UP Board Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 4 Vardhamanaha Mahavir

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Detailed Chapter 4 वर्धमानः महावीर UP Board Solutions for Class 8 Sanskrit

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Class 8 Sanskrit Chapter 4 वर्धमानः महावीर UP Board Solutions PDF

कक्षा 8 संस्कृत पाठ 4 हिंदी अनुवाद वर्धमानः महावीर के प्रश्न उत्तर यूपी बोर्ड

वर्धमानः महावीर

शब्दार्थाः- अन्यतमः = बहुतों से एक/सर्वश्रेष्ठ, शैशवात् = बचपने से, सदाचारसम्पन्नः = सदाचार से युक्त, अजायते = उत्पन्न हुई (जन् धातु, ललकार, प्रथम पुरुष, एक वचन), वर्गभेदः = ऊँच-नीच का भाव, विकलतायाः = व्याकुलता के, दिवङ्गते = मरने पर, शोकोद्विग्नम् = शोक से सन्तप्त, बेचैन, तदानीम् = उस समय, प्रवृत्तः = लग गए, संनियम्य = नियन्त्रित करके, त्रयोविंशतिः = तेईस, चतुर्विशः = चौबीसवें, कैवल्यम् = मोक्ष, प्राणवन्तः = सजीव, प्रस्तरादिषु = पत्थर आदि में, त्रिरत्नोपासनया = त्रिरत्नों के पालन से, अस्तेयम् (न + स्तेयम्) = चोरी न करना, अपरिग्रहः = अपने पास कुछ न रखना, द्विसप्ततिवर्षवयसि = बहत्तर वर्ष की उम्र में, रुग्णः = रोगी ।

भारतवर्षे प्रचलितेषु ... आसीत् ।।1।।

हिन्दी अनुवाद-भारत में प्रचलित धर्म सम्प्रदायों में जैनधर्म का महत्त्व बहुत है। वर्धमान महावीर जैन धर्म के अन्यतम श्रेष्ठ महापुरुष थे। इनका जन्म ईसा पूर्व 599 को वैशाली नगर के कुण्डग्राम में हुआ था। बाल्यकाल में इनका नाम वर्धमान था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशला था। ये जन्म से ही बुद्धिमान, सदाचारसम्पन्न और विचारशील थे। इनका विवाह यशोदा नामक राजकुमारी के साथ हुआ। इनके एक पुत्री प्रियदर्शिनी उत्पन्न हुई। वर्धमान बाल्यकाल से ही विरक्त थे। समाज में प्रचलित आडम्बर, वर्णभेद और जीवहिंसा इनके हृदय में परेशानी के कारण थे। पिता के मरने पर इनका मन शोक से उद्विग्न हो गया। मोह और माया को छोड़ इन्होंने अपने भाई से आज्ञा लेकर संन्यास ग्रहण कर लिया। उस समय इनकी अवस्था तीस वर्ष की थी। कठिन तपस्या से ये सत्य और शान्ति की खोज में लग गए। बारह वर्ष तक तप करके इन्होंने ज्ञान प्राप्त किया। तप से ये इन्द्रियों को जीतकर महावीर या जिन हो गए। जैन मत के अनुसार वर्धमान महावीर से पहले तेईस तीर्थंकर थे । महावीर जैनधर्म के चौबीसवें एवं आखिरी तीर्थंकर थे।

ज्ञानप्राप्तेः ... प्राप्तः ॥2॥

हिन्दी अनुवाद-ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात् महावीर ने तीस वर्ष तक जैनधर्म को बहुत उत्साह से प्रचार किया। धीरे-धीरे भारत के प्रायः सब राज्यों में जैन धर्म का अच्छी तरह प्रचार हुआ। इनके द्वारा दिखाई गए मार्ग पर चलने से लोग मोक्ष प्राप्त करने में समर्थ होते हैं। इनके मत के अनुसार न केवल मनुष्य, पशु, पक्षी व प्राणी; बल्कि वृक्ष और पत्थर आदि में प्राण होते हैं। महावीर के उपदेश के अनुसार सम्यक् दर्शन सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र ऐसे त्रिरत्न की उपासना से लोग मोक्ष प्राप्त करते हैं। शुद्ध आचरण के लिए पाँच महाव्रतों- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह विधान किया गया। साधारण लोगों के अलावा बिम्बसार, अजातशत्रु आदि राजा भी इनके उपदेशों से प्रभावित हुए। इनके द्वारा उपदेशित मार्ग के आधारभूत सिद्धांत थे-सत्य और अहिंसा।।

