Download UP Board Solutions for Class 9 Hindi Chapter 07 कृष्णः गोपालानंदनः
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Question 1. सुविदितमेव अस्ति ।
Answer: शब्दार्थ-सुविदितमेव - भली-भाँति ज्ञात ही है। लोकोत्तरः - अलौकिक । सन्दर्भ-प्रस्तुत अवतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक के अन्तर्गत संस्कृत खण्ड के 'कृष्णः गोपालनन्दन' नामक पाठ से उद्धृत है। हिन्दी अनुवाद – (यह) भली-भाँति ज्ञात ही है कि श्रीकृष्ण अलौकिक महापुरुष थे। हजारों वर्ष पहले उत्पन्न हुए यह महापुरुष आज भी मनुष्यों के हृदय में विराजमान हैं।
In simple words: यह सर्वविदित है कि भगवान श्रीकृष्ण एक अलौकिक महापुरुष थे। वे हजारों साल पहले जन्मे थे, लेकिन आज भी लोगों के हृदयों में बसे हुए हैं।
🎯 Exam Tip: यह गद्यांश का सन्दर्भ सहित अनुवाद है, जिसमें अलौकिक व्यक्तित्व पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
Question 2. श्रीकृष्णस्य मातुलः श्रीकृष्णः जातः ।
Answer: शब्दार्थ-मातुलः - मामा उभावपि - दोनों को ही। न्यक्षिपत् - डाल दिया । स्वभगिन्याः - अपनी बहन का । हिन्दी अनुवाद - श्रीकृष्ण को मामा कंस अत्याचारी शासक था। उसने पहले अपनी बहिन देवकी का विवाह वसुदेव के साथ किया। बाद में आकाशवाणी सुनकर दोनों को ही जेल में डाल दिया। वहीं जेल में श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए।
In simple words: श्रीकृष्ण के मामा कंस एक क्रूर शासक थे, जिन्होंने देवकी और वसुदेव को विवाह के बाद आकाशवाणी सुनकर जेल में डाल दिया था, जहाँ श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।
🎯 Exam Tip: इस भाग में श्रीकृष्ण के जन्म से पूर्व की परिस्थितियों और उनके मामा कंस के अत्याचारों का वर्णन है, जो कथा का महत्वपूर्ण आधार है।
Question 3. श्रीकृष्णस्य जन्म अभवत् ।।
Answer: शब्दार्थ-घटाटोपाः - घटाओं से घिरे सद्योजातम् - तुरन्त (नवजात) पैदा हुए। आदाय - लेकर। उत्तालतरङ्गाम् - ऊँची-ऊँची लहरोंवाली। उत्तीर्य - पार करके । हृदयवल्लभः - हृदय के प्रिय । हिन्दी अनुवाद - श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा में हुआ था। आधी रात में जब ये (श्रीकृष्ण) उत्पन्न हुए तब आकाश में घटाओं से घिरे मेघ ने मूसलधार वर्षा की। उस समय अन्धकारपूर्ण रात्रि थी, किन्तु वसुदेव ने उत्पन्न हुए पुत्र की रक्षा के लिए तुरन्त उसको लेकर ऊँची लहरोंवाली यमुना को पारकर गोकुल में नन्द के घर पहुँचाया। वहाँ बचपन से ही श्रीकृष्ण मनुष्यों के हृदय में प्रिय हो गये।
In simple words: श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को हुआ। घोर वर्षा और अँधेरी रात में वसुदेव उन्हें यमुना पार कर नन्द के घर गोकुल ले गए, जहाँ वे बचपन से ही सबके प्रिय बन गए।
🎯 Exam Tip: इस अंश में श्रीकृष्ण के जन्म और गोकुल आगमन का मार्मिक वर्णन है, जिसमें विपरीत परिस्थितियों में उनके सुरक्षित पहुँचने पर ध्यान दें।
Question 4. बाल्यकाले स्निह्यन्ति ।
