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Detailed Chapter 8 वायु शुद्ध वायु का महत्त्व एवं संवतन् UP Board Solutions for Class 9 Home Science
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Class 9 Home Science Chapter 8 वायु शुद्ध वायु का महत्त्व एवं संवतन् UP Board Solutions PDF
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वायु क्या है? इसमें सम्मिलित तत्त्वों का वर्णन कीजिए । शुद्ध वायु स्वास्थ्य के लिए क्यों आवश्यक है?
या
वायु के प्राकृतिक संगठन का विस्तार से वर्णन कीजिए । शुद्ध वायु के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
Answer: वायु से प्रत्येक व्यक्ति भली-भाँति परिचित है। भले ही वायु को हम देख नहीं सकते परन्तु प्रत्येक व्यक्ति वायु का अनुभव एवं सेवन करता रहता है। प्राणी-मात्र के जीवन का आधार वायु ही है। वायु के अभाव में किसी प्रकार के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अब प्रश्न उठता है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वायु क्या है? वायु वास्तव में कुछ गैसों का मिश्रण है। गैसों का यह मिश्रण रंगहीन, स्वादहीन तथा गन्धहीन होता है। वायु में भार होता है तथा यह दबाव डालती है। वायु फैल सकती है तथा संकुचित हो सकती है। इसमें विसरण का गुण भी पाया जाता है। वायु हमारी पृथ्वी के चारों ओर एक व्यापक क्षेत्र में हर समय रहती है। इस क्षेत्र को वायुमण्डल कहा जाता है।
In simple words: वायु विभिन्न गैसों का रंगहीन, स्वादहीन और गन्धहीन मिश्रण है, जो पृथ्वी को घेरे हुए है और जीवन के लिए आवश्यक है। यह फैल सकती है, संकुचित हो सकती है और इसमें विसरण का गुण होता है, तथा पृथ्वी पर दबाव डालती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में वायु की परिभाषा, उसके भौतिक गुणों और जीवन में उसकी आवश्यकता को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
वायू का संगठन
एक समय था जब वायु को एक तत्त्व समझा जाता था। उस समय वायु की गिनती पाँच मुख्य तत्त्वों में की जाती थी, परन्तु विभिन्न वैज्ञानिक खोजों के परिणामस्वरूप इस धारणा को बदलना पड़ा। वर्तमान ज्ञान के अनुसार वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण मात्र है। वायु में विद्यमान मुख्य गैसें हैं-ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन । इन दो मुख्य गैसों के अतिरिक्त वायु में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, हाइड्रोजन, ऑर्गन तथा जलवाष्प भी विद्यमान रहती है। वायु में लगभग पाँचवा भाग ऑक्सीजन होता है। वायु में विद्यमान गैसों का संगठन निम्नवर्णित तालिका द्वारा स्पष्ट हो जाएगा ।
| गैस का नाम | आयतन के अनुसार % | भार के अनुसार % |
| (i) ऑक्सीजन | 20.95 | 23.14 |
| (ii) नाइट्रोजन | 78.08 | 75.52 |
| (iii) कार्बन डाइऑक्साइड | 0.03 | अल्प मात्रा में |
| (iv) हाइड्रोजन, ओजोन, ऑर्गन आदि गैसें | 0.94 | अल्प मात्रा में |
वायु के इस संगठन को चित्र द्वारा भी दर्शाया गया है। वायु में विद्यमान विभिन्न गैसों का सामान्य परिचय निम्नवर्णित है
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र वायुमण्डल में विभिन्न गैसों की मात्रा को एक पाई चार्ट के माध्यम से दर्शाता है। इसमें नाइट्रोजन (78.08%) का सबसे बड़ा हिस्सा, उसके बाद ऑक्सीजन (20.95%), हाइड्रोजन, ओजोन तथा अन्य गैसें (0.94%), और कार्बन डाइऑक्साइड (0.03%) सबसे छोटा हिस्सा दिखाती हैं। यह चार्ट वायु की गैसीय संरचना का स्पष्ट दृश्य प्रतिनिधित्व प्रदान करता है।
ऑक्सीजन: वायु में ऑक्सीजन का आयतन लगभग 21% होता है। ऑक्सीजन जीवन के लिए- अति आवश्यक है। इसे प्राण-वायु भी कहते हैं। ऑक्सीजन प्रायः सभी जीवधारियों की श्वसन क्रिया के लिए आवश्यक है। प्राणी हों अथवा पौधे, सभी श्वसन क्रिया के लिए ऑक्सीजन लेते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन करते हैं। श्वसन क्रिया में नासिका द्वारा शुद्ध वायु हमारे फेफड़ों में पहुँचती है। फेफड़ों की रुधिर कोशिकाओं में ऑक्सीजन का अवशोषण होता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड वायु में छोड़ दी जाती है ताकि बाह्य-श्वसन द्वारा वायुमण्डल में मुक्त हो जाए। रुधिर द्वारा ऑक्सीजन विभिन्न ऊतकों एवं केशिकाओं में पहुँचती है। यहाँ यह खादा के ज्वलन अथवा ऑक्सीकरण में सहायता करती है। इस क्रिया में ऊर्जा उत्पन्न होती है जोकि हमारे शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं का मूल आधार है। इसके अतिरिक्त वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन अन्य ज्वलन क्रियाओं में भी सहायता करती है। कोयला, लकड़ी, तेल, कपड़ा, कागज आदि सभी पदार्थ ऑक्सीजन की उपस्थिति में ही जलते हैं। इन क्रियाओं में ऑक्सीजन प्रयोग में आती है तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। आग के धुएँ में प्राय: कार्बन डाइऑक्साइड व कार्बन मोनोऑक्साइड गैसें होती हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड: वायु में कार्बन डाइऑक्साइड का आयतन लगभग 0.03% होता है। वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा पौधों एवं प्राणियों की श्वसन क्रिया द्वारा तथा वस्तुओं के जलने के फलस्वरूप बढ़ती रहती