UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 4 Dhatu roop prakaran

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Detailed Chapter 4 धातु रूप प्रकरण UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit

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Class 9 Sanskrit Chapter 4 धातु रूप प्रकरण UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions For Class 9 Sanskrit Chapter 4 धातु-रूप प्रकरण (व्याकरण)

जिस शब्द के द्वारा किसी काम के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं; जैसे-'रामः पुस्तकं पठति ।' इस वाक्य में 'पठति से पढ़ने के काम का बोध होता है; अतः 'पठति क्रिया है। क्रिया के मूल रूप को संस्कृत में 'धातु' कहते हैं; जैसे - रामः पुस्तकं पठति । इस वाक्य में 'पठति' क्रिया का मूल 'पद्' है; अतः 'पद्' धातु है। धातुओं में प्रत्यय जोड़ने से ही क्रिया के विभिन्न रूप बनते हैं। क्रियाएँ 'तिङ' प्रत्यय जोड़कर बनायी जाती हैं; अतः तिङन्त कहलाती हैं। संस्कृत में क्रिया का ही प्रयोग होता है, धातु का नहीं। क्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं-
(1) सकर्मक क्रिया तथा
(2) अकर्मक क्रिया।।(1) सकर्मक क्रिया- ये वे क्रियाएँ हैं, जिनका अपना कर्म होता है। समर्कक क्रिया के व्यापार को फल कर्ता को छोड़कर किसी और (कर्म) पर पड़ता है; जैसे-रामः पुस्तकं पठति । इस वाक्य में 'पठति' क्रिया के व्यापार का फल 'राम:' कर्ता को छोड़कर 'पुस्तकम्' (कर्म) पर पड़ता है; अतः 'पठति' क्रिया सकर्मक है।। क्रिया के पूर्व 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करने पर मिलने वाला उत्तर कर्म होता है। ऊपर के वाक्य में 'क्या' पढ़ता है; प्रश्न करने पर उत्तर में 'पुस्तकम्' आता है; अतः 'पुस्तकम् कर्म है और 'पठति' क्रिया, सकर्मक है।

 

(2) अकर्मक क्रिया- अकर्मक क्रिया के व्यापार का फल केवल कर्ता तक ही सीमित होता है। अकर्मक क्रियाओं का अपना कोई कर्म नहीं होता है; जैसे-रामः हसति । इस वाक्य में हसति' (हँसना) क्रिया के व्यापार का फल केवल 'रामः' कर्ता पर ही पड़ता है; अतः 'हसति' क्रिया अकर्मक है।। अकर्मक क्रिया के पूर्व 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करने से उत्तर में कुछ नहीं आता है।

लकार या काल

प्रयोग की दृष्टि से क्रियाओं की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं, संस्कृत में उन्हें लकारों द्वारा प्रकट किया जाता है। संस्कृत में प्रायः सभी कालों के प्रारम्भ में 'ल' वर्ण आता है, अतः इन्हें लकार कहते हैं। ये 10 होते हैं
1. लट् लकार (वर्तमानकाल),
2. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल),
3. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत्),
4. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत्),
5. लङ् लकार (अनद्यतन भूत),
6. लिङ् लकार (विधिलिङ) अनुमति, आज्ञा, प्रार्थना आदि अर्थ में,
7. आशीलिङ् (आशीर्वाद अर्थ में),
8. लोट् लकार (आज्ञा अर्थ में)
9. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल) तथा
10. लुङ् लकार (हेतु-हेतुमद्भूत) उम्रर्युक्त लकारों में लट्, लोट्, लङ, विधिलिङ ये चार लकार सार्वधातुक और शेष छः लकार आर्धधातुक कहलाते हैं। नवीं कक्षा के छात्रों को केवल निम्नलिखित पाँच लकारों के रूप जानना आवश्यक है
(1) लट् लकार (वर्तमानकाल)- निरन्तर होती हुई, वर्तमानकाले की क्रिया लट् लकार द्वारा बतायी जाती है।
(2) लङ् लकार - भूतकाल की क्रिया को बताने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है। यह लकार, जो कार्य आज से पहले हुआ हो, उसका बोध कराने के लिए प्रयोग किया जाता है।
(3) लृट् लकार- हिन्दी की उन क्रियाओं का, जिनके अन्त में गा, गे, गी लगे होते हैं, का अनुवाद करने के लिए भविष्यत्काल के वाक्यों में लुट् लकार का प्रयोग किया जाता है।
(4) लोट् लकार - अनुमति, निमन्त्रण, आमन्त्रण, अनुरोध, जिज्ञासा और सामर्थ्य अर्थ में लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है।
(5) विधिलिङ् लकार- उनुमति को छोड़कर शेष (निमन्त्रण, आमन्त्रण, अनुरोध, जिज्ञासा, सामर्थ्य तथा विधि) अर्थों में विधिलिङ् लकार का प्रयोग किया जाता है । :

क्रिया के पद

क्रिया के तीन पद होते हैं-
• परस्मैपद,
• आत्मनेपद तथा
• उभयपद ।।(1) परस्मैपद- क्रिया के व्यापार का परिणाम जब कर्ता को प्राप्त न होकर किसी अन्य को प्राप्त होता है तब वहाँ क्रिया के परस्मैपदी रूप का प्रयोग होता है; जैसे-पठति ।(2) आत्मनेपद- जब क्रिया के व्यापार का परिणाम कर्ता तक ही सीमित रहता है, वहाँ क्रिया का आत्मनेपदी रूप प्रयुक्त होता है; जैसे-लभते ।

 

(3) उभयपद- जिन धातुओं के 'परस्मैपदी' तथा 'आत्मनेपदी' दोनों रूप प्रसंगानुसार प्रयुक्त होते हैं, वे उभयपदी धातुएँ कहलाती हैं; जैसे-कृ-करोति, कुरुते; नी-नयति, नयते; जि- जयति, जयते ।

पुरुष

संज्ञा और सर्वनामों की तरह क्रियाओं के भी तीन पुरुष होते हैं-
• प्रथम पुरुष,
• मध्यम । पुरुष तथा
• उत्तम पुरुष ।

वचन

वन संज्ञा और सर्वनामों की तरह क्रियाओं के भी तीन वचन होते हैं-
• एकवचन,
• द्विवचन तथा
• बहुवचन ।

लिंग

लिग संस्कृत में लिंग के कारण क्रियाओं में कोई अन्तर नहीं आता।

धातुगण

उन अनेक धातुओं के समूह को गण कहते हैं, जिनमें एक विकरण प्रत्यय होता है। संस्कृत में विकरण प्रत्ययों के आधार पर समस्त धातुओं को दस गणों में विभक्त किया गया है। प्रत्येक गण का नाम उसकी प्रथम धातु के आधार पर रखा गया है; जैसे-भ्वादिगण की प्रथम धातु 'भू' (भू + आदि गण) है। दस गणों में कुल धातुओं की संख्या 1970 है। इन गणों के नाम इस प्रकार हैं
• भ्वादिगण,
• अदादिगण,
• जुहोत्यादिगण,
• दिवादिगण,
• स्वादिगण,
• तुदादिगण,
• रुधादिगण,
• तनादिगण,
• क्रयादिगण,
• चुरादिगण।

घातुओं के प्राथय

 

(3) लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअतुअताम्अन्तु
मध्यमअतम्अत
उत्तमआनिआवआम

(4) विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमएत्एताम्एयुः
मध्यमएःएतम्एत
उत्तमएयम्एवएम

(5) लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमष्यतिष्यतःष्यन्ति
मध्यमष्यसिष्यथःष्यथ
उत्तमष्यामिष्यावःष्यामः

(3) लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअताम्एताम्अन्ताम्
मध्यमअस्वएथाम्अध्वम्
उत्तमआवहैआमहै

(4) विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमएयाताम्एरन्
मध्यमएथाःएयाथाम्एध्वम्
उत्तमएयएवहिएमहि

(5) लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमस्यतेस्येतेस्यन्ते
मध्यमस्यसेस्येथेस्यध्वे
उत्तमस्येस्यावहेस्यामहे
विशेष - नवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में 'पद्, गम्, अस्, शक्, प्रच्छ' परस्मैपदी धातुओं; 'लभ्' आत्मनेपदी धातु तथा 'याच्, ग्रह, कथ्' उभयपदी धातुओं के रूप निर्धारित हैं। विद्यार्थियों के ज्ञान एवं. अनुवादोपयोगी होने के कारण कुछ अन्य प्रमुख धातु-रूपों को भी यहाँ दिया जा रहा है।

 

(1) भ्वादिगण

इस गण की प्रथम धातु 'भू' होने के कारण इस गण का नाम भ्वादिगण है। यह गण अत्यन्त विशाल है। इसमें 1035 धातुएँ हैं। इसका विकरण शप् (अ) है। इस गण की प्रत्येक धातु के सार्वधातुक लकारों में धातु के अन्त में 'अ' अवश्य जुड़ता है; जैसे - पठ् + अ + ति = पठति । धातु के अन्तिम स्वर इ-ई, उ-ऊ, ऋ का गुण (क्रमशः ए, ओ, अर्) हो जाता है तथा अन्तिम गुण के 'ए' का अय् और 'ओ' का अव् हो जाता हैं; जैसे- भू + अ + ति- भो + अ + ति- भ् + अव् + अ + ति = भवति। नी + अ + ति- ने + अ + ति- न् + अय् + अ + ति - नयति। ह + अ + अर् + अ + ति = हरति ।(1) 'भू' (होना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमभवतिभवतःभवन्ति
मध्यमभवसिभवथःभवथ
उत्तमभवामिभवावःभवामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअभवत्अभवताम्अभवन्
मध्यमअभवःअभवतम्अभवत
उत्तमअभवम्अभवावअभवाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमभवतुभवताम्भवन्तु
मध्यमभवभवतम्भवत
उत्तमभवानिभवावभवाम

