Get the most accurate UP Board Solutions for Class 7 Science Chapter 16 प्रकाश here. Updated for the 2026 27 academic session, these solutions are based on the latest UP Board textbooks for Class 7 Science. Our expert-created answers for Class 7 Science are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 16 प्रकाश UP Board Solutions for Class 7 Science
Want to build a strong core? For Class 7 students, working through UP Board textbook questions is essential. Our Class 7 Science solutions use clear, step-by-step methods so you grasp the reasoning behind each answer. Practicing these Chapter 16 प्रकाश solutions will help you score better marks in exams.
Download Solutions: Chapter 16 प्रकाश (Class 7 Science UP Board)
अभ्यास-प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प छाँट कर अभ्यास पुस्तिका में लिखिए-
(क) उत्तल दर्पण के सामने रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है
(a) दर्पण के दूसरी ओर
(b) वक्रता केन्द्र पर
(c) अनन्त पर
(d) वक्रता केन्द्र तथा मुख्य फोकस के मध्य
Answer: (a) दर्पण के दूसरी ओर
In simple words: उत्तल दर्पण के सामने कोई भी वस्तु रखी जाए, उसका प्रतिबिम्ब हमेशा दर्पण के दूसरी ओर बनता है। यह प्रतिबिम्ब सीधा और आभासी होता है, जिससे हम पीछे से देखने पर वस्तु को सही दिशा में देख पाते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की प्रकृति और स्थिति हमेशा याद रखें - यह आभासी, सीधा और छोटा होता है, तथा दर्पण के पीछे बनता है।
Question 1. (ख) अवतल दर्पण से आभासी सीधा व बड़ा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए वस्तु की स्थिति होगी-
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(b) वक्रता केन्द्र परे
(c) वक्रता केन्द्र के बाहर
(d) दर्पण के ध्रुव व मुख्य फोकस के बीच
Answer: (d) दर्पण के ध्रुव व मुख्य फोकस के बीच
In simple words: अवतल दर्पण से बड़ा और सीधा प्रतिबिम्ब तभी बनता है जब वस्तु को दर्पण के बहुत पास, यानी ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखा जाए। इस स्थिति में प्रतिबिम्ब आभासी भी होता है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के लिए आभासी और बड़ा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने की शर्त यह है कि वस्तु ध्रुव और फोकस के बीच रखी जाए; यह स्थिति दंत चिकित्सकों द्वारा उपयोग की जाती है।
Question 1. (ग) एक दर्पण के सामने खड़ा होने पर आपका दर्पण में प्रतिबिम्ब हमेशा सीधा प्रतीत होता है, दर्पण होगा-
(a) समतल
(b) उत्तल
(c) अवतल
(d) समतल या उत्तल
Answer: (d) समतल या उत्तल
In simple words: जब आप किसी दर्पण के सामने खड़े हों और आपका प्रतिबिम्ब हमेशा सीधा दिखे, तो वह दर्पण समतल हो सकता है (जैसे घर में) या उत्तल हो सकता है (जैसे गाड़ियों के साइड मिरर में)। दोनों ही दर्पण हमेशा सीधा प्रतिबिम्ब बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें, समतल और उत्तल दोनों दर्पण हमेशा सीधा (आभासी) प्रतिबिम्ब बनाते हैं, जबकि अवतल दर्पण वस्तु की स्थिति के आधार पर सीधा या उल्टा प्रतिबिम्ब बना सकता है।
Question 1. (घ) दूर स्थित किसी ऊँची इमारत की सम्पूर्ण ऊँचाई जिस दर्पण में देखी जा सकती है वह दर्पण है-
(a) अवतल
(b) उत्तल
(c) समतल
(d) समतल तथा अवतल दर्पण
Answer: (b) उत्तल
In simple words: एक उत्तल दर्पण दूर की बड़ी चीज़ों को छोटे आकार में दिखा सकता है, जिससे हम एक बड़े क्षेत्र को एक छोटे दर्पण में देख पाते हैं। इसी कारण से, गाड़ियों में पीछे देखने के लिए उत्तल दर्पण का इस्तेमाल होता है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पणों का उपयोग वाहनों में रियर-व्यू मिरर के रूप में किया जाता है क्योंकि वे एक विस्तृत दृश्य क्षेत्र प्रदान करते हैं और हमेशा सीधा, छोटा प्रतिबिम्ब बनाते हैं।
Question 1. (ङ) टॉर्च, सर्चलाइट तथा वाहनों की हेड लाइट के लिए बल्ब की स्थिति होगी-
(a) परावर्तन दर्पण के ध्रुव फोकस के बीच
(b) परावर्तक के फोकस के अति निकट
(c) परावर्तक के फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(d) परावर्तक के वक्रता केन्द्र पर
