NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit: Chapter 14 शद्रिपुविजयः
Explore reliable textbook solutions for Chapter 14 शद्रिपुविजयः tailored for Class 9 learners. Utilizing these Sanskrit answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final UP Board evaluations.
Practice Class 9 Sanskrit Solutions: Chapter 14 शद्रिपुविजयः
Navigate directly to the solved Sanskrit textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.
UP Board Solutions For Class 9 Sanskrit Chapter 14 षड्रिपुविजय (कथा - नाटक कौमुदी)
परिचय
प्रस्तुत पाठ 'प्रबोधचन्द्रोदयम्' नामक नाटक से उद्धृत है। यह एक रूपकात्मक नाटक है और श्रीकृष्ण मिश्र के द्वारा प्रणीत है। कृष्ण मिश्र चन्देल राजा कीर्तिवर्मा के शासनकाल में हुए थे। इनका समय 1050 ईसवी के लगभग माना जाता है। नाटक की प्रस्तावना में यह उल्लिखित है कि राजा कीर्तिवर्मा की उपस्थिति में इसका मंचन किया गया था। इस नाटक में अत्यन्त सरल किन्तु प्रभावपूर्ण ढंग से यह बताया गया है कि विवेक, श्रद्धा, मति, उपनिषद् आदि के सहयोग से पुरुष अविद्याजन्य अन्धकार को पार करके विष्णु-भक्ति की कृपा से अपने वास्तविक विष्णु पद को प्राप्त होता है। इस नाटक में वेदान्त के ब्रह्मवाद के साथ वैष्णव-भक्ति का सुन्दर समन्वय परिलक्षित होता है।
पाठ सारांश
प्रस्तुत नाटक में विवेक, श्रद्धा, मति, उपनिषद्, क्षमा, सन्तोष, वैराग्य, विष्णुभक्ति, महामोह आदि अमूर्त पात्रों के द्वारा दार्शनिक विषयों का अत्यन्त प्रभावोत्पादक एवं सरल शैली में सरसे वर्णन किया गया है। प्रस्तुत पाठ का सारांश इस प्रकार है सर्वप्रथम मैत्री रंगमंच पर प्रवेश करती है और विष्णुभक्ति के द्वारा महाभैरवी के बन्धन से मुक्त हुई श्रद्धा को देखना चाहती है। उसी समय श्रद्धा प्रवेश करती है। मैत्री उसे गले लगाती है। श्रद्धा विष्णुभक्ति के आदेश से काम, क्रोध आदि छः शत्रुओं पर विजय पाने का प्रयास करने के लिए राजा विवेक के पास जाती है। मैत्री भी विष्णुभक्ति की आज्ञा से विवेक की सफलता के लिए महात्माओं के हृदय में जाकर निवास करती है। इसके बाद प्रतीहारी के साथ राजा विवेक मंच पर आते हैं। वह विष्णुभक्ति की आज्ञा से काम आदि छ: रिपुओं को जीतने का प्रयास करते हैं। वह सर्वप्रथम वस्तु-विचार को बुलाकर उसे काम को जीतने का आदेश देते हैं। इसके बाद क्षमा को बुलाकर उसे क्रोध पर विजय प्राप्त करने के लिए कहते हैं। क्षमा कहती है कि मैं तो महामोह को भी जीत सकती हूँ और क्रोध तो उसका अनुचरमात्र है। क्रोध को जीत लेने पर हिंसा, कठोरता, मान, ईष्या आदि पर स्वतः विजय प्राप्त हो जाएगी।
इसके बाद राजा विवेक लोभ को जीतने के लिए सन्तोष को वाराणसी भेजते हैं। इसके बाद वह शुभ मुहूर्त में सेनापति को सेना के प्रस्थान के लिए आदेश देते हैं और स्वयं रथ पर सवार होकर वाराणसी के लिए प्रस्थान करते हैं। काम, क्रोध, लोभ आदि राजा विवेक के दर्शनमात्र से दूर भाग जाते हैं। राजा विवेक भगवान् शिव को प्रणाम करके वहीं अपनी सेना का पड़ाव डाल देते हैं।
