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पाठ का सारांश
राजा दशरथ के चार पुत्र थे- राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न । इनमें भरत कैकई के पुत्र थे। राजा दशरथ कैकई से बहुत प्रेम करते थे तथा उसकी प्रत्येक बात मानते थे। कैकई के कहने से ही राजा दशरथ ने राम को वनवास दिया था। जिस समय रामचन्द्र जी को वनवासे हुआ, उस समय भरत अपने मामा के यहाँ थे। लौटने पर जब उन्हें सब बातों का पता चला तो वे बहुत दुःखी हुए। उन्होंने सोचा कि अब लोग यही कहेंगे कि भरत ने राजगद्दी के मोह में राम को वनवास दिलाया है। राम के वन चले जाने के दुःख में राजा दशरथ की मृत्यु हो चुकी थी। भरत ने अपने पिता के सब धार्मिक कार्यों को पूर्ण किया। प्रजा, ऋषियों, मुनियों और विद्वानों ने भरत से राज्य करने का आग्रह किया। उन्होंने भरत से कहा- “राजा दशरथ ने मरते समय यही आज्ञा दी थी कि आप अयोध्या के राजा बनें। किन्तु भरत राजा बनना बिलकुल भी नहीं चाहते थे। उनका मन कहता था कि इस सिंहासन पर मेरा कोई अधिकार नहीं है। यह तो श्रीराम का ही है, वे ही इस पर बैठेंगे । अन्त में भरत जी रामचन्द्र जी से मिलने वन की ओर चल दिए। उनके साथ अनेक ऋषि, विद्वान और प्रजा के लोग भी थे। अनेक वनों में घूमते, लोगो से पूछते, भरत जी श्रीराम के पास चित्रकूट आ पहुँचे । दोनों भाई बड़े प्रेम से मिले । भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौट चलने का आग्रह किया। अन्य लोगों ने भी रामचन्द्र जी को बहुत समझाया किन्तु उन्होंने कहा कि पिता की आज्ञा का मुझे पालन करना है। कई दिनों तक विवाद होता रहा। भरत और श्रीराम दोनों में से कोई भी अयोध्या का राजा बनने को तैयार न था। अन्त में जब श्रीराम न माने तो भरत ने यह आज्ञा माँगी कि मैं आपके नाम पर राज्य करूंगा। सिंहासन पर आपकी खड़ाऊँ बैठेगी, राज्य आपका ही होगा। रामचन्द्र जी को अपनी खड़ाऊँ देनी पड़ी, भरत अयोध्या लौट आए। उन्होंने राज्य सिंहासन पर श्रीराम की खड़ाऊँ रखी और स्वयं तपस्वी के समान रहने लगे। राम के पीछे 14 वर्ष तक उन्होंने प्रजा की सेवा की। वास्तव में भरत हमारे ऐसे पूर्वज थे जिनके चरित्र में एक भी दोष नहीं है। शिक्षा - भरत जी जैसा भ्रातृ प्रेम, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा सभी में होनी चाहिए।
अभ्यास-प्रश्न
Question 1. भरत कौन थे? पिता की मृत्यु के समय वे कहाँ थे?
Answer: भरत राजा दशरथ के पुत्र थे। पिता की मृत्यु के समय वे ननिहाल में थे।
In simple words: भरत राजा दशरथ के पुत्र थे और जब उनके पिता की मृत्यु हुई, तब वे अपने ननिहाल में थे।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में भरत के परिचय और उनके उस समय के स्थान का सटीक उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. भरत ने अयोध्या के राज्य को क्यों ठुकरा दिया?
Answer: इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि नैतिक दृष्टि से रामचन्द्र जी राजगद्दी के हकदार थे।
In simple words: भरत ने अयोध्या के राज्य को ठुकरा दिया क्योंकि वे मानते थे कि श्रीराम ही इस पर अधिकार के असली हकदार हैं।
🎯 Exam Tip: भरत के त्याग और नैतिकता को दर्शाने वाले इस कारण को स्पष्ट रूप से बताना आवश्यक है।
Question 3. भरत ने राज्य को किस शर्त पर स्वीकार किया?
Answer: भरत ने राज्य को इस शर्त पर स्वीकार किया कि प्रतिनिधि के रूप में आप के नाम पर राज्य करूंगा तथा सिंहासन पर आपकी खडाऊँ बैठेगी। राज्य आपका ही रहेगा।
In simple words: भरत ने राज्य को यह कहकर स्वीकार किया कि वह श्रीराम के प्रतिनिधि के रूप में शासन करेंगे, उनकी खड़ाऊँ सिंहासन पर रखेगी और राज्य श्रीराम का ही रहेगा।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में भरत द्वारा रखी गई दो मुख्य शर्तें (प्रतिनिधि के रूप में शासन और खड़ाऊँ का प्रयोग) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. भरत की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए?
Answer: भरत के चारित्रिक विशेषताओं में उनका मातृ-प्रेम, कर्तव्य-निष्ठा, प्रजा-प्रेम तथा त्याग मुख्य हैं। भरत ने जिस प्रकार वन में जाकर राम से विनती की, सारा दोष अपने ऊपर ले लिया, जिस ढंग से क्षमा याचना की वह ऐसा उदाहरण है जिसकी तुलना का दूसरा उदाहरण संसार के इतिहास में ' कहीं नहीं मिलता।
In simple words: भरत की प्रमुख विशेषताओं में मातृ-प्रेम, कर्तव्य-निष्ठा, प्रजा-प्रेम और त्याग शामिल हैं। उन्होंने राम से क्षमा याचना करते हुए स्वयं पर सारे दोष ले लिए, जो उनके अद्वितीय चरित्र को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: भरत के चरित्र की मुख्य विशेषताओं को सूचीबद्ध करें और उनके किसी एक कार्य (जैसे राम से क्षमा याचना) का उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
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