 

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमभवेत्भवेताम्भवेयुः
मध्यमभवेःभवेतम्भवेत
उत्तमभवेयम्भवेवभवेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमभविष्यतिभविष्यतःभविष्यन्ति
मध्यमभविष्यसिभविष्यथःभविष्यथ
उत्तमभविष्यामिभविष्यावःभविष्यामः
(2) 'पठ्' (पढ़ना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपठतिपठतःपठन्ति
मध्यमपठसिपठथःपठथ
उत्तमपठामिपठावःपठामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअपठत्अपठताम्अपठन्
मध्यमअपठःअपठतम्अपठत
उत्तमअपठम्अपठावअपठाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपठतुपठताम्पठन्तु
मध्यमपठपठतम्पठत
उत्तमपठानिपठावपठाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपठेत्पठेताम्पठेयुः
मध्यमपठेःपठेतम्पठेत
उत्तमपठेयम्पठेवपठेम

 

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपठिष्यतिपठिष्यतःपठिष्यन्ति
मध्यमपठिष्यसिपठिष्यथःपठिष्यथ
उत्तमपठिष्यामिपठिष्यावःपठिष्यामः
(3) 'गम्' (जाना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगच्छतिगच्छतःगच्छन्ति
मध्यमगच्छसिगच्छथःगच्छथ
उत्तमगच्छामिगच्छावःगच्छामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअगच्छत्अगच्छताम्अगच्छन्
मध्यमअगच्छःअगच्छतम्अगच्छत
उत्तमअगच्छम्अगच्छावअगच्छाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगच्छतुगच्छताम्गच्छन्तु
मध्यमगच्छगच्छतम्गच्छत
उत्तमगच्छानिगच्छावगच्छाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगच्छेत्गच्छेताम्गच्छेयुः
मध्यमगच्छेःगच्छेतम्गच्छेत
उत्तमगच्छेयम्गच्छेवगच्छेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगमिष्यतिगमिष्यतःगमिष्यन्ति
मध्यमगमिष्यसिगमिष्यथःगमिष्यथ
उत्तमगमिष्यामिगमिष्यावःगमिष्यामः

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपिबेत्पिबेताम्पिबेयुः
मध्यमपिबेःपिबेतम्पिबेत
उत्तमपिबेयम्पिबेवपिबेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपास्यतिपास्यतःपास्यन्ति
मध्यमपास्यसिपास्यथःपास्यथ
उत्तमपास्यामिपास्यावःपास्यामः
(5) 'दृश्' (पश्य् = देखना) धातुः परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपश्यतिपश्यतःपश्यन्ति
मध्यमपश्यसिपश्यथःपश्यथ
उत्तमपश्यामिपश्यावःपश्यामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअपश्यत्अपश्यताम्अपश्यन्
मध्यमअपश्यःअपश्यतम्अपश्यत
उत्तमअपश्यम्अपश्यावअपश्याम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपश्यतुपश्यताम्पश्यन्तु
मध्यमपश्यपश्यतम्पश्यत
उत्तमपश्यानिपश्यावपश्याम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपश्येत्पश्येताम्पश्येयुः
मध्यमपश्येःपश्येतम्पश्येत
उत्तमपश्येयम्पश्येवपश्येम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमद्रक्ष्यतिद्रक्ष्यतःद्रक्ष्यन्ति
मध्यमद्रक्ष्यसिद्रक्ष्यथःद्रक्ष्यथ

 

उत्तमद्रक्ष्यामिद्रक्ष्यावःद्रक्ष्यामः
(4) 'पा' (पिब् = पीना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपिबतिपिबतःपिबन्ति
मध्यमपिबसिपिबथःपिबथ
उत्तमपिबामिपिबावःपिबामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअपिबत्अपिबताम्अपिबन्
मध्यमअपिबःअपिबतम्अपिबत
उत्तमअपिबम्अपिबावअपिबाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपिबतुपिबताम्पिबन्तु
मध्यमपिबपिबतम्पिबत
उत्तमपिबानिपिबावपिबाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमतिष्ठेत्तिष्ठेताम्तिष्ठेयुः
मध्यमतिष्ठे:तिष्ठेतम्तिष्ठेत
उत्तमतिष्ठेयम्तिष्ठेवतिष्ठेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमस्थास्यतिस्थास्यतःस्थास्यन्ति
मध्यमस्थास्यसिस्थास्यथःस्थास्यथ
उत्तमस्थास्यामिस्थास्यावःस्थास्यामः
(7) 'जि' (जय् = जीतना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजयतिजयतःजयन्ति
मध्यमजयसिजयथःजयथ
उत्तमजयामिजयावःजयामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअजयत्अजयताम्अजयन्
मध्यमअजयःअजयतम्अजयत
उत्तमअजयम्अजयावअजयाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजयतुजयताम्जयन्तु
मध्यमजयजयतम्जयत
उत्तमजयानिजयावजयाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजयेत्जयेताम्जयेयुः
मध्यमजयेःजयेतम्जयेत
उत्तमजयेयम्जयेवजयेम

 

(6) 'स्था' (तिष्ठ् = ठहरना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमतिष्ठतितिष्ठतःतिष्ठन्ति
मध्यमतिष्ठसितिष्ठथःतिष्ठथ
उत्तमतिष्ठामितिष्ठावःतिष्ठामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअतिष्ठत्अतिष्ठताम्अतिष्ठन्
मध्यमअतिष्ठःअतिष्ठतम्अतिष्ठत
उत्तमअतिष्ठम्अतिष्ठावअतिष्ठाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमतिष्ठतुतिष्ठताम्तिष्ठन्तु
मध्यमतिष्ठतिष्ठतम्तिष्ठत
उत्तमतिष्ठानितिष्ठावतिष्ठाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमलभेतलभेयाताम्लंर्भरन्
मध्यमलभेथाःलभेयाथाम्लभेध्वम्
उत्तमलभेयलभेवहिलभेमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमलप्स्यतेलप्स्येतेलप्स्यन्ते
मध्यमलप्स्यसेलप्स्येथेलप्स्यध्वे
उत्तमलप्स्येलप्स्यावहेलप्स्यामहे
(9) 'वृध्' (बढ़ना) धातु : आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमवर्धेवर्धेतेवर्धन्ते
मध्यमवर्धसेवर्धेथेवर्धध्वे
उत्तमवर्धेवर्धावहेवर्धामहे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअवर्धतअवर्धेताम्अवर्धन्त
मध्यमअवर्धथाःअवर्धेथाम्अवर्धध्वम्
उत्तमअवर्धेअवर्धावहिअवर्धामहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमवर्धताम्वर्धेताम्वर्धन्ताम्
मध्यमवर्धस्ववर्धेथाम्वर्धध्वम्
उत्तमवर्धेवर्धावहैवर्धामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमवर्धेतवर्धेयाताम्वर्धेरन्
मध्यमवर्धेथाःवर्धेयाथाम्वर्धेध्वम्
उत्तमवर्धेयवर्धेवहिवर्धेमहि

 

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजेष्यतिजेष्यतःजेष्यन्ति
मध्यमजेष्यसिजेष्यथःजेष्यथ
उत्तमजेष्यामिजेष्यावःजेष्यामः
(8) 'लभ्' (प्राप्त करना) धातुः आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमलभतेलभेतेलभन्ते
मध्यमलभसेलभेथेलभध्वे
उत्तमलभेलभावहेलभामहे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअलभतअलभेताम्अलभन्त
मध्यमअलभथाःअलभेथाम्अलभध्वम्
उत्तमअलभेअलभावहिअलभामहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमलभताम्लभेताम्लभन्ताम्
मध्यमलभस्वलभेथाम्लभध्वम्
उत्तमलभैलभावहैलभामहै.

