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Detailed Chapter 8 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' UP Board Solutions for Class 9 Hindi
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Class 9 Hindi Chapter 8 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 9 Hindi Chapter 8 सूर्यकान्त त्रिपाठी "निराला" (काव्य-खण्ड)
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित पद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए तथा काव्यगत सौन्दर्य भी स्पष्ट कीजिए :
(दान)
1. निकला पहिला आवेश-चपल ।
(Imp.)
शब्दार्थ-पहिला अरविन्द - यहाँ इसके दो अर्थ हैं-
• सरोवर में खिला हुआ पहला कमल,
• प्रातःकाल का सूर्य (ज्ञान)
अनिन्दा - सुन्दर, निर्दोष सौरभ-वसना - सुगन्धि के वस्त्र धारण किये हुए। क्षीण कटि - पतली कमर (धारा) वाली। नटी-नवल - नव-यौवना, नर्तकी।
सन्दर्भ – प्रस्तुत पद्म-पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी काव्य' में संकलित तथा सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित 'अपरा' नामक काव्य ग्रन्थ से 'दान' शीर्षक कविता से ली गयी हैं।
प्रसंग – इस कविता में उन ढोंगी दानियों पर व्यंग्य किया गया है, जिनके हृदय में दया लेशमात्र भी नहीं है तथा जो धर्म के नाम पर केवल दान का ढोंग करते हैं। इन पंक्तियों में कवि ने प्रातःकालीन प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन किया है।
व्याख्या – प्रकृति के रहस्यमय सुन्दर श्रृंगार को देखने के लिए पौ फटते ही पहला कमल खिल गया अथवा प्रकृति के रहस्यों को निर्दोष भाव से देखने के लिए आज ज्ञान का प्रतीक सूर्य निकल आया है। आज ही पहली बार कवि को धर्म के बाह्य आडम्बर का स्वरूप देखकर वास्तविक ज्ञान प्राप्त हुआ है। सुगन्धिरूपी वस्त्र धारण कर वायु मन्द-मन्द बह रही है। वह जब कानों के निकट से गुजरती है तो ऐसा मालूम पड़ता है कि वह प्राणों को पुलकित करनेवाला गतिशीलता का सन्देश दे रही हो। गोमती नदी में कहीं-कहीं पानी कम होने से वह एक पतली कमरवाली नवेली नायिका-सी जान पड़ती है। उसमें उठती-गिरती लहरों के कारण वह धारा मधुर उमंग से भरकर नृत्य करती हुई-सी जान पड़ती है।
काव्यगत सौन्दर्य – कवि ने गोमती तट पर प्रातःकालीन प्राकृतिक सौन्दर्य का सजीव वर्णन किया है।
• गोमती नदी को नवयौवना नर्तकी कहकर नदी का मानवीकरण किया गया है।
• भाषा-संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली ।
• शैली-प्रतीकात्मक, वर्णन
• रस-शान्त, श्रृंगार ।
• शब्द-शक्ति-'निकला पहिला अरविन्द आज' में लक्षणा ।
• गुण-माधुर्य ।
• अलंकार-रूपक, मानवीकरण और अनुप्रास
In simple words: The poet criticizes hypocritical donors and describes the beautiful morning scene at the Gomti river, personifying it as a young dancer, highlighting the awakening of nature and a new understanding of true charity.
🎯 Exam Tip: When analyzing poetry, always explain the context (सन्दर्भ), main theme (प्रसंग), detailed meaning (व्याख्या), and literary beauty (काव्यगत सौन्दर्य) including figures of speech, language, and style, for a comprehensive answer.
