UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 Upasarga prakaran

Get the most accurate UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 9 Sanskrit. Our expert-created answers for Class 9 Sanskrit are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit

For Class 9 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 9 Sanskrit solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण solutions will improve your exam performance.

Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण UP Board Solutions PDF

जो शब्दांश धातु, संज्ञा और विशेषणादि के पूर्व जोड़े जाकर उनके अर्थ में विशेषता उत्पन्न कर देते हैं या सर्वथा अर्थ को बदल देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं; जैसे-'हार' से पूर्व (प्र + हार), आ (आ + हार), सम् (सम् + हार), वि (वि - हार), परि (परि + हार) । उपसर्ग लगाने से धातु के अर्थों में अन्तर आ जाता है। संस्कृत में कुल 22 उपसर्ग माने जाते हैं। उनके नाम और अर्थ इस प्रकार हैं-प्र (अधिक), परा (उल्टा, पीछे), अप (दूर, हीनता, न्यूनता, बुरा), सम् (अच्छी तरह), अनु (पीछे), अव (नीचे, दूर), निस् (बिना, बाहर), निर् (बाहर), दुस् (कठिन), दुर् (बुरा), वि (बिना, अलग), आ-आ (तक, कम), नि (नीचे, निषेध), अधि (ऊपर, श्रेष्ठ), अपि (निकट), अति (बहुत), सु (सुन्दर), उत् (ऊपर); अभि (सामने, ओर), प्रति (ओर, उल्टा), परि. (चारों ओर), उप (निकट)।

सोपसर्ग धातुएँ एवं उनके अर्थ

(1) 'भू' (होना) धातु

भवति = होता है।
अनुभवति = अनुभव करता है।
आविर्भवति = निकलता है, प्रकट होता है।
परिभवति = तिरस्कार करता है।
सम्भवति = पैदा होता है, मिलता है।
तिरोभवति = छिपता है।
अभिभवति = तिरस्कृत होता है।
पराभवति = हराता है।
प्रार्दुभवति = उत्पन्न करता है।
प्रभवति = समर्थ होता है, निकलता है।
उद्भवति = उत्पन्न होता है।

(2) 'नी' (ले जाना) धातु

नयति = ले जाता है।
अभिनयति = अभिनय करता है।
आनयति = लाता है।
परिणयति = विवाह करता है।
अपनयति = हटाता है, दूर करता है।
उन्नयति = ऊँचा उठाता है।
अनुनयति = मानता है।
उपनयति = उपनयन करता है,
पास ले जाता है।
उपानयति = पास लाता है।
व्यपनयति = दूर करता है।
निर्णयति = निर्णय करता है।

(3) 'कृ' (करना) धातु

करोति = करता है।
अपकरोति = बुरा करता है।
नमस्करोति = नमस्कार करता है।
विकरोति = विकार पैदा करता है।
अलङ्करोति = शोभा बढ़ाता है।
निराकरोति = हटाता है।
संस्कारः = सुसज्जित करना।
प्रत्युपकरोति = उपकार का बदला देता है।
उत्कुरुते = चुगली करता है।
अनुकरोति = नकल करता है।
तिरस्करोति = तिरस्कार करता है।
उपकरोति = उपकार करता है।
परिष्करोति = सजाता है।
आविष्करोति = ढूँढ़ता है।
अपकारः = दूसरे का अहित।
संस्करोति = शुद्ध करता है।
प्रकुरुते = जबरदस्ती करता है।

(4) 'गम्' (जाना) धातु

गच्छति = जाता है।
अनुगच्छति = पीछे चलता है।
अधिगच्छति = प्राप्त करता है।
निर्गच्छति = बाहर जाता है।
उद्गच्छति = निकलता है।
उपगच्छति = पास जाता है।
उदागच्छति = ऊपर जाता है।
आगच्छति = आता है।
अवगच्छति = जानता है।
प्रतिगच्छति = लौटता है।
संगच्छति = मिलता है।
प्रत्युद्गच्छति = अगवानी के लिए
जाता है।
अपगच्छति = दूर जाता है।