विष्णुभक्ति हिंसाप्रधान युद्ध को देखने में स्वयं को असमर्थ पाकर वाराणसी से शक्तिग्राम चली जाती है और श्रद्धा को युद्ध का सारा वृत्तान्त अवगत कराने के लिए कह जाती है। श्रद्धा विष्णुभक्ति के पास जाती है। विष्णुभक्ति उस समय शान्ति से कुछ मन्त्रणा कर रही होती है। श्रद्धा उसे युद्ध का वृत्तान्त विस्तार से बताती है कि वस्तु-विचार ने काम को मार डाला। क्षमा ने क्रोध, कठोरता, हिंसा
आदि को धराशायी कर दिया। सन्तोष ने लोभ, तृष्णा, दीनता, असत्य, निन्दा, चोरी, असत्परिग्रह आदि को बन्दी बना लिया। अनुसूया ने मात्सर्य को जीत लिया। परोत्कर्ष की सम्भावना ने मद को दबा दिया। दूसरों के गुणों की अधिकता ने मान को नष्ट कर दिया और महामोह भी योग के विघ्नों के साथ डरकर कहीं छिप गया है।
चरित्र चित्रण
राजा
प्रस्तुत रूपक में बताया गया है कि व्यक्ति किस प्रकार से अत्यन्त सरल एवं प्रभावपूर्ण ढंग से विवेक, श्रद्धा, मति, उपनिषद् आदि के सहयोग से अविद्याजन्य अन्धकार को पार करके विष्णुभक्ति की कृपा से अपने वास्तविक स्वरूप विष्णुपद को प्राप्त होता है। ब्रह्मवाद के साथ वैष्णवभक्ति का सुन्दर समन्वय परिलक्षित होता है। राजा की चारित्रिक विशेषताएँ अग्र प्रकार हैं
(1) सुयोग्य राजा- राजा को अत्यन्त योग्य दर्शाया गया है। वह अच्छे-बुरे सभी कार्यों का मता है। उसे इस बात का पता है कि किस बुराई को किस तरह दूर किया जा सकता है।
(2) ज्ञानी- राजा अत्यन्त ज्ञानी है। वह महामोह को धिक्कारता है कि तुम्हारा मूल ही अज्ञान है।, तत्त्व ज्ञान से ही अविद्यादि विकारों से छुटकारा पाया जा सकता है। वह काम के विजय हेतु वस्तु-विचार को, क्रोध के विजय हेतु क्षमा को, लोभ के विजय हेतु सन्तोष आदि को आदेश देता है।
(3) रणनीतिज्ञ- राजा एक कुशल रणनीतिज्ञ है। युद्ध-भूमि की भाँति ही वह समस्त विकारों को जीतने में समर्थ योद्धाओं- वस्तु-विचार, क्षमा, सन्तोष आदि-को लगाकर ही अन्त में सम्पूर्ण सेना को युद्ध के लिए भेजता है । | (4) स्नेही-राजा को अत्यन्त स्नेही रूप में चित्रित किया गया है। वह सभी लोगोंवस्तु-विचार, क्षमा, सन्तोष आदि-से परामर्श करने के बाद ही युद्ध की पूर्ण तैयारी करता है। शत्रुओं पर विजय पाने के लिए वह सर्वप्रथम अपने पक्ष के महान् योद्धाओं को यथोचित स्थानों पर लगाता है।
(5) विद्वान् - राजा अत्यन्त विद्वान् है। उसे मांगलिक समयों का सही पता है। ज्योतिषी द्वारा प्रस्थान का समय बताने पर वह आदरपूर्वक उसे स्वीकार कर लेता है तथा मांगलिक कार्य सम्पन्न करके ही वह रथ पर चढ़ने का अभिनय करता है। |
(6) आस्तिक- राजा अत्यन्त आस्तिक स्वभाव का है। वह षड्-विकारों को जीतने अर्थात् अभीष्ट की सिद्धि के लिए भगवान् को भी प्रणाम करता है और भगवन्मय नगरी वाराणसी में निवास करने का विचार व्यक्त करके वहीं सेना को पड़ाव डालता है।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि राजा जो एक योग्य, ज्ञानी एवं संकल्पवान् व्यक्ति है, जटिल दार्शनिक विषयों का सरलता से प्रतिपादन करता है।
लघु उत्तरीय संस्कृत प्रश्नोत्तर
अधोलिखित प्रश्नों के संस्कृत में उत्तर लिखिए
Question 1. कामः केन हतः?
