UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 5 Samas prakaran

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Detailed Chapter 5 Samas prakaran UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit

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Class 9 Sanskrit Chapter 5 Samas prakaran UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 5 समास-प्रकरण (व्याकरण)

समास का अर्थ है-संक्षेप । दो या दो से अधिक पदों को इंसे प्रकार मिलाना कि उनके आकार में कमी आ जाये और अर्थ भी पूरा-पूरा निकल आये, को समास कहते हैं; जैसे-नराणां पतिः = नरपतिः। यहाँ पर 'नराणां पतिः' का वही अर्थ है, जो 'नरपतिः' का है, किन्तु 'नरपतिः' आकार में छोटा हो गया है। समास किये गये पदों को 'सामासिक पद' या 'समस्त पद' कहते हैं। सामासिक पदों को अलग-अलग करने की विधि को 'समास-विग्रह' कहते हैं। उपर्युल्लिखित नरपतिः' समस्त पद या सामासिक पद है तथा नराणां पति:' उसका विग्रह है।

यह ध्यान रखना चाहिए कि समस्त पद दो या अधिक पदों से मिलकर बनते हैं, उपसर्ग या प्रत्ययों के योग से नहीं। समास में कम-से-कम दो पदों का होना आवश्यक है। समास के निम्नलिखित छः भेद होते हैं

(1) अव्ययीभाव समास,
(2) तत्पुरुष समास,
(3) कर्मधारय समास,
(4) द्विगु समास,
(5) बहुब्रीहि समास तथा
(6) द्वन्द्व समास ।

समास के उपर्युक्त छः प्रकारों को स्मरण रखने के लिए निम्नलिखित श्लोक को कण्ठस्थ करें

द्वन्द्वो द्विगुरपि चाहूं मद्गेहे नित्यमव्ययीभावः ।
तत्पुरुष कर्मधारय येनाहं स्यां बहुब्रीहिः ॥

विशेष- नवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में केवल तत्पुरुष, द्वन्द्व और कर्मधारय समास ही निर्धारित हैं, किन्तु भाषा-बोध व एक-दूसरे से सम्बद्धता की दृष्टि से सभी समासों को यहाँ दिया जा रहा है। समासों का यह सम्पूर्ण अध्ययन छात्रों को अगली कक्षाओं में अध्ययन करते समय भी सहायक होगा।

अव्ययीभाव समास

सूत्र-'पूर्वपदप्रधानः अव्ययीभावः

जिस समास में पहला पद प्रधान होता है और सम्पूर्ण शब्द क्रिया-विशेषण होकर अव्यय की भाँति प्रयुक्त होता है, वह अव्ययीभाव समास होता है; येथा–उपकूलम् = कुलस्य समीपम् (किनारे के समीप)। इसमें प्रथम पद प्रायः अव्यय और द्वितीय पद कोई संज्ञा शब्द होता है। समस्त पद अव्यय होता है और नपुंसकलिंग एकवचन के तुल्य प्रयुक्त होता है। इस समास में समस्त पद का विग्रह करते समय समस्त पद में प्रयुक्त व्यय के अर्थ का ही प्रयोग किया जाता है; यथा-उपर्युक्त उदाहरण में विग्रह में 'उप' का अर्थ 'समीप ही प्रयुक्त हुआ है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
प्रतिदिनम्दिनं दिनं प्रतिप्रत्येक दिन
उपगङ्गम्गङ्गायाः समीपम्गंगा के समीप
उपकृष्णम्कृष्णस्य समीपम्कृष्ण के समीप
यथायोग्यम्योग्यम् अनतिक्रम्ययोग्य के अनुसार
आजीवनम्जीवनस्य पर्यन्तम्जीवन तक
अनुरामम्रामस्य पश्चात्राम के पीछे

अव्ययं विभक्तिसमीपसमृद्धिव्यूद्धयर्थाभावात्ययासम्प्रतिशब्दप्रादुर्भावपश्चात् यथाऽनुपूर्व्ययौगपद्मसादृश्यसम्पत्तिसाकल्याऽन्तवचनेषु ।” के अनुसार अव्ययीभाव समास निम्नलिखित अर्थों में होता है

विभक्ति अर्थ मेंअधिहरिहरौ इतिहरि के विषय में
समीप अर्थ मेंउपनगरम्नगरस्य समीपम्नगर के समीप
समृद्धि अर्थ मेंसुधान्यम्धान्यस्य समृद्धिधान्य की समृद्धि
व्यृद्धि (अवनति) अर्थ मेंदुर्गुणम्गुणानां व्यृद्धिःगुणों की अवनति
अभाव अर्थ मेंनिर्दोषःदोषाणां अभावःदोषों का अभाव
अत्यय (नाश) अर्थ मेंअतिहिमम्हिमस्य अत्ययःहिम का नाश हो जाने पर
असम्प्रति (अनुचित) अर्थ मेंअतिनिद्रम्निद्रा सम्प्रति न युज्यतेनिद्रा के अनुचित समय में
शब्दप्रादुर्भाव (प्रकाश) अर्थ मेंइतिकृष्णःकृष्ण शब्दस्य प्रकाशःकृष्ण शब्द का उच्चारण
पश्चात् अर्थ मेंअनुदिनम्दिनस्य पश्चात्दिन के पश्चात्
यथा के चार अर्थों में -
(क) वीप्सा अर्थ मेंप्रत्येकम्एकं एकं प्रतिप्रति एक दिन
(ख) योग्यता अर्थ मेंअनुरूपम्रूफ़्स्य योग्यम्एक रूप के योग्य
(ग) अनतिक्रम्य अर्थ मेंयथाशक्तिशक्तिम् अनतिक्रम्यशक्ति के अनुसार
(घ) सादृश्य अर्थ मेंसहरिम्हरेः सादृश्यम्हरि के समान
अनुपूर्व्य (क्रम) अर्थ मेंअनुज्येष्ठम्ज्येष्ठस्यानुपूव्येंणज्येष्ठ क्रम के अनुसार
यौगपद्य (साथ-साथ होना) अर्थ मेंसचक्रमम्चक्रेण युगपद्चक्र के साथ-साथ
सम्पत्ति (योग्यतानुसार) अर्थ मेंसक्षत्रम्क्षत्राणां सम्पत्तिःक्षत्रियों की सम्पत्ति
साकल्य (सम्पूर्णता) अर्थ मेंसतृणम्तृणम् अपि अपरित्यज्यतिनके को भी न छोड़कर
पर्यन्त (तक के) अर्थ मेंआमरणम्मरणस्य पर्यन्तम्मरने तक

अव्ययीभाव समास यद्यपि नपुंसकलिंग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन में ही रहता है, किन्तु कतिपय स्थानों पर अन्य विभक्तियों का भी प्रयोग होता है, जिनके उदाहरण इस प्रकार हैं-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
नदी के नाम या नदी शब्द के साथ समाहार अर्थ मेंपञ्चगङ्गम्पञ्चानां गङ्गानां समाहारः(पाँच गंगाओं का समूह)
परि अर्थ मेंपरिविष्णोः या परि विष्णुःविष्णोः परिः(विष्णु के चारों ओर)
बहिः अर्थ मेंबहिर्वनात् या बहिर्वनम्वन से बाहर
अभिमुख्य अर्थ मेंप्रत्यग्निअग्निम् प्रति (अग्नि की ओर)

अव्ययीभाव समास होने पर समस्त पद में कुछ प्रत्यय जुड़कर रूप परिवर्तन भी होता है; यथा-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
उपशरदम्शरद-समीपम्शरद के पास
उपराजम्राज्ञः समीपम्राजा के पास
उपचर्मम् या उपचर्मचर्मणः समीपम्चर्म के पास
उपसमिधम् या उपसमित्समिधः समीपम्समिधा के पास
उपनदि या उपनदम्नद्याः समीपम्नदी के पास
उपगिरि या उपगिरिम्गिरेः समीपम्गिरि के पास
अध्यात्मम् (विभक्ति अर्थ में)आत्मनि इतिआत्मा के विषय में
उपगुगौः समीपम्गाय के पास
उपवधूवध्वाः समीपम्वधू के पास