(5) 'हृ' (हरण करना, चुराना) धातु

हरति = ले जाता है।
अपहरति = छीनता है।
उद्धरति = उद्धार करता है।
परिहरति = छोड़ता है।
प्रहरति = मारता है, प्रहार करता है।
संहरति = मारता है, रोकता है, हटाता है।
व्याहरति = बोलता है।
अनुहरति = नकल करता है।
आहरति = लाता है।
उदाहरति = उदाहरण देता है।
उपहरति = भेंट देता है।
विहरति = घूमता है।
व्यवहरति = व्यवहार करता है।
समाहरति = इकट्ठा करता है।

(6) 'स्था' (ठहरना) धातु

तिष्ठति = ठहरता है, रुकता है।
अनुतिष्ठति = करता है।
अधितिष्ठति = बैठता है, रहता है।
अवतिष्ठते = ठहरता है।

उत्तिष्ठति = उठता है।
उपतिष्ठति = पास बैठता है।
सन्तिष्ठते = मारता है।
प्रतिष्ठते = रवाना होता है।
उपतिष्ठते = मिलता है, उपस्थान
करता है।

(7) 'वृत्' (पसन्द करना) धातु

वर्तते = होता है।
आवर्तते = वापस जाता है।
परिवर्तते = घूमता है।
निवर्तते = लौटता है।
अनुवर्तते = अनुसरण करता है।
आवर्तयति = माला फेरता है।
प्रत्यावर्तते = लौटता है।
प्रवर्तते = शुरू होता है।

(8) 'ईक्ष' (देखना) धातु

ईक्षते = देखता है।
उपेक्षते = उपेक्षा करता है।
प्रतीक्षते = प्रतीक्षा करता है।
अवेक्षते = रक्षा करता है, आदर
करता है, जाँच करता है।
अपेक्षते = इच्छा करता है।
परीक्षते = परीक्षा लेता है।
निरीक्षते = निरीक्षण करता है।
वीक्षते = देखता है।
समीक्षते = विमर्श करता है.
मनन करता है।

(9) 'इ' (जाना) धातु

एति = जाता है।
प्रत्येति = विश्वास करता है।
उपैति = प्राप्त करता है, पास जाता है।
अन्वेति = पीछे जाता है।
अभ्युपैति = प्राप्त होता है।
व्येति = खर्च करता है।
संलपंति = वार्तालाप करता है।
अवैति = जानता है।
उदेति = उदित होता है।
अभ्येति = सामने आता है।
अपैति = दूर होता है।
विपर्येति = उल्टा समझता है।
अयेति = जानता है।
अपलपति = छिपाता है।

(10) 'चर' (चलना) धातु

चरति = चलता है, घूमता है, खाता है।
आचरति = व्यवहार करता है।
उच्चरति = उच्चारण करता है, ऊपर जाता है।
संचरति = आता-जाता है।
उपचरति = सेवा करता है, उपचार करता है।
उच्चरते = उल्लंघन करता है।
अपचरति = विपरीत करता है।
अतिचरति = विरुद्ध चलता है।
अनुचरति = पीछा करता है।
परिचरति = सेवा करता है।
प्रचरति = प्रचार करता है।
विचरति = विचरण करता है।
सञ्चरते = भ्रमण करता है।
व्यभिचरति = व्यभिचार करता है।

(11) 'दिश्' (देना) धातु

दिशति = देता है।
उपदिशति = उपदेश देता है।
निर्दिशति = बताता है।
आदिशति = आज्ञा देता है।
सन्दिशति = सन्देश देता है।

(12) 'धा' (धारण करना) धातु

दधाति = धारण करता है।
अपिदधाति = बन्द करता है।
सन्दधाति = मेल करता है।
परिधत्ते = पहनता है।
अन्तर्दधाति = छिपता है।
सन्धत्ते = मेल करता है।
निधत्ते = रखता है।
प्रतिनिधत्ते = प्रतिनिधित्व करता है।
अभिदधाति = कहता है।
अवदधाति = ध्यान देता है।
विदधाति = विधान करता है।
निदधाति = अमानत रखता है।
पिधत्ते = ढकता है।
आधत्ते = स्थापित करता है।
प्रणिधत्ते = ध्यान करता है।