Answer: (b) परावर्तक के फोकस के अति निकट
In simple words: टॉर्च और हेडलाइट में बल्ब को परावर्तक दर्पण के फोकस पर रखा जाता है। ऐसा करने से, बल्ब से निकलने वाली सारी रोशनी परावर्तन के बाद एक सीधी और मजबूत किरण पुंज में बदल जाती है, जो दूर तक जाती है।
🎯 Exam Tip: परावर्तन दर्पण के फोकस पर प्रकाश स्रोत रखने से समानांतर किरण पुंज प्राप्त होता है, जो टॉर्च और हेडलाइट्स में प्रकाश को दूर तक भेजने के लिए आवश्यक है।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
(क) समतल द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी होता है।
Answer: समतल **दर्पण** द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी होता है।
In simple words: समतल दर्पण से बनने वाली तस्वीर असली नहीं होती, बल्कि केवल महसूस की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: समतल दर्पण हमेशा आभासी और सीधा प्रतिबिम्ब बनाता है, जो दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु सामने होती है।
Question 2. (ख) जो प्रतिबिम्ब सीधा बनता है उसकी आकृति आभासी होती है।
Answer: जो प्रतिबिम्ब सीधा बनता है उसकी आकृति **आभासी** होती है।
In simple words: यदि किसी चीज़ की तस्वीर सीधी दिखती है, तो वह तस्वीर केवल एक दिखावा होती है, असली नहीं।
🎯 Exam Tip: यह एक सामान्य नियम है कि सभी सीधे प्रतिबिम्ब आभासी होते हैं, और सभी वास्तविक प्रतिबिम्ब उल्टे होते हैं।
Question 2. (ग) यदि आपतन कोण का मान 60° तो परावर्तन कोण का मान 60° होगा।
Answer: यदि आपतन कोण का मान 60° तो परावर्तन कोण का मान **60°** होगा।
In simple words: प्रकाश के परावर्तन के नियम के अनुसार, जिस कोण से रोशनी आती है, उसी कोण से वह वापस भी जाती है।
🎯 Exam Tip: परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है (\( \angle i = \angle r \)), यह नियम सभी प्रकार की परावर्तक सतहों पर लागू होता है।
Question 2. (घ) दर्पण के ध्रुव व वक्रता केन्द्र के बीच की दूरी फोकस दूरी कहलाती है।
Answer: दर्पण के ध्रुव व मुख्य **फोकस** के बीच की दूरी फोकस दूरी कहलाती है।
In simple words: दर्पण के बीच वाले बिंदु (ध्रुव) और उस बिंदु (फोकस) के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते हैं, जहाँ समांतर किरणें टकराने के बाद मिलती हैं या मिलती हुई लगती हैं।
🎯 Exam Tip: वक्रता त्रिज्या \( R \) और फोकस दूरी \( f \) के बीच संबंध \( R = 2f \) होता है, जो गोलीय दर्पणों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. निम्नलिखित में स्तम्भ क के कथनों को स्तम्भ ख के कथनों से सुमेलित कीजिए-
| स्तम्भ (क) | स्तम्भ (ख) |
|---|---|
| (क) उत्तल दर्पण | (अ) वास्तविक एवं आभासी प्रतिबिम्ब |
| (ख) समतल दर्पण | (ब) आभासी एवं छोटा प्रतिबिम्ब |
| (ग) अवतल दर्पण | (स) आभासी एवं वस्तु के बराबर प्रतिबिम्ब |
| (घ) दर्पण | (द) पारदर्शी |
| (ङ) काँच | (य) अपारदर्शी |
Answer:
(क) उत्तल दर्पण – (ब) आभासी एवं छोटा प्रतिबिम्ब
(ख) समतल दर्पण – (स) आभासी एवं वस्तु के बराबर प्रतिबिम्ब
(ग) अवतल दर्पण – (अ) वास्तविक एवं आभासी प्रतिबिम्ब
(घ) दर्पण – (य) अपारदर्शी
(ङ) काँच – (द) पारदर्शी
In simple words: उत्तल दर्पण छोटी और सीधी तस्वीरें बनाता है। समतल दर्पण आपकी जैसी सीधी तस्वीरें बनाता है। अवतल दर्पण सीधी और उल्टी दोनों तरह की तस्वीरें बना सकता है। दर्पण रोशनी को आर-पार नहीं जाने देता, जबकि काँच रोशनी को आर-पार जाने देता है।
🎯 Exam Tip: दर्पणों के प्रकार और उनके द्वारा बनने वाले प्रतिबिम्बों की प्रकृति (वास्तविक/आभासी, सीधा/उल्टा, छोटा/बड़ा) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. निम्नलिखत कथनों में सही के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने गलत (X) का चिह्न लगाइए-
(क) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब एक तल में नहीं होते । (X)
Answer: (क) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब एक तल में नहीं होते । **(X)**
In simple words: यह गलत है। असल में, जब रोशनी किसी सतह से टकराती है, तो आने वाली किरण, वापस जाने वाली किरण और बीच का सीधा डंडा (अभिलम्ब) सभी एक ही जगह (तल) पर होते हैं।