तत्पुरुष समास

सूत्र- 'उत्तरपदार्थप्रधानः तत्पुरुषः जिस समास में उत्तर पद के अर्थ की प्रधानता हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। वाक्य-प्रयोग में लिंग, विभक्ति तथा वचन का प्रयोग भी उत्तर पद के अनुसार ही होता है। तत्पुरुष समास का विग्रह करने पर पूर्व पद में द्वितीया आदि विभक्तियाँ होती हैं-समास करने पर पूर्व पद की विभक्तियों को लोप हो जाता है; जैसे-देवानां मन्दिरम् = 'देवमन्दिरम्', इसमें 'मन्दिरम्' (उत्तर पद) प्रधान है। समास करने पर देवानां की षष्ठी विभक्ति का लोप हो जाता है।

तत्पुरुष समास के भेद-पूर्व पद की विभक्ति के लोप के आधार पर तत्पुरुष के छः भेद होते ।

(1) द्वितीया तत्पुरुष- इसमें पूर्व पद द्वितीया विभक्ति का होता है और समास करने पर द्वितीया विभक्ति का लोप हो जाता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
कृष्णाश्रितःकृष्णम् आश्रितःकृष्ण के सहारे
दुःखतीतःदुःखम् अतीतःदुःख से परे
गजारूढःगजम् आरूढःहाथी पर आरूढ़
शरणागतःशरणम् आगतःशरण में आया हुआ
सुखप्राप्तःसुखं प्राप्तःसुख को प्राप्त हुआ
भयापन्नःभयम् आपन्नःभय को प्राप्त हुआ
ग्रामगतःग्रामं गतःगाँव को गया हुआ
दृष्टिगतःदृष्टिं गतःदृष्टि को गया हुआ

(2) तृतीया तत्पुरुष- इस समास में पूर्व पद तृतीया विभक्ति का होता है और समास करने पर तृतीया विभक्ति का लोप हो जाता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
बाणाहतःबाणेन आहतःबाण से घायल
नखभिन्नःनखैः भिन्नःनखों से फाड़ा गया
नेत्रहीनःनेत्राभ्यां हीनःनेत्रों से रहित
मासपूर्वःमासेन पूर्वःमहीना पहले
पादखञ्जःपादेन खञ्जःपैर से लँगड़ा
गुडमिश्रम्गुडेन मिश्रम्गुड़ से मिला हुआ
हरित्रातःहरिणा त्रातःविष्णु से रक्षा किया गया
धनक्रीतःधनेन क्रीतःधन से खरीदा गया
वाक्कलहःवाचा कलहःवाणी से कलह
व्यवहारकुशलःव्यवहारेण कुशलःव्यवहार से कुशल
अग्निदग्धःअग्निना दग्धःअग्नि से दग्ध
मातृसदृशःमात्रा सदृशःमाता के समान
एकोन:एकेन ऊनःएक से कम

(3) चतुर्थी तत्पुरुष- जहाँ पूर्व पद चतुर्थी विभक्ति का होता है और समास करने पर चतुर्थी विभक्ति का लोप हो जाता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
यूपदारुःयूपाय दारुःयूप के लिए लकड़ी
भूतबलिःभूतेभ्यः बलिःभूतों के लिए बलि
धनकामनाधनाय कामनाधन के लिए इच्छा
कुम्भमृत्तिकाकुम्भाय मृत्तिकाघड़े के लिए मिट्टी
ब्राह्मणहितम्ब्राह्मणाय हितम्ब्राह्मण के लिए हित
पुत्रहितम्पुत्राय हितम्पुत्र के लिए हित
रक्षापुरुषःरक्षायै पुरुषःरक्षा के लिए पुरुष
मार्गव्ययःमार्गाय व्ययःरास्ते के लिए खर्च
विप्रभोजनम्विप्राय भोजनम्ब्राह्मण के लिए भोजन
पठनपुस्तकम्पठनाय पुस्तकम्पढ़ने के लिए पुस्तक
दानपात्रम्दानाय पात्रम्दान के लिए पात्र
भ्रातृ सुखम्भ्रात्रे सुखम्भाई का सुख

(4) पञ्चमी तत्पुरुष- जहाँ पूर्व पद पञ्चमी विभक्ति का होता है और समास करने पर पञ्चमी विभक्ति का लोप हो जाता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
अश्वपतितःअश्वात् पतितःघोड़े से गिरा हुआ
चौरभीतःचौराद् भीतःचोर से डरा हुआ
बन्धनमुक्तःबन्धनाद् मुक्तःबन्धन से मुक्त हुआ
सिंहभयम्सिंहाद् भयम्सिंह से डरा हुआ
हरित्रातःहरेः त्रातःशेर से रक्षा किया गया
मार्गभ्रष्टःमार्गात् भ्रष्टःमार्ग से भ्रष्ट हुआ
गगनपतितःगगनात् पतितःगगन से गिरा हुआ

(5) षष्ठी तत्पुरुष- इसमें पूर्व पद षष्ठी विभक्ति का होता है और समास करने पर षष्ठी विभक्ति | का लोप हो जाता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
राजपुरुषःराज्ञः पुरुषःराजा'का पुरुष
गङ्गाजलम्गङ्गायाः जलम्गंगा का जल
प्रजापतिःप्रजायाः पतिःप्रजा का स्वामी
देवमन्दिरम्देवस्य मन्दिरम्देव का मन्दिर
मूर्तिपूजामूर्त्याः पूजामूर्ति की पूजा
विद्यालयःविद्यायाः आलयःविद्या का घर
तीर्थजलम्तीर्थस्य जलम्तीर्थ का जल
भूपतिःभुवः पतिःपृथ्वी का पति
शिवसमःशिवस्य समःशिव के समान
वेदपतिःवेदानां पतिःवेदों का स्वामी
राजदूतःराज्ञः दूतःराजा का दूत
देवपतिःदेवानां पतिःदेवताओं का स्वामी
आम्रवृक्षःआम्रस्य वृक्षःआम का वृक्ष
देवपुरुषःदेवानां पुरुषःदेवताओं का पुरुष
वेदाध्यापकःवेदानाम् अध्यापकःवेदों का अध्यापक
गणपतिःगणानां पतिःगणों का स्वामी

(6) सप्तमी तत्पुरुष- इसमें पूर्वपद सप्तमी विभक्ति का होता है और समास करने पर सप्तमी विभक्ति का लोप हो जाता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
युद्धनिपुणःयुद्धे निपुणःयुद्ध में निपुण
कूपपतितःकूपे पतितःकुएँ में गिरा हुआ
गुरुभक्तिःगुरौ भक्तिःगुरु में भक्ति
नरोत्तमःनरेषु उत्तमःनरों में उत्तम
कलानिपुणःकलासु निपुणःकलाओं में निपुण
कार्यकुशलःकायें कुशलःकार्य में कुशल
जलमग्नःजले मग्नःजल में डूबा हुआ
शास्त्रप्रवीणशास्त्रेषु प्रवीणःशास्त्रों में प्रवीण
न्यायनिपुणःन्याये निपुणःन्याय में निपुण
सभापण्डितःसभायां पण्डितःसभा में पण्डित
आतपशुष्कःआतपे शुष्कःधूप में सूखा हुआ
वचन धूर्त्तःवचने धूर्त्तःवचनों से धूर्त

