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Detailed Chapter 5 स्मृति UP Board Solutions for Class 9 Hindi
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Class 9 Hindi Chapter 5 स्मृति UP Board Solutions PDF
UP Board Solutions For Class 9 Hindi Chapter 5 स्मृति (गद्य खंड)
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नांकित गद्यांशों में रेखांकित अंशों की सन्दर्भ सहित व्याख्या और तथ्यपरक प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
Question 1. (1) जाड़े के दिन थे ही, तिस पर हवा के प्रकोप से कँपकँपी लग रही थी। हवा मज्जा तक ठिठुरा रही थी, इसलिए हमने कानों को धोती से बाँधा। माँ ने भेंजाने के लिए थोड़े-से चने एक धोती में बाँध दिये । हम दोनों भाई अपना-अपना डण्डा लेकर घर से निकल पड़े। उस समय उस बबूल के डण्डे से जितना मोह था, उतना इस उम्र में रायफल से नहीं। मेरा डण्डा अनेक साँपों के लिए नारायण-वाहन हो चुका था। मक्खनपुर के स्कूल और गाँव के बीच पड़नेवाले आम के पेड़ों से प्रतिवर्ष उससे आम झूरे जाते थे। इस कारण वह मूक डण्डा सजीव-सा प्रतीत होता था। प्रसन्नवदन हम दोनों मक्खनपुर की ओर तेजी से बढ़ने लगे। चिट्ठियों को मैंने टोपी में रख लिया, क्योंकि कुर्ते में जेबें न थीं।
प्रश्न
(1) प्रस्तुत गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) लेखक ने चिट्ठियों को कहाँ रख लिया था?
(4) लेखक ने चिट्ठियों को टोपी में क्यों रख लिया?
(5) लेखक ने डण्डे की तुलना किससे की है?
Answer:
1. सन्दर्भ - प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गदा' में संकलित एवं श्रीराम शर्मा द्वारा लिखित 'स्मृति' नामक निबन्ध से उधृत है। प्रस्तुत अवतरण में लेखक ने अपनी बाल्यावस्था का सजीव चित्रण करते हुए बचपन की छोटी-छोटी बारीकियों को स्पष्ट किया है।
2. रेखांकित अंश की व्याख्या- लेखक शीतऋतु का वर्णन करते हुए कहता है कि “जाड़े का दिन था। हाड़ कंपा देने वाली ठण्ड थी। इसलिए हमने कानों को धोती से बाँध लिया। माँ ने चना भैजाने के लिए उसे एक धोती में बाँध कर मुझे दिया। मैं और छोटा भाई डण्डा लेकर घर से चल पड़े। उस समय उस बबूल के डण्डे से जितना लगाव था उतना आज एक रायफल से नहीं है। मैं उस डण्डे से अनेक साँपों को मार चुका था । प्रतिवर्ष इसी डण्डे से आम के टिकोरे तोड़े जाते थे। इसीलिए वह डण्डी मुझे अत्यन्त प्रिय था। हम दोनों भाई मक्खनपुरे की ओर आगे बढ़े। कुर्ते में जेब न होने के कारण चिट्ठियों को मैंने टोपी में रख लिया था।”
3. लेखक ने चिट्ठियों को अपनी टोपी में रख लिया था।“
4. लेखक के कुर्ते में जेबें न थीं, इसलिए उसने चिट्ठियों को टोपी में रख लिया।
5. लेखक ने डण्डे की तुलना गरुण से की है।
In simple words: यह गद्यांश लेखक श्रीराम शर्मा द्वारा लिखित 'स्मृति' निबंध से लिया गया है, जिसमें वे बचपन के जाड़े के दिन, चने ले जाना, और चिट्ठियों को टोपी में रखने जैसी अपनी यादों का वर्णन कर रहे हैं। वे अपने डंडे से विशेष लगाव महसूस करते हैं और बताते हैं कि जेब न होने के कारण चिट्ठियों को टोपी में रखा गया था।
🎯 Exam Tip: गद्यांश की संदर्भ सहित व्याख्या करते समय लेखक, पाठ का नाम और मुख्य भाव स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. (2) साँप से फुसकार करवा लेना मैं उस समय बड़ा काम समझता था। इसलिए जैसे ही हम दोनों उस कुएँ की ओर से निकले, कुएँ में ढेला फेंककर फुसकार सुनने की प्रवृत्ति जागृत हो गयी। मैं कुएँ की ओर बढ़ा । छोटा भाई मेरे पीछे हो लिया, जैसे बड़े मृगशावक के पीछे छोटा मृगशावक हो लेता है। कुएँ के किनारे से एक ढेला उठाया और उझककर एक हाथ से टोपी उतारते हुए साँप पर ढेलो गिरा दिया, पर मुझ पर तो बिजली-सी गिर पड़ी।
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए ।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) लेखक को कब लगा कि उस पर बिजली सी गिर पड़ी?
