Official UP Board Solutions for Class 7 Hindi: Chapter 16 क्या निराशा हुआ जाए
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Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 16 क्या निराशा हुआ जाए
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महत्त्वपूर्ण गद्यांश की व्याख्या
व्यक्ति-चित्त
संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठयपुस्तक 'मंजरी' के 'क्या निराश हुआ जाय' नामक निबन्ध से लिया गया है। यह निबन्ध हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखा गया है।
प्रसंग: भारतवर्ष में भौतिक संग्रह को महत्त्व न देकर आन्तरिक तत्त्व पर बल दिया गया है। लोभ-मोह, काम-क्रोध पर समय का बन्धन रखे जाने का महत्त्व माना गया है। फिर भी भूख व बीमारी की दवा और परोपकारी कार्यों की उपेक्षा नहीं की जा सकती ।
व्याख्या: मनुष्य हमेशा उच्च आदर्शों को आधार मानकर ही आगे नहीं बढ़ता । कुछ विकार जैसे लोभ, मोह विकसित होकर उसे लक्ष्य से डिगाते रहे हैं। उच्च आदर्श और संयम आदि नगण्य हो गए हैं। जो कुछ विपरीत हुआ है, उससे उच्च आदर्शों, संयम और विधानोक्त कर्मों की उपयोगिता अब और अधिक सामने आ गई है।
समाज के ऊपरी
संदर्भः पूर्ववत् ।
प्रसंग: आजकल लोग कानून की त्रुटियों से लाभ उठाने में संकोच नहीं करते। धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, जबकि कानून को दिया जा सकता है।
व्याख्या: अब यह आम धारणा बन गई है कि भारतवर्ष में धर्म, कानून से बड़ी चीज है। आस्तिकता, सत्य, ईमानदारी, मानव प्रेम आदि की मान्यता अब भी है और रहेगी। दूसरों को पीड़ा पहुँचाना, ठगी, चोरी, डकैती, तस्करी, आदि महापाप हैं। परहित, दरिद्र सेवा, नारी सम्मान और मानव प्रेम आज भी परम पुण्य माने जाते हैं। सभी व्यक्ति इन गुणों को अपने अन्दर अच्छा समझते हैं और नैतिक समर्थन देते हैं।
पाठ का सर (सारांश)
लेखक का मन वर्तमान की घटनाओं से आशंकित है। बेईमानी के माहौल में ईमानदारी से जीविका चलाने वाले पिस रहे हैं। ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है। ऐसी स्थिति में प्रश्न उठता है कि क्या निराश हुआ जाय । वस्तुतः मनुष्य की उन्नति के जितने विधान बनाए गए हैं, उतनी ही मात्रा में लोभ, मोह जैसे विकार भी विस्तृत हो गए। इससे भारत के पुराने आदर्श और भी अधिक महान और उपयोगी दिखाई देने लगे हैं। लेखक ने एक टिकट बाबू की ईमानदारी और एक बस कंडक्टर की कर्तव्यपरायणता का उदाहरण देकर सन्तोष व्यक्त किया है। उसने लिखा है कि जीवन में ऐसी घटनाएँ भी घटित हुईं, जब लोगों ने अकारण ही सहायता की। निराश मन को ढाँढस बंधाया और हिम्मत दिलाई। इसीलिए अभी भी आशा की ज्योति बुझी नहीं है। महान् भारतवर्ष को पाने की सम्भावना बनी हुई है। और बनी रहेगी ।
प्रश्न-अभ्यास
कुछ करने को
नोट-विद्यार्थी स्वयं करें ।
विचार और कल्पना
नोट-विद्यार्थी स्वयं करें ।
निबन्ध से
Question 1. क्या कारण है कि आजकल हर व्यक्ति संदेह की दृष्टि देखा जा रहा है?