(13) 'पत्' (गिरना) धातु

पतति = गिरता है।
उत्पतति = उड़ता है।
निपतति = गिरता है।
विनिपतति = पतन होता है।
आपतति = आ पड़ता है।
प्रणिपतति = प्रणाम करता है।
सन्निपतति = टूट पड़ता है।
प्रपतति = गिरता है।

(14) 'वद्' (कहना) धातु

वदति = कहता है, बोलता है।
विवदति = झगड़ा करता है।
अनुवदति = नकल करता है, अनुवाद करता है।
विप्रवदति = झगड़ता है।
विप्रवदते = विरुद्ध बोलता है।
अपवदति = निन्दा करता है,
अपवाद करता है।
उपवदति = चापलूसी करता है।
प्रतिवदति = उत्तर देता है।
विवदते = विवाद करता है।

(15) 'सद्' (ठहरना, बैठना) धातु

सीदति = बैठता है, ठहरता है।
उत्सीदति = नाश होता है।
प्रसीदति = प्रसन्न होता है।
निषीदति = बैठता है।
उपसीदति = पास बैठता है।
अवसीदति = निराश होता है, थकता है।
आसीदति = प्राप्त करता है।
विषीदति = दुःखी होता है।
प्रत्यासीदति = समीप आता है।

(16) 'रुह' (चढ़ना) धातु

आरोहः = ऊपर चढ़ना।
रोहति = उगता है।
अधिरोहति = चढ़ता है।
आरोहति = चढ़ता है।
अवरोहः = नीचे उतरना।
प्ररोहति = उत्पन्न होता है।
अवरोहति = उतरता है।
संरोहति = मिलता है।

(17) 'लभ्' (प्राप्त करना) धातु

दुर्लभः = कठिनाई से प्राप्त।
सुलभः = सरलता से प्राप्त।

(18) 'बन्ध्' (बाँधना) धातु

बध्नाति = बाँधता है।
निबध्नाति = निबन्ध लिखता है।
प्रबध्नाति = प्रबन्ध करता है।

(19) 'आप्' (पाना) धातु

आप्नोति = प्राप्त करता है।
समाप्नोति = समाप्त करता है, होता है।
व्याप्नोति = व्याप्त करता है।
प्राप्नोति = प्राप्त करता है।

(20) 'ज्ञा' (जानना) धातु

जानाति = जानता है।
उपज्ञानाति = आरम्भ करता है।
अवजानानाति = अपमान करता है।
अपजानीते = छिपता है।
अनुजानाति = अनुमति देता है।
विजानाति = विशेष रूप से जानता है।
जानीते = प्रवृत्त होता है।
प्रतिजानीते = प्रतीक्षा करता है।

(21) 'अस्' (फेंकना) धातु

अस्यति = फेंकता है।
अध्यस्यति = आरोप करता है।
व्युदस्यति = निकालता है।
समास्यति = संक्षिप्त करता है।
अपास्यति = दूर करता है।
निरस्यति = हटाता है।
परास्यति = परास्त करता है।
अभ्यस्यति = कण्ठस्थ करता है।

(22) 'पद्' (चलना, जाना) धातु

पद्यते = जाता है।
उत्पद्यते = उत्पन्न करता है।
सम्पद्यते = सुखी होता है।
विपद्यते = मारता है।

आपद्यते = आपदा में पड़ता है।
प्रतिपद्यते = आज्ञा माँगता है।
प्रपद्यते = शरण में जाता है।

(23) 'तृ' (तैरना) धातु

तरति = तैरता है।
उत्तरति = उत्तर देता है।
वितरति = बाँटता है।
संतरति = तैरता है।

(24) 'क्रम्' (चलना) धातु

क्रामति = चलता है।
आक्रामति = ऊपर जाता है।
क्रमते = उत्साह करता है।
विक्रमते = आगे बढ़ता है।
निष्क्रामति = निकलता है।
अपक्रामति = हटता है।
उपक्रमते = आरम्भ करता है।

(25) 'अय्' (जाना) धातु

अयते = जाता है।
व्ययते = खर्च करता है।
दुरयते = दुःखी होता है।
निलयते = विलीन होता है।
पलायते = भागता है।
निरयते = निकलता है।
दुलयते = काँपता है।