Answer:
1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी गद्य' में संकलित एवं श्रीराम शर्मा द्वारा लिखित 'स्मृति' नामक निबन्ध से उद्धृत है। इन पंक्तियों में लेखक ने अपने बचपन की एक घटना का वर्णन किया है। स्कूल जाते समय एक कुआँ पड़ता, जो सूख गया है। पता नहीं एक काला साँप उसमें कैसे गिर पड़ा था। स्कूल जाते समय बच्चे उसकी फुसकार सुनने के लिए पत्थर मारते थे।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- लेखक कहता है कि "मैं बचपन में साँप से फुसकार करवा लेना महान् कार्य समझता था। मैं और छोटा भाई जब कुएँ की तरफ से गुजरे तो फुसकार सुनने की इच्छा बलवती हुई । मैं कुएँ की तरफ बढ़ा और छोटा भाई मेरे पीछे हो गया। कुएँ के किनारे से मैंने एक ढेला उठाया और एक हाथ से टोपी उतारते हुए साँप पर प्रहार किया, लेकिन मैं एक अजीब संकट में फँस गया। टोपी उतारते हुए मेरी तीनों चिट्ठियाँ कुएँ में गिर पड़ीं। साँप ने फुसकारा था या नहीं मुझे आज भी ठीक से याद नहीं है। मेरी स्थिति उस समय वही हो गयी थी जैसे घास चरते हुए हिरन की आत्मा गोली लगने पर निकल जाती है और वह तड़पता रहता है। चिट्ठियों के कुएँ में गिरने से मेरी भी स्थिति हिरन जैसी हो गयी थी।”
3. लेखक को टोपी उतारते हुए तीन चिट्ठियाँ कुएँ में गिर पड़ीं। उस समय लेखक पर बिजली-सी गिर पड़ी।
In simple words: इस गद्यांश में लेखक कुएँ में साँप को देखने और उस पर ढेला फेंकने की घटना का वर्णन करता है। साँप को फुसकारने की कोशिश में उसकी टोपी और उसमें रखी चिट्ठियाँ कुएँ में गिर जाती हैं, जिससे लेखक को बहुत बड़ा झटका लगता है।
🎯 Exam Tip: बचपन की घटनाओं के वर्णन में लेखक की भावनाएँ और उनके प्रभाव को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।
Question 3. (3) साँप को चक्षुःश्रवा कहते हैं। मैं स्वयं चक्षुःश्रवा हो रहा था। अन्य इन्द्रियों ने मानो सहानुभूति से अपनी शक्ति आँखों को दे दी हो। साँप के फन की ओर मेरी आँखें लगी हुई थीं कि वह कब किस ओर को आक्रमण करता है, साँप ने मोहनीसी डाल दी थी । शायद वह मेरे आक्रमण की प्रतीक्षा में था, पर जिस विचार और आशा को लेकर मैंने कुएँ में घुसने की ठानी थी, वह तो आकाश-कुसुम था । मनुष्य का अनुमान और भावी योजनाएँ कभी-कभी कितनी मिथ्या और उल्टी निकलती हैं। मुझे साँप का साक्षात् होते ही अपनी योजना और आशा की असम्भवता प्रतीत हो गयी। डण्डा चलाने के लिए स्थान ही न था। लाठी या डण्डा चलाने के लिए काफी स्थान चाहिए, जिसमें वे घुमाये जा सकें । साँप को डण्डे से दबाया जा सकता था, पर ऐसा करना मानो तोप के मुहरे पर खड़ा होना था।
प्रश्न
(1) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए ।।
(2) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(3) चक्षुःश्रवा के नाम से कौन-सा जीव जाना जाता है?