🎯 Exam Tip: परावर्तन का पहला नियम कहता है कि आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं, जो एक महत्वपूर्ण भौतिक अवधारणा है।
Question 4. (ख) परावर्तन के नियम से आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है। (✓)
Answer: (ख) परावर्तन के नियम से आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है। **(✓)**
In simple words: यह सही है। रोशनी जिस कोने से आती है (आपतन कोण), उसी कोने से वापस जाती है (परावर्तन कोण)।
🎯 Exam Tip: परावर्तन का दूसरा नियम \( \angle i = \angle r \) बताता है, जो प्रकाश के परावर्तन के सभी मामलों में लागू होता है और इसके बिना परावर्तन को समझना अधूरा है।
Question 4. (ग) परावर्तन का नियम सभी प्रकार के दर्पणों के लिए लागू होता है। (X)
Answer: (ग) परावर्तन का नियम सभी प्रकार के दर्पणों के लिए लागू होता है। **(✓)**
In simple words: यह गलत है। परावर्तन के नियम केवल समतल दर्पण पर ही नहीं, बल्कि उत्तल और अवतल दर्पण जैसे सभी प्रकार के परावर्तक सतहों पर लागू होते हैं।
🎯 Exam Tip: परावर्तन के नियम सार्वभौमिक होते हैं और समतल, गोलीय (उत्तल और अवतल) सहित सभी प्रकार की चिकनी परावर्तक सतहों पर समान रूप से लागू होते हैं।
Question 4. (घ) समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब को पर्दे पर लिया जा सकता है। (X)
Answer: (घ) समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब को पर्दे पर लिया जा सकता है। **(X)**
In simple words: यह गलत है। समतल दर्पण से बनने वाली तस्वीर असली नहीं होती, इसलिए उसे किसी पर्दे पर नहीं दिखाया जा सकता। ऐसी तस्वीरें केवल दर्पण के अंदर ही दिखती हैं।
🎯 Exam Tip: केवल वास्तविक प्रतिबिम्बों को ही पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है, जबकि आभासी प्रतिबिम्बों को नहीं, क्योंकि वे वास्तव में प्रकाश किरणों के मिलने से नहीं बनते।
Question 4. (ङ) अवतल दर्पण से कभी आभासी प्रतिबिम्ब नहीं बनता है। (X)
Answer: (ङ) अवतल दर्पण से कभी आभासी प्रतिबिम्ब नहीं बनता है। **(X)**
In simple words: यह गलत है। अवतल दर्पण आभासी प्रतिबिम्ब बना सकता है। जब वस्तु को दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है, तो अवतल दर्पण एक बड़ा और सीधा आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण से बनने वाले प्रतिबिम्बों की प्रकृति वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है; यह वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिम्ब बना सकता है।
Question 5. गोलीय दर्पण के लिए ध्रुव, वक्रता केन्द्र, मुख्य फोकस तथा मुख्य अक्ष की परिभाषा दीजिए। रेखा चित्र बनाकर इनकी स्थितियों को प्रदर्शित कीजिए ।
Answer:
**ध्रुव:** गोलीय दर्पण के परावर्तक तल का बीच वाला बिंदु 'P' ध्रुव कहलाता है। यह दर्पण की सतह पर स्थित होता है।
**वक्रता केन्द्र:** गोलीय दर्पण जिस बड़े खोखले गोले का हिस्सा होता है, उस गोले के केंद्र को वक्रता केंद्र (C) कहते हैं। यह केंद्र दर्पण के सामने या पीछे हो सकता है।
**वक्रता त्रिज्या:** दर्पण के ध्रुव (P) से वक्रता केंद्र (C) तक की दूरी को वक्रता त्रिज्या (R) कहते हैं। यह गोले की त्रिज्या के बराबर होती है जिससे दर्पण को काटा गया है।
**मुख्य फोकस:** मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं (अवतल दर्पण में) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल दर्पण में), उसे मुख्य फोकस (F) कहते हैं। यह बिंदु \( \text{C} \) और \( \text{P} \) के ठीक बीच में होता है।
**मुख्य अक्ष:** दर्पण के ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) से होकर गुजरने वाली सीधी रेखा को मुख्य अक्ष कहते हैं। यह दर्पण की सभी गणनाओं के लिए संदर्भ रेखा होती है।
In simple words: गोलीय दर्पण के बीच के बिंदु को ध्रुव कहते हैं। जिस बड़े गोले का दर्पण एक टुकड़ा होता है, उसके केंद्र को वक्रता केंद्र कहते हैं। ध्रुव से वक्रता केंद्र की दूरी वक्रता त्रिज्या है। जहां समांतर रोशनी किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं या मिलती हुई लगती हैं, उसे मुख्य फोकस कहते हैं। ध्रुव और वक्रता केंद्र को जोड़ने वाली सीधी रेखा मुख्य अक्ष कहलाती है।