Answer: वस्तुविचारेण कामः हतः ।
In simple words: काम को वस्तुविचार से मारा गया है, अर्थात् विषयों के प्रति आसक्ति का नाश सही सोच से होता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में 'काम' के नाशक कारक को पहचानना मुख्य है।
Question 2. लोभस्य जेता कः?
Answer: सन्तोषः लोभस्य जेता आसीत्।
In simple words: लोभ का विजेता सन्तोष है, जो दर्शाता है कि संतोष ही लालच पर काबू पा सकता है।
🎯 Exam Tip: यहाँ 'लोभ' के विरोधी गुण 'सन्तोष' को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 3. राजा क्रोधस्य विजयाय किम् आदिशति?
Answer: राजा क्रोधस्य विजयाय क्षमाम् आदिशति ।
In simple words: राजा क्रोध पर विजय पाने के लिए क्षमा को आदेश देता है, जिससे पता चलता है कि क्रोध को क्षमा से जीता जा सकता है।
🎯 Exam Tip: 'क्रोध' पर 'क्षमा' की विजय के नैतिक संदेश को याद रखें।
Question 4. देव्या विष्णुभक्त्या राजानं किं सन्दिष्टम्?
Answer: कामक्रोधादीनां निर्जयाय उद्योगं कर्तुं विष्णुभक्त्या राजानं सन्दिष्टम् ।
In simple words: देवी विष्णुभक्ति ने राजा को काम और क्रोध आदि शत्रुओं को जीतने के लिए प्रयास करने का संदेश दिया।
🎯 Exam Tip: विष्णुभक्ति का राजा को दिया गया निर्देश परीक्षा में महत्वपूर्ण है।
Question 5. महामोहेन सह विवेकस्य सङ्ग्रामे जाते कस्य विजयः जातः।
Answer: महामोहेन सह विवेकस्य सङ्ग्रामे जाते विवेकस्य विजयः जातः।
In simple words: महामोह के साथ विवेक के युद्ध में विवेक की विजय हुई, जो ज्ञान की अज्ञान पर जीत को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: विवेक और महामोह के बीच संघर्ष में किसकी विजय हुई, यह जानना आवश्यक है।
Question 6. मैत्री देव्याः प्रिय सखी का आसीत्?
Answer: मैत्री देव्याः प्रिय सखी श्रद्धा आसीत्।।
In simple words: मैत्री देवी की प्रिय सखी श्रद्धा थी, जो उनकी घनिष्ठता को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: पात्रों के संबंधों को याद रखना, जैसे मैत्री की सखी कौन थी, महत्वपूर्ण है।
Question 7. राजा रथमारुह्य क्व गतवान्?
Answer: राजा रथमारुह्य वाराणसी गतवान् ।
In simple words: राजा रथ पर चढ़कर वाराणसी गए, जो उनके उद्देश्य की ओर प्रस्थान को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: राजा के प्रस्थान के गंतव्य स्थान का उल्लेख अक्सर पूछा जाता है।
Question 8. निलीनः कः तिष्ठति?