है। अन्तः श्वसन (प्रश्वसित वायु) तथा बाह्य श्वसन (उच्छ्वसित वायु) क्रिया में वायु की प्रतिशत मात्रा में परिवर्तन निम्न प्रकार से होता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि जैसे-जैसे वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि होती है उसी अनुपात में ऑक्सीजन की मात्रा घटती है। यह स्थिति जीवधारियों के लिए घातक हो सकती है। इससे बचाव करते हैं हरे पौधे । हरे पौधे सूर्य के प्रकाश में कार्बन डाइऑक्साइड व जल को प्रयोग कर अपने भोजन का निर्माण करते हैं। इस क्रिया को प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं। इस क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड प्रयुक्त होती है तथा ऑक्सीजन बाहर निकलती है। इस प्रकार हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा वायुमण्डल में ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड गैसों की मात्रा में सन्तुलन बनाए रखते हैं।
नाइट्रोजनः वायुमण्डल में इसकी मात्रा सर्वाधिक (लगभग 78.08%) होती है। प्रत्यक्ष रूप में यह गैस अधिक उपयोगी नहीं है। न तो यह गैस स्वयं जलती है और न ही वस्तुओं के जलने में सहायता करती है। अतः यह एक प्रकार से निष्क्रिय गैस है, परन्तु परोक्ष रूप से यह एक अति महत्त्वपूर्ण गैस है। यह ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अथवा ज्वलनशील प्रक्रिया की तीव्रता पर अंकुश लगाती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वायुमण्डल में यदि नाइट्रोजन न हो, तो ऑक्सीजन की उपस्थिति में संसार की सभी वस्तुएँ जलकर राख हो जाएँगी।
ओजोन: यह अन्य गैसों (हाइड्रोजन, ऑर्गन, जलवाष्प आदि) के साथ मिलकर वायु का लगभग 0.94% भाग होती है। यह गैस सूर्य की हानिकारक किरणों का अधिकांश भाग सोखकर पृथ्वी तक नहीं पहुँचने देती है। यह फलों एवं सब्जियों को सड़ने से बचाती है। कुछ रोगों में भी यह लाभकारी पाई गई है। कुल मिलाकर यह गैस मानव जीवन के लिए उपयोगी सिद्ध हुई है।
जलवाष्पः
यह वायु को नम एवं ठण्डा बनाती है। वायुमण्डल में इसकी प्रतिशत मात्रा स्थान विशेष के तापक्रम पर निर्भर करती है। कम ताप पर इसकी मात्रा अधिक व अधिक ताप पर इसकी मात्रा कम होती है। इसकी वायुमण्डल में प्रतिशत मात्रा को आपेक्षिक आर्द्रता कहते हैं। अधिक आर्द्रता वातावरण को भारी व सीलनयुक्त बनाती है। ऐसा वातावरण (जैसे कि वर्षा ऋतु) स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, क्योंकि इसमें मक्खी, मच्छर व अनेक रोगाणु आसानी से पनपते हैं। समुद्रतल से ऊँचाई की ओर (जैसे कि ऊँची पर्वत-श्रृंखलाएँ) बढ़ने पर वायु की संरचना बदलने लगती है। अधिक ऊँचाई पर वायुमण्डल में ऑक्सीजन की प्रतिशत मात्रा घट जाती है। यही कारण है कि ऊँचाई पर पहुँचकर साँस लेने में कठिनाई अनुभव होती है। उपर्युक्त गैसों के अतिरिक्त वायुमण्डल में धूल के कण, रेडियोधर्मी तत्त्वे व अनेक प्रकार के कीटाणु भी पाए जाते हैं।
शुद्ध वायु का महत्त्व
शुद्ध वायु संसार के सभी प्राणियों एवं पेड़-पौधों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है। सभी जीवधारी शुद्ध वायु की उपस्थिति में ही जीवन की सबसे महत्त्वपूर्ण श्वसन क्रिया सम्पादित करते हैं। इसके अतिरिक्त भी शुद्ध वायु से अनेक लाभ हैं, जिनका विस्तृत विवरण अग्रलिखित है
मनुष्यों के लिए उपयोगिता
हमारे जीवन में शुद्ध वायु अनेक रूप में उपयोगी है; जैसे कि
(1) श्वसन क्रिया: प्रश्वसन क्रिया में हम शुद्ध वायु को नासिका छिद्रों द्वारा फेफड़ों तक खींचते हैं। फेफड़ों में रक्त-केशिकाओं का जाल बिछा होता है। केशिकाओं में उपस्थित रक्त द्वारा वायु से ऑक्सीजन का अवशोषण होता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन होता है जो कि निःघसन द्वारा वायुमण्डल में पहुँच जाती है। रक्त संचरण के द्वारा ऑक्सीजन विभिन्न कोशिकाओं तथा ऊतकों तक पहुँचती है तथा खादा के ऑक्सीकरण द्वारा ऊर्जा मुक्त करती है। यह मुक्त ऊर्जा मानव शरीर में होने वाली विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक है।
(2) शरीर के ताप को नियमन: स्वस्थ शरीर का तापमान प्राय: 37° से० के लगभग होता है, जबकि कमरे का तापमान 15°-20° से० तक होता है। अतः कम तापमान वाली वायु जब शरीर को स्पर्श करती है, तो शरीर से कुछ गर्मी लेकर जाती है। इस प्रकार लगातार शरीर की गर्मी अथवा ऊष्मा कम होती रहती है। इसी प्रकार शरीर की त्वचा से पसीने का जब वाष्पीकरण होता है, तो भी शरीर के तापमान में कमी आती है।
Question 2. संवातन से क्या तात्पर्य है? प्राकृतिक साधनों पर आधारित संवातन के विभिन्न उपायों का वर्णन कीजिए ।
Answer: संवातन का अर्थ घर के वायुमण्डल में उत्पन्न हो जाने वाली गर्मी, नमी तथा स्थिरता को समाप्त अथवा कम कर देने की प्रक्रिया को संवातन कहते हैं। इस क्रिया के अन्तर्गत घर के कमरों से गर्म, नम व अशुद्ध स्थिर वायु का निष्कासन तथा शुद्ध, शुष्क व शीतल वायु का प्रवेश होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसी आवासीय स्थल से अशुद्ध वायु के निष्कासन तथा बाहर से शुद्ध वायु के आगमन की समुचित व्यवस्था ही संवातन है। संवातन के परिणामस्वरूप ही किसी आवासीय स्थल में निरन्तर शुद्ध वायु उपलब्ध होती रहती है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से संवातन की समुचित व्यवस्था अति आवश्यक है।
