UP Board Solutions Class 7 Hindi Chapter 21 Bharat Ratna Mahamana Madan Mohan Malaviya

Official UP Board Solutions for Class 7 Hindi: Chapter 21 भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय

Review structured textbook solutions for Class 7 Hindi Chapter 21 भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय. Built according to UP Board guidelines for the 2026 27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.

Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 21 भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय

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महत्वपूर्ण पद्यांश की व्याख्या

महामना मदन मोहन मालवीय

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'भारतरत्न महामना मदन मोहन मालवीय' नामक पाठ से लिया गया है।

व्याख्या: प्रस्तुत पद्यांश में मालवीय जी के हिन्दुत्व के प्रति जो विचार थे, उनकी विवेचना की गई है। मालवीय जी हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति के सच्चे अनुयायी थे। वे भारत की सभी समस्याओं का समाधान हिंदू धर्म का पुनरुत्थान मानते थे। उनका मानना था कि हिन्दू धर्म ही वह धर्म है जो विश्व-बंधुत्व की भावना को पुष्ट कर सकता है। वो चाहते थे कि संपूर्ण विश्व में भाईचारा स्थापित हो। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन अपने इसी स्वप्न को पूरा करने में समर्पित कर दिया और इसके लिए कई संस्था व संगठनों का भी निर्माण किया।

पाठ का सम्र (सारांश)

महामना मदन मोहन मालवीय का जन्म ऐसे समय में हुआ था, जब भारत नवजागरण के साथ-साथ स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए संघर्ष कर रहा था। महामना मदन मोहन मालवीय ने भारतीय स्वतंत्रता की ऐसी नींव रखी जिसके परिणाम स्वरूप 15 अगस्त 1947 को हमारा देश स्वतंत्र हुआ। महामना मदन मोहन मालवीय भारतीय स्वाधीनता संघर्ष के नायक और साक्षी थे। इनका जन्म 25 दिसम्बर, 1861 को प्रयाग में हुआ था। उनके पिता पण्डित ब्रजनाथ चतुर्वेदी और माता श्रीमती मूनादेवी थी। मालवीय जी के पूर्वज 15वीं शताब्दी में मालवा प्रदेश से आकर प्रयाग में बस गये थे और स्थानवाची (मल्लई) अथवा 'चौबे' उपनाम से जाने गये। मल्लई शब्द को पं० मदन मोहन ने मालवीय बनाया। तब से सारे मल्लई मालवीय कहे जाने लगे। मालवीय ने म्योर सेण्ट्रल कालेज से बी०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। महामना मदन मोहन मालवीय जी वैदिक (हिन्दू) धर्म और संस्कृति के सच्चे अनुयायी थे। उनका दृष्टिकोण था कि हिन्दू धर्म के दर्शन द्वारा ही विश्वबन्धुत्व के भाव को जाग्रत किया जा सकता है। अपने इस दिवास्वप्न को पूर्ण करने के लिए उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। मालवीय जी ने गंगा के अविरल प्रवाह के लिए 1914 में हरिद्वार में तथा 1924 में प्रयाग में सत्याग्रह किया। मालवीय जी छुआ-छूत, अस्पृश्यता के घोर विरोधी थे। वे इसे कलंक और राष्ट्रीय विकास के मार्ग में बाधा मानते थे। वे नारी शिक्षा व सशक्तिकरण के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने जनता से अनुरोध किया कि वे उन सब सामाजिक कुरीतियों को दूर करें जो स्त्री जाति की उन्नति में बाधक हैं। वे बाल विवाह के घोर विरोधी थे। पण्डित मदन मोहन मालवीय ने गौ-रक्षा आन्दोलन भी चलाए। महामना मदन मोहन मालवीय एक राजनीतिज्ञ से अधिक शिक्षाशास्त्री थे। उन्होंने ही काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। मालवीय जी का सपना था कि सभी स्तर पर शिक्षा का ऐसा प्रबन्ध हो कि कोई भी बच्चा गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित न रह पाये। महामना मालवीय जी ने भारतीय राजनीति, शिक्षा, साहित्य एवं पत्रकारिता में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने अनेक छोटी-छोटी संस्थाओं जैसे- हिन्दू छात्रवास, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, भारती भवन पुस्तकालय आदि को खड़ा किया। राष्ट्र निर्माण में इन संस्थाओं की भूमिका मील का पत्थर है। मालवीय जी ने अधययन-अध्यापन के साथ-साथ कई समाचार-पत्रों का संपादन किया तथा तत्कालीन ब्रिटिश शासन की नीतियों का प्रबल विरोध किया। मालवीय जी का निधन 12 नवम्बर, 1946 को हुआ। विलक्षण प्रतिभा के धनी राष्ट्र नायक मालवीय जी को भारत सरकार द्वारा 30 मार्च, 2015 को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया।

