UP Board Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 Nishamurti Kasturba

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 9 Hindi Chapter 06 निशामूर्ति कस्तूरबा

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. निम्नांकित गद्यांशों में रेखांकित अंशों की सन्दर्भ सहित व्याख्या और तथ्यात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(1) चाहे दक्षिण अफ्रीका में हों या हिन्दुस्तान में, सरकार के खिलाफ लड़ाई के समय जब-जब चारित्र्य का तेज प्रकट करने का मौका आया कस्तूरबा हमेशा इस दिव्य कसौटी से सफलतापूर्वक पार हुई हैं। इससे भी विशेष बात यह है कि बड़ी तेजी से बदलते हुए आज के युग में भी आर्य सती स्त्री का जो आदर्श हिन्दुस्तान ने अपने हृदय में कायम रखा है, उस आदर्श की जीवित प्रतिमा के रूप में राष्ट्र पूज्य कस्तूरबा को पहचानता। है। इस तरह की विविध लोकोत्तर योग्यता के कारण आज सारा राष्ट्र कस्तूरबा की पूजा करता है।
प्रश्न
(1) गद्यांश का संदर्भ लिखिए ।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) किस योग्यता के कारण सारा राष्ट्र कस्तूरबा की पूजा करता है?
Answer:
1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गद्य' के 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' नामक पाठ से अवतरित है। इसके लेखक उच्चकोटि के विचारक काका कालेलकर हैं। प्रस्तुत अवतरण में कस्तूरबा के गुणों का वर्णन किया गया है।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- कस्तूरबा का वर्णन करते हुए लेखक कहता है कि चाहे भारत में हो या दक्षिण अफ्रीका में सरकार के खिलाफ संघर्ष के अवसर पर कस्तूरबा पीछे नहीं रहीं और उसका सफलतापूर्वक संचालन किया। इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि कस्तूरबा ने आदर्श भारतीय नारी के स्वरूप का विधिवत् पालन किया है। भारत ने स्त्री का जो आदर्श अपने हृदय में धारण किया है, कस्तूरबा उसकी प्रतिमूर्ति थीं। इन्हीं गुणों के कारण कस्तूरबा भारतीय समाज में समादृत हैं।
3. विविध लोकोत्तर योग्यता के कारण आज सारा राष्ट्र कस्तूरबा की पूजा करता है।
In simple words: कस्तूरबा ने दक्षिण अफ्रीका और भारत दोनों जगहों पर सरकार के खिलाफ संघर्ष में अपने चरित्र का प्रदर्शन किया। वे भारतीय नारी के आदर्शों की प्रतिमूर्ति थीं, जिनके कारण आज पूरा देश उनकी पूजा करता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में गद्यांश का संदर्भ, रेखांकित अंश की व्याख्या और एक तथ्यात्मक प्रश्न का उत्तर देना होता है। व्याख्या करते समय मूल भाव को स्पष्ट करें और संदर्भ में लेखक व पाठ का नाम लिखें।

 