In simple words: संवातन वह प्रक्रिया है जिसमें घर की गर्म, नम और अशुद्ध हवा को बाहर निकालकर, उसकी जगह ताज़ी, ठंडी और शुद्ध हवा लाई जाती है। यह व्यक्तिगत स्वास्थ्य और आरामदायक वातावरण के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: संवातन की परिभाषा और उसके महत्व को स्पष्टता से बताएं, साथ ही प्राकृतिक साधनों का उल्लेख करना न भूलें।
प्राकृतिक साधनों पर आधारित संवतन
प्रकृति ने हमारे वातावरण में संवतन की समुचित व्यवस्था की है। प्राकृतिक संवातन मुख्य रूप से वायुमण्डल में होने वाली चूषण, संनयन तथा विसरण नामक क्रियाओं द्वारा सम्पन्न होता है। इन तीनों क्रियाओं का सामान्य विवरण निम्नवर्णित है।
(1) चूषण-प्रायः सभी गैसों का संवहन सिद्धान्त रूप से कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर होता है। इसे चूषण क्रिया कहते हैं। फुटबॉल का उदाहरण देखें। हवा भरने वाले पम्प से दबाव के साथ फुटबॉल में हवा भरी जाती है। पूरी हवा भर जाने पर फुटबॉल के अन्दर वायु का दबाव वायुमण्डल में उपस्थित वायु के दबाव से अधिक हो जाता है। अब फुटबॉल का वाल्व ढीला करने पर इसके भीतर की वायु कम दबाव वाले वायुमण्डल में तेजी से संवहन करती है और तब तक करती रहती है जब तक कि फुटबॉल के भीतर की वायु का दबाव वायुमण्डल के दबाव के समान नहीं हो जाता। इस सिद्धान्त का उपयोग घर की संवातन व्यवस्था में किया जाता है।
(2) संनयन-यह प्रक्रिया प्रायः द्रव पदार्थों व गैसों में होती है। हल्के पदार्थों में यह प्रक्रिया तीव्र होती है। उदाहरण के लिए किसी द्रव पदार्थ को गर्म करने पर इसका प्रथम कण अथवा अणु गर्म होते ही फैलकर व हल्का होकर ऊपर की ओर प्रसारित हो जाता है तथा इसका स्थान अपेक्षाकृत ठण्डा कण ले लेता है। फिर यह भी गर्म होकर प्रसारित हो जाता है। यह क्रम लगातार चलता रहता है। इसी सिद्धान्त के अनुसार गर्म होने पर कमरे की वायु हल्की होकर ऊपर उठ जाती है तथा इसके द्वारा रिक्त किए गए स्थान की पूर्ति शीतल वायु द्वारी (कमरे के बाहर से) होती है। इस प्रकार संनयन प्रक्रिया द्वारा कमरे में लगातार शीतल एवं शुद्ध वायु का प्रवेश होता रहता है।
(3) विसरण: इस प्रक्रिया में पदार्थ अधिक सान्द्रता अथवा मात्रा वाले स्थान से कम सान्द्रता अथवा मात्रा वाले स्थान की ओर विसरित करते हैं; उदाहरणार्थ-एक सेण्ट अथवा इत्र की शीशी कमरे के एक कोने में खोलने पर धीरे-धीरे इत्र की सुगन्ध पूरे कमरे में फैल जाती है। इसी प्रकार एक गिलास पानी में स्याही की एक बूंद डालकर हिलाने पर पूरा पानी ही रंगीन हो जाता है। ठोस, द्रव तथा गैस तीनों ही प्रकार के पदार्थों में विसरण की यह प्रक्रिया पाई जाती है। विसरण की प्रक्रिया संवातन के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। कमरे की वायु नमी व बाह्य श्वसन की- कार्बन डाइऑक्साइड गैस के कारण सान्द्र हो जाती है; अतः यह बाहर (कम सान्द्र वायु) की ओर विसरण करती है तथा कम सान्द्रता वाली शुद्ध व शीतल वायु कमरे में अन्दर की ओर विसरण करती है। यह क्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि कमरे के अन्दर व बाहर की वायु की सान्द्रता समान नहीं हो जाती।
संवातन की प्राकृतिक व्यवस्था के लिए उपयोगी उपाय
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए उपयुक्तं संवातन व्यवस्था का होना आवश्यक है। अतः संवातन की उपयुक्त व्यवस्था के लिए निम्नलिखित उपायों को प्रयोग में लाना विवेकपूर्ण है
(1) मकान की व्यवस्था: नियोजित बस्तियों में आवास-गृहों का निर्माण परस्पर पर्याप्त दूरी पर होना चाहिए, एक-दूसरे से मिले हुए मकानों में वायु का प्रवेश स्वतन्त्र रूप से नहीं हो पाता, जबकि दूर-दूर बने मकानों में वायु का संवातन भली प्रकार से होता है।
(2) दरवाजे एवं खिड़कियाँ: मकान में दरवाजे एवं खिड़कियाँ पर्याप्त संख्या में होनी आवश्यक हैं। कमरों में दरवाजों एवं खिड़कियों की व्यवस्था इस प्रकार होनी चाहिए कि जिससे वायु आमने-सामने आर-पार सरलता से आ-जा सके।
(3) रोशनदान: गर्म होने से वायु हल्की हो जाती है तथा ऊपर की ओर उठती है। अतः गर्म एवं अशुद्ध वायु के निष्कासन के लिए कमरे में रोशनदान का होना अनिवार्य है। रोशनदान का एक लाभ यह भी है कि सूर्य की किरणें इससे कमरे में प्रवेश पाकर हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करती रहती हैं।
(4) चिमनी: यह प्रायः रसोई-गृह में निर्मित की जाती हैं। ईंधन के जलने से उत्पन्न धुआँ चिमनी द्वारा ही रसोई-गृह से निष्कासित होता है। इसका लाभ यह है कि गृहिणी न तो घुटन महसूस करती है। और न ही उसके नेत्रों पर धुएँ का कुप्रभाव पड़ता है। आधुनिक युग में धुआँ उत्पन्न करने वाले ईंधन का प्रयोग धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है तथा इसके स्थान पर कुकिंग गैस व विद्युत चूल्हों का उपयोग होने लगा है। अतः अब रसोई-गृह में चिमनी के निर्माण की आवश्यकता लगभग नगण्य हो गई है।
Question 3. संवातन के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली कृत्रिम विधियों का वर्णन कीजिए।
या
सामान्य विद्युत पंखों, निर्वातक पंखों एवं वातानुकूलन संयन्त्रों का संवातन के लिए उपयोग किन-किन पद्धतियों के आधार पर किया जाता है?
