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Step-by-Step UP Board Solutions: Class 7 Geography Chapter 1 पृथ्वी की आंतरिक संरचना
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Class 7 Geography Chapter 1 पृथ्वी की आंतरिक संरचना UP Board Solutions PDF
सोचकर लिखिए -
Question 1. चर्चा कीजिए, अगर पृथ्वी ठण्डी न होती तो क्या होता?
Answer: अगर पृथ्वी ठण्डी नहीं होती, तो धरती पर जीवन संभव नहीं होता। अत्यधिक उच्च तापमान के कारण कोई भी जीव या पौधा जीवित नहीं रह पाता। पृथ्वी का ठंडा होना ही हमें यहाँ रहने की अनुमति देता है, जिससे पानी तरल रूप में रह पाता है और जीवन के लिए आवश्यक वातावरण बन पाता है।
In simple words: अगर पृथ्वी ठंडी नहीं होती, तो कोई भी जीव इस पर नहीं रह पाता क्योंकि तापमान बहुत ज़्यादा होता।
🎯 Exam Tip: इस तरह के काल्पनिक प्रश्नों में हमेशा तर्कसंगत और वैज्ञानिक कारण दें, विशेषकर तापमान और जीवन की अनुकूलता पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. सोचिए, चट्टानें सबसे पहले कैसे बनी होंगी?
Answer: शुरुआत में, चट्टानें तब बनी होंगी जब ज्वालामुखी से बाहर निकले गर्म तत्व और पिघले हुए पदार्थ (मैग्मा) ठंडे होकर जम गए होंगे। यही प्रक्रिया आग्नेय चट्टानों के निर्माण का आधार है। इन प्राथमिक चट्टानों से ही बाद में अन्य प्रकार की चट्टानें बनीं।
In simple words: सबसे पहले, चट्टानें ज्वालामुखी से निकले गर्म पिघले पदार्थों के ठंडा होने और जमने से बनी होंगी।
🎯 Exam Tip: आग्नेय चट्टानों को पृथ्वी की प्राथमिक चट्टानें माना जाता है, क्योंकि वे सीधे मैग्मा या लावा से बनती हैं और अन्य चट्टानों के लिए आधार प्रदान करती हैं।
Question 3. चर्चा कीजिए कि आग्नेय शैलों में जीवाश्म क्यों नहीं पाए जाते हैं?
Answer: आग्नेय शैलें पृथ्वी के अंदर से निकलने वाले बहुत गर्म एवं पिघले हुए पदार्थों (मैग्मा) के ठंडा होकर जमने से बनती हैं। इतनी अधिक गर्मी के कारण, अगर कोई जीव या पौधा होता भी, तो वह पूरी तरह जलकर खत्म हो जाता। यही कारण है कि इन चट्टानों में जानवरों या पौधों के अवशेष (जीवाश्म) नहीं मिलते, क्योंकि वे उच्च तापमान को सहन नहीं कर सकते।
In simple words: आग्नेय शैलें गर्म पिघले मैग्मा से बनती हैं, जिसकी वजह से उनमें कोई जीवाश्म नहीं बच पाता।
🎯 Exam Tip: जीवाश्म केवल अवसादी चट्टानों में पाए जाते हैं, क्योंकि वे धीरे-धीरे परतों में जमा होती हैं जहाँ जैविक पदार्थ सुरक्षित रह सकते हैं।
Question 4. सोचिए, अगर परतदार शैल न होते तो कोयला एवं खनिज तेल कहाँ से मिलता?
Answer: अगर परतदार शैलें नहीं होतीं, तो हमें कोयला और खनिज तेल नहीं मिल पाता। ये महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत लाखों साल पहले दबे हुए पौधों और जानवरों के अवशेषों से बनते हैं, जो परतदार शैलों की परतों में ही सुरक्षित रहते हैं। परतदार शैलें इन जीवाश्म ईंधनों के लिए एक प्राकृतिक भंडार का काम करती हैं।
In simple words: परतदार शैलें न होने पर हमें कोयला और खनिज तेल नहीं मिलते, क्योंकि ये उन्हीं में पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: परतदार शैलें जीवाश्म ईंधन के मुख्य स्रोत होती हैं, जो पृथ्वी के इतिहास की भी जानकारी देती हैं और आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं।
Question 5. पता करें कि आपके घरों में लगने वाली ईंट का निर्माण कैसे होता है?