(2) दुनिया में दो अमोघ शक्तियाँ हैं-शब्द और कृति । इसमें कोई शक नहीं कि 'शब्दों' ने सारी पृथ्वी को हिला दिया है। किन्तु अन्तिम शक्ति तो 'कृति' की है। महात्मा जी ने इन दोनों शक्तियों की असाधारण उपासना की है। कस्तूरबा ने इन दोनों शक्तियों में से अधिक श्रेष्ठ शक्ति कृति की नम्रता के साथ उपासना करके सन्तोष माना और जीवनसिद्धि प्राप्त की।
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) कस्तूरबा कैसी महिला थीं?
(4) शब्द और कृति क्या है?
(5) गाँधी जी ने किसकी उपासना की?
[शब्दार्थ-अमोघ = अचूक । कृति = रचना । सिद्धि = जीवन की श्रेष्ठता ।]
Answer:
1. सन्दर्भ- प्रस्तुत पद्मावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गदा' में संकलित एवं काका कालेलकर द्वारा लिखित । 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' नामक निबन्ध से लिया गया है जो गाँधी युग के जलते चिराग' नामक पुस्तक से उद्धृत है। लेखक कस्तूरबा के जीवन की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए विश्व की महानतम् शक्तियों (शब्द और कृति) में 'बा' को 'कृति' की उपासिका बतलाता है।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- शब्द अर्थात् 'कहना' तथा कृति अर्थात् 'करना' वास्तव में इस संसार की ये ही दो अचूक शक्तियाँ हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि शब्दों की शक्ति ऐसी है जिसने सारे विश्व को प्रभावित कर रखा है, किन्तु शब्दों की अपेक्षा 'कृति' वाली शक्ति और भी महत्त्व रखती है। महात्मा गाँधी ने उक्त दोनों शक्तियों की असाधारण साधना की थी अर्थात् उन्होंने कथनी और करनी में सामंजस्य स्थापित किया था, किन्तु कस्तूरबा ने सबसे पहले महत्त्वपूर्ण शक्ति 'कृति' की नम्रतापूर्वक साधना की और अपने जीवन को सफल सिद्ध किया। 'बा' ने केवल काम करने को ही महत्त्व दिया और इसी के बल पर वे सर्वपूज्य हो गयीं। दक्षिणी अफ्रीका की सरकार ने गाँधी जी को जब जेल भेज दिया तो कस्तूरबा ने अपना बचाव तक नहीं किया और न कहीं निवेदन किया। वे एक दृढ़ संकल्प वाली महिला थीं।
3. कस्तूरबा एक दृढ़ संकल्प वाली महिला थीं।
4. शब्द और कृति दो अमोघ शक्तियाँ हैं।
5. गाँधी जी ने शब्द और कृति दोनों शक्तियों की असाधारण उपासना की है।
In simple words: दुनिया में शब्द और कृति दो प्रमुख शक्तियां हैं, जिनमें कृति (कर्म) श्रेष्ठ है। महात्मा गांधी ने दोनों की साधना की, लेकिन कस्तूरबा ने नम्रतापूर्वक कृति को अपनाया और अपने जीवन को सफल बनाया।