Answer: शब्दार्थ-नयति - ले जाती है। अपरा - दूसरी । निधाय - रखकर अर्थात् लेकर । पाययति - पिलाती नवनीतम् - मक्खन दधिभाण्डम् - दही का बर्तन । त्रोटयति - तोड़ देते थे । क्रुध्यति - क्रोध करता था। स्निह्यति - स्नेह करता था। हिन्दी अनुवाद - बचपन में इन्होंने (श्रीकृष्ण ने) अपने सौंन्दर्य से और बाल-लीला से सभी मनुष्यों के मन को मोहित कर लिया। कोई गोपिका उन्हें गोदी में लेकर अपने घर ले जाती, दूसरी उन्हें दूध पिलाती और अन्य कोई उन्हें मक्खन देती। श्रीकृष्ण प्रेम से दिया गया दूध पीते और मक्खन खाते। अवसर पाकर वे अपने मित्र ग्वालों के साथ किसी घर में घुसकर दही खाते, मित्रों को देते, शेष दही को जमीन पर गिरा देते और कभी-कभी दही के बर्तन को तोड़ देते। यह सब करते हुए भी उनके शील और सौन्दर्य से प्रभावित हुआ कोई भी उन पर क्रोध नहीं करता था, अपितु सब उनसे स्नेह करते थे।
In simple words: बचपन में श्रीकृष्ण अपनी बाल लीलाओं और सौन्दर्य से सबको मोहित कर लेते थे। वे गोपियों के घरों में दही-माखन खाते और शरारतें करते थे, फिर भी कोई उन पर क्रोध नहीं करता था, बल्कि सब उनसे स्नेह करते थे।
🎯 Exam Tip: श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और उनके प्रति सभी के अगाध स्नेह का वर्णन इस खंड का मुख्य बिन्दु है। उनके माखनचोरी प्रसंग पर विशेष ध्यान दें।
Question 5. अनन्तरं अकरोत् ।
Answer: शब्दार्थ-अनन्तरम् - बाद में वेणुः - वंशी वेणुम् - वंशी को (द्वितीया एकवचन का रूप) विहाय - छोड़कर। शृण्वन्ति - सुनते थे।' हिन्दी अनुवाद - इसके पश्चात् श्रीकृष्ण ग्वालों के साथ वन जाकर गायों को चराते और वहाँ वंशी बजाते । इससे सभी गायें और ग्वाले समस्त कार्यों को छोड़कर उनका वंशी-वादन सुनते महाकवि व्यास ने संस्कृत भाषा में (तथा) भक्तकवि सूरदास ने हिन्दी-भाषा में उनकी बाललीला का अत्यन्त सुन्दर वर्णन किया है।
In simple words: श्रीकृष्ण बड़े होकर ग्वालों के साथ वन में गायें चराते और वंशी बजाते थे। उनकी वंशी की मधुर ध्वनि सुनकर सभी गायें और ग्वाले अपने कार्य छोड़कर मंत्रमुग्ध हो जाते थे, जिसका वर्णन व्यास और सूरदास जैसे कवियों ने किया है।
🎯 Exam Tip: यह भाग श्रीकृष्ण के गोचारण और वंशी-वादन की महिमा तथा उनके चरित्र-वर्णन में महाकवियों के योगदान को दर्शाता है।
Question 6. यदा अयं अभवत् ।
Answer: शब्दार्थ-प्रेषयत् - भेजा। अविगणय्य - बिना गिने; बिना परवाह किये। सन्दीप्ते वह्नौ - आग लगने पर । अत्रायत - रक्षा की। पद्मधारयत् - स्थान बना लिया। हन्तुं - मारने के लिए। हिन्दी अनुवाद – जब ये बालक ही थे तब कंस ने उन्हें मारने के लिए एक के बाद एक बहुत-से राक्षसों को भेजा, किन्तु श्रीकृष्ण ने अपने कौशल और पराक्रम से उन सबको मार दिया। उन्होंने न केवल राक्षसों से अपितु अन्य विपत्तियों से भी गोकुलवासियों की रक्षा की। एक बार वर्षा-ऋतु में गोकुल में यमुना का जल तेजी से बढ़ने लगा, तब श्रीकृष्ण ने अपने प्राणों की चिन्ता न करके (बिना परवाह किये) सभी गोकुलवासियों की रक्षा की। इसी प्रकार आग लग जाने पर इन्होंने सब पशुओं और ग्वालों की उससे रक्षा की। इस प्रकारे (उन्होंने) निरन्तर गोकुलवासियों के कष्टों का निवारण करते हुए उनके हृदय में स्थान बना लिया। अतः श्रीकृष्ण बचपन से ही अपने उत्तम गुणों और परोपकार की भावना के कारण लोकप्रिय हो गये।
In simple words: बचपन में कंस द्वारा भेजे गए राक्षसों और प्राकृतिक आपदाओं (जैसे बाढ़ और आग) से श्रीकृष्ण ने अपने कौशल से गोकुलवासियों और पशुओं की रक्षा की। उन्होंने बिना अपनी परवाह किए दूसरों की सहायता की, जिससे वे सबके हृदय में लोकप्रिय हो गए।
🎯 Exam Tip: यह खंड श्रीकृष्ण के बचपन से ही वीर और परोपकारी स्वभाव को दर्शाता है, जिसमें उन्होंने कंस के भेजे राक्षसों और प्राकृतिक आपदाओं से गोकुल की रक्षा की।
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