उपर्युक्त भेदों के अतिरिक्त तत्पुरुष समास के तीन अन्य भेद भी होते हैं-

(क) उपपद तत्पुरुष, (ख) नञ् तत्पुरुष तथा (ग) अलुक् तत्पुरुष।

(क) उपपद तत्पुरुष - जब तत्पुरुष समास में उत्तर पद कोई क्रिया होती है, तब उपपद तत्पुरुष सम्रास होता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
कुम्भकारःकुम्भं करोतिजो घड़ा बनाता है
घनदःधनं ददातिजो धन देता है
मर्मज्ञःमर्मं जानातिजो मर्म को जानता है
धर्मज्ञःधर्मं जानातिजो धर्म को जानता है

(ख) नञ् तत्पुरुष - जब 'न' या 'अन्' जोड़कर निषेध प्रकट किया जाता है; तब नञ् तत्पुरुष समास होता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
असत्यम्न सत्यम्जो सत्य न हो
अनश्वःन अश्वःजो घोड़ा न हो
अकृतम्न कृतम्जो किया न हो
समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
अनागतम्न आगतम्जो आया न हो
अनावश्यकःन आवश्यकःजो आवश्यक न हो
अब्राह्मणःन ब्राह्मणःजो ब्राह्मण न हो
अनिच्छान इच्छाजो इच्छा न हो
अनुपस्थितःन उपस्थितःजो उपस्थित न हो
अनृतम्न ऋतम्जो सही न हो
अनेकःन एकःजो एक न हो
अनौपचारिकःन औपचारिकःजो औपचारिक न हो

विशेष - नञ् तत्पुरुष समास का 'न' जब किसी व्यंजन वर्णन से मिलता है तब वह 'अ' में परिवर्तित हो जाता है और जब किसी स्वर के साथ मिलता है, तब 'अन्' में।

(ग) अलुक् तत्पुरुष- जब तत्पुरुष समास में पूर्वपद की विभक्ति का लोप नहीं होता है, तो वह अलुक् तत्पुरुष कहलाता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
परस्मैपदम्परस्मै पदम्दूसरे के लिए प
दिवंगतःदिवं गतःस्वर्ग को गया
खेचरःखे चरःआकाश में विचरण करने वाला
आत्मनेपदम्आत्मने पदम्अपने लिए पद
वाचस्पतिःवाचः पतिःबृहस्पति
युधिष्ठिरःयुधिः स्थिरःयुद्ध में स्थिर

कर्मधारय समास

सूत्र- 'विशेषणं विशेष्येण बहुलम्। यह तत्पुरुष समास का उपभेद है। इसका पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है। विग्रह करते समय विशेष्य के लिंग, विभक्ति और वचन ही विशेषण में भी प्रयुक्त होते हैं। विशेष्य के लिंग, विभक्ति और वचन के अनुसार ही तत्, एतत् तथा इदम् के रूपों का प्रयोग होता है। उदाहरण-

विशेषण-विशेष्य -समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
कृष्णसर्पःकृष्णः सर्पःकाला साँप
नीलोत्पलम्नीलं (च तत्) उत्पलम्नीला कमल
नीलाम्बरःनीलः (चासौ) अम्बरःनीला वस्त्र
नीलाकाशम्नीलं (च तत्) आकाशम्नीला आकाश
परमेश्वरःपरमः (चासौ) ईश्वरःपरम ईश्वर
मधुरफलम्मधुरं (च तत्) फलम्मीठा फल
श्रेष्ठपुरुषःश्रेष्ठः पुरुषःश्रेष्ठ पुरुष
महादेवःमहान् (चासौ) देवःमहादेव
उपमान कर्मधारय -समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
घनश्यामःघनः इव श्यामःघन के समान श्याम
पुरुषव्याघ्रःपुरुषः व्याघ्रः इवव्याघ्र के समान पुरुष
नरसिंहःनरः सिंहः इवसिंह के समान नर
चन्द्रमुखमचन्द्र इव मुखम्चन्द्रमा के समान मुख
कमलकोमलम्कमलम् इव कोमलम्कमल के समान कोमल
कमलनयनम्कमलम् इव नयनम्कमल के समान नेत्र
रूपक कर्मधारय -समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
विद्याधनम्विद्या एव धनम्विद्यारूपी धन
मुखकमलम्मुख एव कमलम्मुखरूपी कमल
शोकाग्निःशोक एव अग्निःशोकरूपी अग्नि
दुःखसागरःदुःख एव सागरःदुःखरूपी सागर
उभयपद विशेषण -श्वेतकृष्णःश्वेतः च कृष्णःसफेद और काला
कुत्सित और सुन्दर -कुराजाकुत्सितः राजाबुरा राजा
सुपुरुषःसुन्दरः पुरुषःसुन्दर पुरुष
कुपुत्रःकुत्सितः पुत्रःबुरा बेटा
कुनारीकुत्सिता नारीबुरी स्त्री
सुपुत्रःसुन्दरः पुत्रःसुन्दर पुत्र

द्विगु समास

जब कर्मधारय समास का पूर्व पद संख्यावाचक होता है तो वह द्विगु समास कहलाता है; जैसे–त्रिभुवनम् । यहाँ पर 'त्रि' शब्द संख्यावाचक है। इस समास का विग्रह करते समय अन्त में 'समाहारः' शब्द जोड़ते हैं और प्रायः षष्ठी विभक्ति का प्रयोग करते हैं। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
त्रिभुवनम्त्रयाणां भुवनानां समाहारःतीन भुवनों का समूह
पञ्चगवम्पञ्चानां गवानां समाहारःपाँच गाँवों का समूह
चतुर्फलम्चतुर्णां फलानां समाहारःचार फलों का समूह
अष्टाध्यायीअष्टानाम् अध्यायानं समाहारःआठ अध्यायों के समूह वाली
पञ्चवटीपञ्चानां वटानां समाहारःपाँच वटों का समूह
पञ्चपात्रम्पञ्चानां पात्राणां समाहारःपाँच पात्रों का समूह
सप्तदिनम्सप्तानां दिनानां समाहारःसात दिनों का समूह
सप्तशतीसप्तानां शतानां समाहारःसात सौ का समूह
त्रिलोकीत्रयाणां लोकानां समाहारःतीन लोकों का समूह

बहुव्रीहि समास

सूत्र-'अनेकमन्य पदार्थे ।'

जहाँ पर अनेक पद होते हैं, परन्तु वे किसी अन्य पद के विशेषण होते हैं। इसमें अन्य पद के अर्थ की प्रधानता होती है। जिस समास में न तो पूर्व पद प्रधान होता है और न उत्तर पद, अपितु ये पद अपना स्वतन्त्र अर्थ न देकर अन्य पद के लिए विशेषण का कार्य करते हैं, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है। इसमें विग्रह करते समय 'यत्' शब्द के रूपों (यस्य, येन, यस्मै आदि) का प्रयोग किया जाता है; जैसे-पीताम्बरः-पीतम् अम्बरं यस्य सः (कृष्णः) । यहाँ पर पीत और अम्बर पदों की प्रधानता न होकर 'कृष्णः' पद की प्रधानता है और समस्त पद 'कृष्णः' का विशेषण है । | बहुव्रीहि समास के चार भेद होते हैं-

(क) समानाधिकरण बहुव्रीहि,
(ख) व्यधिकरण बहुव्रीहि,
(ग) तुल्ययोग बहुव्रीहि,
(घ) व्यतिहार बहुव्रीहि ।