🎯 Exam Tip: इन सभी पारिभाषिक शब्दों और उनके संबंधित चित्रों को याद रखना, गोलीय दर्पणों से प्रतिबिम्ब बनने की प्रक्रिया को समझने के लिए मौलिक है।
Question 6. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए-
(क) वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिम्ब ।
Answer: वास्तविक प्रतिबिम्ब और आभासी प्रतिबिम्ब में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
| वास्तविक प्रतिबिम्ब | आभासी प्रतिबिम्ब |
|---|---|
| यह प्रतिबिम्ब पर्दे पर बन सकता है। | यह प्रतिबिम्ब पर्दे पर नहीं बन सकता, यह सिर्फ दर्पण में दिखता है। |
| यह हमेशा उल्टा बनता है। | यह हमेशा सीधा बनता है। |
| जब प्रकाश किरणें सच में एक बिंदु पर मिलती हैं, तब यह बनता है। | जब प्रकाश किरणें एक बिंदु से आती हुई महसूस होती हैं, तब यह बनता है। |
| यह अवतल दर्पण द्वारा बनता है (कुछ खास स्थितियों को छोड़कर)। | यह समतल, उत्तल और अवतल दर्पण तीनों द्वारा बन सकता है। |
In simple words: असली तस्वीर (वास्तविक प्रतिबिम्ब) को पर्दे पर देख सकते हैं और यह उल्टी होती है, जबकि नकली तस्वीर (आभासी प्रतिबिम्ब) केवल दर्पण में दिखती है और सीधी होती है। असली तस्वीर तब बनती है जब रोशनी किरणें सच में एक जगह मिलती हैं, नकली तस्वीर तब बनती है जब वे किरणें एक जगह से आती हुई महसूस होती हैं।
🎯 Exam Tip: वास्तविक प्रतिबिम्ब हमेशा उल्टा होता है और पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है, जबकि आभासी प्रतिबिम्ब हमेशा सीधा होता है और इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
Question 6. (ख) अवतल दर्पण तथा उत्तल दर्पण।
Answer: अवतल दर्पण तथा उत्तल दर्पण में निम्नलिखित अंतर होते हैं:
| अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण |
|---|---|
| इसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर धँसा होता है। | इसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है। |
| यह प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर इकट्ठा करता है (अभिसारी)। | यह प्रकाश किरणों को फैलाता है (अपसारी)। |
| यह वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिम्ब बना सकता है। | यह हमेशा आभासी और सीधा प्रतिबिम्ब बनाता है। |
| यह वस्तु से छोटा, बराबर या बड़ा प्रतिबिम्ब बना सकता है। | यह हमेशा वस्तु से छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है। |
| इसका उपयोग टॉर्च, शेविंग दर्पण और दंत चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। | इसका उपयोग वाहनों में रियर-व्यू मिरर और स्ट्रीट लाइट में होता है। |
In simple words: अवतल दर्पण अंदर की ओर मुड़ा होता है और रोशनी को एक जगह इकट्ठा करता है, जिससे बड़ी और छोटी दोनों तरह की तस्वीरें बन सकती हैं। उत्तल दर्पण बाहर की ओर उभरा होता है और रोशनी को फैलाता है, जिससे हमेशा छोटी और सीधी तस्वीरें बनती हैं।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण और उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण भी कहते हैं, और इनकी उपयोगिता इन्हीं गुणों पर आधारित है।
Question 7. समान्तर प्रकाश किरण, अभिसारी प्रकाश किरण तथा अपसारी प्रकाश किरण पुंज का सचित्र वर्णन कीजिए ।
Answer:
(अ) **समान्तर प्रकाश किरण पुंज:** जिस प्रकाश किरण पुंज की सभी किरणें एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं, उसे समान्तर प्रकाश-पुंज कहते हैं। ये किरणें बहुत दूर तक एक ही दिशा में बिना मिले या फैले चलती रहती हैं। उदाहरण के लिए, सूर्य से आने वाली किरणें पृथ्वी पर लगभग समानांतर होती हैं।
(ब) **अभिसारी प्रकाश किरण पुंज:** जिस प्रकाश किरण पुंज की सभी किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद किसी एक बिंदु पर मिलती हैं, उसे अभिसारी किरण पुंज कहते हैं। ये किरणें एक बिंदु की ओर सिकुड़ती हुई प्रतीत होती हैं। उदाहरण के लिए, उत्तल लेंस द्वारा प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करना।
(स) **अपसारी प्रकाश किरण पुंज:** जिस प्रकाश किरण पुंज की सभी किरणें किसी एक बिंदु से निकलकर फैलती हुई प्रतीत होती हैं, उसे अपसारी प्रकाश किरण पुंज कहते हैं। ये किरणें एक बिंदु से दूर जाती हुई दिखाई देती हैं। उदाहरण के लिए, एक बल्ब से निकलने वाला प्रकाश।