Answer: संवातन के प्राकृतिक साधनों के अनुसार मकान में कमरे पर्याप्त लम्बे, चौड़े व ऊँचे होने चाहिए तथा कमरों में पारगमन संवातन के लिए दरवाजे व खिड़कियाँ अधिक संख्या में तथा उपयुक्त स्थानों पर बनी होनी चाहिए, परन्तु इसमें प्रायः निम्नलिखित दो कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है
1. स्थान के अभाव के कारण प्रायः पर्याप्त लम्बाई, चौड़ाई व ऊँचाई वाले कमरों के मकानों का निर्माण करना सम्भव नहीं हो पाता है।
2. वर्ष में अनेक बार (जैसे कि ग्रीष्म ऋतु में) वायु अत्यन्त मन्द गति से संचरण करती है, जिसके फलस्वरूप मकानों में शुद्ध एवं शीतल वायु का उपयुक्त संवातन नहीं हो पाता है; अतः मकानों में घुटन भरा गर्म वातावरण रहता है।
उपर्युक्त कठिनाइयों से निपटने के लिए आज के आधुनिक युग में अनेक प्रकार के विद्युत उपकरणों (संवातन के कृत्रिम साधन) का उपयोग किया जाता है। मकानों एवं सार्वजनिक भवनों में संवातन की उत्तम व्यवस्था के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले प्रमुख विद्युत संयन्त्र निम्नलिखित हैं
(1) सामान्य विद्युत पंखे: सामान्य पंखे प्लीनम पद्धति पर आधारित होते हैं। इनके द्वारा वायु की गति अधिक संवहनशील हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप दूषित वायु की निकासी शीघ्र होती रहती है।
(2) निर्वातक पंखे (एक्जॉस्ट फैन): ये पंखे निर्वात पद्धति पर आधारित होते हैं। इस पद्धति में कमरे की अशुद्ध गर्म वायु को पंखों द्वारा बाहर धकेल दिया जाता है, जिसका स्थान शुद्ध एवं शीतल वायु लेती रहती है, परिणामस्वरूप कमरे में संवतन की व्यवस्था ठीक बनी रहती है। निर्वातक पंखे प्रायः प्रयोगशालाओं, अस्पतालों, छविगृहों व घुटन भरे कमरों में लगाए जाते हैं।
(3) सामान्य व निर्वातक पंखों का मिश्रित उपयोग: इन दोनों प्रकार के पंखों का एक साथ उपयोग मिश्रित अथवा मिली-जुली पद्धति पर आधारित है। इस पद्धति का उपयोग विशाल भवनों, छविगृहों एवं अस्पतालों आदि में किया जाता है। इसके अनुसार निर्वातक पंखे अशुद्ध एवं गर्म वायु को बाहर फेंकते हैं तथा सामान्य पंखे अन्दर की वायु को गति प्रदान करते हैं। इस प्रकार यह पद्धति संवात्नन व्यवस्था को अत्यन्त प्रभावी बना देती है।
(4) वातानुकूलनः आदर्श संवातन की यह आधुनिकतम पद्धति है। इस पद्धति में वायु को उचित तापमान, वांछित स्वच्छता तथा उपयुक्त आर्द्रता प्रदान की जाती है। कमरे में श्वसन क्रिया के कारण उत्पन्न हुई अशुद्ध वायु वातानुकूलन संयन्त्र के शुद्धिकरण भाग में पहुँचकर शुद्ध हो जाती है। बाहर से आने वाली वायु भी सर्वप्रथम शुद्धिकरण भाग में प्रवेश करती है, जिससे यह धूल के कणों एवं कीटाणुओं से मुक्त हो जाती है।
In simple words: कृत्रिम संवातन विधियाँ कमरे के गर्म और अशुद्ध हवा को बाहर निकालने और ताज़ी, ठंडी हवा लाने के लिए बिजली के उपकरणों का उपयोग करती हैं। इनमें सामान्य पंखे, एक्जॉस्ट फैन और वातानुकूलन प्रणाली शामिल हैं, जो प्राकृतिक संवातन की सीमाओं को दूर करती हैं और विशेषकर बड़े या भीड़भाड़ वाले स्थानों में बेहतर वायु गुणवत्ता प्रदान करती हैं।
🎯 Exam Tip: कृत्रिम संवातन की विभिन्न विधियों जैसे पंखों और एयर कंडीशनर के कार्य सिद्धांत और उनके उपयोग के स्थानों का वर्णन करना महत्वपूर्ण है।
ℹ️ चित्र व्याख्या (Diagram Explanation): यह चित्र एक वातानुकूलन (एयर कंडीशनिंग) प्रणाली की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। इसमें बाहर की हवा को एक छलनी और वाशर से गुज़ारा जाता है ताकि उसे साफ किया जा सके। फिर यह साफ हवा संयन्त्र के शीतलीकरण भाग में जाती है, जहाँ उसे ठंडा और नियंत्रित किया जाता है, और फिर उसे कमरे के अंदर फैलाया जाता है। यह प्रणाली कमरे में वांछित तापमान और स्वच्छ वायु बनाए रखने में मदद करती है।
कमरे में वांछित तापमान बनाए रखा जाता है। इस प्रकार इस विधि द्वारा कमरे की संवातन व्यवस्था अत्यन्त प्रभावी बनी रहती है। इस विधि की एकमात्र कमी यह है कि अत्यधिक महँगी होने के कारण यह जनसाधारण की पहुँच से बाहर है। वातानुकूलन यन्त्रों का उपयोग प्रायः धनी परिवारों, छविगृहों, बड़े-बड़े राजकीय अस्पतालों, सार्वजनिक व राजकीय भवनों तथा उच्च श्रेणी के रेल के डिब्बों इत्यादि में किया जाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वायु के कौन-कौन से चार प्रमुख कार्य हैं?