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमवर्धिष्यतेवर्धिष्येतेवर्धिष्यन्ते
मध्यमवर्धिष्यसेवर्धिष्येथेवर्धिष्यध्वे
उत्तमवर्धिष्येवर्धिष्यावहेवर्धिष्यामहे
(10) 'याच्' (माँगना) धातुः उभय-परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमयाचतियाचतःयाचन्ति
मध्यमयाचसियाचथःयाचथ
उत्तमयाचामियाचावःयाचामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअयाचत्अयाचताम्अयाचन्
मध्यमअयाचःअयाचतम्अयाचत
उत्तमअयाचम्अयाचावअयाचाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमयाचतुयाचताम्याचन्तु
मध्यमयाचयाचतम्याचत
उत्तमयाचानियाचाव.याचाम

 

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमयाचेत्याचेताम्याचेयुः
मध्यमयाचेःयाचेतम्याचेत
उत्तमयाचेयम्याचेवयाचेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमयाचिष्यतियाचिष्यतःयाचिष्येन्ति
मध्यमयाचिष्यसियाचिष्यथःयाचिष्यथ
उत्तमयाचिष्यामियाचिष्यावःयाचिष्यामः
'याच्' (माँगना) धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमयाचतेयाचेतेयाचन्ते
मध्यमयाचसेयाचेथेयाचध्वे
उत्तमयाचेयाचावहेयाचामहे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअयाचतअयाचेताम्अयाचन्त
मध्यमअयाचथाःअयाचेथाम्अयाचध्वम्
उत्तमअयाचेअयाचावहिअयाचामहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमयाचताम्याचेताम्याचन्ताम्
मध्यमयाचस्वयाचेथाम्याचध्वम्
उत्तमयाचैयाचावहैयाचामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमयाचिष्यतेयाचिष्येतेयाचिष्यन्ते
मध्यमयाचिष्यसेयाचिष्येथेयाचिष्यध्वे
उत्तमयाचिष्येयाचिष्यावहेयाचिष्यामहे
(11) 'नी' (ले जाना) धातु : उभय०-परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनयतिनयतःनयन्ति
मध्यमनयसिनयथःनयथ
उत्तमनयामिनयावःनयामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअनयत्अनयताम्अनयन्
मध्यमअनयःअनयतम्अनयत
उत्तमअनयम्अनयावअनयाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनयतुनयताम्नयन्तु
मध्यमनयनयतम्नयत
उत्तमनयानिनयावनयाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनयेत्नयेताम्नयेयुः
मध्यमनयेःनयेतम्नयेत
उत्तमनयेयम्नयेवनयेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनेष्यतिनेष्यतःनेष्यन्ति
मध्यमनेष्यसिनेष्यथःनेष्यथ
उत्तमनेष्यामिनेष्यावःनेष्यामः
'नी' (नय्) धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनयतेनयेतेनयन्ते
मध्यमनयसेनयेथेनयध्वे
उत्तमनयेनयावहेनयामहे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअनयतअनयेताम्अनयन्त
मध्यमअनयथाःअनयेथाम्अनयध्वम्
उत्तमअनयेअनयावहिअनयामहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनयेतनयेयाताम्नयेरन्
मध्यमनयेथाःनयेयाथाम्नयेध्वम्
उत्तमनयेयनयेवहिनयेमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनेष्यतेनेष्येतेनेष्यन्ते
मध्यमनेष्यसेनेष्येथेनेष्यध्वे
उत्तमनेष्येनेष्यावहेनेष्यामहे

(2) अदादिगण

अदादिगण की प्रथम धातु 'अद्' है, इस कारण इस गण का नाम अदादिगण पड़ा। इस गण में कुल 72 धातुएँ हैं। इस गण का विकरण अविद्यमान 'अ' है; अतः इस गण की धातुओं और तिङ् प्रत्यय के बीच कोई विकरण नहीं जुड़ता है; जैसे - अद् + ति = अत्ति । इस गण की धातुओं में भी इ का 'ए', उ का 'ओ' तथा ऋ का 'अर्' अर्थात् गुण हो जाता है; जैसे- रुद् + इष्यति = रोदिष्यति। विधिलिङ् में 'यात्' आदि प्रत्यय जुड़ते हैं। लोट् लकार मध्यम पुरुष एकवचन में 'हि' प्रत्यय जुड़ते हैं; जैसे- अद् + हि = अॅद्धि।(12) 'अस्' (होना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअस्तिस्तःसन्ति
मध्यमअसिस्थःस्थ
उत्तमअस्मिस्वःस्मः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमआसीत्आस्ताम्आसन्
मध्यमआसीःआस्तम्आस्त
उत्तमआसम्आस्वआस्म

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअस्तु, स्तात्स्ताम्सन्तु
मध्यमएधिस्तम्स्त
उत्तमअसानिअसावअसाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमस्यात्स्याताम्स्युः
मध्यमस्याःस्यातम्स्यात
उत्तमस्याम्स्यावस्याम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमभविष्यतिभविष्यतःभविष्यन्ति
मध्यमभविष्यसिभविष्यथःभविष्यथ
उत्तमभविष्यामिभविष्यावःभविष्यामः

लङ् लकार (भूतकांल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअददात्अदत्ताम्अददुः
मध्यमअददाःअदत्तम्अदत्त
उत्तमअददाम्अदद्वअदद्म

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमददातुदत्ताम्ददतु
मध्यमदेहिदत्तम्दत्त
उत्तमददानिददावददाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमदद्यात्दद्याताम्दद्युः
मध्यमदद्याःदद्यातम्दद्यात
उत्तमदद्यामदद्यावदद्याम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमदास्यतिदास्यतःदास्यन्ति
मध्यमदास्यसिदास्यथःदास्यथ
उत्तमदास्यामिदास्यावःदास्यामः
'दा' धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमदत्तेददातेददते
मध्यमदत्सेददाथेदद्ध्वे
उत्तमददेदद्वहेदद्महे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअदत्तअददाताम्अददत
मध्यमअदत्थाःअददाथाम्अदद्ध्वम्
उत्तमअददिअदद्वहिअदद्महि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमदत्ताम्ददाताम्ददताम्
मध्यमदत्स्वददाथाम्दद्ध्वम्
उत्तमददैददावहैददामहै

 

(3) जुहोत्यादि गण

इस गण की प्रथम धातु 'हु' होने के कारण गण का नाम जुहोत्यादि गण है। इस गण में कुल 24 धातुएँ हैं। इस गण में भी धातु के बाद विकरण नहीं जुड़ता है। सार्वधातुक लकारों में धातु का द्वित्व हो जाता है। इस गण में लट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन में 'अन्ति' प्रत्यय न लगकर 'अति' प्रत्यय लगता है।(13) 'दा' (देना) धातु : उभयपदी-पर Yosemite

लट् लकार (वर्तमान काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमददातिदत्तःददति
मध्यमददासिदत्थःदत्थ
उत्तमददामिदद्वःदद्मः
(14) 'नश्' (नष्ट होना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनश्यतिनश्यतःनश्यन्ति
मध्यमनश्यसिनश्यथःनश्यथ
उत्तमनश्यामिनश्यावःनश्यामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअनश्यत्अनश्यताम्अनश्यन्
मध्यमअनश्यःअनश्यतम्अनश्यत
उत्तमअनश्यम्अनश्यावअनश्याम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनश्यतुनश्यताम्नश्यन्तु
मध्यमनश्यनश्यतम्नश्यत
उत्तमनश्यानिनश्यावनश्याम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनश्येत्नश्येताम्नश्येयुः
मध्यमनश्येःनश्येतम्नश्येत
उत्तमनश्येयम्नश्येवनश्येम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमनक्ष्यतिनक्ष्यतःनक्ष्यन्ति
मध्यमनक्ष्यसिनक्ष्यथःनक्ष्यथ
उत्तमनक्ष्यामिनक्ष्यावःनक्ष्यामः
(15) 'जन्' (जा = पैदा होना) धातु : आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमान काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजायतेजायेतेजायन्ते
मध्यमजायसेजायेथेजायध्वे
उत्तमजायेजायावहेजायामहे

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमददीतददीयाताम्ददीरन्
मध्यमददीथाःददीयाथाम्ददीध्वम्
उत्तमददीयददीवहिददीमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमदास्यतेदास्येतेदास्यन्ते
मध्यमदास्यसेदास्येथेदास्यध्वे
उत्तमदास्येदास्यावहेदास्यामहे

(4) दिवादिगण

इस गण की प्रथम धातु दिव् है; अतः इस गण का नाम 'दिवादिगण' पड़ा। इस गण में कुल 140 धातुएँ हैं। इस गण में धातु के बाद श्यन् (य) विकरण लगाया जाता है। इस गण में धातु का गुण नहीं होता।

लृट् लकार (भविष्यतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजनिष्यतेजनिष्येतेजनिष्यन्ते
मध्यमजनिष्यसेजनिष्येथेजनिष्यध्वे
उत्तमजनिष्येजनिष्यावहेजनिष्यमहे

(5) स्वादिगण

इस गण की प्रथम धातु 'सु' है; अतः इस गण का नाम 'स्वादिगण' पड़ा। इस गण में कुल 35 धातुएँ हैं। इस गण का विकरण श्नु (नु) है। सार्वधातुक लकारों में धातु में 'नु' लगाकर रूप चलते हैं; जैसे- सु + नु + ति = सुनोति। तीनों पुरुषों के एकवचन में तथा लोट् लकार उत्तम पुरुष के तीनों वचनों में 'नु' में स्थित 'उ' का 'ओ' गुण हो जाता है।(16) 'शक्' (सकना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमशक्नोतिशक्नुतःशक्नुवन्ति
मध्यमशक्नोषिशक्नुथःशक्नुथ
उत्तमशक्नोमिशक्नुवःशक्नुमः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअशक्नोत्अशक्नुताम्अशक्नुवन्
मध्यमअशक्नोःअशक्नुतम्अशक्नुत
उत्तमअशक्नुवम्अशक्नुवअशक्नुम

 