In simple words: समांतर किरणें वे होती हैं जो एक-दूसरे के बगल में सीधी चलती हैं। अभिसारी किरणें एक बिंदु पर इकट्ठी होती हैं। अपसारी किरणें एक बिंदु से बाहर की ओर फैलती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाश किरण पुंज के इन तीनों प्रकारों को उनके व्यवहार (समांतर चलना, एकत्रित होना, या फैलना) और संबंधित आरेखों के साथ याद रखें, क्योंकि ये प्रकाशिकी में मौलिक अवधारणाएँ हैं।
Question 8. अवतल दर्पण का फोकस वास्तविक है जबकि उत्तल दर्पण का फोकस काल्पनिक। स्पष्ट कीजिए।
Answer: अवतल दर्पण का मुख्य फोकस वास्तविक होता है क्योंकि समानांतर प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद वास्तव में मुख्य अक्ष पर एक बिंदु पर मिलती हैं। आप इन मिलती हुई किरणों को एक पर्दे पर देख सकते हैं। वहीं, उत्तल दर्पण का मुख्य फोकस काल्पनिक होता है क्योंकि समानांतर प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष पर किसी एक बिंदु से आती हुई महसूस होती हैं, लेकिन वे सच में वहाँ मिलती नहीं हैं। इन किरणों को हम बिंदीदार रेखाओं से दिखाते हैं क्योंकि वे वास्तविक रूप से मौजूद नहीं होतीं।
In simple words: अवतल दर्पण का फोकस असली होता है क्योंकि रोशनी किरणें सच में एक जगह मिलती हैं। उत्तल दर्पण का फोकस नकली होता है क्योंकि रोशनी किरणें सिर्फ एक जगह से आती हुई लगती हैं, सच में मिलती नहीं हैं।
🎯 Exam Tip: वास्तविक फोकस (अवतल दर्पण) वह होता है जहाँ किरणें सच में मिलती हैं, जबकि आभासी फोकस (उत्तल दर्पण) वह होता है जहाँ किरणें मिलती हुई प्रतीत होती हैं; इस अंतर को रेखाचित्रों से स्पष्ट करें।
Question 9. किसी अवतल दर्पण को ध्रुव तथा फोकस के बीच रखी गयी वस्तु का दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब को प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक किरण आरेख बनाइए ।
Answer: विद्यार्थी इस प्रश्न के लिए आवश्यक किरण आरेख स्वयं बनाएं। इसमें अवतल दर्पण के ध्रुव और फोकस के बीच रखी गई वस्तु से बनने वाले आभासी, सीधे और बड़े प्रतिबिम्ब को दर्शाना होगा।
In simple words: इस सवाल के लिए चित्र खुद बनाना होगा।
🎯 Exam Tip: किरण आरेख बनाते समय, कम से कम दो किरणों का उपयोग करें जो परावर्तन के नियमों का पालन करती हों, और ध्यान दें कि वस्तु की स्थिति बदलने पर प्रतिबिम्ब की प्रकृति और स्थिति कैसे बदलती है।
Question 10. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) उस दर्पण का नाम लिखिए जिससे वस्तु के आकार का आभासी प्रतिबिम्ब बनता है।
Answer: अवतल दर्पण।
In simple words: अवतल दर्पण से वस्तु की बड़ी और सीधी तस्वीर बन सकती है।
🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण ही एकमात्र गोलीय दर्पण है जो वस्तु की विशेष स्थिति (ध्रुव और फोकस के बीच) में वस्तु से बड़ा और आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है।
Question 10. (ख) उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा दीजिए ।
Answer: उत्तल दर्पण का मुख्य फोकस वह बिंदु होता है जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मिलती हुई प्रतीत होती हैं। ये किरणें वास्तव में नहीं मिलतीं, बल्कि दर्पण के पीछे एक बिंदु से आती हुई लगती हैं।
In simple words: उत्तल दर्पण का फोकस वह जगह है जहाँ समानांतर रोशनी टकराकर वापस जाती है और एक बिंदु से आती हुई लगती है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का मुख्य फोकस हमेशा दर्पण के पीछे स्थित होता है और यह आभासी होता है, क्योंकि किरणें वास्तव में वहाँ नहीं मिलतीं।
Question 10. (ग) स्ट्रीट लाइट में प्रयोग किए जाने वाले दर्पण का नाम लिखिए।
Answer: उत्तल दर्पण।
In simple words: स्ट्रीट लाइट में उत्तल दर्पण का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का उपयोग स्ट्रीट लाइट में इसलिए किया जाता है क्योंकि यह प्रकाश को बड़े क्षेत्र में फैलाता है, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा प्रकाशित होता है।
Question 10. (घ) दर्पण के पृष्ठ भाग पर चाँदी की कलई की जाती है क्यों ?
