UP Board Solutions Class 7 Sanskrit Chapter 17 Samaj Nirmane Narinam Bhumika

Official UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit: Chapter 17 समाज निर्माणे नरीनाम भूमिका

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Chapter-wise Solutions for Sanskrit: Chapter 17 समाज निर्माणे नरीनाम भूमिका

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शब्दार्थाः

ब्रह्मवादिनी = ब्रह्मविषयक ज्ञान में निष्णात, परमतत्वचिन्तने = अध्यात्म तत्व के चिन्तन में

प्रज्ञावती = बुद्धिमती

दक्षा = समर्थ

समकक्षतां = समानता को

आपणेषु = दुकानों में

सहयोगितया = सहयोगी के रूप में कन्धे से कन्धा मिलाकर

भूषयन्तः = शोभित करती हुई

पुष्णाति = पुष्ट करता है

सरस्वत्यवतारभूता = सरस्वती का अवतार

अग्रेसरन्ति = आगे चलती हैं

आपणेष्वपि = बाजारों में भी

सांसदेत्यादीनि = सांसद इत्यादि

अभ्युन्नत = अधिक ऊँचा ।

 

Question. वैदिकवाङ्मये ............ सन्ति ।
Answer: वैदिकवाङ्मये विदुष्यः सन्ति । यहाँ 'विदुष्यः' शब्द उचित है जो स्त्रियों के ज्ञान को दर्शाता है।
In simple words: यहाँ 'विदुष्यः' शब्द रिक्त स्थान के लिए सबसे उपयुक्त है, जो यह दर्शाता है कि वैदिक साहित्य में स्त्रियाँ ज्ञानी थीं।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान की पूर्ति करते समय वाक्य के अर्थ और व्याकरण के अनुसार सही शब्द का चुनाव करें।

हिन्दी अनुवाद –

वैदिक साहित्य के काल में अपाला, घोषा, लोपामुद्रा आदि विदुषी स्त्रियाँ हुई हैं। गार्गी ब्रह्मवादिनी, तीक्ष्णबुद्धि और अध्यात्मतत्व की विवेचिका थीं। उन्होंने याज्ञवल्क्य के साथ शास्त्रार्थ किया और याज्ञवल्क्य को पराजित (निरुत्तर) किया। याज्ञवल्क्य की पत्नी मैत्रेयी भी बुद्धिमती और सूक्ष्म विवेचन करने वाली थीं। आचार्य मण्डनमिश्र की पत्नी भारती बहुत विदुषी थीं, साक्षात् सरस्वती माता का अवतार थीं। उनकी यह विशेषता थी कि वे शङ्कराचार्य के साथ मण्डनमिश्र के होने वाले शास्त्रार्थ में निर्णायक बनी थीं। जब मण्डनमिश्र शास्त्रार्थ में पराजित हो गए, तब उन्होंने स्वयं भी शङ्कर (आचार्य) के साथ शास्त्रार्थ किया।

आधुनिक काल में विमानचालन में, चंद्रमा पर जाने में, जलयान चलाने में महिलाएँ आगे बढ़ रही हैं। पुरुषों के समान स्त्रियाँ भी सार्वजनिक व्यापार में और दुकानों में (बाजारों में भी) उनकी संख्या पुरुषों की अपेक्षा कम नहीं है। अब राजनीति में भी स्त्रियाँ पुरुषों के साथ सहयोगी के रूप में (कन्धे से कन्धा मिलाकर) प्रगति कर रही हैं। वे पार्षद, विधायक, सांसद इत्यादि पदों पर भी सुशोभित हो रही हैं। भाषण में भी उनकी ओजस्विता दिखाई देती है। इससे भी अधिक क्या हो सकता है कि वे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री आदि महत्त्वपूर्ण पदों को सुशोभित करती हुई गौरव प्राप्त कर रही हैं। क्रिकेट, वॉलीबॉल, टेनिस इत्यादि पश्चिमी खेलों के क्षेत्रों में भी आधुनिक युवतियाँ और लड़कियाँ विदेशों में जाकर विजय प्राप्त करके संसार में भारत का मान बढ़ा रही हैं। आधुनिक समय में तो कबड्डी, भारोत्तोलन जैसे भारतीय खेलों में भी वे (स्त्रियाँ) होड़ कर रही हैं। पिछले ओलम्पिक खेलों की प्रतिस्पर्धा में भारोत्तोलन में कर्णममल्लेश्वरी ने पदक प्राप्त किया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी युवतियाँ प्रधानाध्यापिका के पदों पर प्रतिष्ठित हुई हैं। न केवल कुलपति के पद को, बल्कि मंत्री पद को भी वे (स्त्रियाँ) सुशोभित कर रही हैं। इस प्रकार निश्चय ही स्त्रियाँ समाज के सब कर्मक्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान करती हुई राष्ट्र की उन्नति में संलग्न हैं।