बहत्तर वर्ष की अवस्था में महावीर पाटलिपुत्र के समीप पावापुरी स्थान पर रोगग्रस्त हुए और मोक्ष को प्राप्त हो गए।

अभ्यासः

 

प्रश्न 1. उच्चारण कुरुते पुस्तिकायां च लिखत
Answer: विद्यार्थी इस प्रश्न का उत्तर स्वयं करें क्योंकि इसमें उच्चारण करके पुस्तिका में लिखने को कहा गया है, जो एक व्यक्तिगत गतिविधि है। यह अभ्यास छात्रों के उच्चारण और लेखन कौशल को सुधारने में मदद करता है।
In simple words: स्टूडेंट्स को यह प्रश्न खुद से हल करना होगा, क्योंकि इसमें शब्दों को जोर से बोलकर कॉपी में लिखने के लिए कहा गया है।

🎯 Exam Tip: उच्चारण और लेखन अभ्यास प्रश्नों को ध्यान से करना चाहिए, क्योंकि यह आपकी भाषा कौशल को बेहतर बनाता है और शब्दों की सही पहचान में मदद करता है।

 

प्रश्न 2. एकपदेन उत्तरत

 

Question 2 (क) वर्धमानमहावीरस्य पितुः नाम किम् आसीतु?
Answer: सिद्धार्थः । महावीर के पिता का नाम सिद्धार्थ था, जो एक राजा थे और उनका नाम बचपन से ही प्रसिद्ध था।
In simple words: महावीर के पिता का नाम सिद्धार्थ था।

🎯 Exam Tip: महापुरुषों के माता-पिता के नाम जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों को याद रखना चाहिए, क्योंकि वे अक्सर ऐतिहासिक संदर्भों में पूछे जाते हैं।

 

Question 2 (ख) वर्धमानमहावीरस्य मातुः नाम किम् आसीत्?
Answer: त्रिशला ।। महावीर की माता का नाम त्रिशला देवी था, जो एक विदुषी और गुणवती महिला थीं।
In simple words: महावीर की माँ का नाम त्रिशला था।

🎯 Exam Tip: नाम याद करते समय, सही वर्तनी (spelling) पर भी ध्यान दें ताकि लिखने में कोई गलती न हो।

 

Question 2 (ग) जैनधर्मानुसारेण त्रिरत्नोपासनया जनाः किं लभन्ते?
Answer: मोक्षं ।। जैन धर्म के अनुसार, त्रिरत्नों (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र) का पालन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह जीवन के दुखों से मुक्ति का सबसे बड़ा मार्ग है।
In simple words: जैन धर्म के हिसाब से, तीन रत्नों का पालन करने से लोग मोक्ष पा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: त्रिरत्नों के नाम और उनका महत्व याद रखें, यह जैन धर्म के मूल सिद्धांतों में से एक है और परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

 

Question 2 (घ) जैनधर्मस्य अन्तिमः तीर्थङ्करः कः आसीत्?
Answer: वर्धमानः महावीरः । वर्धमान महावीर जैन धर्म के चौबीसवें और आखिरी तीर्थंकर थे। उन्होंने अपने उपदेशों से जैन धर्म को पूरे भारत में फैलाया।
In simple words: जैन धर्म के सबसे आखिरी तीर्थंकर वर्धमान महावीर थे।

🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान का प्रश्न है; सभी 24 तीर्थंकरों के नाम याद रखना मुश्किल हो सकता है, लेकिन अंतिम और पहले तीर्थंकर के नाम अवश्य याद रखें।

