। नदियों, झीलों तथा समुद्री क्षेत्रों में कछुए, मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाते हैं। मोर, बत्तख, तोता, सारस, पैराकीट आदि, अन्य जीव हैं जो भारत के वनों तथा आई क्षेत्रों में रहते हैं।
In simple words: भारत एक समृद्ध वन्यजीव देश है जहाँ 89,000 से अधिक जीवों की प्रजातियाँ हैं, जिनमें 1200 से अधिक पक्षी, 2500 मछलियाँ और विभिन्न स्तनधारी जैसे हाथी, गैंडे, जंगली गधे, बाघ और हिमालयी क्षेत्रों में याक शामिल हैं। यहाँ की भौगोलिक विविधता विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है।

🎯 Exam Tip: भारत की वन्यजीव विविधता और प्रमुख पशुओं के निवास स्थान को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रश्न अक्सर वन्यजीव संरक्षण और भूगोल से संबंधित परीक्षाओं में पूछा जाता है।

 

Question 3. अल्पाइन एवं मैंग्रोव वनों का विवरण प्रस्तुत कीजिए ।
Answer: अल्पाइन वन – ये वन हिमालय प्रदेश में 3600 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर पाए जाते हैं। अल्पाइन वनों में कम लम्बाई वाले वृक्ष एवं झाड़ियाँ उगती हैं। बर्च इन वनों का मुख्य वृक्ष है। उसके अलावा कहीं-कहीं पर सिल्वर-फर, जूनिपर, देवदार, पाइन आदि के वृक्ष पाए जाते हैं। हिमरेखा के समीप टुण्ड्रा तुल्य वनस्पति पाई जाती है। यहाँ झाड़ियाँ तथा काई उत्पन्न होती है। मैंग्रोव वन – ये वन तटीय प्रदेशों में नदियों के डेल्टाओं में पाए जाते हैं, इसलिए इनको डेल्टा वन भी कहते हैं। इन वनों में सुंदरी वृक्ष की प्रधानता है। अतः उन्हें सुंदरी वन भी कहते हैं। सबसे अधिक मैंग्रोव सुंदरवन डेल्टा में पाए जाते हैं।
In simple words: अल्पाइन वन हिमालय के ऊँचे इलाकों (3600 मीटर से अधिक) में पाए जाते हैं जहाँ छोटे वृक्ष, झाड़ियाँ, बर्च और टुंड्रा वनस्पति उगती है, जबकि मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्रों और नदी डेल्टाओं में मिलते हैं, विशेषकर सुंदरवन डेल्टा में जहाँ सुंदरी वृक्ष प्रमुख होते हैं।

🎯 Exam Tip: अल्पाइन और मैंग्रोव वनों के मुख्य स्थानों और उनकी प्रमुख वृक्ष प्रजातियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अक्सर भौगोलिक वनस्पति वर्गीकरण से संबंधित प्रश्नों में आता है।

 

Question 4. ऊँचाई के अनुसार पर्वतीय वनों का वर्णन कीजिए ।
Answer: हिमालय पर्वत पर पाए जाने वाले वनों को पर्वतीय वन कहते हैं। इस क्षेत्र की वनस्पति में ऊँचाई के अनुसार अंतर पाया जाता है। इस क्षेत्र को ऊँचाई के अनुसार निम्न वानस्पतिक क्रमों में बाँटा गया है-
1. शंकुधारी वन – 1,500 से 3,000 मीटर की ऊँचाई तक शंकुधारी (कोणधारी) वन पाए जाते हैं। इनकी पत्तियाँ नुकीली होती हैं। इन वनों के मुख्य वृक्ष देवदार, सीडर, स्थूस तथा सिल्वर-फर हैं। इन शंकुल वृक्षों के साथ अल्पाइन चरागाह 2,250 से 2,750 मीटर तक की ऊँचाई के मध्य पाए जाते हैं। इन चरागाहों का उपयोग ऋतु-प्रवास चराई के लिए किया जाता है। प्रमुख पशुचारक जातियाँ गुंजर तथा बकरवाल हैं।
2. उपोष्ण कटिबंधीय पर्वतीय वनस्पति – यह वनस्पति 1,000-2,000 मीटर की ऊँचाई तक उत्तरी-पूर्वी हिमालय एवं पूर्वी हिमालय पर पाई जाती है। इस भाग में वर्षा अधिक होती है। अतः इन वनों में सदाहरित वृक्ष पाए जाते हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के ओक, चेस्टनट और चीड़ के वृक्ष पाए जाते हैं। ये सदापर्णी वन हैं।
3. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन – ये वन उत्तरी-पश्चिमी हिमालय पर 1,000 मी की ऊँचाई तक पाए जाते हैं। यहाँ वर्षा की मात्रा कम होती है। इस कारण यह वृक्ष शुष्क मौसम में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। इनका मुख्य वृक्ष साखू है।
In simple words: पर्वतीय वनों को ऊँचाई के अनुसार तीन मुख्य प्रकारों में बांटा गया है: 1500-3000 मीटर पर शंकुधारी वन (देवदार, सिल्वर-फर) जो नुकीली पत्तियों वाले होते हैं; 1000-2000 मीटर पर उपोष्ण कटिबंधीय पर्वतीय वन (ओक, चेस्टनट) जो सदाहरित होते हैं; और 1000 मीटर तक उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन (साखू) जो कम वर्षा वाले क्षेत्रों में शुष्क मौसम में पत्तियाँ गिराते हैं।