Answer:
1. सन्दर्भ- प्रस्तुत गद्यावतरण पं० श्रीराम शर्मा द्वारा लिखित 'स्मृति' नामक संस्मरणात्मक निबन्ध से अवतरित है। प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने कुएँ से पत्र निकालने की योजना का वर्णन किया है।
2. रेखांकित अंशों की व्याख्या- लेखक का कहना है कि “साँप एक ऐसा जीव है जिसे चक्षुःश्रवा के नाम से जाना जाता है। वहाँ मैं स्वयं चक्षुःश्रवा हो रहा था। मुझे कुएँ में ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे अन्य इन्द्रियों ने अपनी सम्पूर्ण शक्ति नेत्रों को दे दी है। मेरी आँखें साँप के फन पर थीं कि साँप किस तरफ से आक्रमण कर सकता है। इसलिए मैं बिल्कुल चौकन्ना था। उधुर साँप भी मेरे आक्रमण की प्रतीक्षा में था। मैंने जिस संकल्प के साथ कुएँ में प्रवेश किया था, लगता था संकल्प अधूरा ही रह जायेगा। साँप से सामना होते ही मेरी योजना एवं आशा असम्भव-सी प्रतीत होने लगी। लाठी-डण्डा चलाने के लिए पर्याप्त स्थान चाहिए। कुएँ में डण्डा चलाने के लिए स्थान बहुत कम था, वहाँ केवल साँप को डण्डे से दबाया जा सकता था, लेकिन ऐसा करना तोप के आगे खड़ा होना था।”
3. चक्षुःश्रवा के नाम से साँप को जाना जाता है। माना जाता है कि सर्प कर्णविहीन होने के कारण आँख से सुनता भी है।
In simple words: लेखक यहाँ साँप से सामना होने पर अपनी मनोदशा का वर्णन कर रहा है, जहाँ उसे अपनी सभी इंद्रियाँ आँखों में केंद्रित महसूस होती हैं। कुएँ में डंडा चलाने के लिए पर्याप्त जगह न होने के कारण, साँप से सीधे भिड़ना अत्यधिक जोखिम भरा लगता है।
🎯 Exam Tip: गद्यांश की व्याख्या करते समय, लेखक के मानसिक स्थिति और परिस्थितियों के यथार्थवादी चित्रण पर ध्यान दें।
Question 4. श्रीराम शर्मा का जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए।
Answer:
श्रीराम शर्मा (स्मरणीय तथ्य )
जन्म-सन् 1892 ई० (1949 वि०) । मृत्यु-सन् 1967 ई० । जन्म-स्थान-किरथरा (मैनपुरी) उ० प्र० । शिक्षा-बी० ए० ।
साहित्य सेवा – सम्पादक (विशाल भारत), आत्मकथा लेखक, संस्मरण तथा शिकार साहित्य के लेखक ।
भाषा – सरल, प्रवाहपूर्ण, सशक्त, उर्दू एवं ग्रामीण शब्दों का प्रयोग विषयानुकूल ।
शैली – वर्णनात्मक रोचक शैली।
रचनाएँ – सन् बयालीस के संस्मरण, सेवाग्राम की डायरी, शिकार साहित्य, प्राणों का सौदा, बोलती प्रतिमा, जंगल के जीव ।
• जीवन-परिचय- हिन्दी में शिकार साहित्य के प्रणेता पं० श्रीराम शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में 23 मार्च, सन् 1892 ई० को हुआ था। प्रयाग विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात् ये पत्रकारिता के क्षेत्र में उतर आये। आपने 'विशाल भारत' नामक पत्र का सम्पादन बहुत दिनों तक किया। इनका जीवन के प्रति दृष्टिकोण मुख्यतः राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत है। आपने राष्ट्रीय आन्दोलनों में बराबर भाग लिया है जिसकी सजीव झाँकियाँ आपकी रचनाओं में परिलक्षित होती हैं। आपकी मृत्यु एक लम्बी बीमारी के पश्चात् सन् 1967 ई० में हो गयी।