प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को

 

प्रश्न 1: नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।
Answer: यह प्रश्न छात्रों के स्वयं करने के लिए है। विद्यार्थी अपने विचार और अनुभव के आधार पर इसका उत्तर दें।
In simple words: यह सवाल आपको खुद करना है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में अपनी रचनात्मकता और समझ का प्रयोग करें और शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।

 

प्रश्न 2: मालवीय जी ने अनेक समाचार-पत्रों का संपादन किया। पता लगाइए कि वे समाचार पत्र कौन-कौन से थे?
Answer: महामना मदन मोहन मालवीय जी ने 'हिन्दोस्थान', 'अभ्युदय', 'लीडर', 'भारत', 'मर्यादा', 'हिन्दुस्तान टाइम्स', 'इण्डियन ओपीनियन' तथा 'सनातन धर्म' नामक समाचार-पत्रों का संपादन किया था। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से जन-जागरण का महत्वपूर्ण कार्य किया।
In simple words: मालवीय जी ने कई अखबार चलाए, जैसे 'हिन्दोस्थान', 'अभ्युदय', 'लीडर', 'भारत', 'मर्यादा', 'हिन्दुस्तान टाइम्स', 'इण्डियन ओपीनियन' और 'सनातन धर्म'।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं और उनके द्वारा संपादित समाचार-पत्रों के नाम याद रखना इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 3: नोट- विद्यार्थी स्वयं करें
Answer: यह प्रश्न छात्रों के स्वयं करने के लिए है। विद्यार्थी अपने विचार और अनुभव के आधार पर इसका उत्तर दें।
In simple words: यह सवाल आपको खुद करना है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में अपनी रचनात्मकता और समझ का प्रयोग करें और शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।

विचार और कल्पना

 

प्रश्न 1: मालवीय जी ने तत्कालीन समाज की समस्याओं पर आवाज उठाई। आपके विचार से तत्कालीन समाज में क्या-क्या समस्याएँ रही होंगी जिन पर उन्होंने आवाज उठायी ?
Answer: मालवीय जी ने तत्कालीन समाज की कई समस्याओं पर आवाज उठाई थी। उस समय की सबसे बड़ी समस्या ब्रिटिश शासन था, जिसका उन्होंने पुरजोर विरोध किया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता की नींव रखकर देश को 15 अगस्त, 1947 को आजाद होने में मदद की। उस समय समाज में और भी कई दिक्कतें थीं, जैसे छुआ-छूत, अस्पृश्यता, स्त्रियों की कमजोर हालत, अशिक्षा और बाल-विवाह। उन्होंने धार्मिक किताबों के उदाहरण देकर छुआ-छूत को बुरा बताया और कहा कि यह राष्ट्रीय विकास में रुकावट है। वे चाहते थे कि स्त्रियां मजबूत बनें और उन्होंने जनता से कहा कि वे उन सभी पुरानी रीतियों को छोड़ दें जो स्त्रियों की तरक्की में बाधा बनती हैं। वे बाल-विवाह के खिलाफ थे और स्त्री-शिक्षा को बढ़ावा देते थे। उस समय शिक्षा की बहुत कमी थी, इसलिए उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। उन्होंने हिंदू धर्म को मजबूत करने के लिए भी बहुत काम किए। ये सभी प्रयास देश को प्रगति की राह पर ले जाने में सहायक सिद्ध हुए।
In simple words: मालवीय जी ने ब्रिटिश राज, छुआ-छूत, और बाल-विवाह जैसी कई समस्याओं पर आवाज उठाई थी। उन्होंने स्त्रियों की शिक्षा और हिंदू धर्म को मजबूत करने के लिए बहुत काम किए, जिससे समाज में सुधार आया।