अभ्यास

 

Question 1. उच्चारणं कुरुत पुस्तिकायां च लिखत-
Answer: विद्यार्थी स्वयं करें । यह अभ्यास प्रश्न छात्रों के लिए है ताकि वे शब्दों का सही उच्चारण सीख सकें।
In simple words: छात्रों को यह अभ्यास खुद करना है ताकि वे शब्दों का सही ढंग से उच्चारण करना सीख सकें।

🎯 Exam Tip: सही उच्चारण भाषा सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए प्रत्येक शब्द का स्पष्ट रूप से अभ्यास करना चाहिए।

पूर्णवाक्येन उत्तरत

 

Question 2. (क) समाजस्य निर्माणे कासां महती भूमिका स्वीक्रियन्ते?
Answer: समाजस्य निर्माणे नारीणां महती भूमिका स्वीक्रियन्ते । अर्थात् समाजस्य निर्माणे स्त्रीपुरुषयोः समानतायाः महती भूमिका स्वीक्रियन्ते । महिलाएं समाज को बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: समाज के निर्माण में स्त्रियों की बहुत बड़ी भूमिका होती है, इसका मतलब है कि समाज के विकास में स्त्री और पुरुष दोनों की बराबर की भूमिका होती है।

🎯 Exam Tip: उत्तर में "नारीणां" और "स्त्रीपुरुषयोः समानतायाः" जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. (ख) समाजस्य कल्याणं कदा भवति?
Answer: यदा स्त्रीपुरुषयोः समभावो भवेत् । समाज का कल्याण तभी होता है जब स्त्री और पुरुष दोनों को समान महत्व मिले।
In simple words: समाज का भला तब होता है जब आदमी और औरत को एक जैसा समझा जाए।

🎯 Exam Tip: "समभावो" शब्द कल्याण की स्थिति का सार है, इसे उत्तर में शामिल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 2. (ग) प्राचीनकाले अस्माकं देशे काः विदुष्यः आसन्?
Answer: प्राचीनकाले अस्माकं देशे स्त्रियः विदुष्यः आसन् । पुराने समय में हमारे देश में कई ज्ञानी स्त्रियाँ थीं जिन्होंने ज्ञान के क्षेत्र में योगदान दिया।
In simple words: बहुत समय पहले हमारे देश में बहुत सी ज्ञानी औरतें थीं।

🎯 Exam Tip: "प्राचीनकाले" और "विदुष्यः" शब्दों का उपयोग करके सीधे प्रश्न का उत्तर दें।

 

Question 2. (घ) विदुषयः नायैः काः?
Answer: अपाला, घोषा, रोमगा, विश्ववारा, प्रभृतयः विदुष्यः नार्यः अभवन् । ये सभी प्राचीन भारत की महान विदुषी स्त्रियाँ थीं, जिन्होंने ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया।
In simple words: अपाला, घोषा, रोमगा, विश्ववारा जैसी कई ज्ञानी औरतें थीं।

🎯 Exam Tip: जब नामों को सूचीबद्ध करना हो, तो सुनिश्चित करें कि आप उन्हें सटीक रूप से लिखें।

 

Question 2. (ङ) गार्गी केन सह शास्त्रार्थमकरोत?
Answer: गार्गी याज्ञवल्क्येन सह शास्त्रार्थमकरोत् । गार्गी एक महान विदुषी थीं जिन्होंने याज्ञवल्क्य जैसे विद्वान के साथ भी शास्त्रार्थ करने का साहस किया।
In simple words: गार्गी ने याज्ञवल्क्य के साथ बहस की थी।

🎯 Exam Tip: "याज्ञवल्क्येन" सही नाम है जिसका उपयोग शास्त्रार्थ में गार्गी के प्रतिपक्षी को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

 

Question 2. (च) मैत्रेयी कीदृशी आसीतू?
Answer: मैत्रेयी प्रज्ञावती, सूक्ष्मविवेचिका, परमतत्वचिन्तने दक्षा आसीत् । मैत्रेयी न केवल ज्ञानी थीं, बल्कि गहन विचारों को समझने और आध्यात्मिक सत्य पर चिंतन करने में भी कुशल थीं।
In simple words: मैत्रेयी बहुत समझदार, गहरी सोच वाली और भगवान के बारे में सोचने में अच्छी थीं।