In simple words: श्रीराम शर्मा का जन्म 1892 में मैनपुरी में हुआ था, वे एक पत्रकार, लेखक और शिकार साहित्य के प्रणेता थे। उनकी प्रमुख कृतियों में 'सन् बयालीस के संस्मरण' और 'शिकार साहित्य' शामिल हैं, जो उनके राष्ट्रीयता-ओतप्रोत जीवन और पत्रकारिता के अनुभव को दर्शाते हैं।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक परिचय लिखते समय जन्म, मृत्यु, शिक्षा, प्रमुख कृतियाँ और साहित्य में योगदान के मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।
Question 5. श्रीराम शर्मा की साहित्यिक विशेषताओं को बताते हुए उनकी भाषा-शैली भी स्पष्ट कीजिए।
Answer:
• साहित्यिक परिचय - शर्मा जी हिन्दी में शिकार साहित्य प्रस्तुत करने में अपना एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। इनके शिकार साहित्य में घटना विस्तार के साथ-साथ पशु-मनोविज्ञान को सम्यक् परिचय भी मिलता है। शिकार साहित्य के अतिरिक्त शर्मा जी ने ज्ञानवर्द्धक एवं विचारोत्तेजक लेख भी लिखे हैं जो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित हुए हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में तथा संस्मरणात्मक निबन्धों और शिकार सम्बन्धी कहानियों को लिखने में शर्मा जी का एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। शिकार साहित्य को हिन्दी में प्रस्तुत करनेवाले शर्मा जी पहले साहित्यकार हैं।
• भाषा-शैली- शर्मा जी की भाषा स्पष्ट और प्रवाहपूर्ण है। भाषा की दृष्टि से ये प्रेमचन्द के अत्यन्त निकट माने जा सकते हैं, यद्यपि ये छायावादी युग के विशिष्ट साहित्यकार रहे हैं। आपकी भाषा में संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी के शब्दों के साथ-साथ लोकभाषा के शब्दों के प्रयोग से भाषा अत्यन्त सजीव एवं सम्प्रेषणीयता के गुण से सम्पन्न हो गयी है। इनकी शैली स्पष्ट एवं वर्णनात्मक है जिसमें स्थान-स्थान पर स्थितियों का विवेचन मार्मिक और संवेदनशील होता है। शर्मा जी की शिकार सम्बन्धी, संस्मरणात्मक कहानियों और निबन्धों में शैलीगत विशेषता है जो रोमांच और कौतूहल आद्योपान्त बनाये रखती है।
In simple words: श्रीराम शर्मा ने शिकार साहित्य में अग्रणी स्थान बनाया, उनकी रचनाओं में पशु मनोविज्ञान और ज्ञानवर्द्धक लेख भी शामिल हैं। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी और लोकभाषा के शब्दों के मेल से सजीव और प्रभावी है, जबकि उनकी शैली वर्णनात्मक और संवेदनशील है, जो रोमांच और कौतूहल पैदा करती है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक विशेषताओं में विषय वस्तु, शैली और भाषा के प्रयोग पर विशेष ध्यान दें, साथ ही उदाहरण भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
Question 6. श्रीराम शर्मा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए ।
अथवा श्रीराम शर्मा को साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
Answer:
श्रीराम शर्मा (स्मरणीय तथ्य )