 

प्रश्न 3. पूर्णवाक्येन उत्तरत

 

Question 3 (क) महावीरः कति वर्षाणि यावत् जैनधर्मस्य प्रचारम् अकरोत्?
Answer: महावीरः त्रिंशत् वर्षाणि यावत् जैनधर्मस्य प्रचारम् अकरोत् । ज्ञान प्राप्त करने के बाद, भगवान महावीर ने लगभग 30 वर्षों तक जैन धर्म का प्रचार किया, जिससे यह भारत के कई राज्यों में फैला और लोगों को प्रभावित किया।
In simple words: महावीर ने तीस साल तक जैन धर्म फैलाया।

🎯 Exam Tip: ऐसे संख्यात्मक तथ्यों को याद रखने के लिए, उन्हें किसी महत्वपूर्ण घटना से जोड़कर देखें, जैसे संन्यास के बाद की अवधि।

 

Question 3 (ख) महावीरस्य जन्म कत्र अभवन?
Answer: महावीरस्य जन्म वैशाली नगग्य कुण्डग्रामे अभवत् । उनका जन्म वैशाली के पास कुण्डग्राम में हुआ था, जो उनके जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है और जहाँ उन्होंने अपने शुरुआती जीवन का अधिकांश भाग बिताया।
In simple words: महावीर का जन्म वैशाली नगर के कुण्डग्राम में हुआ था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जन्मस्थान और समय अक्सर पूछे जाते हैं, इन्हें अच्छे से याद करें, क्योंकि ये उनके जीवन की घटनाओं को समझने में मदद करते हैं।

 

Question 3 (ग) महावीरस्य पुत्र्याः नाम किम् आसीत्?
Answer: महावीरस्य पुत्र्याः नाम प्रियदर्शिनी आसीत्। भगवान महावीर की बेटी का नाम प्रियदर्शिनी था, जो उनके जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाती है।
In simple words: महावीर की बेटी का नाम प्रियदर्शिनी था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों के नाम भी परीक्षा में आ सकते हैं, इसलिए इन्हें याद रखें।

 

Question 3 (घ) जैनमतानुसारेण महावीरात् पूर्व कति तीर्थङ्कराः अभवन्?
Answer: जैनमतानुसारेण महावीरात् पूर्व त्रयोविंशति तीर्थङ्कराः अभवन् । जैन धर्म के अनुसार, महावीर से पहले 23 तीर्थंकर हुए थे, वे चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर थे, जिन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
In simple words: महावीर से पहले जैन धर्म में तेईस तीर्थंकर थे।

🎯 Exam Tip: जैन धर्म में तीर्थंकरों की कुल संख्या और महावीर के स्थान को स्पष्ट रूप से याद रखें ताकि कोई भ्रम न हो।

 

प्रश्न 4. प्रश्नानामुलराणि लिखत

 

Question 4 (क) कानि पञ्चमहाव्रतानि सन्ति?
Answer: पञ्चमहाव्रतानि सन्ति- सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह। ये पाँच महाव्रत जैन धर्म के शुद्ध आचरण के मूल सिद्धांत हैं, जिनका पालन गृहस्थों और साधुओं दोनों को करना चाहिए ताकि वे मोक्ष प्राप्त कर सकें।
In simple words: जैन धर्म के पाँच बड़े नियम हैं: सच बोलना, हिंसा न करना, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य और किसी चीज का अधिक संग्रह न करना।

🎯 Exam Tip: इन पाँच महाव्रतों के नाम और उनका अर्थ स्पष्ट रूप से याद करें, क्योंकि यह जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके नैतिक मूल्यों को दर्शाता है।

 

Question 4 (ख) त्रिरत्नानि कानि सन्ति?
Answer: त्रिरत्नानि सन्ति- सम्यक्-दर्शनम्, सम्यक्-ज्ञानम्, सम्यक्-चरित्रम्। ये तीन रत्न जैन धर्म में मोक्ष प्राप्त करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शक सिद्धांत हैं, जो व्यक्ति को सही रास्ते पर चलने में मदद करते हैं।
In simple words: जैन धर्म के तीन रत्न हैं: सही विश्वास, सही ज्ञान और सही आचरण।

