UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 Shabd roop prakaran

Get the most accurate UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 9 Sanskrit. Our expert-created answers for Class 9 Sanskrit are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 3 शब्द रूप प्रकार UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit

For Class 9 students, solving UP Board textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 9 Sanskrit solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 3 शब्द रूप प्रकार solutions will improve your exam performance.

Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार UP Board Solutions PDF

UP Board Solutions for Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द-रूप प्रकरण (व्याकरण)

संस्कृत में शब्दों को निम्नलिखित पाँच भागों में बाँटा जा सकता है-


(1) संज्ञा,
(2) सर्वनाम,
(3) विशेषण,
(4) क्रिया,
(5) अव्यये ।

संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण में लिंग, कारक और वचन के अनुसार परिवर्तन होता है। क्रिया में कालें, पुरुष और वचन के अनुसार परिवर्तन होता है तथा अव्ययों में किसी भी दशा में (लिंग, कारक, वचन आदि के कारण) कोई परिवर्तन नहीं होता।

लिंग

संस्कृत में निम्नलिखित तीन लिंग होते हैं-


(1) पुंल्लिग - जिससे पुरुष जाति का बोध होता है; जैसे-नरः, कविः ।
(2) स्त्रीलिंग - जिससे स्त्री जाति का बोध होता है; जैसे-माला, मतिः, धेनुः, वधू, माती आदि ।
(3) नपुंसकलिंग - जिससे न पुरुष जाति का बोध होता है और न स्त्री जाति का; जैसे-फलम्, वारि, मधु, जगत् आदि ।

विशेष - संस्कृत में लिंग-निर्णय में कठिनाई होती है। इसका अभ्यास अति आवश्यक है। इसके पूर्ण ज्ञान के लिए कोश, व्याकरण तथा साहित्य का अध्ययन आवश्यक है।

वचन

संस्कृत में निम्नलिखित तीन वचन होते हैं-


(1) एकवचन- जिनसे एक वस्तु का बोध होता है; यथा-बालकः पठति ।
(2) द्विवचन- जिनसे दो वस्तुओं का बोध होता है; यथा-बालकौ पठतः।।
(3) बहुवचन- जिनसे दो से अधिक वस्तुओं का बोध होता है; यथा-बालकाः पठन्ति ।

कारक

क्रिया से सम्बन्ध रखने वाले पदों को कारक कहते हैं। हिन्दी में कारकों की संख्या आठ है, किन्तु संस्कृत में सम्बन्ध तथा सम्बोधन को; क्रिया से सम्बन्ध न होने के कारण; कारक नहीं माना जाता है।

सामान्य रूप से कारकों का परिचय निम्नलिखित है-

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासुजस्
द्वितीयाअम्औट्शस्
तृतीयाटाभ्याम्भिस्
चतुर्थीडेभ्याम्भ्यस्
पञ्चमीङसिभ्याम्भ्यस्
षष्ठीङस्ओस्आम्
सप्तमीङिसुप्

विभक्तियों के प्रत्यय

संज्ञाओं के तीनों लिंगों, तीनों वचनों तथा सातों विभक्तियों में रूप चलते हैं। शब्द-रूपों को बनाने के लिए उनसे प्रत्यय जोड़े जाते हैं। इन प्रत्ययों को 'सुप् प्रत्यय कहते हैं और इनसे बनने वाले शब्दों को सुबन्त कहते हैं।

कारकविभक्तिचिह्न
(1) कर्त्ताप्रथमाने
(2) कर्मद्वितीयाको
(3) करणतृतीयासे, के द्वारा (with)
(4) सम्प्रदानचतुर्थीके लिए, को (देने के अर्थ में for)
(5) अपादानपञ्चमीसे (अलग होने के अर्थ में from)
(6) सम्बन्धषष्ठीका, के, की, रा, रे, री, ना, ने, नी
(7) अधिकरणसप्तमीमें, पर
(8) सम्बोधनप्रथमाहे! भो! अरे !

कुछ व्यंजनान्त (हलन्त) होते हैं। इन सभी संज्ञा शब्दों को निम्नलिखित छः वर्गों में विभाजित किया जा सकता है


(1) स्वरान्त पुंल्लिग शब्द-राम, कवि, भानु, पितृ, गो आदि ।
(2) स्वरान्त नपुंसकलिंग शब्द-फल, वारि, मधु आदि ।
(3) स्वरान्त स्त्रीलिंग शब्द-माला, मति, धेनु, नदी, वधू, मातृ आदि ।
(4) व्यंजनान्त पुंल्लिग शब्द- करिन्, आत्मन्, राजन्, मरुत्, सुहद् आदि ।।
(5) व्यंजनान्त नपुंसकलिंग शब्द- मनस्, जगत्, नाम आदि ।
(6) व्यंजनान्त स्त्रीलिंग शब्द- वाच्, सरित्, विपद् आदि ।

विशेष- नवीं कक्षा में पुंल्लिग-राम, हरि, गुरु; स्त्रीलिंग-रमा, मति, वाच्; नपुंसकलिंग-सर्व, तद्, युष्मद् तथा अस्मद् शब्दों के रूप निर्धारित हैं। अनुवाद में सहायक होने के कारण इनके अतिरिक्त भी कुछ रूप यहाँ दिये जा रहे हैं।

स्वरान्त (अजन्त) पुंल्लिग शब्द ।

(1) 'राम' अकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमारामःरामौरामाः
द्वितीयारामम्रामौरामान्
तृतीयारामेणरामाभ्याम्रामैः
चतुर्थीरामायरामाभ्याम्रामेभ्यः
पञ्चमीरामात्रामाभ्याम्रामेभ्यः
षष्ठीरामस्यरामयोःरामाणाम्
सप्तमीरामेरामयोःरामेषु
सम्बोधनहे राम!हे रामौ!हे रामाः!

ध्यातव्य- इसी प्रकार नर (मनुष्य), जनक (पिता), नृप (राजा), शिष्य, सूर्य, चन्द्र, खग (पक्षी), मयूर (मोर), धर्म, अनल (आग), पवन (वायु), खल (दुष्ट), सज्जन, कर (हाथ), पिक (कोयल), काक (कौआ), शुक (तोता), वानर (बन्दर), सिंह, मृग (हिरन), गज (हाथी), रासभ (गधा), छात्र, कृषक (किसान), मूषक (चूहा), बिडाल (बिलाव), कुक्कुर (कुत्ता), कूप (कुआँ), सरोवर (तालाब), घट (घड़ा), कलश (घड़ा), अश्व (घोड़ा), चौर, देव, इन्द्र, सुर (देवता), सहोदर (भाई), सुत (पुत्र), सर्प, गणेश आदि अकारान्त संज्ञा पुंल्लिग शब्द हैं। इन सभी के रूप 'राम' की तरह चलते हैं।
(2) जिन शब्दों में र, ष, क्ष, त्र, ऋ वर्ण होते हैं, उनमें तृतीया एकवचन और षष्ठी बहुवचन में 'न' के स्थान पर 'ण' हो जाता है।

(2) 'हरि' (विष्णु) इकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाहरिःहरीहरयः
द्वितीयाहरिम्हरीहरीन्
तृतीयाहरिणाहरिभ्याम्हरिभिः
चतुर्थीहरयेहरिभ्याम्हरिभ्यः
पञ्चमीहरेःहरिभ्याम्हरिभ्यः
षष्ठीहरे:हर्यो:हरीणाम्
सप्तमीहरौहर्योःहरिषु
सम्बोधनहे हरे !हे हरी!हे हरयः!