🎯 Exam Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में शब्दार्थ को समझकर उत्तर देना महत्त्वपूर्ण होता है। रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय लेखक के मूल विचार को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

(3) यह सब श्रेष्ठता या महत्ता कस्तूरबा में कहाँ से आयी? उनकी जीवन-साधना किस प्रकार की थी? शिक्षण के द्वारा उन्होंने बाहर से कुछ नहीं लिया था। सचमुच, उनमें तो आर्य आदर्श को शोभा देनेवाले कौटुम्बिक सद्गुण ही थे। असाधारण मौका मिलते ही और उतनी ही असाधारण कसौटी आ पड़ते ही उन्होंने स्वभावसिद्ध कौटुम्बिक सद्गुण व्यापक किये और उनके जोरों पर हर समय जीवन-सिद्धि हासिल की। सूक्ष्म प्रमाण में या छोटे पैमाने पर जो शुद्ध साधना की जाती है उसका तेज इतना लोकोत्तरी होता है कि चाहे कितना ही बड़ा प्रसंग आ पड़े, व्यापक प्रमाण में कसौटी हो, चारित्र्यवान् मनुष्य को अपनी शक्ति का सिर्फ गुणाकार ही करने का होता है।
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) चारित्र्यवान् मनुष्य को अपनी शक्ति का क्या करना होता है?
(4) चारित्र्यवान व्यक्ति की क्या विशेषता होती है? |
(5) किस साधना का तेज लोकोत्तरी होता है?
Answer:
1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गदा' में संकलित एवं काका कालेलकर द्वारा लिखित 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ से अवतरित है। प्रस्तुत अवतरण में कस्तूरबा के कौटुम्बिक सद्गुणों का वर्णन है।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- कस्तूरबा ने शिक्षण द्वारा कुछ नहीं ग्रहण किया था, बल्कि उन्होंने जो कुछ सीखा-समझा वह व्यवहारतः था । वास्तव में उनमें आदर्श कौटुम्बिक सद्गुण थे, बल्कि अवसर मिलने पर उन्होंने स्वभाव सिद्ध पारिवारिक सद्गुणों का विस्तार किया और उसी के बल पर जीवन में सफलता प्राप्त की। छोटे पैमाने पर जो साधना की जाती है उसमें असीम शक्ति होती है। चरित्रवान व्यक्ति सदैव कसौटी पर खरा उतरता है। कस्तूरबा एक चरित्रवान् महिला थीं। अपने चारित्रिक गुणों और कौटुम्बिक सदगुणों के कारण उन्होंने भारतीय समाज में ख्याति प्राप्त की।
3. चारित्र्यवान् मनुष्य को अपनी शक्ति का सिर्फ गुणाकर ही करना होता है।
4. चारित्र्यवान् व्यक्ति की विशेषता है कि उसमें कौटुम्बिक सद्गुण होते हैं।
5. शुद्ध साधना का तेज लोकोत्तरी होता है।
In simple words: कस्तूरबा में श्रेष्ठता उनके स्वाभाविक कौटुम्बिक सद्गुणों से आई थी। उन्होंने शिक्षा से कुछ नहीं सीखा बल्कि अपने गुणों का विस्तार किया और जीवन में सफलता प्राप्त की। छोटी साधना भी असीम शक्ति प्रदान करती है।