(क) समानाधिकरण बहुव्रीहि- जिस समास के दोनों या अधिक पदों में समान विभक्ति हो, उसे समानाधिकरण बहुव्रीहि कहते हैं। इसका विग्रह करते समय ‘यत्' शब्द के द्वितीय, तृतीया आदि विभक्ति के रूपों का प्रयोग होता है और समस्त पद विशेषण का कार्य करता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
प्राप्तोदकःप्राप्तम् उदकं यं सः (ग्रामः)प्राप्त हो गया है जल जिसको
दत्तचित्तःदत्तं चित्तं येन सः (शिष्यः)लगाया है चित्त जिसने
जितेन्द्रियःजितानि इन्द्रियाणि येन सः (मुनिः)जीत ली हैं इन्द्रियाँ जिसने
लब्धकीर्तिःलब्धा कीर्तिः येन सः (राजा)प्राप्त कर ली है कीर्ति जिसने
पराजितशत्रुःपराजिताः शत्रवः येन सः (वीरः)पराजित कर दिये हैं शत्रु जिसने
दत्तधनःदत्तं धनं यस्मै सः (ब्राह्मणः)दिया गया है धन जिसको
दत्तराज्यःदत्तं राज्यं यस्मै सः (विभीषणः)दे दिया है राज्य जिसको
उपहृतपशुःउपहृताः पशवः यस्मै सः (ब्राह्मणः)भेंट किये हैं पशु जिसको
निर्गतबलःनिर्गतं बलं यस्मात् सः (पुरुषः)निर्कल गया है बल जिससे
निर्गतभयःनिर्गतं भयं यस्मात् सः (बालकः)निकल गया है भय जिससे
गृहीतजलागृहीतं जलं यस्याः स (नदी)ले लिया है जल जिससे
यशोधनःयश एवं धनं यस्य सः (राजायश ही है धम जिसका
लम्बकर्णःलम्बौ कर्णो यस्य सः (गर्दभः)लम्बे हैं कान जिसके
दशाननःदश आननानि यस्य सः (रावणः)दस हैं मुख जिसके
चतुर्भुजःचतस्रः भुजा यस्य सः (विष्णुः)चार हैं भुजा जिसकी
नीलकण्ठःनीलः कण्ठः यस्य सः (शिवः)नीला है कण्ठ जिसका
पीताम्बरःपीतानि अम्बाराणि स्रस्य सः (कृष्णः)पीले हैं वस्त्र जिसके

(ख) व्यधिकरण बहुव्रीहि - जिस बहुव्रीहि समास में दोनों पद अलग-अलग विभक्ति के हों, वहाँ व्यधिकरण बहुव्रीहि समास होता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
चन्द्रशेखरःचन्द्रः शेखरे यस्य सः (शिवः)चन्द्र है शेखर पर जिसके
चूड़ामणिःचूडायां मणिः यस्य सः (सर्पः)चूड़ा पर है मणि जिसके
चन्द्रचूडःचन्द्रः चूडायां यस्य सः (शिवः)चन्द्र है चूड़ा पर जिसके
चक्रपाणिःचक्रं पाणौ यस्य सः (विष्णुः)चक्र है पाणि में जिसके
गदाहस्तःगदा हस्ते यस्य सः (भीमः)गदा है हाथ में जिसके
पीयूषपाणिःपीयूषं पाणौ यस्य सः (भगवान्)पीयूष है पाणि में जिसके
धनुष्पाणिःधनुः पाणौ यस्य सः (अर्जुन)धनुष है पाणि में जिसके
बलाधिकृतःबलाय अधिकृतः यः सः (सेनापति)सेना के लिए अधिकृत

(ग) तुल्ययोग बहुव्रीहि - जब सह (स) का प्रयोग करने पर बहुव्रीहि समास होता है, तब उसे तुल्ययोग बहुव्रीहि समास कहते हैं। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
सराधिकःराधिकया सह इति (कृष्णः)राधिका के साथ
ससीतःसीतया सह इति (रामः)सीता के साथ
सपुत्रःपुत्रेण सहितः (जनकः)पुत्रसहित
सपत्नीकःपत्या सहपत्नी के साथ
सकुटुम्बःकुटुम्बेन सहकुटुम्ब के साथ
सपरिवारःपरिवारेण सहपरिवार के साथ

(घ) व्यतिहार बहुव्रीहि- जब आपस में लड़ाई का ज्ञान कराने वाले तृतीयान्त या सप्तम्यन्त पदों का प्रयोग होता है, तब व्यतिहार बहुव्रीहि समास होता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
हस्ताहस्तिहस्ताभ्यां हस्ताभ्यं प्रवृत्तं युद्धम्हाथों से प्रवृत्त हुआ युद्ध
केशाकेशिकेशेषु केशेषु गृहीत्वा प्रवृत्तं युद्धम्बालों को पकड़कर हुआ युद्ध

विशेष-उपमा के प्रतीक 'इव' पद के साथ विग्रह करने पर भी बहुव्रीहि समास होता है; जैसे-

मृगनयनीमृगस्य नयने इव नयने यस्याः सामृग के नेत्रों के समान हैं नेत्र जिसके
चन्द्रमुखीचन्द्रः इव मुख यस्याः साचन्द्रमा के समान है मुख जिसका
पाषाणहृदयःपाषाणवत् हृदयं यस्य सःपत्थर के समान है हृदय जिसका

द्वन्द्व समास

सूत्र- 'चार्थे द्वन्द्वः । उभयपदप्रधानो द्वन्द्वः ।' जिस समास में दो या अधिक पद जुड़े हुए हों और सभी पद प्रधान हों, वह द्वन्द्व समास कहलाता है। इसमें 'च' का अर्थ छिपा रहता है। विग्रह करते समय प्रत्येक पद के बाद 'च' लगाया जाता है। यह समासु तीन प्रकार का होता है-

(क) इतरेतर,
(ख) समाहार,
(ग) एकशेष ।

(क) इतरेतर द्वन्द्व- इस समास में दो या अधिक पदों का योग होता है। दो पदों के लिए द्विवचन और अधिक पदों के लिए बहुवचन का प्रयोग होता है। लिंग अन्तिम पद के समान प्रयोग किया जाता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
रामलक्ष्मणौरामश्च लक्ष्मणश्चराम और लक्ष्मण
भीमार्जुनौभीमश्च अर्जुनश्चभीम और अर्जुन
पितापुत्रौपिता च पुत्रश्चपिता और पुत्र
वागर्थोंवागश्च अर्थश्चवाणी और अर्थ
हरिहरौहरिश्च हरश्चहरि और हर
पाणिपादम्पाणी च पादौ चहाथ और पैर
धर्माथौधर्मश्च अर्थश्चधर्म और अर्थ
नरनायौंनरश्च नारी चनर और नारी
रामकृष्णौरामश्च कृष्णश्चराम और कृष्ण
बालवृद्धौबालश्च वृद्धश्चबाल और वृद्ध
राममोहनघनश्यामाःरामश्च मोहनश्च घनश्यामश्चराम, मोहन और घनश्याम
कन्दमूलफलानिकेन्द्र च मूलं च फलं चकन्द, मूल और फल
गङ्गायमुनेगङ्गा च यमुना चगङ्गा और यमुना
ब्रह्माविष्णुमहेशाःब्रह्मा च विष्णुश्च महेशश्चब्रह्मा, विष्णु और महेश
सुखदुःखौसुखं च दुःखं चसुख और दुःख
पार्वतीपरमेश्वरौपार्वती च परमेश्वरः चपार्वती और परमेश्वर
शीतोष्णम्शीतं च उष्णं चठण्डा और गर्म
अहर्निशम्अहश्च निशा चदिन और रात
धर्मार्थकाममोक्षाःधर्मश्च अर्थश्च कामश्च मोक्षश्चधर्म, अर्थ, काम और मोक्ष

(ख) समाहार द्वन्द्व- जिस समास में अनेक पदों के समूह (समाहार) का बोध होता है, उसे समाहार द्वन्द्व कहते हैं। इसमें समास करते समय नपुंसकलिंग एकवचन का प्रयोग होता है। प्राणी, वाद्य, सेना और शरीर के अंगों, स्वाभाविक वैर रखने वाले प्राणियों में यह समास होता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
शरीर के अंगों मेंपाणिपादम्पाणी च पादौ चहाथ और पैर
वाद्य के अंगों मेंभेरीपटहम्भेरी च पटहश्चभेरी और पटह
सेना के अंगों मेंरथाश्वम्रथाश्च अश्वाश्चरथ और अश्व
स्वाभाविक शत्रुताअहिनकुलम्अहिश्च नकुलश्चअहि और नकुल
अन्नवाचकगोधूमचणकम्गोधूमाश्च चणकाश्चगोधूम और चणक
नदियों के नामगङ्गाशोणम्गङ्गा च शोणश्चगंगा और शोण
नगरों के नाममथुरापाटलिपुत्रम्मथुरा च पाटलिपुत्रश्चमथुरा और पाटलिपुत्र
व्यंजन विशेषदधि घृतम्दधि च घृतम् चदधि और घृत