ध्यातव्य- इसी प्रकार कवि, मुनि, कपि (बन्दर), ऋषि, यति (साधु), विधि (ब्रह्मा, भाग्य), निधि (खजाना), गिरि (पर्वत), अग्नि, अरि, (शत्रु), वह्नि (आग), रवि (सूर्य), नृपति (राजा), उदधि (समुद्र), अतिथि (मेहमान), असि (तलवार), पाणि (हाथ), व्याधि (बीमारी), सेनापति, प्रजापति, भूपति (राजा), आधि (मानसिक पीड़ा), मणि, पयोधि (समुद्र) आदि संज्ञा इकारान्त पुंल्लिग शब्द हैं। इनके रूप 'हरि' के समान चलते हैं।

(3) 'गुरु' उकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमागुरुःगुरूगुरुवः
द्वितीयागुरुम्गुरूगुरुन्
तृतीयागुरुणागुरुभ्याम्गुरुभिः
चतुर्थीगुरवेगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
पञ्चमीगुरोःगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
षष्ठीगुरोःगुर्वोःगुरुणाम्
सप्तमीगुरौगुर्वोःगुरुषु
सम्बोधनहे गुरो !हे गुरु !हे गुरुवः !

ध्यातव्य- इसी प्रकार भानु (सूर्य), साधु, विधु (चन्द्रमा), रिपु (शत्रु), जन्तु, विष्णु, शम्भु, शिशु (बच्चा) उरु (जंघा), प्रभु, वेणु, (बाँसुरी), राहु, वायु, मृत्यु, पशु, तरु (वृक्ष) आदि संज्ञा उकारान्त पुंल्लिग शब्द हैं। इन सभी के रूप 'गुरु' शब्द के समान चलते हैं।

(4) 'पितृ' ऋकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमापितापितरौपितरः
द्वितीयापितरम् पितरौपितॄन्
तृतीयापित्रापितृभ्याम्पितृभिः
चतुर्थीपित्रेपितृभ्याम्पितृभ्यः
पञ्चमीपितुःपितृभ्याम्पितृभ्यः
षष्ठीपितुःपित्रोःपितृणाम्
सप्तमीपितरिपित्रोःपितृषु
सम्बोधनहे पितः !हे पितरौ !हे पितरः !

ध्यातव्य- (1) भ्रातृ, जामातृ आदि शब्द ऋकारान्त पुंल्लिग हैं। इनके रूप 'पितृ' शब्द के समान ही चलते हैं।
(2) 'मातृ' (स्त्रीलिंग) शब्द का रूप भी 'पितृ' के समान चलता है। केवल द्वितीया के बहुवचन में 'मात्' रूप बनता है।

(5) ओकारान्त 'गो' (बैल) शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमागौःगावौगावः
द्वितीयागाम्गावौगाः
तृतीयागवागोभ्याम्गोभिः
चतुर्थीगवेगोभ्याम्गोभ्यः
पञ्चमीगोःगोभ्याम्गोभ्यः
षष्ठीगोःगवोःगवाम्
सप्तमीगविगवोःगोषु
सम्बोधनहे गौः !हे गावौ !हे गावः !

स्वरान्त (अजन्त) नपुंसकलिंग शब्द

(6) 'गृह' अकारान्त

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमागृहम्गृहेगृहाणि
द्वितीयागृहम्गृहेगृहाणि
सम्बोधनहे गृहे !हे गृहे !हे गृहाणि!

विशेष- शेष तृतीया से सप्तमी विभक्ति तक के रूप अकारान्त पुंल्लिग 'राम' शब्द के समान चलते हैं।

ध्यातव्य- इसी प्रकार पुस्तकम्, वनम्, अरण्यम् (जंगल), मुखम्, कुसुमम्, रत्नम्, सुवर्णम्, कमलम्, पर्णम् (पत्ता), पत्रम् (पत्र या पत्ता), मित्रम्, नक्षत्रम्, तृणम्, उद्यानम्, उपवनम्, बीजम्, जलम्, चित्रम्, गगनम् (आकाश), शरीरम्, ज्ञानम्, दुग्धम् (दूध), अन्नम्, दर्पणम् (ऐना, दर्पण), भवनम् (घर), नगरम्, आम्रम् (आम का फल), दुःखम्, सुखम्, दानम्, नयनम् (आँख), नेत्रम्, छत्रम् (छाता) आदि शब्दों के रूप 'गृह' के समान चलते हैं।

(7) 'वारि' (जल) इकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमावारिवारिणीवारीणि
द्वितीयावारिवारिणीवारीणि
तृतीयावारिणावारिभ्याम्वारिभिः
चतुर्थीवारिणेवारिभ्याम्वारिभ्यः
पञ्चमीवारिणःवारिभ्याम्वारिभ्यः
षष्ठीवारिणःवारिणोःवारीणाम्
सप्तमीवारिणिवारिणोःवारिषु
सम्बोधनहे वारे !, वारि !हे वारिणी !हे वारीणि!

(8) 'दधि' (दही) इकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमादधिदधिनीदधिनी
द्वितीयादधिदधिनीदधीनि
तृतीयादध्नादधिभ्याम्दधिभिः
चतुर्थीदध्नेदधिभ्याम्दधिभ्यः
पञ्चमीदध्नःदधिभ्याम्दधिभ्यः
षष्ठीदध्नःदध्नोःदध्नाम्
सप्तमीदध्नि, दधनिदध्नोःदधिषु
सम्बोधनहे दधि!, दधे !हे दधिनी !हे दधीनि !

ध्यातव्य- इसी प्रकार अक्षि (आँख), अस्थि (हड्डी), सक्थि (जाँघ) आदि शब्दों के रूप 'दधि' के समान चलते हैं।

(9) 'मधु' (शहद) उकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमामधुमधुनीमधूनि
द्वितीयामधुमधुनीमधूनि
तृतीयामधुनामधुभ्याम्मधुभिः
चतुर्थीमधुनेमधुभ्याम्मधुभ्यः
पञ्चमीमधुनःमधुभ्याम्मधुभ्यः
षष्ठीमधुनःमधुनोःमधूनाम्
सप्तमीमधुनिमधुनोःमधुषु
सम्बोधनहे मधु!, मधो !हे मधुनी !हे मधूनि !

ध्यातव्य- इसी प्रकार जानु (घुटना), दारु (लकड़ी), तालु, वस्तु, सानु (पर्वत की चोटी) उकारान्त नपुंसकलिंग शब्द हैं। इनके रूप भी 'मधु' के समान चलते हैं।

स्वरान्त (अजन्त) स्त्रीलिंग शब्द

(10) 'रमा' (लक्ष्मी) आकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमारमारमेरमाः
द्वितीयारमाम्रमेरमाः
तृतीयारमयारमाभ्याम्रमाभिः
चतुर्थीरमायैरमाभ्याम्रमाभ्यः
पञ्चमीरमायाःरमाभ्याम्रमाभ्यः
षष्ठीरमायाःरमयोःरमाणाम्
सप्तमीरमायाम्रमयोःरमासु
सम्बोधनहे रमे !हे रमे !हे रमाः!

ध्यातव्य- इसी प्रकार बाला (स्त्रा), ललना (स्त्री), कन्या, निशा (रात), भार्या (स्त्री), राधा, तारा, कला, विद्या, लता, माला, छात्रा, कमला (लक्ष्मी), पूर्णिमा, दया, नासिका (नाक), वाटिका (बाग), कोकिला (कोयल), शोभा, संख्या, सुषमा, सीता, सन्ध्या, धरा (पृथ्वी) आदि आकारान्त स्त्रीलिंग शब्द हैं। इन सभी के रूप 'रमा' के समान चलेंगे।

(11) 'मति' (बुद्धि) इकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमामतिःमतीमतयः
द्वितीयामतिममतीमतीः
तृतीयामत्यामतिभ्याम्मत्तिभिः
चतुर्थीमतये, मत्यैमतिभ्याम्मतिभ्यः
पञ्चमीमतेः, मत्याःमतिभ्याम्मतिभ्यः
षष्ठीमतेः, मत्याःमत्योःमतीनाम्
सप्तमीमतौ, मत्याम्मत्यर्योःमतिसु
सम्बोधनहे मते !हे मती !हे मतयः !