Question 1. 2. मैं प्रातः पर्यटनार्थ चला वह पैसा एक,
उपायकरण ।
अथवा ढोता जो वह उपाय करण ।
शब्दार्थ-पर्यटनार्थ - भ्रमण के लिए। निश्चल - स्थिर । सदया - दया भाव से युक्त । कृष्णकाय - काले शरीरवाला।
सन्दर्भ – प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक 'हिन्दी काव्य' में संकलित एवं सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित 'दान' शीर्षक कविता से अवतरित है।
प्रसंग – प्रस्तुत पद्म-पंक्तियों में दान का ढोंग करनेवालों पर व्यंग्य किया गया है। कवि ने ऐसी ही एक घटना का चित्रात्मक वर्णन किया है।
व्याख्या – कवि कहता है कि मैं एक दिन सवेरे गोमती नदी के तट पर घूमने के लिए गया और लौटकर पुल के समीप आकर खड़ा हो गया। वहाँ मैं सोचने लगा कि इस संसार के सभी नियम अटल हैं। प्रकृति दया-भाव से सब मनुष्यों को उनके कर्मों का फल प्रदान करती है अर्थात् मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार ही फल पाते हैं। इस प्रकार उनके सोचने के लिए कुछ भी नवीन नहीं होता। सौन्दर्य, गीत, विविध रंग, गन्ध, भाषा, मनोभावों को छन्दों में बाँधना और मनुष्य को प्राप्त होनेवाले ऊँचे-ऊँचे भोग तथा और भी कई प्रकार के दान, जो मनुष्य को प्रकृति ने प्रदान किये हैं या उसने अपने परिश्रम से प्राप्त किये हैं, इन सबमें मनुष्य श्रेष्ठ और सौभाग्यशाली है। फिर निराला जी ने देखा कि गोमती के पुल पर बहुत बड़ी संख्या में बन्दर बैठे हुए हैं तथा सड़क के एक ओर दुबला-पतला काले रंग का मृतप्राय, जो हड़ियों का ढाँचामात्र था, ऐसा एक भिखारी बैठा हुआ है। वह भिक्षा पाने के लिए अपलक नेत्रों से ऊपर की ओर देख रहा है। उसका कण्ठ भूख के कारण बहुत कमजोर पड़ गया था और उसकी श्वास भी तीव्र गति से चल रही थी। ऐसा लग रहा था, मानो वह जीवन से बिल्कुल उदास होकर शेष घड़ियाँ व्यतीत कर रहा हो। न जाने इस जीवन के रूप में वह कौन-सा शाप ढो रहा था और किन पापों का फल भोग रहा था? मार्ग से गुजरनेवाले सभी लोग यही सोचते थे, किन्तु कोई भी इसका उत्तर नहीं दे पाता था। कोई अधिक दया दिखाता तो एक पैसा उसकी ओर फेंक देता।
काव्यगत सौन्दर्य
• कवि ने मानव को प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ रचना बताया है।
• कवि का विचार है कि मनुष्य अपने पूर्वजन्म के कर्मों के कारण दुःख भोगता है।
• भाषा-संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली
• शैली- वर्णनात्मक ।
• रस-शान्त
• अलंकार-'जीता ज्यों जीवन से उदास' में अनुप्रास तथा उत्प्रेक्षा है।
In simple words: The poet describes an encounter with a starving beggar on a bridge, contrasting him with a large group of monkeys. The scene highlights the poet's reflection on human suffering and the inherent laws of nature, while subtly questioning societal compassion.
🎯 Exam Tip: Pay attention to how the poet uses descriptive language to evoke empathy and highlight social commentary. Identify and explain the figures of speech like 'अनुप्रास' and 'उत्प्रेक्षा' to score well in literary analysis.
Question 1. 3. मैंने झुक नीचे श्रेष्ठ मानव !