(ग) एकशेष द्वन्द्व- जिस सामासिक पद में समान रूप से प्रयुक्त होने वाले शब्दों (पदों) में से केवल एक पद शेष रह जाता है और अपने भाव को विभक्ति व वचन के अनुसार प्रकट करता है, वहाँ एकशेष द्वन्द्व समास होता है। उदाहरण-

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ
पितरौमाता च पिता चमाता और पिता
पुत्रौपुत्रश्च पुत्री चपुत्र और पुत्री
रामौरामश्च रामश्चराम और परशुराम
हंसौहंसश्च हंसी चहंस और हंसी
युवानौयुवा च युवती चयुवा और युवती
श्वसुरौश्वश्रू च श्वसुरः चसास और ससुर
बालकाःबालकश्च बालकश्च बालकश्चदो से अधिक बालक
भ्रातरौस्वसा च भ्राता चबहन और भाई

लघु उतरिय प्रश्ननोतर संस्कृत व्याकरण से

तत्पुरुष समास

 

Question 1. निम्नलिखित पदों में समास-विग्रह करते हुए समास का नाम बताइए उत्तर:

समस्त पदसमास-विग्रहसमास का नाम
सुखप्राप्तःसुखम् प्राप्तःद्वितीया तत्पुरुष
शरणापन्नःशरणम् आपन्नःद्वितीया तत्पुरुष
विद्याहीनःविद्या हीनःतृतीया तत्पुरुष
गुरुसदृशःगुरुणा सदृशःतृतीया तत्पुरुष
नखभिन्नःनखैः भिन्नःतृतीया तत्पुरुष
दानपात्रम्दानाय पात्रम्चतुर्थी तत्पुरुष
सिंहभयम्सिंहात् भयम्पञ्चमी तत्पुरुष
अश्वपतितःअश्वात् पतितःपञ्चमी तत्पुरुष
बन्धनमुक्तःबन्धनात् मुक्तःपञ्चमी तत्पुरुष
देवपुरुषःदेवस्य पुरुषःषष्ठी तत्पुरुष
राजपुरुषःराज्ञः पुरुषःषष्ठी तत्पुरुष
राजपुत्रःराज्ञः पुत्रःषष्ठी तत्पुरुष
रणकुशलःरणे कुशलःसप्तमी तत्पुरुष
विद्याप्रवीणःविद्यायां प्रवीणःसप्तमी तत्पुरुष
गृहनिर्गतःगृहात् निर्गतःपञ्चमी तत्पुरुष
मासपूर्वःमासेन पूर्वःतृतीया तत्पुरुष
धान्यार्थःधान्येभ्यः अर्थःचतुर्थी तत्पुरुष
वाक्कलहःवाचा कलहःतृतीया तत्पुरुष
कूपपतितःकूपम् पतितःद्वितीया तत्पुरुष
In simple words: This table provides examples of Tatpurush समास by listing the compound word, its dissolution (समास-विग्रह), and the type of Tatpurush समास it represents based on the case ending of the first word in the dissolution.

🎯 Exam Tip: Understanding the case ending of the first word in the समास-विग्रह is crucial for correctly identifying the type of Tatpurush समास.

 

Question 2. निम्नलिखित वाक्यों का हिन्दी में अनुवाद कीजिए - उपगृहं भवतो मम मन्दिरम् । संसारे सर्वे सङ्कटापन्नाः। ज्ञाने पापं न भवति । योगी निर्जनं वनमगात् । कोलाहलं नगरे न तु कानने ।
Answer: आपके घर के निकट मेरा घर है। संसार में सभी संकटों से घिरे हुए हैं। ज्ञान होने पर पाप नहीं होता है। योगी निर्जन वन को गया। कोलाहल (शोर) नगर में होता है न कि वन में।
In simple words: This question asks for the Hindi translation of five Sanskrit sentences, covering topics like personal location, worldly problems, the nature of knowledge, and a Yogi's actions.

🎯 Exam Tip: Focus on accurate translation of each word and correct grammatical structure to convey the original meaning effectively in Hindi.

 

Question 3. निम्नलिखित शब्दों में समास कीजिए उत्तरः

समास-विग्रहसमस्त पदसमास-विग्रहसमस्त पद
सुखम् आपन्नःसुखापन्नःकूपं पतितःकूपपतितः
मात्रा सदृशःमातृसदृशःपुत्राय हितम्पुत्रहितम्
बाणेन विद्धःबाणाविद्धःभ्रात्रे सुखम्भ्रातृसुखम्
मासेन पूर्वःमासपूर्वः
In simple words: This table provides several Sanskrit phrases (समास-विग्रह) and asks to combine them into single compound words (समस्त पद) using the principles of समास.

🎯 Exam Tip: Pay close attention to the implied case endings and the resulting compound form to ensure correct समास formation.

कर्मधारय समास

 

Question 1. निम्नलिखित पदों में विग्रह करते हुए समास बताइए उत्तरः

समस्त पदसमास-विग्रहसमास का नाम
महापुरुषःमहांश्चासौ पुरुषःकर्मधारय (विशेषण-विशेष्य)
सुपुरुषःसुन्दरः पुरुषःकर्मधारय (सुन्दर के अर्थ में)
शीतोष्णम्शीतं च उष्णम्उभयपद विशेषण कर्मधारय
शुक्लकृष्णःशुक्लः च कृष्णःउभयपद विशेषण कर्मधारय
देवपुरुषःदेव इव पुरुषःपूर्वपद उपमान कर्मधारय
कृष्णसारङ्गःकृष्णश्चासौ सारङ्गःविशेषण-विशेष्य कर्मधारय
समस्त पदसमास-विग्रहसमास का नाम
यशोधनम्यश एव धनम्रूपक कर्मधारय
नीललोहितःनीलः च लोहितःउभयपद विशेषण कर्मधारय
नीलोत्पलम्नीलं च यत् उत्पलम्विशेषण-विशेष्य कर्मधारय
मधुरफलम्मधुरं च यत् फलम्विशेषण-विशेष्य कर्मधारय
घनश्यामःघनः इव श्यामःपूर्वपद उपमान कर्मधारय
In simple words: This question asks to break down given compound words (समस्त पद) into their constituent parts (समास-विग्रह) and identify the specific type of Karmadharaya समास.

🎯 Exam Tip: Pay attention to whether the compound involves a simple adjective-noun relation, a comparison (उपमान-उपमेय), or an identification (रूपक) to correctly classify the Karmadharaya समास.

 

Question 2. निम्नलिखित पदों में समास कीजिए उत्तरः

समास-विग्रहसमस्त पद
महान् चासौ आत्मामहात्मा
मुखं चन्द्र इवमुखचन्द्रः
नरः सिंह इवनरसिंहः
In simple words: This question requires combining the given expanded Sanskrit phrases (समास-विग्रह) into their corresponding compound words (समस्त पद).

🎯 Exam Tip: Identify the key relationship (e.g., adjective-noun, comparison) in the विग्रह to form the correct Karmadharaya समास compound.

द्विगु समास

 

Question 1. निम्नलिखित में विग्रह निर्देश करते हुए समास बताइए उत्तरः

समस्त पदसमास-विग्रहसमास का नाम
चतुर्मुखम्चतुर्णां मुखानां समाहारःद्विगुः
नवरत्नम्नवानां रत्नानां समाहारःद्विगुः
पञ्चवटीपञ्चानां वटानां समाहारःद्विगुः
त्रिवेदम्त्रयाणां वेदानां समाहारःद्विगुः
In simple words: This table asks for the breakdown (विग्रह) of given Dvigu compounds (समस्त पद) and confirms they are Dvigu समास, characterized by a numerical first term indicating a collection.