Answer: महामोहः योगविघ्नैः सह क्वापि निलीनः तिष्ठति ।
In simple words: महामोह योग के विघ्नों के साथ कहीं छिप गया था, जो उसकी पराजय को इंगित करता है।
🎯 Exam Tip: महामोह के छिपने का कारण और उसकी स्थिति को समझना आवश्यक है।
Question 9. कामादिभिः सङ्ग्रामे कस्य विजयः जातः?
Answer: कामादिभिः सङ्ग्रामे राजा विवेकस्य विजयः जातः।
In simple words: काम आदि के साथ युद्ध में राजा विवेक की विजय हुई, जो आध्यात्मिक जीत का प्रतीक है।
🎯 Exam Tip: इस युद्ध में विजेता कौन था, यह प्रश्न का मुख्य बिंदु है।
Question 10. विष्णुभक्तिः कस्य माता आसीत् ? ।
Answer: विष्णुभक्तिः राजा विवेकस्य माता आसीत्।
In simple words: विष्णुभक्ति राजा विवेक की माता थी, जो उनके मार्गदर्शक और पोषक संबंध को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: पात्रों के पारिवारिक संबंधों को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
अग्रलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक प्रश्न के उत्तर रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। इनमें से एक विकल्प शुद्ध है। शुद्ध विकल्प का चयन कर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।
Question 1. षड्पुिविजयः' नामक पाठ किस ग्रन्थ से उधृत है?
(क) उत्तर रामचरितम्' से ।
(ख) 'प्रबोधचन्द्रोदयम्' से
(ग) “वेणीसंहारम्' से ।
(घ) “विक्रमोर्वशीयम्' से
Answer: (ख) 'प्रबोधचन्द्रोदयम्' से
In simple words: 'षड्रिपुविजय' पाठ 'प्रबोधचन्द्रोदयम्' नामक ग्रन्थ से लिया गया है।
🎯 Exam Tip: पाठ के मूल स्रोत या ग्रन्थ का नाम याद रखना एक सामान्य बहुविकल्पीय प्रश्न है।
Question 2. 'प्रबोधचन्द्रोदयम्' के रचनाकार कौन हैं?
(क) महाकवि भास
(ख) भट्टनारायण
(ग) विष्णु शर्मा
(घ) कृष्ण मिश्र
Answer: (घ) कृष्ण मिश्र
In simple words: 'प्रबोधचन्द्रोदयम्' की रचना कृष्ण मिश्र ने की है।
🎯 Exam Tip: किसी भी साहित्यिक कृति के लेखक का नाम परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण जानकारी होती है।
Question 3. 'पड्रिपुविजयः' नामक नाटयांश के पात्र किस प्रकार के हैं?
(क) वास्तविक
(ख) पुरातन
(ग) आधुनिक
(घ) काल्पनिक
Answer: (घ) काल्पनिक
In simple words: 'षड्रिपुविजय' के पात्र वास्तविक नहीं बल्कि काल्पनिक हैं, जो अमूर्त गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
🎯 Exam Tip: इस नाटक के प्रतीकात्मक स्वरूप को समझना और पात्रों के प्रकार को जानना आवश्यक है।
Question 4. 'अये, मे प्रियसखी मैत्री।' में 'मे' पद से किसे संकेतित किया गया है?
(क) 'महाभैरवी' को
(ख) 'श्रद्धा' को
(ग) 'विष्णुभक्ति' को
(घ) 'मैत्री' को
Answer: (ग) 'विष्णुभक्ति' को
In simple words: 'मे' पद का उपयोग 'विष्णुभक्ति' के लिए किया गया है, जो उसके संबंध को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: सर्वनामों के प्रयोग और उनके संदर्भ को ध्यानपूर्वक समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. राजा लोभ को जीतने हेतु सन्तोष को कहाँ जाने के लिए कहता है?