🎯 Exam Tip: त्रिरत्नों के नाम और उनका महत्व याद रखें, यह जैन धर्म के मूल सिद्धांतों में से एक है और मोक्ष प्राप्ति का आधार है।

 

Question 4 (ग) महावीरस्य उपदेशैः के के प्रभाविताः अभवन्?
Answer: साधारणजनैः सह बिम्बसार-अजातशत्रुप्रभृतयो राजानः अपि महावीरस्य उपदेशैः प्रभावितः अभवन् । महावीर के उपदेशों से केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि बिम्बसार और अजातशत्रु जैसे बड़े राजा भी प्रभावित हुए और उन्होंने जैन धर्म को अपनाया, जिससे इसकी लोकप्रियता बढ़ी।
In simple words: महावीर की बातों से आम लोग और राजा बिम्बसार और अजातशत्रु जैसे बड़े शासक भी प्रभावित हुए थे।

🎯 Exam Tip: यह दिखाता है कि महावीर के उपदेशों का समाज के सभी वर्गों पर गहरा प्रभाव पड़ा था, इन प्रमुख नामों को याद रखें ताकि उनकी व्यापक पहुंच का पता चल सके।

 

Question 4 (घ) महावीरस्य मनसः विकलतायाः कानि कारणानि आसन्?
Answer: समाज प्रचलितः आडम्बरः, वगभदः, जीवहिंसा च तस्य मनसः विकलतायाः कारणानि आसन्। महावीर उस समय समाज में फैले हुए दिखावे, जातिभेद और जीवों के प्रति हिंसा को देखकर बहुत दुखी होते थे। इन बातों से उनका मन व्याकुल रहता था और उन्हें सत्य की खोज के लिए प्रेरित किया।
In simple words: समाज में फैले दिखावे, जाति के भेदभाव और जीवों को मारना ही महावीर के मन की बेचैनी के कारण थे।

🎯 Exam Tip: महावीर के समय की सामाजिक समस्याओं और उनके प्रभाव को समझना उनके वैराग्य के कारणों को स्पष्ट करता है और उनकी शिक्षाओं के महत्व को दर्शाता है।

 

प्रश्न 5. मजूषातः क्रियापदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत (पूरा करके)-

 

Question 5 (क) महावीरः जैनधर्मस्य श्रेष्ठः महापुरुषः आसीत् ।
Answer: महावीरः जैनधर्मस्य श्रेष्ठः महापुरुषः आसीत् । महावीर जैन धर्म के सबसे महान पुरुष थे, जिन्होंने इसके सिद्धांतों को दुनिया में फैलाया और लोगों को ज्ञान दिया।
In simple words: महावीर जैन धर्म के एक बहुत ही महान नेता थे।

🎯 Exam Tip: खाली स्थान भरने वाले प्रश्नों में वाक्य के अर्थ के अनुसार सही क्रियापद का चयन करें ताकि वाक्य व्याकरण की दृष्टि से सही हो।

 

Question 5 (ख) महावीरस्य जन्म वैशालीनगरस्य कुण्डग्रामे अभवत् ।।
Answer: महावीरस्य जन्म वैशालीनगरस्य कुण्डग्रामे अभवत् ।। महावीर का जन्म वैशाली शहर के कुण्डग्राम गाँव में हुआ था, जो उनके प्रारंभिक जीवन का महत्वपूर्ण स्थल था।
In simple words: महावीर का जन्म वैशाली के कुण्डग्राम में हुआ।

🎯 Exam Tip: जन्मस्थान जैसे विशिष्ट तथ्यों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये ऐतिहासिक घटनाओं को समझने में मदद करते हैं।

 