Answer: आजकल लोग ज़्यादा दोषी और कम गुणी दिखते हैं। इसका कारण यह है कि लोग गुणों पर कम ध्यान देते हैं और दोषों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। इस वजह से हर कोई एक-दूसरे पर शक करने लगा है।
In simple words: लोग आजकल सिर्फ बुराइयां देखते हैं, इसलिए हर किसी पर शक किया जाता है।
🎯 Exam Tip: जब कारण पूछा जाए, तो सीधे मुख्य वजह बताएं और उसे छोटे वाक्यों में समझाएं।
Question 2. जीवन के महान मूल्यों के बारे में लोगों की आस्थाएँ क्यों हिलने लगी हैं?
Answer: आजकल अखबारों में ठगी, चोरी, डकैती, तस्करी और भ्रष्टाचार की खबरें भरी रहती हैं। आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा माहौल बन गया है कि लगता है, देश में अब कोई ईमानदार व्यक्ति बचा ही नहीं है। हर व्यक्ति को शक की नज़र से देखा जा रहा है। जो लोग बड़े पदों पर हैं, उनमें ज़्यादा गलतियां दिखाई जाती हैं। बेईमान और स्वार्थी लोग पनप रहे हैं, जबकि गरीब, ईमानदार और मेहनती लोग परेशान हो रहे हैं। समाज में जो डरपोक और लाचार लोग हैं, उन्हें दबाया जाता है। ईमानदारी को लोग मूर्खता समझने लगे हैं। जीवन के ज़रूरी नैतिक मूल्यों और आदर्शों का मज़ाक उड़ाया जा रहा है। इसी कारण जीवन के महान मूल्यों में लोगों का भरोसा कम हो रहा है।
In simple words: आजकल बहुत सारी गलत खबरें आती हैं, जिससे लोगों को लगता है कि ईमानदारी और अच्छे मूल्य खत्म हो गए हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के उत्तर में, समाज की वर्तमान स्थिति और नैतिक बदलावों का जिक्र करना ज़रूरी होता है।
Question 3. किन घटनाओं के आधार पर लेखक को लगा कि मनुष्यता अभी समाप्त नहीं हुई है?
Answer: लेखक को यह लगा कि मनुष्यता अभी खत्म नहीं हुई है क्योंकि उन्होंने एक टिकट बाबू की ईमानदारी और एक बस कंडक्टर की अपनी ड्यूटी के प्रति वफादारी की घटनाएँ देखीं। ये घटनाएँ उन्हें उम्मीद देती हैं।
In simple words: एक ईमानदार टिकट बाबू और एक मेहनती बस कंडक्टर की कहानियों से लेखक को लगा कि इंसानियत अभी भी ज़िंदा है।
🎯 Exam Tip: ऐसे सवालों में सीधे उन उदाहरणों का उल्लेख करें जो पाठ में दिए गए हैं।
Question 4. 'बुराई में रस लेना बुरी बात है, अच्छाई में उतना ही रस लेकर उजागर न करना और भी बुरी बात है ।' क्यों?
Answer: लेखक कहते हैं कि लोगों का एक-दूसरे की बुराई को बहुत मज़े से उजागर करना गलत है। लेकिन, इससे भी बुरा यह है कि जब कोई अच्छा काम होता है, तो उसे सामने लाने में लोग संकोच करते हैं। हमारे आस-पास ऐसी कई घटनाएँ होती हैं, जिन्हें अगर दिखाया जाए, तो लोगों के दिलों में अच्छाई के लिए अच्छी भावना जग सकती है। इसलिए हमें अच्छाई को दिखाने में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मकता बढ़े।
In simple words: दूसरों की बुराई को मजे लेकर बताना गलत है, लेकिन उनकी अच्छाई को न बताना और भी गलत है, क्योंकि इससे अच्छी बातें छिप जाती हैं।
🎯 Exam Tip: इस उद्धरण की व्याख्या करते समय, 'बुराई' और 'अच्छाई' दोनों पहलुओं को स्पष्ट करना और समाज पर उनके प्रभाव को समझाना ज़रूरी है।
Question 5. निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए
(क) ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है, सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है।
Answer: आज के समय में पैसे का महत्व बहुत बढ़ गया है। जो लोग बेईमानी से पैसा कमाते हैं, उन्हें समाज में सम्मान मिलता है। लोग चालाकी और बेईमानी से पैसे कमाने में लगे हैं। जो व्यक्ति ईमानदार रहता है, उसे समाज मूर्ख समझता है क्योंकि उसके पास पैसा कम होता है। सच्चाई का पालन करने वाले वे लोग हैं जो गलत काम करने से डरते हैं या जिनके पास गलत तरीके से पैसा कमाने का कोई और रास्ता नहीं है। यानी सच्चे और ईमानदार लोग अक्सर वही होते हैं जो कमज़ोर या असहाय महसूस करते हैं।