(क) प्रयाग
(ख) देवप्रयाग
(ग) कर्णप्रयाग
(घ) वाराणसी
Answer: (घ) वाराणसी
In simple words: राजा लोभ पर विजय के लिए संतोष को वाराणसी जाने का आदेश देता है।
🎯 Exam Tip: राजा द्वारा दिए गए विशिष्ट निर्देशों और स्थानों को याद रखना सहायक होता है।
Question 6. राजा जिस रथ पर बैठकर वाराणसी के लिए चला, वह रथ कैसा था?
(क) सुखप्रद
(ख) सांग्रामिक
(ग) शोभन ।
(घ) स्वर्ण-निर्मित
Answer: (ग) शोभन ।
In simple words: राजा जिस रथ पर बैठकर वाराणसी गया, वह सुन्दर (शोभन) था।
🎯 Exam Tip: यात्रा के साधनों और उनके गुणों का वर्णन परीक्षा में पूछा जा सकता है।
Question 7. 'सुरसरित्' शब्द से नदी का बोध होता है?
(क) वेत्रवती :
(ख) सरस्वती
(ग) गंगा (घ) यमुना
Answer: (ग) गंगा
In simple words: 'सुरसरित्' शब्द गंगा नदी का पर्यायवाची है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत में पर्यायवाची शब्दों को जानना भाषा की समझ के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 8. 'वत्से देव्या विष्णुभक्तेः प्रसादान्मुनिजनचेतः पदं प्राप्नुहि।' कथन किसका है?
(क) 'श्रद्धा' का (ख) प्रतीहारी' का (ग) “क्षमा' का (घ) “शान्ति' का ।
Answer: (घ) “शान्ति' का ।
In simple words: यह कथन शांति का है, जो विष्णुभक्ति के प्रसाद से मुनिजनचेत पद प्राप्त करने का आशीर्वाद देती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पात्रों के कथनों को पहचानना और उनके संदर्भ को समझना आवश्यक है।
Question 9. निवृत्ति किससे होती है?
(क) 'भक्ति-भाव से
(ख) “यज्ञ करने से
(ग) “तत्त्व-ज्ञान' से (घ) “तीर्थयात्रा' से
Answer: (ग) “तत्त्व-ज्ञान' से
In simple words: निवृत्ति (सांसारिक विषयों से विरक्ति) तत्त्व-ज्ञान से प्राप्त होती है।
🎯 Exam Tip: निवृत्ति के साधन के रूप में 'तत्त्व-ज्ञान' की भूमिका को याद रखें।
Question 10. 'मया दृष्टा क्रुद्धशार्दूलमुखद्विभ्रष्टा•••• क्षेमेण सञ्जीविता प्रियसखी।' में रिक्त-पद की पूर्ति होगी
(क) 'मृगीव' से (ख) 'गजेव' से (ग) “शृगालीव' से (घ) “कोकिलेव' से
Answer: (क) 'मृगीव' से
In simple words: रिक्त स्थान की पूर्ति 'मृगीव' शब्द से होगी, जिसका अर्थ मृगी के समान है।
🎯 Exam Tip: श्लोकों में रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए उचित उपमा या शब्द का चयन महत्वपूर्ण है।
Question 11. 'लोभं जेतुं वाराणसी प्रति प्रतिष्ठीयताम् ।' वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति?