🎯 Exam Tip: Remember that Dvigu समास always involves a numerical prefix and typically ends with 'समाहारः' in its विग्रह, signifying a collection or group.

नञ् तत्पुरुष

 

Question 1. निम्नलिखित पदों में विग्रह करते हुए समास का नाम बताइए उत्तर:

समस्त पदसमास-विग्रहसमास का नाम
अगतिःन गतिःनञ् तत्पुरुष
अकुशलःन कुशलःनञ् तत्पुरुष
अभावःन भावःनञ् तत्पुरुष
अनग्निःन अग्निःनञ् तत्पुरुष
अरुचिःन रुचिःनञ् तत्पुरुष
अविद्यान विद्यानञ् तत्पुरुष
अद्वितीयःन द्वितीयःनञ् तत्पुरुष
अनर्थम्न अर्थम्नञ् तत्पुरुष
असत्यम्न सत्यम्नञ् तत्पुरुष
अनागतःन आगतःनञ् तत्पुरुष
In simple words: This table illustrates Nanj Tatpurush समास by providing compound words, their negating dissolution (समास-विग्रह with 'न'), and confirming they are Nanj Tatpurush.

🎯 Exam Tip: Identify Nanj Tatpurush by the presence of 'अ' or 'अन्' as a prefix in the compound word, which signifies negation and translates to 'न' in the समास-विग्रह.

 

Question 2. निम्नलिखित पदों में समास कीजिए उत्तरः

समास-विग्रहसमस्त पदसमास-विग्रहसमस्त पद
न ज्ञानम्अज्ञानम्न उचितःअनुचितः
न आचारःअनाचारःन अर्थम्अनर्थम्
न प्रकाशःअप्रकाशःन मोघःअमोघः
न योग्यःअयोग्यःन सिद्धःअसिद्धः
In simple words: This question provides the dissolved forms (समास-विग्रह) of Nanj Tatpurush compounds and asks for their combined (समस्त पद) forms.

🎯 Exam Tip: When forming Nanj Tatpurush, remember to convert 'न' to 'अ' before consonants and 'अन्' before vowels, if applicable.

द्वन्द्व समास

 

Question 1. निम्नलिखित पदों में विग्रह बतलाते हुए समास बताइए उत्तरः

समस्त पदसमास-विग्रहसमास का नाम
गङ्गायमुनेगङ्गा च यमुना चइतरेतर द्वन्द्व
अहर्निशम्अहश्च निशा चसमाहार द्वन्द्व
कुशकाशम्कुशश्च काशश्चसमाहार द्वन्द्व
पुत्रपौत्रम्पुत्रश्च पौत्रश्चइतरेतर द्वन्द्व
समस्त पदसमास-विग्रहसमास का नाम
अहोरात्रःअहश्च रात्रिः चसमाहार द्वन्द्व
वृक्षाःवृक्षश्च वृक्षश्च वृक्षश्चएकशेष द्वन्द्व
पितरौमाता च पिता चएकशेष द्वन्द्व
धवखदिरौधवश्च खदिरश्चइतरेतर द्वन्द्व
ब्राह्मणौब्राह्मणः च ब्राह्मणी चएकशेष द्वन्द्व
हरिहरौहरिश्च हरश्चइतरेतर द्वन्द्व
In simple words: This question requires breaking down given Dvandva compounds into their constituent parts with 'च' (and), and then identifying the specific type of Dvandva समास (Iteretara, Samahara, or Ekasesha).

🎯 Exam Tip: Distinguish between the three types of Dvandva समास by observing if all members retain their form (Iteretara), if they combine into a singular noun (Samahara), or if one form represents multiple members (Ekasesha).

 

Question 2. निम्नलिखित पदों में समास कीजिए उत्तरः

समास-विग्रहसमस्त पदसमास-विग्रहसमस्त पद
माता च पिता चमातापितरौरथश्च अश्वश्चरथाश्वम्
दधि च घृतम् चदधिघृतम्वृक्षश्च वृक्षश्चवृक्षश्च वृक्षाः
In simple words: This question asks to form compound words (समस्त पद) from given dissolved phrases (समास-विग्रह) that typically represent Dvandva समास.

🎯 Exam Tip: When combining words for Dvandva समास, remember to apply appropriate dual or plural endings based on the number of entities and their gender, especially for Ekasesha Dvandva.

बहुव्रीहि समास

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

 

Question 1. अधोलिखित प्रश्नों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। इनमें से एक विकल्प शुद्ध है। शुद्ध विकल्प का चयन कर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए समास से क्या भाव व्यक्त होता है?
(क) पदों के मेल का
(ख) पदों के संक्षिप्तीकरण का
(ग) पदों का विस्तारीकरण का
(घ) पदों के दीर्घीकरण का
Answer: (ख) पदों के संक्षिप्तीकरण का
In simple words: समास का मुख्य उद्देश्य दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक छोटा और अर्थपूर्ण शब्द बनाना है, जिससे वाक्य संक्षिप्त और प्रभावी हो।

🎯 Exam Tip: समास के शाब्दिक अर्थ 'संक्षेप' को याद रखें, क्योंकि यह समास की मूल प्रकृति को दर्शाता है और अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।

 

Question 2. समास के कुल कितने भेद होते हैं?
(क) छः
(ख) पाँच
(ग) तीन
(घ) चार
Answer: (क) छः
In simple words: संस्कृत व्याकरण में, समास के मुख्य रूप से छह प्रकार होते हैं: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि और द्वन्द्व।

🎯 Exam Tip: सभी छह समासों के नामों को क्रमबद्ध तरीके से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी संख्या और प्रकार से संबंधित प्रश्न सामान्य होते हैं।

 

Question 3. उत्तरपद की प्रधानता और पूर्वपद की विभक्ति के लोप वाला समास कहलाता है
(क) तत्पुरुष
(ख) कर्मधारय
(ग) बहुव्रीहि
(घ) द्विगु
Answer: (क) तत्पुरुष
In simple words: तत्पुरुष समास वह होता है जिसमें उत्तरपद का अर्थ प्रमुख होता है, और समास बनाने पर पूर्वपद की विभक्तियाँ हटा दी जाती हैं।

🎯 Exam Tip: तत्पुरुष समास की पहचान के लिए 'उत्तरपद प्रधान' और 'विभक्ति लोप' इन दो प्रमुख विशेषताओं पर ध्यान दें।

 

Question 4. विभक्ति लोप के अनुसार तत्पुरुष समास के कितने भेद होते हैं?
(क) आठ
(ख) सात
(ग) पाँच
(ग) पाँच
(घ) छः
Answer: (घ) छः
In simple words: विभक्ति लोप के आधार पर तत्पुरुष समास के छह भेद होते हैं, जो द्वितीया से सप्तमी विभक्ति तक के अनुसार वर्गीकृत होते हैं।

🎯 Exam Tip: तत्पुरुष समास के भेदों को याद रखने के लिए, द्वितीया से सप्तमी तक की विभक्तियों को क्रम से दोहराएं, जिससे उनके छह प्रकार आसानी से याद रहें।

 

Question 5. 'शरणागतः' का समास-विग्रह क्या होगा?
(क) शरणाय आगतः
(ख) शरणे आगतः
(ग) शरणम् आगतः ।
(घ) शरणेषु आगतः
Answer: (ग) शरणम् आगतः
In simple words: 'शरणागतः' का समास-विग्रह 'शरणम् आगतः' है, जिसका अर्थ है 'शरण में आया हुआ', यह द्वितीय तत्पुरुष समास का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: समास-विग्रह करते समय सही विभक्ति का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है; यहाँ 'शरणम्' (द्वितीया विभक्ति) सही है क्योंकि 'आगत' क्रिया का कर्म 'शरण' है।