In simple words: आज लोग सोचते हैं कि ईमानदार होना बेवकूफी है, और केवल डरे हुए या लाचार लोग ही सच्चे रहते हैं।
🎯 Exam Tip: आशय स्पष्ट करते समय, मूल पंक्ति के हर हिस्से का मतलब समझाएं और उसके पीछे छिपे विचार को उजागर करें।
(ख) केवल उन्हीं बातों का हिसाब रखो, जिनमें धोखा खाया है तो जीवन कष्टकर हो। जाएगा।
Answer: अगर हम सिर्फ उन बातों पर ध्यान देंगे जिनमें हमें धोखा मिला है या हमें किसी तरह की परेशानी हुई है, तो हमारा जीवन बहुत मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में हम जीवन का आनंद नहीं ले पाएंगे और पिछली बुरी घटनाओं में ही उलझे रहेंगे। इसका मतलब है कि हमें सिर्फ बुरी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि जीवन की अच्छी घटनाओं से आशा रखनी चाहिए। हमेशा सकारात्मक पक्ष पर गौर करें।
In simple words: अगर हम सिर्फ बुरी बातें याद रखेंगे, तो जीवन दुखी हो जाएगा। हमें अच्छी बातों को भी याद रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: ऐसे वाक्यों के आशय में, नकारात्मक सोच के परिणामों और सकारात्मक सोच के फायदों को ज़रूर बताएं।
(ग) भूख की उपेक्षा नहीं की जा सकती, बीमार के लिए दवा की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
Answer: हमारे देश में भौतिक चीज़ों के संग्रह और लोभ-मोह-क्रोध जैसे विकारों को ज़रूरी नहीं माना गया है। लेकिन, अगर कोई व्यक्ति भूखा है, तो उसे अपने लिए खाना जुटाना ही पड़ेगा। इसी तरह, यदि कोई बीमार है, तो वह अपनी बीमारी को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता, उसे दवा हर हाल में चाहिए। ठीक इसी तरह, यदि समाज में या देश में कोई व्यक्ति गलत काम करे, कानून तोड़े या अपराध करे, तो उसे सुधारने के लिए दंड देना ही पड़ेगा, वरना वह दूसरों को दुख देता रहेगा। ये ज़रूरी ज़रूरतें हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
In simple words: भूख और बीमारी जैसी ज़रूरी चीज़ों को अनदेखा नहीं कर सकते। उनकी ज़रूरतें पूरी करना ही पड़ता है।
🎯 Exam Tip: इस पंक्ति के आशय को स्पष्ट करते हुए, शारीरिक ज़रूरतों के साथ-साथ सामाजिक या नैतिक ज़रूरतों को भी जोड़कर समझाएं।
(घ) महान भारतवर्ष के पाने की सम्भावना बनी हुई है, बनी रहेगी।
Answer: लेखक का यह कहना हमें यह संदेश देता है कि हमें सिर्फ कुछ बुराइयों को देखकर निराश नहीं होना चाहिए। इस देश में आज भी ईमानदार, कर्तव्यपरायण और अच्छे लोग मौजूद हैं। हमारा देश ज़रूर बुराइयों पर जीत हासिल कर लेगा। इसलिए, एक महान भारतवर्ष को पाने की पूरी संभावना अभी भी है, और हमेशा रहेगी। हमारा देश फिर से अपने गौरव को प्राप्त करेगा।
In simple words: लेखक कहते हैं कि हमें बुराइयों को देखकर निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि भारत फिर से महान बनने की उम्मीद अभी भी बाकी है।
🎯 Exam Tip: आशावादी दृष्टिकोण को दर्शाते हुए, इस पंक्ति के आशय में देश की अच्छाइयों और भविष्य की उम्मीद को स्पष्ट करें।
भाषा की बात
Question 1. नीचे कुछ अव्यय शब्द दिए गये हैं, उनकी प्रयोग करते हुए एक-एक वाक्य बनाइए
क्योंकि, किन्तु, परन्तु, अथवा, इसलिए, चूंकि, तथा, अतः
Answer:
क्योंकि: मैं यहाँ रुकना नहीं चाहती क्योंकि यहाँ मेरा मन नहीं लग रहा है।
किन्तु: वह गरीब था, किन्तु उसकी ईमानदारी में कोई कमी नहीं थी।
परन्तु: वह आपसे ही मिलने आया था परन्तु आप शहर से बाहर थे।
अथवा: तुम अंग्रेजी अथवा हिंदी में कोई एक भाषा चुन लो ।
इसलिए: बात नहीं मानती इसलिए मैंने उससे कुछ कहना ही छोड़ दिया है।
चूंकि: चूंकि तुम एक मंत्री के बेटे हो, इसलिए तुम किसी पर भी अपनी मर्जी थोप सकते हो?