जन्म-सन् 1892 ई० (1949 वि०) । मृत्यु-सन् 1967 ई० । जन्म-स्थान-किरथरा (मैनपुरी) उ० प्र० । शिक्षा-बी० ए० ।
साहित्य सेवा – सम्पादक (विशाल भारत), आत्मकथा लेखक, संस्मरण तथा शिकार साहित्य के लेखक ।
इनका जीवन के प्रति दृष्टिकोण मुख्यतः राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत है। आपने राष्ट्रीय आन्दोलनों में बराबर भाग लिया है जिसकी सजीव झाँकियाँ आपकी रचनाओं में परिलक्षित होती हैं।
कृतियाँ -
• संस्मरण-साहित्य- 'सेवाग्राम की डायरी' और 'सन् बयालीस के संस्मरण' में इन्होंने राष्ट्रीय आन्दोलन और उस समय के समाज की झाँकी प्रस्तुत की है।
• शिकार साहित्य- 'जंगल के जीव', 'प्राणों का सौदा', 'बोलती प्रतिमा', 'शिकार' में आपका शिकार-साहित्य संगृहीत है। इन सभी रचनाओं में रोमांचकारी घटनाओं का सजीव वर्णन हुआ है । इन कृतियों में घटना-विस्तार के साथसाथ पशुओं के मनोविज्ञान का भी सम्यक् परिचय दिया गया है।
• जीवनी-'नेताजी' और 'गंगा मैया ।' । इन कृतियों के अतिरिक्त शर्मा जी के फुटकर लेख अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे।
In simple words: श्रीराम शर्मा का व्यक्तित्व राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत था और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। उनकी प्रमुख कृतियों में 'सन् बयालीस के संस्मरण' (संस्मरण), 'जंगल के जीव' (शिकार साहित्य) और 'नेताजी' (जीवनी) शामिल हैं, जो उनके विविध लेखन कौशल और गहन अनुभवों को दर्शाती हैं।
🎯 Exam Tip: व्यक्तित्व के पहलुओं को कृतियों से जोड़कर प्रस्तुत करें और साहित्यिक परिचय में लेखक के जीवन, योगदान और प्रमुख रचनाओं को संक्षेप में स्पष्ट करें।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 7. ‘स्मृति' निबन्ध के आधार पर बाल-सुलभ वृत्तियों को संक्षेप में लिखिए।
Answer: बालमन अत्यन्त चंचल होता है। बाल्यावस्था में अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं होता है। बाल्यावस्था में कभी-कभी बड़े साहसिक कार्य सम्पन्न हो जाते हैं।
In simple words: 'स्मृति' निबंध के अनुसार, बच्चों का मन चंचल होता है, उन्हें अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं होता, और वे अक्सर बिना सोचे-समझे बड़े साहसिक कार्य कर जाते हैं।
🎯 Exam Tip: बाल-सुलभ वृत्तियों का वर्णन करते समय उनकी चंचलता, निडरता और अनुभवहीनता को प्रमुखता से उजागर करें।
Question 8. लेखक ने अपने डण्डे के विषय में क्या कहा है?
Answer: लेखक ने अपने डण्डे के विषय में कहा है कि उस उम्र में बबूल के डण्डे से जितना मोह था, उतना इस उम्र में रायफल से नहीं।
In simple words: लेखक ने बताया कि बचपन में उसे अपने बबूल के डंडे से उतना ही गहरा लगाव था, जितना आज किसी को रायफल से नहीं होता।
🎯 Exam Tip: लेखक के भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त करते हुए, डंडे के प्रति उसके विशेष स्नेह को सरल शब्दों में प्रस्तुत करें।
Question 9. लेखक के कुएँ में साँप से संघर्ष के समय उसके छोटे भाई की मनोदशा कैसी थी?