Answer: वायु के महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं
1. समस्त जीवधारियों की श्वसन क्रियों का मूल आधार होना,
2. प्राणियों में शारीरिक तापमान का नियमन करना,
3. जल की उत्पत्ति करना तथा
4. हरे पौधों में भोजन-निर्माण की प्रक्रिया का मूल आधार होना ।
In simple words: वायु जीवन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह श्वसन का आधार है, शरीर का तापमान नियंत्रित करती है, जल का निर्माण करती है और पौधों को भोजन बनाने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: वायु के चार प्रमुख कार्यों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करें।
Question 2. वर्षा ऋतु की नमी से हमें क्या हानियाँ हैं?
Answer: वर्षा ऋतु में नमी होने के कारण वायु में जलवाष्प (आर्द्रता) की मात्रा में वृद्धि हो जाती है। इस प्रकार के वातावरण में फफूदी, कीटाणु व कीट-पतंगे अधिक पनपते हैं। इसके हानिकारक परिणाम निम्नलिखित हैं
1. फफूदी के कारण भोज्य पदार्थ शीघ्र ही सड़ने लगते हैं तथा खाने योग्य नहीं रहते ।
2. चमड़े, लकड़ी व कागज की वस्तुएँ फफूदी के पनपने के कारण अपनी गुणवत्ता खो देती हैं।
3. कीटाणुओं के वातावरण में पनपने के कारण विभिन्न रोगों के होने की सम्भावनाएँ बन जाती हैं।
4. वस्तुओं पर फफूदी व अन्य सूक्ष्मजीवियों के पनपने के कारण वातावरण में सड़न की दुर्गन्ध उत्पन्न हो जाती है।
In simple words: वर्षा ऋतु की अधिक नमी फफूंदी, कीटाणुओं और कीटों को बढ़ाती है, जिससे भोजन सड़ता है, चमड़े और लकड़ी जैसी वस्तुओं की गुणवत्ता घटती है, बीमारियाँ फैलती हैं और सड़ी हुई दुर्गंध आती है।
🎯 Exam Tip: वर्षा ऋतु में नमी से होने वाले कम से कम तीन-चार प्रमुख हानिकारक प्रभावों को उदाहरण सहित समझाएं।
Question 3. प्रकृति वायुमण्डल में प्राण-वायु (ऑक्सीजन) की मात्रा का सन्तुलन किस प्रकार कर पाती है?
या
वायु को शुद्ध करने में प्रकृति किस प्रकार सहायता करती है?
Answer: वायुमण्डल में ऑक्सीजन की मात्रा लगभग 21 प्रतिशत होती है। ऑक्सीजन समस्त प्राणियों को उनकी श्वसन क्रिया के लिए आवश्यक है। श्वसन क्रिया में प्राणी वायु से ऑक्सीजन लेते हैं। तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैसे निष्कासित करते हैं। इसके अतिरिक्त लगभग सभी वस्तुएँ; जैसे लकड़ी, कोयला, कागज आदि ऑक्सीजन की उपस्थिति में ही जलती हैं तथा धुएँ के रूप में कार्बन मोनोऑक्साइड व कार्बन डाइऑक्साइड गैसों को वायुमण्डल में निष्कासित करती हैं। परिणाम यह होता है कि वायुमण्डल में ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है। प्रकृति इस स्थिति से निपटने के लिए पूर्णरूप से सक्षम है। हरे पेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड व पानी का उपयोग कर अपने लिए भोजन का निर्माण करते हैं। इस क्रिया के फलस्वरूप वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा घटती है तथा इसे क्रिया में ऑक्सीजन गैस उत्पन्न होती है। इस प्रकार हरे पौधे वायुमण्डल में ऑक्सीजन गैस निष्कासित कर इसकी मात्रा का सन्तुलन बनाए रखते हैं।
In simple words: प्रकृति पेड़-पौधों के प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वायुमण्डल में ऑक्सीजन का संतुलन बनाए रखती है। जीव और दहन ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, जिसे पेड़-पौधे अवशोषित करके ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं, जिससे वायु शुद्ध रहती है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन-कार्बन डाइऑक्साइड चक्र और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 4. अच्छे स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से आप अपने मकान में किस प्रकार के कमरे बनवाएँगी?