🎯 Exam Tip: मैत्रेयी के गुणों का वर्णन करने वाले विशेषणों को उत्तर में शामिल करें।

 

Question 2. (छ) आधुनिके समाजे स्त्रियः केषु क्षेत्रेषु स्वीकार्य योगदानं कुर्वाणः दृश्यन्ते?
Answer: आधुनिके समाजे स्त्रियः सर्वेषु कर्मक्षेत्रेषु स्वं महत्वपूर्ण योगदानं कुर्वाणाः दृश्यन्ते । आधुनिक समाज में स्त्रियाँ हर क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती हुई दिखाई देती हैं। आज के समय में, महिलाएं शिक्षा से लेकर खेल तक हर जगह अपना हुनर दिखा रही हैं।
In simple words: आजकल औरतें हर काम में अपना खास योगदान देती हुई दिखती हैं।

🎯 Exam Tip: "सर्वेषु कर्मक्षेत्रेषु" वाक्यांश आधुनिक समाज में महिलाओं की व्यापक भूमिका को दर्शाता है।

 

Question 3. पदेषु सन्धि-विच्छेदं कुरुत (सन्धि-विच्छेद करके) –

पदम्सन्धि-विच्छेदः
तथैवतथा + एव
चन्द्रोपरिचन्द्र + उपरि
क्षेत्रेऽपिक्षेत्रे + अपि
शास्त्रार्थेशास्त्र + अर्थे
Answer: ऊपर दी गई तालिका में शब्दों के सही सन्धि-विच्छेद दिखाए गए हैं। सन्धि शब्दों को उनके मूल घटकों में विभाजित करने की एक व्याकरणिक प्रक्रिया है।
In simple words: यह तालिका शब्दों को उनके छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर दिखाती है, जैसे हम दो शब्दों को जोड़कर एक नया शब्द बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: सन्धि-विच्छेद करते समय स्वर सन्धि, व्यंजन सन्धि और विसर्ग सन्धि के नियमों को याद रखें।

 

Question 4. निम्नलिखितपदेषु उपसर्ग लिखत (लिखकर) –

पदम्उपसर्गः
विजयम्वि
संलग्नःसम्
प्रचलितःप्र
प्राध्यापकःप्र
Answer: ऊपर दी गई तालिका में शब्दों के उपसर्ग स्पष्ट रूप से दर्शाए गए हैं। उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं।
In simple words: तालिका में दिखाया गया है कि शब्दों के आगे कौन से छोटे शब्द (उपसर्ग) लगे हैं, जो उनके अर्थ को बदल देते हैं।

🎯 Exam Tip: उपसर्गों को पहचानना शब्द के अर्थ और व्याकरण को समझने में मदद करता है। ध्यान दें कि कुछ उपसर्ग एक जैसे दिखते हैं पर अलग अर्थ देते हैं।

 

Question 5. मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत (पूरा करके) –
(क) वैदिक वाङ्मये नार्यः अभवन् ।
(ख) साम्प्रतं मनुष्याणां जीवनदृष्टिः परिवर्तिता ।
(ग) मण्डनमिश्रस्य पत्नी भारती अतीव विदुषी आसीत् ।
(घ) भारोत्तोलने कर्णमूमल्लेश्वरी पदं प्राप्तवती ।।
Answer:
(क) वैदिक वाङ्मये नार्यः विदुष्यः अभवन् ।
(ख) साम्प्रतं मनुष्याणां जीवनदृष्टिः परिवर्तिता ।
(ग) मण्डनमिश्रस्य पत्नी भारती अतीव विदुषी आसीत् ।
(घ) भारोत्तोलने कर्णममल्लेश्वरी पदं प्राप्तवती ।।
In simple words: यहाँ दिए गए वाक्यों में खाली जगह में सही शब्द भरने थे। हमने हर वाक्य के लिए सही शब्द चुना है ताकि वाक्य का अर्थ पूरा हो सके।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान की पूर्ति करते समय, पूरे वाक्य के संदर्भ और व्याकरणिक शुद्धता पर ध्यान दें।

 

