Official UP Board Solutions for Class 7 Hindi: Chapter 05 निज्भाषा उन्नति
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Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 05 निज्भाषा उन्नति
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समस्त पद्यांशों की व्याख्या
निज भाषा......... को शूल ।
संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठयपुस्तक 'मंजरी' के 'निजभाषा उन्नति' नामक कविता से ली गई हैं। इसके रचयिता भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हैं।
प्रसंग: कवि ने अपनी भाषा की उन्नति के लिए कहा है।
व्याख्या: कवि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कहते हैं, कि सब प्रकार की उन्नति का आधार अपनी भाषा (हिन्दी) की उन्नति करना है। अपनी भाषा हिन्दी के ज्ञान के बिना हृदय का दुख (शूल) दूर नहीं हो सकता है।
करहू विलम्ब न ..............मुल
संदर्भ: पूर्ववत् ।
प्रसंग: कवि ने अपनी भाषा हिन्दी की उन्नति के लिए प्रयत्न करने को कहा है।
व्याख्या: हे भाइयो! अब उठो और देर मत करो। अपना काँटा दूर करो। सबसे पहले अपनी भाषा की उन्नति करो। यह सब चीजों की उन्नति की जड़ है।
प्रचलित करहु रत्न ।
संदर्भ: पूर्ववत् ।
प्रसंग: कवि ने सरकारी काम-काज में हिन्दी का प्रयोग करने के लिए कहा है।
व्याख्या: यत्न करके सारे संसार में अपनी भाषा का प्रयोग प्रचलित कर दो। यह रत्न (निज भाषा) सरकारी कामकाज, कोर्ट (अदालत) आदि में फैला दो।
सुत सो बहु बात ।
संदर्भ: पूर्ववत् ।
प्रसंग: कवि ने घरेलू व्यवहार में बातचीत हिन्दी में ही करने के लिए कहा है।
व्याख्या: अपने मन की अनेक बातों को रात-दिन पुत्र, पत्नी, मित्र और नौकर आदि के साथ अपनी भाषा के माध्यम से ही करो।
निजभाषा पुकार । संदर्भ- पूर्ववत् ।
प्रसंग: कवि ने अपनी भाषा, धर्म, मान-सम्मान और कार्य-व्यवहार को मिलाकर उन्नति करने के लिए कहा है ।
व्याख्या: अपनी भाषा, अपना धर्म, अपना मान-सम्मान, अपने कार्य और व्यवहार, इन सबसे मिलकर प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
पढ़ो लिखो कोउ अनुसार । संदर्भ- पूर्ववत् ।
प्रसंग: अनेक भाषाएँ जान लेने पर भी, सोच-विचार करने के लिए कवि ने हिन्दी का प्रयोग करने को कहा है।
व्याख्या: चाहे अनेक प्रकार से पढ़ाई-लिखाई की जाए, अनेक भाषाएँ सीखी जाएँ, परन्तु जब भी कोई सोच-विचार किया जाए, वह अपनी भाषा में ही किया जाना चाहिए।
अंग्रेजी .हीन ।
संदर्भः पूर्ववत् ।
प्रसंग: अँग्रेजी पढ़कर सर्वगुण होकर, कवि ने हिन्दी (निज भाषा) के ज्ञान बिना मनुष्य को हीन बताया है।
व्याख्या: यद्यपि अँग्रेजी भाषा के पढ़ने से मनुष्य सब गुणों में चतुर हो जाता है, फिर भी अँग्रेजी के साथ हिन्दी भाषा का ज्ञान जरूरी है।
घर की फूट बुरी जगत में . जनि कोय ।
संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'निजभाषा उन्नति' नामक पाठ 'घर की फूट बुरी' नामक कविता से ली गई हैं। इसके रचयिता भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हैं।
प्रसंग: कवि ने अनेक उदाहरण देते हुए घर की फूट को बुरा बताया है। धन, मान और शक्ति की चाह करने वालों को घर में फूट नहीं पड़ने देना चाहिए।