(26) 'क्षिप' (फेंकना) धातु

क्षिपति = फेंकता है।
आक्षिपति = दोष लगाता है।
निक्षिपति = नीचे फेंकता है।
उत्क्षिपति = ऊपर फेंकता है।

(27) 'सृ' (सरकना) धातु

सरति = जाता है।
अपसरति = अलग होता है।
उसरति = दूर भागता है, निकालता है।
निसरति = बाहर निकलता है, खिसक जाता है।
परिसरति = चारों ओर बहता है,
चक्कर काटता है।
अनुसरति = अनुगमन करता है।
अभिसरति = जाता है, पहुँचता है।
उपसरति = पास जाता है, पहुँचता है।
प्रसरति = बह जाता है, उदय होता है।
प्रतिसरति = वापस लौटता है,
आक्रमण कर देता है।

(28) 'अञ्च्' (जाना, पूजा करना) धातु

अञ्चति = जाता है, पूजा करता है।
पराञ्चति = लौटता है।
उदञ्चति = ऊपर जाता है।
प्राञ्चति = उत्पन्न होता है।
प्रत्यञ्चति = अवनति पाता है।
अदाञ्चति = अधोमुख होता है।

(29) 'ग्रह्' (लेना या ग्रहण करना) धातु

गृह्णाति = ग्रहण करता है।
अवगृह्णाति = छिपता है।
प्रतिगृह्णाति = ग्रहण करता है।
अनुगृह्णाति = कृपा करता है।
दुरागृह्णाति = दुराग्रह या हठ करता है।

(30) 'चि' (चुनना) धातु

चिनोति = चुनता है।
निश्चिनोति = निश्चय करता है।
अपचिनोति = घटाता है।
परिचिनोति = पहचानता है।
उपचिनोति = बढ़ाता है।
अवचिनोति = इकट्ठा करता है।