Question 6. संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत (अनुवाद करके) –
(क) समाज में स्त्री और पुरुष का महत्त्व समान है।
(ख) स्त्री और पुरुष की समानता की भावना प्राचीनकाल से है।
(ग) वह युद्ध तथा यज्ञों में भी भाग लेती थी।
(घ) माता बच्चों की प्रथम शिक्षिका होती है।
(ङ) इस समय भारतीय राजनीति में महिलाओं की महती भूमिका है।
Answer:
(क) समाज में स्त्री और पुरुष का महत्त्व समान है।
अनुवाद : समाजे स्त्रीपुरुषयोः समानः महत्वः।।
(ख) स्त्री और पुरुष की समानता की भावना प्राचीनकाल से है।
अनुवाद : स्त्री पुरुषयोः समताभावः प्राचीनकालादेव प्रचलितः अस्ति ।
(ग) वह युद्ध तथा यज्ञों में भी भाग लेती थी।
अनुवाद : सा युद्धे यज्ञे च सम्मिलिता आसीत्।
(घ) माता बच्चों की प्रथम शिक्षिका होती है।
अनुवाद : माता बालकानां प्रथमा शिक्षिका भवति ।।
(ङ) इस समय भारतीय राजनीति में महिलाओं की महती भूमिका है।
अनुवाद : अधुना भारतीय राजनीत्यां महिलानां महती भूमिका अस्ति।
In simple words: इन वाक्यों का हिंदी से संस्कृत में अनुवाद किया गया है। हर वाक्य के अर्थ को ध्यान में रखकर सही संस्कृत शब्दों और व्याकरण का प्रयोग किया गया है।

🎯 Exam Tip: अनुवाद करते समय, वाक्य के काल, वचन और लिंग का सही मिलान सुनिश्चित करें।

 

Question 7. 'मम माता' इति विषये संस्कृतभाषायां पंच वाक्यानि लिखत ।
Answer: विद्यार्थी स्वयं करें । छात्रों को अपनी माता के विषय में पाँच वाक्य लिखने चाहिए, जैसे 'मम माता मम प्रियतमा अस्ति' (मेरी माता मेरी सबसे प्रिय हैं)।
In simple words: यह काम छात्रों के लिए है, उन्हें अपनी माँ के बारे में पाँच संस्कृत वाक्य लिखने होंगे।

🎯 Exam Tip: 'मम माता' जैसे विषयों पर वाक्य लिखते समय, सरल संस्कृत शब्दों और छोटे वाक्यों का उपयोग करें ताकि व्याकरण की त्रुटियां कम हों।

नोट – विद्यार्थी शिक्षण-संकेत स्वयं करें ।

पुनरावृत्तिः

 

Question 1. दीर्घस्वराः के-के सन्ति, इति लिखत ।
Answer: आ, ई, ऋ, लू, ए, ऐ, ओ, औ ।। ये संस्कृत के दीर्घ स्वर हैं जो उच्चारण में अधिक समय लेते हैं।
In simple words: आ, ई, ऋ, लू, ए, ऐ, ओ, औ ये सभी संस्कृत भाषा के लंबे स्वर हैं।

🎯 Exam Tip: स्वरों के प्रकारों को याद रखना उच्चारण और सन्धि नियमों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. संयुक्तव्यञ्जनानां पञ्च उदाहरणानि लिखत ।
Answer: पञ्कजः, पीताम्बरः, कृष्णः, चञ्चु, पञ्च । संयुक्त व्यंजन दो या दो से अधिक व्यंजनों के मेल से बनते हैं।
In simple words: पञ्कजः, पीताम्बरः, कृष्णः, चञ्चु, पञ्च - ये पाँच उदाहरण हैं जिनमें दो या दो से अधिक व्यंजन मिलकर एक नया अक्षर बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: संयुक्त व्यंजनों को पहचानने से शब्द के सही उच्चारण और लेखन में मदद मिलती है।

 

Question 3. निम्नलिखित-वर्णानाम् उच्चारणस्थानानि लिखत (लिखकर)
Answer:
ई, व – तालु
ण – मूर्ख
ए – कंठतालु
ब – ओष्ठ
यह वर्णों के उच्चारण स्थान हैं, जो यह बताते हैं कि ध्वनि मुख के किस भाग से उत्पन्न होती है।
In simple words: यह बताते हैं कि मुंह के किस हिस्से से 'ई', 'व', 'ण', 'ए', 'ब' जैसी आवाजें निकलती हैं।

🎯 Exam Tip: वर्णों के सही उच्चारण स्थान को जानना संस्कृत में शुद्ध उच्चारण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. “अक्' प्रत्याहारे 'ए' प्रत्याहारे च के के वर्णाः भवन्ति, इति लिखत ।
Answer: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ऋ, लू, लु, क (अक्) । प्रत्याहार संस्कृत व्याकरण में वर्णों के समूह को संक्षेप में बताने का एक तरीका है।
In simple words: 'अक्' प्रत्याहार में कौन-कौन से अक्षर आते हैं, वे यहाँ लिखे हैं: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ऋ, लू, लु, क।