व्याख्या: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कहते हैं कि संसार में घर की फूट बहुत बुरी है। सोने की लंका घर की फूट से ही नष्ट हो गई। फूट के कारण ही सौ कौरव मारे गए और महाभारत का युद्ध हुआ। उससे जो हानि हुई, उसकी पूर्ति भारत में अब तक नहीं हो पाई। फूट के कारण ही जयचन्द ने भारत में अफगानों को बुलाया। उसका फल आर्य लोग गुलाम होकर अब तक भोग रहे हैं। फूट के कारण ही महापद्मनन्द ने मगध के राज्य का नाश कर लिया। उसने चन्द्रगुप्त मौर्य का विनाश करना चाहा था लेकिन वह राज्य सहित स्वयं ही नष्ट हो गया। अतः यदि संसार में अपने धन, मान और बल की रक्षा करनी है, तो अपने घर में भूल से भी फूट मत डालो।
प्रश्न-अभ्यास
कुछ करने को
Question 1: निम्नांकित स्थितियों पर छोटे समूहों में चर्चा कीजिए और निष्कर्ष को पाँच-सात पंक्तियों में लिखिए
(क) ऐसा घर जिसमें सब मिलकर कार्य करते हैं।
Answer: हमें अपने घर के सभी कार्यों को मिलकर करना चाहिए। इससे परिवार में प्रेम बढ़ेगा और काम भी जल्दी खत्म होगा। सभी को आराम करने का समान अवसर मिलेगा। बड़ों को महसूस होगा कि बच्चे उनका ख्याल रखते हैं और बच्चों को लगेगा कि बड़े उनका ध्यान रखते हैं। इस तरह घर में हमेशा खुशी का माहौल बना रहेगा और सब मिलकर आगे बढ़ेंगे।
In simple words: हमें घर के काम मिलकर करने चाहिए। इससे सभी खुश रहते हैं, काम जल्दी होते हैं और प्यार बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों के उत्तर में सामाजिक और भावनात्मक लाभों को स्पष्ट रूप से उजागर करें।
Question 1: (ख) ऐसा घर जिसमें फूट है।
Answer: जिस घर में आपस में फूट होती है, वह घर कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता। ऐसे घर में शांति बिल्कुल नहीं रहती, और खुशी का कोई पल भी नहीं आता। घर के सभी सदस्य उदास और चिड़चिड़े रहते हैं। बच्चों का मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। बड़े-बुजुर्गों की सेवा नहीं हो पाती और बाहर के लोग उनका मजाक उड़ाते हैं। यह एक घर की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है।
In simple words: फूट वाले घर में शांति नहीं होती, कोई खुश नहीं रहता और बच्चे भी सही से बड़े नहीं हो पाते।
🎯 Exam Tip: 'फूट' के नकारात्मक प्रभावों को दर्शाने के लिए स्पष्ट और सरल भाषा का प्रयोग करें।
Question 2: कवि ने फूट के कारण होने वाले विनाश के अनेक उदाहरण दिए हैं, यथा
(क) रावण और विभीषण की फूट के कारण लंका का नाश ।
(ख) कौरव और पाण्डवों की फूट के फलस्वरूप महाभारत युद्ध।
(ग) पृथ्वीराज और जयचन्द की आपसी फूट के कारण यवनों को भारत आगमन ।
इन विषयों पर शिक्षक/शिक्षिका के साथ चर्चा करके फूट के कारण और उनके दुष्परिणामों को संक्षेप में लिखिए ।
Answer:
