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Chapter Solutions: Class 7 Hindi (UP Board) - Chapter 25 भारत के महान शिक्षाविद
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पाठ का सारांश
पंडित मदनमोहन मालवीयः पंडित मदनमोहन मालवीय का जन्म 26 दिसंबर, 1861 को इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता ब्रजनाथ मालवीय ने उनकी शुरुआती शिक्षा 'धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला' में कराई। अपने गुरु देवकीनन्दन से प्रेरणा लेकर मालवीय जी एक बहुत अच्छे वक्ता बने। उन्होंने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई पूरी की और फिर सरकारी हाईस्कूल में शिक्षक के तौर पर काम किया। अपनी बोलने और पढ़ाने की अच्छी शैली के कारण वे बहुत मशहूर शिक्षक बन गए।
मालवीय जी में बचपन से ही दूसरों की मदद करने और देश के लिए कुछ करने की भावना थी। वे धर्म के नाम पर कट्टरता और भेदभाव के सख्त खिलाफ थे। 1902 में वे उत्तर प्रदेश के असेंबली चुनाव में चुने गए। वे 1910 से 1920 तक सदस्य रहे। 1931 में लंदन में हुई दूसरी गोलमेज कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और सांप्रदायिकता का विरोध किया। मालवीय जी ने निरक्षरता दूर करने और शिक्षा फैलाने के लिए बहुत प्रयास किए। वे लड़कियों की शिक्षा के बहुत बड़े समर्थक थे। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय बनाने के लिए देशवासियों से पैसे मांगे। काशी नरेश ने इसके लिए पर्याप्त धन और जमीन दी। उनकी ईमानदारी, लगन और कड़ी मेहनत की वजह से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना 1918 में हुई। इसमें इतने सारे विषय पढ़ाए जाते थे कि शायद ही कहीं और इतने विषय एक साथ मिलते हों। मालवीय जी राष्ट्रभाषा हिंदी के भी बहुत बड़े समर्थक थे। 1946 में उनका निधन हो गया। उनका नाम और काम आज भी भारतीयों के मन में जिंदा है।
सर सैयद अहमद खाँ: सर सैयद अहमद खाँ का जन्म 17 अक्टूबर, 1817 को दिल्ली के एक अमीर परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मीर मुक्तकी और माता का नाम अजीजुन्निसा बेगम था। उन्होंने अरबी, फारसी, हिंदी, अंग्रेजी के कई विद्वानों से पढ़ाई की थी। उन्होंने पहले मुगल दरबार में नौकरी की और फिर अंग्रेजों के लिए काम करने लगे। कई पदों पर काम करने के बाद 1876 में बनारस के स्मॉल कॉज कोर्ट के जज पद से रिटायर हुए। अंग्रेजों ने उन्हें 'सर' की उपाधि दी। अहमद साहब बहुत कम खर्च करने वाले थे। उन्होंने 'असबाबे बगावत-ए-हिंद' नाम की एक किताब लिखी। उनकी सोच यह थी कि 1857 के विद्रोह का मुख्य कारण यह था कि भारतीयों को कानून बनाने की प्रक्रिया से दूर रखा गया था। उन्होंने भारतीय मुस्लिम समाज को सही रास्ता दिखाया। वे मुस्लिमों में जागरूकता लाना चाहते थे। उन्होंने 'तहजीबुल एखलाक' नाम की पत्रिका निकाली। उनके अनुसार, धर्म के साथ-साथ आधुनिक विषयों और विज्ञान का ज्ञान भी जरूरी है। उनके मुताबिक, शिक्षा का मकसद छात्र की सोचने की शक्ति को बढ़ाना और उसके व्यक्तित्व को बेहतर बनाना है। शिक्षा के विकास के लिए उन्होंने कई संस्थाएँ खोलीं। इनमें मुरादाबाद का फारसी मदरसा और गाजीपुर व अलीगढ़ की साइंटिफिक सोसाइटी खास थीं। उन्होंने मोहम्मडन एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस की भी स्थापना की। उन्होंने लोगों से चंदा इकट्ठा करके 1875 में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज, अलीगढ़ की स्थापना की, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से मशहूर हुआ। यह उनकी एक बहुत बड़ी देन है। खुले विचारों, वैज्ञानिक सोच और सांप्रदायिक सद्भाव के कारण सर सैयद अहमद खाँ का हर जगह सम्मान होता था। 25 मार्च, 1898 को उनका निधन हो गया।
अभ्यास-प्रश्न
Question 1. मालवीय जी की आरम्भिक शिक्षा कहाँ हुई?
Answer: मालवीय जी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई प्रयाग की 'धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला' में की थी। इस पाठशाला में उन्हें धर्म और ज्ञान दोनों सिखाए गए थे, जिससे उनके व्यक्तित्व की नींव पड़ी।
In simple words: उनकी पहली शिक्षा प्रयाग में 'धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला' नाम के स्कूल में हुई थी।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में स्थान का नाम और पाठशाला का नाम सही से लिखें ताकि पूरा अंक मिले।
Question 2. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में मालवीय जी ने किस बात का विरोध किया?
