NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit: Chapter 04 धातु रूप प्रकरण
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Practice Class 9 Sanskrit Solutions: Chapter 04 धातु रूप प्रकरण
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UP Board Solutions For Class 9 Sanskrit Chapter 4 धातु-रूप प्रकरण (व्याकरण)
जिस शब्द के द्वारा किसी काम के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं; जैसे-'रामः पुस्तकं पठति ।' इस वाक्य में 'पठति से पढ़ने के काम का बोध होता है; अतः 'पठति क्रिया है। क्रिया के मूल रूप को संस्कृत में 'धातु' कहते हैं; जैसे - रामः पुस्तकं पठति । इस वाक्य में 'पठति' क्रिया का मूल 'पद्' है; अतः 'पद्' धातु है। धातुओं में प्रत्यय जोड़ने से ही क्रिया के विभिन्न रूप बनते हैं। क्रियाएँ 'तिङ' प्रत्यय जोड़कर बनायी जाती हैं; अतः तिङन्त कहलाती हैं। संस्कृत में क्रिया का ही प्रयोग होता है, धातु का नहीं। क्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं-(1) सकर्मक क्रिया तथा
(2) अकर्मक क्रिया।।(1) सकर्मक क्रिया- ये वे क्रियाएँ हैं, जिनका अपना कर्म होता है। समर्कक क्रिया के व्यापार को फल कर्ता को छोड़कर किसी और (कर्म) पर पड़ता है; जैसे-रामः पुस्तकं पठति । इस वाक्य में 'पठति' क्रिया के व्यापार का फल 'राम:' कर्ता को छोड़कर 'पुस्तकम्' (कर्म) पर पड़ता है; अतः 'पठति' क्रिया सकर्मक है।। क्रिया के पूर्व 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करने पर मिलने वाला उत्तर कर्म होता है। ऊपर के वाक्य में 'क्या' पढ़ता है; प्रश्न करने पर उत्तर में 'पुस्तकम्' आता है; अतः 'पुस्तकम् कर्म है और 'पठति' क्रिया, सकर्मक है।
(2) अकर्मक क्रिया- अकर्मक क्रिया के व्यापार का फल केवल कर्ता तक ही सीमित होता है। अकर्मक क्रियाओं का अपना कोई कर्म नहीं होता है; जैसे-रामः हसति । इस वाक्य में हसति' (हँसना) क्रिया के व्यापार का फल केवल 'रामः' कर्ता पर ही पड़ता है; अतः 'हसति' क्रिया अकर्मक है।। अकर्मक क्रिया के पूर्व 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करने से उत्तर में कुछ नहीं आता है।
लकार या काल
प्रयोग की दृष्टि से क्रियाओं की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं, संस्कृत में उन्हें लकारों द्वारा प्रकट किया जाता है। संस्कृत में प्रायः सभी कालों के प्रारम्भ में 'ल' वर्ण आता है, अतः इन्हें लकार कहते हैं। ये 10 होते हैं1. लट् लकार (वर्तमानकाल),
2. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल),
3. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत्),
4. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत्),
5. लङ् लकार (अनद्यतन भूत),
6. लिङ् लकार (विधिलिङ) अनुमति, आज्ञा, प्रार्थना आदि अर्थ में,
7. आशीलिङ् (आशीर्वाद अर्थ में),
8. लोट् लकार (आज्ञा अर्थ में)
9. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल) तथा
10. लुङ् लकार (हेतु-हेतुमद्भूत) उम्रर्युक्त लकारों में लट्, लोट्, लङ, विधिलिङ ये चार लकार सार्वधातुक और शेष छः लकार आर्धधातुक कहलाते हैं। नवीं कक्षा के छात्रों को केवल निम्नलिखित पाँच लकारों के रूप जानना आवश्यक है
(1) लट् लकार (वर्तमानकाल)- निरन्तर होती हुई, वर्तमानकाले की क्रिया लट् लकार द्वारा बतायी जाती है।
(2) लङ् लकार - भूतकाल की क्रिया को बताने के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है। यह लकार, जो कार्य आज से पहले हुआ हो, उसका बोध कराने के लिए प्रयोग किया जाता है।
(3) लृट् लकार- हिन्दी की उन क्रियाओं का, जिनके अन्त में गा, गे, गी लगे होते हैं, का अनुवाद करने के लिए भविष्यत्काल के वाक्यों में लुट् लकार का प्रयोग किया जाता है।
(4) लोट् लकार - अनुमति, निमन्त्रण, आमन्त्रण, अनुरोध, जिज्ञासा और सामर्थ्य अर्थ में लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है।
(5) विधिलिङ् लकार- उनुमति को छोड़कर शेष (निमन्त्रण, आमन्त्रण, अनुरोध, जिज्ञासा, सामर्थ्य तथा विधि) अर्थों में विधिलिङ् लकार का प्रयोग किया जाता है । :
क्रिया के पद
क्रिया के तीन पद होते हैं-• परस्मैपद,
• आत्मनेपद तथा
• उभयपद ।।(1) परस्मैपद- क्रिया के व्यापार का परिणाम जब कर्ता को प्राप्त न होकर किसी अन्य को प्राप्त होता है तब वहाँ क्रिया के परस्मैपदी रूप का प्रयोग होता है; जैसे-पठति ।(2) आत्मनेपद- जब क्रिया के व्यापार का परिणाम कर्ता तक ही सीमित रहता है, वहाँ क्रिया का आत्मनेपदी रूप प्रयुक्त होता है; जैसे-लभते ।
(3) उभयपद- जिन धातुओं के 'परस्मैपदी' तथा 'आत्मनेपदी' दोनों रूप प्रसंगानुसार प्रयुक्त होते हैं, वे उभयपदी धातुएँ कहलाती हैं; जैसे-कृ-करोति, कुरुते; नी-नयति, नयते; जि- जयति, जयते ।
पुरुष
संज्ञा और सर्वनामों की तरह क्रियाओं के भी तीन पुरुष होते हैं-• प्रथम पुरुष,
• मध्यम । पुरुष तथा
• उत्तम पुरुष ।
वचन
वन संज्ञा और सर्वनामों की तरह क्रियाओं के भी तीन वचन होते हैं-• एकवचन,
• द्विवचन तथा
• बहुवचन ।
लिंग
लिग संस्कृत में लिंग के कारण क्रियाओं में कोई अन्तर नहीं आता।धातुगण
उन अनेक धातुओं के समूह को गण कहते हैं, जिनमें एक विकरण प्रत्यय होता है। संस्कृत में विकरण प्रत्ययों के आधार पर समस्त धातुओं को दस गणों में विभक्त किया गया है। प्रत्येक गण का नाम उसकी प्रथम धातु के आधार पर रखा गया है; जैसे-भ्वादिगण की प्रथम धातु 'भू' (भू + आदि गण) है। दस गणों में कुल धातुओं की संख्या 1970 है। इन गणों के नाम इस प्रकार हैं• भ्वादिगण,
• अदादिगण,
• जुहोत्यादिगण,
• दिवादिगण,
• स्वादिगण,
• तुदादिगण,
• रुधादिगण,
• तनादिगण,
• क्रयादिगण,
• चुरादिगण।
घातुओं के प्राथय
(3) लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अतु | अताम् | अन्तु |
| मध्यम | अ | अतम् | अत |
| उत्तम | आनि | आव | आम |
(4) विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | एत् | एताम् | एयुः |
| मध्यम | एः | एतम् | एत |
| उत्तम | एयम् | एव | एम |
(5) लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ष्यति | ष्यतः | ष्यन्ति |
| मध्यम | ष्यसि | ष्यथः | ष्यथ |
| उत्तम | ष्यामि | ष्यावः | ष्यामः |
(3) लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अताम् | एताम् | अन्ताम् |
| मध्यम | अस्व | एथाम् | अध्वम् |
| उत्तम | आवहै | आमहै |
(4) विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | एयाताम् | एरन् | |
| मध्यम | एथाः | एयाथाम् | एध्वम् |
| उत्तम | एय | एवहि | एमहि |
(5) लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | स्यते | स्येते | स्यन्ते |
| मध्यम | स्यसे | स्येथे | स्यध्वे |
| उत्तम | स्ये | स्यावहे | स्यामहे |
(1) भ्वादिगण
इस गण की प्रथम धातु 'भू' होने के कारण इस गण का नाम भ्वादिगण है। यह गण अत्यन्त विशाल है। इसमें 1035 धातुएँ हैं। इसका विकरण शप् (अ) है। इस गण की प्रत्येक धातु के सार्वधातुक लकारों में धातु के अन्त में 'अ' अवश्य जुड़ता है; जैसे - पठ् + अ + ति = पठति । धातु के अन्तिम स्वर इ-ई, उ-ऊ, ऋ का गुण (क्रमशः ए, ओ, अर्) हो जाता है तथा अन्तिम गुण के 'ए' का अय् और 'ओ' का अव् हो जाता हैं; जैसे- भू + अ + ति- भो + अ + ति- भ् + अव् + अ + ति = भवति। नी + अ + ति- ने + अ + ति- न् + अय् + अ + ति - नयति। ह + अ + अर् + अ + ति = हरति ।(1) 'भू' (होना) धातु : परस्मैपदीलट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भवति | भवतः | भवन्ति |
| मध्यम | भवसि | भवथः | भवथ |
| उत्तम | भवामि | भवावः | भवामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अभवत् | अभवताम् | अभवन् |
| मध्यम | अभवः | अभवतम् | अभवत |
| उत्तम | अभवम् | अभवाव | अभवाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भवतु | भवताम् | भवन्तु |
| मध्यम | भव | भवतम् | भवत |
| उत्तम | भवानि | भवाव | भवाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भवेत् | भवेताम् | भवेयुः |
| मध्यम | भवेः | भवेतम् | भवेत |
| उत्तम | भवेयम् | भवेव | भवेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भविष्यति | भविष्यतः | भविष्यन्ति |
| मध्यम | भविष्यसि | भविष्यथः | भविष्यथ |
| उत्तम | भविष्यामि | भविष्यावः | भविष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यम | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तम | पठामि | पठावः | पठामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अपठत् | अपठताम् | अपठन् |
| मध्यम | अपठः | अपठतम् | अपठत |