🎯 Exam Tip: गद्यांश के संदर्भ में लेखक के विचारों को समझना महत्वपूर्ण है। रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय, कस्तूरबा के आंतरिक गुणों और उनके प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 2. काका कालेलकर का जीवन-परिचय देते हुए उनके कृतित्व पर प्रकाश डालिए।
(प्रश्न 3. भाषा-शैली को स्पष्ट करते हुए कालेलकर जी की साहित्यिक विशेषताएँ लिखिए ।)
(प्रश्न 4, काका कालेलकर का जीवन एवं साहित्यिक परिचय दीजिए । अथवा काका कालेलकर का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए ।)
Answer:
यह उत्तर प्रश्न 2, 3 और 4 के लिए एक साथ दिया गया है।
काका कालेलकर
(स्मरणीय तथ्य )

जन्म-सन् 1885 ई० । मृत्यु-सन् 1981 ई० । जन्म-स्थान- महाराष्ट्र में सतारा जिला ।
अन्य बातें -हिन्दी, गुजराती, बंगला, अंग्रेजी, मराठी भाषाओं पर पूरा अधिकार, राष्ट्रभाषा का प्रचार ।
भाषा- सरल, ओजस्वी, प्रवाहपूर्ण ।
शैली- सजीव, प्रभावपूर्ण, कल्पना की उड़ान।
साहित्य- संस्मरण, यात्रा वर्णन, सर्वोदय, हिमालय प्रवास, लोकमाता, उस पार के पड़ोसी, जीवन लीला, बापू की झाँकियों, जीवन का काव्य आदि ।
• जीवन-परिचय- काका कालेलकर का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले में 1 दिसम्बर, सन् 1885 ई० को हुआ था। कालेलकर हिन्दी के उन उन्नायक साहित्यकारों में से हैं जिन्होंने अहिन्दी भाषा क्षेत्र का होकर भी हिन्दी सीखकर उसमें लिखना प्रारम्भ किया। उन्होंने राष्ट्रभाषा के प्रचार-कार्य को राष्ट्रीय कार्यक्रम के अन्तर्गत माना है। काका कालेलकर ने सबसे पहले हिन्दी लिखी और फिर दक्षिण भारत में हिन्दी प्रचार को कार्य प्रारम्भ किया। अपनी सूझबूझ, विलक्षणता और व्यापक अध्ययन के कारण उनकी गणना देश के प्रमुख अध्यापकों एवं व्यवस्थापकों में होती है। काका साहब उच्चकोटि के विचारक एवं विद्वान् थे । भाषा प्रचार के साथ-साथ इन्होंने हिन्दी और गुजराती में मौलिक रचनाएँ भी की हैं। सन् 1981 ई० में आपकी मृत्यु हो गयी।
• कृतियाँ - काको साहब की कृतियाँ निम्नलिखित हैं -
1. निबन्ध-संग्रह- जीवन-साहित्य, जीवन का काव्य-इन विचारात्मक निबन्धों में इनके संत व्यक्तित्व और प्राचीन भारतीय संस्कृति की सुन्दर झलक मिलती है।
2. आत्म-चरित्र- 'धर्मोदय' तथा 'जीवन लीला'-इनमें काका साहब के यथार्थ व्यक्तित्व की सजीव झाँकी है।
3. यात्रा-वृत्त- 'हिमालय-प्रवास', 'लोकमाता', 'यात्रा', 'उस पार के पड़ोसी' आदि प्रसिद्ध यात्रावृत्त हैं।
4. संस्मरण- ‘संस्मरण' तथा 'बापू की झाँकी'-इन रचनाओं में महात्मा गाँधी के जीवन का चित्रण है।
5. सर्वोदय-साहित्य- आपकी 'सर्वोदय' रचना में सर्वोदय से सम्बन्धित विचार हैं।
6. साहित्यिक परिचय- काका साहब एक सिद्धहस्त मॅझे हुए लेखक थे। किसी भी सुन्दर दृश्य का वर्णन अथवा पेचीदी समस्या का सुगम विश्लेषण उनके लिए आनन्द का विषय है। उनके यात्रा-वर्णन में पाठकों को देश-विदेश के भौगोलिक विवरणों के साथ-साथ वहाँ की विभिन्न समस्याओं तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी भी हो जाती है। काका साहब देश की विभिन्न भाषाओं के अच्छे जानकार हैं। उन्होंने प्रायः अपने ग्रन्थों का अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाओं में स्वयं प्रस्तुत किया है। इनके विचारों में संस्कृति और परम्पराओं में एक नवीन क्रान्तिकारी दृष्टिकोणों का समावेश रहता है।
7. भाषा-शैली- काका साहब की भाषा अत्यन्त ही सरल और ओजस्वी है। उसमें एक आकर्षक धारा है जिसमें सूक्ष्म दृष्टि एवं विवेचनात्मक तर्कपूर्ण विचार की अभिव्यक्ति होती है। उनकी भाषा में एक नयी चित्रमयता के साथ-साथ विचारों की मौलिकता के स्पष्ट दर्शन होते हैं। भाषा के साथ-साथ उनकी शैली अत्यन्त ही ओजस्वी है। इन्होंने अपने निबन्धों में प्रायः व्याख्यात्मक शैली का प्रयोग किया है। कुछ रचनाओं में प्रबुद्ध विचारक के उपदेशात्मक शैली के दर्शन होते हैं ।
In simple words: काका कालेलकर का जन्म 1885 में महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था और वे 1981 में चल बसे। वे बहुभाषी और राष्ट्रभाषा प्रचारक थे, जिनकी भाषा सरल, ओजस्वी और शैली सजीव थी। उनके साहित्यिक कृतित्व में संस्मरण, यात्रा वर्णन, निबन्ध-संग्रह, आत्म-चरित्र और सर्वोदय-साहित्य प्रमुख हैं, तथा उन्होंने हिन्दी और गुजराती में मौलिक रचनाएँ कीं।

🎯 Exam Tip: साहित्यिक परिचय देते समय लेखक के जन्म, मृत्यु, शिक्षा, भाषाओं पर अधिकार, भाषा-शैली और प्रमुख साहित्यिक योगदानों को स्पष्ट रूप से बिंदुवार प्रस्तुत करें।