🎯 Exam Tip: किसी भी सामाजिक समस्या के बारे में लिखते समय, समस्या को पहचानें, उसके कारणों और उसके समाधान के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 2: भारतीय संस्कृति में गाय को माता कहा गया है। इस संबंध में अपने विचार व्यक्त कीजिए ।
Answer: भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, और मेरे विचार से यह बिल्कुल सही है। जिस प्रकार हमारी जन्म देने वाली माँ हमें दूध पिलाकर बड़े होने तक पालती है, उसी तरह गाय भी हमें जीवनभर दूध देती है, जिसका हम और उसके उत्पादों का उपयोग करते हैं। गाय का दूध शुद्ध, मीठा, स्वास्थ्य के लिए अच्छा और कई बीमारियों से लड़ने में मददगार होता है। गाय हमारे लिए केवल दूध का स्रोत नहीं, बल्कि एक पूजनीय पशु है, जो हमारी संस्कृति में पोषण और मातृत्व का प्रतीक है।
In simple words: हमारी संस्कृति में गाय को माँ कहा गया है क्योंकि वह हमें दूध देती है और हमारे जीवनभर पोषण करती है, ठीक वैसे ही जैसे माँ अपने बच्चों को पालती है। गाय का दूध हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में अपने विचारों को व्यक्त करते समय, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दोनों पहलुओं को संतुलित ढंग से प्रस्तुत करें।

 

प्रश्न 3: मालवीय जी ने सभी के लिए शिक्षा की बात कही थी। आज सरकार ने शिक्षा के अधिकार के तहत इसे पूरे देश में लागू कर दिया। कल्पना कीजिए कि जब यह व्यवस्था नहीं रही होगी तो शिक्षा प्राप्त करने में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ होती होंगी ? लिखिए ।
Answer: जब देश में सबके लिए शिक्षा की सुविधा नहीं थी, तब ज्यादातर गरीब बच्चे पढ़ाई से वंचित रह जाते थे। लड़कियों को भी पढ़ने का मौका नहीं मिलता था और वे भी अनपढ़ रह जाती थीं। गरीब समाज के लोगों को शिक्षा पाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता था। स्कूल बहुत दूर होते थे और रोज समय पर पहुंचना मुश्किल होता था। साथ ही, उस समय आने-जाने के साधन भी इतने अच्छे नहीं थे, जिससे बच्चों को पढ़ाई करने में कई दिक्कतें आती थीं। यह स्थिति बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती थी, क्योंकि शिक्षा के बिना वे विकास नहीं कर पाते थे।
In simple words: जब शिक्षा सभी के लिए नहीं थी, तब गरीब और लड़कियां अक्सर पढ़ नहीं पाती थीं। स्कूल दूर होते थे और आने-जाने में परेशानी होती थी, जिससे पढ़ना बहुत मुश्किल था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित कल्पनात्मक प्रश्नों में, उस समय की सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों का ध्यान रखें।

 