Answer: सबसे पहले, गीली मिट्टी को सांचों में दबाकर कच्ची ईंटें बनाई जाती हैं। फिर इन कच्ची ईंटों को भट्ठों में कोयले की गर्मी से अच्छी तरह पकाया जाता है, जिससे वे मजबूत और टिकाऊ पक्की ईंटें बन जाती हैं। इस प्रक्रिया से ईंटें पानी और मौसम से खराब नहीं होतीं और इमारतें बनाने के लिए तैयार हो जाती हैं।
In simple words: पहले गीली मिट्टी से कच्ची ईंटें बनती हैं, फिर उन्हें कोयले की आंच पर पकाकर पक्की ईंटें बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: ईंटों को पकाने की प्रक्रिया उन्हें जलरोधी और मजबूत बनाती है, जिससे वे घरों के निर्माण के लिए उपयोगी होती हैं और उनकी स्थायित्व बढ़ती है।
Question 6. नीचे चट्टान का महत्त्व बताया गया है रिक्त खाने में चट्टान का प्रकार लिखिए -
Answer: नीचे दी गई तालिका में चट्टानों के उपयोग के आधार पर उनके प्रकार दिए गए हैं। यह तालिका बताती है कि विभिन्न उद्देश्यों के लिए कौन सी चट्टानें उपयुक्त हैं और वे किस भूवैज्ञानिक श्रेणी से संबंधित हैं।
| मद/उपयोग | चट्टानें | ये किस प्रकार की चट्टानें हैं। |
|---|---|---|
| मकान व मूर्ति बनाने के लिए | बालू का पत्थर, संगमरमर | रूपान्तरित चट्टान |
| लिखने के लिए | चॉक, स्लेट, ग्रेफाइट | परतदार चट्टान |
| जलाने के लिए | कोयला | रूपान्तरित चट्टान |
| आभूषण | हीरा | रूपान्तरित चट्टान |
| कृषि के लिए | चीका मिट्टी, लावा मिट्टी, लोयस मिट्टी | आग्नेय चट्टान |
🎯 Exam Tip: चट्टानों और खनिजों के उपयोग तथा उनके प्रकारों को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे पर्यावरण और मानव जीवन से जुड़ा है।
अभ्यास
प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
Question 1. (क) पृथ्वी की आंतरिक परतों के नाम लिखिए?
Answer: पृथ्वी की अंदरूनी संरचना मुख्य रूप से तीन परतों में बंटी हुई है- भूपर्पटी (सबसे बाहरी), मैंटल (मध्य वाली), और क्रोड (सबसे भीतरी)। मैंटल को ऊपरी और निचली मैंटल में बांटा गया है, जबकि क्रोड भी आंतरिक और बाह्य क्रोड में विभाजित है। पृथ्वी की ये परतें अलग-अलग गहराई और बनावट रखती हैं और ग्रह के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: पृथ्वी के अंदर तीन मुख्य परतें हैं: भूपर्पटी, मैंटल और क्रोड। मैंटल और क्रोड भी दो-दो हिस्सों में बंटे हैं।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी की परतों के नाम और उनकी मुख्य विशेषताओं को क्रम से याद रखें, क्योंकि यह पृथ्वी की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझने के लिए आवश्यक है।
Question 1. (ख) भूपर्पटी की सबसे अधिक मोटाई कहाँ होती है?