ध्यातव्य- इसी प्रकार बुद्धि, शुद्धि, गति, भक्ति, शक्ति, धूलि, स्मृति, रुचि, शान्ति, रीति, नीति, पङ्क्ति, जाति, गीति, भीति (डर), युक्ति (उपाय), रात्रि, कृति (रचना), सम्पत्ति, विपत्ति, सन्तति (सन्तान) आदि इकारान्त स्त्रीलिंग शब्द हैं। इन सभी के रूप 'मति' के समान चलेंगे। 'पति' शब्द का रूप भी 'मति' के समान ही चलता है। मात्र चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी, सप्तमी विभक्ति के एकवचन रूपों में परिवर्तन होता है। ये रूप क्रमशः पत्ये, पत्युः, पत्युः, पत्यौ होते हैं।

(12) 'नदी' ईकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमानदीनद्यौनद्यः
द्वितीयानदीम्नद्यौनदीः
तृतीयानद्यानदीभ्याम्नदीभिः
चतुर्थीनद्यैनदीभ्याम्नदीभ्यः
पञ्चमीनद्याःनदीभ्याम्नदीभ्यः
षष्ठीनद्याःनद्योःनदीनाम्
सप्तमीनद्याम्नद्योःनदीषु
सम्बोधनहे नदि !हे नद्यौ !हे नद्यः !

ध्यातव्य - (1) इसी प्रकार राज्ञी (रानी), नारी, पार्वती, नटी, पृथ्वी, देवी, अटवी (जंगल), कुन्ती, गौरी, कुमारी, सखी, पुत्री, रजनी, महिषी, मही, मृगी, वापी, दासी, श्रीमती आदि ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्द हैं। इन सभी शब्दों के रूप 'नदी' के समान चलते हैं।
(2) श्री, लक्ष्मी, तरी, तन्त्री आदि शब्दों के प्रथमा विभक्ति एकवचन के रूप में विसर्ग लगते हैं।

(13) 'धेनु' (गाय) उकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाधेनुःधेनूधेनवः
द्वितीयाधेनुम्धेनूधेनूः
तृतीयाधेन्वाधेनुभ्याम्धेनुभिः
चतुर्थीधेनवे, धेन्वैधेनुभ्याम्धेनुभ्यः
पञ्चमीधेनोः, धेन्वाःधेनुभ्याम्धेनुभ्यः
षष्ठीधेनौ, धेन्वाःधेन्वोःधेनूनाम्
सप्तमीधेनौ, धेन्वाम्धेन्वोःधेनुषु
सम्बोधनहे धेनो !हे धेनू !हे धेनवः!

ध्यातव्य- इसी प्रकार तनु (शरीर), रेणु (धूलि), हनु (ठोड़ी) आदि उकारान्त स्त्रीलिंग शब्द हैं। इन सभी शब्दों के रूप 'धेनु' के समान चलते हैं।

(14) 'वधू' (बहू) ऊकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमावधूःवध्वौवध्वः
द्वितीयावधूम्वध्वौवधूः
तृतीयावध्वावधूभ्याम्वधूभिः
चतुर्थीवध्वैवधूभ्याम्वधूभ्यः
पञ्चमीवध्वाःवधूभ्याम्वधूभ्यः
षष्ठीवध्वाःवध्वोःवधूनाम्
सप्तमीवध्वाम्वध्वोःवधूषु
सम्बोधनहे वधु !हे वध्वौ !हे वध्वः !

ध्यातव्य- इसी प्रकार चमू (सेना), तनू (शरीर), रज्जू (रस्सी), श्वश्रू (सास), कर्कन्धू (बेर), जम्बू (जामुन), श्मश्रू (दाढ़ी) आदि ऊकारान्त स्त्रीलिंग शब्द हैं। इन सभी शब्दों के रूप 'वधू' के समान चलते हैं।

व्यञ्जनान्त संज्ञाएँ

(15) 'भगवत्' तकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाभगवान्भगवन्तौभगवन्तः
द्वितीयाभगवन्तम्भगवन्तौभगवतः
तृतीयाभगवताभगवद्भ्याम्भगवद्भिः
चतुर्थीभगवतेभगवद्भ्याम्भगवद्भ्यः
पञ्चमीभगवतःभगवद्भ्याम्भगवद्भ्यः
षष्ठीभगवतःभगवतोःभगवताम्
सप्तमीभगवतिभगवतोःभगवत्सु
सम्बोधनहे भगवन्!हे भगवन्तौ !हे भगवन्त!

ध्यातव्य - इसी प्रकार भवत् (पुं० आप), बुद्धिमत् (बुद्धिमान), बलवत्, श्रुतवत्, गुणवत्, धनवत्, धीमत्, शीलवत्, रूपवत्, शक्तिमत् आदि वत्-मत् प्रत्ययान्त तकारान्त पुंल्लिग शब्द हैं। इनके रूप 'भगवत्' के समान चलते हैं।

(16) 'इन्' प्रत्ययान्त 'करिन्' (हाथी) शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाकरीकरिणौकरिणः
द्वितीयाकरिणम्करिणौकरिणः
तृतीयाकरिणाकरिभ्याम्करिभिः
चतुर्थीकरिणेकरिभ्याम्करिभ्यः
पञ्चमीकरिणःकरिभ्याम्करिभ्यः
षष्ठीकरिणःकरिणोःकरीणाम्
सप्तमीकरिणिकरिणोःकरिषु
सम्बोधनहे करिन् !हे करिणौ !हे करिणः !

ध्यातव्य- संन्यासिन्, दण्डिन्, तपस्विन्, धनिन्, स्वामिन्, यशस्विन्, दानिन्, ज्ञानिन्, विद्यार्थिन्, हस्तिन्, गुणिन्, मन्त्रिन्, पक्षिन्, वाजिन् (घोड़ा), बलिन्, सुखिन् आदि 'इन्' प्रत्ययान्त पुंल्लिग शब्द हैं। इन सभी के रूप 'करिन्' शब्द के समान चलते हैं।

(17) 'राजन्' नकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाराजाराजानौराजान्:
द्वितीयाराजानम्राजानौराज्ञः
तृतीयाराज्ञाराजभ्याम्राजभिः
चतुर्थीराज्ञेराजभ्याम्राजभ्यः
पञ्चमीराज्ञःराजभ्याम्राजभ्यः
षष्ठीराज्ञःराज्ञोःराज्ञाम्
सप्तमीराज्ञि, राजनिराज्ञोःराजसु
सम्बोधनहे राजन् !हे राजानौ !हे राजानः!

(18) 'जगत्' तकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाजगत्जगतीजगन्ति
द्वितीयाजगत्जगतीजगन्ति
तृतीयाजगताजगद्भ्याम्जगद्भिः
चतुर्थीजगतेजगद्भ्याम्जगद्भ्यः
पञ्चमीजगतःजगद्भ्याम्जगद्भ्यः
षष्ठीजगतःजगतोःजगताम्
सप्तमीजगतिजगतोःजगत्सु
सम्बोधनहे जगत् !हे जगती !हे जगन्ति !