तथा: ईमानदारी, सच्चाई, कर्तव्यनिष्ठा, स्वाभिमान, साहस तथा आत्मनिर्भरता वीर पुरुषों के गुण हैं।
अतः: वह आपसे मिलना नहीं चाहता अतः आप यहाँ से चले जाएँ।
In simple words: यहां दिए गए अव्यय शब्दों का उपयोग करके वाक्य बनाए गए हैं, जो दो वाक्यों या हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: अव्यय शब्दों का प्रयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि वाक्य का अर्थ स्पष्ट हो और शब्द का प्रयोग सही संदर्भ में हो।
Question 2. ईमानदार' तथा 'मूर्ख' शब्द गुणवाचक विशेषण हैं, इनमें क्रमशः 'ई' तथा 'ता' प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा शब्द 'ईमानदारी' तथा 'मूर्खता' बनाया गया है। नीचे लिखे गये विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए- निर्भीक, जिम्मेदार, कायर, अच्छा, लघु, बुरा ।
Answer:
| शब्द | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|
| निर्भीक | निर्भीकता |
| जिम्मेदार | जिम्मेदारी |
| कायर | कायरता |
| अच्छा | अच्छाई |
| लघु | लघुता |
| बुरा | बुराई |
🎯 Exam Tip: प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाते समय, ध्यान दें कि कौन सा प्रत्यय (जैसे 'ता', 'त्व', 'पन', 'आई', 'ई') शब्द के साथ सही बैठेगा और उसका अर्थ न बदले।
Question 3. इस पाठ में सरल, मिश्र और संयुक्त तीनों प्रकार के वाक्य आये हैं। नीचे दिये गये वाक्यों को पढ़िए और बताइए कि वे किस प्रकार के वाक्य हैं
Answer:
| वाक्य | वाक्य का प्रकार |
|---|---|
| (क) उसके सारे गुण भुला दिये जायेंगे और दोषों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाने लगेगा। | संयुक्त वाक्य |
| (ख) एक बार मैं बस में यात्रा कर रहा था। | सरल वाक्य |
| (ग) इस समय सुखी वही है जो कुछ नहीं करता। | मिश्रित वाक्य |
| (घ) यह सही है कि इन दिनों कुछ ऐसा माहौल बना है कि ईमानदारी से मेहनत करके जीविका चलाने वाले निरीह और भोले-भाले श्रमजीवी पिस रहे हैं और झूठ तथा फरेब का रोजगार करने वाले फल-फूल रहे हैं। | मिश्रित वाक्य |
🎯 Exam Tip: वाक्य के प्रकार पहचानने के लिए, ध्यान दें कि क्या उसमें एक ही मुख्य क्रिया है (सरल), दो स्वतंत्र वाक्य किसी संयोजक से जुड़े हैं (संयुक्त), या एक मुख्य वाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हैं (मिश्रित)।
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