(क) राजा (ख) सन्तोषः । (ग) सूर्तः (घ) सेनापतिः
Answer: (क) राजा
In simple words: "लोभ को जीतने के लिए वाराणसी की ओर प्रस्थान करें" यह वाक्य राजा द्वारा कहा गया है।
🎯 Exam Tip: पाठ के संवादों में वक्ता की पहचान करना परीक्षा में पूछा जा सकता है।
Question 12. 'अत्र “””””””समुत्सृज्य पुण्यभाजो विशन्ति यम्।' श्लोक की चरण-पूर्ति होगी
(क) “अहङ्कारम्' से
(ख) मोहम्' से
(ग) “देहम्' से
(घ) “धनम्' से
Answer: (ख) मोहम्' से
In simple words: श्लोक का रिक्त पद 'मोहम्' से पूरा होगा, जिसका अर्थ है मोह को त्यागकर पुण्यशाली बनते हैं।
🎯 Exam Tip: श्लोकों के संदर्भ को समझकर सही शब्द का चयन करना महत्वपूर्ण है।
Question 13. 'यत्रासौ संसारसागरोत्तारतरणिकर्णधारो भगवान् हरिः स्वयं प्रतिवसति ।' वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति?
(क) श्रद्धा (ख) शान्तिः (ग) विष्णुभक्तिः (घ) सन्तोषः ।
Answer: (ग) विष्णुभक्तिः
In simple words: यह कथन विष्णुभक्ति का है, जो भगवान हरि को संसार सागर से पार उतारने वाले के रूप में वर्णित करती है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट दार्शनिक या महत्वपूर्ण कथनों के वक्ता को पहचानना एक प्रमुख मूल्यांकन बिंदु है।
Question 14. क्षमा-'देवस्याज्ञया महामोहमपि .......... पर्याप्तास्मि ।' वाक्य में रिक्त-स्थान की पूर्ति होगी- .
(क) 'पलायितुम्' से
(ख) “नष्टुम्' से
(ग) “जेतुम्' से (घ) “हन्तुम्' से
Answer: (घ) “हन्तुम्' से
In simple words: इस वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति 'हन्तुम्' शब्द से होगी, जिसका अर्थ है मारने के लिए पर्याप्त हूँ।
🎯 Exam Tip: संवादों में क्रियापदों के उचित प्रयोग को समझना और रिक्त स्थानों की पूर्ति करना अभ्यास करें।
Question 15. 'तत्र कामः तावत्प्रथमो वीरो वस्तुविचारेणैव जीयते ।' वाक्यस्य वक्ता कः अस्ति?
(क) सन्तोषः
(ख) प्रतीहारिः
(ग) सूतः (घ) राजा
Answer: (घ) राजा
In simple words: "वहाँ काम, जो प्रथम वीर है, वस्तुविचार से ही जीता जाता है" यह वाक्य राजा द्वारा कहा गया है।
🎯 Exam Tip: राजा के रणनीतिक कथनों और उनके निहितार्थों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 16. 'ततो वस्तुविचारेण कामो ............ ।' वाक्य में रिक्त-स्थान की पूर्ति होगी
(क) निषूदितः' से
(ख) 'निगृहीताः' से
(ग) “हतः' से ।
(घ) 'खण्डितः' से |
Answer: (ग) “हतः' से ।
In simple words: इस वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति 'हतः' शब्द से होगी, जिसका अर्थ है मारा गया।
🎯 Exam Tip: क्रियापदों और उनके सटीक अर्थों को जानना वाक्य पूर्ति में सहायता करता है।
Free study material for Sanskrit
Sanskrit Class 9 Curriculum Solutions: Chapter 14 शद्रिपुविजयः
Accessing Chapter 14 शद्रिपुविजयः Solutions
Explore reliable textbook solutions for Chapter 14 शद्रिपुविजयः tailored for Class 9 learners. Utilizing these complete exercise answers ensures your preparation aligns exactly with official UP Board standards for Sanskrit.
Concept-Driven Answers for Class 9 Sanskrit
Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 9 Sanskrit text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.
Maximizing Study Efficiency
Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 9 Sanskrit.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 14 शद्रिपुविजयः is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 9 Sanskrit are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 14 शद्रिपुविजयः as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 14 शद्रिपुविजयः will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 9 Sanskrit. You can access UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 14 शद्रिपुविजयः in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 9 Sanskrit Chapter 14 शद्रिपुविजयः in printable PDF format for offline study on any device.