(31) 'लप्' (बोलना) धातु

लपति = बोलता है।
आलपति = बोलता है, आलाप करता है।
विलपति = विलाप करता है।

(32) 'आस्' (बैठना) धातु

आस्ते = बैठता है।
उदास्ते = उदासीन होता है।
अध्यास्ते = रहता है।

संस्कृत के विभिन्न उपसर्गों से निर्मित शब्द

उपसर्गअर्थशब्द
अनुपीछे, सामनेअनुकरणम्, अनुभवः, अनुनयः, अनुग्रहः, अनुसरणम्,
अनुगमनम अनुचरः, अनुकूलः, अनुरूपः, अनुरागः,
अनुलोमः ।
अतिअधिक, उस पार, ऊपरअत्याचारः, अतिक्रमणम्, अत्यावश्यकम् अत्युक्तिः,
अतिरिक्तम्, अत्यन्तम्, अतिरेकः ।
अधिऊपर, श्रेष्ठ, प्रधानअधिकारः, अध्यादेशः, अध्यक्षः, अध्यात्म अधिपतिः
अधिकृतः, अधिनायकः।
अपहीनता, दूर, बुरा, विरोधअपकारः, अपयशः, अपहरणम्, अपशब्दः, अपवादः,
अपमानः, अपकर्षः, अपशकुनम्।
अवहीन, नीचेअवनतिः, अवगुणः, अवतारः, अवलोकनम्, अवज्ञा,
अवमानम्, अवधारणा, अवहेलना।
अभिसम्मुख, निकट, ओरअभिनयः, अभिवादनम्, अभिज्ञानम्, अभियोगः, अभि-
मुखम्, अभिशापः, अभिदानम्, अभियानम्, अभिरुचिः।
सीमा, ओर, समेतआमरणम्, आजीवनम्, आरोहणम्, आरम्भः, आजन्मः,
आसमुद्रम्, आदानम्, आयातः, आपूर्तिः, आगमनम्,
आचरणम्।
उत्-उद्ऊपर, ऊँचा, श्रेष्ठउत्पत्तिः, उत्थानम्, उद्गमम्, उत्कृष्टः, उत्कर्षः, उत्तमः,
उन्नतिः, उद्घोषः, उद्गारः, उद्घारः, उद्यमः, उद्भवः ।
उपनिकट, समानउपदेशः, उपद्वीपः, उपकारः, उपभेदः, उपनामः,
उपप्रधानः, उपवनम्, उपनगरम्, उपकूलम्, उपासकः ।
दुस्, दुर्बुरा, कठिन, दुष्टदुश्चरित्रम्, दुस्साहसः, दुष्कर्मः, दुस्तरः, दुर्लभः,
दुराचारः, दुर्गुणः, दुर्गमः, दुर्जनः, दुर्बलः।
प्रअधिक, आगे, ऊपरप्रचारः, प्रकृतिः, प्रकर्षः, प्रकृष्टः, प्रणामः, प्रयत्नः,
प्रमाणम्, प्रसारः, प्रख्यातम्, प्रहारः, प्रवादः, प्रमादः,
प्रलापः, प्रतापः, प्रभावः, प्रदानम्, प्रगतिः, प्रलयः, प्रवीणः,
प्रयोगः।
पराउल्टा, पीछे, निषेधपराजयः, परावर्तनम्, पराभवः, पराक्रमः, परामर्शः,
पराकाष्ठा।
सम्अच्छा, साथ, पूर्णसञ्चयः, सहारः, सङ्गमः, समागमः, संयोगः, संस्कृतः,
संस्कारः, सङ्गतिः, सङ्ग्रहः, सम्पूर्णः, सङ्कल्पः,
सम्मेलनम्, सम्मोहनम्।
निस्, निर्बाहर, निषेध, रहितनिस्सारः, निष्कासनम्, निस्सन्देहः, निष्कारणम्, निरुपायः,
निस्सङ्गः, निस्संकोचः, निष्प्रभावः, निर्दोषः, निर्मलम्,
निरुद्देश्यम्, निरुपद्रवः, निर्भयम्, निश्चलः, निस्तेजः,
निर्जलम्।
निभीतर, नीचे, बाहरनिषेधः, निकृष्टः, निपतनम्, निवारणम्, निरोधः, निर्विरोधः,
निदानम्, निबन्धः, नियोगः, निधिः।
विविशेष, अभाव, भिन्नविज्ञानम्, विषमः, विभेदः, विमतम्, विवादः, विदेशः,
विहारः, वियोगः, विनाशः, विशेषः, विनयः, विभागः,
विश्वासः, विशारदः, विधवा, विमलम्, विलापः,
विवरणम्।
सुअच्छा, सहज, अधिकसुकर्मः, सुपरिचितः, सुयोगः, सुलभः, सुनीति, सुजनः,
सुयशः, सुदेशः, सुकेशः, सुपुत्रः, सुकृतम्, सुदूरम्।
प्रतिविरोध, एक-एक, सामनेप्रत्युत्तरम्, प्रतिशोधः, प्रतिकूलम्, प्रतिक्रिया, प्रतिकारः,
प्रतिध्वनिः, प्रतिवादी, प्रत्युपकारः, प्रतीक्षा, प्रत्येकम्,
प्रतिदिनम्, प्रत्यक्षम्, प्रतिनिधिः, प्रतिवर्षम्।
परिआस-पास, चारों ओर,
पूर्ण
परिजनः, परिचयः, परिष्कारः, परितापः, परितुष्टः, परिधिः,
परिभ्रमण, पर्यावरण, परीक्षा, परितः, परिवारः,
परिकल्पनाः।
अपिअपिहितम्, अपिधानम्।

लघुउतरिय प्रश्न संस्कृत व्याकरण

 