प्रश्न 4: मालवीय जी चाहते थे कि गंगा की धारा को कहीं रोका न जाय क्योंकि गंगा केवल नदी नहीं बल्कि संस्कृति की धारा है। आज गंगा प्रदूषण की शिकार हो गयी है। सोचिए जिस दिन गंगा नहीं रहेगी उस दिन क्या होगा ? इस सम्बंध में अपने विचार व्यक्त कीजिए ।
Answer: जिस दिन गंगा नदी नहीं रहेगी, वह दिन गंगा में आस्था रखने वाले लोगों के लिए एक बड़े संकट जैसा होगा। गंगा हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; यदि गंगा नहीं होगी, तो हमारी संस्कृति भी अधूरी लगेगी। हिंदू धर्म पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। उत्तर भारत के लोगों के जीवन पर इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा। सारी अर्थव्यवस्था बिगड़ जाएगी, उद्योग खत्म हो जाएंगे, और खेती पर भी बुरा असर पड़ेगा। गंगा का न होना उत्तर भारत के पतन का कारण बन सकता है। ऐसे में गंगा के बिना जीवन की कल्पना करना भी भयानक है क्योंकि यह लाखों लोगों की आस्था, आजीविका और जलस्रोत का आधार है।
In simple words: अगर गंगा नहीं रही, तो यह आस्थावान लोगों के लिए बड़ी आपदा होगी। हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और उत्तर भारत का जनजीवन बहुत बुरी तरह प्रभावित होगा।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण और संस्कृति से जुड़े प्रश्नों में, उसके महत्व और उसके न होने पर पड़ने वाले गंभीर परिणामों को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

प्रश्न 5: आपके विचार में वर्तमान समाज की क्या-क्या समस्याएँ हैं? उनके क्या समाधान हो सकते हैं?
Answer: वर्तमान समाज की सबसे बड़ी समस्या बढ़ती जनसंख्या है। इसके अलावा गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी भी प्रमुख समस्याएं हैं। भ्रष्टाचार, खराब राजनीति, साम्प्रदायिकता और पर्यावरण प्रदूषण जैसी कई गंभीर समस्याएँ हैं। ये सभी हमारे भारतीय समाज को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। इन समस्याओं का पहला समाधान जनसंख्या नियंत्रण है। शिक्षा को सभी के लिए आसान और सुलभ बनाना, रोजगार के सही अवसर पैदा करना, भ्रष्टाचार पर कड़ाई से रोक लगाना और प्रदूषण कम करने के लिए सभी नागरिकों को जागरूक होकर नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है। इन उपायों से समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।
In simple words: आज समाज की मुख्य समस्याएँ बढ़ती जनसंख्या, गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार और प्रदूषण हैं। इन्हें रोकने के लिए जनसंख्या नियंत्रण, सबको शिक्षा, रोजगार और नियमों का पालन जरूरी है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक समस्याओं और उनके समाधानों पर लिखते समय, स्पष्ट और व्यवहारिक सुझाव दें, जो समाज के लिए सकारात्मक हों।

जीवनी से

 

प्रश्न 1: महामना मदन मोहन मालवीय का जन्म कब और कहाँ हुआ था? इनके माता पिता का क्या नाम था?
Answer: महामना मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसम्बर, 1861 को प्रयाग में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित ब्रजनाथ चतुर्वेदी और माता का नाम श्रीमती मूना देवी था। उनका बचपन धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल में बीता।
In simple words: मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसम्बर, 1861 को प्रयाग में हुआ। उनके पिता पंडित ब्रजनाथ चतुर्वेदी और माता श्रीमती मूना देवी थीं।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण व्यक्तियों की जीवनी संबंधी प्रश्नों में, जन्म तिथि, स्थान और माता-पिता के नाम जैसी सटीक जानकारी दें।

 