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. कस्तूरबा में एक आदर्श भारतीय नारी के कौन-कौन से गुण विद्यमान थे?
Answer: कस्तूरबा गाँधी एक पतिव्रता महिला थीं। वे अत्यन्त धार्मिक महिला थीं। गीता और तुलसी कृत रामायण में उनकी अगाध श्रद्धा थी। आलस्य नाम की चीज उनके अन्दर थी ही नहीं। आश्रम में कस्तूरबा लोगों के लिए माँ के समान थीं।
In simple words: कस्तूरबा एक आदर्श भारतीय नारी थीं जिनमें पतिव्रता धर्म, धार्मिकता, गीता और रामायण में अगाध श्रद्धा और आलस्यहीनता जैसे गुण थे। वे आश्रम में सभी के लिए माँ समान थीं।

🎯 Exam Tip: आदर्श भारतीय नारी के गुणों का उल्लेख करते समय कस्तूरबा के प्रमुख नैतिक और सामाजिक मूल्यों को स्पष्ट करें।

 

Question 2. स्वयं में शिक्षा के अभाव की पूर्ति 'बा' ने किस प्रकार की?
Answer: कस्तूरबा अनपढ़ थीं। उनका भाषा-ज्ञान सामान्य देहाती से अधिक नहीं था। बापू के साथ वे दक्षिण अफ्रीका में रहीं इसलिए वह कुछ अंग्रेजी समझने लगी थीं।
In simple words: कस्तूरबा अशिक्षित थीं, लेकिन बापू के साथ दक्षिण अफ्रीका में रहने के कारण उन्होंने कुछ अंग्रेजी सीखकर अपने शिक्षा के अभाव को पूरा किया।

🎯 Exam Tip: 'बा' के शिक्षा के अभाव की पूर्ति के प्रयासों को बताते हुए उनके व्यवहारिक ज्ञान और अनुकूलन क्षमता पर जोर दें।

 

Question 3. 'शब्द' और 'कृति' से लेखक का क्या तात्पर्य है? कस्तूरबा के सम्बन्ध में सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
Answer: दुनिया में दो अमोघ शक्तियाँ हैं-शब्द और कृति । इसमें कोई शक नहीं है कि शब्दों ने सारी पृथ्वी को हिला दिया है, किन्तु अन्तिम शक्ति तो कृति ही है। महात्मा जी ने इन दोनों शक्तियों की असाधारण उपासना की है। कस्तूरबा ने इन दोनों शक्तियों में से अधिक श्रेष्ठ शक्ति कृति की नम्रता के साथ उपासना करके सन्तोष माना और जीवनसिद्धि प्राप्त की।
In simple words: लेखक के अनुसार 'शब्द' (कथनी) और 'कृति' (करनी) दो अमोघ शक्तियां हैं, जिनमें कृति अधिक शक्तिशाली है। कस्तूरबा ने कृति की उपासना करके अपने जीवन को सफल बनाया, जो उनकी विनम्रता और कर्मनिष्ठा को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: 'शब्द' और 'कृति' की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कस्तूरबा के उदाहरण से उनके कर्म-प्रधान जीवन को उजागर करें।

 

Question 4. 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ से दस महत्त्वपूर्ण वाक्य लिखिए ।
Answer: कस्तूरबा अनपढ़ थीं। उनका भाषा-ज्ञान सामान्य देहाती से अधिक नहीं था। कस्तूरबा को गीता पर असाधारण श्रद्धा थी। उनकी निष्ठा का पात्र दूसरा ग्रन्थ था तुलसीकृत रामायण। कस्तूरबा रामायण भी ठीक ढंग से कभी पढ़ न सकीं। आश्रम में कस्तूरबा हम लोगों के लिए माँ के समान थीं। आज के जमाने में स्त्री-जीवन-सम्बन्ध के हमारे आदर्श हमने काफी बदल लिये हैं।
In simple words: 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ कस्तूरबा के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है, जैसे उनकी अशिक्षा, गीता और रामायण में श्रद्धा, उनका माँ समान स्वभाव और बदलते सामाजिक आदर्शों के संदर्भ में उनकी महत्ता।

🎯 Exam Tip: पाठ से महत्त्वपूर्ण वाक्य चुनते समय, कस्तूरबा के चरित्र, आदर्शों, उनके जीवन के मुख्य पहलुओं और लेखक के संदेश को दर्शाने वाले वाक्यों को प्राथमिकता दें।