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअजायतअजायेताम्अजायन्त
मध्यमअजायथाःअजायेथाम्अजायध्वम्
उत्तमअजायेअजायावहिअजायामहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजायताम्जायेताम्जायन्ताम्
मध्यमजायस्वजायेथाम्जायध्वम्
उत्तमजायैजायावहैजायामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजायेतजायेयाताम्जायेरन्
मध्यमजायेथाःजायेयाथाम्जायेध्वम्
उत्तमजायेयजायेवहिजायेमहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमशक्नोतुशक्नुताम्शक्नुवन्तु
मध्यमशक्नुहिशक्नुतम्शक्नुत
उत्तमशक्नवानिशक्नवावशक्नवाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमशक्नुयात्शक्नुयाताम्शक्नुयुः
मध्यमशक्नुयाःशक्नुयातम्शक्नुयात
उत्तमशक्नुयाम्शक्नुयावशक्नुयाम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमशक्ष्यतिशक्ष्यतःशक्ष्यन्ति
मध्यमशक्ष्यसिशक्ष्यथःशक्ष्यथ
उत्तमशक्ष्यामिशक्ष्यावःशक्ष्यामः
(17) 'आप्' (प्राप्त करना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमआप्नोतिआप्नुतःआप्नुवन्ति
मध्यमआप्नोषिआप्नुथःआप्नुथ
उत्तमआप्नोमिआप्नुवःआप्नुमः

 

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमआप्नोत्आप्नुताम्आप्नुवन्
मध्यमआप्नोःआप्नुतम्आप्नुत
उत्तमआप्नवम्आप्नुवआप्नुम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमआप्नोतुआप्नुताम्आप्नुवन्तु
मध्यमआप्नुहिआप्नुतम्आप्नुत
उत्तमआप्नवानिआप्नवावआप्नवाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमआप्नुयात्आप्नुयाताम्आप्नुयुः
मध्यमआप्नुयाःआप्नुयातम्आप्नुयात
उत्तमआप्नुयाम्आप्नुयावआप्नुयाम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमआप्स्यतिआप्स्यतःआप्स्यन्ति
मध्यमआप्स्यसिआप्स्यथःआप्स्यथ
उत्तमआप्स्यामिआप्स्यावःआप्स्यामः

(6) तुदादिगण

इस गण की प्रथम धातु 'तुद्' है; अतः इस गण का नाम 'तुदादिगण' है। इसमें कुल 157 धातुएँ हैं। इस गण का विकरण श (अ) है; अतः धातु और प्रत्यय के बीच 'अ' जोड़ दिया जाता है; जैसे-तुद् + अ + ति = तुदति। इस गण में धातु की उपधा तथा अन्त के स्वर का गुण नहीं होता है। इस गण में इ-ई का ईय, उ-ऊ का उव् तथा ऋ का रिय् हो जाता है।(18) 'इष्' (इच्छा करना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमइच्छतिइच्छतःइच्छन्ति
मध्यमइच्छसिइच्छथःइच्छथ
उत्तमइच्छामिइच्छावःइच्छामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमऐच्छत्ऐच्छताम्ऐच्छन्
मध्यमऐच्छःऐच्छतम्ऐच्छत
उत्तमऐच्छम्ऐच्छावऐच्छाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमइच्छतुइच्छताम्इच्छन्तु
मध्यमइच्छइच्छतम्इच्छत
उत्तमइच्छानिइच्छावइच्छाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमइच्छेत्इच्छेताम्इच्छेयुः
मध्यमइच्छेःइच्छेतम्इच्छेत
उत्तमइच्छेयम्इच्छेवइच्छेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमएषिष्यतिएषिष्यतःएषिष्यन्ति
मध्यमएषिष्यसिएषिष्यथःएषिष्यथ
उत्तमएषिष्यामिएषिष्यावःएषिष्यामः
(19) 'प्रच्छ' (पृच्छ-पूछना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपृच्छतिपृच्छतःपृच्छन्ति
मध्यमपृच्छसिपृच्छथःपृच्छथ
उत्तमपृच्छामिपृच्छावःपृच्छामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअपृच्छत्अपृच्छताम्अपृच्छन्
मध्यमअपृच्छःअपृच्छतम्अपृच्छत
उत्तमअपृच्छम्अपृच्छावअपृच्छाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपृच्छतुपृच्छताम्पृच्छन्तु
मध्यमपृच्छपृच्छतम्पृच्छत
उत्तमपृच्छानिपृच्छावपृच्छाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमपृच्छेत्पृच्छेताम्पृच्छेयुः
मध्यमपृच्छेःपृच्छेतम्पृच्छेत
उत्तमपृच्छेयम्पृच्छेवपृच्छेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमप्रक्ष्यतिप्रक्ष्यतःप्रक्ष्यन्ति
मध्यमप्रक्ष्यसिप्रक्ष्यथःप्रक्ष्यथ
उत्तमप्रक्ष्यामिप्रक्ष्यावःप्रक्ष्यामः
(20) 'लिख्' (लिखना) धातु : परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमलिखतिलिखतःलिखन्ति
मध्यमलिखसिलिखथःलिखथ
उत्तमलिखामिलिखावःलिखामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअलिखत्अलिखताम्अलिखन्
मध्यमअलिखः'अलिखतम्अलिखत
उत्तमअलिखम्अलिखावअलिखाम

(7) रुधादिगण

इस गण की प्रथम धातु 'रुध्’ है; इसलिए इस गण का नाम 'रुधादिगण' प्रचलित हुआ। इस गण में कुल 25 धातुएँ हैं।

(21) 'रुध्' (रोकना) धातु : उभय०-परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमरुणद्धिरुन्धःरुन्धन्ति
मध्यमरुणत्सिरुन्धःरुन्ध
उत्तमरुणध्मिरुन्ध्वःरुन्ध्मः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअरुणत्अरुन्धाम्अरुन्धन्
मध्यमअरुणःअरुन्धम्अरुन्ध
उत्तमअरुणधम्अरुन्ध्वअरुन्ध्म

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमरुणछुरुन्धाम्रुन्धन्तु
मध्यमरुन्धिरुन्धम्रुन्ध
उत्तमरुणधानिरुणधावरुणधाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमरुन्ध्यात्रुन्ध्याताम्रुन्ध्युः
मध्यमरुन्ध्याःरुन्ध्यातम्रुन्ध्यात
उत्तमरुन्ध्याम्रुन्ध्यावरुन्ध्याम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमरोत्स्यतिरोत्स्यतःरोत्स्यन्ति
मध्यमरोत्स्यसिरोत्स्यथःरोत्स्यथ
उत्तमरोत्स्यामिरोत्स्यावःरोत्स्यामः

'रुध्' (रोकना) धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमरुन्धेरुन्धातेरुन्धते
मध्यमरुन्त्सेरुन्धाथेरुन्ध्वे
उत्तमरुन्धेरुन्ध्वहेरुन्ध्महे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअरुन्धअरुन्धाताम्अरुन्धन्
मध्यमअरुन्धाःअरुन्धाथाम्अरुन्ध्वम्
उत्तमअरुन्धिअरुन्ध्वहिअरुन्ध्महि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमरुन्धाम्रुन्धाताम्रुन्धताम्
मध्यमरुन्त्स्वरुन्धाथाम्रुन्ध्वम्
उत्तमरुणधैरुणधावहैरुणधामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमरुन्धीतरुन्धीयाताम्रुन्धीरन्
मध्यमरुन्धीथाःरुन्धीयाथाम्रुन्धीध्वम्
उत्तमरुन्धीयरुन्धीवहिरुन्धीमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमरोत्स्यतेरोत्स्येतेरोत्स्यन्ते
मध्यमरोत्स्यसेरोत्स्येथेरोत्स्यध्वे
उत्तमरोत्सेरोत्स्यावहेरोत्स्यामहे

(8) तनादिगण

इस गण की प्रथम धातु 'तन्' है; अतः इस गण का नाम 'तनादिगण' पड़ा। इस गण में केवल 10 धातुएँ हैं। इस गण में सार्वधातुक लकारों में 'उ' विकरण जोड़ा जाता है; उदाहरणार्थ - तन् + उ + ति = तनोति। सार्व- धातुक लकारों में तीनों पुरुषों के एकवचन में तथा लोट् लकार के उत्तम पुरुष के तीनों वचनों में 'उ' के स्थान पर ओ (गुण) हो जाता है।

(22) 'कृ' (करना) धातु : उभय०-परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकरोतिकुरुतःकुर्वन्ति
मध्यमकरोषिकुरुथःकुरुथ
उत्तमकरोमिकुर्वःकुर्मः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअकरोत्अकुरुताम्अकुर्वन्
मध्यमअकरोःअकुरुतम्अकुरुत
उत्तमअकरवम्अकुर्वअकुर्म

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकरोतुकुरुताम्कुर्वन्तु
मध्यमकुरुकुरुतम्कुरुत
उत्तमकरवाणिकरवावकरवाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकुर्यात्कुर्याताम्कुर्युः
मध्यमकुर्याःकुर्यातम्कुर्यात
उत्तमकुर्याम्कुर्यावकुर्याम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकरिष्यतिकरिष्यतःकरिष्यन्ति
मध्यमकरिष्यसिकरिष्यथःकरिष्यथ
उत्तमकरिष्यामिकरिष्यावःकरिष्यामः