Answer: दर्पण के पिछले हिस्से पर चाँदी की एक परत इसलिए चढ़ाई जाती है ताकि अंदर की सतह चमकदार बन जाए। चाँदी एक बहुत अच्छा परावर्तक है, इसलिए यह प्रकाश को अच्छे से वापस भेजती है। इससे दर्पण से स्पष्ट और तेज प्रतिबिम्ब बनता है।
In simple words: दर्पण के पीछे चांदी की परत लगाई जाती है ताकि वह बहुत चमकदार बन जाए और रोशनी को अच्छे से वापस भेज सके, जिससे साफ तस्वीर दिखे।
🎯 Exam Tip: चाँदी धातु सबसे अच्छी प्रकाश परावर्तक मानी जाती है, इसलिए दर्पणों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसके पीछे चाँदी की परत चढ़ाई जाती है, और इसे सुरक्षित रखने के लिए ऊपर से पेंट कर दिया जाता है।
Question 10. (ङ) उत्तल एवं अवतल दर्पण को गोलीय दर्पण कहते हैं। क्यों ?
Answer: उत्तल और अवतल दर्पण दोनों को गोलीय दर्पण कहते हैं क्योंकि इनकी परावर्तक सतह किसी खोखले गोले का एक कटा हुआ हिस्सा होती है। इन दर्पणों का आकार एक गोले के टुकड़े जैसा होता है, इसीलिए इन्हें गोलीय दर्पण कहा जाता है।
In simple words: उत्तल और अवतल दर्पण को गोलीय दर्पण इसलिए कहते हैं क्योंकि वे एक बड़े गोले के कटे हुए टुकड़े जैसे दिखते हैं।
🎯 Exam Tip: गोलीय दर्पणों का नाम उनके आकार से आता है; वे या तो अंदर की ओर घुमावदार होते हैं (अवतल) या बाहर की ओर (उत्तल), दोनों ही एक गोले के हिस्से होते हैं।
Question 11. किसी समतल दर्पण में कोई प्रकाश किरण लम्बवत् आपतित हो तो परावर्तित किरण को चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
Answer: विद्यार्थी इस प्रश्न के लिए आवश्यक किरण आरेख स्वयं बनाएं। जब कोई प्रकाश किरण समतल दर्पण पर लम्बवत् (90 डिग्री पर) पड़ती है, तो वह उसी रास्ते से वापस परावर्तित हो जाती है। यह चित्र में स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए।
In simple words: इस सवाल के लिए चित्र खुद बनाना होगा। जब रोशनी सीधी दर्पण पर गिरती है, तो वह सीधी वापस भी आ जाती है।
🎯 Exam Tip: लम्बवत् आपतन की स्थिति में, आपतन कोण \( 0^\circ \) होता है, इसलिए परावर्तन कोण भी \( 0^\circ \) होगा, जिसका अर्थ है कि किरण अपने ही पथ पर वापस लौट जाती है।
Question 12. (क) उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा दीजिए तथा आवश्यक किरण आरेख बनाइए।
Answer: उत्तल दर्पण का मुख्य फोकस वह बिंदु होता है जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मिलती हुई प्रतीत होती हैं। ये किरणें वास्तव में नहीं मिलतीं, बल्कि दर्पण के पीछे एक बिंदु से आती हुई लगती हैं। इसे \( \text{F} \) द्वारा दर्शाया जाता है और यह वक्रता केंद्र \( \text{C} \) और ध्रुव \( \text{P} \) के बीच में स्थित होता है।
In simple words: उत्तल दर्पण का फोकस वह जगह है जहाँ समानांतर रोशनी किरणें टकराकर ऐसे वापस आती हैं जैसे वे दर्पण के पीछे किसी एक बिंदु से आ रही हों। इसे एक चित्र बनाकर दिखाना होगा।
🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का मुख्य फोकस हमेशा आभासी और दर्पण के पीछे स्थित होता है, जिसे दर्शाने के लिए किरणों को बिंदीदार रेखाओं से जोड़ना आवश्यक है।