| उत्तम | अपठम् | अपठाव | अपठाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पठतु | पठताम् | पठन्तु |
| मध्यम | पठ | पठतम् | पठत |
| उत्तम | पठानि | पठाव | पठाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पठेत् | पठेताम् | पठेयुः |
| मध्यम | पठेः | पठेतम् | पठेत |
| उत्तम | पठेयम् | पठेव | पठेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पठिष्यति | पठिष्यतः | पठिष्यन्ति |
| मध्यम | पठिष्यसि | पठिष्यथः | पठिष्यथ |
| उत्तम | पठिष्यामि | पठिष्यावः | पठिष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गच्छति | गच्छतः | गच्छन्ति |
| मध्यम | गच्छसि | गच्छथः | गच्छथ |
| उत्तम | गच्छामि | गच्छावः | गच्छामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अगच्छत् | अगच्छताम् | अगच्छन् |
| मध्यम | अगच्छः | अगच्छतम् | अगच्छत |
| उत्तम | अगच्छम् | अगच्छाव | अगच्छाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गच्छतु | गच्छताम् | गच्छन्तु |
| मध्यम | गच्छ | गच्छतम् | गच्छत |
| उत्तम | गच्छानि | गच्छाव | गच्छाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गच्छेत् | गच्छेताम् | गच्छेयुः |
| मध्यम | गच्छेः | गच्छेतम् | गच्छेत |
| उत्तम | गच्छेयम् | गच्छेव | गच्छेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गमिष्यति | गमिष्यतः | गमिष्यन्ति |
| मध्यम | गमिष्यसि | गमिष्यथः | गमिष्यथ |
| उत्तम | गमिष्यामि | गमिष्यावः | गमिष्यामः |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पिबेत् | पिबेताम् | पिबेयुः |
| मध्यम | पिबेः | पिबेतम् | पिबेत |
| उत्तम | पिबेयम् | पिबेव | पिबेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पास्यति | पास्यतः | पास्यन्ति |
| मध्यम | पास्यसि | पास्यथः | पास्यथ |
| उत्तम | पास्यामि | पास्यावः | पास्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पश्यति | पश्यतः | पश्यन्ति |
| मध्यम | पश्यसि | पश्यथः | पश्यथ |
| उत्तम | पश्यामि | पश्यावः | पश्यामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अपश्यत् | अपश्यताम् | अपश्यन् |
| मध्यम | अपश्यः | अपश्यतम् | अपश्यत |
| उत्तम | अपश्यम् | अपश्याव | अपश्याम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पश्यतु | पश्यताम् | पश्यन्तु |
| मध्यम | पश्य | पश्यतम् | पश्यत |
| उत्तम | पश्यानि | पश्याव | पश्याम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पश्येत् | पश्येताम् | पश्येयुः |
| मध्यम | पश्येः | पश्येतम् | पश्येत |
| उत्तम | पश्येयम् | पश्येव | पश्येम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | द्रक्ष्यति | द्रक्ष्यतः | द्रक्ष्यन्ति |
| मध्यम | द्रक्ष्यसि | द्रक्ष्यथः | द्रक्ष्यथ |
| उत्तम | द्रक्ष्यामि | द्रक्ष्यावः | द्रक्ष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पिबति | पिबतः | पिबन्ति |
| मध्यम | पिबसि | पिबथः | पिबथ |
| उत्तम | पिबामि | पिबावः | पिबामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अपिबत् | अपिबताम् | अपिबन् |
| मध्यम | अपिबः | अपिबतम् | अपिबत |
| उत्तम | अपिबम् | अपिबाव | अपिबाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पिबतु | पिबताम् | पिबन्तु |
| मध्यम | पिब | पिबतम् | पिबत |
| उत्तम | पिबानि | पिबाव | पिबाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | तिष्ठेत् | तिष्ठेताम् | तिष्ठेयुः |
| मध्यम | तिष्ठे: | तिष्ठेतम् | तिष्ठेत |
| उत्तम | तिष्ठेयम् | तिष्ठेव | तिष्ठेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | स्थास्यति | स्थास्यतः | स्थास्यन्ति |
| मध्यम | स्थास्यसि | स्थास्यथः | स्थास्यथ |
| उत्तम | स्थास्यामि | स्थास्यावः | स्थास्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जयति | जयतः | जयन्ति |
| मध्यम | जयसि | जयथः | जयथ |
| उत्तम | जयामि | जयावः | जयामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अजयत् | अजयताम् | अजयन् |
| मध्यम | अजयः | अजयतम् | अजयत |
| उत्तम | अजयम् | अजयाव | अजयाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जयतु | जयताम् | जयन्तु |
| मध्यम | जय | जयतम् | जयत |
| उत्तम | जयानि | जयाव | जयाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जयेत् | जयेताम् | जयेयुः |
| मध्यम | जयेः | जयेतम् | जयेत |
| उत्तम | जयेयम् | जयेव | जयेम |
(6) 'स्था' (तिष्ठ् = ठहरना) धातु : परस्मैपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | तिष्ठति | तिष्ठतः | तिष्ठन्ति |
| मध्यम | तिष्ठसि | तिष्ठथः | तिष्ठथ |
| उत्तम | तिष्ठामि | तिष्ठावः | तिष्ठामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अतिष्ठत् | अतिष्ठताम् | अतिष्ठन् |
| मध्यम | अतिष्ठः | अतिष्ठतम् | अतिष्ठत |
| उत्तम | अतिष्ठम् | अतिष्ठाव | अतिष्ठाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | तिष्ठतु | तिष्ठताम् | तिष्ठन्तु |
| मध्यम | तिष्ठ | तिष्ठतम् | तिष्ठत |
| उत्तम | तिष्ठानि | तिष्ठाव | तिष्ठाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | लभेत | लभेयाताम् | लंर्भरन् |
| मध्यम | लभेथाः | लभेयाथाम् | लभेध्वम् |
| उत्तम | लभेय | लभेवहि | लभेमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | लप्स्यते | लप्स्येते | लप्स्यन्ते |
| मध्यम | लप्स्यसे | लप्स्येथे | लप्स्यध्वे |
| उत्तम | लप्स्ये | लप्स्यावहे | लप्स्यामहे |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | वर्धे | वर्धेते | वर्धन्ते |
| मध्यम | वर्धसे | वर्धेथे | वर्धध्वे |
| उत्तम | वर्धे | वर्धावहे | वर्धामहे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अवर्धत | अवर्धेताम् | अवर्धन्त |
| मध्यम | अवर्धथाः | अवर्धेथाम् | अवर्धध्वम् |
| उत्तम | अवर्धे | अवर्धावहि | अवर्धामहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | वर्धताम् | वर्धेताम् | वर्धन्ताम् |
| मध्यम | वर्धस्व | वर्धेथाम् | वर्धध्वम् |
| उत्तम | वर्धे | वर्धावहै | वर्धामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | वर्धेत | वर्धेयाताम् | वर्धेरन् |
| मध्यम | वर्धेथाः | वर्धेयाथाम् | वर्धेध्वम् |
| उत्तम | वर्धेय | वर्धेवहि | वर्धेमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जेष्यति | जेष्यतः | जेष्यन्ति |
| मध्यम | जेष्यसि | जेष्यथः | जेष्यथ |
| उत्तम | जेष्यामि | जेष्यावः | जेष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | लभते | लभेते | लभन्ते |
| मध्यम | लभसे | लभेथे | लभध्वे |
| उत्तम | लभे | लभावहे | लभामहे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अलभत | अलभेताम् | अलभन्त |
| मध्यम | अलभथाः | अलभेथाम् | अलभध्वम् |
| उत्तम | अलभे | अलभावहि | अलभामहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | लभताम् | लभेताम् | लभन्ताम् |
| मध्यम | लभस्व | लभेथाम् | लभध्वम् |
| उत्तम | लभै | लभावहै | लभामहै. |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | वर्धिष्यते | वर्धिष्येते | वर्धिष्यन्ते |
| मध्यम | वर्धिष्यसे | वर्धिष्येथे | वर्धिष्यध्वे |
| उत्तम | वर्धिष्ये | वर्धिष्यावहे | वर्धिष्यामहे |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | याचति | याचतः | याचन्ति |
| मध्यम | याचसि | याचथः | याचथ |
| उत्तम | याचामि | याचावः | याचामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अयाचत् | अयाचताम् | अयाचन् |
| मध्यम | अयाचः | अयाचतम् | अयाचत |
| उत्तम | अयाचम् | अयाचाव | अयाचाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | याचतु | याचताम् | याचन्तु |
| मध्यम | याच | याचतम् | याचत |
| उत्तम | याचानि | याचाव. | याचाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | याचेत् | याचेताम् | याचेयुः |
| मध्यम | याचेः | याचेतम् | याचेत |
| उत्तम | याचेयम् | याचेव | याचेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | याचिष्यति | याचिष्यतः | याचिष्येन्ति |
| मध्यम | याचिष्यसि | याचिष्यथः | याचिष्यथ |
| उत्तम | याचिष्यामि | याचिष्यावः | याचिष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | याचते | याचेते | याचन्ते |
| मध्यम | याचसे | याचेथे | याचध्वे |
| उत्तम | याचे | याचावहे | याचामहे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अयाचत | अयाचेताम् | अयाचन्त |
| मध्यम | अयाचथाः | अयाचेथाम् | अयाचध्वम् |
| उत्तम | अयाचे | अयाचावहि | अयाचामहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | याचताम् | याचेताम् | याचन्ताम् |