'कृ' (करना) धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकुरुतेकुर्वातेकुर्वते
मध्यमकुरुषेकुर्वाथेकुरुध्वे
उत्तमकुर्वेकुर्वहेकुर्महे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअकुरुतअकुर्वाताम्अकुर्वत
मध्यमअकुरुथाःअकुर्वाथाम्अकुरुध्वम्
उत्तमअकुर्विअकुर्वहिअकुर्महि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकुरुताम्कुर्वाताम्कुर्वताम्
मध्यमकुरुध्वकुर्वाथाम्कुरुध्वम्
उत्तमकरवैकरवावहैकरवामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकुर्वीतकुर्वीयाताम्कुर्वीरन्
मध्यमकुर्वीथाःकुर्वीयाथाम्कुर्वीध्वम्
उत्तमकुर्वीयकुर्वीवहिकुर्वीमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकरिष्यतेकरिष्येतेकरिष्यन्ते
मध्यमकरिष्यसेकरिष्येथेकरिष्यध्वे
उत्तमकरिष्येकरिष्यावहेकरिष्यामहे

(9) क्रयादिगण

इस गण की प्रथम धातु 'क्री' है; अतः इस गण का नाम 'क्रयादिगण' पड़ा। इस गण में कुल 61 धातुएँ हैं। इस गण का विकरण श्ना (ना) है; अतः धातु और प्रत्यय के बीच में 'ना' जोड़ दिया जाता है; जैसे- क्री + ना + ति = क्रीणाति।

(23) 'ग्रह' (पकड़ लेना) धातु : उभय०-परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगृह्णातिगृह्णीतःगृह्णन्ति
मध्यमगृह्णासिगृह्णीथःगृह्णीथ
उत्तमगृह्णामिगृह्णीवःगृह्णीमः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअगृह्णात्अगृह्णीताम्अगृह्णन्
मध्यमअगृह्णाःअगृह्णीतम्अगृह्णीत
उत्तमअगृह्णाम्अगृह्णीवअगृह्णीम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगृह्णातुगृह्णीताम्गृह्णन्तु
मध्यमगृह्णागृह्णीतम्गृह्णीत
उत्तमगृह्णाानिगृह्णावगृह्णाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगृह्णीयात्गृह्णीयाताम्गृह्णीयुः
मध्यमगृह्णीयाःगृह्णीयातम्गृह्णीयात
उत्तमगृह्णीयाम्गृह्णीयावगृह्णीयाम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमग्रहीष्यतिग्रहीष्यतःग्रहीष्यन्ति
मध्यमग्रहीष्यसिग्रहीष्यथःग्रहीष्यथ
उत्तमग्रहीष्यामिग्रहीष्यावःग्रहीष्यामः

'ग्रह्' (पकड़ना, लेना) धातु : उभय०-आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगृह्णीतेगृह्णातेगृह्णन्ते
मध्यमगृह्णीषेगृह्णाथेगृह्णीध्वे
उत्तमगृह्णेगृह्णीवहेगृणीमहे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअगृह्णीतअगृह्णाताम्अगृह्णत
मध्यमअगृह्णीथाःअगृह्णाथाम्अगृह्णीध्वम्
उत्तमअगृहिणअगृह्मणीवहिअगृह्णीमहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगृह्णीताम्गृह्णाताम्गृह्णताम्
मध्यमगृह्णीष्वगृह्णाथाम्गृह्णीध्वम्
उत्तमगृह्णैगृह्णावहैगृह्णामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगृह्णीतगृह्णीयाताम्गृह्णीरन्
मध्यमगृह्णीथाःगृह्णीयाथाम्गृह्णीध्वम्
उत्तमगृह्णीयगृह्णीवहिगृणीमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमग्रहीष्यतेग्रहीष्येतेग्रहीष्यन्ते
मध्यमग्रहीष्यसेग्रहीष्येथेग्रहीष्यध्वे
उत्तमग्रहीष्येग्रहीष्यावहेग्रहीष्यामहे

(24) 'ज्ञा' (जा = जानना) धातु : उभय०-पर परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजानातिजानीतःजानन्ति
मध्यमजानासिजानीथःजानीथ
उत्तमजानामिजानीवःजानीमः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअजानात्अजानीताम्अजानन्
मध्यमअजानाःअजानीतम्अजानीत
उत्तमअजानाम्अजानीवअजानीम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषএকवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजानातुजानीताम्जानन्तु
मध्यमजानीहिजानीतम्जानीत
उत्तमजानानिजानावेजानाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजानीयात्जानीयाताम्जानीयुः
मध्यमजानीयाःজानीयातम्जानीयात
उत्तमजानीयाम्जानीयावजानीयाम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजानीतेजानातेजानते
मध्यमजानीषेजानाथेजानीध्वे
उत्तमजानेजानीवहेजानीमहे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअजानीतअजानाताम्अजानत
मध्यमअजानीथाःअजानाथाम्अजानीध्वम्
उत्तमअजानिअजानीवहिअजानीमहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजानीताम्जानाताम्जानताम्
मध्यमजानीष्वजानाथाम्जानीध्वम्
उत्तमजानैजानावहैजानामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजानीतजानीयाताम्जानीरन्
मध्यमजानीथाःजानीयाथाम्जानीध्वम्
उत्तमजानीयजानीवहिजानीमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमज्ञास्यतेज्ञास्येतेज्ञास्यन्ते
मध्यमज्ञास्यसेज्ञास्येथेज्ञास्यध्वे
उत्तमज्ञास्येज्ञास्यावहेज्ञास्यामहे

(10) चुरादिगण

इस गण की प्रथम धातु 'चुर्' है; अतः इस गण का नाम 'चुरादिगण' है। इस गण में कुल 411 धातुएँ हैं। इस गण की धातुओं और प्रत्ययों के बीच 'अय' विकरण जोड़ दिया जाता है; जैसे - चुर् + अय + ति = चोरयति। इस गण की धातुओं में इ, उ, ऋ का गुण हो जाता है। यदि उपधा (किसी शब्द के अन्तिम अक्षर के पहले का अक्षर) के 'अ' की, जिसके बाद संयुक्त व्यंजन न हो, उसकी और अन्तिम स्वर की वृद्धि हो जाती है; जैसे- क्षल्-क्षालयति, तड्-ताडयति। आकारान्त धातुओं में 'आ' के बाद प् और लग जाता है।

(25) 'चुर्' (चुराना) धातु : उभय०-पर परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमचोरयतिचोरयतःचोरयन्ति
मध्यमचोरयसिचोरयथःचोरयथ
उत्तमचोरयामिचोरयावःचोरयामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअचोरयत्अचोरयताम्अचोरयन्
मध्यमअचोरयःअचोरयतम्अचोरयत
उत्तमअचोरयम्अचोरयावअचोरयाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमचोरयतुचोरयताम्चोरयन्तु
मध्यमचोरयचोरयतम्चोरयत
उत्तमचोरयाणिचोरयावचोरयाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमचोरयेत्चोरयेताम्चोरयेयुः
मध्यमचोरयेःचोरयेतम्चोरयेत
उत्तमचोरयेयम्चोरयेवचोरयेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमचोरयिष्यतिःचorयिष्यतःचorयिष्यन्ति
मध्यमचोरयिष्यसिचोरयिष्यथःचोरयिष्यथ
उत्तमचोरयिष्यामिचोरयिष्यावःचोरयिष्यामः

'चुर्' (चुराना) धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमचोरयतेचोरयेतेचोरयन्ते
मध्यमचोरयसेचोरयेथेचोरयध्वे
उत्तमचोरयेचोरयावहेचोरयामहे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअचोरयतअचोरयेताम्अचोरयन्त
मध्यमअचोरयथाःअचोरयेथाम्अचोरयध्वम्
उत्तमअचोरयेअचोरयावहिअचोरयामहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमचोरयताम्चोरयेताम्चोरयन्ताम्
मध्यमचोरयस्वचोरयेथाम्चोरयध्वम्
उत्तमचोरयैचोरयावहैचोरयामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमचोरयेतचोरयेताम्चोरयेरन्
मध्यमचोरयेथाःचोरयेथाम्चोरयेध्वम्
उत्तमचोरयेयचोरयेवहिचोरयेमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमचोरयिष्यतेचोरयिष्येतेचोरयिष्यन्ते
मध्यमचोरयिष्यसेचोरयिष्येथेचोरयिष्यध्वे
उत्तमचोरयिष्येचोरयिष्यावहेचोरयिष्यामहे

(26) 'कथ्' (कहना) धातु : उभय०-परस्मैपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकथयतिकथयतःकथयन्ति
मध्यमकथयसिकथयथःकथयथ
उत्तमकथयामिकथयावःकथयामः

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअकथयत्अकथयताम्अकथयन्
मध्यमअकथयःअकथयतम्अकथयत
उत्तमअकथयम्अकथयावअकथयाम

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकथयतुकथयताम्कथयन्तु
मध्यमकथयकथयतम्कथयत
उत्तमकथयानिकथयावकथयाम

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकथयेत्कथयेताम्कथयेयुः
मध्यमकथयेःकथयेतम्कथयेत
उत्तमकथयेयम्कथयेवकथयेम

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकथयिष्यतिकथयिष्यतःकथयिष्यन्ति
मध्यमकथयिष्यसिकथयिष्यथःकथयिष्यथ
उत्तमकथयिष्यामिकथयिष्यावःकथयिष्यामः

'कथ्' (कहना) धातु : उभय०-आत्मनेपदी

लट् लकार (वर्तमानकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकथयतेकथयेतेकथयन्ते
मध्यमकथयसेकथयेथेकथयध्वे
उत्तमकथयेकथयावहेकथयामहे