अथवा मैंने झुक तत्पर वानर ।
शब्दार्थ-पारायण - अध्ययन । कपियों - बन्दरों सरिता-मज्जन - नदी में स्नान । इतर - दूसरा । दूर्वादल - दूब । तण्डुल - चावल ।।
सन्दर्भ – प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तके 'हिन्दी काव्य' में संकलित एवं सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित 'दान' शीर्षक कविता से अवतरित है।
प्रसंग – सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला' ने अपनी 'दान' शीर्षक कविता में ढोंग करनेवाले दिखावटी धार्मिक लोगों पर तीखा व्यंग्य किया है।
व्याख्या – कवि कहता है कि मैंने झुककर पुल के नीचे देखा तो मेरे मन में कुछ आशा जगी । वहाँ एक ब्राह्मण स्नान करके शिव जी पर जल चढ़ाकर और दूब, चावल, तिल आदि भेंट करके अपनी झोली लिये हुए ऊपर आया। उसको देखकर बन्दर शीघ्रता से दौड़े। यह ब्राह्मण भगवान् राम का भक्त था। उसे भक्ति करने से कुछ मनोकामना पूरी होने की आशा थी। वह बारहों महीने भगवान् शिव की आराधना करता था। वे ब्राह्मण महाशय प्रतिदिन प्रातःकाल रामायण का पाठ करने के बाद ' श्रीमन्नारायण' मन्त्र का जाप करते हैं। वह अन्धविश्वासी ब्राह्मण जब कभी दुःखी होता या असहाय दशा का अनुभव करता, तब हाथ जोड़कर बन्दरों से कहता कि वे उसका दुःख दूर कर दें। कवि उस ब्राह्मण का परिचय देते हुए कहता है कि वे सज्जन मेरे पड़ोस में रहते हैं और प्रतिदिन गोमती नदी में स्नान करते हैं । उसने पुल के ऊपर पहुँचकर अपनी झोली से पुए निकाल लिये और हाथ बढ़ाते हुए बन्दरों के हाथ में रख दिये।
कवि को यह देखकर दुःख हुआ कि उसने बन्दरों को तो बड़े चाव से पुए खिलाये, परन्तु उधर घूमकर भी नहीं देखा, जिधर वह भिखारी कातर दृष्टि से देखता हुआ बैठा था । मानवीय करुणा की उपेक्षा और बन्दरों को पुए खिलाने के बाद वह अन्धविश्वासी ब्राह्मण बोला कि अब मैंने उन राक्षसी वृत्तियों से छुटकारा पा लिया है, जिनके कारण मैं दुःखी था, परन्तु निराला जी के मुख से निकला ' धन्य हो श्रेष्ठ मानव' । भाव यह है कि जो मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है, उसकी इतनी दुर्गति कि उसे बन्दरों से भी तुच्छ समझा गया। मरणासन्न दशा में देखकर भी उसे भिक्षा के योग्य भी न समझा गया। मानवता का इससे बढ़कर क्रूर उपहास और क्या हो सकता है?
काव्यगत सौन्दर्य
• कवि ने अन्धविश्वासी मानव के धार्मिक ढोंग पर तीव्र व्यंग्य किया है।
• भाषा- साहित्यिक खड़ीबोली ।
• शैली-व्यंग्यात्मक ।
• रस-शान्त ।
• अलंकार-अनुप्रास।
In simple words: The poet critically observes a Brahmin performing a ritualistic act of charity by feeding monkeys while ignoring a dying human beggar. This act exposes the hypocrisy and misplaced compassion prevalent in society, highlighting the irony of calling such a person 'श्रेष्ठ मानव' (superior human).
🎯 Exam Tip: Focus on identifying the central irony and satire in the poem. The contrast between feeding animals and neglecting humans is key to understanding the poet's social criticism. Analyzing the use of 'व्यंग्यात्मक शैली' (satirical style) is crucial.