Answer: द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में मालवीय जी ने सांप्रदायिकता का खुलकर विरोध किया था। वे सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे।
In simple words: मालवीय जी ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में धार्मिक भेदभाव का विरोध किया था।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी राष्ट्रीय नेता के योगदान के बारे में पूछा जाए, तो उनके विचारों और कार्यों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 3. मालवीय जी ने शिक्षा के प्रसार के लिए क्या किया?
Answer: मालवीय जी ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारे प्रयास किए। वे महिलाओं की शिक्षा के बड़े समर्थक थे और मानते थे कि शिक्षा से ही देश आगे बढ़ सकता है। उन्होंने लोगों से चंदा और धन इकट्ठा करके 1918 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। इस विश्वविद्यालय में कई विषयों की पढ़ाई की व्यवस्था की गई थी।
In simple words: उन्होंने शिक्षा को फैलाने के लिए बहुत मेहनत की। उन्होंने लड़कियों की पढ़ाई का समर्थन किया और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय बनवाया।
🎯 Exam Tip: किसी भी नेता के योगदान का वर्णन करते समय, उनके प्रमुख कार्यों और संस्थाओं का उल्लेख करना महत्वपूर्ण होता है।
Question 4. सर सैयद अहमद खाँ के अनुसार 1857 ई० के विद्रोह का कारण क्या था?
Answer: सर सैयद अहमद खाँ के अनुसार 1857 के विद्रोह का मुख्य कारण यह था कि भारतीयों को कानून बनाने की प्रक्रिया से दूर रखा गया था। उनका मानना था कि अगर भारतीयों को फैसले लेने में शामिल किया जाता तो यह विद्रोह टाला जा सकता था।
In simple words: सर सैयद अहमद खाँ का मानना था कि 1857 के विद्रोह का कारण भारतीयों को कानून बनाने से अलग रखना था।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं के कारणों का वर्णन करते समय, प्रमुख व्यक्तियों के विचारों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 5. मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए सर सैयद अहमद खाँ ने कौन-कौन से कार्य किए?
Answer: मुस्लिम समाज को ऊपर उठाने के लिए सर सैयद अहमद खाँ ने बहुत काम किए। उन्होंने मुस्लिमों में जागरूकता लाने के लिए 'तहजीबुल एखलाक' नाम की एक पत्रिका निकाली। उनका कहना था कि धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक विषयों और विज्ञान की जानकारी भी बहुत ज़रूरी है। यह सोच समाज में नई दिशा लेकर आई।
In simple words: उन्होंने मुस्लिमों में जागरूकता बढ़ाने के लिए 'तहजीबुल एखलाक' पत्रिका निकाली और आधुनिक शिक्षा का समर्थन किया।
🎯 Exam Tip: समाज सुधारकों के कार्यों का वर्णन करते समय, उनके द्वारा शुरू की गई पत्रिकाओं और उनके मुख्य विचारों का उल्लेख करें।
Question 6. शिक्षा के उत्थान में सर सैयद अहमद खाँ का क्या योगदान है?
Answer: शिक्षा को बढ़ावा देने में सर सैयद अहमद खाँ का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने इस काम के लिए कई संस्थाएँ खोलीं, जिनमें मुरादाबाद का फारसी मदरसा और गाजीपुर व अलीगढ़ की साइंटिफिक सोसाइटी प्रमुख हैं। उन्होंने लोगों से चंदा इकट्ठा करके मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना। यह शिक्षा के क्षेत्र में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान था।
In simple words: उन्होंने शिक्षा के लिए कई संस्थाएँ खोलीं और मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के योगदान को बताते समय, उनके द्वारा स्थापित प्रमुख संस्थाओं और उनके प्रभाव पर ध्यान दें।
Question 7. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)
(क) शिक्षक देवकीनन्दन की मालवीय के व्यक्तित्व को निखारने में प्रमुख भूमिका रही ।
(ख) मालवीय जी का मानना था कि देशभक्ति धर्म का ही एक अंग है।
(ग) सैयद अहमद खाँ समझते थे कि समाज तब सुधर सकता है, जब शिक्षा के क्षेत्र में नया दृष्टिकोण अपनाया जाए।
(घ) सैयद अहमद खाँ की भारत को सबसे बड़ी देन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय है।
Answer:
(क) शिक्षक देवकीनन्दन की मालवीय के व्यक्तित्व को निखारने में प्रमुख भूमिका रही ।
(ख) मालवीय जी का मानना था कि देशभक्ति धर्म का ही एक अंग है।
(ग) सैयद अहमद खाँ समझते थे कि समाज तब सुधर सकता है, जब शिक्षा के क्षेत्र में नया दृष्टिकोण अपनाया जाए।
(घ) सैयद अहमद खाँ की भारत को सबसे बड़ी देन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय है।
In simple words: खाली जगहों को सही शब्दों से भरें ताकि वाक्य पूरे और सही अर्थ वाले बन सकें। हर वाक्य में एक महत्वपूर्ण जानकारी छिपी है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, पूरे वाक्य को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि भरा गया शब्द वाक्य के अर्थ को पूरी तरह से फिट करता है।
योग्यता विस्तारः
नोट- छात्रों को अपने शिक्षक या शिक्षिका की मदद से इन गतिविधियों को स्वयं पूरा करना चाहिए। यह उन्हें विषय को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
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UP Board Solutions for Class 7 Hindi Chapter 25 भारत के महान शिक्षाविद
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