लङ् लकार (भूतकाल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअकथयतअकथयेताम्अकथयन्त
मध्यमअकथयथाःअकथयेथाम्अकथयध्वम्
उत्तमअकथयेअकथयावहिअकथयामहि

लोट् लकार (आज्ञार्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकथयताम्कथयेताम्कथयन्ताम्
मध्यमकथयस्वकथयेथाम्कथयध्वम्
उत्तमकथयैकथयावहैकथयामहै

विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकथयेतकथयेयाताम्कथयेरन्
मध्यमकथयेथाःकथयेयाथाम्कथयेध्वम्
उत्तमकथयेयकथयेवहिकथयेमहि

लृट् लकार (भविष्यत्काल)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमकथयिष्यतेकथयिष्येतेकथयिष्यन्ते
मध्यमकथयिष्यसेकथयिष्येथेकथयिष्यध्वे
उत्तमकथयिष्येकथयिष्यावहेकथयिष्यामहे

संक्षिप्त धातु-रूप

यहाँ पर प्रसिद्ध एवं प्रचलित 235 धातुओं के पाँच लकारों के प्रथम पुरुष एकवचन के रूप दिये जा रहे हैं। धातु का अर्थ एवं गण धातु के साथ अंकित कर दिया गया है। धातु के पूरे रूप क्रिया-प्रकरण में गण की अन्य धातुओं के समान बना लेने चाहिए। ये छात्रों को अनुवाद हेतु उपयोगी सिद्ध होंगे।

(क) परस्मैपदी धातुएँ

प्रथम गण (भ्वादिगण)

धातुअर्थलट् लकारलङ् लकारलोट् लकारविधिलिङ् लकारलृट् लकार
अट्घूमनाअटतिआटत्अटतुअटेत्अटिष्यति
अर्च्पूजना.अर्चतिआर्चत्अर्चतुअर्चेत्अर्चिष्यति
अव्रक्षा करनाअवतिआवत्अवतुअवेत्अविष्यति
ईर्ष्यूईर्ष्या करनाईर्ष्यतिऐर्व्यत्ईर्ष्यातुईष्येंतुईर्षिष्यति
जानाऋच्छतिआच्छेत्ऋच्छतुऋच्छेत्ऋच्छिष्यति
काङ्क्ष्चाहनाकाङ्क्षतिअकाङ्क्षत्काङ्क्षतुकाङ्क्षेत्काङ्क्षिष्यति
कूज्चूँ-चूँ करनाकूजतिअकूजत्कूजतुकूजेत्कूजिष्यति
कृष्जोतनाकर्षतिअकर्षत्कर्षतुकर्षेत्कर्क्ष्यति
क्रीड्खेलनाक्रीडतिअक्रीडत्क्रीडतुक्रीडेत्क्रीडिष्यति
क्षिनष्ट होनाक्षयतिअक्षयत्क्षयतुक्षयेत्क्षयिष्यति
खन्खोदनाखनतिअखनत्खनतुखनेत्खनिष्यति
खाद्खानाखादतिअखादत्खादतुखादेत्खादिष्यति
खेल्खेलनाखेलतिअखेलत्खेलतुखेलेत्खेलिष्यति
गद्कहनागदतिअगदत्गदतुगदेत्गदिष्यति
गम्जानागच्छतिअगच्छत्गच्छतुगच्छेत्गमिष्यति
गर्ज्गरजनागर्जतिअगर्जत्गर्जतुगर्जेत्गर्जिष्यति
गैगानागायतिअगायत्गायतुगायेत्गास्यति
घ्रासूँघनाजिघ्रतिअजिघ्रत्जिघ्रतुजिघ्रेत्घ्रास्यति
चर्चरनाचरतिअचरत्चरतुचरेत्चरिष्यति
चल्चलनाचलतिअचलत्चलतुचलेत्चलिष्यति
जप्जपनाजपतिअजपत्जपतुजपेत्जपिष्यति
जिजीतनाजयतिअजयत्जयतुजयेत्जेष्यति
जीव्जीनाजीवतिअजीवत्जीवतुजीवेत्जीविष्यति
ज्वल्जलनाज्वलतिअज्वलत्ज्वलतुज्वलेत्ज्वलिष्यति
तप्तप करनातपतिअतपत्तपतुतपेत्तप्स्यति
तृतैरना.तरतिअतरत्तरतुतरेत्तरिष्यति
त्यज्छोड़नात्यजतिअत्यजत्त्यजतुत्यजेत्त्यक्ष्यति
दा.देनायच्छतिअयच्छतयच्छत्यच्छेत्दास्यति
दहजलनादहतिअदहत्दहतुदहेत्धक्ष्यति
दृश्देखनापश्यतिअपश्यत्पश्यतुपश्येत्द्रक्ष्यति
धाव्दौड़नाधावतिअधावत्धावतुधावेत्धाविष्यति
धृरखनाधरतिअधरत्धरतुधरेत्धरिष्यति
ध्यैध्यान रखनाध्यायतिअध्यायत्ध्यायतुध्यायेत्ध्यास्यति
नन्द्प्रसन्न होनानन्दतिअनन्दत्नन्दतुनन्देत्नन्दिष्यति
नम्नमस्कार करनानमतिअनमत्नमतुनमेत्नंस्यति
निन्द्निन्दा करनानिन्दतिअनिन्दत्निन्दतुनिन्देत्निन्दिष्यति
नीले जानानयतिअनयत्नयतुनयेत्नेष्यति
पच्पकानापचतिअपचत्पचतुपचेत्पक्ष्यति
पठ्पढ़नापठतिअपठत्पठतुपठेत्पठिष्यति
पत्गिरनापततिअपतत्पततुपतेत्पतिष्यति
पापीनापिबतिअपिबत्पिबतुपिबेत्पास्यति
फल्फलनाफलतिअफलत्फलतुफलेत्फलिष्यति
भज्सेवा करनाभजतिअभजत्भजतुभजेत्भक्ष्यति
भूहोनाभवतिअभवत्भवतुभवेत्भविष्यति
भ्रम्घूमनाभ्रमतिअभ्रमत्भ्रमतुभ्रमेत्भ्रमिष्यति
मूर्छ्मूच्छित होनामूच्र्छतिअमूर्च्छत्मूर्च्छतुमूच्छेतमूच्छिष्यति
यज्यज्ञ करनायजतिअयजत्यजतुयजेत्यक्ष्यति
याच्माँगनायाचतिअयाचत्याचतुयाचेत्याचिष्यति
रक्षरक्षा करनारक्षतिअरक्षत्रक्षतुरक्षेत्रक्षिष्यति
रहउगनारोहतिअरोहत्रोहतुरोहेत्रोक्ष्यति
लप्बोलनालपतिअलपत्लपतुलपेत्लपिष्यति
वद्बोलनावदतिअवदत्वदतुवदेत्वदिष्यति
वप्बोनावपतिअवपत्वपतुवपेत्वप्स्यति
वस्रहनावसतिअवसत्वसतुवसेत्वत्स्यति
वहढोनावहतिअवहत्वहतुवहेत्वक्ष्यति
वाञ्छ्चाहनावाञ्छतिअवाञ्छत्वाञ्छतुवाञ्छेत्वाञ्छिष्यति
वृष्बरसनावर्षतिअवर्षत्वर्षतुवर्षेत्वर्षिष्यति
व्रज्जानाव्रजतिअव्रजत्व्रजतुव्रजेत्व्रजिष्यति
शंस्प्रशंसा करनाशंसतिअशंसत्शंसतुशंसेत्शंसिष्यति
श्रिआश्रय लेनाश्रयतिअश्रयत्श्रयतुश्रयेत्श्रयिष्यति
सद्बैठनासीदतिअसीदत्सीदतुसीदेत्सत्स्यति
सृसरकनासरतिअसरत्सरतुसरेत्सरिष्यति
स्थाठहरनातिष्ठतिअतिष्ठत्तिष्ठतुतिष्ठेत्स्थास्यति
स्मृयाद करनास्मरतिअस्मरत्स्मरतुस्मरेत्स्मरिष्यति
हस्हँसनाहसतिअहसत्हसतुहसेत्हसिष्यति
आ + ह्वेबुलानाआह्वयतिआह्वयत्आह्वयतुआह्वयेत्आह्वस्यति

द्वितीय गण (अदादिगण)

धातुअर्थलट् लकारलङ् लकारलोट् लकारविधिलिङ् लकारलृट् लकार
अद्खानाअत्तिआदत्अत्तुअद्यात्अत्स्यति
अस्होनाअस्तिआसीत्अस्तुस्यात्भविष्यति
जानाएतिऐत्एतुइयात्एष्यति
जागृजागनाजागर्तिअजागत्जागर्तुजागृयात्जागरिष्यति
दुह्दुहनादोग्धिअधोक्दोग्धुदुह्यात्धोक्ष्यति
पारक्षा करनापातिअपात्पातुपायात्पास्यति
ब्रूबोलनाब्रवीतिअब्रवीत्ब्रवीतुब्रूयात्वक्ष्यति
भाचमकनाभातिअभात्भातुभायात्भास्यति
याजानायातिअयात्यातुयायात्यास्यति
रुद्रोनारोदितिअरोदीत्रोदितुरुद्यात्रोदिष्यति
विद्जाननावेतिअवेत्वेत्तुविद्यात्वेदिष्यति
शास्शिक्षा देनाशास्तिअशात्शासतुशिष्यात्शासिष्यति
स्तुस्तुति करनास्तौतिअस्तौत्स्तौतुस्तुयात्स्तोष्यति
स्नानहानास्नातिअस्नात्स्नातुस्नायात्स्नास्यति
स्वप्सोनास्वपितिअस्वपीत्स्वपितुस्वप्यात्स्वप्स्यति
हन्मारनाहन्तिअहन्हन्तुहन्यात्हनिष्यति