🎯 Exam Tip: पर्वतीय वनों के ऊँचाई के अनुसार वर्गीकरण, उनके मुख्य वृक्षों और विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भौगोलिक वितरण और पारिस्थितिकी से संबंधित प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 5. वनस्पति जगत एवं प्राणी जगत में भिन्नता के लिए उत्तरदायी कारकों का संक्षिप्त विवेचन कीजिए ।
Answer: तापमान, आर्द्रता, भूमि-मृदा एवं वर्षण भारत में वानस्पतिक एवं वन्य-प्राणियों में विविधता हेतु उत्तरदायी प्रमुख कारक हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है-
(i) तापमान – हवा में नमी के साथ तापमान, वर्षण तथा मृदा वनस्पति के प्रकार को निर्धारित करते हैं। हिमालय की ढलानों तथा प्रायद्वीपीय पहाड़ियों पर उपोष्ण कटिबंधीय तथा अल्पाइन वनस्पति पाई जाती है।
(ii) सूर्य का प्रकाश – किसी भी स्थान पर सूर्य के प्रकाश का समय उस स्थान के अक्षांश, समुद्र तल से ऊँचाई एवं ऋतु पर निर्भर करता है। प्रकाश अधिक समय तक मिलने के कारण वृक्ष गर्मी की ऋतु में जल्दी बढ़ते हैं। लंबे समय तक सूर्य का प्रकाश पाने वाले क्षेत्रों में गहन वनस्पति पाई जाती है। वर्षण – भारत में दक्षिण-पश्चिमी मानसून तथा लौटती हुई उत्तर-पूर्वी मानसून द्वारा वर्षा होती है। भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा वाले क्षेत्रों की अपेक्षा कम गहन वनस्पति पाई जाती है। भूमि-भूमि प्राकृतिक वनस्पति को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से प्रभावित करती है। यह वनस्पति के प्रकार को प्रभावित करती है। उपजाऊ भूमि को कृषि के लिए प्रयोग किया जाता है जबकि वन चरागाहों एवं विभिन्न वन्य प्राणियों को आश्रय प्रदान करते हैं। विभिन्न प्रकार की मृदा, विभिन्न प्रकार की वनस्पति को उगने में सहायता प्रदान करती है। मरुस्थल की रेतीली जमीन कैक्टस एवं काँटेदार झाड़ियों को उगने में सहायता प्रदान करती है जबकि गीली, दलदली, डेल्टाई मृदा मैंग्रोव तथा डेल्टाई वनस्पति के उगने में सहायक होती है। कम गहराई वाली पहाड़ी ढलानों की मृदा शंकुधारी वृक्षों के उगने में सहायक होती है।
In simple words: वनस्पति और प्राणी जगत की विविधता के मुख्य कारण तापमान, आर्द्रता, मिट्टी और वर्षा हैं। तापमान और सूर्य का प्रकाश पौधों की वृद्धि और प्रकार को प्रभावित करते हैं, जबकि वर्षा की मात्रा वनस्पति घनत्व को निर्धारित करती है। मिट्टी का प्रकार भी विभिन्न पौधों और वन्यजीवों के लिए विशिष्ट आवास बनाता है।