Question 2. सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' का जीवन-परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए। अथवा निराला जी की साहित्यिक सेवाओं एवं भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए। अथवा निराला जी की साहित्यिक सेवाओं एवं काव्य रचनाओं पर प्रकाश डालिए ।
(सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला')
(स्मरणीय तथ्य )
जन्म - सन् 1897 ई०, मेदनीपुर (बंगाल)।
मृत्यु - सन् 1961 ई० ।
पिता - पं० रामसहाय त्रिपाठी ।
रचना - 'राम की शक्ति-पूजा', 'तुलसीदास', 'अपरा', 'अनामिका', 'अणिमा', 'गीतिका', 'अर्चना', 'परिमल', 'अप्सरा', 'अलका' ।
काव्यगत विशेषताएँ
वर्य-विषय - छायावाद, रहस्यवाद, प्रगतिवाद, प्रकृति के प्रति तादात्म्य का भाव ।
भाषा - खड़ीबोली जिसमें संस्कृत शब्दों की बहुलता है। उर्दू व अंग्रेजी के शब्दों तथा मुहावरों का प्रयोग।
शैली - 1. दुरूह शैली, 2. सरल शैली ।। छन्द-तुकान्त, अतुकान्त, रबर छन्द।। अलंकार-उपमा, रूपक, अतिशयोक्ति, मानवीकरण, विशेषण-विपर्यय आदि ।
जीवन-परिचय - हिन्दी के प्रमुख छायावादी कवि पं० सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' का जन्म महिषा-दल, स्टेट मेदनीपुर (बंगाल) में सन् 1897 ई० की बसन्त पंचमी को हुआ था। वैसे ये उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गढ़ कोला गाँव के निवासी थे। इनके पिता पं० रामसहाय त्रिपाठी थे। ये कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। इनकी शिक्षा-दीक्षा बंगाल में हुई थी। 13 वर्ष की अल्पायु में इनका विवाह हो गया था। इनकी पत्नी बड़ी विदुषी और संगीतज्ञ थीं। उन्हीं के संसर्ग में रहकर इनकी रुचि हिन्दी साहित्य और संगीत की ओर हुई । निराला जी ने हिन्दी, बंगला और संस्कृत का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया था। 22 वर्ष की अवस्था में ही पत्नी का देहान्त हो जाने पर अत्यन्त ही खिन्न होकर इन्होंने महिषादल स्टेट की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और स्वच्छन्द रूप से काव्य-साधना में लग गये। इन्होंने 'समन्वय' और 'मतवाला' नामक पत्रों का सम्पादन किया। इनका सम्पूर्ण जीवन संघर्षों में ही बीता और जीवन के अन्तिम दिनों तक ये आर्थिक संकट में घिरे रहे। सन् 1961 ई० में इनका देहान्त हो गया।
रचनाएँ - निराला जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। कविता के अतिरिक्त इन्होंने उपन्यास, कहानी, निबन्ध, आलोचना और संस्मरण आदि विभिन्न विधाओं में भी अपनी लेखनी चलायी। परिमल, गीतिका, अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, अपरा, बेला, नये पत्ते, आराधना, अर्चना आदि इनकी प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं। इनकी अत्यन्त प्रसिद्ध काव्य-रचना 'जुही की कली' है। लिली, चतुरी चमार, सुकुल की बीबी (कहानी संग्रह) एवं अप्सरा, अलका, प्रभावती इनके महत्त्वपूर्ण उपन्यास हैं। काव्यगत विशेषताएँ
(क) भाव-पक्ष-
• हिन्दी साहित्य में निराला मुक्त वृत्त परम्परा के प्रवर्तक माने जाते हैं।
• इनके काव्य में भाषा, भाव और छन्द तीनों समन्वित हैं।
• ये स्वामी विवेकानन्द और स्वामी रामकृष्ण परमहंस की दार्शनिक विचारधारा से बहुत प्रभावित थे।
• निराला के काव्य में बुद्धिवाद और हृदय का सुन्दर समन्वय है।
• छायावाद, रहस्यवाद और प्रगतिवाद तीनों क्षेत्रों में निराला का अपना विशिष्ट महत्त्वपूर्ण स्थान है।
• इनकी रचनाओं में राष्ट्रीय प्रेरणा का स्वर भी मुखर हुआ है।
• छायावादी कवि होने के कारण निराला का प्रकृति से अटूट प्रेम है। इन्होंने प्रकृति-चित्रण में प्रसाद जी की भाँति ही मानवीय भावों का आरोप करते। हुए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