🎯 Exam Tip: प्रत्याहारों को अच्छी तरह समझना पाणिनीय व्याकरण का आधार है।

 

Question 5. 'श', 'ष' 'स' चैतेषाम् उच्चारणस्थानानि वदत ।
Answer: ए, ऐ, ओ, औ, ख, ग, घ, ङ (ए)। इन वर्णों के उच्चारण स्थान मुख के विभिन्न भागों से संबंधित हैं।
In simple words: 'श', 'ष', 'स' और ए, ऐ, ओ, औ, ख, ग, घ, ङ जैसे अक्षरों को मुंह के अलग-अलग हिस्सों से बोला जाता है।

🎯 Exam Tip: व्यंजनों के उच्चारण स्थानों में सूक्ष्म अंतर होते हैं, जिनका अभ्यास शुद्ध उच्चारण के लिए आवश्यक है।

 

Question 6. निम्नलिखितपदेषु सन्धि-विच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत (सन्धि-विच्छेद करके)

पदम्सन्धि-विच्छेदःसन्धि-नाम
सूक्तिःसु + उक्तिदीर्घ
दीर्घ औषधालयःऔषध + आलयःदीर्घ
तथापितथा + अपिदीर्घ
दीर्घ सूर्योदयःसूर्य + उदयःगुण
Answer: इस तालिका में दिए गए शब्दों के सन्धि-विच्छेद और उनके सन्धि के प्रकार स्पष्ट रूप से बताए गए हैं। सन्धि दो अक्षरों के मेल से होने वाला परिवर्तन है।
In simple words: यह टेबल दिखाती है कि शब्दों को कैसे तोड़ा जाता है और वे किस तरह की सन्धि (जैसे 'दीर्घ' या 'गुण') से बने हैं।

🎯 Exam Tip: सन्धि के नियमों को समझने के लिए प्रत्येक प्रकार (दीर्घ, गुण, वृद्धि आदि) के उदाहरणों का अभ्यास करना सबसे अच्छा तरीका है।

 

Question 7. निर्देशानुसारेण शब्दरूपाणि लिखत (लिखकर) –

शब्दःरूपम्
'राम' शब्दस्य तृतीया विभक्ति बहुवचनेरामैः
'रमा' शब्दस्य षष्ठीविभक्तेः एकवचनेरमायाः
'पुस्तक' शब्दस्य सप्तमी विभक्ति बहुवचनेपुस्तकेषु
'नदी' शब्दस्य षष्ठीविभक्तेः एकवचनेनद्याः
Answer: ऊपर की तालिका में दिए गए निर्देशों के अनुसार शब्दों के सही रूप प्रस्तुत किए गए हैं। शब्दरूप संज्ञा या सर्वनाम के विभिन्न विभक्तियों और वचनों के रूप होते हैं।
In simple words: टेबल में दिखाया गया है कि 'राम', 'रमा', 'पुस्तक' और 'नदी' जैसे शब्दों के अलग-अलग रूप (विभक्ति और वचन के हिसाब से) कैसे बनते हैं।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण शब्दरूपों (जैसे अकारान्त पुल्लिंग, आकारान्त स्त्रीलिंग) को याद करने से संस्कृत व्याकरण को समझने में बहुत मदद मिलती है।

 

Question 8. शुद्धेषु उत्तरेषु (✓) चिह्न योजयत् (लगाकर) –
(क) कारकाणि सन्ति । (सप्त/अष्ट)
(ख) विभक्तयः सन्ति । (षट्/सप्त/अष्ट)
(ग) त्वं पठसि । (पुस्तकम्/पुस्तकी)
(घ) सीता फलं खादति । (मधुरः/मधुरम्)
Answer:
(क) कारकाणि सन्ति । सप्त
(ख) विभक्तयः सन्ति । सप्त
(ग) त्वं पठसि । पुस्तकम्
(घ) सीता फलं खादति । मधुरम्
In simple words: सही विकल्प चुनना था। संस्कृत में 7 विभक्तियाँ होती हैं। 'पुस्तकम्' शब्द 'पठसि' क्रिया के लिए सही कर्म है, जबकि 'मधुरम्' 'फलं' के लिए सही विशेषण है। कारक के लिए भी 'सप्त' अधिक सामान्य उत्तर है।

🎯 Exam Tip: विकल्पों में से सही उत्तर चुनते समय संस्कृत व्याकरण के नियमों, जैसे कारक, विभक्ति और लिंग-वचन के मिलान पर ध्यान दें।

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