🎯 Exam Tip: वनस्पति और प्राणी जगत की भिन्नता को प्रभावित करने वाले कारकों (तापमान, वर्षा, मृदा, सूर्य का प्रकाश) को समझना और उदाहरण सहित व्याख्या करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. हिमालय क्षेत्र की प्रमुख वानस्पतिक पेटियों का वर्णन कीजिए ।
Answer: हिमालय क्षेत्र की प्रमुख वानस्पतिक पेटियाँ - ऊँचाई के आधार पर पर्वतीय क्षेत्रों के अनेक विभाग होते हैं। ऊँचाई के साथ-साथ तापमान में भी कमी आती जाती है। इन क्षेत्रों में वर्षा के वितरण में भी अन्तर पाया जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में उष्ण कटिबंधीय सदाहरित वनों से लेकर ध्रुवीय वनस्पति तक पायी जाती है। हिमालय क्षेत्र की वनस्पति को प्रमुख रूप से चार भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) उष्ण कटिबन्धीय आई पर्णपाती वन – हिमालय की गिरिपाद शिवालिक श्रेणियाँ उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वनों से ढकी हैं। इन वनों का आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्त्वपूर्ण वृक्ष साल है। बाँस भी यहाँ खूब होता है।
(2) उपोष्ण कटिबंधीय पर्वतीय वन – इस क्षेत्र से ऊपर उपोष्ण कटिबंधीय वन मिलते हैं। समुद्र तल से 1000 से 2000 मीटर तक की ऊँचाई वाले भागों में आई पर्वतीय वन पाए जाते हैं। ये वन सदाबहार की श्रेणी में आते हैं। इनमें विभिन्न प्रकार की ओक, चेस्टनट, सेब और चीड़ के वृक्ष पाए जाते हैं। ऐश और बीच यहाँ के अन्य वृक्ष हैं।
(3) शंकुधारी वन – समुद्र तल से 1600 से 3300 मीटर की ऊँचाई के बीच चीड़, सीडर, सिल्वर-फर और स्पूस के वृक्षों की प्रधानता है। ये शीतोष्ण कटिबंध के प्रसिद्ध शंकुधारी वन हैं। हिम वर्षा को सहन करने के कारण इन वृक्षों की पत्तियाँ नुकीली हैं, जो शंकु के समान दिखाई पड़ती हैं। अल्पाइन वन-ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ इन शंकुधारी वनों का स्थान अल्पाइन वन ले लेते हैं। ये हिमालय पर 3,300 से 3,600 मीटर की ऊँचाई तक पाए जाते हैं। इन वनों में छोटे कद के वृक्ष तथा झाड़ियाँ उगती हैं। इन वनों के प्रमुख वृक्ष सिल्वर-फर, चीड़, भुर्ज तथा हपुषा हैं।
In simple words: हिमालय क्षेत्र में ऊँचाई और तापमान के अनुसार विभिन्न वनस्पति पेटियाँ हैं, जिनमें उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन (साल, बाँस) निचली ढलानों पर, उपोष्ण कटिबंधीय पर्वतीय वन (ओक, चेस्टनट) मध्य ऊँचाई पर, और 1600-3300 मीटर पर शंकुधारी वन (चीड़, देवदार) तथा 3300 मीटर से ऊपर अल्पाइन वन (सिल्वर-फर, भुर्ज) पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: हिमालयी वनस्पति पेटियों के ऊँचाई-आधारित वर्गीकरण और प्रत्येक पेटी की प्रमुख वृक्ष प्रजातियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भौगोलिक विविधता और वनस्पति विज्ञान से संबंधित प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 7. वनस्पति का अर्थ बताइए। भारतीय वनस्पति आज कितनी प्राकृतिक रह गयी है?
Answer: एक दिए गए पर्यावरण की रूपरेखा में एक-दूसरे से परस्पर मिलकर रहने वाले पादप प्रजातियों के समुदाय को वनस्पति कहते हैं। वर्तमान भारत में प्राकृतिक वनस्पति प्राकृतिक नहीं रह गयी है, जिसके निम्नलिखित कारण हैं-
1. भारत के अधिकांश क्षेत्रों (हिमालय तथा थार मरुस्थल के आंतरिक भागों को छोड़कर) में मानवीय हस्तक्षेप के कारण प्राकृतिक वनस्पति या तो नष्ट कर दी गई है या उसे बदल दिया गया है।
2. भारत में 40% पादप प्रजातियाँ विदेशों से लाकर उत्तर भारत तथा राजस्थान में थार मरुभूमि में लगाई गई हैं।
3. अधिकांश प्राकृतिक वनस्पति को काटकर उसके स्थान पर कृषि तथा औद्योगिक इकाइयों को लगा दिया गया है। और यह वनस्पति बिल्कुल समाप्त हो गई है।
In simple words: वनस्पति एक विशिष्ट पर्यावरण में साथ रहने वाले पौधों का समुदाय है। भारत में मानवीय हस्तक्षेप, विदेशी प्रजातियों के प्रवेश और कृषि तथा औद्योगिक विकास के कारण अधिकांश प्राकृतिक वनस्पति अब अपने मूल प्राकृतिक स्वरूप में नहीं रही है और या तो नष्ट हो गई है या बदल दी गई है।