(क) रावण और विभीषण के बीच फूट का मुख्य कारण उनके विचारों और आदतों में अंतर था। रावण अपनी शक्ति पर बहुत घमंड करता था और उसने धोखे से सीता का अपहरण कर लिया था। विभीषण एक धार्मिक व्यक्ति था और उसने रावण द्वारा सीता हरण का विरोध किया, क्योंकि यह गलत था। उसने रावण से सीता को राम के पास वापस भेजने का अनुरोध किया, लेकिन रावण ने उसे कायर कहकर अपमानित किया। इस अपमान से दुखी होकर विभीषण राम के पास चला गया और उन्हें रावण तथा लंका के सारे रहस्य बता दिए, जिसके कारण राम ने युद्ध में रावण को हरा दिया। इस तरह, रावण का पूरा विनाश इन्हीं दोनों भाइयों की आपसी फूट का परिणाम था।
(ख) कौरव पांडवों से बहुत ईर्ष्या करते थे। उन्होंने उनके राज्य का हिस्सा हड़प लिया और उन्हें बहुत परेशान किया। कौरवों का अन्याय तब बढ़ गया जब उन्होंने जुए में धोखा देकर पांडवों का राज्य छीन लिया और भरी सभा में द्रौपदी का अपमान किया। इसके परिणामस्वरूप, पांडवों और कौरवों के बीच कुरुक्षेत्र में महाभारत का भयानक युद्ध हुआ। इस युद्ध में दोनों तरफ के अनेक वीर मारे गए, और अंततः दुर्योधन भी मारा गया। उसके सभी संबंधी और भाई पहले ही मारे जा चुके थे। धृतराष्ट्र और गांधारी के अलावा कुरु-वंश में कोई नहीं बचा। इस युद्ध में न केवल कौरवों का विनाश हुआ, बल्कि पांडवों के पुत्र भी कम उम्र में मारे गए और विश्व के कई शूरवीर मारे गए, जो एक बहुत ही भयावह परिणाम था।
(ग) पृथ्वीराज और जयचंद के बीच फूट का कारण जयचंद की पृथ्वीराज के बढ़ते प्रताप से ईर्ष्या करना था। उनके बीच झगड़े का एक बड़ा कारण जयचंद की बेटी संयोगिता भी थी, जो पृथ्वीराज से प्रेम करती थी। जयचंद ने अपने स्वयंवर में पृथ्वीराज को आमंत्रित नहीं किया था, लेकिन पृथ्वीराज ने संयोगिता का अपहरण करके उससे विवाह कर लिया। इससे जयचंद की नफरत पृथ्वीराज के लिए और भी बढ़ गई। इसी बदले की भावना के कारण जब मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज पर हमला किया, तो जयचंद ने गौरी का साथ दिया। गौरी पहले दो बार पृथ्वीराज से हार चुका था, लेकिन जयचंद की मदद से वह इस बार पृथ्वीराज को हराने में सफल रहा। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत के कई हिस्सों पर विदेशियों का शासन स्थापित हो गया। गौरी ने बाद में जयचंद को भी नहीं बख्शा और उसके राज्य पर भी हमला कर दिया, जिससे भारत को बड़ा नुकसान हुआ।
In simple words: आपसी फूट के कारण लंका नष्ट हुई, महाभारत हुआ और विदेशियों को भारत में आने का मौका मिला। रावण और विभीषण, कौरव और पांडव, और पृथ्वीराज व जयचंद की लड़ाई से बहुत नुकसान हुआ।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक उदाहरण देते समय कारणों और परिणामों को स्पष्ट रूप से बताएं, और दिखाएं कि कैसे फूट ने विनाशकारी परिणाम दिए।
Question 3: इस कविता के आधार पर आप भी दो सवाल बनाइए ।
Answer: प्र०1. सब प्रकार की उन्नति का आधार क्या है? प्र०2. कवि के अनुसार घर-परिवार के सदस्यों के साथ हमें किस भाषा में बात करनी चाहिए?
In simple words: कविता से सीखकर दो प्रश्न बनाने हैं। एक प्रश्न उन्नति के आधार पर और दूसरा घर में कौन-सी भाषा बोलने पर।
🎯 Exam Tip: प्रश्न बनाते समय कविता के मुख्य विचारों को शामिल करें और प्रश्न स्पष्ट तथा समझने योग्य हों।
Question 1: यदि आपको अपनी बात हिन्दी, संस्कृत अथवा अंग्रेजी में से किसी एक भाषा में कहने के लिए कहा जाय, तो आप किस भाषा को चुनेंगे ?