 

Question 5. कस्तूरबा से सम्बन्धित संक्षिप्त गद्यांश लिखिए।
Answer: वह भले ही अशिक्षित रही हों, संस्था चलाने की जिम्मेदारी लेने की महत्त्वाकांक्षा भले ही उनमें कभी जागी न हो, लेकिन देश में क्या चल रहा है उसकी सूक्ष्म जानकारी वह प्रश्न पूछकर या अखबारों के ऊपर नजर डालकर प्राप्त कर ही लेती थीं।
In simple words: कस्तूरबा भले ही अशिक्षित थीं और संस्था चलाने की महत्वाकांक्षा नहीं रखती थीं, फिर भी वे देश-दुनिया की जानकारी प्रश्न पूछकर या अखबारों के माध्यम से रखती थीं।

🎯 Exam Tip: संक्षिप्त गद्यांश लिखते समय, कस्तूरबा के व्यक्तित्व के मुख्य गुणों जैसे उनकी जागरूकता और समझ को संक्षेप में व्यक्त करें।

 

Question 6. कस्तूरबा के 'मूक किन्तु तेजस्वी बलिदान' की कहानी लिखिए।
Answer: सती कस्तूरबा सिर्फ अपने संस्कारों के कारण पातिव्रत्य धर्म को, कुटुम्ब वत्सलता को और तेजस्विता को चिपकाये रहीं और उसी के बल पर महात्मा जी के महात्म्य की बराबरी में आ सकीं। आज हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध आदि अनेक धर्मों के लोगों का यह विशाल देश अत्यन्त निष्ठा के साथ कस्तूरबा की पूजा करता है।
In simple words: कस्तूरबा ने अपने संस्कारों, पातिव्रत्य धर्म, पारिवारिक प्रेम और तेजस्विता के बल पर महात्मा गांधी के समान महानता हासिल की। आज भारत के सभी धर्मों के लोग उन्हें बहुत निष्ठा से पूजते हैं।

🎯 Exam Tip: 'मूक किन्तु तेजस्वी बलिदान' की व्याख्या करते समय कस्तूरबा के आंतरिक गुणों और उनके निःस्वार्थ योगदान पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 7. कस्तूरबा की मितभाषिता एवं कर्तव्यनिष्ठा के गुणों को प्रकट करनेवाले प्रसंगों एवं घटनाओं का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: आश्रम में चाहे बड़े-बड़े नेता आयें या मामूली कार्यकर्ता, उनके खाने-पीने का प्रबन्ध कस्तूरबा ही करती थीं। प्राणघातक बीमारी से मुक्त होने के बाद रसोई के कार्यों में हाथ बँटाती थीं । कस्तूरबा में आर्य आदर्श को शोभा देनेवाले कौटुम्बिक सद्गुण थे ।
In simple words: कस्तूरबा आश्रम में आने वाले सभी लोगों के भोजन की व्यवस्था करती थीं और बीमारी से उबरने के बाद भी रसोई के काम में मदद करती थीं, जो उनकी कर्तव्यनिष्ठा और आर्य आदर्शों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: मितभाषिता और कर्तव्यनिष्ठा के प्रसंगों का वर्णन करते समय कस्तूरबा के व्यवहारिक जीवन के उदाहरणों को प्रमुखता दें।

 

Question 8. 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ की भाषा-शैली की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ की भाषा-शैली विवेचनात्मक है। भाषा अपेक्षाकृत संस्कृतनिष्ठ एवं परिष्कृत है।
In simple words: 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ की भाषा विवेचनात्मक, संस्कृतनिष्ठ और परिष्कृत है, जो लेखक की गहन सोच और साफ सुथरी अभिव्यक्ति को दर्शाती है।

🎯 Exam Tip: भाषा-शैली की विशेषताओं का उल्लेख करते समय, पाठ में प्रयुक्त भाषा के प्रकार (जैसे संस्कृतनिष्ठ, सरल) और लेखक की शैली (जैसे विवेचनात्मक, वर्णात्मक) को स्पष्ट करें।