🎯 Exam Tip: वनस्पति की परिभाषा और भारत में प्राकृतिक वनस्पति के गैर-प्राकृतिक होने के मुख्य कारणों (मानवीय हस्तक्षेप, विदेशी प्रजातियाँ, भूमि उपयोग परिवर्तन) को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 8. भारत में उच्चावच तथा वर्षा ने प्राकृतिक वनस्पति को किस तरह प्रभावित किया है?
Answer: भारत में उच्चावच तथा वर्षा प्राकृतिक वनस्पति के वितरण को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित करते हैं -
1. उच्चावच तथा वर्षा का सीधा संबंध है। पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक वर्षा होती है। अतः इन क्षेत्रों में सदाबहार वनों का विस्तार पाया जाता है।
2. जिन भागों में पठारी तथा मैदानी उच्चावच है वहाँ वर्षा सामान्य होती है और इन क्षेत्रों में पर्णपाती वनों का विस्तार मिलता है।
3. मरुस्थली उच्चावच में वर्षा कम होती है। अतः यहाँ कॅटीले वन तथा झाड़ियों का विस्तार है।
4. दलदली उच्चावचं तथा खारे और मीठे पानी के मिश्रण के क्षेत्र में सुंदरी वृक्ष उगते हैं।
In simple words: भारत में, उच्चावच और वर्षा प्राकृतिक वनस्पति के वितरण को सीधे प्रभावित करते हैं; अधिक वर्षा वाले पर्वतीय क्षेत्रों में सदाबहार वन, सामान्य वर्षा वाले पठारी और मैदानी क्षेत्रों में पर्णपाती वन, कम वर्षा वाले मरुस्थलीय क्षेत्रों में कॅटीले वन, और दलदली-खारे पानी के क्षेत्रों में सुंदरी जैसे मैंग्रोव वन पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: उच्चावच और वर्षा के प्रत्यक्ष संबंध को समझें और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में वनस्पति के प्रकारों पर उनके प्रभाव को याद रखें।

 

Question 9. भारत में उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों का वर्णन कीजिए।
Answer: उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों में पर्याप्त वर्षा तथा उच्च तापमान के कारण वृक्षों की ऊँचाई 60 मीटर से अधिक होती है। इन वृक्षों के ऊपरी भाग आपस में इतने मिले होते हैं कि सूर्य का प्रकाश ऊपर से नीचे की ओर कठिनाई से ही पहुँच पाता है। इन वृक्षों की जड़ों में बेलें उग आती हैं। ये बेलें पेड़ों पर चढ़ जाती हैं। इस तरह से ये पेड़ इतने सघन होते हैं कि उनमें से गुजरना अत्यन्त कठिन होता है। इन वनों में पतझड़ का एक निश्चित समय न होने से ये सदैव हरे भरे रहते हैं। ये सदाहरित वन 200 सेमी से अधिक वर्षा वाले भागों में पाए जाते हैं। भारत में ये वन पश्चिमी तटीय प्रदेश, पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल, उत्तर-पूर्वी पर्वतीय प्रदेश तथा अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप इत्यादि में पाए जाते हैं। इन वनों के मुख्य वृक्ष रबड़, बाँस, ताड़, जामुन, महोगनी, आबनूस, रोजवुड, बैंत, नारियल, सिनकोना इत्यादि हैं। इन वृक्षों से मूल्यवान एवं उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं। उपयोगी रबड़ के वृक्ष से रबड़, सिनकोना के वृक्ष की छाल से कुनैन और नारियल की लकड़ी से नाव और सजावट का सामान, इसके फल से तेल तथा रेशे से रस्से, टाट, ब्रश, पायदान आदि बनाए जाते हैं। आर्थिक दृष्टि से इन वनों का महत्त्व बहुत कम है क्योंकि सघनता के कारण इनको काटना बहुत कठिन है तथा इनमें एक ही स्थान पर एक प्रकार के वृक्ष नहीं उगते हैं।
In simple words: उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन अत्यधिक वर्षा और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जिनकी ऊँचाई 60 मीटर से अधिक होती है और वे सदा हरे-भरे रहते हैं। ये वन इतने सघन होते हैं कि सूर्य का प्रकाश मुश्किल से ही जमीन तक पहुँच पाता है। भारत में ये पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी प्रदेशों और द्वीपों में पाए जाते हैं, जहाँ रबड़, बाँस, महोगनी जैसे वृक्ष होते हैं, जिनसे उपयोगी उत्पाद मिलते हैं लेकिन सघनता के कारण इनकी कटाई कठिन होती है।

