NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit: Chapter 13 विरो अभिमन्यु
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Practice Class 8 Sanskrit Solutions: Chapter 13 विरो अभिमन्यु
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अभ्यासः
Question 1. उच्चारणं कुरुत पुस्तिकायां च लिखत-
Answer: विद्यार्थी अपने शिक्षक की सहायता से इन शब्दों का सही उच्चारण करें और उन्हें अपनी पुस्तिका में लिखें। यह अभ्यास उनके संस्कृत शब्द ज्ञान और लेखन कौशल को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
In simple words: छात्रों को शब्दों का उच्चारण करके अपनी कॉपी में लिखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: सही उच्चारण और लेखन अभ्यास से संस्कृत भाषा पर अच्छी पकड़ बनती है।
Question 2. एकपदेन उत्तरत
(क) कौरवपक्षे कः प्रथमं सेनापतिः अभवत्?
(ख) द्रोणाचार्यः कति दिनानि सेनापतिः आसीत्?
(ग) एकादशे दिवसे कः सेनापतिः अभवत्?
(घ) अर्जुनं विहाय चक्रव्यूह-भेदन-विधिं कः अजानात्?
Answer:
(क) कौरव पक्ष के पहले सेनापति भीष्मः थे। वे एक महान योद्धा थे और बहुत शक्तिशाली थे।
(ख) द्रोणाचार्य पञ्च दिनों तक सेनापति रहे। उन्होंने बहुत बहादुरी से युद्ध किया था।
(ग) ग्यारहवें दिन द्रोणाचार्यः सेनापति बने। भीष्म के बाद उन्होंने कौरवों की सेना का नेतृत्व संभाला था।
(घ) अर्जुन के अलावा चक्रव्यूह-भेदन-विधि को अभिमन्युः जानता था। यह एक बहुत ही कठिन युद्ध कला थी जिसे कुछ ही लोग जानते थे।
In simple words:
(क) भीष्म।
(ख) पाँच।
(ग) द्रोणाचार्य।
(घ) अभिमन्यु।
🎯 Exam Tip: युद्ध के महत्वपूर्ण किरदारों और उनकी भूमिकाओं को याद रखें, जैसे सेनापति कौन था और कितने समय तक रहा।
Question 3. एकवाक्येन उत्तरत
(क) महाभारतस्य युद्धं कति दिनानि यावत् प्राचलत्?
(ख) त्रयोदशे दिने कः सेनापतिः आसीत् ?
(ग) द्रोणाचार्यः विजयाय किं रचितवान्?
(घ) चक्रव्यूहद्वारे पाण्डवान् कः अवरुद्धवान्?
Answer:
(क) महाभारत का युद्ध अष्टादश दिनानि यावत् प्राचलत्। यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण युद्ध था।
(ख) तेरहवें दिन द्रोणाचार्यः सेनापतिः आसीत्। उन्होंने अपने युद्ध कौशल से कई योद्धाओं को हराया था।
(ग) द्रोणाचार्य ने अपनी विजय के लिए चक्रव्यूहम् रचितवान्। यह एक विशेष प्रकार की सैन्य संरचना थी जिसे भेदना बहुत कठिन था।
(घ) चक्रव्यूह के द्वार पर जयद्रथः पाण्डवान् अवरुद्धवान्। उसे भगवान शिव का वरदान प्राप्त था जिससे वह एक दिन के लिए पाण्डवों को रोक सकता था।
In simple words:
(क) महाभारत का युद्ध अठारह दिनों तक चला।
(ख) तेरहवें दिन द्रोणाचार्य सेनापति थे।
(ग) द्रोणाचार्य ने जीतने के लिए चक्रव्यूह बनाया।
(घ) चक्रव्यूह के द्वार पर जयद्रथ ने पांडवों को रोका।
🎯 Exam Tip: लंबे उत्तरों के लिए, मुख्य जानकारी को एक वाक्य में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने का अभ्यास करें।
Question 4. अधोलिखित-पदानां विभक्ति-वचनं लिखत-
Answer: नीचे दिए गए संस्कृत शब्दों के विभक्ति और वचन तालिका में लिखे गए हैं। विभक्ति और वचन से शब्द का वाक्य में सही प्रयोग निर्धारित होता है।
| पदम् | विभक्तिः | वचनम् |
|---|---|---|
| मोहनम् | द्वितीया | एकवचनम् |
| ऐतिहासिकस्य | षष्ठी | एकवचनम् |
| विजयाय | चतुर्थी | एकवचनम् |
| स्वपितृष्वसुः | प्रथमा | एकवचनम् |
| पराक्रमेण | तृतीया | एकवचनम् |
🎯 Exam Tip: 'विभक्ति' (कारक) और 'वचन' (संख्या) संस्कृत व्याकरण के मूल तत्व हैं; इन्हें समझने से वाक्य निर्माण में मदद मिलती है।
Question 5. अधोलिखितपदानि समानार्थकैः पदैः सह योजयत (जोड़कर)
Answer: नीचे 'क' और 'ख' स्तंभों के शब्दों के समानार्थक शब्दों को मिलाकर तालिका में दर्शाया गया है। समानार्थक शब्द सीखने से आपकी शब्दावली बढ़ती है और भाषा को समझने में मदद मिलती है।
| पदम् ('क') | समानार्थक पदम् ('ख') |