प्रश्न 2: मदन मोहन और उनके वंशज मालवीय क्यों कहे गये?
Answer: मालवीय जी के पूर्वज 15वीं शताब्दी में मालवा प्रदेश से आकर प्रयाग में बस गए थे। वे 'स्थानवाची' (मल्लई) या 'चौबे' उपनाम से जाने जाते थे। 'मल्लई' शब्द को पंडित मदन मोहन ने 'मालवीय' बना दिया, और तब से उनके सभी वंशज 'मालवीय' कहलाने लगे। यह उपनाम उनके परिवार के मूल निवास स्थान से जुड़ा हुआ था।
In simple words: मालवीय जी के पूर्वज मालवा से प्रयाग आकर बस गए थे। 'मल्लई' शब्द को मदन मोहन ने 'मालवीय' में बदला, और तभी से उनके परिवार के लोग मालवीय कहलाने लगे।

🎯 Exam Tip: नामों की उत्पत्ति या परिवर्तन से जुड़े प्रश्नों में, मूल शब्द और उसके रूपांतरण को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 3: मालवीय जी के जन्म के समय भारत की स्थिति कैसी थी?
Answer: महामना मदन मोहन मालवीय का जन्म ऐसे समय में हुआ था, जब भारत में नए विचारों का उदय हो रहा था और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष चल रहा था। उस समय भारत बौद्धिक और वैचारिक रूप से जाग रहा था। कई समाज सुधारक और विचारक भारत को उसकी मूल राष्ट्रीय और आध्यात्मिक पहचान की ओर वापस लाने का प्रयास कर रहे थे। यह एक परिवर्तनकारी दौर था, जब देश अपनी पहचान और भविष्य के लिए लड़ रहा था।
In simple words: मालवीय जी के जन्म के समय भारत में नए विचारों का उदय हो रहा था और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष चल रहा था। कई लोग भारत को उसकी पुरानी पहचान दिलाने की कोशिश कर रहे थे।

🎯 Exam Tip: किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के समय की स्थिति का वर्णन करते समय, तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक माहौल का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 4: महामना ने तत्कालीन भारत में समस्याओं के समाधान का विकल्प किसे माना है। और क्यों?
Answer: महामना ने तत्कालीन भारत में समस्याओं के समाधान का विकल्प हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान को माना था। उनका मानना था कि हिन्दू धर्म एक सनातन (शाश्वत) धर्म है। मालवीय जी इस धर्म और संस्कृति के सच्चे अनुयायी थे। उन्हें विश्वास था कि हिन्दू धर्म के सिद्धांतों में सभी समस्याओं का समाधान निहित है।
In simple words: महामना ने समस्याओं का हल हिंदू धर्म को फिर से जगाने में देखा, क्योंकि उन्हें लगता था कि हिंदू धर्म एक पुराना और सच्चा धर्म है और वे इसके समर्थक थे।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति की विचारधारा या समाधान के पीछे के तर्क को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

प्रश्न 5: महामना मालवीय का दिवास्वप्न क्या था?
Answer: महामना मालवीय जी का दिवास्वप्न था कि हिन्दू धर्म के सिद्धांतों के द्वारा पूरी दुनिया में भाईचारे और एकता की भावना को जगाया जाए। वे चाहते थे कि हिन्दू धर्म की शिक्षाएं सभी को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम सिखाएं।
In simple words: मालवीय जी का सपना था कि हिंदू धर्म के दर्शन के जरिए पूरी दुनिया में भाईचारा और प्रेम फैले।

🎯 Exam Tip: 'दिवास्वप्न' या बड़े सपनों का वर्णन करते समय, उसके मुख्य लक्ष्य और उससे जुड़ी भावनाओं को व्यक्त करें।

 

प्रश्न 6: उन्होंने तत्कालीन समाज में फैली किन-किन समस्याओं पर कुठाराघात किया?
Answer: मालवीय जी ने तत्कालीन समाज में फैली कई समस्याओं पर कड़ा प्रहार किया था। इनमें छुआ-छूत, अस्पृश्यता (भेदभाव), बाल-विवाह और स्त्रियों को अशिक्षित तथा कमजोर बनाए रखने जैसी बुरी प्रथाएं शामिल थीं। उन्होंने इन प्रथाओं को समाज के लिए हानिकारक बताया।
In simple words: मालवीय जी ने छुआ-छूत, अस्पृश्यता, बाल-विवाह और स्त्रियों की अशिक्षा जैसी समाज की पुरानी और बुरी बातों का विरोध किया।