Answer: भूपर्पटी की मोटाई सबसे ज़्यादा पर्वतीय क्षेत्रों के नीचे पाई जाती है। पहाड़ों के नीचे, यह परत लगभग 70 किलोमीटर तक मोटी हो सकती है, जबकि महासागरों के नीचे यह काफी पतली होती है। यह अतिरिक्त मोटाई पर्वतों के विशाल द्रव्यमान के कारण होती है, जो उनकी स्थिरता को बनाए रखने में मदद करती है।
In simple words: भूपर्पटी सबसे मोटी पहाड़ों के नीचे होती है, जहाँ यह लगभग 70 किलोमीटर तक जा सकती है।
🎯 Exam Tip: भूपर्पटी की मोटाई महासागरों और महाद्वीपों के नीचे अलग-अलग होती है; महाद्वीपीय भूपर्पटी अधिक मोटी होती है।
Question 1. (ग) ज्वालामुखी विस्फोट में निकलने वाला लावा कहाँ एकत्रित रहता है?
Answer: जब ज्वालामुखी फटता है, तो उसमें से निकलने वाला पिघला हुआ लावा पृथ्वी की सतह पर बाहर आता है और वहीं ठंडा होकर जम जाता है। यह ठंडा हुआ लावा नई चट्टानों और भू-आकृतियों का निर्माण करता है। इस प्रक्रिया से नई भूमि बनती है और स्थलाकृति में बदलाव आता है।
In simple words: ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा पृथ्वी की सतह पर आता है और वहीं जमा हो जाता है।
🎯 Exam Tip: लावा ठंडा होने पर आग्नेय चट्टानों का निर्माण करता है, जैसे बेसाल्ट, जो पृथ्वी की सतह पर सबसे आम आग्नेय चट्टान है।
Question 1. (घ) आग्नेय शैलों की विशेषताएँ लिखिए?
Answer: आग्नेय शैलों की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. ये चट्टानें बहुत कठोर होती हैं, जिससे इनमें कटाव (अपरदन) कम होता है।
2. ये आमतौर पर छोटे या बड़े कणों (रवे) वाली और दानेदार दिखती हैं, जो इनके बनने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
3. इन चट्टानों में परतें नहीं होतीं, क्योंकि ये एक साथ जमती हैं।
4. इनमें जीवाश्म नहीं मिलते, क्योंकि ये बहुत गर्मी में बनती हैं, जिससे जैविक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं।
5. ये अक्सर ज्वालामुखी गतिविधि से जुड़ी होती हैं।
6. इन चट्टानों में सोना, चांदी और अभ्रक जैसे कई कीमती खनिज पाए जाते हैं। ये पृथ्वी के अंदर की गहरी परतों से खनिज लेकर आती हैं।
In simple words: आग्नेय शैलें कठोर, दानेदार होती हैं, इनमें परतें या जीवाश्म नहीं होते, और ये ज्वालामुखी से बनती हैं। इनमें कीमती खनिज होते हैं।
🎯 Exam Tip: आग्नेय चट्टानों को प्राथमिक चट्टानें भी कहते हैं क्योंकि ये अन्य सभी चट्टानों का मूल होती हैं और पृथ्वी की आंतरिक प्रक्रियाओं का सीधा परिणाम होती हैं।
Question 1. (ङ) रूपांतरित शैलें कैसे बनती हैं?