ध्यातव्य- इसी प्रकार पठत्, रुदत्, तरत्, ददत् आदि तकारान्त नपुंसकलिंग शब्दों के रूप चलते हैं।

(19) 'नामन्' नकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमानामनामनी, नाम्नीनामानि
द्वितीयानामनामनी, नाम्नीनामानि
तृतीयानाम्नानामभ्याम्नामभिः
चतुर्थीनाम्नेनामभ्याम्नामभ्यः
पञ्चमीनाम्नःनामभ्याम्नामभ्यः
षष्ठीनाम्नःनाम्नोःनाम्नाम्
सप्तमीनाम्नि, नामनिनाम्नोःनामसु
सम्बोधनहे नाम!, नामन् !हे नाम्नी !हे नामानि !

ध्यातव्य - व्योमन् (आकाश), धामन् (घर, तेज), प्रेमन् (प्रेम), सामन् (सामवेद का मन्त्र) आदि नकारान्त नपुंसकलिंग शब्द हैं। इनके रूप 'नामनू' शब्द के समान चलते हैं।

(20) 'मनस्' सकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमामनःमनसीमनांसि
द्वितीयामनःमनसीमनांसि .
तृतीयामनसामनोभ्याम्मनोभिः
चतुर्थीमनसेमनोभ्याम्मनोभ्यः
पञ्चमीमनसःमनोभ्याम्मनोभ्यः
षष्ठीमनसःमनसोःमनसाम्
सप्तमीमनसिमनसोःमनस्सु, मनःसु
सम्बोधनहे मनः !हे मनसी !हे मनांसि !

ध्यातव्य- इसी प्रकार नभस् (आकाश), अम्भस् (पानी), उरस् (छाती), पयस् (दूध या पानी), रजस् (धूल), वयस् (उम्र), वक्षस् (छाती), अयस् (लोहा), तमस् (अन्धकार), वर्चस् (वचन), यशस् (कीर्ति), तेजस्, तपस्, शिरस्, सरस् (तालाब) इत्यादि सकारान्त नपुंसकलिंग शब्द हैं। इन सभी के रूप 'मनस्' के समान चलेंगे।

(21) 'वाच्' (वाणी) चकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमावाक्, वाग्वाचौवाचः
द्वितीयावाचम्वाचौवाचः
तृतीयावाचावाग्भ्याम्वाग्भिः
चतुर्थीवाचेवाग्भ्याम्वाग्भ्यः
पञ्चमीवाचःवाग्भ्याम्वाग्भ्यः
षष्ठीवाचःवाचोःवाचाम्
सप्तमीवाचिवाचोःवाक्षु
सम्बोधनहे वाक् !हे वाचौ !हे वाचः!

(22) 'सरित्' तकारान्त शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासरित्सरितौसरितः
द्वितीयासरितम्सरितौसरितः
तृतीयासरितासरिद्भ्याम्सरिद्भिः
चतुर्थीसरितेसरिद्भ्याम्सरिद्भ्यः
पञ्चमीसरितःसरिद्भ्याम्सरिद्भ्यः
षष्ठीसरितःसरितोःसरिताम्
सप्तमीसरितिसरितोःसरित्सु
सम्बोधनहे सरित् !हे सरितौ !हे सरितः !

ध्यातव्य- इसी प्रकार, विद्युत (बिजली), हरित् (हरा, घास, दिशा), योषित् (स्त्री) आदि तकारान्त शब्दों के रूप 'सरित्' के समान चलेंगे।

सर्वनाम शब्द

जो शब्द संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयुक्त किये जाते हैं, वे सर्वनाम कहे जाते हैं; जैसे-सर्व, तद्, किम्, युष्मद्, अस्मद् आदि। युष्मद् और अस्मद् को छोड़कर सर्वनाम शब्दों के रूप तीनों लिंगों में अलग-अलग बनते हैं। विशेष - सर्वनाम शब्दों के सम्बोधन में रूप नहीं चलते हैं।

(1) 'सर्व' (सब) पुंल्लिग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासर्वःसर्वोसर्वे
द्वितीयासर्वम्सर्वोसर्वान्
तृतीयासर्वेणसर्वाभ्याम्सर्वैः
चतुर्थीसर्वस्मैसर्वाभ्याम्सर्वेभ्यः
पञ्चमीसर्वस्मात्सर्वाभ्याम्सर्वेभ्यः
षष्ठीसर्वस्यसर्वयोःसर्वेषाम्
सप्तमीसर्वस्मिन्सर्वयोःसर्वेषु

'सर्व' नपुंसकलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासर्वम्सर्वेसर्वाणि
द्वितीयासर्वम्सर्वेसर्वाणि

विशेष-शेष तृत्तीया से सप्तमी तक के रूप सर्व (पुंल्लिग) के समान चलेंगे।

'सर्व' स्त्रीलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासर्वासर्वेसर्वाः
द्वितीयासर्वाम्सर्वेसर्वाः
तृतीयासर्वयासर्वाभ्याम्सर्वाभिः
चतुर्थीसर्वस्यैसर्वाभ्याम्सर्वाभ्यः
पञ्चमीसर्वस्याःसर्वाभ्याम्सर्वाभ्यः
षष्ठीसर्वस्याःसर्वयोःसर्वासाम्
सप्तमीसर्वस्याम्सर्वयोःसर्वासु

(2) 'तत्' या तद् (वह) पुंल्लिग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासःतौते
द्वितीयातम्तौतान्
तृतीयातेनताभ्याम्तैः
चतुर्थीतस्मैताभ्याम्तेभ्यः
पञ्चमीतस्मात्ताभ्याम्तेभ्यः
षष्ठीतस्यतयोःतेषाम्
सप्तमीतस्मिन्तयोःतेषु

'तद्' नपुंसकलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमातत्, तद्तेतानि
द्वितीयातत्, तद्तेतानि..

विशेष - शेष तृतीया से सप्तमी विभक्ति के रूप तद् (पुंल्लिग) के समान चलेंगे।

'तद्' स्त्रीलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासातेताः
द्वितीयाताम्तेताः
तृतीयातयाताभ्याम्ताभिः
चतुर्थीतस्यैताभ्याम्ताभ्यः
पञ्चमीतस्याःताभ्याम्ताभ्यः
षष्ठीतस्याःतयोःतासाम्
सप्तमीतस्याम्तयोःतासु

(3) 'यद्' (जो) पुंल्लिग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमायःयौये
द्वितीयायम्यौयान्
तृतीयायेनयाभ्याम्यैः
चतुर्थीयस्मैयाभ्याम्येभ्यः
पञ्चमीयस्मात्याभ्याम्येभ्यः
षष्ठीयस्यययोःयेषाम्
सप्तमीयस्मिन्ययोःयेषु

'यद्' नपुंसकलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमायद्, यत्येयानि
द्वितीयायद्, यत्येयानि

'यद्' स्त्रीलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमायायेयाः
द्वितीयायाम्येयाः
तृतीयाययायाभ्याम्याभिः
चतुर्थीयस्यैयाभ्याम्याभ्यः
पञ्चमीयस्याःयाभ्याम्याभ्यः
षष्ठीयस्याःययोःयासाम्
सप्तमीयस्याम्ययोःयासु

(4) 'किम्' (क्या कौन) पुंल्लिग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाकःकौके
द्वितीयाकम्कौकान्
तृतीयाकेनकाभ्याम्कैः
चतुर्थीकस्मैकाभ्याम्केभ्यः
पञ्चमीकस्मात्काभ्याम्केभ्यः
षष्ठीकस्यकयोःकेषाम्
सप्तमीकस्मिन्कयोःकेषु

'किम्' नपुंसकलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाकिम्केकानि
द्वितीयाकिम्केकानि