🎯 Exam Tip: सामाजिक सुधारों से संबंधित प्रश्नों में, उन विशिष्ट समस्याओं का उल्लेख करें जिन पर सुधारक ने काम किया।

 

प्रश्न 7: स्त्रियों के प्रति मालवीय जी का क्या दृष्टिकोण था?
Answer: स्त्रियों के प्रति मालवीय जी का दृष्टिकोण बहुत ही प्रगतिशील था। उन्होंने कहा था कि वे चाहते हैं कि हमारे देश की सभी स्त्रियाँ अंग्रेज महिलाओं की तरह पिस्तौल और बंदूक चलाना सीखें, ताकि वे किसी भी हमले से अपनी रक्षा कर सकें। उन्होंने जनता से अनुरोध किया कि वे उन सभी सामाजिक कुरीतियों को दूर करें जो स्त्री जाति की उन्नति में बाधा डालती हैं। वे बाल विवाह के घोर विरोधी थे और उन्होंने सामाजिक प्रगति के लिए स्त्री शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि शिक्षित स्त्रियां ही सशक्त समाज का निर्माण कर सकती हैं।
In simple words: मालवीय जी चाहते थे कि स्त्रियां आत्मरक्षा के लिए बंदूक चलाना सीखें। उन्होंने बाल-विवाह का विरोध किया और स्त्रियों की शिक्षा पर बहुत जोर दिया, ताकि वे मजबूत बन सकें।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के विचारों का वर्णन करते समय, उनके मुख्य बिंदुओं और उनके पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

 

प्रश्न 8: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे मालवीय जी की क्या सोच थी ?
Answer: महामना मदन मोहन मालवीय एक राजनीतिज्ञ से अधिक शिक्षाशास्त्री थे। उनका मानना था कि हमारी सभी समस्याओं की जड़ अशिक्षा है। वे शिक्षा को पुराने और नए मूल्यों के बीच एक सेतु के रूप में देखते थे। इन्हीं विचारों को ध्यान में रखकर मालवीय जी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। मालवीय जी का सपना था कि सभी स्तर पर शिक्षा का ऐसा प्रबंध हो कि कोई भी बच्चा गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित न रह पाए। वे चाहते थे कि यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम बने।
In simple words: मालवीय जी शिक्षा को हर समस्या का हल मानते थे। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की ताकि कोई भी गरीब बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्राचीन-आधुनिक ज्ञान का संगम हो।

🎯 Exam Tip: संस्थाओं की स्थापना के पीछे के उद्देश्यों को समझाते समय, संस्थापक के दृष्टिकोण और उस संस्था के सामाजिक महत्व पर जोर दें।

भाषा की बात

 

प्रश्न 1: पाठ में 'साथ-साथ' शब्द आया है जो पुनरुक्त शब्द है। इसी प्रकार दिये गये पुनरुक्त शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए अपना-अपना, धीरे-धीरे, छोटे-छोटे, हँसते-हँसते, पानी-पानी ।
Answer:
अपना-अपना - तुम सबको अपना-अपना कार्य स्वयं करना चाहिए। (हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।)
धीरे-धीरे - उन्हें अपने मकसद में कामयाबी धीरे-धीरे मिल ही गई। (सफलता अक्सर धैर्य और मेहनत से मिलती है।)
छोटे-छोटे - इन छोटे-छोटे कामों में सफलता पाकर ही तुम आगे बढ़ पाओगे। (बड़े लक्ष्य छोटे-छोटे कदमों से ही हासिल होते हैं।)
हँसते-हँसते - छोटे बच्चे के मुँह से इस तरह की बात सुनकर सब हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। (खुशी के पल अक्सर ऐसे ही हंसी-मजाक में बीतते हैं।)
पानी-पानी - चोरी करते हुए पकड़े जाने पर वह पानी-पानी हो गया। (शर्मिंदगी अक्सर व्यक्ति को शांत कर देती है।)
In simple words: पुनरुक्त शब्द वे होते हैं जो दोहराए जाते हैं, जैसे 'साथ-साथ'। इनसे वाक्य में जोर आता है।