Answer: मैं अपनी बात कहने के लिए हिन्दी भाषा को चुनूँगा/चुनूँगी, क्योंकि हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है और मुझे इसका पूरा ज्ञान है। यह भाषा हमें अपनी संस्कृति और पहचान से भी जोड़ती है।
In simple words: मैं हिन्दी भाषा चुनूँगा/चुनूँगी क्योंकि यह हमारी राष्ट्रभाषा है और मुझे अच्छे से आती है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों के उत्तर में अपनी पसंद का कारण स्पष्ट रूप से बताएं और राष्ट्रभाषा जैसे महत्वपूर्ण बिंदु को शामिल करें।
कविता से
Question 1: निज भाषा की उन्नति से क्या-क्या लाभ होगा ?
Answer: अपनी भाषा की उन्नति करने से अपने धर्म, मान-सम्मान और कार्य-व्यवहार में उन्नति होगी। अपनी भाषा का ज्ञान व्यक्ति को आत्मविश्वास देता है और सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।
In simple words: अपनी भाषा को आगे बढ़ाने से हमारा धर्म, इज्जत और कामकाज सब बेहतर होते हैं।
🎯 Exam Tip: 'निज भाषा उन्नति' के सभी पहलुओं - धर्म, मान, व्यवहार - को उत्तर में शामिल करें।
Question 2: हमें अपनी भाषा का प्रसार कहाँ-कहाँ करना चाहिए?।
Answer: हमें अपनी भाषा का प्रसार सरकारी काम-काज, अदालत आदि में करना चाहिए। साथ ही यह प्रयास करना चाहिए कि हमारी हिंदी भाषा का विस्तार विदेशों में भी हो सके। भाषा का प्रचार-प्रसार उसकी शक्ति और पहुंच को बढ़ाता है।
In simple words: हमें अपनी भाषा को सरकारी दफ्तरों, अदालतों में और विदेशों में भी फैलाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: भाषा के प्रसार के लिए विभिन्न क्षेत्रों को उल्लेख करें - सरकारी, न्यायिक और अंतर्राष्ट्रीय।
Question 3: कवि ने अपनी भाषा के अतिरिक्त किसको-किसको बढ़ाने की बात की है ?
Answer: कवि ने भाषा के अतिरिक्त धर्म, मान-सम्मान, एकता आदि को बढ़ाने की बात की है। उनका मानना है कि इन सभी तत्वों का विकास एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।
In simple words: कवि ने भाषा के साथ-साथ धर्म, अपनी इज्जत और मेल-जोल को भी बढ़ाने को कहा है।
🎯 Exam Tip: उत्तर में कवि द्वारा उल्लेखित सभी नैतिक और सामाजिक मूल्यों को शामिल करें।
Question 4: कवि ने महाभारत के युद्ध का क्या कारण बताया है ?
Answer: कवि ने महाभारत युद्ध का कारण कौरवों और पांडवों के बीच आपसी फूट को बताया है। यह फूट ही उनके विनाश का मुख्य कारण बनी।
In simple words: कवि ने कहा कि महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच की आपसी फूट के कारण हुआ था।
🎯 Exam Tip: महाभारत युद्ध के मुख्य कारण को स्पष्ट रूप से और संक्षिप्त में बताएं।
Question 5: निम्नांकित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए
(क) निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल ।
Answer: कवि का आशय है कि अपनी भाषा का प्रचार-प्रसार करने से अपने धर्म, मान-सम्मान, कार्य व्यवहार आदि में उन्नति होगी। अपनी भाषा की उन्नति ही हर प्रकार की तरक्की का आधार है। जब व्यक्ति अपनी भाषा में सोचता और व्यक्त करता है, तो उसकी सभी क्षेत्रों में प्रगति होती है।
In simple words: अपनी भाषा को आगे बढ़ाना ही सभी तरह की तरक्की का सबसे मुख्य आधार है।
🎯 Exam Tip: पंक्तियों का आशय स्पष्ट करते समय मूल विचार और उसके व्यापक अर्थ दोनों को समझाएं।