विशेष-शेष तृतीया से सप्तमी विभक्ति तक के रूप किम् (पुंल्लिग) के समान चलेंगे।

'किम्' स्त्रीलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाकाकेकाः
द्वितीयाकाम्केकाः
तृतीयाकयाकाभ्याम्काभिः
चतुर्थीकस्यैकाभ्याम्काभ्यः
पञ्चमीकस्याःकाभ्याम्काभ्यः
षष्ठीकस्याःकयोःकासाम्
सप्तमीकस्याम्कयोःकासु

(5) 'इदम्' (यह) पुंल्लिग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाअयम्इमौइमे
द्वितीयाइमम्, एनम्इमौ, एनौइमान्, एनान्
तृतीयाअनेन, एनेनआभ्याम्एभिः
चतुर्थीअस्मैआभ्याम्एभ्यः
पञ्चमीअस्मात्आभ्याम्एभ्यः
षष्ठीअस्यअनयोः, एनयोःएषाम्
सप्तमीअस्मिन्अनयोः, एनयोःएषु

'इदम्' नपुंसकलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाइदम्इमेइमानि
द्वितीयाइदम्, एनत्इमे, एनेइमानि, एनानि

विशेष-शेष तृतीया से सप्तमी विभक्ति तक के रूप इदम् (पुंल्लिग) के समान चलेंगे।

'इदम्' स्त्रीलिंग शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाइयम्इमेइमाः
द्वितीयाइमाम्, एनाम्इमे, एनेइमाः, एनाः
तृतीयाअनया, एनयाआभ्याम्आभिः
चतुर्थीअस्यैआभ्याम्आभ्यः
पञ्चमीअस्याःआभ्याम्आभ्यः
षष्ठीअस्याःअनयोः, एनयोःआसाम्
सप्तमीअस्याम्अनयोः, एनयोःआसु

(6) 'अस्मद्' (मैं, हम) उत्तमपुरुषवांची शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाअहम्आवाम्वयम्
द्वितीयामाम्, माआवाम्, नौअस्मान्, नः
तृतीयामयाआवाभ्याम्अस्माभिः
चतुर्थीमह्यम्, मेआवाभ्याम्, नौअस्मभ्यम्, नः
पञ्चमीमत्आवाभ्याम्अस्मत्
षष्ठीमम्, मेआवयोः, नौअस्माकम्, नः
सप्तमीमयिआवयोः, नौअस्मासु

(7) 'युष्मद्' (तू, तुम) मध्यमपुरुषवाची शब्द

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमात्वम्युवाम्यूयम्
द्वितीयात्वाम्, त्वायुवाम्, वाम्युष्मान्, वः
तृतीयात्वयायुवाभ्याम्युष्माभिः
चतुर्थीतुभ्यम्, तेयुवाभ्याम्, वाम्युष्मभ्यम्, वः
पञ्चमीत्वत्युवाभ्याम्युष्मत्
षष्ठीतव, तेयुवयोः, वाम्युष्माकम्, वः
सप्तमीत्वयियुवयोः, वाम्युष्मासु

संख्यावाचक विशेषण

(1) 'एक' से 'चतुर्' शब्द तक संख्या-वाचक शब्दों के रूप तीनों लिंगों में भिन्न-भिन्न चलते हैं। शेष संख्याओं के तीनों लिंगों में एक समान रूप होते हैं।
(2) 'एक' शब्द के एकवचन में, 'द्वि' शब्द के द्विवचन में और शेष संख्यावाचकों के बहुवचन में रूप चलते हैं।

(1) एकवचनान्त 'एक' शब्द

विभक्तिपुंल्लिगनपुंसकलिंगस्त्रीलिंग
प्रथमाएकःएकम्एका
द्वितीयाएकम्एकम्एकाम्
तृतीयाएकेनएकेनएकया
चतुर्थीएकस्मैएकस्मैएकस्यै
पञ्चमीएकस्मात्एकस्मात्एकस्याः
षष्ठीएकस्यएकस्यएकस्याः
सप्तमीएकस्मिन्एकस्मिन्एकस्याम्

(2) द्विवचनान्त 'द्वि' (दो) शब्द

विभक्तिःपुंल्लिगनपुं०/स्त्री०
प्रथमाद्वौद्वे
द्वितीयाद्वौद्वे
तृतीयाद्वाभ्याम्द्वाभ्याम्
चतुर्थीद्वाभ्याम्द्वाभ्याम्
पञ्चमीद्वाभ्याम्द्वाभ्याम्
षष्ठीद्वयोःद्वयोः
सप्तमीद्वयोःद्वयोः

(3) बहुवचनान्त 'त्रि' (तीन) शब्द

विभक्तिपुंल्लिगनपुंसकलिंगस्त्रीलिंग
प्रथमात्रयःत्रीणितिस्रः
द्वितीयात्रीन्त्रीणितिस्रः
तृतीयात्रिभिःत्रिभिःतिसृभिः
चतुर्थीत्रिभ्यःत्रिभ्यःतिसृभ्यः
पञ्चमीत्रिभ्यःत्रिभ्यःतिसृभ्यः
षष्ठीत्रयाणाम्त्रयाणाम्तिसृणाम्
सप्तमीत्रिषुत्रिषुतिसृषु

(4) बहुवचनान्त 'चतुर्' (चार) शब्द

विभक्तिपुंल्लिगनपुंसकलिंगस्त्रीलिंग
प्रथमाचत्वारःचत्वारिचतस्रः
द्वितीयाचतुरःचत्वारिचतस्रः
तृतीयाचतुर्भिःचतुर्भिःचतसृभिः
चतुर्थीचतुर्थ्यःचतुर्थ्यःचतसृभ्यः
पञ्चमीचतुर्थ्यःचतुर्थ्यःचतसृभ्यः
षष्ठीचतुर्णाम्, चतुर्णाम्चतुर्णाम्चतसृणाम्
सप्तमीचतुर्षुचतुर्षुचतसृषु

पुंल्लिग, नपुंसकलिंग तथा स्त्रीलिंग में एकसमान

विभक्ति(5) 'पञ्चन्'(6) 'षट्'
प्रथमापञ्चषट्, षड्
द्वितीयापञ्चषट्, षड्
तृतीयापञ्चभिःषद्भिः
चतुर्थीपञ्चभ्यःषड्भ्यः
पञ्चमीपञ्चभ्यःषड्भ्यः
षष्ठीपञ्चानाम्षण्णाम्
सप्तमीपञ्चसुषट्सु, षटत्सु
विभक्ति(7) 'सप्तन्' (सात)(8) 'अष्टन्' (आठ)
प्रथमासप्तअष्टौ, अष्ट
द्वितीयासप्तअष्टौ, अष्ट
तृतीयासप्तभिःअष्टभिः, अष्टाभिः
चतुर्थीसप्तभ्यःअष्टभ्यः, अष्टाभ्यः
पञ्चमीसप्तभ्यःअष्टभ्यः, अष्टाभ्यः
षष्ठीसप्तानाम्अष्टनाम्, अष्टानाम्
सप्तमीसप्तसुअष्टसु, अष्टासु
विभक्ति(9) 'नवन्' (नौ)(10) 'दशन्' (दस)
प्रथमानवदश
द्वितीयानवदश
तृतीयानवभिःदशभिः
चतुर्थीनवभ्यःदशभ्यः
पञ्चमीनवभ्यःदशभ्यः
षष्ठीनवानाम्दशानाम्
सप्तमीनवसुदशंसु