 

Question 6. 'चौरभयम्' में तत्पुरुष समास का कौन-सा भेद है?
(क) द्वितीया तत्पुरुष
(ख) चतुर्थी तत्पुरुष
(ग) पञ्चमी तत्पुरुष
(घ) सप्तमी तत्पुरुष
Answer: (ग) पञ्चमी तत्पुरुष
In simple words: 'चौरभयम्' का विग्रह 'चौरात् भयम्' (चोर से भय) होता है, जहाँ 'चौरात्' पंचमी विभक्ति में है, इसलिए यह पंचमी तत्पुरुष समास है।

🎯 Exam Tip: भय या डर के अर्थ में हमेशा पंचमी विभक्ति का प्रयोग होता है, इस नियम को याद रखने से पंचमी तत्पुरुष के उदाहरणों को पहचानने में मदद मिलेगी।

 

Question 7. 'न्यायनिपुणः' में तत्पुरुष समास का कौन-सा भेद है?
(क) द्वितीया तत्पुरुष
(ख) चतुर्थी तत्पुरुष
(ग) पञ्चमी तत्पुरुष,
(घ) सप्तमी तत्पुरुष
Answer: (घ) सप्तमी तत्पुरुष
In simple words: 'न्यायनिपुणः' का विग्रह 'न्याये निपुणः' (न्याय में निपुण) होता है, जहाँ 'न्याये' सप्तमी विभक्ति में है, अतः यह सप्तमी तत्पुरुष समास है।

🎯 Exam Tip: 'निपुण' (कुशल) जैसे शब्दों के साथ हमेशा सप्तमी विभक्ति का प्रयोग होता है, जो इसे सप्तमी तत्पुरुष समास का एक स्पष्ट उदाहरण बनाता है।

 

Question 8. जब समस्त पद में पूर्व पद नकारात्मक भाव व्यक्त करता है, तब कौन-सा समास होता है?
(क) कर्मधारय
(ख) अलुक् तत्पुरुष
(ग) नञ् तत्पुरुष
(घ) उपपद तत्पुरुष
Answer: (ग) नञ् तत्पुरुष
In simple words: नञ् तत्पुरुष समास में, पहला पद 'न' या 'अ' जैसे नकारात्मक अव्यय का प्रयोग करके अर्थ को निषेधात्मक बनाता है।

🎯 Exam Tip: 'अ', 'अन' या 'न' से शुरू होने वाले शब्दों को देखें, क्योंकि वे अक्सर नकारात्मकता दर्शाते हैं और नञ् तत्पुरुष समास के उदाहरण होते हैं।

 

Question 9. 'दिवंगतः' का समास-विग्रह क्या होगा?
(क) दिवाय गतः
(ख) दिवसात् गतः
(ग) दिवः गतः
(घ) दिवं गतः
Answer: (घ) दिवं गतः
In simple words: 'दिवंगतः' का सही समास-विग्रह 'दिवं गतः' है, जिसका अर्थ है 'स्वर्ग को गया हुआ', जो द्वितीय तत्पुरुष समास का एक उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: 'गत' क्रिया के साथ अक्सर द्वितीय विभक्ति का प्रयोग होता है, जैसे 'ग्रामं गत' या 'स्वर्गं गत', जो ऐसे शब्दों के विग्रह को समझने में सहायक होता है।

 

Question 10. जब समस्त पद के प्रथम पद की विभक्ति का लोप नहीं होता, तब कौन-सा समास होता है?
(क) नञ् तत्पुरुष
(ख) अलुक् तत्पुरुष
(ग) तृतीया तत्पुरुष
(घ) उपपद तत्पुरुष
Answer: (ख) अलुक् तत्पुरुष
In simple words: अलुक् तत्पुरुष समास वह होता है जिसमें समास बनाने के बाद भी पूर्वपद की विभक्ति बनी रहती है, उसका लोप नहीं होता है।

🎯 Exam Tip: 'अलुक्' का अर्थ है 'लोप न होना', इस शब्द के अर्थ को याद रखने से अलुक् तत्पुरुष समास की विशेषता को समझना आसान हो जाता है।

 

Question 11. उपपद तत्पुरुष समास में होता है
(क) सम्बोधन का लोप
(ख) समस्त पदों में उपपद क्रिया का प्रयोग
(ग) पूर्वपद की विभक्ति का लोप नहीं
(घ) प्रथम पद नकारात्मक
Answer: (ख) समस्त पदों में उपपद क्रिया का प्रयोग
In simple words: उपपद तत्पुरुष समास में, उत्तरपद एक क्रिया होती है जो पूर्वपद के साथ मिलकर एक नया अर्थ बनाती है।

🎯 Exam Tip: उपपद तत्पुरुष समास की पहचान के लिए यह याद रखें कि इसका उत्तरपद हमेशा कोई क्रियात्मक शब्द होता है, जैसे 'कुम्भकारः' में 'कार' (कृ)।

 

Question 12. 'धनहीनः' में तत्पुरुष समास का कौन-सा भेद है?
(क) तृतीया तत्पुरुष
(ख) चतुर्थी तत्पुरुष
(ग) पञ्चमी तत्पुरुष,
(घ) षष्ठी तत्पुरुष
Answer: (क) तृतीया तत्पुरुष
In simple words: 'धनहीनः' का विग्रह 'धनेन हीनः' (धन से हीन) होता है, जहाँ 'धनेन' तृतीया विभक्ति में है, अतः यह तृतीया तत्पुरुष समास है।

🎯 Exam Tip: 'हीन' (रहित) जैसे शब्दों के साथ अक्सर तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है, जो 'धनहीनः' जैसे उदाहरणों को पहचानने में मदद करता है।

 

Question 13. 'भूतबलिः' का समास-विग्रह होगा
(क) भूतेभ्यः बलिः
(ख) भूतात् बलिः
(ग) भूतं बलिः
(घ) भूतेन बलिः
Answer: (क) भूतेभ्यः बलिः
In simple words: 'भूतबलिः' का सही समास-विग्रह 'भूतेभ्यः बलिः' है, जिसका अर्थ है 'भूतों के लिए बलि', और यह चतुर्थी तत्पुरुष समास का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: 'बलि' (बलिदान) के लिए, संप्रदान कारक (चतुर्थी विभक्ति) का प्रयोग होता है, इसलिए 'भूतेभ्यः' सही विग्रह है।

 

Question 14. निम्नलिखित में से कौन पञ्चमी तत्पुरुष का उदाहरण नहीं है?
(क) धर्मभ्रष्टः
(ख) सर्पभीतः
(ग) रक्षापुरुषः
(घ) दूरादागतः
Answer: (ग) रक्षापुरुषः
In simple words: 'रक्षापुरुषः' (रक्षायै पुरुषः - रक्षा के लिए पुरुष) चतुर्थी तत्पुरुष का उदाहरण है, जबकि अन्य विकल्प (धर्मभ्रष्टः - धर्मात् भ्रष्टः, सर्पभीतः - सर्पात् भीतः, दूरादागतः - दूरात् आगतः) पंचमी तत्पुरुष के उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: पंचमी तत्पुरुष में 'से अलग होना' या 'भय' का भाव होता है, जबकि चतुर्थी तत्पुरुष में 'के लिए' का भाव होता है। विग्रह के अर्थ पर ध्यान दें।

 

Question 15. निम्नलिखित में से कौन षष्ठी तत्पुरुष का उदाहरण है?
(क) दुःखमुक्तः
(ख) स्वर्गस्य फलम्
(ग) पुत्रहितम्
(घ) धनहीनः
Answer: (ख) स्वर्गस्य फलम्
In simple words: 'स्वर्गस्य फलम्' (स्वर्ग का फल) में 'स्वर्गस्य' षष्ठी विभक्ति में है, जो संबंध दर्शाता है, अतः यह षष्ठी तत्पुरुष समास का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: षष्ठी तत्पुरुष में दो पदों के बीच 'का, के, की' का संबंध होता है, इसे पहचानने के लिए विग्रह में 'स्य', 'णाम्' जैसे प्रत्ययों पर ध्यान दें।