Question 1. निम्नलिखित वाक्यों का अर्थ लिखिए
(अ) सर्वे छात्राः इदानीम् उद्याने विहरन्ति ।
(आ) ते उद्यानात् बहूनि फलानि आहरन्ति ।
(इ) यदा कोऽपि पशुः उद्याने प्रविशति, उद्यानपालकः तान् लगुडेन प्रहरति ।
(ई) अत्र सेवकाः नित्यं जलम् आनयन्ति। ते पादपान् सिञ्चन्ति। समयेन ते फलानि प्रतीक्षन्ते ।
(उ) उद्यानपालकः बहु श्रम करोति ।
(ऊ) तस्य पुत्रः तम् अनुकरोति ।
(ए) यः कोऽपि कार्यं करोति, सः फलं प्राप्नोति ।
(ऐ) अध्यापका बालान् उपकरोति, तेषां दुर्वचनानि तिरस्करोति ।।
Answer:
(अ) सभी छात्र इस समय उद्यान में विहार कर रहे हैं।
(आ) वे उद्यान से बहुत फलों को लेते हैं।
(इ) जब कोई भी पशु उद्यान में प्रवेश करता है, उद्यानपालक (माली) उनको डण्डे के द्वारा मारता है।
(ई) यहाँ सेवक नित्य जल लेने आते हैं। वे पौधों को सींचते हैं। वे समय से फलों की प्रतीक्षा करते हैं।
(उ) उद्यानपालक (माली) बहुत मेहनत करता है।
(ऊ) उसका पुत्र उसका अनुकरण करती है।
(ए) जो कोई भी कार्य करता है, वह फल प्राप्त करता है।
(ऐ) अध्यापक बालकों का उपकार करता है, उनके दुर्वचनों को दूर करता है।
In simple words: यह प्रश्न संस्कृत वाक्यों का हिंदी में अनुवाद करने को कहता है, जिसमें विभिन्न उपसर्गों के प्रयोग वाले क्रियापदों का अर्थ स्पष्ट होता है।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के अर्थ और उनके क्रियापदों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना अनुवाद के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. 'उद्यानम्' पर पाँच वाक्य संस्कृत में लिखिए ।
Answer: 'उद्यानम्' पर पाँच वाक्य निबन्ध-प्रकरण के अन्तर्गत 'उद्यानम्' शीर्षक निबन्ध से चुनकर स्वयं लिखिए।
In simple words: छात्र को 'उद्यानम्' (बगीचा) विषय पर संस्कृत में पाँच वाक्य स्वयं लिखने हैं, जो निबंध अनुभाग से संबंधित हो सकता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में छात्रों की रचनात्मकता और संस्कृत व्याकरण की समझ का मूल्यांकन होता है। विषय से संबंधित सरल और सही वाक्य बनाने का अभ्यास करें।

वजनिक प्रश्नोत्तर

 

Question 1. 'आगच्छति' शब्द का क्या अर्थ है?
(क) जाता है।
(ख) आता है।
(ग) लौटता है।
(घ) दूर जाता है।
Answer: (ख) आता है।
In simple words: 'आगच्छति' का अर्थ 'आना' है, जो 'आ' उपसर्ग (पास) और 'गच्छति' (जाना) से मिलकर बना है।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के अर्थ और क्रिया के मूल अर्थ को समझकर ही सही अर्थ का चयन करें।

 

Question 2. 'उप' उपसर्ग का सामान्यतः क्या अर्थ होता है?
(क) छोटा
(ख) निषेध
(ग) विरोध
(घ) अधिक
Answer: (क) छोटा
In simple words: 'उप' उपसर्ग का सामान्य अर्थ 'निकट', 'सहायक' या 'छोटा' होता है, जो किसी वस्तु या क्रिया की लघुता या समीपत्व को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक उपसर्ग के कई अर्थ हो सकते हैं; प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त अर्थ चुनें।

 

Question 3. 'उद्भवति' शब्द का क्या अर्थ है?
(क) होता है।
(ख) छिपाता है।
(ग) हराता है।
(घ) उत्पन्न होता है
Answer: (घ) उत्पन्न होता है
In simple words: 'उद्भवति' का अर्थ 'उत्पन्न होना' है, जो 'उत्' उपसर्ग (ऊपर) और 'भवति' (होना) के संयोग से बना है, जिसका भाव है 'किसी चीज का ऊपर आना' या 'प्रकट होना'।

🎯 Exam Tip: धातु के मूल अर्थ में उपसर्ग के अर्थ को जोड़कर शब्द का सही अर्थ समझें।

 