Question 5: (ख) जो जग में धान मान और बल अपुनी राखन होय । तो अपुने घर में भूले हू फूट करौ जनि कोय ।
Answer: कवि कहना चाहता है कि यदि संसार में अपने धन, मान और बल की रक्षा करनी है, तो अपने घर में भूल से भी फूट मत डालो। एकता और सद्भाव ही किसी भी परिवार या समाज की मजबूती का आधार होते हैं।
In simple words: अगर दुनिया में अपना धन, इज्जत और ताकत बचाना चाहते हो, तो गलती से भी अपने घर में लड़ाई-झगड़ा मत करो।
🎯 Exam Tip: इस दोहे का अर्थ स्पष्ट करते समय धन, मान, बल और फूट के बीच के संबंध को बताएं।
भाषा की बात
Question 1: शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
करम, जदपि, सुबरन, हिय, जल, मीत, धरम।
Answer:
करम - कर्म
जदपि - यद्यपि
सुबरन - सुवर्ण
आरज - आर्य
हिये - हृदय
जल - नीर
मीत - मित्र
धरम - धर्म
In simple words: दिए गए शब्दों के पुराने, असली संस्कृत रूप लिखने हैं।
🎯 Exam Tip: तत्सम शब्दों को याद रखने के लिए उनके मूल संस्कृत अर्थों को समझना सहायक होता है।
Question 2: निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल । बिन निज भाषा ज्ञान के मिटै नै हिय को शूल ॥ उपर्युक्त पंक्तियों में आये हुए 'मूल' और 'शूल' शब्द तुकान्त शब्द हैं। कविता से ऐसे ही तुकान्त शब्द छाँटकर उन शब्दों के आधार पर कुछ पंक्तियाँ रचिए।
Answer: उपर्युक्त पंक्तियों में 'मूल' और 'शूल' जैसे तुकान्त शब्द हैं। कविता से और तुकान्त शब्द: 'कोय', 'होय' (जग में धान मान और बल अपुनी राखन होय, तो अपुने घर में भूले हू फूट करौ जनि कोय)।
इन्हीं शब्दों के आधार पर बनाई गई पंक्तियाँ:
आ गए वे परदेश से अजब अनोखी बात ।
मेरे लिए तो आ गई आज दीवाली रात ।।
In simple words: कविता की लाइनों में से ऐसे शब्द ढूंढो जिनकी आवाज़ एक जैसी हो (जैसे मूल और शूल)। फिर उन्हीं की तरह कुछ नई लाइनें बनाओ।
🎯 Exam Tip: तुकान्त शब्द वे होते हैं जिनकी अंतिम ध्वनियाँ समान होती हैं; कविता से ऐसे शब्द चुनें और उन्हीं की तरह नई पंक्तियाँ रचें।
Question 3: इस कविता से मैंने सीखा.. । – विद्यार्थी स्वयं करें ।
Answer: इस कविता से मैंने अपनी भाषा का सम्मान करना, एकता में रहना और सभी के साथ मिलकर काम करना सीखा। यह कविता हमें अपनी संस्कृति और देश के प्रति प्रेम सिखाती है।
In simple words: इस कविता से हमने अपनी भाषा, एकता और मिलकर रहने की बातें सीखीं।
🎯 Exam Tip: सीखने के बिंदुओं को स्पष्ट और संक्षिप्त वाक्यों में लिखें, कविता के मुख्य संदेशों को दर्शाते हुए।
Question 4: अब मैं करूंगा/करूंगी. । – विद्यार्थी स्वयं करें ।
Answer: अब मैं अपनी भाषा हिंदी को बोलने और इसका सम्मान करने का पूरा प्रयास करूंगा/करूंगी। मैं अपने घर और बाहर भी एकता बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा/करूंगी।
In simple words: अब मैं अपनी भाषा को महत्व दूंगा/दूंगी और घर में सभी से मिलकर रहूंगा/रहूंगी।
🎯 Exam Tip: यह एक व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है; इसमें भविष्य की कार्ययोजना को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें, जो कविता के संदेशों पर आधारित हो।
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Hindi Class 7 Curriculum Solutions: Chapter 05 निज्भाषा उन्नति
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