Answer: लेखक ने कहा है कि "जब मैं कुएँ के नीचे जा रहा था तो छोटा भाई रो रहा था। मैंने उसे ढांढस दिलाया कि मैं कुएँ में पहुँचते ही साँप को मार दूंगा।”
In simple words: जब लेखक कुएँ में उतर रहा था, तो उसका छोटा भाई डरकर रो रहा था, जिसे लेखक ने साँप को मारने का आश्वासन देकर शांत किया।
🎯 Exam Tip: भाई की मनोदशा का वर्णन करते समय उसके डर और लेखक के आश्वासन को स्पष्ट करें।
Question 10. लेखक की तीन साहित्यिक विशेषताएँ लिखिए ।
Answer: लेखक की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण एवं प्रभावशाली है। भाषा की दृष्टि से इन्होंने प्रेमचन्द जी के समान ही प्रयोग किये हैं। इन्होंने अपनी भाषा को सरल एवं सुबोध बनाने के लिए संस्कृत, उर्दू तथा अंग्रेजी के शब्दों के साथ-साथ लोकभाषा के शब्दों का प्रयोग किया है।
In simple words: लेखक की साहित्यिक विशेषताएँ हैं: सहज, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली भाषा; प्रेमचंद के समान यथार्थवादी भाषा प्रयोग; और संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी तथा लोकभाषा के शब्दों का संतुलित मिश्रण।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक विशेषताओं को संक्षेप में बताते हुए भाषा की सरलता, प्रवाह और शब्द-प्रयोग पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 11. 'स्मृति ' पाठ से आपने क्या समझा? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: 'स्मृति' पाठ से यह बात उभरकर सामने आती है कि बच्चे अत्यन्त साहसी होते हैं। उन्हें मृत्यु का भय नहीं होता है। इस उम्र में वे बड़े-बड़े साहसिक कार्य कर बैठते हैं।
In simple words: 'स्मृति' पाठ हमें सिखाता है कि बच्चे बहुत निडर और साहसी होते हैं, उन्हें मौत का डर नहीं होता और वे अक्सर अपनी उम्र से बड़े साहसिक काम कर जाते हैं।
🎯 Exam Tip: पाठ से मिली मुख्य सीख को स्पष्ट और संक्षिप्त वाक्यों में व्यक्त करें, बच्चों के साहस पर जोर दें।
Question 12. 'स्मृति' पाठ से दस सुन्दर वाक्य लिखिए।
Answer: सन् 1908 ई० की बात है। जाड़े के दिन थे। हवा के प्रकोप से कँपकँपी लग रही थी। हवा मज्जा तक ठिठुरा रही थी। हम दोनों उछलते-कूदते एक ही साँस में गाँव से चार फर्लाग दूर उस कुएँ के पास आ गये । कुआँ कच्चा था और चौबीस हाथ गहरा था। कुएँ की पाट पर बैठे हम रो रहे थे। दृढ़ संकल्प से दुविधा की बेड़ियाँ कट जाती हैं। छोटा भाई रोता था और उसके रोने का तात्पर्य था कि मेरी मौत मुझे नीचे बुला रही है। छोटे भाई की आशंका बेजा थी, पर उस फैं और धमाके से मेरा साहस कुछ और बढ़ गया।
In simple words: इस अंश में लेखक 1908 के जाड़े के दिनों की घटना का वर्णन करते हैं, जब वे और उनका भाई कुएँ के पास पहुँचे। उनका रोना और छोटे भाई का डर लेखक के दृढ़ संकल्प और साहस को और बढ़ा देता है, जिससे वे चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: वाक्यों का चयन करते समय पाठ के मुख्य विचारों, घटनाओं और लेखक की भावनाओं को दर्शाने वाले अंशों को प्राथमिकता दें।
Question 13. चिट्ठियों को कुएँ में गिरता देख लेखक की क्या मनोदशा हुई?
Answer: चिट्ठियों को कुएँ में गिरता देख लेखक की मनोदशा उसी प्रकार हुई जैसे घास चरते हुए हिरन की आत्मा गोली से हत होने पर निकल जाती है और वह तड़पता रह जाता है।
In simple words: चिट्ठियों के कुएँ में गिरने पर लेखक को ऐसा लगा जैसे किसी हिरन को गोली लगने पर उसकी आत्मा शरीर छोड़ देती है, वह अत्यधिक व्याकुल और असहाय महसूस करने लगा।
🎯 Exam Tip: लेखक की मनोदशा का वर्णन करते समय उसकी घबराहट, निराशा और असहायता को तुलनात्मक रूप से स्पष्ट करें।
Question 14. 'वह कुएँ वाली घटना किसी से न कहे।' लेखक ने अपने साथी लड़के से क्यों कहा?