ध्यातव्य - (1) सभी नकारान्तवाची (एका-दशन् से अष्टादशन्) शब्दों के रूप 'पञ्चन्' शब्द के समान तीनों लिंगों में एकसमान चलते हैं।
(2) एकोनविंशतिः (19) से लेकर सभी संख्यावाची शब्दों के रूप स्त्रीलिंग और एकवचन में ही होते हैं।
(3) इकारान्त स्त्रीलिंग (एकोनविंशतिः आदि) संख्यावाची शब्दों के रूप 'मति' के समान चलते हैं।
(4) 'शत्' अन्त वाले (त्रिंशत्, चत्वारिंशत्, पञ्चाशत्) संख्यावाची शब्दों के रूप 'विपद्' शब्द के समान चलते हैं।
(5) षष्टिः, सप्ततिः, अशीतिः, नवतिः आदि सभी इकारान्त शब्दों के रूप 'मति' के समान चलते हैं।

एक से सौ तक संख्यावाची शब्द

1. एकः, एकम्, एका
2. द्वौ, द्वे, द्वे
3. त्रयः त्रीणि, तिस्स्रः
4. चत्वारः, चत्वारि, चतस्रः
5. पञ्च
6. षट्, षड्
7. सप्त
8. अष्टौ, अष्ट
9. नव
10. दश
11. एकादश
12. द्वादश
13. त्रयोदश
14. चतुर्दश
15. पञ्चदश
16. षोडश
17. सप्तदश
118. अष्टादश
19. नवदश, एकोनविंशतिः, एकान्नविंशति, ऊनविंशतिः
20. विंशतिः
21. एकविंशतिः
22. द्वाविंशतिः
23. त्रयोविंशतिः
24. चतुर्विंशतिः
25. पञ्चविंशतिः
26. षड्विंशतिः
27. सप्तविंशतिः
28. अष्टाविंशतिः
29. एकोनत्रिंशत्, एकान्नत्रिंशत्, ऊनत्रिंशत्, नवविंशतिः
30. त्रिंशत्
31. एकत्रिंशत्
32. द्वात्रिंशत्
33. त्रयस्त्रिंशत्
34. चतुस्त्रिंशत्
35. पञ्चत्रिंशत्
36. षट्त्रिंशत्
37. सप्तत्रिंशत्
38. अष्टात्रिंशत्
39. नवत्रिंशत्, ऊनचत्वारिंशत्, एकोनचत्वारिंशत्, एकान्नचत्वारिंशत्
40. चत्वारिंशत्
41. एकचत्वारिंशत्
42. द्वाचत्वारिंशत्, द्विचत्वारिंशत्
43. त्रयश्चत्वारिंशत्, त्रिचत्वारिंशत्
44. चतुश्चत्वारिंशत्
45. पञ्चचत्वारिंशत्
46. षट्चत्वारिंशत्
47. सप्तचत्वारिंशत्
48. अष्टचत्वारिंशत्, अष्टाचत्वारिंशत्
49. नवचत्वारिंशत्, ऊनपञ्चाशत्, एकोनपञ्चाशत्, एकान्नपञ्चाशत्
64. चतुष्षष्टिः
65. पञ्चषष्टिः
66. षट्षष्टिः
67. सप्तषष्टिः
68. अष्टषष्टिः, अष्टाषष्टिः
69. नवषष्टिः, ऊनसप्ततिः, एकोनसप्ततिः, एकान्नसप्ततिः
70. सप्ततिः
71. एकसप्ततिः
72. द्विसप्ततिः, द्वासप्ततिः
73. त्रिसप्ततिः, त्रयस्सप्ततिः
74. चतुस्सप्ततिः
75. पञ्चसप्ततिः
76. षट्सप्ततिः
77. सप्तसप्ततिः
78. अष्टसप्ततिः, अष्टासप्ततिः
79. नवसप्ततिः, ऊनाशीतिः, एकोनाशीतिः, एकान्नाशीतिः
80. अशीतिः
81. एकाशीतिः
82. द्वयशीतिः
83. त्र्यशीतिः
84. चतुरशीतिः
85. पञ्चाशीतिः
86. षडशीतिः
87. सप्ताशीतिः
88. अष्टाशीतिः
89. नवाशीतिः, ऊननवतिः, एकोननवतिः, एकान्ननवतिः ।
90. नवतिः
91. एकनवतिः
92. द्विनवतिः, द्वानवतिः
93. त्रिनवतिः त्रयोनवतिः

 

Question 1. 'राम' शब्द रूप कैसा है?
(क) अकारान्त
(ख) मकारान्त
(ग) आकारान्त
(घ) इकारान्त
Answer: (क) अकारान्त
In simple words: 'राम' शब्द अकारान्त होता है, जिसका अर्थ है कि यह 'अ' स्वर से समाप्त होता है।

🎯 Exam Tip: शब्द रूपों के प्रकार (जैसे अकारान्त, इकारान्त) को समझना मूल शब्दों के सही विभक्तियों को पहचानने की कुंजी है।

 

Question 2. 'राम' शब्द का तृतीया बहुवचन में रूप होता है-
(क) रामेभ्यः
(ख) रामेण
(ग) रामाभ्याम्
(घ) रामैः
Answer: (घ) रामैः
In simple words: 'राम' शब्द का तृतीया विभक्ति, बहुवचन में रूप 'रामैः' होता है।

🎯 Exam Tip: तृतीया बहुवचन के रूप प्रायः 'भिः' प्रत्यय से बनते हैं, लेकिन अकारान्त शब्दों में विशेष रूप से 'ऐः' प्रत्यय का प्रयोग होता है।

 

Question 3. 'रामाय' शब्द किस विभक्ति और किस वचन का रूप है?
(क) पञ्चमी और एकवचन :
(ख) षष्ठी और द्विवचन
(ग) चतुर्थी और बहुवचन
(घ) चतुर्थी और एकवचन
Answer: (घ) चतुर्थी और एकवचन
In simple words: 'रामाय' शब्द 'राम' का चतुर्थी विभक्ति, एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'राम के लिए' होता है।

🎯 Exam Tip: चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग संप्रदान कारक में होता है, जिसका अर्थ 'के लिए' या 'को' (देने के अर्थ में) होता है।

 

Question 4. हरि शब्द का रूप किसकी भाँति चलेगा?
(क) दधि की
(ख) मति की ।
(ग) वारि की
(घ) मुनि की
Answer: (घ) मुनि की
In simple words: 'हरि' एक इकारान्त पुंल्लिग शब्द है, इसलिए इसका रूप 'मुनि' जैसे अन्य इकारान्त पुंल्लिग शब्दों की तरह चलता है।

🎯 Exam Tip: समान स्वरान्त या व्यंजनान्त वाले शब्दों के रूप एक जैसे चलते हैं, जिससे उन्हें याद रखना आसान हो जाता है।

 

Question 5. हरौ' शब्द किस विभक्ति और किस वचन का रूप है?
(क) प्रथमा और द्विवचन का
(ख) सप्तमी और एकवचन का
(ग) द्वितीया और द्विवचन को ।
(घ) षष्ठी और द्विवचन का
Answer: (ख) सप्तमी और एकवचन का
In simple words: 'हरौ' शब्द 'हरि' का सप्तमी विभक्ति, एकवचन का रूप है।

🎯 Exam Tip: सप्तमी विभक्ति अधिकरण कारक को दर्शाती है और इसका अर्थ 'में' या 'पर' होता है।

 

Question 6. 'गुरु' शब्द का द्वितीया द्विवचन में रूप होगा
(क) गुरौ
(ख) गुरोः ।
(ग) गुरवः
(घ) गुरू
Answer: (घ) गुरू
In simple words: 'गुरु' शब्द (उकारान्त पुंल्लिग) का द्वितीया विभक्ति, द्विवचन में रूप 'गुरू' होता है।

🎯 Exam Tip: उकारान्त शब्दों के द्विवचन रूपों में अक्सर दीर्घ 'ऊ' ध्वनि आती है, जैसे 'गुरू' या 'भानू'।

 