| मध्यम | याचस्व | याचेथाम् | याचध्वम् |
| उत्तम | याचै | याचावहै | याचामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | याचिष्यते | याचिष्येते | याचिष्यन्ते |
| मध्यम | याचिष्यसे | याचिष्येथे | याचिष्यध्वे |
| उत्तम | याचिष्ये | याचिष्यावहे | याचिष्यामहे |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नयति | नयतः | नयन्ति |
| मध्यम | नयसि | नयथः | नयथ |
| उत्तम | नयामि | नयावः | नयामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अनयत् | अनयताम् | अनयन् |
| मध्यम | अनयः | अनयतम् | अनयत |
| उत्तम | अनयम् | अनयाव | अनयाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नयतु | नयताम् | नयन्तु |
| मध्यम | नय | नयतम् | नयत |
| उत्तम | नयानि | नयाव | नयाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नयेत् | नयेताम् | नयेयुः |
| मध्यम | नयेः | नयेतम् | नयेत |
| उत्तम | नयेयम् | नयेव | नयेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नेष्यति | नेष्यतः | नेष्यन्ति |
| मध्यम | नेष्यसि | नेष्यथः | नेष्यथ |
| उत्तम | नेष्यामि | नेष्यावः | नेष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नयते | नयेते | नयन्ते |
| मध्यम | नयसे | नयेथे | नयध्वे |
| उत्तम | नये | नयावहे | नयामहे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अनयत | अनयेताम् | अनयन्त |
| मध्यम | अनयथाः | अनयेथाम् | अनयध्वम् |
| उत्तम | अनये | अनयावहि | अनयामहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नयेत | नयेयाताम् | नयेरन् |
| मध्यम | नयेथाः | नयेयाथाम् | नयेध्वम् |
| उत्तम | नयेय | नयेवहि | नयेमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नेष्यते | नेष्येते | नेष्यन्ते |
| मध्यम | नेष्यसे | नेष्येथे | नेष्यध्वे |
| उत्तम | नेष्ये | नेष्यावहे | नेष्यामहे |
(2) अदादिगण
अदादिगण की प्रथम धातु 'अद्' है, इस कारण इस गण का नाम अदादिगण पड़ा। इस गण में कुल 72 धातुएँ हैं। इस गण का विकरण अविद्यमान 'अ' है; अतः इस गण की धातुओं और तिङ् प्रत्यय के बीच कोई विकरण नहीं जुड़ता है; जैसे - अद् + ति = अत्ति । इस गण की धातुओं में भी इ का 'ए', उ का 'ओ' तथा ऋ का 'अर्' अर्थात् गुण हो जाता है; जैसे- रुद् + इष्यति = रोदिष्यति। विधिलिङ् में 'यात्' आदि प्रत्यय जुड़ते हैं। लोट् लकार मध्यम पुरुष एकवचन में 'हि' प्रत्यय जुड़ते हैं; जैसे- अद् + हि = अॅद्धि।(12) 'अस्' (होना) धातु : परस्मैपदीलट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अस्ति | स्तः | सन्ति |
| मध्यम | असि | स्थः | स्थ |
| उत्तम | अस्मि | स्वः | स्मः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | आसीत् | आस्ताम् | आसन् |
| मध्यम | आसीः | आस्तम् | आस्त |
| उत्तम | आसम् | आस्व | आस्म |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अस्तु, स्तात् | स्ताम् | सन्तु |
| मध्यम | एधि | स्तम् | स्त |
| उत्तम | असानि | असाव | असाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | स्यात् | स्याताम् | स्युः |
| मध्यम | स्याः | स्यातम् | स्यात |
| उत्तम | स्याम् | स्याव | स्याम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | भविष्यति | भविष्यतः | भविष्यन्ति |
| मध्यम | भविष्यसि | भविष्यथः | भविष्यथ |
| उत्तम | भविष्यामि | भविष्यावः | भविष्यामः |
लङ् लकार (भूतकांल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अददात् | अदत्ताम् | अददुः |
| मध्यम | अददाः | अदत्तम् | अदत्त |
| उत्तम | अददाम् | अदद्व | अदद्म |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ददातु | दत्ताम् | ददतु |
| मध्यम | देहि | दत्तम् | दत्त |
| उत्तम | ददानि | ददाव | ददाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | दद्यात् | दद्याताम् | दद्युः |
| मध्यम | दद्याः | दद्यातम् | दद्यात |
| उत्तम | दद्याम | दद्याव | दद्याम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | दास्यति | दास्यतः | दास्यन्ति |
| मध्यम | दास्यसि | दास्यथः | दास्यथ |
| उत्तम | दास्यामि | दास्यावः | दास्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | दत्ते | ददाते | ददते |
| मध्यम | दत्से | ददाथे | दद्ध्वे |
| उत्तम | ददे | दद्वहे | दद्महे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अदत्त | अददाताम् | अददत |
| मध्यम | अदत्थाः | अददाथाम् | अदद्ध्वम् |
| उत्तम | अददि | अदद्वहि | अदद्महि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | दत्ताम् | ददाताम् | ददताम् |
| मध्यम | दत्स्व | ददाथाम् | दद्ध्वम् |
| उत्तम | ददै | ददावहै | ददामहै |
(3) जुहोत्यादि गण
इस गण की प्रथम धातु 'हु' होने के कारण गण का नाम जुहोत्यादि गण है। इस गण में कुल 24 धातुएँ हैं। इस गण में भी धातु के बाद विकरण नहीं जुड़ता है। सार्वधातुक लकारों में धातु का द्वित्व हो जाता है। इस गण में लट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन में 'अन्ति' प्रत्यय न लगकर 'अति' प्रत्यय लगता है।(13) 'दा' (देना) धातु : उभयपदी-पर Yosemiteलट् लकार (वर्तमान काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ददाति | दत्तः | ददति |
| मध्यम | ददासि | दत्थः | दत्थ |
| उत्तम | ददामि | दद्वः | दद्मः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नश्यति | नश्यतः | नश्यन्ति |
| मध्यम | नश्यसि | नश्यथः | नश्यथ |
| उत्तम | नश्यामि | नश्यावः | नश्यामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अनश्यत् | अनश्यताम् | अनश्यन् |
| मध्यम | अनश्यः | अनश्यतम् | अनश्यत |
| उत्तम | अनश्यम् | अनश्याव | अनश्याम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नश्यतु | नश्यताम् | नश्यन्तु |
| मध्यम | नश्य | नश्यतम् | नश्यत |
| उत्तम | नश्यानि | नश्याव | नश्याम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नश्येत् | नश्येताम् | नश्येयुः |
| मध्यम | नश्येः | नश्येतम् | नश्येत |
| उत्तम | नश्येयम् | नश्येव | नश्येम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नक्ष्यति | नक्ष्यतः | नक्ष्यन्ति |
| मध्यम | नक्ष्यसि | नक्ष्यथः | नक्ष्यथ |
| उत्तम | नक्ष्यामि | नक्ष्यावः | नक्ष्यामः |
लट् लकार (वर्तमान काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जायते | जायेते | जायन्ते |
| मध्यम | जायसे | जायेथे | जायध्वे |
| उत्तम | जाये | जायावहे | जायामहे |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ददीत | ददीयाताम् | ददीरन् |
| मध्यम | ददीथाः | ददीयाथाम् | ददीध्वम् |
| उत्तम | ददीय | ददीवहि | ददीमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | दास्यते | दास्येते | दास्यन्ते |
| मध्यम | दास्यसे | दास्येथे | दास्यध्वे |
| उत्तम | दास्ये | दास्यावहे | दास्यामहे |
(4) दिवादिगण
इस गण की प्रथम धातु दिव् है; अतः इस गण का नाम 'दिवादिगण' पड़ा। इस गण में कुल 140 धातुएँ हैं। इस गण में धातु के बाद श्यन् (य) विकरण लगाया जाता है। इस गण में धातु का गुण नहीं होता।लृट् लकार (भविष्यतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जनिष्यते | जनिष्येते | जनिष्यन्ते |
| मध्यम | जनिष्यसे | जनिष्येथे | जनिष्यध्वे |
| उत्तम | जनिष्ये | जनिष्यावहे | जनिष्यमहे |
(5) स्वादिगण
इस गण की प्रथम धातु 'सु' है; अतः इस गण का नाम 'स्वादिगण' पड़ा। इस गण में कुल 35 धातुएँ हैं। इस गण का विकरण श्नु (नु) है। सार्वधातुक लकारों में धातु में 'नु' लगाकर रूप चलते हैं; जैसे- सु + नु + ति = सुनोति। तीनों पुरुषों के एकवचन में तथा लोट् लकार उत्तम पुरुष के तीनों वचनों में 'नु' में स्थित 'उ' का 'ओ' गुण हो जाता है।(16) 'शक्' (सकना) धातु : परस्मैपदीलट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शक्नोति | शक्नुतः | शक्नुवन्ति |
| मध्यम | शक्नोषि | शक्नुथः | शक्नुथ |
| उत्तम | शक्नोमि | शक्नुवः | शक्नुमः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अशक्नोत् | अशक्नुताम् | अशक्नुवन् |
| मध्यम | अशक्नोः | अशक्नुतम् | अशक्नुत |
| उत्तम | अशक्नुवम् | अशक्नुव | अशक्नुम |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अजायत | अजायेताम् | अजायन्त |
| मध्यम | अजायथाः | अजायेथाम् | अजायध्वम् |
| उत्तम | अजाये | अजायावहि | अजायामहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जायताम् | जायेताम् | जायन्ताम् |
| मध्यम | जायस्व | जायेथाम् | जायध्वम् |