(ख) कला-पक्ष- (1) भाषा-शैली-निराला जी की भाषा संस्कृतगर्भित खड़ीबोली है। यत्र-तत्र बंगला भाषा के शब्दों का भी प्रयोग मिल जाता है। इनकी रचनाओं में उर्दू और फारसी के शब्द भी प्रयुक्त हुए हैं। इनके काव्य में जहाँ हृदयगत भावों की प्रधानता है वहाँ भाषा सरल, मुहावरेदार और प्रवाहपूर्ण है। निराला के काव्य में प्रायः तीन प्रकार की शैलियों के दर्शन होते हैं
• सरल और सुबोध शैली - (प्रगतिवादी रचनाओं में)
• क्लिष्ट और दुरूह शैली - (रहस्यवादी एवं छायावादी रचनाओं में)
• हास्य-व्यंग्यपूर्ण शैली - (हास्य-व्यंग्यपूर्ण रचनाओं में)
(2) रस-छन्द-अलंकारे-निराला के काव्य में श्रृंगार, वीर, रौद्र और हास्य रस का सुन्दर और स्वाभाविक ढंग से परिपाक हुआ है। निराला जी परम्परागत काव्य छन्दों से सर्वथा भिन्न छन्दों के प्रवर्तक माने जाते हैं। इनके मुक्तछन्द दो प्रकार के हैं। (1) तुकान्त (2) अतुकान्त । दोनों प्रकार के छन्दों में लय और ध्वनि का विशेष ध्यान रखा गया है।
अलंकारों के प्रति निराला जी की विशेष रुचि दिखलाई नहीं पड़ती। इन्होंने प्राचीन और नवीन दोनों प्रकार के उपमान की प्रयोग किया है। मानवीकरण और विशेषण जैसे अंग्रेजी के अलंकारों का भी इनके काव्य में प्रयोग मिलता है।
साहित्य में स्थान-निराला जी हिन्दी साहित्य के बहुप्रतिभा सम्पन्न कलाकार एवं साहित्यकार हैं। इन्होंने अपने परम्परागत क्रान्तिकारी स्वच्छन्द मुक्त काव्य-योजना का निर्माण किया। समय के परिवर्तन के साथ-साथ इनके काव्य में भी छायावाद, रहस्यवाद और प्रगतिवाद के दर्शन हुए हैं। सब कुछ मिलाकर निराला भारतीय संस्कृति के युगद्रष्टा कवि हैं। छायावादी चार कवियों (प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी वर्मा) में इनका प्रमुख स्थान है।
In simple words: Suryakant Tripathi 'Nirala' was a prominent figure of the Chhayavaad era, known for his revolutionary free verse and versatile contributions across poetry, novels, and essays. His work showcases a blend of philosophical depth, natural beauty, and social commentary, deeply rooted in Indian culture.
🎯 Exam Tip: When writing a poet's biography, ensure to cover key life events, major works (poetry, prose), literary characteristics (भाव-पक्ष and कला-पक्ष, including language, style, and figures of speech), and his standing in Hindi literature for a complete answer.
Question 3. निराला जी द्वारा रचित 'दान' कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए ।
सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा लिखित 'दान' कविता में दुःखी मानवों की उपेक्षा करके वानरों, कौओं आदि को भोजन खिलाने वाले मनुष्यों पर व्यंग्य किया गया है। 'दान' कविता का सारांश निम्न प्रकार है
सारांश – एक दिन प्रातःकाल कवि घूमते-घूमते नदी के पुल पर जा पहुँचा और सोचने लगा कि यह प्रकृति-जो जैसा करता है, उसे वैसा ही फल देती है। संसार का सौन्दर्य, गीत, भाषा आदि सभी किसी-न-किसी रूप में प्रकृति का दान पाते हैं और सभी यही कहते हैं कि मनुष्य सर्वश्रेष्ठ है।
कवि ने देखा कि पुल के ऊपर बहुत से बन्दर बैठे हैं और मार्ग में एक ओर काले रंग का मरा हुआ-सा अत्यन्त दुर्बल भिखारी बैठा हुआ है। जैसे ही कवि ने झुककर नीचे की ओर देखा तो उन्हें वहाँ पर शिवजी के ऊपर चावल, तिल और जल चढ़ाते हुए एक ब्राह्मण दिखलायी दिया तत्पश्चात् वह ब्राह्मण एक झोली लेकर ऊपर आया। बन्दर उसे देखकर वहाँ आ गये । उसने बन्दरों को झोली से निकालकर पुए दे दिये और उसे भिखारी की ओर मुड़कर भी नहीं देखा। यह देखकर कवि को दुःख हुआ। वह व्यंग्य के साथ बोला-हे मानव, तू धन्य है।
In simple words: The poem 'Dan' by Nirala satirizes the hypocritical practice of feeding animals like monkeys and crows while ignoring suffering humans. It highlights the poet's anguish at seeing a Brahmin offer food to monkeys, completely disregarding a dying beggar, questioning the true essence of charity and humanity.