Question 7. 'गुरवः' शब्द किस विभक्ति और किस वचन का रूप है?
(क) सप्तमी और द्विवचन का ।
(ख) चतुर्थी और एकवचन का
(ग) प्रथमा और बहुवचनं का
(घ) द्वितीया और बहुवचन का
Answer: (ग) प्रथमा और बहुवचनं का
In simple words: 'गुरवः' शब्द 'गुरु' का प्रथमा विभक्ति, बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'अनेक गुरु' होता है।

🎯 Exam Tip: बहुवचन रूप पहचानने से वाक्य में क्रिया और कर्ता के बीच सही समन्वय स्थापित करने में मदद मिलती है।

 

Question 8. 'रमा' शब्द किस प्रकार का है?
(क) अकारान्त स्त्रीलिंग
(ख) आकारान्त स्त्रीलिंग
(ग) अकारान्त पुंल्लिग
(घ) आकारान्त पुंल्लिग
Answer: (ख) आकारान्त स्त्रीलिंग
In simple words: 'रमा' शब्द 'आ' स्वर से समाप्त होता है और स्त्रीलिंग है, इसलिए यह एक आकारान्त स्त्रीलिंग शब्द है।

🎯 Exam Tip: आकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के रूप 'रमा' की तरह ही चलते हैं, जैसे 'माला', 'लता' आदि।

 

Question 9. 'रमाभिः' शब्द किस विभक्ति और किस वचन का रूप है?
(क) चतुर्थी और बहुवचन का
(ख) पञ्चमी और बहुवचन का
(ग) तृतीया और बहुवचन का।
(घ) द्वितीया और बहुवचन का।
Answer: (ग) तृतीया और बहुवचन का।
In simple words: 'रमाभिः' शब्द 'रमा' का तृतीया विभक्ति, बहुवचन का रूप है।

🎯 Exam Tip: स्त्रीलिंग शब्दों के तृतीया बहुवचन में अक्सर 'भिः' प्रत्यय का प्रयोग होता है।

 

Question 10. 'रमा' शब्द का षष्ठी द्विवचन का रूप होगा-
(क) रमायाः
(ख) रमयोः (ग) रमायै (घ) रमया
Answer: (ख) रमयोः
In simple words: 'रमा' शब्द का षष्ठी विभक्ति, द्विवचन में रूप 'रमयोः' होता है।

🎯 Exam Tip: षष्ठी विभक्ति संबंध कारक को दर्शाती है और इसका अर्थ 'का, के, की' होता है।

 

Question 11. 'मति' शब्द का रूप किसके समान नहीं चलेगा
(क) सम्पत्ति के
(ख) सरित् के
(ग) नीति के
(घ) भक्ति के
Answer: (ख) सरित् के
In simple words: 'मति' एक इकारान्त स्त्रीलिंग शब्द है, जबकि 'सरित्' एक तकारान्त स्त्रीलिंग शब्द है, इसलिए 'सरित्' का रूप 'मति' के समान नहीं चलेगा।

🎯 Exam Tip: शब्द रूपों का निर्धारण मुख्य रूप से उनके अंतिम स्वर या व्यंजन (अजन्त/हलन्त) और उनके लिंग पर निर्भर करता है।

 

Question 12. 'मत्योः' शब्द रूप की विभक्ति और वचन है
(क) सप्तमी और द्विवचन
(ख) पञ्चमी और एकवचन
(ग) चतुर्थी और एकवचन ।
(घ) षष्ठी और एकवचन
Answer: (क) सप्तमी और द्विवचन
In simple words: 'मत्योः' शब्द 'मति' का षष्ठी द्विवचन या सप्तमी द्विवचन का रूप है।

🎯 Exam Tip: कुछ शब्द रूपों में एक ही रूप भिन्न-भिन्न विभक्तियों और वचनों में पाया जा सकता है, जिन्हें संदर्भ से समझना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 13. द्वितीया विभक्ति के द्विवचन में 'मति' शब्द का रूप होगा
(क) मत्योः
(ख) मती
(ग) मत्यौ
घ) मत्यै
Answer: (ख) मती
In simple words: 'मति' शब्द का द्वितीया विभक्ति, द्विवचन में रूप 'मती' होता है।

🎯 Exam Tip: इकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के द्वितीया द्विवचन रूपों में प्रायः 'ई' की ध्वनि आती है, जैसे 'मती', 'बुद्धी'।

 

Question 14. 'वाच्' शब्द कैसा है?
(क) हलन्त पुंल्लिगे ।
(ख) चकारान्त स्त्रीलिंग ।
(ग) चकारान्त पुंल्लिग
(घ) चकारान्त नपुंसकलिंग ।
Answer: (ख) चकारान्त स्त्रीलिंग ।
In simple words: 'वाच्' शब्द 'च' व्यंजन पर समाप्त होता है और स्त्रीलिंग है, इसलिए यह एक चकारान्त स्त्रीलिंग शब्द है।

🎯 Exam Tip: हलन्त (व्यंजनान्त) शब्दों के रूप थोड़े जटिल होते हैं और इन्हें उनके अंतिम व्यंजन के आधार पर पहचाना जाता है।

 

Question 15. सप्तमी बहुवचन में 'वाच्' शब्द का क्या रूप होगा? ।
(क) वाचशु
(ख) वाचषु
(ग) वाचसु
(घ) वाक्षु
Answer: (घ) वाक्षु
In simple words: 'वाच्' शब्द का सप्तमी विभक्ति, बहुवचन में रूप 'वाक्षु' होता है।

🎯 Exam Tip: हलन्त शब्दों के सप्तमी बहुवचन में 'सु' या 'षु' प्रत्यय का प्रयोग होता है, जो संधि नियमों के अनुसार बदल सकता है।

 

Question 16. 'वाच्' शब्द का प्रथमा विभक्ति और एकवचन का रूप होगा
(क) वाचः
(ख) वाणी
(ग) वाक् (घ) वाचम्
Answer: (ग) वाक्
In simple words: 'वाच्' शब्द का प्रथमा विभक्ति, एकवचन में रूप 'वाक्' (या वाग्) होता है।

🎯 Exam Tip: व्यंजन संधि के नियमों के कारण प्रथमा एकवचन में मूल शब्द के अंतिम व्यंजन में परिवर्तन हो सकता है।

 

Question 17. 'सर्व' नपुंसकलिंग शब्द का तृतीया बहुवचन में क्या रूप होगा?
(क) सर्वैः (ख) सर्वस्यै । (ग) स्वर से पहले (घ) सर्वेभ्यः
Answer: (क) सर्वैः
In simple words: 'सर्व' नपुंसकलिंग शब्द का तृतीया बहुवचन में रूप 'सर्वैः' होता है, जो पुंल्लिग के समान ही है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम शब्दों में नपुंसकलिंग के रूप अक्सर प्रथमा और द्वितीया को छोड़कर पुंल्लिग के समान होते हैं।

 

Question 18. 'तद्' नपुंसकलिंग का द्वितीया बहुवचन में क्या रूप होगा?
(क) तान्
(ख) तानि
(ग) ते ।
(घ) ताः
Answer: (ख) तानि
In simple words: 'तद्' नपुंसकलिंग शब्द का द्वितीया बहुवचन में रूप 'तानि' होता है।

🎯 Exam Tip: नपुंसकलिंग शब्दों के प्रथमा और द्वितीया बहुवचन में 'अनि' प्रत्यय का प्रयोग होता है।

 

Question 19. 'नौ' किस शब्द और वचन का रूप है?
(क) न शब्द, प्रथमा, द्विवचन ।
(ख) अस्मद् शब्द, द्वितीया, द्विवचन
(ग) नव शब्द, चतुर्थी, द्विवचन
(घ) नो शब्द, द्वितीया, द्विवचन
Answer: (ख) अस्मद् शब्द, द्वितीया, द्विवचन
In simple words: 'नौ' शब्द 'अस्मद्' (मैं) सर्वनाम का द्वितीया विभक्ति, द्विवचन का वैकल्पिक रूप है, जिसका अर्थ 'हम दोनों को' होता है।