| उत्तम | जायै | जायावहै | जायामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जायेत | जायेयाताम् | जायेरन् |
| मध्यम | जायेथाः | जायेयाथाम् | जायेध्वम् |
| उत्तम | जायेय | जायेवहि | जायेमहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शक्नोतु | शक्नुताम् | शक्नुवन्तु |
| मध्यम | शक्नुहि | शक्नुतम् | शक्नुत |
| उत्तम | शक्नवानि | शक्नवाव | शक्नवाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शक्नुयात् | शक्नुयाताम् | शक्नुयुः |
| मध्यम | शक्नुयाः | शक्नुयातम् | शक्नुयात |
| उत्तम | शक्नुयाम् | शक्नुयाव | शक्नुयाम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | शक्ष्यति | शक्ष्यतः | शक्ष्यन्ति |
| मध्यम | शक्ष्यसि | शक्ष्यथः | शक्ष्यथ |
| उत्तम | शक्ष्यामि | शक्ष्यावः | शक्ष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | आप्नोति | आप्नुतः | आप्नुवन्ति |
| मध्यम | आप्नोषि | आप्नुथः | आप्नुथ |
| उत्तम | आप्नोमि | आप्नुवः | आप्नुमः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | आप्नोत् | आप्नुताम् | आप्नुवन् |
| मध्यम | आप्नोः | आप्नुतम् | आप्नुत |
| उत्तम | आप्नवम् | आप्नुव | आप्नुम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | आप्नोतु | आप्नुताम् | आप्नुवन्तु |
| मध्यम | आप्नुहि | आप्नुतम् | आप्नुत |
| उत्तम | आप्नवानि | आप्नवाव | आप्नवाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | आप्नुयात् | आप्नुयाताम् | आप्नुयुः |
| मध्यम | आप्नुयाः | आप्नुयातम् | आप्नुयात |
| उत्तम | आप्नुयाम् | आप्नुयाव | आप्नुयाम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | आप्स्यति | आप्स्यतः | आप्स्यन्ति |
| मध्यम | आप्स्यसि | आप्स्यथः | आप्स्यथ |
| उत्तम | आप्स्यामि | आप्स्यावः | आप्स्यामः |
(6) तुदादिगण
इस गण की प्रथम धातु 'तुद्' है; अतः इस गण का नाम 'तुदादिगण' है। इसमें कुल 157 धातुएँ हैं। इस गण का विकरण श (अ) है; अतः धातु और प्रत्यय के बीच 'अ' जोड़ दिया जाता है; जैसे-तुद् + अ + ति = तुदति। इस गण में धातु की उपधा तथा अन्त के स्वर का गुण नहीं होता है। इस गण में इ-ई का ईय, उ-ऊ का उव् तथा ऋ का रिय् हो जाता है।(18) 'इष्' (इच्छा करना) धातु : परस्मैपदीलट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | इच्छति | इच्छतः | इच्छन्ति |
| मध्यम | इच्छसि | इच्छथः | इच्छथ |
| उत्तम | इच्छामि | इच्छावः | इच्छामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ऐच्छत् | ऐच्छताम् | ऐच्छन् |
| मध्यम | ऐच्छः | ऐच्छतम् | ऐच्छत |
| उत्तम | ऐच्छम् | ऐच्छाव | ऐच्छाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | इच्छतु | इच्छताम् | इच्छन्तु |
| मध्यम | इच्छ | इच्छतम् | इच्छत |
| उत्तम | इच्छानि | इच्छाव | इच्छाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | इच्छेत् | इच्छेताम् | इच्छेयुः |
| मध्यम | इच्छेः | इच्छेतम् | इच्छेत |
| उत्तम | इच्छेयम् | इच्छेव | इच्छेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | एषिष्यति | एषिष्यतः | एषिष्यन्ति |
| मध्यम | एषिष्यसि | एषिष्यथः | एषिष्यथ |
| उत्तम | एषिष्यामि | एषिष्यावः | एषिष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पृच्छति | पृच्छतः | पृच्छन्ति |
| मध्यम | पृच्छसि | पृच्छथः | पृच्छथ |
| उत्तम | पृच्छामि | पृच्छावः | पृच्छामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अपृच्छत् | अपृच्छताम् | अपृच्छन् |
| मध्यम | अपृच्छः | अपृच्छतम् | अपृच्छत |
| उत्तम | अपृच्छम् | अपृच्छाव | अपृच्छाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पृच्छतु | पृच्छताम् | पृच्छन्तु |
| मध्यम | पृच्छ | पृच्छतम् | पृच्छत |
| उत्तम | पृच्छानि | पृच्छाव | पृच्छाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पृच्छेत् | पृच्छेताम् | पृच्छेयुः |
| मध्यम | पृच्छेः | पृच्छेतम् | पृच्छेत |
| उत्तम | पृच्छेयम् | पृच्छेव | पृच्छेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | प्रक्ष्यति | प्रक्ष्यतः | प्रक्ष्यन्ति |
| मध्यम | प्रक्ष्यसि | प्रक्ष्यथः | प्रक्ष्यथ |
| उत्तम | प्रक्ष्यामि | प्रक्ष्यावः | प्रक्ष्यामः |
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | लिखति | लिखतः | लिखन्ति |
| मध्यम | लिखसि | लिखथः | लिखथ |
| उत्तम | लिखामि | लिखावः | लिखामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अलिखत् | अलिखताम् | अलिखन् |
| मध्यम | अलिखः' | अलिखतम् | अलिखत |
| उत्तम | अलिखम् | अलिखाव | अलिखाम |
(7) रुधादिगण
इस गण की प्रथम धातु 'रुध्’ है; इसलिए इस गण का नाम 'रुधादिगण' प्रचलित हुआ। इस गण में कुल 25 धातुएँ हैं।
(21) 'रुध्' (रोकना) धातु : उभय०-परस्मैपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रुणद्धि | रुन्धः | रुन्धन्ति |
| मध्यम | रुणत्सि | रुन्धः | रुन्ध |
| उत्तम | रुणध्मि | रुन्ध्वः | रुन्ध्मः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अरुणत् | अरुन्धाम् | अरुन्धन् |
| मध्यम | अरुणः | अरुन्धम् | अरुन्ध |
| उत्तम | अरुणधम् | अरुन्ध्व | अरुन्ध्म |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रुणछु | रुन्धाम् | रुन्धन्तु |
| मध्यम | रुन्धि | रुन्धम् | रुन्ध |
| उत्तम | रुणधानि | रुणधाव | रुणधाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रुन्ध्यात् | रुन्ध्याताम् | रुन्ध्युः |
| मध्यम | रुन्ध्याः | रुन्ध्यातम् | रुन्ध्यात |
| उत्तम | रुन्ध्याम् | रुन्ध्याव | रुन्ध्याम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रोत्स्यति | रोत्स्यतः | रोत्स्यन्ति |
| मध्यम | रोत्स्यसि | रोत्स्यथः | रोत्स्यथ |
| उत्तम | रोत्स्यामि | रोत्स्यावः | रोत्स्यामः |
'रुध्' (रोकना) धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रुन्धे | रुन्धाते | रुन्धते |
| मध्यम | रुन्त्से | रुन्धाथे | रुन्ध्वे |
| उत्तम | रुन्धे | रुन्ध्वहे | रुन्ध्महे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अरुन्ध | अरुन्धाताम् | अरुन्धन् |
| मध्यम | अरुन्धाः | अरुन्धाथाम् | अरुन्ध्वम् |
| उत्तम | अरुन्धि | अरुन्ध्वहि | अरुन्ध्महि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रुन्धाम् | रुन्धाताम् | रुन्धताम् |
| मध्यम | रुन्त्स्व | रुन्धाथाम् | रुन्ध्वम् |
| उत्तम | रुणधै | रुणधावहै | रुणधामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रुन्धीत | रुन्धीयाताम् | रुन्धीरन् |
| मध्यम | रुन्धीथाः | रुन्धीयाथाम् | रुन्धीध्वम् |
| उत्तम | रुन्धीय | रुन्धीवहि | रुन्धीमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रोत्स्यते | रोत्स्येते | रोत्स्यन्ते |
| मध्यम | रोत्स्यसे | रोत्स्येथे | रोत्स्यध्वे |
| उत्तम | रोत्से | रोत्स्यावहे | रोत्स्यामहे |
(8) तनादिगण
इस गण की प्रथम धातु 'तन्' है; अतः इस गण का नाम 'तनादिगण' पड़ा। इस गण में केवल 10 धातुएँ हैं। इस गण में सार्वधातुक लकारों में 'उ' विकरण जोड़ा जाता है; उदाहरणार्थ - तन् + उ + ति = तनोति। सार्व- धातुक लकारों में तीनों पुरुषों के एकवचन में तथा लोट् लकार के उत्तम पुरुष के तीनों वचनों में 'उ' के स्थान पर ओ (गुण) हो जाता है।
(22) 'कृ' (करना) धातु : उभय०-परस्मैपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | करोति | कुरुतः | कुर्वन्ति |
| मध्यम | करोषि | कुरुथः | कुरुथ |
| उत्तम | करोमि | कुर्वः | कुर्मः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अकरोत् | अकुरुताम् | अकुर्वन् |
| मध्यम | अकरोः | अकुरुतम् | अकुरुत |
| उत्तम | अकरवम् | अकुर्व | अकुर्म |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | करोतु | कुरुताम् | कुर्वन्तु |
| मध्यम | कुरु | कुरुतम् | कुरुत |
| उत्तम | करवाणि | करवाव | करवाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कुर्यात् | कुर्याताम् | कुर्युः |
| मध्यम | कुर्याः | कुर्यातम् | कुर्यात |
| उत्तम | कुर्याम् | कुर्याव | कुर्याम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | करिष्यति | करिष्यतः | करिष्यन्ति |
| मध्यम | करिष्यसि | करिष्यथः | करिष्यथ |
| उत्तम | करिष्यामि | करिष्यावः | करिष्यामः |
'कृ' (करना) धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कुरुते | कुर्वाते | कुर्वते |
| मध्यम | कुरुषे | कुर्वाथे | कुरुध्वे |
| उत्तम | कुर्वे | कुर्वहे | कुर्महे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अकुरुत | अकुर्वाताम् | अकुर्वत |