🎯 Exam Tip: When summarizing, focus on the main theme, key events, and the central message or critique the poet conveys. Use concise language to capture the essence of the work.
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. 'दान' शीर्षक कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
उत्तर :
शीर्षक 'दान' निराला की चर्चित कविता है। प्रस्तुत पंक्तियों में दीनों, असहायों एवं शोषितों के प्रति संवेदना व्यक्त की गयी है। एक दिन निराला घूमते-फिरते नदी के पुल पर जा पहुँचे । पुल पर बहुत से बन्दर बैठे हुए थे। रास्ते में एक दुर्बल भिखारी भी बैठा हुआ है। नीचे शिवजी का मन्दिर है। शिवजी के ऊपर चावल-तिल आदि चढ़ाने का ताँता लगा हुआ था। एक ब्राह्मण पूजा-पाठ करने के पश्चात् झोली लेकर पुल पर आया। झोली से पुए निकालकर बन्दरों को खिलाने लगा लेकिन भिखारी की ओर देखा तक नहीं। कवि को यह देखकर बहुत कष्ट होता है।
In simple words: The central theme of 'Dan' is a critique of performative charity, where a Brahmin feeds monkeys while ignoring a dying human, exposing a lack of true compassion towards the marginalized and exploited.
🎯 Exam Tip: For central idea questions, identify the core message or moral of the poem. Clearly state the poet's perspective on the issue presented.
Question 2. पुल पर खड़े होकर 'निराला' जी क्या सोचते हैं?
उत्तर : पुल पर खड़े होकर सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' सोचते हैं कि इस सृष्टि का निर्माण करने वाले के नियम अटल हैं। यहाँ जो जैसा करता है उसे वैसे ही फल की प्राप्ति होती है।
In simple words: Standing on the bridge, Nirala contemplates the unchanging laws of creation, believing that everyone receives consequences according to their actions.
🎯 Exam Tip: Relate the poet's thoughts to the broader philosophical context within the poem. Understanding the poet's contemplation deepens the analysis of the narrative.
Question 3. निराला ने 'दान' कविता के माध्यम से किस पर प्रहार किया है?
उत्तर : निराला ने 'दान' कविता के माध्यम से धनाढ्य लोगों पर प्रहार किया है, जो बन्दरों को मालपुए खिलाते हैं और निर्धन मनुष्य उन्हें बेबसी से देखते रह जाते हैं।
In simple words: Through 'Dan', Nirala critiques wealthy individuals who engage in superficial acts of charity, like feeding animals, while neglecting the truly needy and helpless people.
🎯 Exam Tip: Identify the specific target of the poet's criticism. Articulating who is being criticized and why is essential for a precise answer.
Question 4. मानव के विषय में सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' की धारणा पहले क्या थी?
उत्तर : मानव को सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी मानते थे।
In simple words: Initially, Suryakant Tripathi 'Nirala' believed humans to be the supreme beings in creation.
🎯 Exam Tip: Differentiate between the poet's initial thoughts and later realizations as presented in the poem, if applicable. This shows a deeper understanding of the poet's evolving perspective.
Question 5. 'कानों में प्राणों की कहती' से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर : जब सौरभ वसना समीर कानों के निकट से गुजरती है, वह मानो कानों में प्राणों को पुलकित करनेवाला प्रेम मन्त्र चुपचाप कह जाती है।
In simple words: The phrase implies that the fragrant breeze, when passing by the ears, whispers a secret mantra of love that invigorates the soul, symbolizing a deep, soothing connection with nature.
🎯 Exam Tip: Explain metaphors and figurative language by linking them to the emotional or sensory experience the poet intends to convey. This demonstrates strong analytical skills.