Question 5 (ग) जैनधर्मस्य प्रचारं महावीरः उत्साहेन अकरोत्।।
Answer: जैनधर्मस्य प्रचारं महावीरः उत्साहेन अकरोत्।। महावीर ने बड़े उत्साह और जोश के साथ जैन धर्म का प्रचार किया, जिससे यह धर्म तेजी से फैला।
In simple words: महावीर ने जैन धर्म को बड़े उत्साह से फैलाया।

🎯 Exam Tip: क्रिया और उसके कर्ता के बीच सही तालमेल बिठाना सीखें, खासकर संस्कृत में, ताकि वाक्य का अर्थ स्पष्ट हो।

 

Question 5 (घ) त्रिंशद्वर्षवयसि मोहमायां परित्यज्य महावीरः संन्यासं गृहीतवान् ।।
Answer: त्रिंशद्वर्षवयसि मोहमायां परित्यज्य महावीरः संन्यासं गृहीतवान् ।। तीस वर्ष की आयु में, महावीर ने दुनिया के मोह-माया को छोड़कर संन्यास ले लिया था, जो उनके आध्यात्मिक पथ का आरंभ था।
In simple words: महावीर ने तीस साल की उम्र में दुनिया छोड़ संन्यास ले लिया।

🎯 Exam Tip: यह घटना महावीर के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, इसलिए इसे याद रखना चाहिए, क्योंकि यह उनके आध्यात्मिक सफर की शुरुआत थी।

 

प्रश्न 6. अधोलिखित-padesu सन्धि-विच्छेदं कुरुत (सन्धि-विच्छेद करके)-

 

Answer:

शब्दसन्धि-विच्छेद
मतानुसारेणमत + अनुसारेण
इत्यासीत्इति + आसीत्
उपदेशानुसारेणउपदेश + अनुसारेण
त्रिरत्नोपसनयात्रिरत्न + उपसनया

In simple words: दिए गए शब्दों को उनके मूल शब्दों में तोड़ना 'सन्धि-विच्छेद' कहलाता है। यह दो शब्दों को अलग करता है जो मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं और उनके अर्थ को स्पष्ट करते हैं।

🎯 Exam Tip: सन्धि-विच्छेद करते समय, संस्कृत व्याकरण के नियमों को ध्यान से समझना महत्वपूर्ण है ताकि सही मूल शब्दों की पहचान हो सके और उनका अर्थ सही रहे।

 

प्रश्न 7. हिन्दीभाषायाम् अनुवादं कुरुत (अनुवाद करके)

 

Question 7 (क) महावीरः जैनधर्मस्य अन्यतमः श्रेष्ठो महापुरुषः आसीत् ।
Answer: महावीर जैन धर्म के अन्यतम श्रेष्ठ महापुरुष थे । महावीर जैन धर्म के सबसे महान नेताओं में से एक थे, जिन्होंने इस धर्म को पूरी दुनिया में फैलाया और उसके सिद्धांतों को स्थापित किया।
In simple words: महावीर जैन धर्म के सबसे खास और महान आदमी थे।

🎯 Exam Tip: संस्कृत से हिंदी अनुवाद करते समय, वाक्य के अर्थ और भाव को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है, साथ ही व्याकरणिक शुद्धता का भी ध्यान रखें।

 

Question 7 (ख) बाल्यकाले तस्य नाम वर्धमान इत्यासीत् ।
Answer: बचपन में उनका नाम वर्धमान था। महावीर को बचपन में वर्धमान नाम से जाना जाता था, जो उनके आध्यात्मिक विकास को दर्शाता है और यह नाम उनकी वृद्धि का प्रतीक था।
In simple words: बचपन में महावीर का नाम वर्धमान था।

🎯 Exam Tip: विशेषणों और क्रियापदों का सही अनुवाद वाक्य को स्पष्ट और सटीक बनाता है, जिससे पढ़ने वाले को सही जानकारी मिलती है।

 