Answer: रूपांतरित शैलें तब बनती हैं जब आग्नेय शैलें या परतदार शैलें बहुत ज़्यादा गर्मी (ताप) और दबाव (दाब) के कारण बदल जाती हैं। ये बदलाव चट्टानों की बनावट, रूप और खनिज संरचना को बदल देते हैं, जिससे एक नई प्रकार की चट्टान बनती है। यह प्रक्रिया पृथ्वी की गहराइयों में होती है, जहाँ उच्च तापमान और दबाव मौजूद होते हैं।
In simple words: रूपांतरित शैलें तब बनती हैं जब गर्मी और दबाव के कारण आग्नेय और परतदार शैलें बदल जाती हैं।
🎯 Exam Tip: रूपांतरित शैलें मौजूदा चट्टानों के कायापलट का परिणाम होती हैं, जिससे वे अधिक कठोर और घनी हो जाती हैं और अक्सर नए खनिज भी बनते हैं।
Question 2. यहाँ कुछ शैलों के नाम दिए हैं उन्हें सही वर्ग में लिखिए -
ग्रेफाइट, हीरा, चूने का पत्थर, संगमरमर, अभ्रक, कोयला, स्लेट, बालू, बेसाल्ट, ग्रेनाइट
Answer: दिए गए शैलों को उनके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत करके नीचे दी गई तालिका में दिखाया गया है। यह वर्गीकरण शैलों की उत्पत्ति और संरचना के आधार पर किया गया है, जो उन्हें आग्नेय, अवसादी या रूपांतरित श्रेणियों में रखता है।
| आग्नेय शैल | अवसादी शैल | रूपान्तरित शैल |
|---|---|---|
| अभ्रक | कोयला | संगमरमर |
| बेसाल्ट | चूने का पत्थर | स्लेट |
| ग्रेनाइट | बालू | ग्रेफाइट |
| हीरा |
🎯 Exam Tip: चट्टानों के प्रकारों को समझने के लिए, उनके बनने की प्रक्रिया और मुख्य उदाहरणों को याद रखना चाहिए, क्योंकि यह भूविज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Question 3. निम्नलिखित वाक्यों से गलत शब्द को काटकर वाक्य सही कीजिए (सही करके) –
Answer:
(क) आग्नेय शैल कठोर और रवेदार होते हैं।
(ख) परतदार शैलों की उत्पत्ति में नदियों का बड़ा हाथ है।
(ग) रूप तथा गुणों के परिवर्तन से बनी शैल को रूपान्तरित शैल कहते हैं।
(घ) चूने के पत्थर से संगमरमर बनता है।
(ङ) हिमालय पर्वत परतदार शैल का उदाहरण है।
In simple words: इन वाक्यों में जो गलतियाँ थीं, उन्हें ठीक करके सही वाक्य यहाँ दिए गए हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, गलत शब्द को पहचानना और उसे सही शब्द से बदलना महत्वपूर्ण है, जिससे वाक्य का अर्थ सही हो। प्रत्येक कथन भूवैज्ञानिक सिद्धांतों को दर्शाता है।
Question 4. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ।
Answer:
(क) पृथ्वी की ऊपरी परत को सियाल कहते हैं।
(ख) पृथ्वी की सबसे निचली परत को निफे कहते हैं।
(ग) चूना पत्थर रूपांतरण के फलस्वरूप संगमरमर बनता है।
(घ) मैण्टल की ऊपरी परत को दुर्बलतामण्डल कहते हैं।
In simple words: यहाँ खाली जगह भरकर वाक्य पूरे किए गए हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, आपको विषय से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दावली और अवधारणाओं की सही जानकारी होनी चाहिए ताकि सटीक उत्तर दे सकें।
भौगोलिक कुशलताएँ -
Answer: इस गतिविधि को विद्यार्थियों को स्वयं करना चाहिए। यह उन्हें अपनी समझ और रचनात्मकता का उपयोग करने का अवसर देता है, साथ ही विषय-वस्तु का व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने में मदद करता है। ऐसे कार्य छात्रों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण भाग होते हैं।
In simple words: यह काम छात्रों को खुद करना है।
🎯 Exam Tip: ऐसे कार्यों से आप विषय की अपनी समझ को और गहरा कर सकते हैं और अपनी विश्लेषण क्षमता में सुधार कर सकते हैं।
परियोजना कार्य -
Answer: इस परियोजना कार्य को विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं का उपयोग करके स्वयं पूरा करना चाहिए। यह उन्हें व्यावहारिक कौशल और ज्ञान विकसित करने में मदद करेगा, साथ ही टीम वर्क और शोध कौशल को भी बढ़ावा देगा। परियोजनाएँ सीखने का एक प्रभावी तरीका हैं।
In simple words: छात्रों को यह परियोजना खुद बनानी है।
🎯 Exam Tip: परियोजना कार्य आपको वास्तविक दुनिया के अनुभवों से जोड़कर सीखने में मदद करते हैं और आपकी प्रस्तुति कौशल को भी बेहतर बनाते हैं।
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