Question 6. 'दान' शीर्षक कविता में कवि द्वारा किये गये व्यंग्य की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : कविवर निराला ने ‘दान' शीर्षक कविता में समाज की इस अमानवीय प्रवृत्ति पर व्यंग्य किया है कि भक्त लोग एक भूखे मनुष्य को भोजन कराने के स्थान पर बन्दरों को पुए खिलाते हैं और यह समझते हैं कि इससे उन्हें परम पुण्य की प्राप्ति होगी ।
In simple words: In 'Dan', Nirala satirizes the inhuman tendency of devotees to feed monkeys for religious merit, while ignoring starving human beings, highlighting the hypocrisy and misdirection of charitable acts in society.
🎯 Exam Tip: Clearly articulate the irony and the poet's critical stance. Use strong vocabulary to describe the social commentary embedded in the poem.
Question 7. 'दान' शीर्षक कविता पर एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर : एक दिन प्रातःकाल कवि घूमते-घूमते नदी के पुल पर जा पहुँचा और सोचने लगा कि यह प्रकृति-जो जैसा करता है, उसे वैसा ही फल देती है। संसार का सौन्दर्य, गीत, भाषा आदि सभी किसी-न-किसी रूप में प्रकृति का दान पाते हैं और सभी यही कहते हैं कि मनुष्य सर्वश्रेष्ठ है। कवि ने देखा कि पुल के ऊपर बहुत से बन्दर बैठे हैं और मार्ग में एक ओर काले रंग का मरा हुआ-सा अत्यन्त दुर्बल भिखारी बैठा हुआ है। जैसे ही कवि ने झुककर नीचे की ओर देखा तो उन्हें वहाँ पर शिवजी के ऊपर चावल, तिल और जल चढ़ाते हुए एक ब्राह्मण दिखलायी दिया। तत्पश्चात् वह ब्राह्मण एक झोली लेकर ऊपर आया। बन्दर उसे देखकर वहाँ आ गये। उसने बन्दरों को झोली से निकालकर पुए दे दिये और उस भिखारी की ओर मुड़कर भी नहीं देखा। यह देखकर कवि को दुःख हुआ । वह व्यंग्य के साथ बोला-हे मानव, तू धन्य है।
In simple words: This paragraph summarizes 'Dan', where Nirala describes observing a Brahmin feeding monkeys while ignoring a dying beggar. The poem serves as a sharp critique of superficial acts of charity that prioritize ritual over genuine human compassion.
🎯 Exam Tip: For an essay-style answer (अनुच्छेद), ensure a logical flow of ideas from introduction to conclusion. Cover the main plot, character interactions, and the underlying message comprehensively.
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. निराला किस युग के कवि माने जाते हैं?
उत्तर : निराला छायावाद युग के कवि माने जाते हैं।
In simple words: Nirala is considered a prominent poet of the Chhayavaad (Romantic) era in Hindi literature.
🎯 Exam Tip: Knowing the literary era of a poet is fundamental for contextualizing their work and understanding their artistic influences.
Question 2. निराला की दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर : परिमल और अनामिका ।
In simple words: Two notable works by Nirala are 'Parimal' and 'Anamika'.
🎯 Exam Tip: Memorize key works of important poets as this is a common factual question. Ensure correct spelling of the titles.
Question 3. निराला की पुत्री का क्या नाम था?
उत्तर : निराला की पुत्री का नाम सरोज था।
In simple words: Nirala's daughter was named Saroj.
🎯 Exam Tip: Biographical details, especially family connections, often appear in short-answer questions. Remembering them can earn quick marks.
Question 4. छायावाद के स्तम्भ कहे जाने वाले कवि का नाम लिखिए।
उत्तर : सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' ।
In simple words: Suryakant Tripathi 'Nirala' is considered one of the pillars of the Chhayavaad movement.
🎯 Exam Tip: Identify the key figures associated with major literary movements. This demonstrates your knowledge of literary history.
Question 5. निराला के काव्य की भाषा क्या है?
उत्तर : खड़ीबोली ।
In simple words: The language predominantly used in Nirala's poetry is Khari Boli (Standard Hindi).