🎯 Exam Tip: उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों की विशेषताओं (ऊँचाई, घनत्व, सदाबहार प्रकृति), उनके वितरण क्षेत्रों और प्रमुख वृक्षों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. भारतीय वनस्पति एवं जैव-विविधता संरक्षण पर संक्षेप में लिखिए।
Answer: भारतीय वनस्पति-
1. भारत में प्राकृतिक वनस्पति का आवरण साफ करके प्राप्त भूमि पर उद्योग तथा कृषि का विस्तार किया गया है।
2. भारत में लगभग 49,000 पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इस दृष्टि से भारत का संसार में 10 वाँ स्थान तथा एशिया में चौथा स्थान है।
3. 15,000 प्रजातियों के फूल वाले पौधे मिलते हैं। यह संसार का 6% है।
4. बिना फूल वाले पौधों में फर्न, शैवाल तथा फंजाई हैं।
5. उच्चावच, तापमान तथा वर्षा की विविधता के कारण यहाँ उष्ण कटिबंधीय सदाबहार (वर्षा) वनों से लेकर ध्रुवीय प्रदेश तक की वनस्पति पाई जाती है।
6. भारत के हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार पर देशज वनस्पति का विस्तार है जबकि 40% वनस्पति बाहर से लाकर लगाई गई है। जैव-विविधता संरक्षण-
1. वन्य-प्राणियों की सुरक्षा तथा संरक्षण के उपाय किए जा रहे हैं –
1. संकटापन्न बने जीवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
2. इनकी अब गणना की जाने लगी है।
3. बाघ परियोजना को सफलता मिल चुकी है।
4. असम में गैंडे के संरक्षण की एक विशेष योजना चलाई जा रही है। सिंहों की घटती संख्या चिंता का विषय बन गई है। अतः आरक्षित क्षेत्रों की संख्या और उनके क्षेत्रों के विस्तार पर बल दिया जा रहा है।
2. वन्य-प्राणियों से हमने बहुत कुछ सीखा है। सभी प्राणी श्रमशील हैं। उनमें प्यार, लगाव, आक्रमण, सुरक्षा, सामंजस्य, साहस, समझदारी, चतुराई, क्रीड़ा, उत्सव आदि सहज भाव से पाया जाता है, जिनको मनुष्य ने उनसे सीखा और अपनाया है। अतः वन्य जीवों का संरक्षण बहुत की आवश्यक है।
3. जैव-विविधता प्रकृति की धरोहर है। यह प्राकृतिक धरोहर हमारी ही नहीं अपितु भावी पीढ़ियों की भी है। इस प्राकृतिक धरोहर को भावी पीढ़ियों तक ज्यों-का-त्यों पहुँचाना प्रत्येक नागरिक का धर्म और कर्तव्य है।
4. प्राकृतिक परिवर्तन तथा मनुष्य के हस्तक्षेप से अनेक जीव-जातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं और कई के निकट भविष्य में विलुप्त होने का भय बना हुआ है।
In simple words: भारत में 49,000 पौधों की प्रजातियाँ (विश्व में 10वां स्थान) और उच्च जैव-विविधता है, जो जलवायु और उच्चावच से प्रभावित होती है, लेकिन मानव गतिविधियों से प्राकृतिक वनस्पति कम हो गई है। वन्यजीव संरक्षण के लिए संकटापन्न प्रजातियों पर ध्यान दिया जा रहा है, बाघ परियोजना जैसी पहलें सफल रही हैं, और जैव-विविधता को भविष्य की पीढ़ियों के लिए बचाना एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

🎯 Exam Tip: भारतीय वनस्पति की विविधता, इसके संरक्षण की आवश्यकता और प्रमुख संरक्षण प्रयासों (जैसे बाघ परियोजना) पर ध्यान दें, क्योंकि यह पर्यावरण, भूगोल और संरक्षण नीतियों से संबंधित प्रश्नों में महत्वपूर्ण है।

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