| मध्यम | अकुरुथाः | अकुर्वाथाम् | अकुरुध्वम् |
| उत्तम | अकुर्वि | अकुर्वहि | अकुर्महि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कुरुताम् | कुर्वाताम् | कुर्वताम् |
| मध्यम | कुरुध्व | कुर्वाथाम् | कुरुध्वम् |
| उत्तम | करवै | करवावहै | करवामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कुर्वीत | कुर्वीयाताम् | कुर्वीरन् |
| मध्यम | कुर्वीथाः | कुर्वीयाथाम् | कुर्वीध्वम् |
| उत्तम | कुर्वीय | कुर्वीवहि | कुर्वीमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | करिष्यते | करिष्येते | करिष्यन्ते |
| मध्यम | करिष्यसे | करिष्येथे | करिष्यध्वे |
| उत्तम | करिष्ये | करिष्यावहे | करिष्यामहे |
(9) क्रयादिगण
इस गण की प्रथम धातु 'क्री' है; अतः इस गण का नाम 'क्रयादिगण' पड़ा। इस गण में कुल 61 धातुएँ हैं। इस गण का विकरण श्ना (ना) है; अतः धातु और प्रत्यय के बीच में 'ना' जोड़ दिया जाता है; जैसे- क्री + ना + ति = क्रीणाति।
(23) 'ग्रह' (पकड़ लेना) धातु : उभय०-परस्मैपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गृह्णाति | गृह्णीतः | गृह्णन्ति |
| मध्यम | गृह्णासि | गृह्णीथः | गृह्णीथ |
| उत्तम | गृह्णामि | गृह्णीवः | गृह्णीमः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अगृह्णात् | अगृह्णीताम् | अगृह्णन् |
| मध्यम | अगृह्णाः | अगृह्णीतम् | अगृह्णीत |
| उत्तम | अगृह्णाम् | अगृह्णीव | अगृह्णीम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गृह्णातु | गृह्णीताम् | गृह्णन्तु |
| मध्यम | गृह्णा | गृह्णीतम् | गृह्णीत |
| उत्तम | गृह्णाानि | गृह्णाव | गृह्णाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गृह्णीयात् | गृह्णीयाताम् | गृह्णीयुः |
| मध्यम | गृह्णीयाः | गृह्णीयातम् | गृह्णीयात |
| उत्तम | गृह्णीयाम् | गृह्णीयाव | गृह्णीयाम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ग्रहीष्यति | ग्रहीष्यतः | ग्रहीष्यन्ति |
| मध्यम | ग्रहीष्यसि | ग्रहीष्यथः | ग्रहीष्यथ |
| उत्तम | ग्रहीष्यामि | ग्रहीष्यावः | ग्रहीष्यामः |
'ग्रह्' (पकड़ना, लेना) धातु : उभय०-आत्मनेपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गृह्णीते | गृह्णाते | गृह्णन्ते |
| मध्यम | गृह्णीषे | गृह्णाथे | गृह्णीध्वे |
| उत्तम | गृह्णे | गृह्णीवहे | गृणीमहे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अगृह्णीत | अगृह्णाताम् | अगृह्णत |
| मध्यम | अगृह्णीथाः | अगृह्णाथाम् | अगृह्णीध्वम् |
| उत्तम | अगृहिण | अगृह्मणीवहि | अगृह्णीमहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गृह्णीताम् | गृह्णाताम् | गृह्णताम् |
| मध्यम | गृह्णीष्व | गृह्णाथाम् | गृह्णीध्वम् |
| उत्तम | गृह्णै | गृह्णावहै | गृह्णामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गृह्णीत | गृह्णीयाताम् | गृह्णीरन् |
| मध्यम | गृह्णीथाः | गृह्णीयाथाम् | गृह्णीध्वम् |
| उत्तम | गृह्णीय | गृह्णीवहि | गृणीमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ग्रहीष्यते | ग्रहीष्येते | ग्रहीष्यन्ते |
| मध्यम | ग्रहीष्यसे | ग्रहीष्येथे | ग्रहीष्यध्वे |
| उत्तम | ग्रहीष्ये | ग्रहीष्यावहे | ग्रहीष्यामहे |
(24) 'ज्ञा' (जा = जानना) धातु : उभय०-पर परस्मैपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जानाति | जानीतः | जानन्ति |
| मध्यम | जानासि | जानीथः | जानीथ |
| उत्तम | जानामि | जानीवः | जानीमः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अजानात् | अजानीताम् | अजानन् |
| मध्यम | अजानाः | अजानीतम् | अजानीत |
| उत्तम | अजानाम् | अजानीव | अजानीम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | একवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जानातु | जानीताम् | जानन्तु |
| मध्यम | जानीहि | जानीतम् | जानीत |
| उत्तम | जानानि | जानावे | जानाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जानीयात् | जानीयाताम् | जानीयुः |
| मध्यम | जानीयाः | জानीयातम् | जानीयात |
| उत्तम | जानीयाम् | जानीयाव | जानीयाम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जानीते | जानाते | जानते |
| मध्यम | जानीषे | जानाथे | जानीध्वे |
| उत्तम | जाने | जानीवहे | जानीमहे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अजानीत | अजानाताम् | अजानत |
| मध्यम | अजानीथाः | अजानाथाम् | अजानीध्वम् |
| उत्तम | अजानि | अजानीवहि | अजानीमहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जानीताम् | जानाताम् | जानताम् |
| मध्यम | जानीष्व | जानाथाम् | जानीध्वम् |
| उत्तम | जानै | जानावहै | जानामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जानीत | जानीयाताम् | जानीरन् |
| मध्यम | जानीथाः | जानीयाथाम् | जानीध्वम् |
| उत्तम | जानीय | जानीवहि | जानीमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ज्ञास्यते | ज्ञास्येते | ज्ञास्यन्ते |
| मध्यम | ज्ञास्यसे | ज्ञास्येथे | ज्ञास्यध्वे |
| उत्तम | ज्ञास्ये | ज्ञास्यावहे | ज्ञास्यामहे |
(10) चुरादिगण
इस गण की प्रथम धातु 'चुर्' है; अतः इस गण का नाम 'चुरादिगण' है। इस गण में कुल 411 धातुएँ हैं। इस गण की धातुओं और प्रत्ययों के बीच 'अय' विकरण जोड़ दिया जाता है; जैसे - चुर् + अय + ति = चोरयति। इस गण की धातुओं में इ, उ, ऋ का गुण हो जाता है। यदि उपधा (किसी शब्द के अन्तिम अक्षर के पहले का अक्षर) के 'अ' की, जिसके बाद संयुक्त व्यंजन न हो, उसकी और अन्तिम स्वर की वृद्धि हो जाती है; जैसे- क्षल्-क्षालयति, तड्-ताडयति। आकारान्त धातुओं में 'आ' के बाद प् और लग जाता है।
(25) 'चुर्' (चुराना) धातु : उभय०-पर परस्मैपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोरयति | चोरयतः | चोरयन्ति |
| मध्यम | चोरयसि | चोरयथः | चोरयथ |
| उत्तम | चोरयामि | चोरयावः | चोरयामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अचोरयत् | अचोरयताम् | अचोरयन् |
| मध्यम | अचोरयः | अचोरयतम् | अचोरयत |
| उत्तम | अचोरयम् | अचोरयाव | अचोरयाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोरयतु | चोरयताम् | चोरयन्तु |
| मध्यम | चोरय | चोरयतम् | चोरयत |
| उत्तम | चोरयाणि | चोरयाव | चोरयाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोरयेत् | चोरयेताम् | चोरयेयुः |
| मध्यम | चोरयेः | चोरयेतम् | चोरयेत |
| उत्तम | चोरयेयम् | चोरयेव | चोरयेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोरयिष्यतिः | चorयिष्यतः | चorयिष्यन्ति |
| मध्यम | चोरयिष्यसि | चोरयिष्यथः | चोरयिष्यथ |
| उत्तम | चोरयिष्यामि | चोरयिष्यावः | चोरयिष्यामः |
'चुर्' (चुराना) धातु : उभयपदी-आत्मनेपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोरयते | चोरयेते | चोरयन्ते |
| मध्यम | चोरयसे | चोरयेथे | चोरयध्वे |
| उत्तम | चोरये | चोरयावहे | चोरयामहे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अचोरयत | अचोरयेताम् | अचोरयन्त |
| मध्यम | अचोरयथाः | अचोरयेथाम् | अचोरयध्वम् |
| उत्तम | अचोरये | अचोरयावहि | अचोरयामहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोरयताम् | चोरयेताम् | चोरयन्ताम् |
| मध्यम | चोरयस्व | चोरयेथाम् | चोरयध्वम् |
| उत्तम | चोरयै | चोरयावहै | चोरयामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोरयेत | चोरयेताम् | चोरयेरन् |
| मध्यम | चोरयेथाः | चोरयेथाम् | चोरयेध्वम् |
| उत्तम | चोरयेय | चोरयेवहि | चोरयेमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोरयिष्यते | चोरयिष्येते | चोरयिष्यन्ते |
| मध्यम | चोरयिष्यसे | चोरयिष्येथे | चोरयिष्यध्वे |
| उत्तम | चोरयिष्ये | चोरयिष्यावहे | चोरयिष्यामहे |
(26) 'कथ्' (कहना) धातु : उभय०-परस्मैपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कथयति | कथयतः | कथयन्ति |
| मध्यम | कथयसि | कथयथः | कथयथ |
| उत्तम | कथयामि | कथयावः | कथयामः |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अकथयत् | अकथयताम् | अकथयन् |
| मध्यम | अकथयः | अकथयतम् | अकथयत |
| उत्तम | अकथयम् | अकथयाव | अकथयाम |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कथयतु | कथयताम् | कथयन्तु |
| मध्यम | कथय | कथयतम् | कथयत |
| उत्तम | कथयानि | कथयाव | कथयाम |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कथयेत् | कथयेताम् | कथयेयुः |
| मध्यम | कथयेः | कथयेतम् | कथयेत |
| उत्तम | कथयेयम् | कथयेव | कथयेम |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कथयिष्यति | कथयिष्यतः | कथयिष्यन्ति |