🎯 Exam Tip: सर्वनामों के वैकल्पिक रूप (जैसे 'मा', 'मे', 'नौ') संस्कृत भाषा में सामान्य हैं और इन्हें विशेष रूप से याद रखना चाहिए।

 

Question 20. 'अस्मद्' शब्द का इनमें से सही रूप कौन-सा है?
(क) मयी
(ख) माम
(ग) मम
(घ) मम्
Answer: (ग) मम
In simple words: 'अस्मद्' (मैं) सर्वनाम का षष्ठी विभक्ति, एकवचन में रूप 'मम' होता है, जिसका अर्थ 'मेरा' होता है।

🎯 Exam Tip: 'अस्मद्' और 'युष्मद्' के रूप तीनों लिंगों में समान रहते हैं और इन्हें प्रायः याद कर लेना चाहिए।

 

Question 21. 'त्वम्' किस शब्द और वचन का रूप है?
(क) तू शब्द और प्रथमा एकवचन का
(ख) युष्मद् शब्द और प्रथमा एकवचन का
(ग) अस्मद् शब्द और प्रथमा एकवचन का
(घ) स शब्द और तृतीया एकवचन का
Answer: (ख) युष्मद् शब्द और प्रथमा एकवचन का
In simple words: 'त्वम्' शब्द 'युष्मद्' (तुम) सर्वनाम का प्रथमा विभक्ति, एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'तुम' होता है।

🎯 Exam Tip: 'युष्मद्' और 'अस्मद्' सर्वनामों के प्रथमा एकवचन के रूप वाक्यों की शुरुआत में कर्ता के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

 

Question 22. 'युष्मद्' का द्वितीया बहुवचन में कौन-सा रूप होगा?
(क) त्वाम्
(ख) युष्मान् (ग) यूयम् (घ) युवाम्
Answer: (ख) युष्मान्
In simple words: 'युष्मद्' (तुम) सर्वनाम का द्वितीया विभक्ति, बहुवचन में रूप 'युष्मान्' होता है, जिसका अर्थ 'तुम सबको' होता है।

🎯 Exam Tip: द्वितीया विभक्ति कर्म कारक को दर्शाती है और इसका अर्थ 'को' होता है।

 

Question 23. 'अस्मद्' शब्द का' अस्मत्' रूप किस विभक्ति और वचन में बनता है?
(क) प्रथमा बहुवचन में ।
(ख) षष्ठी एकवचन में ।
(ग) पञ्चमी बहुवचन में
(घ) सप्तमी एकवचन में
Answer: (ग) पञ्चमी बहुवचन में
In simple words: 'अस्मत्' शब्द 'अस्मद्' (मैं) सर्वनाम का पञ्चमी विभक्ति, बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'हम सबसे' (अलग होने के अर्थ में) होता है।

🎯 Exam Tip: पञ्चमी विभक्ति अपादान कारक को दर्शाती है और इसका अर्थ 'से' (अलग होने के अर्थ में) होता है।

 

Question 24. 'तद्' सर्वनाम नपुंसकलिंग का' तस्मै' रूप बनता है
(क) प्रथमा में
(ख) चतुर्थी में
(ग) पञ्चमी में
(घ) सप्तमी में
Answer: (ख) चतुर्थी में
In simple words: 'तस्मै' शब्द 'तद्' सर्वनाम का चतुर्थी विभक्ति, एकवचन का रूप है, जिसका प्रयोग पुंल्लिग और नपुंसकलिंग दोनों में होता है।

🎯 Exam Tip: सर्वनामों के रूप याद करते समय उनके लिंग और वचन के अनुसार होने वाले परिवर्तनों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 25. 'वाग्भिः' रूप किस विभक्ति के किस वचन का है? ।
(क) तृतीया के बहुवचन का।
(ख) चतुर्थी के द्विवचन का।
(ग) षष्ठी के द्विवचन का
(घ) सप्तमी के एकवचन का
Answer: (क) तृतीया के बहुवचन का।
In simple words: 'वाग्भिः' शब्द 'वाच्' (वाणी) का तृतीया विभक्ति, बहुवचन का रूप है।

🎯 Exam Tip: तृतीया बहुवचन में 'भिः' प्रत्यय का प्रयोग होता है, जो हलन्त शब्दों के साथ संधि नियमों के कारण बदल सकता है।

 

Question 26. 'युष्मत्' रूप किस विभक्ति के किस वचन का है?
(क) पञ्चमी के बहुवचन का
(ख) षष्ठी के एकवचन का
(ग) सप्तमी के द्विवचन का न का
(घ) षष्ठी के द्विवचन का ।
Answer: (क) पञ्चमी के बहुवचन का
In simple words: 'युष्mत्' शब्द 'युष्mद्' (तुम) सर्वनाम का पञ्चमी विभक्ति, बहुवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'तुम सबसे' होता है।

🎯 Exam Tip: 'युष्mद्' और 'अस्मद्' के पञ्चमी बहुवचन रूप 'युष्mत्' और 'अस्मत्' होते हैं।

 

Question 27. 'अस्मद्' शब्द कामया' रूप बनता है
(क) द्वितीया विभक्ति में
(ख) चतुर्थी विभक्ति में
(ग) पञ्चमी विभक्ति में ।
(घ) तृतीया विभक्ति में
Answer: (घ) तृतीया विभक्ति में
In simple words: यदि 'कामया' शब्द 'मया' का एक त्रुटिपूर्ण रूप है, तो 'मया' शब्द 'अस्मद्' सर्वनाम का तृतीया विभक्ति, एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ 'मेरे द्वारा' होता है।

🎯 Exam Tip: विभक्ति और वचन के आधार पर शब्दों के अंत में लगने वाले प्रत्ययों को ध्यानपूर्वक समझें।

 

Question 28. 'ऊननवतिः' संख्यावाची शब्द का मान है
(क) 89 (ख) 91 (ग) 99 (घ) 79
Answer: (क) 89
In simple words: 'ऊननवतिः' का अर्थ 'नब्बे में एक कम' होता है, इसलिए इसका मान 89 है।

🎯 Exam Tip: संस्कृत संख्याओं को समझने के लिए 'ऊन' (कम) और 'अधिक' (ज्यादा) जैसे उपसर्गों पर ध्यान दें।

 

Question 29. 'षष्णवतिः' संख्यावाची शब्द का मान है
(क) 96
(ख) 69
(ग) 99
(घ) 59
Answer: (क) 96
In simple words: 'षष्णवतिः' का अर्थ 'छह और नब्बे' होता है, इसलिए इसका मान 96 है।

🎯 Exam Tip: बड़ी संख्याओं को बनाने के लिए इकाई और दहाई के अंकों के संस्कृत नामों का सही संयोजन महत्वपूर्ण है।

UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार

Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 3 शब्द रूप प्रकार prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 9 Sanskrit textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 3 शब्द रूप प्रकार

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 9 Sanskrit chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 9 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these UP Board Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Sanskrit Class 9 Solved Papers

Using our Sanskrit solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 9 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 3 शब्द रूप प्रकार to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार for the 2026 27 session?

The complete and updated UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Sanskrit are as per latest UP Board curriculum.

Are the Sanskrit UP Board solutions for Class 9 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 9 UP Board solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 9 Sanskrit. You can access UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Sanskrit UP Board solutions for Class 9 as a PDF?

Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 3 शब्द रूप प्रकार in printable PDF format for offline study on any device.