 

Question 9. कस्तूरबा के गुणों को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: कस्तूरबा आदर्श भारतीय महिला थीं। वे पतिव्रता स्त्री थीं। वे आश्रम में बच्चों की देखभाल करती थीं। आश्रम में कस्तूरबा लोगों के लिए माँ समान थीं। गीता और रामायण में उनकी अगाध श्रद्धा थी।
In simple words: कस्तूरबा एक आदर्श भारतीय महिला थीं, जिनमें पतिव्रता धर्म, बच्चों की देखभाल, माँ समान प्रेम और धार्मिक ग्रंथों में अगाध श्रद्धा जैसे गुण थे।

🎯 Exam Tip: कस्तूरबा के गुणों को लिखते समय, उनके नैतिक, सामाजिक और धार्मिक पहलुओं को संक्षेप में प्रस्तुत करें।

 

Question 10. काका कालेलकर की भाषा-शैली की दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: काका कालेलकर की भाषा परिष्कृत खड़ीबोली है। उसमें प्रवाह, ओज तथा अकृत्रिमता है। इन्होंने विवेचनात्मक, विवरणात्मक तथा व्यंग्यात्मक शैलियों का प्रयोग किया है।
In simple words: काका कालेलकर की भाषा परिष्कृत खड़ीबोली है जिसमें प्रवाह, ओज और सहजता है। उनकी शैली विवेचनात्मक, विवरणात्मक और व्यंग्यात्मक है।

🎯 Exam Tip: लेखक की भाषा-शैली का वर्णन करते समय, उनकी भाषा की शुद्धता, प्रवाह और प्रयुक्त विभिन्न शैलियों का उल्लेख करें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. काका कालेलकर की दो रचनाओं के नाम लिखिए।
Answer: काका कालेलकर की दो रचनाएँ जीवन काव्य तथा हिमालय प्रवास हैं।
In simple words: काका कालेलकर की दो प्रमुख रचनाएँ 'जीवन काव्य' और 'हिमालय प्रवास' हैं।

🎯 Exam Tip: अतिलघु उत्तरीय प्रश्नों में सीधा और सटीक उत्तर दें। रचनाओं के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. काका कालेलकर किस युग के लेखक माने जाते हैं?
Answer: काका कालेलकर शुक्ल एवं शुक्लोत्तर युग के लेखक माने जाते हैं।
In simple words: काका कालेलकर को हिंदी साहित्य में शुक्ल और शुक्लोत्तर युग का लेखक माना जाता है।

🎯 Exam Tip: लेखक का साहित्यिक युग याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. राष्ट्रभाषा प्रचार को राष्ट्रीय कार्यक्रम मानने वाले हिन्दी लेखक का नाम बताइए।
Answer: राष्ट्रभाषा प्रचार को राष्ट्रीय कार्यक्रम मानने वाले हिन्दी लेखक का नाम है काका कालेलकर ।
In simple words: काका कालेलकर वह हिन्दी लेखक थे जिन्होंने राष्ट्रभाषा के प्रचार को एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में देखा।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में प्रमुख व्यक्तियों और उनके महत्वपूर्ण योगदानों को याद रखें।

 

Question 4. कस्तूरबा कौन थीं?
Answer: कस्तूरबा महात्मा गाँधी की पत्नी थीं।
In simple words: कस्तूरबा महात्मा गांधी की पत्नी थीं।

🎯 Exam Tip: यह एक बुनियादी जानकारी है जिसे हर छात्र को पता होना चाहिए।

 