| मध्यम | कथयिष्यसि | कथयिष्यथः | कथयिष्यथ |
| उत्तम | कथयिष्यामि | कथयिष्यावः | कथयिष्यामः |
'कथ्' (कहना) धातु : उभय०-आत्मनेपदी
लट् लकार (वर्तमानकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कथयते | कथयेते | कथयन्ते |
| मध्यम | कथयसे | कथयेथे | कथयध्वे |
| उत्तम | कथये | कथयावहे | कथयामहे |
लङ् लकार (भूतकाल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अकथयत | अकथयेताम् | अकथयन्त |
| मध्यम | अकथयथाः | अकथयेथाम् | अकथयध्वम् |
| उत्तम | अकथये | अकथयावहि | अकथयामहि |
लोट् लकार (आज्ञार्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कथयताम् | कथयेताम् | कथयन्ताम् |
| मध्यम | कथयस्व | कथयेथाम् | कथयध्वम् |
| उत्तम | कथयै | कथयावहै | कथयामहै |
विधिलिङ् लकार (विध्यर्थ)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कथयेत | कथयेयाताम् | कथयेरन् |
| मध्यम | कथयेथाः | कथयेयाथाम् | कथयेध्वम् |
| उत्तम | कथयेय | कथयेवहि | कथयेमहि |
लृट् लकार (भविष्यत्काल)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कथयिष्यते | कथयिष्येते | कथयिष्यन्ते |
| मध्यम | कथयिष्यसे | कथयिष्येथे | कथयिष्यध्वे |
| उत्तम | कथयिष्ये | कथयिष्यावहे | कथयिष्यामहे |
संक्षिप्त धातु-रूप
यहाँ पर प्रसिद्ध एवं प्रचलित 235 धातुओं के पाँच लकारों के प्रथम पुरुष एकवचन के रूप दिये जा रहे हैं। धातु का अर्थ एवं गण धातु के साथ अंकित कर दिया गया है। धातु के पूरे रूप क्रिया-प्रकरण में गण की अन्य धातुओं के समान बना लेने चाहिए। ये छात्रों को अनुवाद हेतु उपयोगी सिद्ध होंगे।
(क) परस्मैपदी धातुएँ
प्रथम गण (भ्वादिगण)
| धातु | अर्थ | लट् लकार | लङ् लकार | लोट् लकार | विधिलिङ् लकार | लृट् लकार |
|---|---|---|---|---|---|---|
| अट् | घूमना | अटति | आटत् | अटतु | अटेत् | अटिष्यति |
| अर्च् | पूजना. | अर्चति | आर्चत् | अर्चतु | अर्चेत् | अर्चिष्यति |
| अव् | रक्षा करना | अवति | आवत् | अवतु | अवेत् | अविष्यति |
| ईर्ष्यू | ईर्ष्या करना | ईर्ष्यति | ऐर्व्यत् | ईर्ष्यातु | ईष्येंतु | ईर्षिष्यति |
| ऋ | जाना | ऋच्छति | आच्छेत् | ऋच्छतु | ऋच्छेत् | ऋच्छिष्यति |
| काङ्क्ष् | चाहना | काङ्क्षति | अकाङ्क्षत् | काङ्क्षतु | काङ्क्षेत् | काङ्क्षिष्यति |
| कूज् | चूँ-चूँ करना | कूजति | अकूजत् | कूजतु | कूजेत् | कूजिष्यति |
| कृष् | जोतना | कर्षति | अकर्षत् | कर्षतु | कर्षेत् | कर्क्ष्यति |
| क्रीड् | खेलना | क्रीडति | अक्रीडत् | क्रीडतु | क्रीडेत् | क्रीडिष्यति |
| क्षि | नष्ट होना | क्षयति | अक्षयत् | क्षयतु | क्षयेत् | क्षयिष्यति |
| खन् | खोदना | खनति | अखनत् | खनतु | खनेत् | खनिष्यति |
| खाद् | खाना | खादति | अखादत् | खादतु | खादेत् | खादिष्यति |
| खेल् | खेलना | खेलति | अखेलत् | खेलतु | खेलेत् | खेलिष्यति |
| गद् | कहना | गदति | अगदत् | गदतु | गदेत् | गदिष्यति |
| गम् | जाना | गच्छति | अगच्छत् | गच्छतु | गच्छेत् | गमिष्यति |
| गर्ज् | गरजना | गर्जति | अगर्जत् | गर्जतु | गर्जेत् | गर्जिष्यति |
| गै | गाना | गायति | अगायत् | गायतु | गायेत् | गास्यति |
| घ्रा | सूँघना | जिघ्रति | अजिघ्रत् | जिघ्रतु | जिघ्रेत् | घ्रास्यति |
| चर् | चरना | चरति | अचरत् | चरतु | चरेत् | चरिष्यति |
| चल् | चलना | चलति | अचलत् | चलतु | चलेत् | चलिष्यति |
| जप् | जपना | जपति | अजपत् | जपतु | जपेत् | जपिष्यति |
| जि | जीतना | जयति | अजयत् | जयतु | जयेत् | जेष्यति |
| जीव् | जीना | जीवति | अजीवत् | जीवतु | जीवेत् | जीविष्यति |
| ज्वल् | जलना | ज्वलति | अज्वलत् | ज्वलतु | ज्वलेत् | ज्वलिष्यति |
| तप् | तप करना | तपति | अतपत् | तपतु | तपेत् | तप्स्यति |
| तृ | तैरना. | तरति | अतरत् | तरतु | तरेत् | तरिष्यति |
| त्यज् | छोड़ना | त्यजति | अत्यजत् | त्यजतु | त्यजेत् | त्यक्ष्यति |
| दा. | देना | यच्छति | अयच्छत | यच्छत् | यच्छेत् | दास्यति |
| दह | जलना | दहति | अदहत् | दहतु | दहेत् | धक्ष्यति |
| दृश् | देखना | पश्यति | अपश्यत् | पश्यतु | पश्येत् | द्रक्ष्यति |
| धाव् | दौड़ना | धावति | अधावत् | धावतु | धावेत् | धाविष्यति |
| धृ | रखना | धरति | अधरत् | धरतु | धरेत् | धरिष्यति |
| ध्यै | ध्यान रखना | ध्यायति | अध्यायत् | ध्यायतु | ध्यायेत् | ध्यास्यति |
| नन्द् | प्रसन्न होना | नन्दति | अनन्दत् | नन्दतु | नन्देत् | नन्दिष्यति |
| नम् | नमस्कार करना | नमति | अनमत् | नमतु | नमेत् | नंस्यति |
| निन्द् | निन्दा करना | निन्दति | अनिन्दत् | निन्दतु | निन्देत् | निन्दिष्यति |
| नी | ले जाना | नयति | अनयत् | नयतु | नयेत् | नेष्यति |
| पच् | पकाना | पचति | अपचत् | पचतु | पचेत् | पक्ष्यति |
| पठ् | पढ़ना | पठति | अपठत् | पठतु | पठेत् | पठिष्यति |
| पत् | गिरना | पतति | अपतत् | पततु | पतेत् | पतिष्यति |
| पा | पीना | पिबति | अपिबत् | पिबतु | पिबेत् | पास्यति |
| फल् | फलना | फलति | अफलत् | फलतु | फलेत् | फलिष्यति |
| भज् | सेवा करना | भजति | अभजत् | भजतु | भजेत् | भक्ष्यति |
| भू | होना | भवति | अभवत् | भवतु | भवेत् | भविष्यति |
| भ्रम् | घूमना | भ्रमति | अभ्रमत् | भ्रमतु | भ्रमेत् | भ्रमिष्यति |
| मूर्छ् | मूच्छित होना | मूच्र्छति | अमूर्च्छत् | मूर्च्छतु | मूच्छेत | मूच्छिष्यति |
| यज् | यज्ञ करना | यजति | अयजत् | यजतु | यजेत् | यक्ष्यति |
| याच् | माँगना | याचति | अयाचत् | याचतु | याचेत् | याचिष्यति |
| रक्ष | रक्षा करना | रक्षति | अरक्षत् | रक्षतु | रक्षेत् | रक्षिष्यति |
| रह | उगना | रोहति | अरोहत् | रोहतु | रोहेत् | रोक्ष्यति |
| लप् | बोलना | लपति | अलपत् | लपतु | लपेत् | लपिष्यति |
| वद् | बोलना | वदति | अवदत् | वदतु | वदेत् | वदिष्यति |
| वप् | बोना | वपति | अवपत् | वपतु | वपेत् | वप्स्यति |
| वस् | रहना | वसति | अवसत् | वसतु | वसेत् | वत्स्यति |
| वह | ढोना | वहति | अवहत् | वहतु | वहेत् | वक्ष्यति |
| वाञ्छ् | चाहना | वाञ्छति | अवाञ्छत् | वाञ्छतु | वाञ्छेत् | वाञ्छिष्यति |
| वृष् | बरसना | वर्षति | अवर्षत् | वर्षतु | वर्षेत् | वर्षिष्यति |
| व्रज् | जाना | व्रजति | अव्रजत् | व्रजतु | व्रजेत् | व्रजिष्यति |
| शंस् | प्रशंसा करना | शंसति | अशंसत् | शंसतु | शंसेत् | शंसिष्यति |
| श्रि | आश्रय लेना | श्रयति | अश्रयत् | श्रयतु | श्रयेत् | श्रयिष्यति |
| सद् | बैठना | सीदति | असीदत् | सीदतु | सीदेत् | सत्स्यति |
| सृ | सरकना | सरति | असरत् | सरतु | सरेत् | सरिष्यति |
| स्था | ठहरना | तिष्ठति | अतिष्ठत् | तिष्ठतु | तिष्ठेत् | स्थास्यति |
| स्मृ | याद करना | स्मरति | अस्मरत् | स्मरतु | स्मरेत् | स्मरिष्यति |
| हस् | हँसना | हसति | अहसत् | हसतु | हसेत् | हसिष्यति |
| आ + ह्वे | बुलाना | आह्वयति | आह्वयत् | आह्वयतु | आह्वयेत् | आह्वस्यति |
द्वितीय गण (अदादिगण)
| धातु | अर्थ | लट् लकार | लङ् लकार | लोट् लकार | विधिलिङ् लकार | लृट् लकार |
|---|---|---|---|---|---|---|
| अद् | खाना | अत्ति | आदत् | अत्तु | अद्यात् | अत्स्यति |
| अस् | होना | अस्ति | आसीत् | अस्तु | स्यात् | भविष्यति |
| इ | जाना | एति | ऐत् | एतु | इयात् | एष्यति |
| जागृ | जागना | जागर्ति | अजागत् | जागर्तु | जागृयात् | जागरिष्यति |
| दुह् | दुहना | दोग्धि | अधोक् | दोग्धु | दुह्यात् | धोक्ष्यति |
| पा | रक्षा करना | पाति | अपात् | पातु | पायात् | पास्यति |
| ब्रू | बोलना | ब्रवीति | अब्रवीत् | ब्रवीतु | ब्रूयात् | वक्ष्यति |
| भा | चमकना | भाति | अभात् | भातु | भायात् | भास्यति |
| या | जाना | याति | अयात् | यातु | यायात् | यास्यति |
| रुद् | रोना | रोदिति | अरोदीत् | रोदितु | रुद्यात् | रोदिष्यति |
| विद् | जानना | वेति | अवेत् | वेत्तु | विद्यात् | वेदिष्यति |
| शास् | शिक्षा देना | शास्ति | अशात् | शासतु | शिष्यात् | शासिष्यति |
| स्तु | स्तुति करना | स्तौति | अस्तौत् | स्तौतु | स्तुयात् | स्तोष्यति |
| स्ना | नहाना | स्नाति | अस्नात् | स्नातु | स्नायात् | स्नास्यति |
| स्वप् | सोना | स्वपिति | अस्वपीत् | स्वपितु | स्वप्यात् | स्वप्स्यति |
| हन् | मारना | हन्ति | अहन् | हन्तु | हन्यात् | हनिष्यति |
वस्तनिष्ठ प्रश्नोत्तर
अधोलिखित प्रश्नों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। इनमें से एक विकल्प शुद्ध है। शुद्ध विकल्प का चयन कर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए-
Question 1. वर्तमानकाल के लिए किस लकार का प्रयोग किया जाता है?