Question 4. 'उत्पत्ति' शब्द का क्या अर्थ है?
(क) उड़ता है।
(ख) बैठता है।
(ग) चढ़ता है
Answer: (क) उड़ता है।
In simple words: 'उत्पत्ति' शब्द का अर्थ 'उड़ना' है, जो 'उत्' उपसर्ग (ऊपर) और 'पत्ति' (गिरना/जाना) से बना है, जिसका अर्थ है 'ऊपर की ओर जाना' या 'उड़ना'।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग लगने से धातु के अर्थ में परिवर्तन को ध्यान में रखें; जैसे 'पत्' का अर्थ 'गिरना' है, लेकिन 'उत्पत्' का अर्थ 'उड़ना' होता है।

 

Question 5. अध्यक्ष' शब्द में कौन-सा उपसर्ग लगा है?
(क) अति
(ख) अभि
(ग) अधि
(घ) अध्य
Answer: (ग) अधि
In simple words: 'अध्यक्ष' शब्द 'अधि' उपसर्ग और 'अक्ष' से मिलकर बना है, जहाँ 'अधि' का अर्थ 'ऊपर' या 'श्रेष्ठ' है।

🎯 Exam Tip: शब्दों में छिपे उपसर्गों को पहचानने के लिए संधि नियमों और उपसर्गों के मूल अर्थ का ज्ञान आवश्यक है।

 

Question 6. 'अति' उपसर्ग का क्या अर्थ है?
(क) पास
(ख) अधिक
(ग) अच्छा
Answer: (ख) अधिक
In simple words: 'अति' उपसर्ग का मुख्य अर्थ 'अधिक', 'बहुत' या 'उस पार' होता है, जो किसी चीज की अधिकता या सीमा से परे होने को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के विभिन्न अर्थों को याद रखना शब्दावली बढ़ाने और सही विकल्प चुनने में सहायता करता है।

 

Question 7. 'नि' उपसर्ग से कौन-सा अर्थ है?
(क) सम्मुख
(ख) श्रेष्ठ
(ग) निषेध
(घ) ऊपर
Answer: (ग) निषेध
In simple words: 'नि' उपसर्ग का अर्थ 'नीचे', 'निषेध', 'भीतर' या 'बाहर' हो सकता है; यहाँ दिए गए विकल्पों में 'निषेध' सबसे उपयुक्त है।

🎯 Exam Tip: एक ही उपसर्ग के कई अर्थ हो सकते हैं; संदर्भ के अनुसार सही अर्थ का चुनाव करें।

 

Question 8. 'x' उपसर्ग से कौन-सा अर्थ ध्वनित होता है?
(क) बुरा
(ख) सम्मुख
(ग) श्रेष्ठ
(घ) ऊपर
Answer: (घ) ऊपर
In simple words: 'ऊपर' अर्थ को ध्वनित करने वाले उपसर्ग 'उत्-उद्' या 'अधि' होते हैं, जो किसी चीज के ऊपर या श्रेष्ठ स्थिति को दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के अर्थों को याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करने में मदद करता है।

 

Question 9. 'सु' उपसर्ग का कौन-सा अर्थ उचित है?
(क) ऊपर
(ख) अच्छा
(ग) ऊँची
(घ) नीचा
Answer: (ख) अच्छा
In simple words: 'सु' उपसर्ग का अर्थ 'अच्छा', 'सुन्दर' या 'सहज' होता है, जो किसी गुण की श्रेष्ठता को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के सकारात्मक और नकारात्मक अर्थों को पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. 'प्रत्यासीदति' के लिए कौन-सा विकल्प उपयुक्त है?
(क) प्रति
(ख) आ
(ग) प्रति और आ
(घ) प्रत्या
Answer: (ग) प्रति और आ
In simple words: 'प्रत्यासीदति' शब्द 'प्रति' और 'आ' दो उपसर्गों तथा 'सद्' धातु से मिलकर बना है, जिसका अर्थ 'समीप आना' होता है।

🎯 Exam Tip: कुछ शब्दों में एक से अधिक उपसर्ग हो सकते हैं; सभी उपसर्गों को पहचानना आवश्यक है।

 