🎯 Exam Tip: Understanding the language used by a poet helps in appreciating their style and accessibility. Specify 'Khari Boli' for modern Hindi poets.
Question 6. निम्नलिखित में से सही उत्तर के सम्मुख सही (NV) का चिह्न लगाइए
(अ) भिखारी का रंग काला था।
(ब) शिवभक्त बन्दरों को पुए खिला रहा था।
(स) निराला भारतेन्दु युग के कवि माने जाते हैं।
In simple words: This question asks to identify the correct statement among the given options, relating to the 'Dan' poem or Nirala's life. Students should recall facts about the poem's characters and the poet's background.
🎯 Exam Tip: For true/false or multiple-choice questions without an explicit answer, critically evaluate each statement against the learned content. Such questions test factual recall and comprehension.
काव्य-सौन्दर्य एवं व्याकरण-बोध
Question 1. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए-
(अ) सोचा 'विश्व का नियम निश्चल', जो जैसा उसको वैसा फल ।
(ब) विप्रवर स्नान कर चढ़ा सलिल, शिव पर दूर्वा दल तण्डुल, तिल ।
Answer:
(अ) काव्यगत विशेषताएँ-
• यह धरती का शाश्वत सत्य है कि जो जैसा करता है उसी के अनुसार फल मिलता है।
• छन्द-नवीन प्रकार की अतुकान्त छन्द ।
• भाषा-संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली ।
• शैली-आलंकारिक, भावात्मक।
• अलंकार-रूपक और अनुप्रास ।
• गुण-माधुर्य ।
• रस-शान्त ।
(ब) काव्यगत विशेषताएँ-
• कवि ने मानव समाज की दयनीय दशा एवं थोथे आडम्बरों का सजीव चित्रण किया है।
• भाषा-संस्कृतनिष्ठ एवं साहित्यिक खड़ीबोली ।
• अलंकार-अनुप्रास ।
• छन्द-तुकान्त।
• रस-शान्त
• गुण-प्रसाद ।
In simple words: The first line reflects on the immutable law of karma and its consequences, using an unrhymed free verse and a reflective tone. The second line vividly describes a Brahmin performing a ritualistic offering to Lord Shiva, highlighting the superficiality of such acts through Sanskritized language and a critical perspective.
🎯 Exam Tip: For explaining literary beauty (काव्य-सौन्दर्य), break down your analysis into different elements: central theme, poetic meter (छन्द), language (भाषा), style (शैली), literary devices (अलंकार), and sentiment (रस) for a detailed evaluation.
Question 2. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार का नाम बताइए
(अ) जीता ज्यों जीवन से उदास ।
(ब) भाषा भावों के छन्द बद्ध ।
(स) कहते कपियों के जोड़ हाथ।
Answer:
(अ) अनुप्रास,
(ब) अनुप्रास,
(स) अनुप्रास ।
In simple words: All three phrases demonstrate the figure of speech 'Anupras' due to the repetition of consonants at the beginning of words or within words, creating a musical effect.
🎯 Exam Tip: When identifying figures of speech, look for characteristic patterns. 'Anupras' (Alliteration) is identified by the repetition of consonant sounds in close proximity. Always provide a clear, concise reason for your choice.
Question 3. निम्नलिखित में समास-विग्रह करते हुए समास का नाम बताइए
| कृष्णकाय | = | कृष्ण काय | = | कर्मधारय |
| दूर्वादल | = | दूर्वादल (हरीघास) | = | कर्मधारय |
| सरिता-मज्जन | = | सरिता में मज्जन | = | अधिकरण तत्पुरुष |
| रामभक्त | = | राम का भक्त | = | सम्बन्ध तत्पुरुष |
In simple words: This question requires breaking down compound words (समास) into their constituent parts (विग्रह) and identifying the type of compound, such as Karmadharaya or Tatpurush, based on the relationship between the words.
🎯 Exam Tip: For Samas Vigrah, accurately identify the primary and secondary words, their relationship, and the resulting Samas type. Practice recognizing the specific rules for each type (e.g., qualifying adjectives for Karmadharaya, case relations for Tatpurush).
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UP Board Solutions Class 9 Hindi Chapter 8 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
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