वस्तनिष्ठ प्रश्नोत्तर

अधोलिखित प्रश्नों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। इनमें से एक विकल्प शुद्ध है। शुद्ध विकल्प का चयन कर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए-

 

Question 1. वर्तमानकाल के लिए किस लकार का प्रयोग किया जाता है?
(क) विधिलिङ् लकार का
(ख) लट् लकार का
(ग) लृट् लकार का
(घ) लङ् लकार का
Answer: (ख) लट् लकार का
In simple words: वर्तमान काल को व्यक्त करने के लिए संस्कृत में 'लट् लकार' का प्रयोग किया जाता है। यह वर्तमान में हो रही क्रियाओं को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: लकार का सही काल से मिलान करना व्याकरण के आधारभूत प्रश्नों में से एक है। विशेष रूप से वर्तमान (लट्), भूत (लङ्) और भविष्य (लृट्) काल के लकारों को याद रखें।

 

Question 2. लङ् लकार किस काल को प्रदर्शित करता है?
(क) वर्तमानकाल को ।
(ख) भविष्यत्काल को ।
(ग) भूतकाल को
(घ) किसी काल को नहीं
Answer: (ग) भूतकाल को
In simple words: संस्कृत में 'लङ् लकार' का प्रयोग उन क्रियाओं को दर्शाने के लिए किया जाता है जो भूतकाल में घटित हो चुकी हैं।

🎯 Exam Tip: लङ् लकार की पहचान अक्सर क्रिया के पूर्व 'अ' उपसर्ग से होती है, जैसे 'अपठत्'। यह भूतकाल की क्रियाओं को व्यक्त करने का मानक तरीका है।

 

Question 3. विधिलिङ् लकार का प्रयोग किस प्रकार के वाक्यों में होता है?
(क) आज्ञा अर्थ के वाक्यों में
(ख) चाहिए अर्थ के वाक्यों में
(ग) भविष्यत्काल के वाक्यों में ।
(घ) इच्छा अर्थ के वाक्यों में
Answer: (ख) चाहिए अर्थ के वाक्यों में
In simple words: 'विधिलिङ् लकार' का उपयोग चाहिए, सलाह, विधि या संभावना जैसे भावों को व्यक्त करने वाले वाक्यों में होता है।

🎯 Exam Tip: 'चाहिए' अर्थ के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग सबसे आम है, लेकिन इसे अनुमति, आमंत्रण और अनुरोध जैसे अन्य विध्यर्थक भावों के लिए भी याद रखें।

 

Question 4. आज्ञा अर्थ में कौन-सा लकार प्रयुक्त होता है?
(क) लोट् लकार
(ख) लङ् लकार
(ग) विधिलिङ् लकार
(घ) लृट् लकार
Answer: (क) लोट् लकार
In simple words: आज्ञा, आदेश या प्रार्थना के भाव को व्यक्त करने के लिए संस्कृत में 'लोट् लकार' का प्रयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: लोट् लकार का उपयोग कमांड या अनुरोध करने के लिए किया जाता है। इसके रूपों को पहचानना महत्वपूर्ण है, जैसे 'पठतु' (वह पढ़े)।

 

Question 5. लकार कुल कितने प्रकार के होते हैं?
(क) आठ
(ख) पाँच
(ग) सात
(घ) दस
Answer: (घ) दस
In simple words: संस्कृत व्याकरण में कुल दस प्रकार के लकार होते हैं, जो क्रिया के काल, अवस्था और मनोदशा को दर्शाते हैं।

🎯 Exam Tip: हालांकि संस्कृत में दस लकार होते हैं, छात्रों को आमतौर पर पाठ्यक्रम के लिए केवल पाँच प्रमुख लकारों (लट्, लङ्, लृट्, लोट्, विधिलिङ्) को याद रखने की सलाह दी जाती है।

 

Question 6. संस्कृत में कुल कितने गण माने जाते हैं?
(क) पाँच
(ख) सात
(ग) दस
(घ) सोलह
Answer: (ग) दस
In simple words: संस्कृत में धातुओं को उनकी संरचना और विकरण प्रत्यय के आधार पर दस विभिन्न 'गणों' में वर्गीकृत किया गया है।

🎯 Exam Tip: गण धातु-रूपों के निर्माण के आधार हैं। प्रत्येक गण का अपना विशिष्ट विकरण प्रत्यय होता है जो क्रिया रूपों को प्रभावित करता है।

 

Question 7. गण का नाम किस आधार पर रखा गया है?
(क) धातु से जुड़े प्रत्यय के आधार पर
(ख) धातु से जुड़े उपसर्ग के आधार पर
(ग) लकार के आधार पर
(घ) गण की प्रथम धातु के आधार पर
Answer: (घ) गण की प्रथम धातु के आधार पर
In simple words: प्रत्येक गण का नाम उस गण की पहली धातु के नाम पर रखा गया है, जैसे 'भू' धातु से 'भ्वादिगण' बना है।

🎯 Exam Tip: गण के नामकरण का यह सिद्धांत धातु-रूपों को व्यवस्थित और याद रखने में मदद करता है। प्रथम धातु का नाम गण के नाम का प्रतिनिधित्व करता है।

 

Question 8. संस्कृत में किस कारण से क्रिया में कोई परिवर्तन नहीं होता?
(क) क्रिया-पद के कारण।
(ख) लिंग के कारण
(ग) पुरुष के कारण
(घ) वचन के कारण
Answer: (ख) लिंग के कारण
In simple words: संस्कृत में क्रिया के रूप लिंग के अनुसार नहीं बदलते हैं, वे केवल पुरुष और वचन के आधार पर परिवर्तित होते हैं।

🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण नियम है जो संस्कृत को कई अन्य भाषाओं से अलग करता है। क्रिया हमेशा कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार बदलती है, लिंग के अनुसार नहीं।

 

Question 9. निम्नलिखित में से कौन क्रिया को पद नहीं है?
(क) सकर्मकाकर्मक
(ख) परस्मै
(ग) आत्मने
(घ) उभय
Answer: (क) सकर्मकाकर्मक
In simple words: 'सकर्मक' और 'अकर्मक' क्रिया के प्रकार हैं, जबकि 'परस्मैपद', 'आत्मनेपद' और 'उभयपद' क्रिया के पद होते हैं जो क्रिया के व्यापार के परिणाम पर आधारित होते हैं।

🎯 Exam Tip: पद क्रिया के व्यापार का परिणाम कहाँ जाता है, इस पर आधारित होते हैं (कर्ता को या किसी और को)। सकर्मक/अकर्मक क्रिया के भेद हैं, पद नहीं।

 

Question 10. 'युवां ग्रन्थम् अपठतम्' में रेखांकित पद के स्थान पर क्रिया का क्या रूप होगा, जिससे वाक्य विधिलिङ्का बन जाए?
(क) पठेयम्
(ख) पठेव
(ग) पठतम् ।
(घ) पठेतम् ।
Answer: (घ) पठेतम् ।
In simple words: 'अपठतम्' लङ् लकार (भूतकाल) मध्यम पुरुष द्विवचन का रूप है। इसे विधिलिङ् लकार मध्यम पुरुष द्विवचन में बदलने पर 'पठेतम्' बन जाता है, जिसका अर्थ 'तुम दोनों को पढ़ना चाहिए' होता है।

🎯 Exam Tip: लकार परिवर्तन के प्रश्नों में कर्ता के पुरुष और वचन का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि क्रिया का सही रूप चुना जा सके। 'युवां' मध्यम पुरुष द्विवचन का कर्ता है।

 

Question 11. 'गच्छानि' किस लकार, पुरुष और वचन का रूप है?
(क) लोट्, उत्तम, एक
(ख) लट्, उत्तम, एक
(ग) लङ, प्रथम, बहु ।
(घ) लृट्, मध्यम, एक
Answer: (क) लोट्, उत्तम, एक
In simple words: 'गच्छानि' 'गम्' धातु के लोट् लकार (आज्ञार्थ), उत्तम पुरुष और एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'मैं जाऊँ' या 'मुझे जाना चाहिए' होता है।

🎯 Exam Tip: धातु-रूपों को पहचानते समय, धातु, लकार, पुरुष और वचन चारों का सही निर्धारण करना आवश्यक है। उत्तम पुरुष एकवचन के लोट् लकार में अक्सर 'आनि' प्रत्यय होता है।

 

Question 12. 'अगच्छम्' किस काल का रूप है?
(क) वर्तमानकाल का
(ख) सामान्य भूतकाल का ।
(ग) भविष्यत्काल का
(घ) भूतकाल का ।
Answer: (घ) भूतकाल का ।
In simple words: 'अगच्छम्' 'गम्' धातु के लङ् लकार (भूतकाल) उत्तम पुरुष एकवचन का रूप है, जो भूतकाल की क्रिया को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: 'अ' उपसर्ग से शुरू होने वाली क्रियाएँ अक्सर लङ् लकार (भूतकाल) की पहचान होती हैं। यह उपसर्ग क्रिया के अतीत में होने का संकेत देता है।