 

Question 16. 'विद्यायाम् कुशलः' में समास करने पर समस्त पद बनेगा? ।
(क) विद्यकुशलः
(ख) विद्याकुशलः
(ग) विद्यां कुशलः
(घ) विद्याकुशलः
Answer: (ख) विद्याकुशलः
In simple words: 'विद्यायाम् कुशलः' का अर्थ है 'विद्या में कुशल', समास करने पर यह 'विद्याकुशलः' बनता है, जहाँ सप्तमी विभक्ति का लोप होता है।

🎯 Exam Tip: समास करते समय पूर्वपद की विभक्ति का लोप होता है और शेष शब्द मिलकर एक समस्त पद बनाते हैं। वर्तनी शुद्धता पर ध्यान दें।

 

Question 17. जब समस्त पद के दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य का सम्बन्ध पाया जाता है, तब कौन-सा ' समास होता है?
(क) तत्पुरुष
(ख) अव्ययीभाव
(ग) बहुव्रीहि
(घ) कर्मधारय
Answer: (घ) कर्मधारय
In simple words: कर्मधारय समास में एक पद दूसरे पद की विशेषता बताता है, यानी एक विशेषण होता है और दूसरा विशेष्य।

🎯 Exam Tip: कर्मधारय समास को पहचानने के लिए 'कैसा' या 'क्या है जो' जैसे प्रश्न पूछें, यदि एक पद दूसरे की विशेषता बताए तो वह कर्मधारय होता है।

 

Question 18. 'कमलकोमलम्' का समास-विग्रह होगा-
(क) कमलं कोमलम्
(ख) कमलस्य कोमलम्
(ग) कमलम् इव कोमलम्
(घ) कमलाय कोमलम्
Answer: (ग) कमलम् इव कोमलम्
In simple words: 'कमलकोमलम्' का समास-विग्रह 'कमलम् इव कोमलम्' (कमल के समान कोमल) है, यह उपमान कर्मधारय समास का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: 'इव' (समान) शब्द उपमान कर्मधारय समास का मुख्य सूचक है, जो उपमेय और उपमान के बीच तुलना दर्शाता है।

 

Question 19. 'नर इव सिंहः' में समास करने पर समस्त पद क्या बनेगा?
(क) नरसिंहः,
(ख) नरिवसिंह
(ग) नरेवसिंह
(घ) नरैवसिंहः
Answer: (क) नरसिंहः
In simple words: 'नर इव सिंहः' (सिंह के समान नर) का समास करने पर 'नरसिंहः' बनता है, जो उपमान कर्मधारय समास का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: जब 'इव' जैसे तुलनात्मक शब्द का प्रयोग होता है, तो समस्त पद में 'इव' हट जाता है और दोनों पद मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं।

 

Question 20. जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह करने पर दोनों के मध्य 'च' जुड़ जाता है, वह कौन-सा समास है?
(क) द्वन्द्व
(ख) अव्ययीभाव ।
(ग) द्विगु
(घ) बहुव्रीहि
Answer: (क) द्वन्द्व
In simple words: द्वन्द्व समास वह होता है जिसमें दो या दो से अधिक पद होते हैं और सभी पद समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं, विग्रह में उनके बीच 'च' (और) आता है।

🎯 Exam Tip: द्वन्द्व समास की पहचान 'च' के प्रयोग और सभी पदों की प्रधानता से होती है, जैसे 'रामश्च लक्ष्मणश्च' (राम-लक्ष्मणौ)।

 

Question 21. द्वन्द्व समास के कुल कितने भेद हैं?
(क) पाँच
(ख) चार
(ग) तीन
(घ) दो
Answer: (ग) तीन
In simple words: द्वन्द्व समास के तीन मुख्य प्रकार होते हैं: इतरेतर, समाहार और एकशेष।

🎯 Exam Tip: द्वन्द्व समास के तीनों भेदों - इतरेतर, समाहार, एकशेष - को उनके विशिष्ट नियमों के साथ याद रखें, यह परीक्षा में सहायक होगा।

 

Question 22. 'पितरौ' किस समास का उदाहरण है?
(क) इतरेतर द्वन्द्व का
(ख) एकशेष द्वन्द्व का
(ग) समाहारे द्वन्द्व का
(घ) द्विगु का
Answer: (ख) एकशेष द्वन्द्व का
In simple words: 'पितरौ' का विग्रह 'माता च पिता च' (माता और पिता) होता है, जहाँ अनेक पदों में से केवल एक पद (पितरौ) शेष रहता है, इसलिए यह एकशेष द्वन्द्व समास है।

🎯 Exam Tip: एकशेष द्वन्द्व में, दो या अधिक पदों में से केवल एक पद बचता है जो अन्य सभी के अर्थ को भी दर्शाता है, जैसे 'हंसौ' (हंसश्च हंसी च)।

 

Question 23. 'शास्त्रप्रवीणः का विग्रह और समास का नाम होगा-
(क) शास्त्रेषु प्रवीणः, सप्तमी तत्पुरुष
(ख) शास्त्राणाम् प्रवीणः, षष्ठी तत्पुरुष
(ग) शास्त्राय प्रवीणः, चतुर्थी तत्पुरुष
(घ) शास्त्रे प्रवीणः, सप्तमी तत्पुरुष
Answer: (क) शास्त्रेषु प्रवीणः, सप्तमी तत्पुरुष
In simple words: 'शास्त्रप्रवीणः' का सही विग्रह 'शास्त्रेषु प्रवीणः' (शास्त्रों में कुशल) है, और यह सप्तमी तत्पुरुष समास का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: 'प्रवीण' (कुशल) या 'निपुण' जैसे शब्दों के साथ हमेशा सप्तमी विभक्ति का प्रयोग होता है, जो इसे सप्तमी तत्पुरुष समास के रूप में पहचानने में मदद करता है।

 

Question 24. सुन्दर और कुत्सित अर्थों में 'सु' और 'कु' का प्रयोग किस समास में होता है?
(क) षष्ठी तत्पुरुष,
(ख) कर्मधारय
(ग) अव्ययीभाव
(घ) बहुव्रीहि
Answer: (ख) कर्मधारय
In simple words: कर्मधारय समास में 'सु' (सुन्दर) और 'कु' (कुत्सित/बुरा) उपसर्गों का प्रयोग विशेषण के रूप में होता है, जैसे 'सुपुरुषः' (सुन्दरः पुरुषः) या 'कुराजा' (कुत्सितः राजा)।

🎯 Exam Tip: 'सु' और 'कु' उपसर्गों का अर्थ 'अच्छा' और 'बुरा' होता है, और जब वे किसी संज्ञा की विशेषता बताते हैं, तो वे कर्मधारय समास के अंतर्गत आते हैं।

 

Question 25. जिसे समास में अनेक पदों के समूह का बोध होता है, उसे कहते हैं
(क) समाहार द्वन्द्व
(ख) इतरेतर द्वन्द्व
(ग) द्विगु
(घ) एकशेष द्वन्द्व
Answer: (क) समाहार द्वन्द्व
In simple words: समाहार द्वन्द्व समास वह होता है जिसमें अनेक पदों का समूह या संग्रह एक इकाई के रूप में बोध कराता है, और इसका प्रयोग नपुंसकलिंग एकवचन में होता है।

🎯 Exam Tip: 'समाहार' का अर्थ है 'समूह' या 'इकट्ठा करना', यह याद रखने से समाहार द्वन्द्व की प्रकृति को समझने में आसानी होगी।

UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 5 Samas prakaran

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