Answer: सामान्यतः मनुष्य एक घण्टे में लगभग 100 घन मीटर वायु ग्रहण करता है। यदि उस वायु का एक घण्टे में तीन बार भी परिवर्तन हो, तो एक मनुष्य के लिए लगभग 33 घन मीटर स्थान की आवश्यकता पड़ेगी। अतः मकान में लम्बे, चौड़े व ऊँचे कमरों का होना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद रहता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए घर के अन्दर व बाहर उत्तम संवातन व्यवस्था का होना भी आवश्यक है। अतः कमरों में दरवाजे व खिड़कियाँ इस प्रकार से होनी चाहिए कि वायु का पारगमन सरलतापूर्वक हो सके ।
In simple words: अच्छे स्वास्थ्य के लिए मकान में लम्बे, चौड़े और ऊँचे कमरे बनवाने चाहिए, ताकि पर्याप्त हवा का संचार हो सके। कमरों में दरवाजों और खिड़कियों की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे ताज़ी हवा आसानी से अंदर आ सके और दूषित हवा बाहर जा सके, जिससे उत्तम संवातन बना रहे।
🎯 Exam Tip: स्वच्छ हवा के लिए कमरों के आकार, खिड़की-दरवाजे की व्यवस्था और वायु संचार के महत्व पर जोर दें।
Question 5. घर से बाहर की संवातन व्यवस्था के सम्भावित उपायों पर प्रकाश डालिए ।
Answer: घर के अन्दर वायु का प्रवेश सदैव बाहर से ही होता है। अतः घर की अच्छी-से-अच्छी आन्तरिक संवातन व्यवस्था भी तब तक अप्रभावी ही रहेगी जब तक कि बाहर की संवातन व्यवस्था ठीक प्रकार की न हो। बाहर की. संवातन व्यवस्था को उत्तम बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए
1. सड़कें तथा गलियाँ चौड़ी होनी चाहिए ।
2. बस्ती अथवा मौहल्ले में मकानों के बीच पर्याप्त दूरी होनी चाहिए ।
3. सड़कों व नालियों की सफाई की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
4. मकानों के आस-पास पार्क व क्रीड़ास्थल होने चाहिए।
5. मकानों के आस-पास व सड़कों के दोनों ओर हरे पेड़-पौधे लगे होने चाहिए।
In simple words: घर के बाहर की अच्छी संवातन व्यवस्था के लिए चौड़ी सड़कें, मकानों के बीच पर्याप्त दूरी, सड़कों और नालियों की नियमित सफाई, तथा आसपास पार्क व पेड़-पौधे होना आवश्यक है ताकि घर में स्वच्छ वायु का संचार हो सके।
🎯 Exam Tip: बाहरी संवातन के लिए शहरी नियोजन, स्वच्छता और हरियाली के महत्व को रेखांकित करें।
Question 6. घर के अन्दर संवातन के मुख्य साधन कौन-कौन से हैं?
Answer:
| घर के अन्दर संवातन के मुख्य साधन | |||
| प्राकृतिक | कृत्रिम | ||
| दरवाजे एवं खिड़कियाँ | रोशनदान | सामान्य विद्युत पंखे | निर्वातक पंखे |
| चिमनी | वातानुकूलन संयन्त्र |
In simple words: घर के अंदर संवातन के मुख्य साधन प्राकृतिक और कृत्रिम होते हैं। प्राकृतिक साधनों में दरवाजे, खिड़कियां, रोशनदान और चिमनी शामिल हैं, जबकि कृत्रिम साधनों में सामान्य विद्युत पंखे, निर्वातक पंखे और वातानुकूलन संयन्त्र शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: संवातन के प्राकृतिक और कृत्रिम साधनों को एक तालिका या सूची के रूप में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 7. संवातन का क्या महत्त्व है? समझाइए ।
Answer: संवातन वह व्यवस्था है जिसके माध्यम से किसी आवासीय स्थल पर निरन्तर वायु का आवागमन होता रहता है। संवातन की व्यवस्था का विशेष महत्त्व है। इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप सम्बन्धित स्थल पर शुद्ध एवं स्वच्छ वायु उपलब्ध होती रहती है। इस स्थिति में कमरे की दूषित, गर्म एवं दुर्गन्धयुक्त वायु बाहर निकल जाती है तथा उसके स्थान पर शीतल, शुद्ध वायु प्रवेश कर जाती है। अवासीय स्थल पर संवातन की उचित व्यवस्था होने की दशा में विभिन्न रोगों के जीवाणुओं को पनपने का अवसर उपलब्ध नहीं होता, कमरे में नमी या घुटन नहीं होती तथा वहाँ का तापमान भी सामान्य बना रहता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि संवतन की व्यवस्था सम्बन्धित व्यक्तियों के सामान्य स्वास्थ्य में सहायक होती है।
In simple words: संवातन का महत्व यह है कि यह किसी भी स्थान पर ताज़ी और शुद्ध हवा के निरंतर प्रवाह को बनाए रखता है, जिससे दूषित और गर्म हवा बाहर निकल जाती है। यह रोगों के जीवाणुओं को पनपने से रोकता है, नमी और घुटन कम करता है, तापमान को सामान्य रखता है, और व्यक्तियों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: संवातन के महत्व को स्वास्थ्य, स्वच्छता और आरामदायक वातावरण के संदर्भ में विस्तार से समझाएं।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वायु अपने आप में क्या है?
Answer: वायु अपने आप में विभिन्न गैसों की एक मिश्रण है।
In simple words: वायु कई अलग-अलग गैसों का मिश्रण है।
🎯 Exam Tip: वायु को गैसों के मिश्रण के रूप में परिभाषित करें।
Question 2. वायु-रूपी गैसीय मिश्रण में विद्यमान मुख्य गैसों का उल्लेख कीजिए।
Answer: वायु-रूपी गैसीय मिश्रण में विद्यमान मुख्य गैसें हैं ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन, ओजोन तथा ऑर्गन आदि ।
In simple words: वायु मुख्य रूप से ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन, ओजोन और ऑर्गन गैसों का मिश्रण है।
🎯 Exam Tip: वायु में पाई जाने वाली प्रमुख गैसों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. वायु जीवन के लिए क्यों आवश्यक है?
Answer: वायु निम्नलिखित दो रूपों में जीवन के लिए आवश्यक है (1) जीवधारियों में श्वसन क्रिया वायु की उपस्थिति में ही होती है। (2) यह हमारे शरीर के ताप को नियन्त्रित करने में सहायता करती है।
In simple words: वायु श्वसन के लिए और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है, जिससे जीवन संभव होता है।
🎯 Exam Tip: वायु के दो मुख्य जीवन-सहायक कार्यों पर ध्यान दें।
Question 4. वस्तुओं के जलने से कौन-सी गैस बनती है?