Question 12. (ख) परावर्तन के नियमों को लिखिए ।
Answer: परावर्तन के दो मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
1. आपतित किरण (आने वाली किरण), परावर्तित किरण (वापस जाने वाली किरण) और परावर्तक सतह के आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलम्ब (सतह पर 90 डिग्री का काल्पनिक डंडा), ये तीनों एक ही समतल (जगह) में होते हैं।
2. आपतन कोण (जिस कोण से किरण आती है, \( \angle i \)) हमेशा परावर्तन कोण (जिस कोण से किरण वापस जाती है, \( \angle r \)) के बराबर होता है। इसे \( \angle i = \angle r \) के रूप में भी लिखा जाता है।
In simple words: परावर्तन के दो नियम हैं: पहला, आने वाली किरण, जाने वाली किरण और बीच का सीधा डंडा सभी एक ही जगह होते हैं। दूसरा, रोशनी जिस कोने से आती है, उसी कोने से वापस जाती है।
🎯 Exam Tip: परावर्तन के ये नियम प्रकाशिकी के मूलभूत सिद्धांत हैं और सभी प्रकार की परावर्तक सतहों पर लागू होते हैं, इसलिए इन्हें सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 13. (क) पार्श्व परिवर्तन क्या है? समतल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब पार्श्व परिवर्तन दर्शाइए ।
Answer: पार्श्व परिवर्तन वह घटना है जिसमें एक समतल दर्पण में किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब उसके बाएँ और दाएँ भाग को उल्टा दिखाता है। इसका मतलब है कि जब आप दर्पण में अपना दायाँ हाथ उठाते हैं, तो प्रतिबिम्ब में आपका बायाँ हाथ ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है। यह दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिम्ब की एक खास विशेषता है।
In simple words: पार्श्व परिवर्तन का मतलब है कि जब आप दर्पण में देखते हैं, तो आपका दायाँ हिस्सा बायाँ और बायाँ हिस्सा दायाँ दिखता है। जैसे, अगर आप अपना दायाँ हाथ उठाएं, तो दर्पण में आपका बायाँ हाथ उठा हुआ दिखेगा।
🎯 Exam Tip: पार्श्व परिवर्तन केवल समतल दर्पण में होता है, और यह अक्ष पर वस्तु के सीधे होने के बावजूद बाएँ-दाएँ का उलटाव दिखाता है।
Question 13. (ख) अंग्रेजी वर्णमाला के किन-किन अक्षरों के समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्बों में पार्श्व परिवर्तन प्रतीत नहीं होता।
Answer: अंग्रेजी वर्णमाला के ग्यारह अक्षर ऐसे हैं जिनके समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्बों में पार्श्व परिवर्तन प्रतीत नहीं होता है। ये अक्षर हैं: \( \text{A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y} \)। ये अक्षर ऐसे डिज़ाइन किए गए हैं कि इनका बायाँ और दायाँ भाग एक जैसा दिखता है, जिससे दर्पण में भी वे वैसे ही दिखते हैं।
In simple words: अंग्रेजी के 11 अक्षर ऐसे हैं जो दर्पण में भी वैसे ही दिखते हैं जैसे वे असल में होते हैं, उनमें दायाँ-बायाँ नहीं बदलता। ये हैं: A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y.