 

Question 13. 'लभ्' धातु के लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपदी) का रूप होगा
(क) लभेते
(ख) लभेत
(ग) लभताम्
(घ) लभते
Answer: (घ) लभते
In simple words: 'लभ्' धातु (प्राप्त करना) आत्मनेपद में लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन में 'लभते' रूप धारण करती है, जिसका अर्थ 'वह प्राप्त करता है' होता है।

🎯 Exam Tip: आत्मनेपदी धातु-रूपों को परस्मैपदी से अलग पहचानना महत्वपूर्ण है। लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन में आत्मनेपद में 'ते' प्रत्यय होता है।

 

Question 14. 'लभध्वम्' 'लभ्' धातु (आत्मनेपदी) के किस लकार, पुरुष और वचन का रूप है?
(क) लोट्, मध्यम, एक ।
(ख) लोट्, मध्यम, बहु.
(ग) विधिलिङ, मध्यम, बहु
(घ) लृट्, मध्यम, बहु ।
Answer: (ख) लोट्, मध्यम, बहु.
In simple words: 'लभध्वम्' 'लभ्' धातु के लोट् लकार (आज्ञार्थ) आत्मनेपद में मध्यम पुरुष बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'तुम सब प्राप्त करो' होता है।

🎯 Exam Tip: आत्मनेपद में मध्यम पुरुष बहुवचन का लोट् लकार रूप अक्सर 'ध्वम्' या 'ध्वे' प्रत्यय के साथ समाप्त होता है। इस पहचान को याद रखना सहायक होता है।

 

Question 15. परस्मैपद में 'याचेत्' किस लकार का रूप होगा?
(क) लोट् का
(ख) विधिलिङ को
(ग) लृट् को
(घ) लङ् का
Answer: (ख) विधिलिङ को
In simple words: 'याचेत्' 'याच्' धातु (माँगना) के विधिलिङ् लकार, परस्मैपद प्रथम पुरुष एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'उसे माँगना चाहिए' होता है।

🎯 Exam Tip: विधिलिङ् लकार के परस्मैपद में प्रथम पुरुष एकवचन का रूप अक्सर 'एत्' से समाप्त होता है, जो 'चाहिए' अर्थ का संकेत देता है।

 

Question 16. "याचे' आत्मनेपद में किस काल का रूप होगा?
(क) वर्तमानकाल का
(ख) भूतकाल का
(ग) विधिलिङ का
(घ) भविष्यत्काल का ।
Answer: (क) वर्तमानकाल का
In simple words: 'याचे' 'याच्' धातु के लट् लकार (वर्तमानकाल) आत्मनेपद में उत्तम पुरुष एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'मैं माँगता हूँ' होता है।

🎯 Exam Tip: आत्मनेपद में उत्तम पुरुष एकवचन का लट् लकार रूप अक्सर 'ए' प्रत्यय के साथ समाप्त होता है। काल और पद को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. 'एधि' किस धातु का रूप है?
(क) आप् का.
(ख) याच् का '
(ग) अस् का
(घ) इष् का
Answer: (ग) अस् का
In simple words: 'एधि' 'अस्' धातु (होना) के लोट् लकार, मध्यम पुरुष एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'तुम होओ' या 'हो जा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'अस्' धातु एक अनियमित धातु है और इसके रूप अन्य धातुओं से भिन्न होते हैं। 'एधि' जैसे विशिष्ट रूपों को सीधे याद रखना आवश्यक है।

 

Question 18. 'शक्ष्यावः' में मूल धातु और लकार कौन-से हैं?
(क) आस् और लृट्
(ख) शक् और लृट्
(ग) नश् और लोट् ।
(घ) अस् और विधिलिङ
Answer: (ख) शक् और लृट्
In simple words: 'शक्ष्यावः' 'शक्' धातु (सकना) के लृट् लकार (भविष्यत्काल) उत्तम पुरुष द्विवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'हम दोनों सकेंगे' होता है।

🎯 Exam Tip: भविष्यत्काल के रूपों में अक्सर 'स्य' या 'ष्य' प्रत्यय पाया जाता है। धातु और लकार की पहचान के लिए इन संकेतों पर ध्यान दें।

 

Question 19. 'शिष्यः प्रश्नं प्रक्ष्यति ।' में रेखांकित पद के स्थान पर वाक्य को लोट् लकार में बदलने के | लिए क्या पद प्रयुक्त करेंगे?
(क) पृच्छेत्
(ख) अपृच्छत्
(ग) पृच्छति
(घ) पृच्छतु
Answer: (घ) पृच्छतु
In simple words: 'प्रक्ष्यति' लृट् लकार (भविष्यत्काल) का रूप है। इसे लोट् लकार (आज्ञार्थ) प्रथम पुरुष एकवचन में बदलने पर 'पृच्छतु' हो जाएगा, जिसका अर्थ 'वह पूछे' होता है।

🎯 Exam Tip: वाक्य में क्रिया को बदलते समय, कर्ता (शिष्यः - प्रथम पुरुष एकवचन) के पुरुष और वचन को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। लोट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन में 'तु' प्रत्यय होता है।

 

Question 20. 'ग्रह' धातु (आत्मनेपदं) में लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) गृणीत.
(ख) गृहणीत
(ग) गृणीते
(घ) गृणीताम् ।
Answer: (ग) गृणीते
In simple words: 'ग्रह्' धातु (पकड़ना, लेना) आत्मनेपद में लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन में 'गृह्णीते' रूप बनता है, जिसका अर्थ 'वह पकड़ता है' होता है।

🎯 Exam Tip: आत्मनेपद और परस्मैपदी के रूपों में भेद करना आवश्यक है। आत्मनेपद के लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन में 'ते' प्रत्यय होता है।

 

Question 21. 'अगृह्णन्' में लकार, पुरुष, वचन और पद होगा
(क) लङ प्रथम, बहु, परस्मैपद
(ख) लृट्, उत्तम, एक, उभये
(ग) लङ, प्रथम, एक, परस्मैपद
(घ) लङ, मध्यम, एक, आत्मनेपद
Answer: (क) लङ प्रथम, बहु, परस्मैपद
In simple words: 'अगृह्णन्' 'ग्रह्' धातु के लङ् लकार (भूतकाल) परस्मैपद प्रथम पुरुष बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'उन सबने पकड़ा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'अ' से शुरू होने वाली क्रियाएँ अक्सर लङ् लकार की होती हैं। '-अन्' प्रत्यय प्रथम पुरुष बहुवचन परस्मैपद की पहचान है।

 

Question 22. 'कथ्' धातु (परस्मैपदी) लोट् लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप है
(क) कथयते
(ख) कथयतम्
(ग) कथयताम्
(घ) कथयथ
Answer: (घ) कथयथ
In simple words: 'कथ्' धातु (कहना) परस्मैपदी में लोट् लकार (आज्ञार्थ), मध्यम पुरुष बहुवचन का रूप 'कथयथ' होता है, जिसका अर्थ 'तुम सब कहो' है।

🎯 Exam Tip: लोट् लकार मध्यम पुरुष बहुवचन में परस्मैपद में अक्सर धातु के बाद 'थ' प्रत्यय आता है (जैसे 'पठथ')।

 

Question 23. निम्नलिखित में कौन-सी धातु उभयपदी है?
(क) अस्
(ख) लभ्
(ग) याच् :
(घ) प्रच्छ ।
Answer: (ग) याच् :
In simple words: 'याच्' (माँगना) धातु उभयपदी है, जिसका अर्थ है कि इसके रूप परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों में चलते हैं।

🎯 Exam Tip: उभयपदी धातुएँ वे होती हैं जिनके रूप परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों में बनते हैं, जैसे 'कृ' (करना) या 'याच्' (माँगना)।

 

Question 24. 'पृच्छाम' रूप किस लकार, पुरुष तथा वचन का है?
(क) लट्, उत्तम, एके
(ख) लोट्, उत्तम, बहु ।
(ग) लङ, प्रथम, द्वि
(घ) विधिलिङ, उत्तम, बहु
Answer: (ख) लोट्, उत्तम, बहु ।
In simple words: 'पृच्छाम' 'प्रच्छ' धातु (पूछना) के लोट् लकार (आज्ञार्थ), उत्तम पुरुष बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'हम सब पूछें' होता है।

🎯 Exam Tip: उत्तम पुरुष बहुवचन के लोट् लकार में अक्सर 'आम' प्रत्यय आता है, जैसे 'पठाम', 'गच्छाम'।

 

Question 25. 'अस्' धातु किस गण के अन्तर्गत आती है?
(क) अदादि
(ख) दिवादि
(ग) क्रयादि
(घ) रुधादि ।
Answer: (क) अदादि
In simple words: 'अस्' धातु (होना) संस्कृत के 'अदादिगण' के अंतर्गत आती है, जो बिना किसी विकरण प्रत्यय के धातु रूपों का निर्माण करता है।

🎯 Exam Tip: 'अस्' धातु अदादिगण की एक महत्वपूर्ण और अक्सर अनियमित धातु है, जिसे इसके विशिष्ट रूपों के कारण याद रखना आवश्यक है।

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