Answer: वस्तुओं के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है।
In simple words: जब कोई वस्तु जलती है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है।
🎯 Exam Tip: दहन प्रक्रिया के मुख्य गैसीय उत्पाद को याद रखें।
Question 5. संवातन क्या है?
Answer: किसी आवासीय स्थान पर शुद्ध वायु के प्रवेश एवं अशुद्ध वायु के बाहर जाने की व्यवस्था को संवातन कहते हैं।
In simple words: संवातन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी स्थान की दूषित हवा को बाहर निकालकर ताज़ी हवा अंदर लाई जाती है।
🎯 Exam Tip: संवातन की सरल और स्पष्ट परिभाषा दें।
Question 6. रोशनदानों का संवातन में क्या महत्त्व है?
Answer: अशुद्ध वायु गर्म होकर हल्की हो जाती है तथा ऊपर उठकर कमरे में बने रोशनदानों से बाहर निकल जाती है।
In simple words: रोशनदान गर्म और हल्की अशुद्ध हवा को कमरे से बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे ताज़ी हवा के लिए जगह बनती है।
🎯 Exam Tip: संवहन के सिद्धांत के आधार पर रोशनदानों के कार्य को समझाएं।
Question 7. कृत्रिम संवतन के मुख्य साधन क्या हैं?
Answer: कृत्रिम संवातन के मुख्य साधन है
1. सामान्य विद्युत पंखे,
2. निर्वातक पंखे,
3. वातानुकूलन संयन्त्र।
In simple words: कृत्रिम संवातन के प्रमुख साधनों में सामान्य पंखे, एक्जॉस्ट फैन और एयर कंडीशनर शामिल हैं, जो यांत्रिक तरीकों से वायु संचार को नियंत्रित करते हैं।
🎯 Exam Tip: कृत्रिम संवातन के तीन मुख्य साधनों के नाम याद रखें।
Question 8. पारगाम संवातन को प्रभावी बनाने का क्या उपाय है?
Answer: इसके लिए दरवाजों एवं खिड़कियों को ठीक आमने-सामने स्थित होना चाहिए ।
In simple words: पारगाम संवातन को प्रभावी बनाने के लिए, दरवाजे और खिड़कियां एक-दूसरे के ठीक सामने होनी चाहिएं ताकि हवा आसानी से आर-पार जा सके।
🎯 Exam Tip: प्रभावी क्रॉस-वेंटिलेशन के लिए दरवाजों और खिड़कियों की स्थिति पर ध्यान दें।
Question 9. रात्रि में पेड़ के नीचे सोना क्यों हानिकारक है?
Answer: रात्रि में पेड़-पौधों में श्वसन क्रिया अधिक होती है जिसके फलस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन भी अधिक होता है। अतः रात्रि में पेड़ के नीचे सोना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
In simple words: रात में पेड़-पौधे अधिक कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं क्योंकि वे प्रकाश संश्लेषण नहीं करते, जिससे आसपास की हवा में ऑक्सीजन कम हो जाती है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
🎯 Exam Tip: रात्रि में पेड़-पौधों की श्वसन क्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के बारे में बताएं।
Question 10. पृथ्वी पर वायुमण्डल का क्षेत्र कितना विस्तृत है?
Answer: पृथ्वी पर लगभग 400 किलोमीटर ऊपर तक वायु पाई जाती है।
In simple words: पृथ्वी का वायुमण्डल लगभग 400 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला हुआ है।
🎯 Exam Tip: वायुमण्डल की अनुमानित ऊर्ध्वाधर सीमा को याद रखें।
Question 11. वायु को शुद्ध करने में सूर्य के प्रकाश तथा पेड़-पौधों की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पेड़-पौधे प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया सम्पन्न करते हैं। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत पेड़-पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड गैस ग्रहण कर लेते हैं तथा ऑक्सीजन विसर्जित करके वायु को शुद्ध करते हैं।
In simple words: सूर्य का प्रकाश पेड़-पौधों को प्रकाश संश्लेषण करने में मदद करता है, जिससे वे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं, इस प्रकार वायु को शुद्ध करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया और वायु शुद्धिकरण में उसकी भूमिका को समझाएं।
Question 12. वायु में पाई जाने वाली सक्रिय गैस कौन-सी है?
Answer: वायु में पाई जाने वाली मुख्य सक्रिय गैस है-ऑक्सीजन ।
In simple words: वायु में ऑक्सीजन मुख्य सक्रिय गैस है, जो श्वसन और दहन जैसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: वायु की सबसे महत्वपूर्ण सक्रिय गैस के रूप में ऑक्सीजन को पहचानें।
Question 13. वायु में पाई जाने वाली मुख्य निष्क्रिय गैस कौन-सी है?
Answer: वायु में पाई जाने वाली मुख्य निष्क्रिय गैस है-नाइट्रोजन ।
In simple words: वायु में नाइट्रोजन मुख्य निष्क्रिय गैस है, जो लगभग 78% मात्रा में मौजूद है और रासायनिक रूप से कम प्रतिक्रियाशील है।
🎯 Exam Tip: वायु की सबसे प्रचुर मात्रा में मौजूद निष्क्रिय गैस के रूप में नाइट्रोजन को पहचानें।
Question 14. वर्षा ऋतु में वायु में मुख्य रूप से क्या परिवर्तन होते हैं?
Answer: वर्षा ऋतु में वायु में नमी की दर बढ़ जाती है तथा धूल-कणों एवं अन्य लटकने वाली अशुद्धियाँ घट जाती हैं।
In simple words: वर्षा ऋतु में वायु में नमी बढ़ जाती है, जबकि धूल और अन्य निलंबित अशुद्धियाँ कम हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: वर्षा ऋतु के दौरान वायु की नमी और शुद्धता में बदलाव पर ध्यान दें।
Question 15. प्राणवायु अथवा जीवन-रक्षक गैस कौन-सी है?