🎯 Exam Tip: वे अक्षर जिनमें पार्श्व परिवर्तन नहीं दिखता, वे ज्यामितीय रूप से सममित होते हैं, यानी उनकी बाईं और दाईं ओर की आकृति एक जैसी होती है।
Question 14. यदि आपतन कोण का मान 30° है, परावर्तन कोण का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: परावर्तन के नियमानुसार, आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है।
यहाँ, आपतन कोण \( \angle i = 30^\circ \)
परावर्तन के नियम से, \( \angle r = \angle i \)
\[ \implies \angle r = 30^\circ \]अतः, परावर्तन कोण का मान भी \( 30^\circ \) होगा। यह नियम प्रकाश की गतिशीलता का एक महत्वपूर्ण पहलू दर्शाता है।
In simple words: रोशनी जिस कोण से आती है, उसी कोण से वापस जाती है। अगर रोशनी 30 डिग्री के कोण से आ रही है, तो वह 30 डिग्री के कोण से ही वापस जाएगी।
🎯 Exam Tip: यह एक सीधा प्रश्न है जो परावर्तन के दूसरे नियम पर आधारित है; बस आपतन कोण को परावर्तन कोण के बराबर लिखें।
Question 15. यदि आपतित किरण व समतल दर्पण के बीच बनने वाला कोण 60° तो परावर्तन कोण का मान कितना होगा ?
Answer: आपतित किरण और समतल दर्पण के बीच का कोण दिया गया है, जो \( 60^\circ \) है।
हमें आपतन कोण \( \angle i \) ज्ञात करना होगा, जो अभिलम्ब और आपतित किरण के बीच का कोण होता है।
अभिलम्ब और दर्पण की सतह के बीच का कोण हमेशा \( 90^\circ \) होता है।
इसलिए, आपतन कोण \( \angle i = 90^\circ - (\text{आपतित किरण और दर्पण के बीच का कोण}) \)
\[ \angle i = 90^\circ - 60^\circ \]\[ \implies \angle i = 30^\circ \]
परावर्तन के नियमानुसार, आपतन कोण \( \angle i \) परावर्तन कोण \( \angle r \) के बराबर होता है।
\[ \implies \angle r = \angle i \]\[ \implies \angle r = 30^\circ \]
अतः, परावर्तन कोण का मान \( 30^\circ \) होगा। यह समझने के लिए कि रोशनी सतह से कैसे टकराती है, अभिलंब का ज्ञान आवश्यक है।
In simple words: रोशनी की किरण और दर्पण के बीच का कोण 60 डिग्री है। दर्पण पर एक सीधी लाइन (अभिलम्ब) 90 डिग्री पर होती है। तो, आने वाली किरण और सीधी लाइन के बीच का कोण 90 - 60 = 30 डिग्री होगा। रोशनी जिस कोण से आती है (30 डिग्री), उसी कोण से वापस जाती है, इसलिए वापस जाने का कोण भी 30 डिग्री होगा।
🎯 Exam Tip: ध्यान दें कि आपतन कोण हमेशा अभिलम्ब और आपतित किरण के बीच का कोण होता है, न कि आपतित किरण और दर्पण की सतह के बीच का कोण।
Question. प्रोजेक्ट कार्य – नोट – विद्यार्थी स्वयं करें ।
Answer: विद्यार्थी इस प्रोजेक्ट कार्य को स्वयं पूरा करें। इसमें दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए अपनी रचनात्मकता और समझ का उपयोग करना होगा।
In simple words: यह काम खुद से करना है।
🎯 Exam Tip: प्रोजेक्ट कार्य को करते समय, सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और अपनी समझ का उपयोग करके एक व्यवस्थित और पूर्ण समाधान प्रस्तुत करें।
Free study material for Science
UP Board Solutions for Class 7 Science Chapter 16 प्रकाश
Accessing Official UP Board Solutions for Chapter 16 प्रकाश
Students can now access the UP Board Solutions for Chapter 16 प्रकाश prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 7 Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest UP Board syllabus.
Mastering Theoretical & Practical Questions
Benefit from expertly drafted, step-by-step explanations tackling the hardest items in the Class 7 Science curriculum. These breakdowns ensure Class 7 students grasp the core principles governing both theory and calculations, making our UP Board Questions and Answers an invaluable asset for foundational growth.
Complete Preparation Kit for Class 7 Exams
Integrating our Science solution guides into your routine enhances cognitive pacing and accuracy. These resources act as an effective roadmap for Class 7 homework tasks, which can be augmented further using our curated Revision Notes and Sample Papers for Chapter 16 प्रकाश to ensure comprehensive exam coverage.
FAQs
The complete and updated UP Board Solutions Class 7 Science Chapter 16 प्रकाश is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 7 Science are as per latest UP Board curriculum.
Yes, our experts have revised the UP Board Solutions Class 7 Science Chapter 16 प्रकाश as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using UP Board language because UP Board marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our UP Board Solutions Class 7 Science Chapter 16 प्रकाश will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 7 Science. You can access UP Board Solutions Class 7 Science Chapter 16 प्रकाश in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire UP Board Solutions Class 7 Science Chapter 16 प्रकाश in printable PDF format for offline study on any device.