Question 5. निम्नलिखित में से सही वाक्य के सम्मुख सही (√) का चिह्न लगाइए-
(अ) कस्तूरबा अनपढ़ थीं।
(√)
(ब) 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ विवेचनात्मक शैली में लिखा गया है।
(√)
(स) कालेलकर जी का सम्पर्क टैगोर से नहीं था।
(x)
(द) दुनिया में 'शब्द' और 'कृति' दो अमोघ शक्तियाँ हैं।
(√)
Answer:
(अ) कस्तूरबा अनपढ़ थीं। (√)
(ब) 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ विवेचनात्मक शैली में लिखा गया है। (√)
(स) कालेलकर जी का सम्पर्क टैगोर से नहीं था। (x)
(द) दुनिया में 'शब्द' और 'कृति' दो अमोघ शक्तियाँ हैं। (√)
In simple words: यह प्रश्न कस्तूरबा और 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ से संबंधित कुछ कथनों की सत्यता की जांच करता है, जिसमें सही विकल्प का चयन करना होता है।

🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय या सत्य/असत्य प्रश्नों में, प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें और पाठ के आधार पर उसकी सटीकता का आकलन करें।

व्याकरण-बोध

 

Question 1. निम्नलिखित शब्दों में सन्धि-विच्छेद करते हुए सन्धि का नाम भी लिखिए-
लोकोत्तर, सत्याग्रह, गुणाकर, महत्त्वाकांक्षा, एकाक्षरी, प्रत्युत्पन्न ।
Answer:
लोकोत्तर = लोक + उतर = गुण सन्धि
सत्याग्रह = सत्य + आग्रह = दीर्घ सन्धि
गुणाकर = गुण + आकर = दीर्घ सन्धि
महत्त्वाकांक्षा = महत्त्व + आकांक्षा - दीर्घ सन्धि
एकाक्षरी = एक + अक्षरी = दीर्घ सन्धि
प्रत्युत्पन्न = प्रति + उत्पन्न = यण सन्धि
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए शब्दों का सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का प्रकार (गुण, दीर्घ, यण) बताना है, जो हिन्दी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: सन्धि-विच्छेद करते समय, शब्दों के मूल अर्थ और सन्धि के नियमों का ध्यान रखें। प्रत्येक सन्धि के प्रकार को सही ढंग से पहचानना आवश्यक है।

 

Question 2. निम्नलिखित में समास-विग्रह करते हुए समास का नाम लिखिए-
माँ-बाप, देश-सेवा, राष्ट्रमाता, प्राणघातक, बन्धनमुक्ते, धर्मनिष्ठा ।
Answer:
माँ-बाप = माँ और बाप = द्वन्द्व समास
देश-सेवा = देश के लिए सेवा = सम्प्रदान तत्पुरुष
राष्ट्रमाता = राष्ट्र की माता = सम्बन्ध तत्पुरुष
प्राणघातक = प्राण के लिए घातक = सम्प्रदान तत्पुरुष
बन्धनमुक्त = बंधन से मुक्त = करण तत्पुरुष
धर्मनिष्ठा = धर्म में निष्ठा = अधिकरण तत्पुरुष
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए समस्त पदों का समास-विग्रह करके उनके समास का प्रकार (द्वन्द्व, तत्पुरुष) बताना है, जिससे शब्दों की रचना और अर्थ समझने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: समास-विग्रह करते समय, पद के अर्थ और उसके घटकों के बीच के संबंध को स्पष्ट करें। तत्पुरुष समास के उपभेदों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 3. निम्नलिखित विदेशज शब्दों के लिए हिन्दी शब्द लिखिए -
अमलदार, कायम, जिद्द, हासिल, कतई, खुद ।
Answer:
अमलदार = ग्राह्य
जिद्द = हठ
हासिल = प्राप्त
कतई = बिल्कुल
खुद = स्वयं
In simple words: इस प्रश्न में कुछ विदेशज शब्दों के लिए उनके सही हिन्दी पर्याय बताने हैं, जो शब्द ज्ञान को बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: विदेशज शब्दों के हिन्दी पर्याय याद करते समय उनके सामान्य उपयोग और संदर्भ पर ध्यान दें। यह शब्दकोश ज्ञान को मजबूत करता है।

Step-by-Step Textbook Answers: Class 9 Hindi Chapter 06 निशामूर्ति कस्तूरबा

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Detailed Answer Guides for Chapter 06 निशामूर्ति कस्तूरबा

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FAQs

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