Answer: ऑक्सीजन गैस, जो कि प्राणियों में श्वसन क्रिया के लिए आवश्यक होती है।
In simple words: ऑक्सीजन गैस को प्राणवायु या जीवन-रक्षक गैस कहते हैं, क्योंकि यह सभी जीवित प्राणियों के श्वसन के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: जीवन के लिए आवश्यक गैस के रूप में ऑक्सीजन की पहचान करें।
Question 16. वायु संगठन में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का प्रतिशत क्या है?
Answer: वायु संगठन में ऑक्सीजन 20.95% तथा कार्बन डाइऑक्साइड 0.03% होती है।
In simple words: वायु में ऑक्सीजन लगभग 20.95% और कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 0.03% की मात्रा में पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: वायु में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के सटीक प्रतिशत मान याद रखें।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question. प्रत्येक प्रश्न के चार वैकल्पिक उत्तर दिए गए हैं। इनमें से सही विकल्प चुनकर लिखिए
(1) प्रकृति में ऑक्सीजन का सन्तुलन बनाए रखते हैं (क) मनुष्य, (ख) कीट-पतंगे, (ग) वन्य जीव-जन्तु, (घ) पेड़-पौधे ।
Answer: (घ) पेड़-पौधे
In simple words: प्रकृति में ऑक्सीजन का संतुलन पेड़-पौधे बनाए रखते हैं, क्योंकि वे प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा ऑक्सीजन उत्पादन में पौधों की भूमिका को समझें।
Question. (2) वायु को दूषित करने वाला कारक है (क) प्राणियों की श्वसन क्रिया, (ख) जैविक पदार्थों का विघटन, (ग) दहन की व्यापक प्रक्रिया, (घ) ये सभी कारक ।
Answer: (घ) ये सभी कारक
In simple words: प्राणियों की श्वसन क्रिया, जैविक पदार्थों का विघटन और दहन की प्रक्रियाएं सभी वायु को दूषित करने वाले कारक हैं।
🎯 Exam Tip: वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों को पहचानें।
Question. (3) वायु में विद्यमान गैसों में से सर्वाधिक सक्रिय गैस है (क) नाइट्रोजन, (ख) हाइड्रोजन, (ग) कार्बन डाइऑक्साइड, (घ) ऑक्सीजन ।
Answer: (घ) ऑक्सीजन
In simple words: वायु में ऑक्सीजन सबसे अधिक सक्रिय गैस है, जो जीवन और दहन के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: वायु की सबसे प्रतिक्रियाशील गैस के रूप में ऑक्सीजन को पहचानें।
Question. 4. वायु में विद्यमान मुख्य निष्क्रिय गैस है (क) ऑक्सीजन, (ख) ओजोन, (ग) नाइट्रोजन, (घ) कार्बन मोनोऑक्साइड ।
Answer: (ग) नाइट्रोजन
In simple words: वायु में नाइट्रोजन मुख्य निष्क्रिय गैस है, जो हवा का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती है।
🎯 Exam Tip: वायु में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली निष्क्रिय गैस का नाम याद रखें।
Question. (5) संवातन का मुख्य उद्देश्य है (क) कमरे से दुर्गन्ध को हटाना, (ख) कमरे में सुगन्ध को बढ़ाना, (ग) कमरे में शुद्ध वायु प्राप्त करना, (घ) कमरे को ठण्डा रखना।
Answer: (ग) कमरे में शुद्ध वायु प्राप्त करना
In simple words: संवातन का मुख्य उद्देश्य कमरे में ताज़ी और शुद्ध हवा लाना है, जिससे वायु की गुणवत्ता बेहतर हो।
🎯 Exam Tip: संवातन के प्राथमिक लक्ष्य को पहचानें, जो कि स्वच्छ वायु है।
Question. (6) कमरे में उत्तम संवातन व्यवस्था के लिए आवश्यक है (क) दरवाजे, (ख) खिड़कियाँ, (ग) रोशनदान, (घ) पारगामी व्यवस्था ।
Answer: (घ) पारगामी व्यवस्था
In simple words: कमरे में अच्छी संवातन व्यवस्था के लिए पारगामी व्यवस्था महत्वपूर्ण है, जिसमें हवा एक तरफ से प्रवेश करके दूसरी तरफ से बाहर निकलती है।
🎯 Exam Tip: प्रभावी वायु संचार के लिए क्रॉस-वेंटिलेशन (पारगामी व्यवस्था) के महत्व को समझें।
Question. (7) विद्युत पंखों द्वारा वायु को प्रदान की जाती है (क) स्थिरता, (ख) स्थायित्व, (ग) गति, (घ) आर्द्रता ।
Answer: (ग) गति
In simple words: विद्युत पंखे वायु को गति प्रदान करते हैं, जिससे हवा का संचार बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: विद्युत पंखों के प्राथमिक कार्य को पहचानें, जो कि वायु को गतिशील करना है।
Question. (8) दीवारों में बनी चिमनियों से कमरे की वायु (क) बाहर निकलती है, (ख) बाहर भी जाती है तथा अन्दर भी जाती है, (ग) बाहर से अन्दर आती है, (घ) कोई प्रभाव नहीं होता।
Answer: (क) बाहर निकलती है
In simple words: दीवारों में बनी चिमनियों का मुख्य कार्य कमरे की गर्म और दूषित हवा को बाहर निकालना है।
🎯 Exam Tip: चिमनियों के कार्य को समझें, जो कि गर्म हवा को बाहर निकालने पर केंद्रित है।
Question. (9) श्वसन क्रिया में रक्त का शुद्धिकरण करती है (क) नाइट्रोजन, (ख) हाइड्रोजन, (ग) ऑक्सीजन, (घ) कार्बन मोनोऑक्साइड ।
Answer: (ग) ऑक्सीजन
In simple words: श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन रक्त का शुद्धिकरण करती है, क्योंकि यह हीमोग्लोबिन से मिलकर पूरे शरीर में पहुँचती है और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: श्वसन प्रक्रिया में रक्त शुद्धिकरण के लिए ऑक्सीजन की भूमिका को पहचानें।
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