Answer: 'वह कुएँ वाली घटना किसी से न कहे।' ऐसा लेखक ने अपने साथी लड़के से घरवालों के भय से कहा था।
In simple words: लेखक ने अपने भाई से कुएँ वाली घटना किसी को न बताने के लिए कहा, क्योंकि उसे डर था कि घरवालों को पता चलने पर डाँट पड़ेगी या कोई अन्य दंड मिलेगा।
🎯 Exam Tip: लेखक के डर और घरवालों की संभावित प्रतिक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कारण स्पष्ट करें।
Question 15. कुएँ में साहसपूर्वक उतरकर चिट्ठियों को निकाल लाने के कार्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: लेखक पाँच धोतियाँ जोड़कर कुएँ के नीचे उतरा। नीचे कच्चे कुएँ का व्यास बहुत कम था, अतः साँप को डण्डे से मारना आसान नहीं थी। लेखक का कहना है कि डण्डे के मेरी ओर खिंच आने से मेरे और साँप के आसन बदल गये । मैंने तुरन्त ही लिफाफे और पोस्टकार्ड चुन लिये।
In simple words: लेखक ने पाँच धोतियाँ जोड़कर कुएँ में उतरने का साहस किया, जहाँ सीमित जगह के कारण साँप को मारना मुश्किल था। साँप से सामना होने पर उसने चतुराई से लिफाफे और पोस्टकार्ड उठा लिए।
🎯 Exam Tip: कुएँ में उतरने की तैयारी, साँप से सामना और चिट्ठियाँ निकालने की प्रक्रिया को विस्तार से वर्णन करें, लेखक के साहस को रेखांकित करें।
Question 16. लेखक और साँप के बीच संघर्ष के विषय में लिखिए।
Answer: जब लेखक चिट्ठियाँ लेने कुएँ में उतरा तो साँप ने वार किया और डण्डे से चिपट गया। डण्डा हाथ से छूटा तो नहीं, पर झिझक, सहम अथवा आतंक से अपनी ओर खिंच गया और गुंजल्क मारता हुआ साँप का पिछला भाग मेरे हाथों से छू गया। डण्डे को मैंने एक ओर पटक दिया । यदि कहीं उसका दूसरा वार पहले होता, तो उछलकर मैं साँप पर गिरता और न बचता। डण्डे के मेरी ओर खिंच आने से मेरे और साँप के आसन बदल गये। मैंने तुरन्त ही लिफाफे और पोस्टकार्ड चुन लिये।
In simple words: कुएँ में चिट्ठियाँ निकालते समय साँप ने लेखक पर हमला किया, जिससे डंडा उसके हाथ से छूटा नहीं पर खिंच गया। लेखक ने तुरंत डंडे को एक तरफ पटका और सावधानी से चिट्ठियाँ उठा लीं, इस संघर्ष में उसने अपनी जान का जोखिम उठाया।
🎯 Exam Tip: संघर्ष के दौरान लेखक की प्रतिक्रिया, साँप के हमलों और लेखक द्वारा अपनाई गई रणनीति को विस्तृत रूप से समझाएँ।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 17. श्रीराम शर्मा किस युग के लेखक थे?
Answer: श्रीराम शर्मा शुक्ल एवं शुक्लोत्तर युग के लेखक थे।
In simple words: श्रीराम शर्मा हिन्दी साहित्य के शुक्ल और शुक्लोत्तर युग के प्रमुख लेखक थे।
🎯 Exam Tip: लेखक के साहित्यिक युग का सीधा और सटीक उल्लेख करें।
Question 18. श्रीराम शर्मा ने किस पत्रिका का सम्पादन किया था?
Answer: श्रीराम शर्मा ने ‘विशाल भारत' का सम्पादन किया था।
In simple words: श्रीराम शर्मा ने 'विशाल भारत' नामक पत्रिका का संपादन किया था।
🎯 Exam Tip: पत्रिका के नाम का सही उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 19. 'स्मृति' लेख किस शैली में लिखा गया है?
Answer: 'स्मृति' लेख वर्णनात्मक शैली में लिखा गया है।
In simple words: 'स्मृति' लेख को वर्णनात्मक शैली में लिखा गया है, जिसमें घटनाओं का विस्तृत चित्रण होता है।
🎯 Exam Tip: शैली का उल्लेख करते समय उसकी प्रकृति (जैसे वर्णनात्मक) को स्पष्ट करें।
Question 20. चिट्ठी किसने लिखी थी?