|---|---|
| युद्धम् | समरः |
| दिनानि | दिवसाः |
| सेनापतिः | चमूपतिः |
| एकाकी | एकलः |
| हतवान् | मारितवान् |
🎯 Exam Tip: समानार्थक शब्दों का ज्ञान होने से आप भाषा को अधिक रचनात्मक और विविध तरीके से उपयोग कर सकते हैं।
Question 6. अधोलिखितवाक्यानि संशोधयत (शुद्ध करके)-
(क) द्रोणाचार्यः सेनापतिः आसीत्।
(ख) सः पञ्चदिनानि सेनापतिः आसीत् ।
(ग) ती वीरगतिं प्राप्तवन्तो ।
(घ) दुर्योधनः स्वविजयः द्रोणाचार्य प्रार्थितवान् ।
(ङ) अभिमन्युः वीरगतिं लब्धवान् ।
Answer:
(क) यह वाक्य पहले से ही शुद्ध है और इसका अर्थ है कि द्रोणाचार्य सेनापति थे। संस्कृत व्याकरण में वाक्य की शुद्धता बहुत महत्वपूर्ण होती है।
(ख) सही वाक्य है: सः पञ्चदिनानि सेनापतिः आसीत् । इसका मतलब है कि वह पाँच दिनों तक सेनापति था। द्रोणाचार्य ने भीष्म के बाद पाँच दिनों तक सेना का नेतृत्व किया था।
(ग) सही वाक्य है: तौ वीरगतिं प्राप्तवन्तौ । इसका अर्थ है 'वे दोनों वीरगति को प्राप्त हुए'। वीरगति पाना युद्ध में सर्वोच्च बलिदान माना जाता है। (यहां 'ती' को 'तौ' में संशोधित किया गया है क्योंकि 'प्राप्तवन्तौ' द्विवचन है।)
(घ) सही वाक्य है: दुर्योधनः स्वविजयम् द्रोणाचार्यं प्रार्थितवान् । इसका अर्थ है 'दुर्योधन ने अपनी विजय के लिए द्रोणाचार्य से प्रार्थना की'। दुर्योधन को अपनी जीत के लिए अपने गुरुओं की मदद की बहुत आवश्यकता थी।
(ङ) सही वाक्य है: अभिमन्युः वीरगतिं लब्धवान् । इसका अर्थ है 'अभिमन्यु को वीरगति प्राप्त हुई'। अभिमन्यु एक महान योद्धा थे जिन्होंने अपनी कम उम्र में भी असाधारण वीरता दिखाई।
In simple words:
(क) द्रोणाचार्य सेनापति थे। (यह सही है)
(ख) वह पाँच दिन तक सेनापति था।
(ग) वे दोनों वीरगति को प्राप्त हुए।
(घ) दुर्योधन ने अपनी जीत के लिए द्रोणाचार्य से प्रार्थना की।
(ङ) अभिमन्यु को वीरगति मिली।
🎯 Exam Tip: संस्कृत में वाक्य शुद्ध करते समय कर्ता, क्रिया और कर्म के वचन, लिंग और कारक का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।
Question 7. संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत (अनुवाद करके)
(क) वीर अभिमन्यु अर्जुन का पुत्र थाः ।
(ख) वह अकेले सात महारथियों से लड़ा।
(ग) जयद्रथ ने अन्याय में अभिमन्यु का वध किया था।
(घ) अतः अर्जुन ने जयद्रथ के वध की प्रतिज्ञा की।
Answer:
(क) इस हिंदी वाक्य का संस्कृत अनुवाद है: वीरः अभिमन्युः अर्जुनस्य पुत्रः आसीत् । यह वाक्य अभिमन्यु के महत्वपूर्ण पारिवारिक संबंध को दर्शाता है।
(ख) इस हिंदी वाक्य का संस्कृत अनुवाद है: सः एकाकी सप्तभिः महारथिभिः युद्धं कृतवान् । यह अभिमन्यु की असाधारण वीरता और पराक्रम का प्रमाण है। (यहां 'सप्तैः' को 'सप्तभिः' में संशोधित किया गया है क्योंकि यह 'महारथिभिः' के साथ तृतीया बहुवचन में होगा।)
(ग) इस हिंदी वाक्य का संस्कृत अनुवाद है: जयद्रथः अन्यायेन अभिमन्युं हतवान् । अभिमन्यु की मृत्यु महाभारत के सबसे दुखद और अन्यायपूर्ण घटनाओं में से एक थी। (यहां 'अन्यायन्' को 'अन्यायेन' में संशोधित किया गया है क्योंकि 'अन्याय' का तृतीया एकवचन 'अन्यायेन' होता है।)
(घ) इस हिंदी वाक्य का संस्कृत अनुवाद है: अतः अर्जुनः जयद्रथं हन्तुं प्रतिज्ञाम् अकरोत् । अर्जुन ने अभिमन्यु की मृत्यु का बदला लेने के लिए यह कठिन प्रतिज्ञा ली थी।
In simple words:
(क) वीरः अभिमन्युः अर्जुनस्य पुत्रः आसीत् ।
(ख) सः एकाकी सप्तभिः महारथिभिः युद्धं कृतवान् ।
(ग) जयद्रथः अन्यायेन अभिमन्युं हतवान् ।
(घ) अतः अर्जुनः जयद्रथं हन्तुं प्रतिज्ञाम् अकरोत् ।
🎯 Exam Tip: अनुवाद करते समय, मूल वाक्य के अर्थ और व्याकरणिक संरचना को बनाए रखने के लिए सही शब्द और कारक-विभक्ति का उपयोग करें।
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UP Board Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 13 विरो अभिमन्यु
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