Question 7 (ग) वर्धमानः बाल्यकालादेव विरक्त आसीत् ।
Answer: वर्धमान बचपन से ही विरक्त थे। वर्धमान बचपन से ही सांसारिक मोह-माया से दूर रहते थे और आध्यात्मिकता की ओर झुकाव रखते थे, जो उनके संन्यास का आधार बना।
In simple words: वर्धमान बचपन से ही दुनिया की चीजों से अलग थे।

🎯 Exam Tip: 'विरक्त' जैसे शब्दों का सही अर्थ समझना, उनके गहरे दार्शनिक भाव को प्रकट करता है और उनके जीवन दर्शन को समझने में मदद करता है।

 

Question 7 (घ) स इन्द्रियाणि सन्नियम्य जिनोऽभवत् ।
Answer: वे इन्द्रियाँ वश में करके 'जिन' बन गए। उन्होंने अपनी सभी इंद्रियों को नियंत्रण में रखकर 'जिन' की पदवी प्राप्त की, जिसका अर्थ है विजेता और जिसने उन्हें आत्म-विजयी बनाया।
In simple words: उन्होंने अपनी इंद्रियों को काबू किया और 'जिन' बन गए।

🎯 Exam Tip: 'जिन' शब्द का अर्थ और उसका महत्व जैन धर्म के संदर्भ में याद रखें, क्योंकि यह आत्म-संयम और विजय का प्रतीक है।

 

प्रश्न 8. संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत (अनुवाद करके)

 

Question 8 (क) वर्धमान महावीर जैनधर्म के चौबीसवें तीर्थंकर थे।
Answer: वर्धमानः महावीरः जैन धर्मस्य चतुर्विंशः तीर्थङ्करः आसीत् । वर्धमान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, जो इस परंपरा के अंतिम और सबसे प्रसिद्ध गुरुओं में से एक हैं और उन्होंने इस धर्म को नई दिशा दी।
In simple words: वर्धमान महावीर जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर थे।

🎯 Exam Tip: हिंदी से संस्कृत अनुवाद करते समय, सही विभक्ति, वचन और लिंग का प्रयोग करना बहुत जरूरी है ताकि वाक्य का अर्थ सटीक रहे।

 

Question 8 (ख) महावीर की माता का नाम त्रिशला था।
Answer: महावीरस्य मातुः नाम त्रिशला आसीत् । महावीर की माता त्रिशला देवी थीं, जिन्होंने एक महान आत्मा को जन्म दिया और उन्हें प्रारंभिक संस्कार दिए।
In simple words: महावीर की माँ का नाम त्रिशला था।

🎯 Exam Tip: संबंध कारक (जैसे 'की' के लिए 'स्य') का सही उपयोग सुनिश्चित करें ताकि वाक्य में संबंध स्पष्ट रूप से व्यक्त हो सके।

 

Question 8 (ग) पत्थर में भी प्राण है।
Answer: प्रस्तरेषु अपि प्राणाः सन्ति ।। जैन दर्शन के अनुसार, न केवल जीवित प्राणी बल्कि पेड़-पौधे और पत्थर जैसी निर्जीव वस्तुओं में भी सूक्ष्म जीवन होता है, जो अहिंसा के सिद्धांत का आधार है।
In simple words: जैन धर्म के अनुसार, पत्थरों में भी जान होती है।

🎯 Exam Tip: इस वाक्य में जैन धर्म के 'अहिंसा' सिद्धांत की गहराई को दर्शाया गया है, जहां जीवन का सम्मान हर रूप में किया जाता है, यहां तक कि छोटे से छोटे कण में भी।

 

Question 8 (घ) उस समय वे तीस वर्ष के थे ।
Answer: तस्मिन् समये सः त्रिंशद्वर्षवयस्क आसीत्। उस समय महावीर की आयु तीस वर्ष थी, जब उन्होंने संन्यास का मार्ग अपनाया और अपने आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की।
In simple words: उस समय वह तीस साल के थे।

🎯 Exam Tip: काल और आयु संबंधी वाक्यों का अनुवाद करते समय, संख्या और 'वर्षवयस्क' जैसे शब्दों का सही प्रयोग करें ताकि वाक्य सटीक और स्पष्ट रहे।

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