Answer: चिट्ठी श्रीराम शर्मा के बड़े भाई ने लिखी थी।
In simple words: चिट्ठी लेखक श्रीराम शर्मा के बड़े भाई ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: प्रश्न का सीधा उत्तर दें, जिसमें चिट्ठी लिखने वाले का स्पष्ट उल्लेख हो।
Question 21. निम्नलिखित में से सही वाक्य के सम्मुख सही (√) का चिह्न लगाओ
(अ) साँप को चक्षुःश्रवा कहते हैं।
(ब) ‘स्मृति' लेख 'शिकार' पुस्तक से लिया गया है।
(स) कुआँ पक्का और दस हाथ गहरा था।
(द) 'स्मृति' में सन् 1928 की बात है।
Answer:
(अ) साँप को चक्षुःश्रवा कहते हैं। (√)
(ब) ‘स्मृति' लेख 'शिकार' पुस्तक से लिया गया है। (√)
(स) कुआँ पक्का और दस हाथ गहरा था। (x)
(द) 'स्मृति' में सन् 1928 की बात है। (x)
In simple words: साँप को चक्षुःश्रवा कहा जाता है और 'स्मृति' लेख 'शिकार' पुस्तक से लिया गया है, ये दोनों कथन सही हैं। जबकि कुएँ के विवरण और 'स्मृति' के समयकाल से जुड़े कथन गलत हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें और उसकी सत्यता को पाठ के आधार पर जाँच कर सही या गलत चिह्नित करें।
व्याकरण-बोध
Question 22. निम्नलिखित समस्त पदों का समास-विग्रह कीजिए तथा समास का नाम बताइए -
विषधर, चक्षुःश्रवा, प्रसन्नवदन, मृग-समूह, वानर-टोली ।
Answer:
| समस्त पद | समास-विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| विषधर | विष को धारण करनेवाला (सर्प) | बहुब्रीहि समास |
| चक्षुःश्रवा | आँखों से सुननेवाला | बहुब्रीहि समास |
| प्रसन्नवदन | प्रसन्न वदन वाला | कर्मधारय समास |
| मृग-समूह | मृगों का समूह | सम्बन्ध तत्पुरुष |
| वानर-टोली | वानरों की टोली | सम्बन्ध तत्पुरुष |
In simple words: यह प्रश्न समास-विग्रह और उनके प्रकारों को स्पष्ट करता है, जैसे 'विषधर' और 'चक्षुःश्रवा' बहुब्रीहि समास के उदाहरण हैं, जबकि 'प्रसन्नवदन' कर्मधारय और 'मृग-समूह' व 'वानर-टोली' सम्बन्ध तत्पुरुष समास के उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: समास-विग्रह करते समय पद के अर्थ और पदों के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ, तथा समास के प्रकार को सही पहचानें।
Question 23. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ बताते हुए वाक्य-प्रयोग कीजिए -
बेड़ियाँ कट जाना, बेहाल होना, आँखें चार होना, तोप के मुहरे पर खड़ा होना, टूट पड़ना, मोरचे पड़ना ।
Answer:
• बेड़ियाँ कट जाना- (मुक्त हो जाना) दासता की बेड़ियाँ कट जाने से देश आजाद हो गया।
• बेहाल होना- (व्याकुल होना) राम के वन चले जाने पर दशरथ जी बेहाल हो गये ।
• आँखें चार होना- (प्रेम होना) आँखें चार होने पर प्रेम होता है।
• तोप के मुहरे पर खड़ा होना- (मुकाबले पर डटना) हमारे देश के नौजवान तोप के मुहरे पर खड़े होने के लिए तैयार रहते हैं।
• टूट पड़ना- (धावा बोल देना) हमारे देश के नौजवान जब पाकिस्तानी सेना पर टूट पड़े तो उसके छक्के छूट गये ।
• मोरचे पड़ना- (मुकाबला होना) कारगिल युद्ध में भारतीय सेना को पाकिस्तानी सेना से मोरचे पड़ गये।
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न मुहावरों के अर्थ और उनके वाक्य-प्रयोग को दर्शाता है, जैसे 'बेड़ियाँ कट जाना' का अर्थ है मुक्त हो जाना और 'तोप के मुहरे पर खड़ा होना' का अर्थ है मुकाबले के लिए तैयार रहना।
🎯 Exam Tip: मुहावरे का अर्थ स्पष्ट करें और वाक्य-प्रयोग ऐसा हो जो मुहावरे के सही भाव को दर्शाता हो।
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