(क) विधिलिङ् लकार का
(ख) लट् लकार का
(ग) लृट् लकार का
(घ) लङ् लकार का
Answer: (ख) लट् लकार का
In simple words: वर्तमान काल को व्यक्त करने के लिए संस्कृत में 'लट् लकार' का प्रयोग किया जाता है। यह वर्तमान में हो रही क्रियाओं को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: लकार का सही काल से मिलान करना व्याकरण के आधारभूत प्रश्नों में से एक है। विशेष रूप से वर्तमान (लट्), भूत (लङ्) और भविष्य (लृट्) काल के लकारों को याद रखें।
Question 2. लङ् लकार किस काल को प्रदर्शित करता है?
(क) वर्तमानकाल को ।
(ख) भविष्यत्काल को ।
(ग) भूतकाल को
(घ) किसी काल को नहीं
Answer: (ग) भूतकाल को
In simple words: संस्कृत में 'लङ् लकार' का प्रयोग उन क्रियाओं को दर्शाने के लिए किया जाता है जो भूतकाल में घटित हो चुकी हैं।
🎯 Exam Tip: लङ् लकार की पहचान अक्सर क्रिया के पूर्व 'अ' उपसर्ग से होती है, जैसे 'अपठत्'। यह भूतकाल की क्रियाओं को व्यक्त करने का मानक तरीका है।
Question 3. विधिलिङ् लकार का प्रयोग किस प्रकार के वाक्यों में होता है?
(क) आज्ञा अर्थ के वाक्यों में
(ख) चाहिए अर्थ के वाक्यों में
(ग) भविष्यत्काल के वाक्यों में ।
(घ) इच्छा अर्थ के वाक्यों में
Answer: (ख) चाहिए अर्थ के वाक्यों में
In simple words: 'विधिलिङ् लकार' का उपयोग चाहिए, सलाह, विधि या संभावना जैसे भावों को व्यक्त करने वाले वाक्यों में होता है।
🎯 Exam Tip: 'चाहिए' अर्थ के लिए विधिलिङ् लकार का प्रयोग सबसे आम है, लेकिन इसे अनुमति, आमंत्रण और अनुरोध जैसे अन्य विध्यर्थक भावों के लिए भी याद रखें।
Question 4. आज्ञा अर्थ में कौन-सा लकार प्रयुक्त होता है?
(क) लोट् लकार
(ख) लङ् लकार
(ग) विधिलिङ् लकार
(घ) लृट् लकार
Answer: (क) लोट् लकार
In simple words: आज्ञा, आदेश या प्रार्थना के भाव को व्यक्त करने के लिए संस्कृत में 'लोट् लकार' का प्रयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: लोट् लकार का उपयोग कमांड या अनुरोध करने के लिए किया जाता है। इसके रूपों को पहचानना महत्वपूर्ण है, जैसे 'पठतु' (वह पढ़े)।
Question 5. लकार कुल कितने प्रकार के होते हैं?
(क) आठ
(ख) पाँच
(ग) सात
(घ) दस
Answer: (घ) दस
In simple words: संस्कृत व्याकरण में कुल दस प्रकार के लकार होते हैं, जो क्रिया के काल, अवस्था और मनोदशा को दर्शाते हैं।
🎯 Exam Tip: हालांकि संस्कृत में दस लकार होते हैं, छात्रों को आमतौर पर पाठ्यक्रम के लिए केवल पाँच प्रमुख लकारों (लट्, लङ्, लृट्, लोट्, विधिलिङ्) को याद रखने की सलाह दी जाती है।
Question 6. संस्कृत में कुल कितने गण माने जाते हैं?
(क) पाँच
(ख) सात
(ग) दस
(घ) सोलह
Answer: (ग) दस
In simple words: संस्कृत में धातुओं को उनकी संरचना और विकरण प्रत्यय के आधार पर दस विभिन्न 'गणों' में वर्गीकृत किया गया है।
🎯 Exam Tip: गण धातु-रूपों के निर्माण के आधार हैं। प्रत्येक गण का अपना विशिष्ट विकरण प्रत्यय होता है जो क्रिया रूपों को प्रभावित करता है।
Question 7. गण का नाम किस आधार पर रखा गया है?
(क) धातु से जुड़े प्रत्यय के आधार पर
(ख) धातु से जुड़े उपसर्ग के आधार पर
(ग) लकार के आधार पर
(घ) गण की प्रथम धातु के आधार पर
Answer: (घ) गण की प्रथम धातु के आधार पर
In simple words: प्रत्येक गण का नाम उस गण की पहली धातु के नाम पर रखा गया है, जैसे 'भू' धातु से 'भ्वादिगण' बना है।
🎯 Exam Tip: गण के नामकरण का यह सिद्धांत धातु-रूपों को व्यवस्थित और याद रखने में मदद करता है। प्रथम धातु का नाम गण के नाम का प्रतिनिधित्व करता है।
Question 8. संस्कृत में किस कारण से क्रिया में कोई परिवर्तन नहीं होता?
(क) क्रिया-पद के कारण।
(ख) लिंग के कारण
(ग) पुरुष के कारण
(घ) वचन के कारण
Answer: (ख) लिंग के कारण
In simple words: संस्कृत में क्रिया के रूप लिंग के अनुसार नहीं बदलते हैं, वे केवल पुरुष और वचन के आधार पर परिवर्तित होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण नियम है जो संस्कृत को कई अन्य भाषाओं से अलग करता है। क्रिया हमेशा कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार बदलती है, लिंग के अनुसार नहीं।
Question 9. निम्नलिखित में से कौन क्रिया को पद नहीं है?
(क) सकर्मकाकर्मक
(ख) परस्मै
(ग) आत्मने
(घ) उभय
Answer: (क) सकर्मकाकर्मक
In simple words: 'सकर्मक' और 'अकर्मक' क्रिया के प्रकार हैं, जबकि 'परस्मैपद', 'आत्मनेपद' और 'उभयपद' क्रिया के पद होते हैं जो क्रिया के व्यापार के परिणाम पर आधारित होते हैं।
🎯 Exam Tip: पद क्रिया के व्यापार का परिणाम कहाँ जाता है, इस पर आधारित होते हैं (कर्ता को या किसी और को)। सकर्मक/अकर्मक क्रिया के भेद हैं, पद नहीं।
Question 10. 'युवां ग्रन्थम् अपठतम्' में रेखांकित पद के स्थान पर क्रिया का क्या रूप होगा, जिससे वाक्य विधिलिङ्का बन जाए?
(क) पठेयम्
(ख) पठेव
(ग) पठतम् ।
(घ) पठेतम् ।
Answer: (घ) पठेतम् ।
In simple words: 'अपठतम्' लङ् लकार (भूतकाल) मध्यम पुरुष द्विवचन का रूप है। इसे विधिलिङ् लकार मध्यम पुरुष द्विवचन में बदलने पर 'पठेतम्' बन जाता है, जिसका अर्थ 'तुम दोनों को पढ़ना चाहिए' होता है।
🎯 Exam Tip: लकार परिवर्तन के प्रश्नों में कर्ता के पुरुष और वचन का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि क्रिया का सही रूप चुना जा सके। 'युवां' मध्यम पुरुष द्विवचन का कर्ता है।
Question 11. 'गच्छानि' किस लकार, पुरुष और वचन का रूप है?
(क) लोट्, उत्तम, एक
(ख) लट्, उत्तम, एक
(ग) लङ, प्रथम, बहु ।
(घ) लृट्, मध्यम, एक
Answer: (क) लोट्, उत्तम, एक
In simple words: 'गच्छानि' 'गम्' धातु के लोट् लकार (आज्ञार्थ), उत्तम पुरुष और एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'मैं जाऊँ' या 'मुझे जाना चाहिए' होता है।
🎯 Exam Tip: धातु-रूपों को पहचानते समय, धातु, लकार, पुरुष और वचन चारों का सही निर्धारण करना आवश्यक है। उत्तम पुरुष एकवचन के लोट् लकार में अक्सर 'आनि' प्रत्यय होता है।
Question 12. 'अगच्छम्' किस काल का रूप है?