Question 11. 'प्रवर्तते' शब्द का कौन-सा अर्थ उचित है?
(क) देखता है
(ख) वापस जाता है।
(ग) घूमता है।
(घ) शुरू होता है।
Answer: (घ) शुरू होता है।
In simple words: 'प्रवर्तते' का अर्थ 'शुरू होता है' या 'प्रारम्भ होता है' है, जो 'प्र' उपसर्ग (आगे) और 'वृत्' धातु (होना/पसन्द करना) से बना है।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग के प्रभाव से धातु के अर्थ में हुए परिवर्तन को समझें। 'वृत्' का मूल अर्थ 'होना' है, लेकिन 'प्रवृत्' का अर्थ 'शुरू होना' है।

 

Question 12. 'विप्रवदति' का कौन-सा अर्थ सर्वोपयुक्त है?
(क) झगड़ता हैं।
(ख) ब्राह्मण कहता है।
(ग) चापलूसी करता है।
(घ) उत्तर देता है
Answer: (क) झगड़ता हैं।
In simple words: 'विप्रवदति' का अर्थ 'झगड़ना' है, जो 'वि' और 'प्र' उपसर्गों के साथ 'वद्' धातु (कहना) से बना है, जिसका भाव 'विरुद्ध कहना' या 'विवाद करना' है।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के संयोग से धातु के अर्थ में आने वाले सूक्ष्म भेदों को पहचानें।

 

Question 13. 'परिसरति' शब्द किस उपसर्ग-धातु के योग से बना है? .
(क) परि और सृ
(ख) प्र और सरति
(ग) परिसर और ति
(घ) परि और सरति
Answer: (क) परि और सृ
In simple words: 'परिसरति' शब्द 'परि' (चारों ओर) उपसर्ग और 'सृ' (सरकना/जाना) धातु के योग से बना है, जिसका अर्थ 'चारों ओर बहना' या 'घूमना' है।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग और धातु को अलग-अलग पहचानकर उनके सही अर्थ के साथ शब्द का निर्माण करना सीखें।

 

Question 14. 'आक्रामति' शब्द का कौन-सा अर्थ उचित है?
(क) निकलती है।
(ख) आक्रमण करता है।
(ग) मारता है।
(घ) ऊपर जाता है।
Answer: (घ) ऊपर जाता है।
In simple words: 'आक्रामति' का अर्थ 'ऊपर जाता है' या 'आक्रमण करना' हो सकता है; दिए गए विकल्पों में 'ऊपर जाता है' भी एक मान्य अर्थ है जो 'आ' (तक) और 'क्रम्' (चलना) से बना है।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के विविध अर्थों और धातु के साथ उनके संयोजन से बनने वाले विभिन्न अर्थों को समझें।

 

Question 15. 'समास्यति' शब्द का क्या अर्थ है?
(क) हराता है
(ख) संक्षिप्त करता है
(ग) जीतता है।
(घ) विलीन होता है।
Answer: (ख) संक्षिप्त करता है
In simple words: 'समास्यति' शब्द 'सम्' (अच्छी तरह/पूर्ण) उपसर्ग और 'अस्' (फेंकना) धातु से बना है, जिसका अर्थ 'संक्षिप्त करना' या 'इकट्ठा करना' है।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के मूल अर्थ को समझकर धातु के क्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करें।

 

Question 16. 'परि' उपसर्ग का कौन-सा अर्थ नहीं है?
(क) आस-पास
(ख) चारों ओर
(ग) बाहर
(घ) पूर्ण
Answer: (ग) बाहर
In simple words: 'परि' उपसर्ग का अर्थ 'आस-पास', 'चारों ओर' और 'पूर्ण' होता है, जबकि 'बाहर' अर्थ 'निस्' या 'निर्' उपसर्गों से संबंधित है।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों के सटीक अर्थ और उनके विपरीत अर्थों को जानना भ्रम से बचने में मदद करता है।

UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण

Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 9 Sanskrit textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 9 Sanskrit chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 9 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Sanskrit Class 9 Solved Papers

Using our Sanskrit solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 9 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Sanskrit are as per latest UP Board curriculum.

Are the Sanskrit UP Board solutions for Class 9 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 9 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 9 Sanskrit. You can access UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Sanskrit UP Board solutions for Class 9 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 7 उपसर्ग प्रकरण in printable PDF format for offline study on any device.