🎯 Exam Tip: पुनरुक्त शब्दों का प्रयोग भाषा को अधिक प्रभावी और आकर्षक बनाता है। उनका सही प्रयोग वाक्य की सुंदरता बढ़ा देता है।

 

प्रश्न 2: नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।
Answer: यह प्रश्न छात्रों के स्वयं करने के लिए है। विद्यार्थी अपने विचार और अनुभव के आधार पर इसका उत्तर दें।
In simple words: यह सवाल आपको खुद करना है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में अपनी रचनात्मकता और समझ का प्रयोग करें और शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।

 

प्रश्न 3: निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए
जैसे- जो अनुकरण करने योग्य हो - अनुकरणीय
(क) युग का निर्माण करने वाला।
(ख) जो सबको समान भाव से देखता हो।
(ग) जहाँ पृथ्वी और आकाश मिलते प्रतीत हों।
(घ) जिसका कोई खण्ड न हो सके ।
Answer:
(क) युगनिर्माता
(ख) समद्रष्टा
(ग) क्षितिज
(घ) अखण्ड
In simple words: वाक्यांश के लिए एक शब्द का मतलब है कि कई शब्दों के बदले एक ही शब्द का प्रयोग करना। यह भाषा को छोटा और मजबूत बनाता है।

🎯 Exam Tip: वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखते समय, उस शब्द का चुनाव करें जो पूरे वाक्यांश के अर्थ को सबसे सटीक रूप से व्यक्त करता हो।

 

प्रश्न 4: इस पाठ को पढ़कर आपके मन में महामना मदन मोहन मालवीय के व्यक्तित्व की कुछ विशेषताएँ उभर रही होंगी। उन विशेषताओं को संक्षेप में लिखिए।
Answer: पंडित मदन मोहन मालवीय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नायक और प्रत्यक्षदर्शी थे। वे हिंदू धर्म और संस्कृति के सच्चे अनुयायी थे। वे पूरी दुनिया में भाईचारे (विश्वबंधुत्व) के भाव के सच्चे समर्थक थे। मालवीय जी छुआ-छूत और अस्पृश्यता के घोर विरोधी थे। वे स्त्रियों के प्रति बहुत उदार विचार रखते थे। उन्होंने समाज को फिर से बेहतर बनाने के लिए जिन बातों पर जोर दिया, उनमें गायों की रक्षा भी प्रमुख थी। महामना मदन मोहन मालवीय एक अच्छे राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक महान शिक्षाशास्त्री भी थे। वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक भी थे। मालवीय जी एक बहुत ही प्रतिभावान व्यक्ति थे। वे एक साथ उच्चकोटि के राजनीतिज्ञ, शिक्षाशास्त्री, साहित्यकार और पत्रकार थे। वे ब्रिटिश सरकार की नीतियों के भी प्रबल विरोधी थे। अपनी असाधारण प्रतिभा के कारण मालवीय जी को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से सम्मानित किया जा चुका है।
In simple words: मालवीय जी स्वतंत्रता सेनानी, हिंदू धर्म के अनुयायी, छुआ-छूत के विरोधी, स्त्री शिक्षा के समर्थक, राजनीतिज्ञ, शिक्षाशास्त्री और पत्रकार थे। वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक भी थे, और उन्हें भारतरत्न मिला।

🎯 Exam Tip: किसी व्यक्तित्व की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उनके विभिन्न पहलुओं (जैसे सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक) को बिंदुवार या संक्षेप में प्रस्तुत करें।

Step-by-Step Textbook Answers: Class 7 Hindi Chapter 21 भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय

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