(क) वर्तमानकाल का
(ख) सामान्य भूतकाल का ।
(ग) भविष्यत्काल का
(घ) भूतकाल का ।
Answer: (घ) भूतकाल का ।
In simple words: 'अगच्छम्' 'गम्' धातु के लङ् लकार (भूतकाल) उत्तम पुरुष एकवचन का रूप है, जो भूतकाल की क्रिया को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: 'अ' उपसर्ग से शुरू होने वाली क्रियाएँ अक्सर लङ् लकार (भूतकाल) की पहचान होती हैं। यह उपसर्ग क्रिया के अतीत में होने का संकेत देता है।
Question 13. 'लभ्' धातु के लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपदी) का रूप होगा
(क) लभेते
(ख) लभेत
(ग) लभताम्
(घ) लभते
Answer: (घ) लभते
In simple words: 'लभ्' धातु (प्राप्त करना) आत्मनेपद में लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन में 'लभते' रूप धारण करती है, जिसका अर्थ 'वह प्राप्त करता है' होता है।
🎯 Exam Tip: आत्मनेपदी धातु-रूपों को परस्मैपदी से अलग पहचानना महत्वपूर्ण है। लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन में आत्मनेपद में 'ते' प्रत्यय होता है।
Question 14. 'लभध्वम्' 'लभ्' धातु (आत्मनेपदी) के किस लकार, पुरुष और वचन का रूप है?
(क) लोट्, मध्यम, एक ।
(ख) लोट्, मध्यम, बहु.
(ग) विधिलिङ, मध्यम, बहु
(घ) लृट्, मध्यम, बहु ।
Answer: (ख) लोट्, मध्यम, बहु.
In simple words: 'लभध्वम्' 'लभ्' धातु के लोट् लकार (आज्ञार्थ) आत्मनेपद में मध्यम पुरुष बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'तुम सब प्राप्त करो' होता है।
🎯 Exam Tip: आत्मनेपद में मध्यम पुरुष बहुवचन का लोट् लकार रूप अक्सर 'ध्वम्' या 'ध्वे' प्रत्यय के साथ समाप्त होता है। इस पहचान को याद रखना सहायक होता है।
Question 15. परस्मैपद में 'याचेत्' किस लकार का रूप होगा?
(क) लोट् का
(ख) विधिलिङ को
(ग) लृट् को
(घ) लङ् का
Answer: (ख) विधिलिङ को
In simple words: 'याचेत्' 'याच्' धातु (माँगना) के विधिलिङ् लकार, परस्मैपद प्रथम पुरुष एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'उसे माँगना चाहिए' होता है।
🎯 Exam Tip: विधिलिङ् लकार के परस्मैपद में प्रथम पुरुष एकवचन का रूप अक्सर 'एत्' से समाप्त होता है, जो 'चाहिए' अर्थ का संकेत देता है।
Question 16. "याचे' आत्मनेपद में किस काल का रूप होगा?
(क) वर्तमानकाल का
(ख) भूतकाल का
(ग) विधिलिङ का
(घ) भविष्यत्काल का ।
Answer: (क) वर्तमानकाल का
In simple words: 'याचे' 'याच्' धातु के लट् लकार (वर्तमानकाल) आत्मनेपद में उत्तम पुरुष एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'मैं माँगता हूँ' होता है।
🎯 Exam Tip: आत्मनेपद में उत्तम पुरुष एकवचन का लट् लकार रूप अक्सर 'ए' प्रत्यय के साथ समाप्त होता है। काल और पद को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 17. 'एधि' किस धातु का रूप है?
(क) आप् का.
(ख) याच् का '
(ग) अस् का
(घ) इष् का
Answer: (ग) अस् का
In simple words: 'एधि' 'अस्' धातु (होना) के लोट् लकार, मध्यम पुरुष एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'तुम होओ' या 'हो जा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'अस्' धातु एक अनियमित धातु है और इसके रूप अन्य धातुओं से भिन्न होते हैं। 'एधि' जैसे विशिष्ट रूपों को सीधे याद रखना आवश्यक है।
Question 18. 'शक्ष्यावः' में मूल धातु और लकार कौन-से हैं?
(क) आस् और लृट्
(ख) शक् और लृट्
(ग) नश् और लोट् ।
(घ) अस् और विधिलिङ
Answer: (ख) शक् और लृट्
In simple words: 'शक्ष्यावः' 'शक्' धातु (सकना) के लृट् लकार (भविष्यत्काल) उत्तम पुरुष द्विवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'हम दोनों सकेंगे' होता है।
🎯 Exam Tip: भविष्यत्काल के रूपों में अक्सर 'स्य' या 'ष्य' प्रत्यय पाया जाता है। धातु और लकार की पहचान के लिए इन संकेतों पर ध्यान दें।
Question 19. 'शिष्यः प्रश्नं प्रक्ष्यति ।' में रेखांकित पद के स्थान पर वाक्य को लोट् लकार में बदलने के | लिए क्या पद प्रयुक्त करेंगे?
(क) पृच्छेत्
(ख) अपृच्छत्
(ग) पृच्छति
(घ) पृच्छतु
Answer: (घ) पृच्छतु
In simple words: 'प्रक्ष्यति' लृट् लकार (भविष्यत्काल) का रूप है। इसे लोट् लकार (आज्ञार्थ) प्रथम पुरुष एकवचन में बदलने पर 'पृच्छतु' हो जाएगा, जिसका अर्थ 'वह पूछे' होता है।
🎯 Exam Tip: वाक्य में क्रिया को बदलते समय, कर्ता (शिष्यः - प्रथम पुरुष एकवचन) के पुरुष और वचन को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। लोट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन में 'तु' प्रत्यय होता है।
Question 20. 'ग्रह' धातु (आत्मनेपदं) में लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप होगा
(क) गृणीत.
(ख) गृहणीत
(ग) गृणीते
(घ) गृणीताम् ।
Answer: (ग) गृणीते
In simple words: 'ग्रह्' धातु (पकड़ना, लेना) आत्मनेपद में लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन में 'गृह्णीते' रूप बनता है, जिसका अर्थ 'वह पकड़ता है' होता है।
🎯 Exam Tip: आत्मनेपद और परस्मैपदी के रूपों में भेद करना आवश्यक है। आत्मनेपद के लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन में 'ते' प्रत्यय होता है।
Question 21. 'अगृह्णन्' में लकार, पुरुष, वचन और पद होगा
(क) लङ प्रथम, बहु, परस्मैपद
(ख) लृट्, उत्तम, एक, उभये
(ग) लङ, प्रथम, एक, परस्मैपद
(घ) लङ, मध्यम, एक, आत्मनेपद
Answer: (क) लङ प्रथम, बहु, परस्मैपद
In simple words: 'अगृह्णन्' 'ग्रह्' धातु के लङ् लकार (भूतकाल) परस्मैपद प्रथम पुरुष बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'उन सबने पकड़ा' होता है।
🎯 Exam Tip: 'अ' से शुरू होने वाली क्रियाएँ अक्सर लङ् लकार की होती हैं। '-अन्' प्रत्यय प्रथम पुरुष बहुवचन परस्मैपद की पहचान है।
Question 22. 'कथ्' धातु (परस्मैपदी) लोट् लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप है
(क) कथयते
(ख) कथयतम्
(ग) कथयताम्
(घ) कथयथ
Answer: (घ) कथयथ
In simple words: 'कथ्' धातु (कहना) परस्मैपदी में लोट् लकार (आज्ञार्थ), मध्यम पुरुष बहुवचन का रूप 'कथयथ' होता है, जिसका अर्थ 'तुम सब कहो' है।
🎯 Exam Tip: लोट् लकार मध्यम पुरुष बहुवचन में परस्मैपद में अक्सर धातु के बाद 'थ' प्रत्यय आता है (जैसे 'पठथ')।
Question 23. निम्नलिखित में कौन-सी धातु उभयपदी है?
(क) अस्
(ख) लभ्
(ग) याच् :
(घ) प्रच्छ ।
Answer: (ग) याच् :
In simple words: 'याच्' (माँगना) धातु उभयपदी है, जिसका अर्थ है कि इसके रूप परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों में चलते हैं।
🎯 Exam Tip: उभयपदी धातुएँ वे होती हैं जिनके रूप परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों में बनते हैं, जैसे 'कृ' (करना) या 'याच्' (माँगना)।
Question 24. 'पृच्छाम' रूप किस लकार, पुरुष तथा वचन का है?
(क) लट्, उत्तम, एके
(ख) लोट्, उत्तम, बहु ।
(ग) लङ, प्रथम, द्वि
(घ) विधिलिङ, उत्तम, बहु
Answer: (ख) लोट्, उत्तम, बहु ।
In simple words: 'पृच्छाम' 'प्रच्छ' धातु (पूछना) के लोट् लकार (आज्ञार्थ), उत्तम पुरुष बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'हम सब पूछें' होता है।
🎯 Exam Tip: उत्तम पुरुष बहुवचन के लोट् लकार में अक्सर 'आम' प्रत्यय आता है, जैसे 'पठाम', 'गच्छाम'।
Question 25. 'अस्' धातु किस गण के अन्तर्गत आती है?
(क) अदादि
(ख) दिवादि
(ग) क्रयादि
(घ) रुधादि ।
Answer: (क) अदादि
In simple words: 'अस्' धातु (होना) संस्कृत के 'अदादिगण' के अंतर्गत आती है, जो बिना किसी विकरण प्रत्यय के धातु रूपों का निर्माण करता है।
🎯 Exam Tip: 'अस्' धातु अदादिगण की एक महत्वपूर्ण और अक्सर अनियमित धातु है, जिसे इसके विशिष्ट रूपों के कारण याद रखना आवश्यक है।
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